हाईकोर्ट

क्या धर्मांतरण एक इलाज है? अनुसूचित जाति के दर्जे की समाप्ति पर एक पुनर्विचार
क्या धर्मांतरण एक इलाज है? अनुसूचित जाति के दर्जे की समाप्ति पर एक पुनर्विचार

चिन्थड़ा आनंद बनाम आंध्र प्रदेश राज्य में सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने इस कानूनी स्थिति को दोहराया कि हिंदू धर्म, जैन धर्म या सिख धर्म के अलावा अन्य धर्मों में धर्मांतरण के परिणामस्वरूप अनुसूचित जाति का दर्जा खो जाता है। याचिकाकर्ता ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उत्तरदाताओं के खिलाफ प्राथमिकी को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी। उत्तरदाताओं ने कथित तौर पर हिंदू-मडिगा समुदाय के एक सदस्य (अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत) याचिकाकर्ता के खिलाफ जातिवादी गाली दी थी और कथित तौर पर पीटा था। हालांकि,...

भोजशाला मंदिर-कमल मौला विवाद: सर्वे का वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करे अपलोड, ताकि याचिकाकर्ता देख सकें: हाईकोर्ट ने ASI को निर्देश
भोजशाला मंदिर-कमल मौला विवाद: सर्वे का वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करे अपलोड, ताकि याचिकाकर्ता देख सकें: हाईकोर्ट ने ASI को निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया कि वह साइट सर्वे के वीडियोग्राफिक रिकॉर्ड को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करे और मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी को उसका एक्सेस (पहुंच) प्रदान करे।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया:"सुप्रीम कोर्ट के 01.04.2026 के आदेश के पैरा 6 में की गई टिप्पणियों को देखते हुए हम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को निर्देश देते हैं कि वह भोजशाला साइट पर की गई सर्वे की कार्यवाही की वीडियोग्राफी को एक...

जाति प्रमाण पत्र रद्द करने से पहले कारण बताओ नोटिस देने की शर्त सिर्फ़ फ़ोन कॉल करने से पूरी नहीं होती: उत्तराखंड हाईकोर्ट
जाति प्रमाण पत्र रद्द करने से पहले 'कारण बताओ नोटिस' देने की शर्त सिर्फ़ फ़ोन कॉल करने से पूरी नहीं होती: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि किसी व्यक्ति को सिर्फ़ फ़ोन कॉल करना, जाति प्रमाण पत्र रद्द करने से पहले 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने की शर्त को पूरा नहीं करता। कोर्ट ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र रद्द करने से, जिससे नागरिक अधिकार मिलते हैं, प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का उचित और सही मौक़ा मिलना ज़रूरी है।जस्टिस पंकज पुरोहित रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में तहसीलदार द्वारा 09.07.2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें याचिकाकर्ता का OBC जाति प्रमाण पत्र रद्द किया गया था।...

ससुर से वसूली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक, विधवा बहू के भरण-पोषण बकाया विवाद में अंतरिम राहत
ससुर से वसूली पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक, विधवा बहू के भरण-पोषण बकाया विवाद में अंतरिम राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण मामले में ससुर के खिलाफ जारी वसूली वारंट पर रोक लगाई। यह मामला मृत पति के जीवनकाल के दौरान बकाया भरण-पोषण राशि को लेकर विधवा बहू द्वारा की गई वसूली से जुड़ा है।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने यह अंतरिम आदेश पारित करते हुए ससुर को राहत दी। हालांकि अदालत ने शर्त रखी कि वह विवादित राशि का आधा हिस्सा निचली अदालत में जमा करेंगे, तभी यह रोक प्रभावी रहेगी।मामले के अनुसार, वर्ष 2016 में विधवा बहू ने अपने पति के जीवित रहते हुए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की...

21 साल बाद बलात्कार के दोषी को हाईकोर्ट ने किया बरी, गवाही में विरोधाभास और सबूतों की कमी बनी वजह
21 साल बाद बलात्कार के दोषी को हाईकोर्ट ने किया बरी, गवाही में विरोधाभास और सबूतों की कमी बनी वजह

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 में बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी किया। अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास, ठोस साक्ष्यों का अभाव और फोरेंसिक रिपोर्ट में असंगतियों के कारण दोषसिद्धि को बरकरार रखना सुरक्षित नहीं है। गौरतलब है कि अपील लंबित रहने के दौरान आरोपी की मृत्यु हो चुकी थी।जस्टिस रुपिंदरजीत चहल ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता ने अलग-अलग चरणों पर घटना के बारे में भिन्न-भिन्न बयान दिए। उन्होंने पुलिस के समक्ष दिए गए बयान, दंड प्रक्रिया संहिता...

सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने BJP नेता गौरव भाटिया की याचिका पर X यूज़र से मांगा जवाब
सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने BJP नेता गौरव भाटिया की याचिका पर X यूज़र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए X (पूर्व में ट्विटर) यूज़र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। यह मामला भाटिया के टीवी डिबेट से जुड़े एक कथित अश्लील वीडियो पोस्ट को लेकर है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।जस्टिस मिनी पुष्कर्णा ने रैंटिंग गोला नाम के यूज़र को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।भाटिया का आरोप है कि उक्त यूज़र ने 19 दिसंबर को वीडियो पोस्ट किया जो उनके द्वारा दायर मानहानि मामले में 25 सितंबर, 2025 को...

दिव्यांगों को पूर्ण सहयोग देने में कोई कानूनी बाधा नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिव्यांगों को 'पूर्ण सहयोग' देने में कोई कानूनी बाधा नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को पूर्ण सहयोग देने पर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत कोई कानूनी रोक नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम न बनने का हवाला देकर वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल रोका नहीं जा सकता।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की बेंच एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनके 78 वर्षीय पति गंभीर बीमारियों जैसे उन्नत डिमेंशिया और अल्जाइमर से पीड़ित हैं और पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हैं।मामले में साकेत अदालत के प्रिंसिपल जिला एवं सेशन जज...

स्टूडेंट एक्टिविस्ट की हिरासत पर सख्त हाईकोर्ट, दिल्ली पुलिस को CBI जांच की चेतावनी
स्टूडेंट एक्टिविस्ट की हिरासत पर सख्त हाईकोर्ट, दिल्ली पुलिस को CBI जांच की चेतावनी

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टूडेंट एक्टिविस्ट की कथित अवैध हिरासत और प्रताड़ना के मामले में दिल्ली पुलिस को कड़ी चेतावनी दी। अदालत ने संकेत दिया कि यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जा सकती है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने कहा,“अब काफी हो चुका है, हम इसे यूं नहीं जाने देंगे। जरूरत पड़ी तो जांच CBI को सौंप देंगे।”अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस का अब तक का रवैया भरोसा पैदा नहीं करता।अदालत ने दिल्ली पुलिस द्वारा सीलबंद...

पत्रकारिता करने से शिक्षक की नौकरी पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
पत्रकारिता करने से शिक्षक की नौकरी पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा संस्थानों में शिक्षक नियुक्ति या सेवा के लिए पत्रकारिता में संलिप्त होना कोई बाधा नहीं है। अदालत ने कहा कि लागू नियमों में ऐसी कोई मनाही नहीं है।जस्टिस इरशाद अली ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 बेसिक शिक्षा के शिक्षकों पर लागू नहीं होती। उनके सेवा नियम उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियम 1981 द्वारा संचालित होते हैं, जिनमें पत्रकारिता करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है।मामला एक सहायक शिक्षक...

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की रिक्यूज़ल सुनवाई के वीडियो हटाने का आदेश, केजरीवाल को नोटिस: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की रिक्यूज़ल सुनवाई के वीडियो हटाने का आदेश, केजरीवाल को नोटिस: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए सोशल मीडिया से अदालत की कार्यवाही के वीडियो हटाने का निर्देश दिया, जो जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की रिक्यूज़ल (मामले से अलग होने) की सुनवाई से संबंधित थे। यह आदेश एक जनहित याचिका पर दिया गया, जिसमें अरविंद केजरीवाल समेत अन्य नेताओं और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ अदालत की कार्यवाही को कथित रूप से “बिना अनुमति रिकॉर्ड और प्रसारित” करने पर अवमानना कार्रवाई की मांग की गई थी। जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की...

लॉरेंस ऑफ पंजाब वेब सीरीज पर रोक की मांग, हाईकोर्ट पहुंचे कांग्रेस सांसद राजा वारिंग
'लॉरेंस ऑफ पंजाब' वेब सीरीज पर रोक की मांग, हाईकोर्ट पहुंचे कांग्रेस सांसद राजा वारिंग

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर आधारित वेब सीरीज 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई।यह याचिका कांग्रेस सांसद राजा वारिंग की ओर से दायर की गई। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया कि 27 अप्रैल को ओटीटी मंच जी5 पर प्रस्तावित इस वेब सीरीज के प्रसारण पर तत्काल रोक लगाई जाए।याचिका में कहा गया कि यह सीरीज गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन और उसके अपराधी नेटवर्क के उदय को दर्शाती है जिससे अपराध को महिमामंडित करने का खतरा...

सोशल मीडिया पोस्ट विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, मंत्री हरदीप पुरी की बेटी से जुड़ी सामग्री हटाने के आदेश पर सुनवाई
सोशल मीडिया पोस्ट विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस, मंत्री हरदीप पुरी की बेटी से जुड़ी सामग्री हटाने के आदेश पर सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। अदालत ने इस मामले में हिमायनी पुरी से जवाब मांगा।जस्टिस मिनी पुष्करणा की सिंगल बेंच ने यह स्पष्ट किया कि वह याचिकाकर्ता की ओर से दायर आदेश निरस्तीकरण (वैकैशन) अर्जी और अंतरिम निषेधाज्ञा दोनों पर एक साथ सुनवाई करेंगी। मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की गई।यह याचिका रायपुर के सोशल एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने दायर की। उनका कहना है कि पहले पारित आदेश...

शादी और बच्चे के हित को देखते हुए पीड़िता को दोबारा बुलाने की अनुमति: राजस्थान हाईकोर्ट
शादी और बच्चे के हित को देखते हुए पीड़िता को दोबारा बुलाने की अनुमति: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए आरोपी की उस अर्जी को मंजूरी दी, जिसमें उसने पीड़िता और उसकी मां को दोबारा गवाही के लिए बुलाने की मांग की थी। अदालत ने यह निर्णय आरोपी और पीड़िता के बीच विवाह तथा उनसे जन्मी बच्ची के हित को ध्यान में रखते हुए दिया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि यदि बदली हुई परिस्थितियों में पीड़िता और उसकी मां के बयान फिर से दर्ज नहीं किए गए तो इससे उनके वैवाहिक जीवन और उनकी बेटी के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।अदालत ने प्राचीन...

दिल्ली की जमीन बेहद सीमित संसाधन: हाईकोर्ट ने 1063 करोड़ की मांग बहाल की, टैक्सदाताओं पर बोझ नहीं डाल सकते
दिल्ली की जमीन बेहद सीमित संसाधन: हाईकोर्ट ने 1063 करोड़ की मांग बहाल की, टैक्सदाताओं पर बोझ नहीं डाल सकते

दिल्ली हाईकोर्ट ने नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) को बड़ी राहत देते हुए भारत होटल्स लिमिटेड के खिलाफ 1063 करोड़ से अधिक की लाइसेंस फीस मांग को बहाल किया। अदालत ने कहा कि राजधानी की जमीन बेहद सीमित सार्वजनिक संसाधन है और उससे होने वाले नुकसान का बोझ आम करदाताओं पर नहीं डाला जा सकता।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सिंगल जज के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें 13 फरवरी 2020 की मांग नोटिस और 1982 में किए गए लाइसेंस समझौते की समाप्ति रद्द की गई थी।यह विवाद NDMC द्वारा भारत होटल्स...

CrPC की धारा 125 के तहत अंतिम भरण-पोषण आदेश हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अंतरिम राहत पर प्रभावी होगा: कर्नाटक हाईकोर्ट
CrPC की धारा 125 के तहत अंतिम भरण-पोषण आदेश हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अंतरिम राहत पर प्रभावी होगा: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही अवधि के लिए पति पर दो अलग-अलग मामलों में भरण-पोषण का बोझ नहीं डाला जा सकता। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत दिया गया अंतिम भरण-पोषण आदेश हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 24 के तहत दिए गए अंतरिम भरण-पोषण आदेश पर प्राथमिकता रखेगा।जस्टिस डॉ. के. मनमधा राव की सिंगल बेंच ने कहा कि धारा 125 के तहत पारित आदेश साक्ष्यों के आधार पर अंतिम निर्णय होता है।इसलिए इसे प्रमुखता दी जानी चाहिए।अदालत ने टिप्पणी की,“एक ही अवधि...

महिला की गरिमा उसके आश्रय से जुड़ी है: मद्रास हाईकोर्ट का सख्त आदेश, तोड़ा गया घर फिर से बनाने का निर्देश
महिला की गरिमा उसके आश्रय से जुड़ी है: मद्रास हाईकोर्ट का सख्त आदेश, तोड़ा गया घर फिर से बनाने का निर्देश

मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि किसी महिला की गरिमा उसके रहने के अधिकार से गहराई से जुड़ी होती है। अदालत ने अवैध रूप से तोड़े गए घर के मामले में न केवल मुआवजा देने का आदेश दिया, बल्कि आरोपियों को तुरंत घर पुनर्निर्माण करने के निर्देश भी दिए।जस्टिस एल. विक्टोरिया गौरी ने कहा,“महिला की गरिमा उसके आश्रय के अधिकार से अविभाज्य रूप से जुड़ी है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीने और रहने का अधिकार भी शामिल है।” अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,"घर केवल...

फीस में मनमानी बढ़ोतरी और किताबों की सप्लाई में गड़बड़ी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार
फीस में मनमानी बढ़ोतरी और किताबों की सप्लाई में गड़बड़ी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूल अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के उन प्राइवेट स्कूलों के अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार किया, जिन पर फीस में भारी बढ़ोतरी करने और अभिभावकों को चुनिंदा विक्रेताओं से नकली या डुप्लीकेट ISBN वाली किताबें ज़्यादा कीमतों पर खरीदने के लिए मजबूर करने का आरोप है।जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी की:"इस तरह का बर्ताव, जब किताबों और स्टेशनरी पर मिलने वाले भारी मुनाफे और सप्लाई के खास तरीके के साथ मिलाकर देखा जाता है तो यह एक सोची-समझी साज़िश की ओर इशारा करता है। इसका मकसद अभिभावकों को...

राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी से गायब स्टॉक की रिकवरी आदेश रद्द किया, कहा - गबन के आरोपों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई ज़रूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने कर्मचारी से गायब स्टॉक की रिकवरी आदेश रद्द किया, कहा - गबन के आरोपों के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई ज़रूरी

राजस्थान हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया कि जब किसी कर्मचारी की ओर से कोई गंभीर दुराचार होता है, जिससे नियोक्ता को आर्थिक नुकसान होता है तो नियोक्ता को केवल वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर रिकवरी का आदेश देने के बजाय, नियमों के तहत अनुमत उचित कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की बेंच सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम (RSRTC) में मैकेनिक के तौर पर काम कर रहा था। अधिकारियों द्वारा स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन किया गया, जिसमें 8 टायर और...