हाईकोर्ट

लिखित बयान में दिए गए बचाव को CPC ऑर्डर 7 नियम 11 के तहत शिकायत खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई ऐसा बचाव जो, अगर साबित हो जाए तो वादी के दावे को खारिज कर सकता है, उसे आम तौर पर सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर VII नियम 11(a) के तहत शिकायत खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि जांच केवल शिकायत में कही गई बातों पर निर्भर करती है और प्रतिवादी द्वारा अपने लिखित बयान में उठाए गए तर्क यह तय करने के लिए प्रासंगिक नहीं हैं कि शिकायत में कार्रवाई का कारण (cause of action) बताया गया है या नहीं।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा,“कार्रवाई...

पीड़िता की उम्र साबित नहीं हुई: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने POCSO के तहत 20 साल की सज़ा रद्द की; रेप के लिए 12 साल की सज़ा सुनाई

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO Act की धारा 4 के तहत सज़ा तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि पीड़िता की उम्र 18 साल से कम थी, भले ही IPC की धारा 376(1) के तहत रेप का अपराध अलग से साबित हो गया हो।जस्टिस माइकल ज़ोथानखुमा और जस्टिस शमीमा जहान की डिवीज़न बेंच ने कहा,"हमारा मानना ​​है कि भले ही POCSO Act, 2012 की धारा 4 के तहत सज़ा नहीं दी जा सकती - क्योंकि ट्रायल के दौरान पीड़िता की उम्र 18 साल से कम होना साबित नहीं हो पाया - लेकिन अपीलकर्ता द्वारा पीड़िता के साथ रेप की...

साफ़ तौर पर अवैध ढांचा: दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी स्कूल की ज़मीन पर अवैध रूप से बने मंदिर को हटाने का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी स्कूल के लिए तय ज़मीन पर बने मंदिर को रेगुलर करने की मांग वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि मंदिर बिना मंज़ूरी के और सरकारी ज़मीन के निपटारे से जुड़े नियमों के खिलाफ बनाया गया।जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि मंदिर "साफ़ तौर पर एक अवैध ढांचा" था और इसे उस ज़मीन पर बने रहने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।याचिकाकर्ता रजिस्टर्ड सोसाइटी है। उसने कोर्ट से DDA के 2021 का फैसला रद्द करने और वहां बने मंदिर को रेगुलर करने की मांग की थी।कोर्ट ने पाया कि यह ज़मीन मूल रूप से नर्सरी स्कूल...

जैसलमेर के रामदेवरा मंदिर में साफ़-सफ़ाई, हेल्थकेयर और कानून-व्यवस्था की देखरेख के लिए हाईकोर्ट ने बनाई कमेटी

राजस्थान हाईकोर्ट ने जैसलमेर के रामदेवरा मंदिर ट्रस्ट के साथ मिलकर काम करने के लिए कमेटी बनाई। यह कमेटी भक्तों के लिए साफ़-सफ़ाई, हेल्थकेयर और कानून-व्यवस्था की ज़रूरतों पर नज़र रखेगी और इस संबंध में बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाएँ तैयार करेगी।जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच एक PIL (जनहित याचिका) पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ खास महीनों में रोज़ाना आने वाले लगभग 2-3 लाख भक्तों के लिए उचित इंफ्रास्ट्रक्चर और साफ़-सफ़ाई व हेल्थकेयर जैसी...

साबित न हुए गलत व्यवहार के आधार पर पिछली बकाया सैलरी पूरी तरह से नहीं रोकी जा सकती, दिल्ली हाईकोर्ट ने 50% राहत दी

जस्टिस संजीव नरूला की दिल्ली हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि दिल्ली स्कूल एजुकेशन रूल्स, 1973 के नियम 121 के तहत, मैनेजिंग कमेटी के लिए यह ज़रूरी है कि वह नौकरी पर वापस बुलाए जाने पर पिछली बकाया सैलरी के बारे में सही और निष्पक्ष फैसला ले। वह बिना साबित हुए आरोपों या अनुमानों के आधार पर सैलरी देने से इनकार नहीं कर सकती।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता 'न्यू सरस्वती पब्लिक सेकेंडरी स्कूल' में असिस्टेंट टीचर थे। उनकी नियुक्ति मूल रूप से 15 अक्टूबर 1993 को हुई थी। उनकी सेवाएँ 16 अक्टूबर 2002 और 14 नवंबर 2002...

अगर तलाकशुदा पत्नी ने दोबारा शादी नहीं की तो वह गुज़ारा-भत्ता का दावा कर सकती है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि पति द्वारा हासिल किया गया तलाक का एकतरफ़ा आदेश (ex parte decree) अपने आप में उसकी पूर्व पत्नी का भरण-पोषण करने की कानूनी ज़िम्मेदारी को खत्म नहीं करता, बशर्ते पत्नी ने दोबारा शादी न की हो और वह अपना खर्च उठाने में असमर्थ हो।साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि एक अविवाहित बेटी, जो CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की याचिका दायर करने से पहले ही बालिग हो चुकी है और जिसे कोई शारीरिक या मानसिक अक्षमता नहीं है, वह इस प्रावधान के तहत भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती।जस्टिस उदय कुमार ने...

मुस्लिम व्यक्ति की दूसरी शादी अमान्य नहीं, IPC की धारा 494 के तहत दो शादियां करने का अपराध नहीं बनता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में पक्ष मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आते हैं, वहां किसी व्यक्ति की दूसरी शादी सिर्फ़ इसलिए "अमान्य" नहीं मानी जाएगी कि उसकी पहली शादी अभी भी कायम है। इसलिए IPC की धारा 494 के तहत बिगैमी का अपराध नहीं बनेगा।जस्टिस एन. तुकारामजी की सिंगल जज बेंच ने मुस्लिम व्यक्ति के खिलाफ बिगैमी की कार्यवाही रद्द की, क्योंकि उन्हें लगा कि IPC की धारा 494 के लिए ज़रूरी शर्तें पूरी नहीं हो रही थीं।कोर्ट ने कहा:"इसके अलावा, पक्षकारों पर लागू होने वाले पर्सनल लॉ से जुड़ा एक अलग और...

रेवेन्यू केस को खारिज करना और साथ ही रिमांड ऑर्डर रद्द करना, वादी को अपील के अधिकार से वंचित करता है: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने रेवेन्यू बोर्ड का आदेश रद्द करते हुए कहा कि अगर रिमांड ऑर्डर के खिलाफ अपील दायर की जाती है। साथ ही ऊपरी अदालत इस बात से संतुष्ट होती है कि आदेश सही या उचित नहीं था, तो मामले को नए सिरे से फैसला करने के लिए पहली अपीलीय अदालत में वापस भेजा (रिमांड) जा सकता है, लेकिन वादी के रेवेन्यू केस को खारिज नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि अगर केस खारिज करने वाले ऐसे आदेशों की अनुमति दी जाती है तो अपील करने वाले को पहली अपील के अधिकार का लाभ उठाने से वंचित कर...

झारखंड हाईकोर्ट ने 4 साल की बच्ची की अंतरिम कस्टडी मां को सौंपी, IVF प्रक्रिया से जुड़े दर्द और त्याग पर ध्यान दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि कस्टडी के मामलों में नाबालिग बच्चे का कल्याण और सर्वोत्तम हित सबसे महत्वपूर्ण बात होनी चाहिए। चार साल की बच्ची की अंतरिम कस्टडी उसकी माँ को सौंपते हुए कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि बच्ची का जन्म IVF के ज़रिए हुआ था और माँ ने "इससे जुड़े दर्द और त्याग" को सहा है।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की डिवीज़न बेंच हज़ारीबाग की फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। फैमिली कोर्ट ने 'गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट, 1890' की धारा 12 के तहत माँ...

परिवार की मर्ज़ी के बिना शादी करने वाली बालिग़ महिला को बयान के लिए यात्रा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकती पुलिस: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसी बालिग़ महिला को सिर्फ़ उसका बयान दर्ज करने के लिए ग़ाज़ीपुर की यात्रा करने के लिए मजबूर न करें, क्योंकि उसने परिवार की मर्ज़ी के बिना शादी करने के बाद अपनी जान और आज़ादी को ख़तरा होने की आशंका जताई थी। [2026 LiveLaw (MP) 364]याचिकाकर्ता को "पूछताछ/जांच में सहयोग करने" का निर्देश देते हुए जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने निर्देश दिया:"मौजूदा मामले के तथ्यों को देखते हुए याचिकाकर्ता ने साफ़ तौर पर आशंका जताई है कि अगर उसे ग़ाज़ीपुर...

पेमेंट में देरी के आधार पर मील की ज़रूरत से कम गन्ना आवंटित करना सही नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मील की अनुमानित ज़रूरत से कम गन्ना आवंटित करने के भेदभावपूर्ण फ़ैसले को कम गन्ना उठाने या गन्ना मूल्य के भुगतान में कथित देरी के आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब कम आवंटन के कारण ही कम गन्ना उठाया गया और मिल की भुगतान करने की क्षमता प्रभावित हुई।कोर्ट ने यह भी कहा कि गन्ना आवंटन करते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि सप्लाई किए गए गन्ने का केवल 60% ही अंततः पेराई के लिए उपलब्ध होता है, जबकि बाकी 40% चोरी और अन्य नुकसानों में चला जाता है।जस्टिस जे.जे....

पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करना और बिना वजह बार-बार मायके जाना क्रूरता: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पत्नी यह जानते हुए भी कि उसका पति अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है, उसे संयुक्त परिवार से अलग होकर अलग घर बसाने के लिए मजबूर करती है और बिना उचित कारण बार-बार मायके जाती है, तो यह पति के प्रति वैवाहिक क्रूरता (Cruelty) माना जा सकता है।जस्टिस पीटी आशा और जस्टिस एन. माला की पीठ ने इसी आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा पति को दिए गए तलाक के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पत्नी की अपील खारिज कर दी।क्या था मामला?पति-पत्नी की शादी जून 2019 में हुई थी। पति के...

यूपी पुलिसकर्मियों को राहत: सजा के खिलाफ पुनर्विचार में देरी माफ की जा सकती है, इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधीनस्थ रैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों को राहत देते हुए कहा कि विभागीय सजा के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने में हुई देरी को माफ किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों के अधीनस्थ रैंक के दंड एवं अपील नियम, 1991 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो परिसीमा अधिनियम, 1963 की धारा 5 के तहत देरी माफ करने की शक्ति को समाप्त करता हो।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि नियमों में न तो...

26 साल बाद भूमि आवंटन रद्द करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार के हक में बहाल की ज़मीन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 26 साल बाद कृषि भूमि का आवंटन रद्द किए जाने के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 198(4) के तहत इतने लंबे अंतराल के बाद शुरू की गई कार्यवाही कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने कहा कि जब आवंटी को बाद में हस्तांतरणीय अधिकारों वाला भूमिधर भी दर्ज किया जा चुका था, तब निजी शिकायत पर 26 साल बाद आवंटन रद्द करने की कार्यवाही नहीं की जा सकती।जस्टिस चंद्र कुमार राय ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संबंधित...

दिल्ली हाई कोर्ट ने GST रजिस्ट्रेशन के लिए पूरे देश में बायोमेट्रिक आधार वेरिफिकेशन का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने देश भर के GST अधिकारियों को आदेश दिया कि वे यह पक्का करें कि किसी भी नए GST रजिस्ट्रेशन को तब तक मंज़ूरी न दी जाए जब तक कि आवेदक बायोमेट्रिक आधारित आधार ऑथेंटिकेशन न करवा ले।जस्टिस अनिल झेत्रपाल और जस्टिस शैल जैन की डिवीज़न बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब अनजान लोगों के PAN और आधार विवरणों का गलत इस्तेमाल करके धोखाधड़ी से GST रजिस्ट्रेशन कराने की समस्या लगातार बनी हुई थी।कोर्ट ने राज्यसभा में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों का ज़िक्र किया। आंकड़ों के अनुसार...

चीफ जस्टिस पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सौरव दास के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई का इंतजार

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में CJP के प्रवक्ता सौरव दास के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि 20 अगस्त को 'X' पर किए गए उनके पोस्ट में हाईकोर्ट और तत्कालीन एक्टिंग चीफ जस्टिस, अब चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की निष्पक्षता, निष्ठा और अधिकार पर गंभीर सवाल उठाए गए।याचिकाकर्ता का आरोप है कि पोस्ट में महंगाई भत्ते के बकाये के भुगतान से जुड़े डिवीजन बेंच के फैसले को राजनीतिक मंशा से जोड़कर पेश किया गया और अदालत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। यह...

भारत में तलाक-ए-हसन वैध, असम के कानून के तहत कराना होगा रजिस्ट्रेशन: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि तलाक-ए-हसन भारत में फिलहाल वैध तलाक का एक रूप है और प्रतिबंधित नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि असम में इस तरह के तलाक का रजिस्ट्रेशन 2024 के असम अनिवार्य मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम के तहत संबंधित विवाह एवं तलाक रजिस्ट्रार के समक्ष कराया जा सकता है।जस्टिस अरुण देव चौधरी ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक पति ने बारपेटा के उप-पंजीयक-सह-विवाह एवं तलाक रजिस्ट्रार द्वारा तलाक-ए-हसन के पंजीकरण से इनकार किए जाने को चुनौती दी थी।पति का कहना...