हाईकोर्ट

सिर्फ शराब की गंध से नशे में गाड़ी चलाना साबित नहीं होता, रक्त या ब्रेथ एनालाइज़र जांच जरूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट
सिर्फ शराब की गंध से नशे में गाड़ी चलाना साबित नहीं होता, रक्त या ब्रेथ एनालाइज़र जांच जरूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी चालक के मुंह से केवल शराब की गंध आने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि वह नशे की हालत में वाहन चला रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि रक्त जांच या ब्रेथ एनालाइज़र जांच के जरिए यह साबित होना आवश्यक है कि शरीर में शराब की मात्रा मोटर वाहन अधिनियम, 1988 में निर्धारित सीमा से अधिक थी। ऐसी वैज्ञानिक जांच के अभाव में केवल शराब की गंध के आधार पर नशे में वाहन चलाने का आरोप या भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत आरोप तय नहीं किया जा सकता।यह...

धर्म के नाम पर नदियों को प्रदूषित करने का अधिकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
धर्म के नाम पर नदियों को प्रदूषित करने का अधिकार नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर किसी भी व्यक्ति को जल स्रोतों को प्रदूषित करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता जनस्वास्थ्य के अधीन है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर धार्मिक अधिकारों का प्रयोग नहीं किया जा सकता।जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस बी. पुगालेंधी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी तमिराबरानी नदी में श्राद्ध कर्म के दौरान बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य सामग्री फेंके जाने पर चिंता जताते हुए की। अदालत ने कहा कि तमिलनाडु...

पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं कहना बेतुका, अगर आप भारत में रह रहे हैं तो यह माना जाता है कि आप भारतीय हैं: जस्टिस धूलिया
'पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं' कहना बेतुका, अगर आप भारत में रह रहे हैं तो यह माना जाता है कि आप भारतीय हैं: जस्टिस धूलिया

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, जस्टिस सुधांशु धूलिया ने वोटर रोल के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में गंभीर सवाल उठाए और नागरिकता के डॉक्यूमेंटेशन और लोकल चुनाव अधिकारियों को मिली ताकत के आसपास की "बाहर निकालने वाली पॉलिटिक्स" पर चिंता जताई।"दिल से विद कपिल सिब्बल" एपिसोड में बोलते हुए, जस्टिस धूलिया ने तर्क दिया कि मौजूदा प्रोसेस नागरिकों पर सबूत का गलत बोझ डालता है, जिससे वोट देने का मौलिक अधिकार खतरे में पड़ता है। उनकी यह टिप्पणी इस गरमागरम बहस के बीच आई है कि क्या पासपोर्ट नागरिकता...

संशोधन की अर्ज़ी खारिज होने पर भी पार्टी मौजूदा दलीलों के आधार पर कानूनी तर्क दे सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
संशोधन की अर्ज़ी खारिज होने पर भी पार्टी मौजूदा दलीलों के आधार पर कानूनी तर्क दे सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर VI नियम 17 के तहत दलीलों (pleadings) में संशोधन की अर्ज़ी खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि कोई पार्टी अंतिम सुनवाई के चरण में पहले से रिकॉर्ड पर मौजूद दलीलों से उत्पन्न कानूनी सवालों को नहीं उठा सकती।कोर्ट ने कहा कि अगर प्रस्तावित संशोधन केवल उन कानूनी दलीलों को दोहराता है, जो पहले से ही दलीलों और अपील के मेमोरेंडम से स्पष्ट हैं, तो उसे खारिज करने से कोई कानूनी नुकसान नहीं होता है।CPC का ऑर्डर VI नियम 17 कोर्ट को दलीलों में संशोधन...

पुलिस शायद आरोपी को रिहाई दिलाने में मदद करने के लिए गिरफ्तारी की प्रक्रिया को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है- एमपी हाईकोर्ट
पुलिस शायद आरोपी को रिहाई दिलाने में मदद करने के लिए गिरफ्तारी की प्रक्रिया को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है- एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वह सभी जांच अधिकारियों के लिए एक सर्कुलर जारी करें। इसमें उन्हें पंकज बंसल मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस और BNSS की धारा 47 की ज़रूरतों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी जाए। इन नियमों के तहत गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना ज़रूरी है।जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीज़न बेंच ने आगे कहा कि नियमों का पालन न करने से यह धारणा बनेगी कि आरोपी को लिखित आधार जानबूझकर नहीं दिए गए। ऐसा बुरी नीयत से किया...

जहां आर्बिट्रेशन क्लॉज़ मौजूद हो, वहां विवादित तथ्यों वाले कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
जहां आर्बिट्रेशन क्लॉज़ मौजूद हो, वहां विवादित तथ्यों वाले कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े मामलों में रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 226 के तहत रिट याचिका ऐसे कॉन्ट्रैक्ट विवाद में स्वीकार्य नहीं है, जहां विवाद में तथ्यों से जुड़े सवाल शामिल हों और एग्रीमेंट के तहत पीड़ित पक्ष के पास आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) का उपाय उपलब्ध हो।कोर्ट ने मछली पकड़ने के लीज़ को खत्म करने और सिक्योरिटी ज़ब्त करने के खिलाफ चुनौती पर सुनवाई करने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि लीज़ वाली जगह और कॉन्ट्रैक्ट के तहत बकाया रकम पर विरोधी दावों का समाधान तभी हो सकता है, जब पार्टियाँ तय फोरम के सामने सबूत पेश...

सही बोली लगाने वाले को हटाने पर तुले: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे को फटकार लगाई, कोंकण रेलवे की बोली खारिज करने का फैसला रद्द किया
'सही बोली लगाने वाले को हटाने पर तुले': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे को फटकार लगाई, कोंकण रेलवे की बोली खारिज करने का फैसला रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ्ते नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे (NER) अधिकारियों के 'मनमाने' और "बदनीयती भरे" कामों पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने एक सरकारी सहयोगी कंपनी, कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KRCL) की फाइनेंशियल बोली को बार-बार कमजोर आधारों पर खारिज किया।NER के कामों को "परेशान करने जैसा" बताते हुए जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने 8 जून, 2026 का पत्र रद्द किया, जिसमें बैंक गारंटी में लाभार्थी का नाम गलत होने की बात कहकर KRCL की बोली खारिज कर दी गई।कोर्ट ने...

पहले पति को तलाक दिए बिन शादी करने वाले दूसरे पुरुष से महिला भरण-पोषण कर सकती है? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया जवाब
पहले पति को तलाक दिए बिन शादी करने वाले दूसरे 'पुरुष' से महिला भरण-पोषण कर सकती है? इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि अगर कोई महिला अपने पहले पति को तलाक दिए बिना किसी पुरुष के साथ रहने लगती है, तो उसे "कानूनी रूप से विवाहित पत्नी" नहीं माना जाएगा, इसलिए वह CrPC की धारा 125 के तहत अपने साथी से गुज़ारा-भत्ता पाने की हकदार नहीं है।जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें महिला को उसके साथी (जिससे उसने कथित तौर पर पहले पति से तलाक लिए बिना शादी की थी) से गुज़ारा-भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।हालांकि, सिंगल जज ने उनकी नाबालिग बेटी को दिए गए...

Sunday Sitting | 150 साल पुराने मेथोडिस्ट स्कूल पर गिराए जाने का खतरा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित नज़ूल ज़मीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया
Sunday Sitting | 150 साल पुराने मेथोडिस्ट स्कूल पर गिराए जाने का खतरा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित 'नज़ूल' ज़मीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया

रविवार को बुलाई गई विशेष सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने विवादित ज़मीन के मामले में दखल देते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। यह ज़मीन कथित तौर पर एक ऐसे शिक्षण संस्थान की, जो 150 से ज़्यादा सालों से चल रहा है, लेकिन अब उस पर "गिराए जाने का खतरा" मंडरा रहा है।सीतापुर के सिविल लाइन्स स्थित मेथोडिस्ट मिशन गर्ल्स जूनियर हाई स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने राज्य सरकार के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे विवादित संपत्ति का...

एलिबी की दलील को ट्रायल के दौरान साबित करना ज़रूरी; IO इसे सच मानकर अकेले ही फ़ाइनल रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाकोर्ट
'एलिबी की दलील' को ट्रायल के दौरान साबित करना ज़रूरी; IO इसे सच मानकर अकेले ही फ़ाइनल रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाकोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि किसी आरोपी की "एलिबी की दलील" (यानी घटना के समय कहीं और होने का दावा) को आपराधिक ट्रायल के दौरान सबूत पेश करके साबित करना ज़रूरी है। इन्वेस्टिगेटिंग ऑफ़िसर (IO) इसे सच मानकर अकेले ही फ़ाइनल रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सकता।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने कहा कि अगर IO उन गवाहों के बयानों के आधार पर फ़ाइनल रिपोर्ट दाखिल करता है, जो आरोपियों की एलिबी की दलील का समर्थन करते हैं तो यह "बहुत बड़ी गैर-कानूनी बात" होगी।कोर्ट ने ये बातें तब कहीं जब उसने दो आरोपियों...

गिरफ़्तारी के लिखित आधार बताने के लिए कोई तय फ़ॉर्मेट नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS के आरोपी की कस्टडी बरकरार रखी
गिरफ़्तारी के लिखित आधार बताने के लिए कोई तय फ़ॉर्मेट नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS के आरोपी की कस्टडी बरकरार रखी

दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत आरोपी व्यक्ति की ज़मानत याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि गिरफ़्तारी के लिखित आधार बताने के लिए कानून या अदालत द्वारा कोई तय फ़ॉर्मेट नहीं बनाया गया और इस मामले के तथ्यों को देखते हुए संवैधानिक ज़रूरतों का काफ़ी हद तक पालन करना ही काफ़ी है।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा तैयार किए गए अरेस्ट मेमो (गिरफ़्तारी के दस्तावेज़) से कानूनी स्थिति की "सही समझ" झलकती है। इसमें कोई कमी होने मात्र से आरोपी को रिहाई का हक नहीं मिल जाता।बेंच ने यह टिप्पणी...

S.8 Evidence Act | झूठी NCR से लेकर फरार होने तक: पत्नी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति के आचरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया विचार
S.8 Evidence Act | झूठी NCR से लेकर फरार होने तक: पत्नी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति के 'आचरण' पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया विचार

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने बुधवार को पत्नी की हत्या के दोषी व्यक्ति की उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी। कोर्ट ने उसके धोखेबाज़ कामों—जैसे झूठा भरोसा दिलाना, झूठी पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराना और अंत में फरार हो जाना—को भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 8 के तहत "प्रासंगिक आचरण" माना।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने दोषी (पवन कुमार) की जेल अपील खारिज की। उसने हरदोई सेशंस कोर्ट के 2016 के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उसे IPC की धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराया...

मेडिकल सबूत से पुष्टि न होने पर भी पीड़िता की विश्वसनीय गवाही बलात्कार में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त:इलाहाबाद हाईकोर्ट
मेडिकल सबूत से पुष्टि न होने पर भी पीड़िता की विश्वसनीय गवाही बलात्कार में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त:इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलादाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के एक बलात्कार मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए कहा है कि यदि पीड़िता (Prosecutrix) की गवाही विश्वसनीय, सुसंगत और किसी मूलभूत खामी से मुक्त हो, तो केवल इस आधार पर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती कि मेडिकल साक्ष्य अभियोजन के मामले की पूरी तरह पुष्टि नहीं करते।जस्टिस संजीव कुमार की पीठ ने वीर सिंह द्वारा दायर आपराधिक अपील खारिज करते हुए कहा कि बलात्कार कोई चिकित्सीय स्थिति नहीं, बल्कि एक कानूनी अपराध है।...

यूपी से जुड़े पासपोर्ट विवाद को सिर्फ़ इसलिए दिल्ली में दायर नहीं किया जा सकता, क्योंकि विदेश मंत्रालय यहाँ स्थित है: दिल्ली हाईकोर्ट
यूपी से जुड़े पासपोर्ट विवाद को सिर्फ़ इसलिए दिल्ली में दायर नहीं किया जा सकता, क्योंकि विदेश मंत्रालय यहाँ स्थित है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट से जुड़ा कोई विवाद सिर्फ़ इसलिए उसके सामने नहीं लाया जा सकता, क्योंकि विदेश मंत्रालय (MEA) राष्ट्रीय राजधानी में स्थित है। [2026 LiveLaw (Del) 645]जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन) इस बात पर निर्भर करता है कि क्या विवाद का कोई हिस्सा कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में उत्पन्न हुआ।इस तरह बेंच ने याचिकाकर्ता की याचिका खारिज की, जिसमें पासपोर्ट में जन्म तिथि को ठीक करने और "उत्प्रवास...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाटा प्रोजेक्ट्स का ₹940 करोड़ का हाईवे कॉन्ट्रैक्ट बहाल किया, कहा- NHAI का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का फैसला पहले से तय
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टाटा प्रोजेक्ट्स का ₹940 करोड़ का हाईवे कॉन्ट्रैक्ट बहाल किया, कहा- NHAI का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का फैसला 'पहले से तय'

टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI), जो संविधान के आर्टिकल 12 के तहत "राज्य" (State) है, मनमाने ढंग से हाईवे बनाने का कॉन्ट्रैक्ट बीच में ही खत्म नहीं कर सकती और न ही देरी के लिए कॉन्ट्रैक्टर को जिम्मेदार ठहरा सकती है, जब देरी खुद अथॉरिटी की गलती से हुई हो—जैसे कि कॉन्ट्रैक्ट के तहत बिना किसी रुकावट वाली ज़मीन और साफ़ रास्ता (clear right of way) न सौंप पाना।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी ने कहा,"इस मामले में...

स्वास्तिक की जगह ✓ निशान वाले मतपत्र को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
स्वास्तिक की जगह ✓ निशान वाले मतपत्र को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी मतदाता का इरादा स्पष्ट रूप से व्यक्त हो रहा है, तो केवल इस आधार पर मतपत्र को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता कि उस पर निर्धारित 'स्वास्तिक' चिन्ह के बजाय ✓ (टिक मार्क) लगाया गया है। अदालत ने कहा कि जब तक किसी नियम या उपनियम में स्पष्ट रूप से यह न कहा गया हो कि केवल स्वास्तिक चिन्ह ही मान्य होगा, तब तक ऐसे मतपत्र को खारिज करना उचित नहीं है।जस्टिस एन. तुकारामजी ने बोधन बार एसोसिएशन के महासचिव (2026-27) के चुनाव से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत ने विवादित...

पति-पत्नी की तरह साथ रहने पर वैध विवाह का कड़ा सबूत मांगकर भरण-पोषण से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पति-पत्नी की तरह साथ रहने पर वैध विवाह का कड़ा सबूत मांगकर भरण-पोषण से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे हों और उनका वैवाहिक संबंध अन्य परिस्थितियों से स्थापित होता हो, तो भरण-पोषण (Maintenance) के दावे को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वैध विवाह का सख्त दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।जस्टिस अचल सचदेव ने यह टिप्पणी महाराजगंज फैमिली कोर्ट के उस आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए की, जिसमें महिला की भरण-पोषण याचिका केवल इसलिए खारिज कर दी गई थी क्योंकि वह स्वयं को विधिक रूप से विवाहित...

प्राचार्य पर अभद्र व्यवहार और शिकायत निवारण समिति नहीं होने के आरोप: राजस्थान हाईकोर्ट ने लॉ कॉलेज और प्राचार्य को जारी किया नोटिस
प्राचार्य पर अभद्र व्यवहार और शिकायत निवारण समिति नहीं होने के आरोप: राजस्थान हाईकोर्ट ने लॉ कॉलेज और प्राचार्य को जारी किया नोटिस

राजस्थान हाईकोर्ट ने लॉ स्टूडेंट की याचिका पर सुनवाई करते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी से संबद्ध एस.एस. जैन सुबोध लॉ कॉलेज और उसके प्राचार्य को नोटिस जारी किया। याचिका में प्राचार्य पर स्टूडेंट के साथ अभद्र व्यवहार करने और कॉलेज में अनिवार्य छात्र शिकायत निवारण समिति के कार्यरत नहीं होने का आरोप लगाया गया।जस्टिस शुभा मेहता की पीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।याचिका के अनुसार, स्टूडेंट का आरोप है कि उसे दीक्षांत समारोह की सूचना नहीं दी गई और न ही...

भगवा रंग में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त आतंकवादी वाली फेसबुक पोस्ट मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक
भगवा रंग में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त आतंकवादी' वाली फेसबुक पोस्ट मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेसबुक पर कथित रूप से सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट साझा करने के आरोपी एक व्यक्ति की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई। आरोपी का दावा है कि संबंधित पोस्ट उसने नहीं की थी, बल्कि उसका सोशल मीडिया खाता हैक कर लिया गया था।जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता मुशाहिद गड़ा को अंतरिम राहत देते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया।मामला सहारनपुर में पिछले वर्ष जुलाई में दर्ज FIR से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा...

जीवनसाथी की बातचीत बिना अनुमति रिकॉर्ड करना निजता के अधिकार का उल्लंघन, तलाक के मुकदमे में सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट
जीवनसाथी की बातचीत बिना अनुमति रिकॉर्ड करना निजता के अधिकार का उल्लंघन, तलाक के मुकदमे में सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि पति या पत्नी की टेलीफोन पर हुई बातचीत को उनकी अनुमति के बिना गुप्त रूप से रिकॉर्ड करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे कॉल रिकॉर्डिंग को वैवाहिक विवाद या तलाक के मुकदमे में साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस नामावरापु राजेश्वर राव ने दो दीवानी पुनरीक्षण याचिकाएं खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।अदालत ने कहा,"पक्षकारों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग के संबंध में निचली अदालत का यह निष्कर्ष सही है कि दूसरे...