हाईकोर्ट

पुलिस प्रोटेक्शन स्टेटस सिंबल बन गया है, कोर्ट खास वर्ग नहीं बना सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पुलिस प्रोटेक्शन 'स्टेटस सिंबल' बन गया है, कोर्ट खास वर्ग नहीं बना सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट

CRPF से ज़िंदगी भर सुरक्षा की मांग करने वाली याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि टैक्सपेयर्स के पैसे की कीमत पर पुलिस प्रोटेक्शन एक स्टेटस सिंबल बन गया है।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की बेंच ने कहा,“यह बहुत अच्छी तरह से माना जा सकता है कि खतरे की भावना का नेचर और सिक्योरिटी देने की ज़िम्मेदारी का फैसला संबंधित अधिकारियों पर छोड़ देना चाहिए, क्योंकि यह साफ तौर पर एक फैक्ट का सवाल है, जिसे ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को देखना है, न कि इस कोर्ट को भारत के संविधान के आर्टिकल 226...

पति द्वारा पत्नी को बिना बताए माता-पिता के घर रात भर रुकने पर थप्पड़ मारने की एक घटना क्रूरता नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
पति द्वारा पत्नी को बिना बताए माता-पिता के घर रात भर रुकने पर थप्पड़ मारने की 'एक घटना' क्रूरता नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि पति द्वारा अपनी पत्नी को बिना बताए माता-पिता के घर रात भर रुकने पर थप्पड़ मारने की "एक घटना" IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं मानी जाएगी।23 साल बाद क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी पति को बरी करते हुए कोर्ट ने आगे कहा कि पति द्वारा लगातार, असहनीय पिटाई के आरोप को साबित करने के लिए ठोस सबूत की ज़रूरत होगी कि इसी वजह से पत्नी ने आत्महत्या की।जस्टिस गीता गोपी ने अपने ऑर्डर में कहा:“पति का पत्नी को बिना बताए रात भर मायके में रहने की वजह से थप्पड़ मारना...

अगर चाइनीज़ मांझा की बिक्री बिना रोक-टोक जारी रही तो पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए राज्य ज़िम्मेदार होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट की चेतावनी
अगर 'चाइनीज़ मांझा' की बिक्री बिना रोक-टोक जारी रही तो पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए राज्य ज़िम्मेदार होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट की चेतावनी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों की जानलेवा सिंथेटिक पतंग मांझे, जिसे आमतौर पर “चाइनीज़ मांझा” कहा जाता है, के बिना रोक-टोक बनाने, बिक्री और इस्तेमाल पर असरदार तरीके से रोक लगाने में नाकामी पर कड़ा संज्ञान लिया।यह देखते हुए कि राज्य के अधिकारी तभी "जागते हैं और कुछ कार्रवाई शुरू करते हैं", जब दुखद चोटें या मौतें अखबारों की सुर्खियों में होती हैं, कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर इस खतरे को तुरंत नहीं रोका गया तो वह राज्य को अपने खजाने से पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए मजबूर कर सकता...

कब्र की खामोशी को वारिसों के साइन से नहीं बदला जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने समझौते पर लापरवाही से मौत का मामला रद्द करने से किया इनकार
'कब्र की खामोशी' को वारिसों के साइन से नहीं बदला जा सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने समझौते पर लापरवाही से मौत का मामला रद्द करने से किया इनकार

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि IPC की धारा 304-A के तहत इंसानी जान के नुकसान से जुड़ी क्रिमिनल कार्रवाई सिर्फ़ आरोपी और मृतक के रिश्तेदारों के बीच समझौते के आधार पर रद्द नहीं की जा सकती, यह देखते हुए कि “कब्र की खामोशी को समझौते के डीड पर वारिसों के साइन से नहीं बदला जा सकता।”जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,"समझौते के आधार पर क्रिमिनल कार्रवाई को रद्द करने का ज़रूरी आधार पीड़ित की आरोपी के खिलाफ़ कोई मौजूदा शिकायत न होने पर टिका है। हालांकि, हत्या की लापरवाही के मामलों में, मृतक ही मुख्य पीड़ित...

हाईकोर्ट ने सस्पेंड किए गए मदरसों को ग्रांट-इन-एड चुनिंदा तरीके से जारी रखने का आरोप लगाने वाली याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा
हाईकोर्ट ने सस्पेंड किए गए मदरसों को ग्रांट-इन-एड चुनिंदा तरीके से जारी रखने का आरोप लगाने वाली याचिका पर यूपी सरकार से जवाब मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने उत्तर प्रदेश सरकार से पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) पर जवाब मांगा, जिसमें आरोप लगाया गया कि मदरसों की मान्यता सस्पेंड होने के बावजूद उन्हें ग्रांट-इन-एड जारी रखने के लिए कोई एक जैसी राज्य पॉलिसी नहीं है।सोशल वर्कर अज़ाज अहमद ने एडवोकेट अशोक पांडे और विंदेश्वरी पांडे के ज़रिए यह PIL दायर की, जिसमें दावा किया गया कि कुछ मान्यता प्राप्त सस्पेंड किए गए संस्थानों को ग्रांट-इन-एड दिया जाता है, लेकिन दूसरों को नहीं दिया जा रहा है।बुधवार को, एडवोकेट पांडे ने कहा कि...

रोड एक्सीडेंट क्रॉस-FIR में वकील के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती कार्रवाई न की जाए: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश
रोड एक्सीडेंट क्रॉस-FIR में वकील के खिलाफ कोई ज़बरदस्ती कार्रवाई न की जाए: झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची में रोड एक्सीडेंट की घटना से जुड़ी क्रॉस-FIR में आरोपी वकील मनोज टंडन को अंतरिम सुरक्षा दी है और मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई। साथ ही कोर्ट ने कहा है कि एक ही घटना से जुड़े दोनों क्रॉस-केस की जांच एक ही जांच अधिकारी से करानी चाहिए।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच वकील द्वारा दायर मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें वकील ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के अलग-अलग नियमों के तहत दर्ज डोरंडा P.S. केस नंबर 51 और 52/2026 के संबंध में पुलिस द्वारा परेशान...

अर्नेश कुमार गाइडलाइंस का उल्लंघन: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका में दोनों राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और DGP को नोटिस जारी किया
अर्नेश कुमार गाइडलाइंस का उल्लंघन: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका में दोनों राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और DGP को नोटिस जारी किया

अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का लगातार पालन न करने पर प्रकाश डालते हुए महत्वपूर्ण आदेश में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब और हरियाणा राज्यों के चीफ सेक्रेटरी और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ कंटेम्प्ट की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने कहा,“02.07.2014 के फैसले की कॉपी सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के चीफ सेक्रेटरी और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस और सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आगे...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित जगह पर नमाज़ पढ़ने के आरोपी स्टूडेंट्स के खिलाफ क्रिमिनल केस रद्द किया, चेतावनी जारी की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित जगह पर नमाज़ पढ़ने के आरोपी स्टूडेंट्स के खिलाफ क्रिमिनल केस रद्द किया, चेतावनी जारी की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दो स्टूडेंट्स के खिलाफ पूरी क्रिमिनल कार्रवाई रद्द की, जिन्हें लोकल एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा उस मकसद के लिए तय की गई जगह पर नमाज़ पढ़ने के लिए फंसाया गया।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने स्टूडेंट्स को भविष्य में लोकल एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा जारी किए गए निर्देशों और खास रोक का पालन करने की भी चेतावनी दी।संक्षेप में मामलादोनों एप्लीकेंट्स पर IPC की धारा 143 और 188 के तहत कथित अपराध करने के लिए एक FIR दर्ज की गई। संत कबीर नगर कोर्ट ने अपराध का संज्ञान लिया और मई 2019 में...

हिंसा भड़काए बिना सरकार या पॉलिसी की आलोचना करने पर UAPA नहीं लग सकता: दिल्ली हाईकोर्ट में बताया गया
हिंसा भड़काए बिना सरकार या पॉलिसी की आलोचना करने पर UAPA नहीं लग सकता: दिल्ली हाईकोर्ट में बताया गया

सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि हिंसा को बढ़ावा दिए या भड़काए बिना सरकार या उसके पॉलिसी फैसलों की आलोचना करने पर अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट, 1967 (UAPA) नहीं लग सकता।सीनियर वकील ने फाउंडेशन ऑफ़ मीडिया प्रोफेशनल्स की ओर से चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच के सामने यह बात कही।फाउंडेशन ने UAPA के तहत अलग-अलग प्रोविज़न की कॉन्स्टिट्यूशनल वैलिडिटी को चुनौती दी, जिसमें कहा गया कि यह कानून एंटी-टेरर कानून के रूप में एक पॉलिटिकल...

अपराधी दया को अधिकार के तौर पर नहीं मांग सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य द्वारा सज़ा में बदलाव के बाद कांस्टेबल की बहाली की अर्ज़ी खारिज की
'अपराधी दया को अधिकार के तौर पर नहीं मांग सकता': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य द्वारा सज़ा में बदलाव के बाद कांस्टेबल की बहाली की अर्ज़ी खारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल की कंपलसरी रिटायरमेंट के खिलाफ अर्ज़ी यह कहते हुए खारिज की कि एक बार जब राज्य ने दया याचिका में उसकी बर्खास्तगी को कंपलसरी रिटायरमेंट में बदलकर नरमी दिखाई तो उसके पास आगे ज्यूडिशियल रिव्यू की मांग करने का कोई लागू करने लायक अधिकार नहीं है।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कहा,"दया कानूनी अधिकारों का विषय नहीं है। यह वहीं से शुरू होती है, जहां कानूनी अधिकार खत्म होते हैं। एक अपराधी व्यक्ति को दया के अधिकार के इस्तेमाल के संबंध में होम सेक्रेटरी द्वारा अपने...

माता-पिता की देखभाल को लेकर भाइयों के बीच अचानक हुई लड़ाई, जिससे मौत हुई, मर्डर नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा घटाकर 14 साल की
माता-पिता की देखभाल को लेकर भाइयों के बीच अचानक हुई लड़ाई, जिससे मौत हुई, मर्डर नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा घटाकर 14 साल की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने दो भाइयों की सज़ा को मर्डर से गैर-इरादतन हत्या में यह कहते हुए बदल दिया कि बूढ़े माता-पिता के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी को लेकर अचानक हुए पारिवारिक झगड़े से हुआ जानलेवा हमला पहले से सोचा-समझा नहीं था। इसलिए इसमें IPC की धारा 302 नहीं लगती।जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की एक डिवीजन बेंच ने नादिया में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सज़ा के खिलाफ ऐमुद्दीन शेख और एक अन्य की अपील को कुछ हद तक मंज़ूरी दी।प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, अपील करने वाले और पीड़ित भाई-बहन...

CAPF भर्ती में मेडिकल बोर्ड की राय आखिरी, कोर्ट गलत इरादे या प्रोसेस में कमी के अलावा अपील नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
CAPF भर्ती में मेडिकल बोर्ड की राय आखिरी, कोर्ट गलत इरादे या प्रोसेस में कमी के अलावा अपील नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPFs) की भर्ती के मामलों में कोर्ट के दखल की सीमित गुंजाइश पर ज़ोर देते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि रिव्यू मेडिकल बोर्ड का फैसला आखिरी है और प्रोसेस में गलती या गलत इरादे जैसी खास स्थितियों को छोड़कर कोर्ट द्वारा आगे रिव्यू या दोबारा जांच नहीं की जा सकती।कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि CAPFs की भर्ती को कंट्रोल करने वाला कानूनी ढांचा दूसरी मेडिकल जांच के बाद दी गई मेडिकल राय को आखिरी दर्जा देता है। कोर्ट को ऐसे एक्सपर्ट फैसलों को बदलने में धीमा...

सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत भरण-पोषण न्यायाधिकरण बच्चों को बेदखल करने का आदेश नहीं दे सकता: कलकत्ता हाइकोर्ट
सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत भरण-पोषण न्यायाधिकरण बच्चों को बेदखल करने का आदेश नहीं दे सकता: कलकत्ता हाइकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित भरण-पोषण न्यायाधिकरण को धारा 4 और 5 की कार्यवाही में बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का अधिकार नहीं है।न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण की शक्तियां केवल मासिक भरण-पोषण तय करने तक सीमित हैं, उन्हें परिसर खाली कराने तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।जस्टिस कृष्णा राव ने उप-मंडल पदाधिकारी (जो भरण-पोषण न्यायाधिकरण के रूप में कार्य कर रहे थे) द्वारा पारित आदेशों में आंशिक...

जेल में बंद आरोपी पर भी लगाया जा सकता है रासुका, यदि रिहाई पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका हो: इलाहाबाद हाइकोर्ट
जेल में बंद आरोपी पर भी लगाया जा सकता है रासुका, यदि रिहाई पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका हो: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी को यह संतोष हो कि जेल में बंद आरोपी के जमानत पर रिहा होने की वास्तविक संभावना है और रिहाई के बाद वह सार्वजनिक व्यवस्था के प्रतिकूल गतिविधियों में संलग्न हो सकता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत निरोधात्मक आदेश पारित किया जा सकता है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की खंडपीठ ने सुनील कुमार गुप्ता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।याचिका में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका)...

अनुशासनात्मक दंड अपराध के अनुरूप होना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने रिटायर के बाद दी गई सजा में किया संशोधन
अनुशासनात्मक दंड अपराध के अनुरूप होना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने रिटायर के बाद दी गई सजा में किया संशोधन

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई में लगाया गया दंड सिद्ध कदाचार की गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने रिटायरमेंट के बाद वेतनमान में 21 चरणों की कटौती के दंड को अत्यधिक मानते हुए उसमें संशोधन किया।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,“अनुशासनात्मक कार्यवाही में हस्तक्षेप का दायरा अत्यंत सीमित है। यह स्थापित विधि है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह हाइकोर्ट तभी हस्तक्षेप कर सकता है जब निष्कर्ष मनमाने, असंगत, प्रक्रियात्मक त्रुटि से ग्रस्त या स्पष्ट पूर्वाग्रह से प्रभावित...

एकल मां को पूर्ण अभिभावक मानना दान नहीं, संवैधानिक निष्ठा: बॉम्बे हाइकोर्ट ने दिया बच्ची के स्कूल अभिलेख से पिता का नाम हटाने का आदेश
एकल मां को पूर्ण अभिभावक मानना दान नहीं, संवैधानिक निष्ठा: बॉम्बे हाइकोर्ट ने दिया बच्ची के स्कूल अभिलेख से पिता का नाम हटाने का आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी एकल मां को बच्चे की नागरिक पहचान के लिए पूर्ण अभिभावक के रूप में मान्यता देना कोई दान नहीं, बल्कि संविधान के प्रति निष्ठा है। अदालत ने नाबालिग बच्ची के स्कूल रिकॉर्ड से उसके पिता का नाम हटाने और उसकी जाति मराठा के स्थान पर मां की जाति महार (अनुसूचित जाति) दर्ज करने का आदेश दिया।जस्टिस विभा कंकणवाडी और जस्टिस हितेन वेणगावकर की खंडपीठ ने कहा कि जो मां अपने बच्चे का अकेले पालन-पोषण कर रही है, उसके अधिकारों को विधिवत मान्यता मिलनी...

हिरासत में 437 मौतों पर झारखंड हाइकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य, राज्य से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
हिरासत में 437 मौतों पर झारखंड हाइकोर्ट सख्त, मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य, राज्य से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 176(1-क) (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 196) के तहत पुलिस या न्यायिक हिरासत में मृत्यु, लापता होने या दुष्कर्म के हर मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक जांच अनिवार्य है। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी, क्योंकि राज्य ने खुलासा किया कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच 437 लोगों की हिरासत में मौत हुई।चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग...

IPC की धारा 498A जैसे वैवाहिक मामलों में यांत्रिक तरीके से LOC जारी नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट
IPC की धारा 498A जैसे वैवाहिक मामलों में यांत्रिक तरीके से LOC जारी नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाइकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए (भारतीय न्याय संहिता की धारा 85) के तहत दर्ज वैवाहिक क्रूरता के मामलों में लुक-आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की प्रवृत्ति पर कड़ी आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में एलओसी केवल अपवाद स्वरूप और विशेष परिस्थितियों में ही जारी की जा सकती है न कि यांत्रिक तरीके से।जस्टिस के. श्रीनिवास रेड्डी की एकलपीठ ने आरोपी के खिलाफ जारी LOC को निरस्त करते हुए कहा कि पुलिस को यह देखना आवश्यक है कि क्या आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है या गिरफ्तारी...