हाईकोर्ट

विदेश में भविष्य के इलाज की अनदेखी नहीं की जा सकती: मोटर दुर्घटना मुआवज़े में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ₹9.16 करोड़ दिए
विदेश में भविष्य के इलाज की अनदेखी नहीं की जा सकती: मोटर दुर्घटना मुआवज़े में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ₹9.16 करोड़ दिए

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मोटर दुर्घटना पीड़ित को दी गई मुआवज़ा राशि को ₹52 लाख से बढ़ाकर ₹9.16 करोड़ कर दिया है। अदालत ने कहा कि दावा करने वाले को 100% स्थायी कार्यात्मक विकलांगता हुई है और उसके भविष्य के चिकित्सीय उपचार की अनदेखी नहीं की जा सकती।कोर्ट ने इसके अतिरिक्त अमेरिका में उन्नत चिकित्सा उपचार के लिए ₹6 करोड़ का मुआवज़ा भी मंजूर किया।जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा:“अपीलकर्ता/दावेदार पिछले दो दशकों से इस दुर्घटना के परिणाम भुगत रहा है—लगातार दर्द, बार-बार चिकित्सा हस्तक्षेप और अपने...

यात्रियों की सुरक्षा से सीधा संबंध: पायलटों के विश्राम मानदंड लागू करने की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने DGCA से मांगा पक्ष
'यात्रियों की सुरक्षा से सीधा संबंध': पायलटों के विश्राम मानदंड लागू करने की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने DGCA से मांगा पक्ष

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी) को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से उस याचिका पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा, जिसमें फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को स्थगित (abeyance) में रखने के DGCA के फैसले को चुनौती दी गई है। ये नियम पायलटों और फ्लाइट क्रू के लिए न्यूनतम विश्राम समय निर्धारित करते हैं, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।याचिका में कहा गया है कि ये नियम पायलटों की थकान (fatigue management) को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। हालांकि, इंडिगो से जुड़े...

समान साक्ष्य पर सह-आरोपियों के बरी होने पर NDPS Act की धारा 37 की बाधा हटेगी: गुवाहाटी हाइकोर्ट
समान साक्ष्य पर सह-आरोपियों के बरी होने पर NDPS Act की धारा 37 की बाधा हटेगी: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने NDPS Act के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि यदि उसी मामले में समान साक्ष्य के आधार पर सह-आरोपी बरी हो चुके हों और उन बरी होने के निष्कर्षों को अपील में चुनौती नहीं दी गई हो तो जमानत पर विचार करते समय अदालत को उन निष्कर्षों को वैध मानकर चलना होगा। ऐसे में NDPS Act की धारा 37 के तहत लगाई गई सख्त शर्तें भी संतुष्ट मानी जाएंगी।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि जब तक सह-आरोपियों के बरी होने के निष्कर्ष अपील में पलटे नहीं जाते तब तक जमानत याचिका पर...

भर्ती विज्ञापन में शर्त न होने पर पीजी अतिरिक्त पंजीयन के आधार पर डॉक्टरों को नहीं कर सकता खारिज: मध्यप्रदेश हाइकोर्ट
भर्ती विज्ञापन में शर्त न होने पर पीजी अतिरिक्त पंजीयन के आधार पर डॉक्टरों को नहीं कर सकता खारिज: मध्यप्रदेश हाइकोर्ट

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने मेडिकल ऑफिसर (ग्रेड-I) और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी खारिज किए जाने को असंवैधानिक करार देते हुए स्पष्ट किया कि भर्ती विज्ञापन में उल्लेख न की गई किसी अतिरिक्त योग्यता के आधार पर उम्मीदवारों को बाहर नहीं किया जा सकता।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकल पीठ ने मंगलवार को डॉक्टरों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह को स्वीकार करते हुए कहा कि दस्तावेज़ सत्यापन या अस्थायी परिणाम घोषित होने के बाद किसी नई योग्यता की...

पूर्वक्रय का अधिकार अत्यंत कमजोर बिना दावा किए निषेधाज्ञा वाद दायर करना अधिकार का परित्याग माना जाएगा: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट
पूर्वक्रय का अधिकार अत्यंत कमजोर बिना दावा किए निषेधाज्ञा वाद दायर करना अधिकार का परित्याग माना जाएगा: जम्मू-कश्मीर हाइकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्वक्रय (प्री-एम्पशन) का अधिकार एक अत्यंत कमजोर अधिकार है, जिसे खरीदार विधिसम्मत तरीकों से विफल कर सकता है और जिसे पूर्वक्रेता अपने आचरण के माध्यम से भी त्याग सकता है।हाइकोर्ट ने वर्ष 2001 में जिला जज, पुंछ द्वारा पारित उस निर्णय और डिक्री को निरस्त कर दिया, जिसमें वादी के पक्ष में पूर्वक्रय अधिकार लागू करते हुए संपत्ति का कब्जा 40,000 के भुगतान पर सौंपने का आदेश दिया गया।जस्टिस संजय धर ने कहा कि यदि कोई पूर्वक्रेता बिक्री की जानकारी होने के...

BNSS के तहत मानसिक अस्वस्थता की याचिका पर फैसला किए बिना ट्रायल आगे नहीं बढ़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
BNSS के तहत मानसिक अस्वस्थता की याचिका पर फैसला किए बिना ट्रायल आगे नहीं बढ़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें BNSS की धारा 368 के तहत दायर आवेदन पर बिना किसी तर्कपूर्ण फैसले के सिर्फ मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ट्रायल जारी रखने का निर्देश दिया गया, जिसमें याचिकाकर्ता को स्वस्थ दिमाग का बताया गया।BNSS की धारा 368 मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के ट्रायल की प्रक्रिया बताता है।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच ने कहा कि ट्रायल शुरू करने से पहले, ट्रायल कोर्ट को BNSS की धारा 368 के तहत आवेदन पर फैसला करना अनिवार्य है। इसलिए चुनौती दिए गए आदेश को रद्द...

अनुच्छेद 226 के तहत रिट कोर्ट निर्णय की प्रक्रिया देखता है, गुण-दोष नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट
अनुच्छेद 226 के तहत रिट कोर्ट निर्णय की प्रक्रिया देखता है, गुण-दोष नहीं: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की उचित मूल्य दुकान का लाइसेंस रद्द किए जाने के मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र में अदालत केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया की जांच करती है, न कि निर्णय के गुण-दोष का मूल्यांकन।जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत सर्टियोरारी अधिकार का प्रयोग केवल यह देखने तक सीमित है कि क्या निर्णय लेते समय प्रासंगिक तथ्यों पर विचार किया गया या नहीं, अथवा क्या निर्णय किसी...

वर्किंग सेटर्डे के विरोध में वकीलों की हड़ताल पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त, कहा- अदालतों का बहिष्कार अनुच्छेद 21 के तहत वादकारियों के अधिकारों का उल्लंघन
वर्किंग सेटर्डे के विरोध में वकीलों की हड़ताल पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त, कहा- अदालतों का बहिष्कार अनुच्छेद 21 के तहत वादकारियों के अधिकारों का उल्लंघन

राजस्थान हाइकोर्ट ने प्रत्येक माह दो शनिवार कार्यदिवस घोषित किए जाने के फैसले के विरोध में वकीलों द्वारा की जा रही हड़ताल पर कड़ी नाराज़गी जताई। हाइकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि वकीलों को हड़ताल का कोई अधिकार नहीं है, विशेष रूप से तब, जब मामला नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा हो।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की एकलपीठ ने कहा कि जब वकील अदालतों का बहिष्कार करते हैं तो इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत वादकारियों को प्राप्त त्वरित न्याय के अधिकार का सीधा उल्लंघन होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विरोध का...

इंदौर जल प्रदूषण मामला: हाइकोर्ट ने गठित किया रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच आयोग
इंदौर जल प्रदूषण मामला: हाइकोर्ट ने गठित किया रिटायर जज की अध्यक्षता में जांच आयोग

इंदौर में हाल ही में सामने आए गंभीर जल संकट और दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। हाइकोर्ट ने भागीरथपुरा क्षेत्र में जल प्रदूषण और उसके इंदौर शहर के अन्य इलाकों पर पड़े प्रभाव की जांच के लिए रिटायर जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने कहा कि लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं। यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार...

दिल्ली हाईकोर्ट अप्रैल में यासीन मलिक के लिए मौत की सज़ा मांगने वाली NIA की याचिका पर करेगा सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट अप्रैल में यासीन मलिक के लिए मौत की सज़ा मांगने वाली NIA की याचिका पर करेगा सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी) को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक के जवाब पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। NIA ने एक टेरर फंडिंग मामले में मलिक के लिए मौत की सज़ा की अपील की है।सुनवाई के दौरान, NIA की ओर से पेश हुए SPP अक्षय मलिक ने जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच के सामने यासीन मलिक के जवाब पर एजेंसी का जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय मांगा और कहा कि यह जांच के लिए भेजा गया।इस अनुरोध का विरोध करते हुए यासीन मलिक ने...

सीमा-रेखा पार करना: नॉमिनेशन फी बढ़ोतरी पर सवाल उठाने के लिए हाई कोर्ट जज के खिलाफ BCI चेयरमैन का पत्र अनुचित
सीमा-रेखा पार करना: नॉमिनेशन फी बढ़ोतरी पर सवाल उठाने के लिए हाई कोर्ट जज के खिलाफ BCI चेयरमैन का पत्र अनुचित

हाल ही में, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन, सीनियर एडवोकेट मनन कुमार मिश्रा ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत को एक पत्र लिखकर राज्य बार काउंसिल चुनावों में लड़ने के लिए लिए जाने वाले 1.25 लाख रुपये के नॉमिनेशन फी पर केरल हाईकोर्ट द्वारा की गई आलोचनात्मक टिप्पणियों पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने जज द्वारा की गई टिप्पणियों को "कुछ आधारहीन और लापरवाह मौखिक टिप्पणियां" बताया और यहां तक ​​कि जज के ट्रांसफर की मांग करने की धमकी भी दी।केरल हाईकोर्ट एडवोकेट राजेश विजयन द्वारा दायर रिट...

शादी का रजिस्ट्रेशन वैवाहिक सद्भाव का सबूत नहीं, एक साल से पहले आपसी तलाक से इनकार करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
शादी का रजिस्ट्रेशन वैवाहिक सद्भाव का सबूत नहीं, एक साल से पहले आपसी तलाक से इनकार करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दो लोगों के बीच सिर्फ शादी का रजिस्ट्रेशन वैवाहिक सद्भाव या साथ रहने के उनके इरादे को तय नहीं कर सकता।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीजन बेंच ने कहा,"शादी का रजिस्ट्रेशन सिर्फ एक कानूनी ज़रूरत है। यह अपने आप में वैवाहिक सद्भाव, साथ रहने के इरादे, या वैवाहिक रिश्ते की व्यवहार्यता को तय नहीं कर सकता।" बेंच एक पत्नी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें शादी की तारीख से एक साल पूरा होने से पहले आपसी...

कोर्ट को धोखा देने की कोशिश: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेशंस कोर्ट में समानांतर याचिका का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
कोर्ट को धोखा देने की कोशिश: दिल्ली हाईकोर्ट ने सेशंस कोर्ट में समानांतर याचिका का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अग्रिम जमानत याचिका को यह पाते हुए खारिज की कि आरोपी ने दो अलग-अलग कोर्ट में समानांतर अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर की थीं, जिनकी सुनवाई उसी दिन हो रही थी। इस हरकत को "आज़ादी के नाम पर प्रक्रिया का साफ दुरुपयोग" बताया।जस्टिस गिरीश कथपालिया की बेंच ने पाया कि एक साथ दो अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर करने का कोई स्वीकार्य कारण नहीं था, एक सेशंस कोर्ट में और दूसरी हाई कोर्ट में, बिना सही जानकारी दिए।यह मामला तब सामने आया, जब एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि आरोपी...

गिरफ्तारी के लिखित कारणों पर सुप्रीम कोर्ट का मिहिर राजेश शाह फैसला भविष्य में लागू होगा: दिल्ली हाईकोर्ट
गिरफ्तारी के लिखित कारणों पर सुप्रीम कोर्ट का 'मिहिर राजेश शाह' फैसला भविष्य में लागू होगा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025) मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, जिसमें सभी अपराधों में रिमांड से पहले आरोपी को गिरफ्तारी के लिखित कारण देना अनिवार्य है, भविष्य में लागू होगा और इसे फैसले की तारीख से पहले की गई गिरफ्तारियों पर लागू नहीं किया जा सकता।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की डिवीजन बेंच ने इस तरह एक याचिका खारिज की, जिसमें एक हत्या के मामले में याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई कि गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी के...

पारंपरिक प्रतिबंध विधवा को गैर-पैतृक संपत्ति बेचने से नहीं रोक सकते, जेंडर-आधारित रीति-रिवाजों को समानता के आगे झुकना होगा: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पारंपरिक प्रतिबंध विधवा को गैर-पैतृक संपत्ति बेचने से नहीं रोक सकते, जेंडर-आधारित रीति-रिवाजों को समानता के आगे झुकना होगा: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि एक विधवा अपने पति से विरासत में मिली गैर-पैतृक संपत्ति को रिश्तेदारों की सहमति के बिना बेचने में सक्षम है, क्योंकि इसके विपरीत कोई भी पारंपरिक प्रतिबंध संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है।जस्टिस विरिंदर अग्रवाल ने कहा,"नतीजतन, किसी महिला के अपनी स्वतंत्र रूप से विरासत में मिली संपत्ति से निपटने के अधिकार पर ऐसा कोई भी प्रतिबंध संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य, कानूनी रूप से अस्थिर और बाध्यकारी प्रभाव से रहित माना जाना चाहिए।" यह विवाद 42 कनाल 19 मरला कृषि भूमि से...

बिना बच्चों वाली विधवा को दोबारा शादी के बाद भी फैमिली पेंशन मिलते रहने वाला नियम उचित: दिल्ली हाईकोर्ट
बिना बच्चों वाली विधवा को दोबारा शादी के बाद भी फैमिली पेंशन मिलते रहने वाला नियम उचित: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 के नियम 54 की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया, जिसके तहत बिना बच्चों वाली विधवा को दोबारा शादी के बाद भी फैमिली पेंशन मिलती रहेगी।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने एक मृत CRPF जवान के माता-पिता द्वारा दायर एक रिट याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने अपने बेटे की विधवा की दोबारा शादी के बाद खुद को फैमिली पेंशन देने की मांग की थी।कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 के नियम 54 के तहत बिना...

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी: कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य को नौ जिलों में अधिग्रहित ज़मीन 31 मार्च तक BSF को सौंपने का निर्देश दिया
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी: कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य को नौ जिलों में अधिग्रहित ज़मीन 31 मार्च तक BSF को सौंपने का निर्देश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार (27 जनवरी) को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह भारत-बांग्लादेश सीमा (IB) के पास नौ जिलों में अधिग्रहित ज़मीन 31 मार्च तक सीमा सुरक्षा बल (BSF) को बाड़बंदी के मकसद से सौंप दे।ये निर्देश चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच ने एक पूर्व डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ द्वारा दायर जनहित याचिका पर विचार करते हुए जारी किए, जिसमें पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के बड़े हिस्से पर बाड़बंदी न होने की बात कही गई।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि...