हाईकोर्ट
'लोकतंत्र में असहमति स्वीकार होनी चाहिए': पत्रकार अभिसार शर्मा को असम CM पर बयान वाले मामले में हाईकोर्ट से राहत
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आज पत्रकार अभिसार शर्मा को पहले से मिली अंतरिम सुरक्षा (गिरफ्तारी या चार्जशीट जैसी जबरन कार्रवाई से संरक्षण) की अवधि 22 अक्टूबर तक बढ़ा दी। शर्मा ने यह याचिका उस FIR के खिलाफ दायर की है जो असम पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज की थी। FIR में आरोप है कि उन्होंने असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर “सांप्रदायिक राजनीति” करने का बयान दिया। FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 (राष्ट्र की संप्रभुता को खतरे में डालना), 196 (समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना) और 197 (राष्ट्रीय एकता व...
न्यूज़लॉन्ड्री ने अडानी कंपनियों के खिलाफ कंटेंट हटाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी
डिजिटल न्यूज प्लेटफ़ॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा जारी उस निर्देश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसमें डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म को अडानी ग्रुप की कंपनियों से संबंधित कई रिपोर्ट और वीडियो हटाने के लिए कहा गया।यह मामला जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध था। हालांकि, इस पर सुनवाई नहीं हुई और अब इसे सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका में न्यूज़लॉन्ड्री ने 16 सितंबर को मंत्रालय द्वारा न्यूज़लॉन्ड्री के साथ-साथ ध्रुव...
इससे अधिक गंभीर कुछ नहीं: नाबालिग बेटी से रेप के आरोपी पिता की जमानत दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने व्यक्ति की जमानत रद्द की, जिस पर कई वर्षों तक अपनी नाबालिग बेटी के साथ बार-बार दुष्कर्म करने, उसे पोर्न देखने के लिए मजबूर करने और उसकी मां को उसके सामने गाली देकर डराने का आरोप है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा, "किसी बच्चे के लिए इससे अधिक गंभीर कुछ नहीं हो सकता कि जिस पिता ने उसे जन्म दिया और जिसकी पवित्र जिम्मेदारी उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की है वही उसका शोषण करे।"अदालत ने कहा कि सेशन कोर्ट ने इतने गंभीर मामले में गिरफ्तारी के मात्र नौ दिन के भीतर जमानत देकर खुद को...
लापरवाही से वाहन चलाने से हुई मौत के मामले में परिवीक्षा का लाभ नहीं दिया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि लापरवाही और तेज रफ्तार से वाहन चलाकर किसी की मौत का कारण बनने वाले व्यक्ति को परिवीक्षा अधिनियम 1958 (Probation of Offenders Act, 1958) का लाभ नहीं दिया जा सकता।जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को परिवीक्षा का लाभ देना अनुचित है। उन्होंने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया।यह मामला 2014 का है जब एक आरोपी पर IPC की धारा 279 (तेज और लापरवाही से गाड़ी चलाना), 337...
दत्तक माता-पिता को यौन शोषण और क्रूरता का दोषी, दिल्ली हाईकोर्ट ने मानव तस्करी के पहलू की अनदेखी पर पुलिस को फटकारा
दत्तक माता-पिता को यौन शोषण और क्रूरता का दोषी, दिल्ली हाईकोर्ट ने मानव तस्करी के पहलू की अनदेखी पर पुलिस को फटकारा दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची के दत्तक माता-पिता को क्रूरता और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया। न्यायालय ने कहा कि यह मामला बच्चों की तस्करी से जुड़ा हो सकता है। इस पहलू की अनदेखी करने पर पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जांच अधिकारी ने बच्ची के जैविक माता-पिता को ढूंढने का कोई प्रयास नहीं किया और न ही यह जांच की गई कि बच्ची...
डमी स्कूलों पर राजस्थान हाई कोर्ट का कड़ा रुख, SIT गठित करने का निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने डमी स्कूलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह शिक्षा प्रणाली के लिए एक अभिशाप है। ये स्कूल स्टूडेंट को नीट (NEET) और जेईई (JEE) जैसी एडमिशन परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटरों में जाने की अनुमति देते हैं, जबकि कक्षा 9वीं से 12वीं तक उनकी नियमित उपस्थिति को फर्जी तरीके से दर्शाते हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने राज्य और सभी शिक्षा बोर्डों को निर्देश दिया कि वे अचानक निरीक्षण के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करें।कोर्ट ने इस समस्या से निपटने के लिए कई अहम निर्देश जारी...
UAPA ट्रिब्यूनल ने जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन को गैरकानूनी संगठन घोषित किया
दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस सचिन दत्ता की अध्यक्षता वाले UAPA ट्रिब्यूनल ने जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन (JKIM) को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित किया।जस्टिस दत्ता ने 3 सितंबर को जारी आदेश में कहा कि यह आदेश केंद्र सरकार द्वारा 11 मार्च, 2025 को जारी की गई अधिसूचना की पुष्टि करता है, जिसमें UAPA की धारा 3(1) के तहत JKIM को गैरकानूनी घोषित किया गया था।केंद्र सरकार के अनुसार JKIM पाकिस्तान समर्थित अलगाववादी संगठन है, जिसका नेतृत्व वर्तमान में मसरूर...
डाबर च्यवनप्राश विज्ञापन मामले में पतंजलि को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने अपील पर उठाए सवाल
पतंजलि आयुर्वेद ने दिल्ली हाईकोर्ट में एकल जज के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसे डाबर के च्यवनप्राश उत्पाद का कथित रूप से अपमान करने वाले विज्ञापन चलाने से रोक दिया गया था।मामले की सुनवाई जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने की।शुरुआत में कोर्ट ने पतंजलि का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट जयंत मेहता से मौखिक रूप से कहा कि सिंगल जज का आदेश विवेकाधीन प्रकृति का है। उसके खिलाफ अपील में बैठने का कोई कारण नहीं है।कोर्ट ने टिप्पणी की,“आपने च्यवनप्राश बनाने वाले सभी लोगों को...
'र***ी' शब्द का इस्तेमाल महिला के यौन सम्मान पर हमला, शील भंग के समान: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी महिला को 'र***ी' कहना उसके यौन सम्मान पर सवाल उठाकर उसके चरित्र पर हमला करता है। यह शील भंग (Modesty) के अपराध के बराबर है।जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि जब यह शब्द किसी महिला के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो यह यौन व्यंजना से भरा होता है और सीधे तौर पर उसकी पवित्रता पर लांछन लगाता है।कोर्ट ने कहा कि यह शब्द गाली का एक सामान्य रूप नहीं है बल्कि यह एक महिला को ढीले चरित्र वाली के रूप में चित्रित करता है। जब इसका उपयोग किया जाता है तो यह एक महिला को...
आरोपी द्वारा आत्म-दोषपूर्ण तथ्य न बताना, स्वीकारोक्ति से इनकार करना असहयोग नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी द्वारा जांच अधिकारी द्वारा पूछे गए प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर न देना या कोई भी स्वीकारोक्ति देने से इनकार करना असहयोग नहीं कहा जा सकता।जस्टिस अरुण मोंगा ने कहा कि किसी आरोपी द्वारा अपने विरुद्ध कोई भी आरोप लगाने वाली बात कहने से इनकार करना भी असहयोग नहीं कहा जा सकता।अदालत एक आरोपी द्वारा जबरन वसूली के मामले में अग्रिम ज़मानत की मांग करते हुए दायर याचिका पर विचार कर रहा था। यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 384 (जबरन वसूली), 385 (जबरन वसूली के लिए किसी...
अरविंद केजरीवाल को नहीं मिल रहा सरकारी बंगला, दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा- 'मनमर्जी पर आधारित नहीं हो सकता'
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि आवासीय आवास का आवंटन पूरी तरह से अधिकारियों की मनमर्जी पर आधारित नहीं हो सकता, क्योंकि उसने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को आवासीय आवास आवंटित करने की याचिका पर सुनवाई की।जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव और संपदा निदेशालय के निदेशक को अगली सुनवाई की तारीख 25 सितंबर को वर्चुअल रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया।केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि 35, लोधी एस्टेट...
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1999 में बलात्कार के दोषी व्यक्ति की उम्र निर्धारित करने के लिए किशोर परीक्षण कराने का निर्देश दिया
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1999 में बलात्कार के दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की उम्र निर्धारित करने के लिए किशोर परीक्षण कराने का निर्देश दिया। यह निर्देश तब आया, जब दोषी ने दावा किया कि अपराध के समय वह नाबालिग था, जिससे उसके मामले में किशोर न्याय प्रावधानों की प्रयोज्यता पर सवाल उठे।स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र के आधार पर अपीलकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि कथित अपराध की तारीख को उसकी उम्र 16 वर्ष 06 महीने और 17 दिन थी और यद्यपि ट्रायल कोर्ट के समक्ष किशोर होने का तर्क नहीं दिया गया। फिर भी विभिन्न...
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने BJP MLA की चुनाव याचिका खारिज करने की मांग वाली याचिका खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी विधायक (BJP MLA) देवेंद्र अत्री द्वारा कांग्रेस (Congress) उम्मीदवार बिजेंद्र सिंह द्वारा उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका खारिज करने की मांग वाली याचिका खारिज की।पहले सिंह ने अत्री के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने पुनर्मतगणना की मांग की थी और भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाया था। बाद में कांग्रेस उम्मीदवार ने संशोधित याचिका दायर की, जिसमें भ्रष्ट आचरण के आरोपों को हटा दिया गया और उनकी याचिका को केवल पुनर्मतगणना तक ही सीमित रखा गया।अदालत ने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला आने तक NHAI द्वारा CLAT-PG अंकों के आधार पर वकीलों की भर्ती पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 सितंबर) को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की 11 अगस्त की अधिसूचना को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें कहा गया कि वकीलों की भर्ती के लिए CLAT-PG अंक आधार होंगे।अदालत ने याचिका पर फैसला सुनाए जाने तक NHAI द्वारा भर्ती पर भी रोक लगाई।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने सभी पक्षकारों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।पिछली सुनवाई में NHAI ने हाईकोर्ट को बताया कि वह वकीलों की भर्ती के लिए...
बार-बार मुकदमेबाजी की अनुमति नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठाओं को कुंभी दर्जा देने के खिलाफ PIL खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार के उस शासनादेश (GR) के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज की, जिसके तहत मराठा समुदाय के उन सदस्यों को जो स्वयं को कुंभी मूल का बताते हैं, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में कुंभी जाति का प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अखंड की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर पहले से ही याचिका अदालत में लंबित है और नई याचिका दाख़िल करना मुकदमेबाजी की अनावश्यक पुनरावृत्ति होगी।चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की,“हम मुकदमेबाजी...
भ्रष्टाचार मामले में हाईकोर्ट सेशन जज के खिलाफ की विभागीय जांच की सिफारिश
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सेशन जज के खिलाफ विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। अदालत ने पाया कि जज ने ज़मीन अधिग्रहण कार्यालय में कार्यरत सरकारी कंप्यूटर ऑपरेटर जिस पर 5 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि गबन करने का आरोप है, उनके खिलाफ गंभीर धाराओं को नज़रअंदाज़ कर केवल हल्की धारा कायम रखी, जिससे उसे अनुचित लाभ मिला।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की पीठ ने आदेश दिया कि इस मामले की प्रति प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (विजिलेंस), हाईकोर्ट ऑफ़ मध्यप्रदेश, जबलपुर को भेजी जाए और माननीय चीफ जस्टिस के...
नारायण साई की अस्थायी ज़मानत याचिका पर आदेश पारित करेगा गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 सितंबर) को यह संकेत दिया कि वह बलात्कार मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहे नारायण साई की उस अर्जी पर आदेश पारित करेगा, जिसमें उन्होंने अपनी बीमार मां से मिलने के लिए अस्थायी ज़मानत की मांग की।नारायण साई को 2019 में सूरत की सेशंस कोर्ट ने दोषी ठहराकर उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी। उन्होंने दलील दी कि उनकी माँ की तबीयत नाज़ुक है और उन्हें कभी भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है। उनकी ओर से कहा गया कि इससे पहले भी इसी आधार पर अदालत उन्हें अस्थायी ज़मानत दे चुकी है।मामले की सुनवाई...
सुप्रीम कोर्ट से पुष्टि प्राप्त भूमि अधिग्रहण धारा 24(2) के तहत न तो निरस्त होगा, न ही पुनर्जीवित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन भूमि अधिग्रहण कार्यवाहियों को सुप्रीम कोर्ट पहले ही वैध ठहरा चुका है, उन्हें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में न्यायसंगत मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 24(2) के आधार पर न तो पुनर्जीवित किया जा सकता है और न ही अमान्य घोषित।जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने यह टिप्पणी मेरठ ज़िले की भूमि अधिग्रहण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए दी। अदालत ने कहा कि अधिग्रहण की कार्यवाही 1990 में पूरी हो चुकी थी।...
सिर्फ 'तेज़ रफ़्तार' शब्द कहना लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि केवल गवाह का यह कहना कि आरोपी “तेज़ रफ़्तार” से गाड़ी चला रहा था, लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। जस्टिस राकेश काइंथला ने स्पष्ट किया कि अभियोजन को आरोपी की विशेष लापरवाही साबित करनी होगी।मामला जुलाई 2009 का है जब सूचक ने ऊना में अपनी कार सड़क के किनारे खड़ी की थी। आरोप था कि एचआरटीसी बस चालक ने पीछे से तेज़ रफ़्तार में टक्कर मारी। ट्रायल कोर्ट ने चालक को दोषी ठहराया था और कहा था कि सड़क सीधी थी और बस रोकी जा सकती थी। परंतु अपीलीय अदालत ने चालक को...
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला को 22 हफ्ते का गर्भपात कराने की अनुमति दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 वर्षीय अविवाहित महिला को 22-हफ्ते का गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। यह गर्भ एक व्यक्ति द्वारा शादी का झूठा वादा करके बनाए गए शारीरिक संबंधों के कारण ठहरा था, जिससे महिला को गंभीर शारीरिक और मानसिक आघात पहुँचा था।जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा कि अगर महिला को यह गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर किया जाता है तो उसकी पीड़ा और बढ़ जाएगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ेगा, जिससे उसके शरीर पर हुए घाव शायद ही भर पाएंगेमहिला के अनुसार, वह उस व्यक्ति के...




















