हाईकोर्ट
पैसे लेकर नौकरी का भरोसा देना धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC की धारा 420) के आरोप में दी गई सज़ा बरकरार रखी। इस व्यक्ति ने नीमच के पूर्व कलेक्टर होने का ढोंग किया और नौकरी के इच्छुक लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झूठा भरोसा देकर उनसे धोखे से 2 लाख रुपये प्रति व्यक्ति ऐंठ लिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि उसका यह कृत्य धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है, न कि आपराधिक विश्वासघात की।जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा,"सरकारी दफ्तरों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर स्टूडेंट्स...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 37 साल बाद आपराधिक मामले में अमान्य समझौते के बावजूद दोबारा सुनवाई से इनकार किया, कार्यवाही रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट द्वारा एक व्यक्ति को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराया। यह फैसला एक समझौते के आधार पर दिया गया, भले ही वह समझौता अमान्य था।ऐसा करते हुए कोर्ट ने दोबारा सुनवाई का आदेश देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि 37 साल बीत जाने के बाद मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेजना न्याय के हित में नहीं होगा।भले ही बरी किए जाने का फैसला कानून के पूरी तरह से अनुरूप नहीं था। फिर भी कोर्ट ने अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आरोपी के खिलाफ चल रही कार्यवाही...
विदेशी कोर्ट के आदेश के बावजूद पिता द्वारा बच्चे को माँ से दूर ले जाना गैर-कानूनी कस्टडी माना जाएगा: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक पिता को निर्देश दिया कि वह अपने बच्चे की कस्टडी माँ को सौंप दे। कोर्ट ने पाया कि पिता ने बच्चे को गैर-कानूनी तरीके से भारत लाया था, जबकि बच्चे की कस्टडी एक कनाडाई कोर्ट ने माँ को सौंपी थी (जिस कार्यवाही में पिता ने भी हिस्सा लिया था)।ऐसा करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि बच्चे को उसकी माँ से दूर रहने के लिए मजबूर करना (जो कनाडा में रहती है) बच्चे के लिए मानसिक रूप से बहुत कष्टदायक होगा।माँ ने 'हैबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका के ज़रिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।...
ब्रिटिश नागरिकता विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के 2019 के राहुल गांधी को दिए नोटिस के रिकॉर्ड की जांच की, केंद्र को पक्षकार बनाने की अनुमति दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने गुरुवार को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा पेश किए गए उन आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की, जो 2019 में कांग्रेस (Congress) नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी को जारी किए गए एक नोटिस से संबंधित थे। इस नोटिस में उनकी नागरिकता के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया।ये रिकॉर्ड जस्टिस राजीव सिंह की बेंच के सामने 9 मार्च, 2026 के पिछले आदेश के पालन में रखे गए।पिछला आदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर पारित किया गया।...
उत्तम नगर होली झड़प: हाईकोर्ट ने सांप्रदायिक हिंसा रोकने के लिए पुलिस को ईद के दौरान जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च) को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह सभी ज़रूरी कदम उठाए ताकि ईद के त्योहार के दौरान आम जनजीवन में कोई रुकावट न आए। यह निर्देश उत्तम नगर में हुई एक घटना के संदर्भ में दिया गया, जहां होली के दौरान हुई एक झड़प में 26 साल के एक युवक की हत्या कर दी गई थी।कोर्ट ने पुलिस को आगे यह भी निर्देश दिया कि वे ऐसी व्यवस्था करें जिससे "सभी लोगों में सुरक्षा और बचाव का एहसास पैदा हो" और अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि समाज के किसी भी तबके के "किसी भी व्यक्ति"...
शराब नीति मामला: केजरीवाल समेत सभी आरोपियों को जवाब दाखिल करने के लिए समय, 2 अप्रैल को अगली सुनवाई
दिल्ली शराब नीति मामले में दिल्ली हाइकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया।बता दें, यह याचिका विशेष अदालत द्वारा दिए गए कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने (एक्सपंज) की मांग से जुड़ी है।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने आरोपियों के वकीलों के अनुरोध पर उन्हें अतिरिक्त समय दिया और मामले को 2 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दिया।सुनवाई के दौरान ED की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू और विशेष वकील...
धारा 151 CPC के तहत निष्फल मुकदमों को समाप्त कर सकती है सिविल कोर्ट: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी मुकदमे का मूल कारण (cause of action) बाद की घटनाओं के चलते समाप्त हो जाता है, तो सिविल कोर्ट अपनी निहित शक्तियों (Section 151 CPC) का प्रयोग करते हुए ऐसे मुकदमे को निष्फल (infructuous) घोषित कर खारिज कर सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मुकदमों को केवल अंतरिम आदेश बनाए रखने या भविष्य की संभावनाओं के आधार पर लंबित नहीं रखा जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस संदीप वी. मार्ने ने भारत संघ द्वारा दायर सिविल रिवीजन आवेदन पर सुनवाई करते हुए की। याचिका सिटी सिविल कोर्ट के...
पीड़ित और दोषी एक ही गांव के हों, यह अकेले पैरोल से इनकार का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इस आधार पर कि दोषी और पीड़ित एक ही गांव में रहते हैं, पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि ऐसी आशंका सिर्फ अनुमान (conjecture) पर आधारित है और इससे पैरोल के सुधारात्मक उद्देश्य पर असर पड़ता है।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि पैरोल का उद्देश्य कैदी को परिवार से जोड़कर उसमें आत्ममंथन और सुधार की भावना विकसित करना है।मामला क्या था?याचिकाकर्ता की पैरोल अर्जी इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि वह और पीड़ित एक...
ईशा फाउंडेशन के खिलाफ कथित मानहानि सामग्री हटाने का आदेश: दिल्ली हाइकोर्ट सख्त, मीडिया आउटलेट की याचिका खारिज
दिल्ली हाइकोर्ट ने तमिल मीडिया संस्थान नक्कीरन पब्लिकेशंस को सद्गुरु की ईशा फाउंडेशन के खिलाफ प्रकाशित कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने का निर्देश दिया।अदालत ने साथ ही नक्कीरन द्वारा दायर वह आवेदन भी खारिज किया, जिसमें मुकदमे को प्रारंभिक स्तर पर ही खत्म करने की मांग की गई।जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने साफ शब्दों में कहा, आदेश 7 नियम 11 की याचिका खारिज की जाती है। सभी आपत्तिजनक सामग्री हटाई जाए।यह मामला वर्ष 2024 में दायर उस मानहानि वाद से जुड़ा है, जिसमें ईशा फाउंडेशन ने आरोप लगाया था कि नक्कीरन...
दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन दशक पुराने मामले में क्लर्क को बरी किया, कहा- CBI केस साबित करने में नाकाम रही
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग (DESU) के पूर्व क्लर्क को 1994 के भ्रष्टाचार के मामले में बरी किया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपी ने रिश्वत की मांग की थी या उसे स्वीकार किया था।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने स्पेशल जज के 2003 का फैसला रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत दोषी ठहराया गया था।यह मामला एक उपभोक्ता की शिकायत से शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी, जो उस समय DESU कार्यालय में...
अगर पुलिस 'दबाव डाले' तो अवमानना का मामला भेजें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को दी सलाह
हाल ही में दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब मजिस्ट्रेट कुछ खास 'असुविधाजनक' मामलों की जांच के आदेश देते हैं तो कभी-कभी बड़े पुलिस अधिकारी उन पर 'दबाव डालने' की कोशिश करते हैं।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने मजिस्ट्रेटों को साफ तौर पर सलाह दी कि अगर उन्हें किसी पुलिस अधिकारी की तरफ से ऐसी कोई शर्मिंदगी या दबाव महसूस हो, तो वे कभी भी हाईकोर्ट में अवमानना का मामला भेज सकते हैं।बेंच ने अपने आदेश में कहा,"मजिस्ट्रेट को ज़रूरी आदेश देने में हिचकिचाना...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 22 साल बाद पुलिसकर्मी पर चाकू से हमला करने के आरोपी की सजा बरकरार रखी
एक पुलिस अधिकारी पर "साहसी हमले" के दो दशक से भी ज़्यादा समय बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति की सज़ा और दोषसिद्धि बरकरार रखी, जिसने पिछली पुलिस कार्रवाई के दौरान रोके जाने के बदले में एक हेड कांस्टेबल पर चाकू से हमला किया था।जस्टिस विमल कुमार यादव ने आरोपी द्वारा दायर अपील खारिज की और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 392, 394 और 397 (लूट) के तहत उसकी दोषसिद्धि की पुष्टि की।यह मामला अप्रैल 2002 का है, जब हेड कांस्टेबल सुरेश कुमार ड्यूटी के बाद घर लौट रहे थे, तभी दिल्ली के...
आत्महत्या सभ्य दुनिया की समस्या, जो तनाव और सामाजिक दबाव से पैदा होती है: दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में व्यक्ति को दोषी ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आत्महत्या तेज़ी से "सभ्य दुनिया की एक समस्या" बनती जा रही है, जो अक्सर तनाव, सामाजिक दबाव और सहयोग प्रणालियों के टूटने के कारण होती है। कोर्ट ने यह टिप्पणी अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराते हुए की।जस्टिस विमल कुमार यादव ने ये टिप्पणियां पति द्वारा दायर अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कीं। उन्होंने पति की सज़ा को IPC की धारा 304B (दहेज मृत्यु) से बदलकर IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत कर दिया, जबकि IPC...
कानूनी कार्यवाही के कारण हुई भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत
भगत सिंह को अपने जीवनकाल के दौरान दो महत्वपूर्ण ट्रायलों का सामना करना पड़ा। पहला दिल्ली में केंद्रीय विधान सभा बम की घटना से उत्पन्न हुआ, जबकि दूसरा लाला लाजपत राय की मौत के जवाब में सॉन्डर्स की हत्या से संबंधित लाहौर षड्यंत्र मामला था। पूर्व में, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जबकि बाद वाले में भगत सिंह को सुखदेव और राजगुरु के साथ मौत की सजा सुनाई गई थी। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, तीन क्रांतिकारियों को 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई। लगभग 45 साल बाद अपनी शहादत...
फैंटम मिसालें: भारतीय अदालतों में AI-जनित केस लॉ का उदय
सामान्य कानून निर्णयों की वैधता मिसाल की प्रामाणिकता पर निर्भर करती है। यदि मनगढ़ंत अधिकारी न्यायिक तर्क में प्रवेश करते हैं, तो निर्णय के सिद्धांत की अखंडता से ही समझौता किया जाता है। हाल ही में, हालांकि, वैश्विक क्षेत्राधिकारों में एक विघटनकारी और अत्यधिक चिंताजनक प्रवृत्ति उभरी है, फैंटम केस कानून प्रस्तुत करना। लिखित प्रस्तुतियों की समीक्षा करने वाले न्यायिक अधिकारी तेजी से उन निर्णयों के लिए पूरी तरह से प्रारूपित उद्धरणों की खोज कर रहे हैं जो बस मौजूद ही नहीं हैं। ये अपराधी इन वकीलों...
दिल्ली हाईकोर्ट ने आठ हफ़्तों के अंदर सभी ज़िला उपभोक्ता आयोगों में हाइब्रिड सुनवाई की सुविधा शुरू करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि राष्ट्रीय राजधानी के सभी ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों में हाइब्रिड सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा आठ हफ़्तों के भीतर चालू हो जाए।चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीज़न बेंच ने यह भी आदेश दिया कि सभी दस ज़िला आयोगों द्वारा प्रकाशित दैनिक कॉज़ लिस्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का लिंक दिया जाना चाहिए।कोर्ट वकील एस.बी. त्रिपाठी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर...
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नवोदय विद्यालयों में एडमिशन में EWS कोटे को शामिल न करने की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। इस याचिका में दावा किया गया कि जवाहर नवोदय विद्यालयों में एडमिशन की प्रक्रिया से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों के लिए कोटे को बाहर रखा गया।जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने यह टिप्पणी की:"श्री एस. एम. गुरु, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल, प्रतिवादियों की ओर से अग्रिम सूचना पर पेश हुए। याचिका की एक प्रति, साथ में संलग्न दस्तावेजों के साथ, उन्हें दी जाए ताकि वे निर्देश प्राप्त कर सकें और याचिका पर अपना जवाब दाखिल...
अनुच्छेद 25 पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, निजी जगहों पर प्रार्थनाओं पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 देश में हर धार्मिक संप्रदाय को पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, लेकिन यह प्रार्थना की आड़ में एक धर्म द्वारा दूसरे धर्म को उकसाने को कोई सुरक्षा नहीं देता।साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी व्यक्ति की निजी जगह पर की जाने वाली प्रार्थनाओं या धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर कोई रुकावट या रोक नहीं हो सकती, चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय का हो।ये टिप्पणियां जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच...
हाईकोर्ट का निर्देश- रोड डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई करे इंदौर नगर निगम
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अंतरिम उपाय के तौर पर मंगलवार (17 मार्च) को इंदौर नगर निगम को शहर में रोड डिवाइडर और फुटपाथ पर लगे अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।कोर्ट होर्डिंग्स के अवैध रूप से लगाए जाने को लेकर चिंता जताने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था।PIL पर नोटिस जारी करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"नोटिस चार हफ़्तों के भीतर जवाब देने योग्य बनाया जाए। एक अंतरिम उपाय के तौर पर यह निर्देश दिया जाता है कि...
फैमिली कोर्ट 'मुबारत' के ज़रिए आपसी तलाक़ की घोषणा के लिए मुस्लिम जोड़े की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए अधिकृत: गुजरात हाईकोर्ट ने फिर की पुष्टि
गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि फैमिली कोर्ट आपसी सहमति से तलाक़ के आधार पर शादी को खत्म करने की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए सक्षम और अधिकृत है। इस आपसी सहमति को मुस्लिम जोड़ों के बीच हुए 'मुबारत' समझौते के रूप में भी जाना जाता है।जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस निशा एम. ठाकोर की खंडपीठ ने 'आसिफ़ दाऊदभाई करवा और अन्य बनाम कोई नहीं (2025)' मामले में हाईकोर्ट के फ़ैसले का हवाला दिया और कहा कि कोर्ट ने समझौते के ज़रिए मुस्लिम शादी को खत्म करने के मामले पर विस्तार से विचार किया था।2025 के फ़ैसले का...




















