हाईकोर्ट

पुलिस के पास हैंडराइटिंग, सिग्नेचर लेने की पावर CrPC की धारा 311-A से अलग: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने CBI जांच के खिलाफ रिवीजन खारिज की
पुलिस के पास हैंडराइटिंग, सिग्नेचर लेने की पावर CrPC की धारा 311-A से अलग: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने CBI जांच के खिलाफ रिवीजन खारिज की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती देने वाली क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन खारिज की, जिसमें कहा गया कि हैंडराइटिंग और सिग्नेचर लेने की पावर इन्वेस्टिगेशन पावर है और यह सिर्फ CrPC की धारा 311-A पर निर्भर नहीं है।कोर्ट ने साफ किया कि CrPC की धारा 311-A को सैंपल सिग्नेचर और हैंडराइटिंग लेने की पावर का अकेला सोर्स मानने से पुलिस की इन्वेस्टिगेशन अथॉरिटी बेवजह कम हो जाएगी।जस्टिस राकेश कैंथला ने कहा:“यह कहना कि CrPC की धारा 311A ही इन्वेस्टिगेशन के दौरान आरोपी से सिग्नेचर और हैंडराइटिंग...

Custodial Death | कैदी की आत्महत्या पर पूरी तरह से राज्य की ज़िम्मेदारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹10 लाख का मुआवज़ा दिया
Custodial Death | कैदी की आत्महत्या पर पूरी तरह से राज्य की ज़िम्मेदारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹10 लाख का मुआवज़ा दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में कहा कि राज्य अपनी कस्टडी में किसी कैदी की अप्राकृतिक मौत के लिए पूरी तरह से ज़िम्मेदार है, भले ही मौत साफ़ तौर पर अप्राकृतिक आत्महत्या हो।जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने फैसला सुनाया कि भारत के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत गारंटी वाला जीवन और इंसानी गरिमा का अधिकार एक अंदरूनी, अलंघनीय और हर जगह मौजूद अधिकार है, जो उस व्यक्ति को भी दिया जाता है जिसे राज्य ने गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार और हिरासत में लिया हो।इस तरह बेंच ने प्रेमा...

IPC की धारा 498A का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल इसके मकसद को कम करता है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पढ़ी-लिखी महिलाओं द्वारा कानून के गलत इस्तेमाल पर दुख जताया, FIR रद्द की
IPC की धारा 498A का बिना सोचे-समझे इस्तेमाल इसके मकसद को कम करता है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पढ़ी-लिखी महिलाओं द्वारा कानून के गलत इस्तेमाल पर दुख जताया, FIR रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदमी और उसके परिवार के खिलाफ फाइल की गई FIR रद्द करते हुए कहा कि "बहुत पढ़ी-लिखी" महिला शिकायतकर्ताओं द्वारा इंडियन पैनल कोड (IPC) की धारा 498A का "बिना सोचे-समझे" इस्तेमाल करना, सिर्फ धारा 498A के मकसद को कम करता है।सिंगल-जज जस्टिस प्रवीण पाटिल ने पढ़ी-लिखी महिलाओं द्वारा सिर्फ बदला लेने के लिए पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ धारा 498A के तहत FIR दर्ज कराने के "परेशान करने वाले पैटर्न" पर ध्यान दिया।जस्टिस पाटिल ने 20 फरवरी को दिए गए आदेश में कहा,"यह कोर्ट हाल के दिनों...

मजिस्ट्रेट विवादित मालिकाना हक के आधार पर कंडीशनल सीज़र का आदेश नहीं दे सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डकैती के मामले में सीज़र रद्द किया
मजिस्ट्रेट विवादित मालिकाना हक के आधार पर कंडीशनल सीज़र का आदेश नहीं दे सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डकैती के मामले में सीज़र रद्द किया

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने माना कि मजिस्ट्रेट CrPC की धारा 156(3) के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए विवादित टाइटल या मालिकाना हक के फैसले पर निर्भर कंडीशनल निर्देश जारी नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसे मामले ट्रायल या सिविल कार्यवाही के दायरे में आते हैं।जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा,"जांच के दौरान सीज़र करने की शक्ति जांच से जुड़े संबंधित प्रावधानों के तहत पुलिस के पास है। मजिस्ट्रेट CrPC की धारा 156(3) के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए टाइटल के फैसले पर निर्भर कंडीशनल निर्देश जारी...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आर्टिकल 22(5) के सेफगार्ड्स का उल्लंघन पर एक्टिविस्ट विक्टर दास की NSA डिटेंशन रद्द की
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आर्टिकल 22(5) के सेफगार्ड्स का उल्लंघन पर एक्टिविस्ट विक्टर दास की NSA डिटेंशन रद्द की

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 (NSA) के तहत विक्टर दास की प्रिवेंटिव डिटेंशन को यह कहते हुए रद्द किया कि आर्टिकल 22(5) के तहत संवैधानिक सेफगार्ड्स का उल्लंघन किया गया।जस्टिस कल्याण राय सुराणा और जस्टिस अंजन मोनी कलिता की डिवीजन बेंच ने 7 अक्टूबर, 2025 के डिटेंशन ऑर्डर, डिटेंशन के आधार और राज्य सरकार की मंज़ूरी रद्द की और निर्देश दिया कि अगर किसी और मामले में ज़रूरत न हो तो दास को तुरंत रिहा किया जाए।दास को असमिया सिंगर ज़ुबीन गर्ग की मौत के बाद हुई घटनाओं के बाद गुवाहाटी के...

पुजारी सिर्फ़ भगवान का सेवक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंदिर की प्रॉपर्टी पर पुजारी के मालिकाना हक का दावा किया खारिज
'पुजारी सिर्फ़ भगवान का सेवक': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंदिर की प्रॉपर्टी पर पुजारी के मालिकाना हक का दावा किया खारिज

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अशोकनगर ज़िले में मौजूद मंदिर गणेश जी के पुजारी का मंदिर से जुड़ी खेती की ज़मीन पर दावा खारिज किया।जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की बेंच ने कहा कि पुजारी सिर्फ़ भगवान का सेवक होता है और मंदिर की ज़मीन और उससे जुड़ी प्रॉपर्टी मंदिर के भगवान की होती हैं।कोर्ट ने कहा; "मैनेजर या पुजारी भगवान का सेवक होता है और मंदिर की प्रॉपर्टी भगवान की होती है, मैनेजर/पुजारी की नहीं। इसलिए भले ही वादी के पहले के लोगों को पुजारी या मैनेजर बनाया गया हो, फिर भी वादी मंदिर की प्रॉपर्टी को अपनी या...

अगर MRTP Act के तहत खरीद नोटिस के 24 महीने के अंदर अधिग्रहण के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो ज़मीन का रिज़र्वेशन खत्म हो जाता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
अगर MRTP Act के तहत खरीद नोटिस के 24 महीने के अंदर अधिग्रहण के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो ज़मीन का रिज़र्वेशन खत्म हो जाता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अगर महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एक्ट, 1966 (MRTP Act) की धारा 127(1) के तहत तय समय खत्म होने के बाद ज़मीन के अधिग्रहण के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो ज़मीन को ऐसे रिज़र्वेशन, अलॉटमेंट या डेज़िग्नेशन से मुक्त माना जाता है। कोर्ट ने कहा कि एक बार जब एक वैलिड खरीद नोटिस दिया जाता है और प्लानिंग अथॉरिटी चौबीस महीने के अंदर अधिग्रहण के लिए कदम नहीं उठाती है तो यह चूक कानूनी तौर पर काल्पनिक मानी जाती है और अथॉरिटी टेक्निकल ऑब्जेक्शन उठाकर ऐसे नतीजे को नहीं हरा...

घर के पास सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाइकोर्ट
घर के पास सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के घर के ठीक पास सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान होना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त गरिमापूर्ण जीवन और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि स्वस्थ जीवन का अभिन्न पहलू स्वच्छ और स्वच्छतापूर्ण वातावरण है। इसके अभाव में व्यक्ति के गरिमा के साथ जीने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।अदालत एडवोकेट रचित गुप्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनके घर की पूर्वी दीवार के साथ कथित रूप से अवैध रूप...

2026 CLAT-UG: संपूर्ण मेरिट सूची संशोधित करने के आदेश पर रोक, इलाहाबाद हाइकोर्ट की खंडपीठ का अंतरिम निर्णय
2026 CLAT-UG: संपूर्ण मेरिट सूची संशोधित करने के आदेश पर रोक, इलाहाबाद हाइकोर्ट की खंडपीठ का अंतरिम निर्णय

इलाहाबाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने 3 फरवरी को पारित एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों के संघ को CLAT-UG-2026 की संपूर्ण मेरिट सूची भविष्य की काउंसलिंग के लिए संशोधित करने का निर्देश दिया गया।जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश संघ द्वारा दायर विशेष अपील पर पारित किया। संघ ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी।मामले की पृष्ठभूमिएकलपीठ ने पाया था कि उच्चस्तरीय 'निगरानी समिति' ने एक विवादित प्रश्न के संबंध में विषय विशेषज्ञों की...

उचित समय में मकान न बनाने पर आवासीय पट्टा निरस्त कर सकता है कलेक्टर: इलाहाबाद हाइकोर्ट
उचित समय में मकान न बनाने पर आवासीय पट्टा निरस्त कर सकता है कलेक्टर: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कहा कि यदि आवंटित आवासीय भूखंड पर उचित समय के भीतर मकान का निर्माण नहीं किया जाता है तो कलेक्टर को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली 2016 के नियम 64(2)(ख) के तहत पट्टा निरस्त करने का अधिकार है, बशर्ते संबंधित पक्ष को पूर्व सूचना दी गई हो।जस्टिस आलोक माथुर ने कहा,“आवासीय भूखंडों के आवंटन संबंधी प्रावधानों को प्रभावी बनाने और उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि भूमि का उपयोग उचित समय के भीतर मकान निर्माण के लिए किया जाए। यदि किसी कारणवश पट्टाधारी मकान निर्माण...

पति के वेतन का विवरण व्यक्तिगत सूचना, पत्नी की RTI याचिका खारिज: राजस्थान हाइकोर्ट
पति के वेतन का विवरण व्यक्तिगत सूचना, पत्नी की RTI याचिका खारिज: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार का आदेश बरकरार रखा, जिसमें पत्नी द्वारा दायर सूचना अधिकार (RTI) आवेदन के तहत पति के वेतन संबंधी विवरण देने से इनकार किया गया था। अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी के वेतन और सेवा संबंधी विवरण व्यक्तिगत सूचना की श्रेणी में आते हैं।मामले में याचिकाकर्ता ने संबंधित विभाग में कार्यरत अपने पति के एक निश्चित अवधि के वेतन पर्ची और वेतन भुगतान का विवरण मांगा। राज्य ने यह कहते हुए सूचना देने से इनकार किया कि मांगी गई जानकारी व्यक्तिगत प्रकृति की है, जो एक तृतीय पक्ष से...

दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर मनी मिराज को जमानत: विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी पर सहमति के बाद हाईकोर्ट ने दी राहत
दुष्कर्म मामले में यूट्यूबर मनी मिराज को जमानत: विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी पर सहमति के बाद हाईकोर्ट ने दी राहत

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दुष्कर्म, मारपीट, अप्राकृतिक कृत्य और जबरन गर्भपात जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे यूट्यूबर और कॉमेडियन मनी मिराज उर्फ रमदी मिराज आलम को जमानत दी।यह आदेश जस्टिस गौतम चौधरी की पीठ ने पारित किया।सुनवाई के दौरान सूचनाकर्ता/पीड़िता स्वयं अदालत में उपस्थित हुईं और हस्तलिखित बयान प्रस्तुत कर दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते की पुष्टि की। अपने बयान में उन्होंने कहा कि आरोपी ने उनसे गुप्त रूप से विवाह किया, लेकिन सार्वजनिक रूप से विवाह करने से इनकार किया। अब दोनों ने विशेष विवाह...

मंदिर के पास 40 वर्ष पुरानी दुकान हटाने का नोटिस बरकरार, श्रद्धालुओं की आवाजाही में बाधा: राजस्थान हाइकोर्ट
मंदिर के पास 40 वर्ष पुरानी दुकान हटाने का नोटिस बरकरार, श्रद्धालुओं की आवाजाही में बाधा: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने श्री देवस्थान बोर्ड सिरोही द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, जिसमें श्री सारणेश्वर महादेव मंदिर के पास स्थित लगभग 40 वर्ष पुरानी दुकान को खाली करने के लिए कहा गया। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता मंदिर की भूमि पर अतिक्रमणकारी है।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कहा कि मंदिर की संपत्ति से अतिक्रमण हटाने के लिए बोर्ड को कार्यवाही शुरू करने का पूरा अधिकार है ताकि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।याचिकाकर्ता का कहना था...

पैतृक या विरासत में मिली संपत्ति भी धन शोधन कानून के तहत कुर्क हो सकती है: दिल्ली हाइकोर्ट
पैतृक या विरासत में मिली संपत्ति भी धन शोधन कानून के तहत कुर्क हो सकती है: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पैतृक या विरासत में मिली संपत्तियां भी धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (PMLA) के तहत कुर्क की जा सकती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में ऐसी संपत्तियों को कोई विशेष छूट नहीं दी गई।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडे़जा की खंडपीठ ने अरुण सूरी द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अपील में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पीतमपुरा स्थित एक आवासीय संपत्ति की कुर्की को चुनौती दी गई।यह अपील एक्ट की धारा 42 के तहत उस आदेश के विरुद्ध दायर की गई,...

गृहिणी निष्क्रिय नहीं, घरेलू योगदान के आर्थिक मूल्य को कानून में मान्यता मिलनी चाहिए: दिल्ली हाइकोर्ट
गृहिणी निष्क्रिय नहीं, घरेलू योगदान के आर्थिक मूल्य को कानून में मान्यता मिलनी चाहिए: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि गृहिणी को निष्क्रिय मानना घरेलू योगदान की गलत समझ को दर्शाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि घरेलू संबंधों में पत्नी के योगदान के आर्थिक मूल्य को कानून में मान्यता दी जानी चाहिए।जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने कहा,“गृहिणी 'निष्क्रिय नहीं बैठती; वह ऐसा श्रम करती है, जिससे कमाने वाला जीवनसाथी प्रभावी ढंग से काम कर सके। भरण-पोषण के दावों का निर्णय करते समय इस योगदान की अनदेखी करना अवास्तविक और अन्यायपूर्ण होगा।”अदालत ने आगे कहा,“कानून को केवल आय को ही...

लघु दंड के बाद जांच अवधि लागू करना अवैध, कर्मचारी को पदोन्नति पर विचार का अधिकार: मद्रास हाइकोर्ट
लघु दंड के बाद जांच अवधि लागू करना अवैध, कर्मचारी को पदोन्नति पर विचार का अधिकार: मद्रास हाइकोर्ट

मद्रास हाइकोर्ट की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि लघु दंड की अवधि समाप्त होने के बाद पदोन्नति रोके रखने के लिए तथाकथित जांच अवधि लागू करना अवैध है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड समाप्त होने के बाद कर्मचारी के पदोन्नति पर विचार से उसे वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस सी. वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. विजयकुमार की खंडपीठ ने विभाग द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।मामले की पृष्ठभूमिसंबंधित कर्मचारी विद्यालय शिक्षा विभाग में कार्यरत था। उसके विरुद्ध आरोपपत्र जारी...

जिस विषय में पुनर्मूल्यांकन का आवेदन नहीं, उसमें अंक घटाना गलत: गुवाहाटी हाइकोर्ट
जिस विषय में पुनर्मूल्यांकन का आवेदन नहीं, उसमें अंक घटाना गलत: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस विषय में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं किया गया हो, उस विषय के अंकों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कोई बदलाव नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि किसी विषय के पुनर्मूल्यांकन के दौरान दूसरे विषय के पहले से दिए गए अंक घटाना नियमों के विपरीत है।जस्टिस नेल्सन सैलो की पीठ ने कहा,“जब याचिकाकर्ता के पुत्र ने निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल विज्ञान विषय में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया तो यह समझ से परे है कि उस पुनर्मूल्यांकन के दौरान गणित विषय के अंक...

लोकतांत्रिक सीमाएं लांघने पर ही पुलिस खर्च की वसूली: राजस्थान हाइकोर्ट
लोकतांत्रिक सीमाएं लांघने पर ही पुलिस खर्च की वसूली: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से किए गए विरोध-प्रदर्शन पर सामान्यतः पुलिस बल की तैनाती का खर्च नहीं वसूला जा सकता लेकिन यदि प्रदर्शनकारी लोकतांत्रिक सीमाओं का उल्लंघन करते हैं तो अतिरिक्त खर्च की वसूली की जा सकती है।यह टिप्पणी जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने उस मामले की सुनवाई के दौरान की जिसमें एक प्रदर्शन के दौरान एक याचिकाकर्ता के पानी की ऊँची टंकी पर चढ़ जाने के कारण अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा था और उसके खर्च की वसूली का प्रश्न उठा...

परिवार की मर्ज़ी के खिलाफ़ लव रिलेशनशिप को रोकने के लिए हमला करना पब्लिक ऑर्डर के खिलाफ़ नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रिवेंटिव डिटेंशन रद्द किया
परिवार की मर्ज़ी के खिलाफ़ लव रिलेशनशिप को रोकने के लिए हमला करना 'पब्लिक ऑर्डर' के खिलाफ़ नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रिवेंटिव डिटेंशन रद्द किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में यह फैसला सुनाया कि लड़की के परिवार को एतराज़ होने पर भी किसी लड़के को लव रिलेशनशिप जारी रखने से रोकने के लिए उस पर हमला करना 'व्यक्तिगत' काम है। इसे 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' कानूनों के तहत किसी व्यक्ति को हिरासत में लेना 'पब्लिक ऑर्डर' के खिलाफ़ नहीं माना जा सकता।कोल्हापुर सर्किट सीट पर बैठे जस्टिस रवींद्र अवचट और जस्टिस अजीत कडेथंकर की डिवीजन बेंच ने सोलापुर के रहने वाले आदित्य माने के खिलाफ़ पास किए गए प्रिवेंटिव डिटेंशन ऑर्डर रद्द किया।बेंच ने कहा कि माने...

जाति व्यवस्था पर मद्रास हाईकोर्ट का अहम आदेश- राज्य द्वारा आयोजित मंदिर उत्सवों में जाति को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए
जाति व्यवस्था पर मद्रास हाईकोर्ट का अहम आदेश- राज्य द्वारा आयोजित मंदिर उत्सवों में जाति को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि हिंदू धार्मिक और चैरिटेबल एंडोमेंट डिपार्टमेंट के ज़रिए राज्य द्वारा आयोजित मंदिर उत्सव जाति को बनाए नहीं रख सकते।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि भारत के रिपब्लिक बनने का मकसद सभी के साथ एक जैसा व्यवहार करना था। कोर्ट ने आगे कहा कि देश में हर अथॉरिटी की कोशिश जाति को खत्म करने की होनी चाहिए, न कि उसे बनाए रखने की। इस तरह कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा आयोजित मंदिर उत्सव को इनविटेशन में जाति के नामों का इस्तेमाल करके जाति को बनाए रखने की इजाज़त नहीं दी जा...