हाईकोर्ट

फैमिली कोर्ट मुबारत के ज़रिए आपसी तलाक़ की घोषणा के लिए मुस्लिम जोड़े की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए अधिकृत: गुजरात हाईकोर्ट ने फिर की पुष्टि
फैमिली कोर्ट 'मुबारत' के ज़रिए आपसी तलाक़ की घोषणा के लिए मुस्लिम जोड़े की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए अधिकृत: गुजरात हाईकोर्ट ने फिर की पुष्टि

गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि फैमिली कोर्ट आपसी सहमति से तलाक़ के आधार पर शादी को खत्म करने की अर्ज़ी पर विचार करने के लिए सक्षम और अधिकृत है। इस आपसी सहमति को मुस्लिम जोड़ों के बीच हुए 'मुबारत' समझौते के रूप में भी जाना जाता है।जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस निशा एम. ठाकोर की खंडपीठ ने 'आसिफ़ दाऊदभाई करवा और अन्य बनाम कोई नहीं (2025)' मामले में हाईकोर्ट के फ़ैसले का हवाला दिया और कहा कि कोर्ट ने समझौते के ज़रिए मुस्लिम शादी को खत्म करने के मामले पर विस्तार से विचार किया था।2025 के फ़ैसले का...

दिल्ली हाईकोर्ट ने समीर मोदी पर कथित हमले के मामले में बीना मोदी के खिलाफ ट्रायल पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने समीर मोदी पर कथित हमले के मामले में बीना मोदी के खिलाफ ट्रायल पर रोक लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उद्योगपति बीना मोदी और सीनियर वकील ललित भसीन के खिलाफ शुरू की गई ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई। यह मामला 2024 में एक बोर्ड मीटिंग के दौरान गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (GPI) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर समीर मोदी पर कथित हमले से जुड़ा है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने मोदी और भसीन द्वारा दायर याचिकाओं पर यह अंतरिम आदेश पारित किया। इन याचिकाओं में उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें इस मामले में पेश होने के लिए समन जारी किया गया।ट्रायल कोर्ट ने फरवरी...

आपराधिक मामलों में अस्पष्ट मेडिकल राय निष्पक्ष सुनवाई को कमज़ोर करती है: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को मेडिको-लीगल गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया
आपराधिक मामलों में अस्पष्ट मेडिकल राय निष्पक्ष सुनवाई को कमज़ोर करती है: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को मेडिको-लीगल गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे व्यापक और एक समान मेडिको-लीगल गाइडलाइंस तैयार करने और उन्हें लागू करने के निर्देश जारी करें। इन गाइडलाइंस का पालन सभी सरकारी मेडिकल अधिकारियों को करना होगा, जब वे आपराधिक मामलों में मेडिकल राय देंगे, ताकि उनकी स्पष्टता, पठनीयता, पूर्णता और असंदिग्धता सुनिश्चित हो सके।जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की बेंच ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को आगे निर्देश दिया कि वे पुलिस विभागों को निर्धारित गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने का निर्देश दें। साथ...

स्काउट्स और गाइड्स कोटा का लाभ हिंदुस्तान स्काउट्स को भी दिया जाए: दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया
स्काउट्स और गाइड्स कोटा का लाभ 'हिंदुस्तान स्काउट्स' को भी दिया जाए: दिल्ली हाईकोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेल मंत्रालय को निर्देश दिया कि स्काउट्स और गाइड्स कोटा के तहत भर्ती का लाभ 'हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स एसोसिएशन' को भी दिया जाए। कोर्ट ने माना कि इस तरह के लाभ से इनकार करना मनमाना था और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन था।जस्टिस मिनी पुष्करणा ने फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता एसोसिएशन, जिसे युवा मामले और खेल मंत्रालय (MOYA) से मान्यता प्राप्त है, उसे इस कोटे से बाहर नहीं रखा जा सकता, जबकि इसी तरह की स्थिति वाले दूसरे संगठन, 'भारत स्काउट्स एंड गाइड्स' को यह लाभ दिया जा रहा...

सरकारी स्कूल टीचर की नियुक्ति से पहले की दूसरी शादी दुराचार नहीं, बल्कि योग्यता की जड़ पर ही वार है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सरकारी स्कूल टीचर की नियुक्ति से पहले की दूसरी शादी दुराचार नहीं, बल्कि योग्यता की जड़ पर ही वार है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई महिला, जिसने सरकारी स्कूल टीचर के तौर पर नियुक्त होने से पहले दूसरी शादी (Bigamous Marriage) की थी, उसे इस आधार पर यूपी सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली और यूपी सरकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियमावली के तहत दुराचार के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि वह उम्मीदवार, जिसने 2009 में ऐसे व्यक्ति से शादी की, जिसकी पहली शादी अभी भी कायम थी, वह 'उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा शिक्षक सेवा नियमावली, 1981' के नियम 12 के तहत टीचर के तौर पर...

मुकदमे में संशोधन की समयसीमा पर अहम फैसला: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कहा- मुकदमे के चरण के आधार पर होगा निर्णय
मुकदमे में संशोधन की समयसीमा पर अहम फैसला: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कहा- मुकदमे के चरण के आधार पर होगा निर्णय

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सिविल मामलों में याचिका (प्लीडिंग) में संशोधन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संशोधन आवेदन की समयसीमा का आकलन मुकदमे की शुरुआत की तारीख से नहीं, बल्कि मुकदमे किस चरण में है, इसके आधार पर किया जाना चाहिए।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 6 नियम 17 के तहत अदालत को किसी भी चरण में संशोधन की अनुमति देने का अधिकार है। बशर्ते वह वास्तविक विवाद के समाधान के लिए आवश्यक हो।अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक चरण (ट्रायल शुरू होने से पहले) में...

नार्को टेस्ट से पहले या दौरान भी आरोपी वापस ले सकता है सहमति: राजस्थान हाइकोर्ट
नार्को टेस्ट से पहले या दौरान भी आरोपी वापस ले सकता है सहमति: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि कोई भी आरोपी नार्को विश्लेषण (नार्को टेस्ट) के लिए दी गई अपनी सहमति को परीक्षण से पहले या उसके दौरान भी वापस ले सकता है।अदालत ने स्पष्ट किया कि एक बार दी गई सहमति अंतिम (अपरिवर्तनीय) नहीं मानी जा सकती।जस्टिस अनूप कुमार धांध की पीठ ने कहा कि यदि आरोपी की इच्छा के विरुद्ध नार्को टेस्ट किया जाता है, तो यह उसके मौलिक अधिकारों जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) तथा आत्मदोषारोपण के खिलाफ अधिकार (अनुच्छेद 20(3)) का उल्लंघन होगा।अदालत ने कहा,“नार्को...

मजिस्ट्रेट खुद करेंगे प्रारंभिक जांच, पुलिस को नहीं सौंप सकते जिम्मेदारी: कलकत्ता हाइकोर्ट
मजिस्ट्रेट खुद करेंगे प्रारंभिक जांच, पुलिस को नहीं सौंप सकते जिम्मेदारी: कलकत्ता हाइकोर्ट

कलकत्ता हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट पुलिस को “जांच” (इन्क्वायरी) करने का निर्देश नहीं दे सकते। यह जिम्मेदारी स्वयं मजिस्ट्रेट को निभानी होगी, और उसके बाद ही वे जांच के आदेश दे सकते हैं।जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी ने कहा कि कानून के तहत जांच का अर्थ न्यायिक प्रक्रिया से है, जिसे केवल मजिस्ट्रेट या अदालत ही कर सकती है। यदि इस कार्य को पुलिस को सौंप दिया जाए खासकर तब जब पुलिस पहले ही FIR दर्ज करने से इनकार...

रिश्वत मांगने के आरोप में फंसे आबकारी अधिकारी को राहत नहीं, कलकत्ता हाइकोर्ट ने कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार
रिश्वत मांगने के आरोप में फंसे आबकारी अधिकारी को राहत नहीं, कलकत्ता हाइकोर्ट ने कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार

कथित तौर पर लाइसेंस देने के बदले रिश्वत मांगने के मामले में फंसे एक आबकारी अधिकारी को कलकत्ता हाइकोर्ट से राहत नहीं मिली।अदालत ने भ्रष्टाचार से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जिनकी जांच ट्रायल के दौरान ही की जाएगी।जस्टिस अपूर्व सिन्हा राय ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर अदालत को केवल यह देखना होता है कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है, न कि पूरे मामले का...

मेवाड़ राजघराने में विरासत विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने पद्मजा कुमारी की याचिका खारिज की
मेवाड़ राजघराने में विरासत विवाद: दिल्ली हाइकोर्ट ने पद्मजा कुमारी की याचिका खारिज की

मेवाड़ राजघराने में चल रहे विरासत विवाद में एक अहम मोड़ आया। दिल्ली हाइकोर्ट ने पद्मजा कुमारी परमार की उस याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने अपने दिवंगत पिता अरविंद सिंह मेवाड़ की संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार मांगा था।जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने स्पष्ट किया कि जब किसी वसीयत (विल) के अस्तित्व को स्वीकार किया जा चुका हो, भले ही उसकी वैधता पर विवाद हो तब व्यक्ति को बिना वसीयत (इंटेस्टेट) के आधार पर संपत्ति के प्रशासन की मांग करने वाली याचिका मान्य नहीं होती।अदालत ने कहा,“कानूनी व्यवस्था यह कहती है...

सूरत दुष्कर्म मामला: बयान में विरोधाभास का दावा, नारायण साईं ने हाइकोर्ट में सजा को दी चुनौती
सूरत दुष्कर्म मामला: बयान में विरोधाभास का दावा, नारायण साईं ने हाइकोर्ट में सजा को दी चुनौती

सूरत दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे नारायण साईं ने गुजरात हाइकोर्ट में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए कहा है कि पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास बदलाव और सुधार हैं, जिन पर ट्रायल कोर्ट ने ध्यान नहीं दिया।यह दलील मंगलवार को जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छानी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दी गई।साईं के वकील ने अदालत में कहा कि पीड़िता को कई मौके मिले, जब वह घटना की शिकायत कर सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।वकील के अनुसार,“यदि किसी महिला के साथ ऐसा अत्याचार होता है,...

राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्स फीस रिफंड विवाद में धोखाधड़ी के मामले में upGrad के डायरेक्टर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने कोर्स फीस रिफंड विवाद में धोखाधड़ी के मामले में upGrad के डायरेक्टर की गिरफ्तारी पर रोक लगाई

राजस्थान हाई कोर्ट ने upGrad के डायरेक्टरों और अन्य कर्मचारियों/सहयोगियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई। upGrad एक डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म है जो ऑनलाइन उच्च शिक्षा कार्यक्रम उपलब्ध कराता है। यह रोक उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वास भंग के आरोप में दर्ज आपराधिक मामले के संबंध में लगाई गई।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने यह आदेश पारित किया।याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका के अनुसार, यह मामला एक छात्र ने दर्ज कराया। इस छात्र ने प्लेटफॉर्म पर एक कोर्स चुना था। इसके लिए 5.25 लाख रुपये की फीस जमा की थी।...

3 साल की हिरासत के बाद PMLA में ज़मानत मिली, कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा - लंबे समय तक हिरासत के मामलों में अनुच्छेद 21, दोहरी शर्तों पर भारी पड़ सकता है
3 साल की हिरासत के बाद PMLA में ज़मानत मिली, कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा - लंबे समय तक हिरासत के मामलों में अनुच्छेद 21, दोहरी शर्तों पर भारी पड़ सकता है

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में आरोपी को ज़मानत दी। कोर्ट ने माना कि तीन साल से ज़्यादा समय तक ट्रायल से पहले हिरासत में रखना, अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही यह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) की धारा 45 के तहत तय सख्त 'दोहरी शर्तों' में ढील देने का उचित आधार बन सकता है।जस्टिस सुव्रा घोष ने टिप्पणी की कि कोई भी दंडात्मक कानून कितना भी सख्त क्यों न हो, एक संवैधानिक अदालत को हमेशा संविधानवाद और कानून के शासन के पक्ष में ही...

पत्नी भरण-पोषण की कार्यवाही के लिए RTI Act के तहत पति का IT रिटर्न नहीं मांग सकती, यह निजी जानकारी के तहत छूट प्राप्त है: कर्नाटक हाईकोर्ट
पत्नी भरण-पोषण की कार्यवाही के लिए RTI Act के तहत पति का IT रिटर्न नहीं मांग सकती, यह 'निजी जानकारी' के तहत छूट प्राप्त है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई भी जीवनसाथी, दूसरे जीवनसाथी का इनकम टैक्स रिटर्न और वित्तीय रिकॉर्ड, सूचना का अधिकार (RTI) एक्ट, 2005 के तहत आवेदन करके प्राप्त नहीं कर सकता; क्योंकि ऐसी जानकारी RTI Act की धारा 8(1)(j) के तहत 'निजी जानकारी' मानी जाती है, जिसे सार्वजनिक करने से छूट प्राप्त है।बेंगलुरु में बैठी पीठ ने अदालत के आदेश में यह टिप्पणी करते हुए गिरीश रामचंद्र देशपांडे बनाम CIC, 2012 AIR SCW 5865 मामले का हवाला दिया,"...किसी व्यक्ति द्वारा अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी...

अगर अपॉइंटमेंट गैर-कानूनी नहीं है तो प्रमोशन के लिए एड-हॉक सर्विस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अगर अपॉइंटमेंट गैर-कानूनी नहीं है तो प्रमोशन के लिए एड-हॉक सर्विस को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अपॉइंटमेंट गैर-कानूनी नहीं है तो सरकार किसी कर्मचारी की एड-हॉक सर्विस को प्रमोशन के लिए नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस कर्मचारी के दावे को गैर-कानूनी तरीके से नज़रअंदाज़ किया गया, उसे प्रमोशन उसी तारीख से दिया जाना चाहिए, जिस तारीख को उसके जूनियर को प्रमोशन दिया गया।यह मानते हुए कि नियमों के अनुसार किया गया एड-हॉक अपॉइंटमेंट ज़्यादा से ज़्यादा अनियमित हो सकता है, गैर-कानूनी नहीं, जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने कहा,“अगर...

RTE Act के तहत 25% सीटें आरक्षित करने की योजना का इस्तेमाल एक ही बच्चे के एडमिशन के लिए बार-बार नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
RTE Act के तहत 25% सीटें आरक्षित करने की योजना का इस्तेमाल एक ही बच्चे के एडमिशन के लिए बार-बार नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत वंचितों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की योजना इसलिए बनाई गई ताकि ज़्यादा से ज़्यादा योग्य बच्चों को शिक्षा के अवसर मिल सकें, लेकिन यह योजना किसी माता-पिता को यह अधिकार नहीं देती कि वे एक ही बच्चे के लिए बार-बार सीट की मांग करें। बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फैसला सुनाया।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस हितेन वेनेगांवकर की डिवीज़न बेंच ने पिता की याचिका खारिज की। पिता ने अपने घर के पास के एक स्कूल में अपने बच्चे के लिए सीट देने की 'ज़िद' की थी,...

समन मिलने के बाद सुनवाई की तारीख के बारे में न बताने के लिए आरोपी अपने पिता को दोषी नहीं ठहरा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देरी माफ करने की अर्जी खारिज की
'समन मिलने के बाद सुनवाई की तारीख के बारे में न बताने के लिए आरोपी अपने पिता को दोषी नहीं ठहरा सकता': हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने देरी माफ करने की अर्जी खारिज की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 130 दिन की देरी माफ करने की अर्जी खारिज की। कोर्ट ने कहा कि अर्जी देने वाला इस दलील पर भरोसा नहीं कर सकता कि कोर्ट का समन मिलने के बाद उसके पिता ने उसे सुनवाई की तारीख के बारे में नहीं बताया।जस्टिस राकेश कैंथला ने टिप्पणी की:"जब कानून यह कहता है कि समन परिवार के किसी वयस्क पुरुष सदस्य को दिया जाए तो यह ठीक वैसा ही है जैसे समन सीधे अर्जी देने वाले को दिया गया हो। इसलिए यह दलील कि अर्जी देने वाले को उसके पिता ने सुनवाई की तारीख के बारे में नहीं बताया, उसके काम नहीं आएगी।"...

“नाम में हुई क्लर्क की गलती कानूनी अधिकार को खत्म नहीं कर सकती”: बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना में मौत के मुआवज़े के दावे पर फिर से विचार करने का आदेश दिया
“नाम में हुई क्लर्क की गलती कानूनी अधिकार को खत्म नहीं कर सकती”: बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेलवे दुर्घटना में मौत के मुआवज़े के दावे पर फिर से विचार करने का आदेश दिया

बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रेलवे दुर्घटना से जुड़े मुआवज़े के दावे को सिर्फ़ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि सीज़न टिकट पर यात्री के नाम में कोई छोटी-मोटी गलती है, जबकि टिकट पर लिखा पहचान पत्र (ID) नंबर यात्री की पहचान की पुष्टि करता हो। कोर्ट ने कहा कि अगर यात्री की पहचान रेलवे अधिकारियों द्वारा जारी पहचान पत्र जैसे भरोसेमंद सबूतों से साबित हो जाती है तो टिकट पर नाम में हुई क्लर्क की गलती या अधूरा नाम छपा होने से मुआवज़े का दावा करने का कानूनी अधिकार खत्म नहीं हो जाता।जस्टिस जितेंद्र...