हाईकोर्ट

एक धर्म के व्यक्ति का दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेना किसी भी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
एक धर्म के व्यक्ति का दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेना किसी भी संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि "किसी विशेष धर्म या आस्था को मानने वाले व्यक्ति का दूसरे धर्म के त्योहारों में भाग लेना भारत के संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।"यह टिप्पणी मैसूर में दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए मुख्य अतिथि के रूप में बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को राज्य द्वारा आमंत्रित किए जाने को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज करते हुए की गई।चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सी. एम. जोशी की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत याचिकाकर्ताओं के धर्म का पालन और...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को लोकपाल से बाहर रखने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री को लोकपाल से बाहर रखने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम 1975 के उन प्रावधानों को चुनौती दी थी जो मुख्यमंत्री को लोकायुक्त के दायरे से बाहर रखते हैं।अमिताभ ठाकुर ने इस प्रावधान [अधिनियम की धारा 2(g)] को बेहद मनमाना, अनुचित, अर्थहीन और खतरनाक" करार दिया, क्योंकि यह मुख्यमंत्री को किसी भी आरोप और शिकायत से बचाता है। ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा कि यह प्रावधान मुख्यमंत्री को अपने पद का दुरुपयोग कर किसी भी...

बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: स्वीकृत पदों की अनुपलब्धता के कारण श्रमिकों को स्थायी दर्ज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता
बॉम्बे हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: स्वीकृत पदों की अनुपलब्धता के कारण श्रमिकों को स्थायी दर्ज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जिन श्रमिकों ने लगातार सेवा की आवश्यक अवधि पूरी कर ली है, उन्हें केवल इस आधार पर स्थायी दर्जा देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं हैं। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि ऐसा इनकार श्रमिकों का लगातार शोषण होगा, जो कल्याणकारी कानून और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के 22 वन श्रमिकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। ये श्रमिक 2003 से चौकीदार, माली, रसोइया और जंगली जानवरों...

राजस्थान हाईकोर्ट का अहम कदम: केस से जुड़ी सभी जानकारी के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने पर नोटिस जारी
राजस्थान हाईकोर्ट का अहम कदम: केस से जुड़ी सभी जानकारी के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने पर नोटिस जारी

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में हाईकोर्ट के लिए एक आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने की मांग की गई ताकि केस लिस्ट, ई-फाइलिंग विवरण, आदेश/निर्णय आदि से संबंधित सभी जानकारी एक ही जगह पर मिल सके।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने प्रैक्टिसिंग वकील द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता ने बताया कि 2023 से हाईकोर्ट ने टेलीग्राम चैनल पर केस लिस्ट अपलोड करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा, कोर्ट की ई-कोर्ट्स वेबसाइट...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बाढ़ प्रभावित फसलों की देखभाल के लिए हत्या के दोषी की पैरोल बढ़ाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने बाढ़ प्रभावित फसलों की देखभाल के लिए हत्या के दोषी की पैरोल बढ़ाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के दोषी को हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित अपनी फसलों की देखभाल करने के लिए पैरोल की अवधि चार सप्ताह के लिए बढ़ाई।जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने प्रवीण राणा नामक दोषी को पहले कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों पर ही चार सप्ताह की पैरोल दी।कोर्ट ने कहा,"याचिकाकर्ता की निरंतर उपस्थिति न केवल अप्रत्याशित है बल्कि भगवान के कार्य (भारी बारिश) के कारण भी आवश्यक है। यह उसके परिवार की आजीविका का एकमात्र स्रोत है, जिस पर उसकी विधवा मां और दो नाबालिग बच्चे पूरी तरह से निर्भर हैं। पानी कम...

स्वतंत्रता बनाम पदानुक्रम: हाईकोर्ट में प्रत्यक्ष अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर बहस
स्वतंत्रता बनाम पदानुक्रम: हाईकोर्ट में प्रत्यक्ष अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर बहस

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में केरल हाईकोर्ट की उन अग्रिम ज़मानत याचिकाओं पर विचार करने के लिए आलोचना की है जो बिना सत्र न्यायालय में जाए, सीधे उसके समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं ।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यद्यपि सत्र न्यायालय और हाईकोर्ट को बीएनएसएस की धारा 482 (पूर्व में, धारा 438 सीआरपीसी) के तहत गिरफ्तारी-पूर्व ज़मानत (अग्रिम ज़मानत) के लिए प्रार्थना पर विचार करने का समवर्ती क्षेत्राधिकार प्रदान किया गया है, न्यायालयों के पदानुक्रम की मांग है कि ऐसे...

फैशन और परंपरा का मिलन: भारतीय कोल्हापुरी शिल्पकला के संरक्षण में बौद्धिक संपदा की कमी
फैशन और परंपरा का मिलन: भारतीय कोल्हापुरी शिल्पकला के संरक्षण में बौद्धिक संपदा की कमी

कला और उसके रचनाकारों की सच्ची समृद्धि इस बात पर निर्भर करती है कि उत्साही और नवोन्मेषी आविष्कारकों और कलाकारों को उनके काम के लिए उचित मान्यता और संरक्षण मिले। इसका एक ज्वलंत उदाहरण कोल्हापुरी चप्पलों की कहानी है।ये हस्तनिर्मित चमड़े की चप्पलें भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रही हैं। आमतौर पर भारतीय बाजारों में 1000 रुपये से ज़्यादा की कीमत पर नहीं बिकतीं। फिर भी, हाल ही में इतालवी लक्ज़री ब्रांड प्राडा ने इन्हें 1-1.2 लाख रुपये में सूचीबद्ध किया है, जबकि उन कारीगरों को कोई प्रतिफल, मुआवजा या...

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने DC और SSP के कब्जे वाले गेस्ट हाउस जिला जजों को आवंटित करने का निर्देश दिया
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने DC और SSP के कब्जे वाले गेस्ट हाउस जिला जजों को आवंटित करने का निर्देश दिया

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पंजाब के मलेरकोटला में उपायुक्त (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के कब्जे वाले सरकारी गेस्ट हाउस खाली करके जिला जज को आधिकारिक और आवासीय उपयोग के लिए आवंटित किए जाएं।पंजाब सरकार ने 2021 में मलेरकोटला को ज़िला घोषित किया था। उसके बाद 2023 में वहां सेशन कोर्ट का गठन किया गया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि संबंधित अधिसूचना के अनुसार निर्धारित मानकों के अनुरूप कोई आवासीय सुविधा उपलब्ध नहीं है, जो जिला एंड सेशन जज, एडिशनल जिला...

बिना आरोप पत्र दाखिल किए आपराधिक मामला लंबित होने पर पदोन्नति से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
बिना आरोप पत्र दाखिल किए आपराधिक मामला लंबित होने पर पदोन्नति से इनकार नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आपराधिक मामले का लंबित होना, जिसमें आरोप पत्र दाखिल न किया गया हो, विभागीय जांच में सभी आरोपों से बरी हुए कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:"निश्चित रूप से याचिकाकर्ता को कोई आरोप पत्र नहीं दिया गया। हालांकि, संबंधित मजिस्ट्रेट को आगे की जांच का आदेश देने का पूरा अधिकार है। हालांकि, ऐसा कोई भी तथ्य, यदि कोई हो, प्रतिवादियों को उच्च पद पर पदोन्नति से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता, खासकर जब आरोप पत्र अभी तक तय...

धर्मस्थल दफ़नाने का मामला: हाईकोर्ट ने निवासियों द्वारा चिन्हित स्थलों पर निरीक्षण और उत्खनन की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
धर्मस्थल दफ़नाने का मामला: हाईकोर्ट ने निवासियों द्वारा चिन्हित स्थलों पर निरीक्षण और उत्खनन की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को धर्मस्थल दफ़नाने के मामलों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) को शहर के दो निवासियों की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने चिन्हित स्थलों पर शवों का निरीक्षण और उत्खनन करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई करने के उनके अनुरोध पर विचार करने का अनुरोध किया।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने पुरंदर गौड़ा और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर SIT को नोटिस जारी किया और कहा,"याचिकाकर्ताओं को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा, क्योंकि अपराध संख्या 39/2025 (एक सफाई कर्मचारी द्वारा दर्ज की गई...

तीन दशक से अलग रह रहे दंपति को साथ रहने को मजबूर करना मानसिक क्रूरता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
तीन दशक से अलग रह रहे दंपति को साथ रहने को मजबूर करना मानसिक क्रूरता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब पति-पत्नी में से कोई भी पक्ष “तीन दशकों से अधिक समय तक अलग रह रहा हो और सुलह या सहवास का कोई प्रयास भी न किया गया हो, तो विवाह का मूल सार ही नष्ट हो जाता है।”अदालत ने कहा, “ऐसे में केवल एक कानूनी बंधन शेष रह जाता है, जिसमें कोई वास्तविकता नहीं होती। इतने लंबे अलगाव के बाद पक्षों को साथ रहने के लिए बाध्य करना अव्यावहारिक होगा और वास्तव में दोनों पक्षों पर और अधिक मानसिक क्रूरता थोपने जैसा होगा।”यह नोट करते हुए कि दंपति वर्ष 1994 से अलग रह रहे हैं,...

UAPA आरोपी को 5 साल बाद जमानत, हाईकोर्ट ने कहा– आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने वाला सबूत नहीं
UAPA आरोपी को 5 साल बाद जमानत, हाईकोर्ट ने कहा– आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने वाला सबूत नहीं

हाईकोर्ट ने एक आरोपी को ज़मानत दी जो 5 साल से ज़्यादा समय से जेल में बंद था। आरोप था कि उसने सह-आरोपियों को अवैध हथियार सप्लाई किए। केस UAPA, IPC 120-B और आर्म्स एक्ट की धाराओं में दर्ज था।कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के ख़िलाफ़ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। सिर्फ़ एक पिस्तौल और कुछ कारतूस बरामद हुए, बाकी केवल गुप्त सूचना और गवाहों के बयान ही थे।जस्टिसा पिता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबी कैद ही ज़मानत का आधार बन सकती है, क्योंकि मुक़दमे की धीमी गति आरोपी...

एमपी हाईकोर्ट का अहम सुझाव: कॉर्पोरेट क्लाइमेट रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड बनाएं
एमपी हाईकोर्ट का अहम सुझाव: कॉर्पोरेट क्लाइमेट रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड बनाएं

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर में कचरे के ढेर और खराब स्वच्छता की स्थिति को उजागर करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिया। कोर्ट ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को कॉर्पोरेट क्लाइमेट रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड (CCR Fund) बनाने पर विचार करना चाहिए, जिसका उपयोग विशेष रूप से पर्यावरण, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए किया जाए।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने ग्वालियर नगर निगम द्वारा दायर अनुपालन रिपोर्ट, एमिक्स क्यूरी...