हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट का अहम फैसला: संशोधन याचिका के लिए पहले सेशन कोर्ट जाएं, 'दुर्लभ' मामलों में ही सीधे हाईकोर्ट आएं
झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 397 के तहत संशोधन अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने के लिए याचिकाकर्ताओं को पहले सेशन कोर्ट जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केवल दुर्लभ और विशेष परिस्थितियों में ही सीधे हाईकोर्ट से संपर्क किया जाना चाहिए।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ सीधे हाईकोर्ट में दायर संशोधन याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। याचिकाकर्ता ने CrPC की धारा 245 के तहत अपने आरोप मुक्त होने के अनुरोध को खारिज किए जाने को चुनौती दी...
अवमानना कार्यवाही में अदालत आदेश की सीमाओं से आगे नहीं जा सकती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवमानना कार्यवाही में अदालत उस आदेश की सीमाओं से बाहर नहीं जा सकती, जिसकी अवहेलना का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि केवल वही निर्देश जिनका उल्लेख आदेश या निर्णय में स्पष्ट रूप से किया गया हो, या जो स्वयं स्पष्ट हों, उन्हीं को ध्यान में रखा जा सकता है।जस्टिस शहजाद अज़ीम और जस्टिस सिंदु शर्मा की खंडपीठ ने कहा,“अवमानना कानून के क्षेत्राधिकार में काम करते समय अदालत को पहले से व्यक्त की गई बातों से आगे बढ़कर कोई पूरक आदेश या निर्देश जारी नहीं करना चाहिए।...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीनियर्स की आलोचना वाली कविता पोस्ट करने के आरोपी अधिकारी के निलंबन पर लगाई रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को राहत प्रदान की, जिन्हें व्हाट्सएप ग्रुप पर अपने सीनियर्स की कथित आलोचना वाली कविता पोस्ट करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।7 जुलाई, 2025 को पारित निलंबन आदेश को इस आधार पर न्यायालय में चुनौती दी गई कि किसी भी कविता को अपलोड करना कदाचार के दायरे में नहीं आएगा और भी कोई बड़ी सजा नहीं होगी।जस्टिस मनीष माथुर की पीठ ने विवादित निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की दलीलें बलशाली हैं। प्रथम दृष्टया विचार की आवश्यकता है।...
वकालत लाइसेंस के निलंबन को छिपाने पर हाईकोर्ट ने वकील पर जुर्माना लगाया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने वकील पर जुर्माना लगाया, जिसने जनहित याचिका (PIL) दायर करते हुए महत्वपूर्ण तथ्य कि उसका वकालत का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया, उसको छुपाया गया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता बेदाग़ नहीं है, क्योंकि उसने यह खुलासा नहीं किया कि एक वकील के रूप में उसका लाइसेंस पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल द्वारा 23.11.2022 के आदेश के तहत निलंबित कर दिया गया, जो मामला अभी भी पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के...
नाम बदलने का अधिकार मौलिक अधिकार, बोर्ड वैधानिक दस्तावेजों को अनदेखा कर अनुरोध खारिज नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति को अपना नाम बदलने या अपनाने का अधिकार संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा बोर्ड वैधानिक दस्तावेजों पर विचार किए बिना मनमाने ढंग से ऐसे अनुरोधों को खारिज नहीं कर सकता।जस्टिस संजय धर की पीठ मोहम्मद हसन (पहले राज वली) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने बोर्ड द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसके हाई स्कूल और इंटरमीडिएट प्रमाणपत्रों में नाम...
CCI की जांच के खिलाफ एशियन पेंट्स को झटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी भी पक्ष को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा धारा 26(1) के तहत शुरुआती राय बनाने के चरण में मौखिक या लिखित सुनवाई का अंतर्निहित अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आदेश प्रशासनिक प्रकृति का होता है और सुनवाई देना या न देना CCI के विवेक पर निर्भर करता है।जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डॉ. नीला गोखले की खंडपीठ एशियन पेंट्स लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एशियन पेंट्स ने CCI के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें महानिदेशक...
पिता के जीवित रहते दादा की संपत्ति में हिस्सा नहीं मांग सकते: दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि एक हिंदू व्यक्ति अपने दादा की संपत्ति में तब तक हिस्सा नहीं मांग सकता, जब तक कि उसके माता-पिता जीवित हों। कोर्ट ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 की धारा 8 का हवाला देते हुए यह बात कही।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने हिंदू महिला द्वारा अपने पिता और बुआ के खिलाफ दायर याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। महिला ने अपने दादा की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति में हिस्सा मांगा था।महिला ने तर्क दिया कि चूंकि संपत्ति उसके दादा की स्व-अर्जित है, इसलिए यह पैतृक...
'यह एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है': मैसूरु दशहरा समारोह में बानू मुश्ताक को मुख्य अतिथि बनाए जाने के खिलाफ याचिकाएं खारिज
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को मैसूरु के आगामी दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए बुकर पुरस्कार विजेता और लेखिका बानू मुश्ताक को मुख्य अतिथि नामित करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस सी एम जोशी की खंडपीठ ने दलीलें सुनने के बाद कहा,"हम यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि राज्य द्वारा आयोजित समारोह में किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को अनुमति देना याचिकाकर्ताओं के किसी कानूनी या संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है या यह भारत के...
MV Act की धारा 174 के अंतर्गत निष्पादन याचिकाओं पर 12 वर्ष की परिसीमा अवधि लागू: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों द्वारा मोटर वाहन अधिनियम 1988 (MV Act) की धारा 174 के अंतर्गत मुआवज़े की वसूली हेतु दायर की गई निष्पादन याचिकाएं परिसीमा अधिनियम 1963 के अंतर्गत बारह वर्ष की सीमा अवधि के अधीन हैं।अदालत ने कहा कि यद्यपि MV Act में कोई विशिष्ट परिसीमा खंड नहीं है, फिर भी सामान्य परिसीमा कानून की अनदेखी नहीं की जा सकती।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की,"निम्नलिखित अदालत द्वारा दिए गए निष्कर्ष कि MV Act की धारा 174 के अंतर्गत आवेदन किसी भी समय दायर किया जा...
दुकानदार किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते: राजस्थान हाईकोर्ट ने नई उचित मूल्य की दुकानें खोलने के खिलाफ याचिकाएं खारिज कीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा एक ही क्षेत्र में नई उचित मूल्य की दुकानें (Fair Price Shops- FPS) खोलने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा दुकान मालिक किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते।जस्टिस सुनील बेनिवाल की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नई FPS खोलना सरकार का नीतिगत निर्णय है। फिर जो लोग 20 साल से FPS चला रहे हैं, वे किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते।अदालत ने आगे कहा कि कुछ FPS में 500 से कम राशन कार्ड धारक हैं, जबकि...
एक मुस्लिम महिला तलाक के बाद भी CrPC की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण मांग सकती है
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि एक मुस्लिम महिला तलाक के बाद भी धारा 125 CrPC के तहत अपने पति से भरण-पोषण (maintenance) मांग सकती है, अगर तलाक के बाद इद्दत अवधि में उसके भविष्य के लिए पति ने “उचित और न्यायसंगत प्रावधान” नहीं किया।जस्टिस जितेंद्र कुमार ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया, जिसमें एक मुस्लिम पुरुष को अपनी पत्नी को महीने ₹7,000 देने का निर्देश दिया गया था। पति ने दलील दी थी कि उनकी शादी आपसी सहमति (mubarat) से खत्म हो गई थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।मामले की जानकारी: पत्नी ने...
मजिस्ट्रेट को BNSS की धारा 358 के तहत अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 358 (पहले CrPC की धारा 319) किसी मजिस्ट्रेट को किसी अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार नहीं देती।BNSS की धारा 358 अदालत को ऐसे किसी भी व्यक्ति को समन जारी करने का अधिकार देती है, जो अभियुक्त नहीं है। हालांकि, साक्ष्यों से किसी अपराध का दोषी प्रतीत होता है।हालांकि, जस्टिस अमित महाजन ने स्पष्ट किया कि इस प्रावधान का प्रयोग केवल जांच या सुनवाई के दौरान ही किया जा सकता है (संज्ञान के चरण में नहीं)।इस मामले में शिकायतकर्ता ने...
अपील का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं, विधायिका अपराध के आधार पर अपीलीय फॉर्म निर्धारित कर सकती है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने माना कि अपील का अधिकार एक वैधानिक अधिकार है, मौलिक नहीं। इसलिए विधायिका अपराध के विषय के आधार पर अपीलीय मंच निर्धारित कर सकती है।अदालत ने कहा,"इस तर्क के संबंध में कि अभियुक्त अपीलीय मंच खो देता है, यह न्यायालय इसे निराधार पाता है। अपील का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है; यह विशुद्ध रूप से विधायिका द्वारा निर्मित वैधानिक अधिकार है। विधायिका विषय की प्रकृति के आधार पर कुछ मामलों में जानबूझकर उच्चतर अपीलीय मंच का प्रावधान कर सकती है।"अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र जमाकर्ताओं के हितों का...
वादी को CPC के तहत प्रतिवाद दायर करने का कोई निहित अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वादी द्वारा प्रतिवाद दायर करना केवल न्यायिक रूप से स्वीकृत है और यह पक्षकार का वैधानिक अधिकार नहीं है।प्रतिवाद, जिसे प्रत्युत्तर भी कहा जाता है, वादी द्वारा दीवानी मुकदमे में प्रतिवादी के लिखित बयान के जवाब में दायर किया जाता है - अपना रुख स्पष्ट करने या प्रतिवादी के दावों का खंडन करने के लिए।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा,"सिविल प्रक्रिया संहिता प्रतिवाद दायर करने की परिकल्पना नहीं करती है। हालांकि यह न्यायिक रूप से स्वीकृत है कि एक बार प्रतिवाद रिकॉर्ड में दर्ज...
विभाजन के वाद में पक्षकारों का प्रतिस्थापन: जब उत्तराधिकारियों का पता न चल सके
विभाजन के वाद सह-स्वामियों या उत्तराधिकारियों के बीच संपत्ति के बंटवारे के लिए दायर किए जाते हैं, और इनमें अक्सर कई पक्ष शामिल होते हैं जिनके अधिकारों की सावधानीपूर्वक रक्षा करना आवश्यक होता है। एक आम समस्या तब उत्पन्न होती है जब ऐसे वाद के किसी एक पक्ष की कार्यवाही के दौरान मृत्यु हो जाती है। सामान्यतः, उनके कानूनी उत्तराधिकारियों या प्रतिनिधियों का नाम रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है ताकि मामला आगे बढ़ सके। यह प्रतिस्थापन सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश XXII नियम 4 के तहत किया जाता है।...
परिवार छोड़ने वाले माता-पिता की आय EWS आरक्षण में नहीं गिनी जाएगी: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला दिया है कि अगर किसी बच्चे के माता-पिता में से कोई एक परिवार को छोड़कर चला गया है, तो ऐसे माता-पिता की आय को EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाणपत्र जारी करने में नहीं जोड़ा जाएगा।जस्टिस एन. नागेश एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिकाकर्ता (पहली याचिकाकर्ता) नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की अभ्यर्थी थी, जिसकी EWS प्रमाणपत्र के लिए दी गई अर्जी को खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा,“EWS प्रमाणपत्र देने में पिता और मां दोनों की आय को ध्यान...
पति की मौत के बाद दोबारा शादी कर भी ससुराल को मुकदमों में घसीटने पर महिला पर जुर्माना: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया है, क्योंकि उसने अपने ससुराल पक्ष को लगातार मुकदमों में घसीटा, जबकि उसके पति का निधन हो चुका था और वह खुद दूसरी शादी भी कर चुकी थी।जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि महिला ने ससुराल वालों को “सिर्फ बदले की भावना से” और कानून के दुरुपयोग से परेशान किया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि उसका आचरण “कानून की प्रक्रिया के दुरुपयोग का पाठ्यपुस्तक उदाहरण” है। कोर्ट ने कहा कि पति की मृत्यु के बाद भी वह अपने सास-ससुर को लगातार मुकदमों में उलझाकर “सिर्फ...
आत्महत्या उकसावे में आरोपी की बार-बार की हरकतों से साबित हो सकती है मंशा: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत (pre-arrest bail) देने से इनकार कर दिया, जिस पर 16 साल 11 महीने की लड़की को आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment of suicide) का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामलों में Mens Rea (दोषपूर्ण मानसिकता) केवल एक घटना से नहीं, बल्कि आरोपी के लगातार किए गए कृत्यों से निकाला जा सकता है।आरोप था कि घटना से एक रात पहले याचिकाकर्ता ने पीड़िता को फोन किया था और उसके द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में लिखा था कि उसने पीड़िता को जान देने की...
भारतीय सामान को 'Made in China' बताकर बेचना सार्वजनिक हित के खिलाफ: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि स्थानीय रूप से बने सामान को उपभोक्ताओं के सामने 'Made in China' या किसी अन्य विदेशी देश का बताकर बेचना सार्वजनिक हित के खिलाफ है।यह मामला कस्टम विभाग से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता के सामान (मोबाइल टेम्पर्ड ग्लास) पर 'Made in China' का लेबल लगा होने के कारण विभाग ने छापेमारी करके माल जब्त कर लिया था। विभाग ने सशर्त अंतरिम रिहाई की अनुमति दी थी, जिसके लिए ₹56,03,995/- का बॉन्ड और ₹29,75,189/- की बैंक गारंटी देने को कहा गया। याचिकाकर्ता ने इस शर्त का विरोध किया और...
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का आदेश: क्रिमिनल मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग अस्थायी रूप से निलंबित
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए सभी पीठों द्वारा चल रहे आपराधिक मामलों की लाइव स्ट्रीमिंग अस्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश 15 सितंबर (सोमवार) से लागू होगा और अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।PIL में आरोप1. याचिकाकर्ता ने दलील दी कि अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का दुरुपयोग किया जा रहा है।2. कई निजी संस्थाएं रील, क्लिप और मीम्स बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं।3. इनसे न्यायपालिका और विधि समुदाय की छवि को ग़लत और अपमानजनक...




















