हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने ₹22 करोड़ के 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में ज़मानत देने से किया इनकार, कहा - इसका समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है
दिल्ली हाईकोर्ट ने ₹22 करोड़ के "डिजिटल अरेस्ट" साइबर धोखाधड़ी मामले में चार आरोपियों को ज़मानत देने से इनकार किया। यह मामला एक बुज़ुर्ग नागरिक से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के अपराधों का समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है और इनसे सख्ती से निपटना ज़रूरी है।जस्टिस मनोज जैन ने दो आरोपियों की नियमित ज़मानत याचिकाएं और दो अन्य की अग्रिम ज़मानत याचिकाएं खारिज कीं। उन्होंने कहा कि इस समय अगर इन्हें रिहा किया गया तो चल रही जाँच में रुकावट आ सकती है।यह मामला 70 साल से ज़्यादा उम्र के एक बुज़ुर्ग के...
रुकावट दूर करने के लिए प्रमोशन देने वाली सरकारी नीति को समान रूप से लागू किया जाना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
रेवेन्यू बोर्ड में काम करने वाले टेलीफ़ोन ऑपरेटरों को सिविल सेक्रेटेरिएट में लोअर डिवीज़न असिस्टेंट के पद पर प्रमोट करने के मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि रुकावट दूर करने के लिए प्रमोशन देने वाली सरकारी नीति को एक समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।यूपी रेवेन्यू बोर्ड मिनिस्टीरियल सर्विस रूल्स, 1983 रेवेन्यू बोर्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा शर्तों को नियंत्रित करते हैं। हालांकि, इनमें टेलीफ़ोन ऑपरेटरों का पद शामिल नहीं है, जिसे 1986 में मंज़ूरी दी गई। चूंकि...
कल्याणकारी योजना के तहत आंगनवाड़ी सेविका के पद पर चयन से कोई लागू करने योग्य वैधानिक अधिकार नहीं मिलता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत आंगनवाड़ी सेविका के पद पर चयन या नियुक्ति से कोई लागू करने योग्य वैधानिक अधिकार नहीं मिलता। ऐसे चयन से जुड़े विवादों में आमतौर पर रिट अधिकार क्षेत्र के तहत हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं होती है।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच 10.02.2023 को सिंगल जज द्वारा C.W.J.C. No. 10524 of 2017 में दिए गए फैसले को चुनौती देने वाली इंट्रा-कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका को...
माँ की मृत्यु के बाद पिता ही स्वाभाविक अभिभावक होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि माँ की मृत्यु के बाद पिता ही स्वाभाविक अभिभावक होता है और आमतौर पर नाबालिग के कल्याण की देखभाल करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति होता है।जस्टिस संदीप जैन की पीठ ने इस प्रकार एक पिता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas corpus) याचिका स्वीकार की और 13 महीने के बच्चे के ननिहाल पक्ष के रिश्तेदारों को निर्देश दिया कि वे बच्चे की कस्टडी याचिकाकर्ता को सौंप दें।याचिकाकर्ता-पिता का पक्ष यह था कि उसकी पत्नी (बच्चे की माँ) की मृत्यु पिछले साल फरवरी में हो गई, और तब...
पहली मैटरनिटी लीव के 2 साल के अंदर दूसरी मैटरनिटी लीव पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पहली मैटरनिटी लीव के 2 साल के अंदर किसी महिला द्वारा दूसरी मैटरनिटी लीव मांगने पर कोई रोक नहीं है।इलाहाबाद हाईकोर्ट के पिछले फैसले, 'अनुपम यादव और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य' पर भरोसा करते हुए जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने कहा,"अनुपम यादव (उपर्युक्त) मामले में जैसा कि फैसले को पढ़ने से साफ पता चलता है, किसी कर्मचारी के लिए पहली मैटरनिटी लीव मिलने के दो साल के अंदर दूसरी मैटरनिटी लीव का लाभ मांगने पर कोई रोक नहीं है।"याचिकाकर्ता ने अपनी दूसरी मैटरनिटी लीव...
सर्विस रिकॉर्ड निजी जानकारी, RTI Act के तहत इसका खुलासा करने से छूट: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सर्विस रिकॉर्ड निजी जानकारी होती है, जिसे सूचना का अधिकार (RTI Act) के तहत सार्वजनिक करने से छूट मिली हुई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी जानकारी को सार्वजनिक करने का आदेश तब तक नहीं दिया जा सकता, जब तक कि संबंधित अथॉरिटी इस बात से संतुष्ट न हो जाए कि व्यापक जनहित के लिए ऐसा करना ज़रूरी है।जस्टिस आबासाहेब डी. शिंदे एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में राज्य सूचना आयोग के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस के सर्विस रिकॉर्ड को सार्वजनिक...
चुनाव में गड़बड़ी की अटकलों पर आधारित निवारक हिरासत टिकाऊ नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि संसदीय चुनावों में गड़बड़ी की अटकलों पर आधारित हिरासत का आदेश, बिना किसी सीधे या ठोस सबूत के, 'लाइव नेक्सस' (सीधे जुड़ाव) की शर्त को पूरा करने में नाकाम रहता है और उसे रद्द किया जा सकता है।कोर्ट 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें जम्मू-कश्मीर लोक सुरक्षा अधिनियम, 1978 की धारा 8 के तहत जारी हिरासत आदेश को चुनौती दी गई। इस आदेश में हिरासत में लिए गए व्यक्ति पर राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक गतिविधियों में...
498ए मामले में बरी होने से भरण-पोषण नहीं रोका जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अहम फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति का धारा 498ए के आपराधिक मामले में बरी होना, पत्नी और नाबालिग बच्चे को भरण-पोषण देने से बचने का आधार नहीं बन सकता, यदि वे स्वयं अपना पालन-पोषण करने में असमर्थ हैं।जस्टिस गजेंद्र सिंह की पीठ ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 एक सामाजिक न्याय का प्रावधान है, जिसका उद्देश्य जरूरतमंद आश्रितों को आर्थिक सहारा देना है, न कि किसी को दंडित करना।अदालत ने कहा,“धारा 498ए में बरी होना अपने आप में भरण-पोषण से इनकार का आधार नहीं हो सकता, यदि यह साबित...
उन्नाव रेप केस: पीड़िता की अतिरिक्त सबूत पेश करने की मांग खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी
दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप मामले में पीड़िता की याचिका खारिज की, जिसमें उसने दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ अतिरिक्त सबूत पेश करने की अनुमति मांगी थी।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने सेंगर द्वारा 2020 में दायर अपील पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया। सेंगर ने अपनी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती दी।पीड़िता ने अपनी अर्जी में स्कूल रिकॉर्ड के आधार पर जन्मतिथि समेत कुछ अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने और नए साक्ष्य दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध...
यासीन मलिक के दावों पर NIA का दिल्ली हाईकोर्ट में जवाब: सहानुभूति पाने की कोशिश अपराध से कोई संबंध नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक के उन दावों को खारिज किया, जिनमें उन्होंने विभिन्न सरकारों के साथ कार्य संबंध होने की बात कही थी। एजेंसी ने कहा कि यह केवल जनसहानुभूति हासिल करने का प्रयास है और इससे उनके अपराध पर कोई असर नहीं पड़ता।NIA ने अपने जवाब में कहा,“सीनियर नेताओं, मीडिया कर्मियों और नौकरशाहों के नाम लेना केवल लोकप्रियता और सहानुभूति पाने के लिए है। इसका इस मामले के गुण-दोष से कोई लेना-देना नहीं है।” मलिक ने दावा किया कि वर्ष...
दिल्ली पुलिस SI भर्ती: पुरुषों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी, महिलाओं के लिए अलग नियम भेदभाव नहीं- हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पुरुष उम्मीदवारों के लिए वैध हल्के मोटर वाहन (LMV) ड्राइविंग लाइसेंस की अनिवार्यता सही है और महिलाओं के लिए इस शर्त का न होना भेदभाव नहीं माना जाएगा।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने इस मामले में दायर याचिका खारिज करते हुए कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती अधिसूचना को वैध ठहराया।याचिकाकर्ता का तर्क था कि पुरुष उम्मीदवारों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य करना जबकि...
UP Goonda Act: सिर्फ दो मुकदमों से किसी को गुंडा नहीं कहा जा सकता- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को 'गुंडा' घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसा करना व्यक्ति और उसके परिवार की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है।जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें छह महीने के बाहरीकरण आदेश को चुनौती दी गई। यह आदेश बुलंदशहर के एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) द्वारा पारित किया गया, जिसे मेरठ मंडल के आयुक्त ने भी बरकरार रखा था।प्रशासन ने...
NCLT आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, इलाहाबाद में दाखिल मामलों की जांच अब वहीं होगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NCLT के प्रधान पीठ नई दिल्ली के उस आदेश पर आंशिक रोक लगाई, जिसमें इलाहाबाद पीठ में दाखिल याचिकाओं और आवेदनों की संयुक्त जांच का निर्देश दिया गया था।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने केंद्र सरकार के वकील द्वारा निर्देश लेने के लिए चार सप्ताह का समय मांगे जाने के बीच यह स्पष्ट किया कि इलाहाबाद में दाखिल याचिकाओं की जांच केवल वहीं की रजिस्ट्री द्वारा की जाएगी।यह मामला कंपनी लॉ बार एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में 27...
'ट्रबलमेकर' की सूची बनाकर गिरफ्तारी क्यों? कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा सवाल
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले कथित “ट्रबलमेकर” सूची के आधार पर गिरफ्तारी के निर्देशों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग से सवाल किया है कि जब कानून और वैधानिक प्राधिकरण पहले से मौजूद हैं, तो ऐसे आदेश की जरूरत क्या है।चीफ जस्टिस सुजय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ यह सुनवाई एक जनहित याचिका पर कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने “गुप्त रूप से” एक सूची तैयार की है, जिसके आधार पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा सकता है।सभी पक्षों की दलीलें...
LPG की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, जनहित याचिका खारिज कर कहा- यह कार्यपालिका का विषय
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में LPG की कथित कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा पूरी तरह कार्यपालिका के दायरे में आता है और अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि जब केंद्र सरकार पहले से ही स्थिति से निपटने के लिए कदम उठा रही है। तब अदालत किसी प्रकार का आदेश (मंडामस) जारी नहीं कर सकती।यह याचिका वकील राकेश कुमार मित्तल ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक वस्तु होने के...
मालेगांव ब्लास्ट मामला: हाईकोर्ट से चार आरोपियों को बड़ी राहत, आरोप तय करने का आदेश रद्द
वर्ष 2006 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में चार आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को विशेष अदालत द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय करने का आदेश रद्द किया।हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चंदक की खंडपीठ ने यह फैसला आरोपियों द्वारा दायर अपीलों पर सुनाया। अदालत ने माना कि आरोपियों ने प्रथम दृष्टया ऐसा मामला प्रस्तुत किया, जिसमें विशेष NIA अदालत के आदेश में हस्तक्षेप करना उचित है। हालांकि फैसले की विस्तृत प्रति अभी उपलब्ध नहीं कराई गई।यह मामला 8 सितंबर, 2006 को...
कोर्ट वीडियो प्रसारण मामले में जस्टिस तेजस कारिया ने सुनवाई से खुद को अलग किया, केजरीवाल के खिलाफ अवमानना याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट में कोर्ट कार्यवाही के कथित अनधिकृत वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रसारण से जुड़े मामले में जस्टिस तेजस कारिया ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस कारिया की खंडपीठ ने आदेश देते हुए कहा कि यह मामला अब किसी अन्य बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, जिसमें जस्टिस कारिया शामिल न हों।मामले का विवरणयह जनहित याचिका अधिवक्ता वैभव सिंह द्वारा दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं के साथ-साथ पत्रकार...
खुले कारागारों के विस्तार पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर मामला किया दर्ज
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में खुले कारागारों की स्थापना, संचालन और विस्तार सुनिश्चित करने के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया। यह कदम सुप्रीम कोर्ट हालिया निर्देशों के पालन में उठाया गया।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने यह आदेश उस फैसले के संदर्भ में दिया. जो 26 फरवरी को 'सुहास चकमा बनाम भारत संघ व अन्य' मामले में पारित हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खुले सुधारात्मक संस्थानों की आवश्यकता और व्यवहार्यता का आकलन...
तीन दशक पुराने भुगतान दावों पर झटका: दिल्ली हाईकोर्ट ने कश्मीरी प्रवासी ठेकेदारों की अपील खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर से विस्थापित कश्मीरी ठेकेदारों की अपील खारिज की, जिसमें उन्होंने 1989 से पहले किए गए सरकारी कामों के लंबित भुगतानों की मांग की थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह कहते हुए राहत देने से इनकार किया कि इतने लंबे समय के बाद दावों की पुष्टि के लिए आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने सिंगल जस्टिस का फैसला बरकरार रखा। ठेकेदारों का कहना था कि उन्होंने लोक निर्माण विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों के लिए काम किया,...
जजों के परिजनों के पेशे को आधार बनाकर पक्षपात का आरोप नहीं लगाया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि जजों के बच्चों का सरकारी वकील पैनल में होना पक्षपात का आधार माना जाए तो देश के कई जजों को सुनवाई से खुद को अलग करना पड़ेगा।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें उन्होंने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से जज के अलग होने की मांग की थी।केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा के बच्चों को केंद्र सरकार की ओर से कई मामलों में वकील के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे...




















