हाईकोर्ट

प्रशासनिक प्रक्रिया को विफल होने से बचाने के लिए आवश्यकता के सिद्धांत का सहारा लिया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'आवश्यकता का सिद्धांत' केवल पक्षपात की स्थिति में ही लागू नहीं होता, बल्कि ऐसी प्रशासनिक अपरिहार्यता में भी इसका सहारा लिया जा सकता है, जहां सार्वजनिक कर्तव्य के निर्वहन के दौरान प्रशासनिक प्रक्रिया ठप होने और पूरा प्रयास व्यर्थ हो जाने की आशंका हो।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने इस सिद्धांत को लागू करते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के चेयरमैन द्वारा अकेले प्रधानाचार्य पद की चयन सूची घोषित किए जाने को वैध ठहराया। उस समय बोर्ड के अन्य सभी सदस्यों का...

घरों के अवैध ध्वस्तीकरण के बाद पुनर्वास के वादे से पीछे नहीं हट सकता सूरत नगर निगम: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि वह सूरत नगर निगम को उन लोगों के पुनर्वास के समझौते से पीछे हटने की अनुमति नहीं देगा, जिनके घर जून में कथित अवैध ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान गिरा दिए गए। कोर्ट ने कहा कि निगम पहले प्रभावित लोगों को आवास देने पर सहमत हुआ था और अब वह अपना रुख नहीं बदल सकता।जस्टिस निखिल एस. करियल नासिर नगर इलाके में जून में चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियान से प्रभावित निवासियों की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इससे पहले सूरत नगर निगम ने निवासियों के इस आरोप का जोरदार विरोध किया कि उन्हें जो वैकल्पिक...

पहले बिना अनुमति जेल से अनुपस्थित रहने के बावजूद कैदी को तीसरी पैरोल: राजस्थान हाईकोर्ट ने लंबे कारावास और अनुकूल रिपोर्टों को माना अहम

राजस्थान हाईकोर्ट ने पहले खुले कारागार शिविर में रात के निरीक्षण के दौरान बिना अनुमति अनुपस्थित पाए जाने के कारण जेल वापस भेजे गए कैदी को तीसरी नियमित पैरोल मंजूर की। कोर्ट ने कैदी की लंबे समय से हिरासत, पहली और दूसरी पैरोल के दौरान संतोषजनक आचरण, तय समय पर जेल लौटने और संबंधित विभागों की अनुकूल रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने कैदी की याचिका स्वीकार करते हुए जिला पैरोल सलाहकार समिति का वह आदेश रद्द किया, जिसके तहत उसकी...

कर्नाटक SIT: वोटर लिस्ट से नाम हटाने की कोशिश के आरोप में BJP बूथ एजेंटों पर दर्ज दो FIR पर हाईकोर्ट की रोक

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आपत्तियां दाखिल कर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश करने के आरोप में बीजेपी के दो बूथ लेवल एजेंटों के खिलाफ दर्ज दो FIR पर रोक लगाई। यह मामला बेंगलुरु के मल्लेश्वरम विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है।जस्टिस अनंत रमनाथ हेगड़े ने दोनों एजेंटों की ओर से दायर अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अंतरिम राहत दी। याचिकाकर्ता जी.एस. वसंतलक्ष्मी और दीपक सिंह आर. ने FIR रद्द करने की मांग की थी। ये FIR...

PMLA की रकम और मुख्य अपराध की रकम में गणितीय मेल होना ज़रूरी नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने पूर्व CM मधु कोडा की याचिका खारिज की

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि 'शेड्यूल्ड ऑफ़ेंस' (मुख्य अपराध) से जुड़ी कार्यवाही में तय की गई रकम और 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002' (PMLA) के तहत अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम) मानी जाने वाली संपत्ति की कीमत के बीच "गणितीय मेल" होना ज़रूरी नहीं है।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की सिंगल जज बेंच झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोडा की ओर से CrPC की धारा 482 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में रांची में PMLA मामलों के स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें...

एडवोकेट जनरल को हटाने की मांग को लेकर वकीलों की हड़ताल पूरी तरह गैर-कानूनी: मेघालय हाईकोर्ट ने जारी किया अवमानना नोटिस

मेघालय हाईकोर्ट ने गुरुवार (8 अक्टूबर) को मेघालय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और शिलांग बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और कार्यकारी सदस्यों को अवमानना नोटिस जारी किया। इन एसोसिएशन ने राज्य भर की सभी अदालतों में न्यायिक कामकाज से दूर रहने का आह्वान किया था, जब तक कि मेघालय सरकार एडवोकेट जनरल को हटा नहीं देती। कोर्ट ने कहा कि इस तरह काम से दूर रहने से न्याय प्रशासन में बाधा आती है और यह आपराधिक अवमानना ​​के बराबर है।चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस एच.एस. थांगखियू की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते...

प्राइवेट एम्प्लॉयर और एजुकेशनल इंस्टिट्यूट एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकते: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल डिवीज़न बेंच ने कहा कि तमिलनाडु में कोई भी प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट या प्राइवेट एम्प्लॉयर एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति या समुदाय की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकता।पृष्ठभूमि की जानकारीयाचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु सरकार से यह निर्देश देने की मांग की कि वह राज्य के भीतर प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट और प्राइवेट एम्प्लॉयर को एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति या समुदाय की जानकारी...

CrPC की धारा 156(3) की प्रक्रिया का पालन किए बिना मजिस्ट्रेट प्रशासनिक विवाद को आपराधिक मामला नहीं बना सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट किसी प्रशासनिक विवाद को आपराधिक कार्यवाही में नहीं बदल सकते। ऐसा वे किसी ऐसी अर्ज़ी के आधार पर FIR दर्ज करने का आदेश देकर नहीं कर सकते, जिसमें खुद FIR दर्ज करने की मांग न की गई हो, और न ही CrPC की धारा 156(3) के तहत शक्तियों के इस्तेमाल से जुड़े सुरक्षा उपायों का पालन किए बिना ऐसा कर सकते हैं।कोर्ट ने साफ़ किया कि जब किसी पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) के सामने रखी गई जानकारी किसी प्रशासनिक मुद्दे से जुड़ी हो तो उसे सिर्फ़ इसलिए आपराधिक...

BREAKING| एमपी हाईकोर्ट का पुलिस को आदेश: CJP प्रदर्शन में शामिल होने जाती हिरासत में ली गई महिला को पेश करें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया कि वे उस महिला को कोर्ट के सामने पेश करें, जिसे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ CJP के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पुणे से दिल्ली जा रही ट्रेन में इटारसी जंक्शन पर पुलिस ने हिरासत में लिया।कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार महिला की उसके परिवार तक सुरक्षित वापसी के लिए इंतज़ाम कर सकती है।चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीज़न बेंच ने आदेश दिया:"नोटिस जारी करें, जिसकी वापसी की तारीख 13.10.2026 तय की गई। राज्य को निर्देश दिया जाता...

Excise Policy: दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI की याचिका के मेंटेनेबिलिटी पर शुरुआती सुनवाई की मांग वाली अर्ज़ी खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अर्ज़ी खारिज की। इस अर्ज़ी में कथित शराब नीति घोटाले मामले में 23 आरोपियों को आरोपमुक्त (डिस्चार्ज) किए जाने के खिलाफ CBI की रिवीजन याचिका की 'मेंटेनेबिलिटी' (सुनवाई योग्य होने) पर शुरुआती सुनवाई की मांग की गई।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आरोपी विजय नायर की अर्ज़ी खारिज की। नायर ने कोर्ट के पहले के निर्देशों में बदलाव की मांग की थी ताकि मुख्य मामले की मेरिट पर सुनवाई से पहले CBI की याचिका की 'मेंटेनेबिलिटी' पर उनकी आपत्ति सुनी और तय की जा सके।कोर्ट ने कहा कि...

कर्नाटक हाईकोर्ट में बताया गया: इनकम टैक्स एक्ट के तहत जीवनसाथी वाले फ़ायदों से समलैंगिक जोड़ों को बाहर रखना आर्टिकल 15 का उल्लंघन

शुक्रवार (9 अक्टूबर) को कर्नाटक हाईकोर्ट को बताया गया कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत 'जीवनसाथी' वाले फ़ायदों से समलैंगिक जोड़ों को बाहर रखना लिंग के आधार पर भेदभाव है और यह संविधान के आर्टिकल 15 का उल्लंघन करता है।याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश होते हुए डॉ. ध्रुव जानसेन-संघवी ने जस्टिस बी एम श्याम प्रसाद के सामने तर्क दिया कि यह मामला मूल रूप से आर्टिकल 15 के तहत समानता के बारे में है, न कि समलैंगिक जोड़ों के शादी करने के अधिकार के बारे में।यह चुनौती इनकम टैक्स एक्ट की धारा 56(2)(x) के पांचवें...

कानूनी अधिकार के बिना डेवलपमेंट अथॉरिटी इम्पैक्ट फ़ीस और ओपन एरिया पेनल्टी नहीं लगा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि डेवलपमेंट अथॉरिटी 'इम्पैक्ट फ़ीस' या 'ओपन एरिया पेनल्टी' नहीं लगा सकती। कोर्ट ने माना कि उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 15(2-A) के तहत अथॉरिटी केवल डेवलपमेंट फ़ीस, म्यूटेशन चार्ज, स्टैकिंग फ़ीस और पानी की फ़ीस ही वसूल सकती है।इन दो तरह के शुल्क (लेवी) को लगाने के अधिकार पर नहीं, बल्कि उनकी गणना (कैलकुलेशन) की दर पर सवाल उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक अदालत द्वारा कानून की व्याख्या शुरुआत से ही लागू मानी जाती है। याचिकाकर्ता को इसके लाभ से...

गैर-स्थानीय प्रजाति के पेड़ लगाने पर रोक के बावजूद पौधरोपण जारी, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया, जिसमें 9 जनवरी 2026 के सरकारी परिपत्र के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर कोनोकार्पस प्रजाति के पेड़ लगाए जाने का आरोप लगाया गया। यह प्रजाति स्थानीय नहीं है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि सात कार्यदिवस के भीतर डाक खर्च जमा कराकर स्पीड पोस्ट के जरिए पावती सहित नोटिस भेजा जाए। मामले को चार सप्ताह बाद...

बिना सरकारी अनुमति दूसरा विवाह करने पर यूपी के सरकारी कर्मचारी को मिल सकती है बड़ी सजा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी अनुमति के बिना दूसरा विवाह करने वाले सरकारी कर्मचारी पर बड़ी अनुशासनात्मक सजा लगाई जा सकती है।उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम 29 के उपनियम (1) और (2) के उल्लंघन पर सजा तय करना नियुक्ति प्राधिकारी के विवेक पर निर्भर करता है। जस्टिस मनीष कुमार निगम ने स्पष्ट किया कि नियम 29 का उपनियम (3), जिसमें ऐसे मामले में तीन साल तक वेतनवृद्धि रोकने की न्यूनतम सजा का प्रावधान है, वर्ष 1976 में हटा दिया गया। इसके बाद इस उपनियम को दोबारा नियमावली में...

अंतरिम प्रबंधन समिति न नए सदस्य बना सकती, न पुराने सदस्यों को हटा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 के तहत गठित अंतरिम प्रबंधन समिति को सहकारी समिति में नए सदस्य शामिल करने या मौजूदा सदस्यों को हटाने का अधिकार नहीं है।यदि अंतरिम समिति ऐसा कोई प्रस्ताव पारित करती है, तो वह कानूनी रूप से अमान्य होगा। रजिस्ट्रार भी अधिनियम की धारा 128 के तहत ऐसे प्रस्ताव को प्रभावी नहीं कर सकता। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि अंतरिम प्रबंधन समिति का गठन समिति के रोजमर्रा के कामकाज को अस्थायी रूप से...

कैंसर पीड़ित दो माह के बच्चे के खून के लिए अस्पताल ने वसूले 9 हजार रुपये, आयुष्मान योजना से हटाने का फैसला बरकरार

ब्लड कैंसर से पीड़ित दो माह के बच्चे को चढ़ाए जाने वाले खून की दो यूनिट के लिए 9 हजार रुपये वसूलने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी अस्पताल को राहत देने से इनकार किया।अदालत ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पताल का पंजीकरण समाप्त करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा। योजना के तहत पात्र मरीजों को निर्धारित उपचार और सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने अस्पताल की ओर से दाखिल याचिका खारिज की।अस्पताल ने...