हाईकोर्ट
एयर फ़ोर्स से जम्मू-कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज़: सिविल सर्विस करियर बनाने के लिए नियम तोड़ने वाले एयरमैन को हाईकोर्ट ने दी राहत
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एयरमैन को राहत दी, जो एयर फ़ोर्स से पहले डिस्चार्ज हुए बिना जम्मू एंड कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में शामिल हो गया। कोर्ट ने कहा कि खास हालात में सर्विस नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए सही बातों का ध्यान रखना चाहिए।कोर्ट रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता की एयर फ़ोर्स सर्विस से डिस्चार्ज की रिक्वेस्ट को खारिज करने को चुनौती दी गई और उसे जम्मू-कश्मीर एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में ऑफिसर के तौर पर काम करते रहने की इजाज़त देने के लिए निर्देश...
5 वर्ष से कम आयु की बालिका की प्राकृतिक संरक्षक माँ, विवादित सेपरेशन डीड से पिता को अभिरक्षा नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि हिंदू अल्पसंख्यकता एवं संरक्षकता अधिनियम, 1956 के तहत पाँच वर्ष से कम आयु की बालिका की प्राकृतिक संरक्षक उसकी माँ होती है, क्योंकि इतनी कम उम्र के बच्चे की देखभाल पिता की तुलना में माँ ही अधिक प्रभावी ढंग से कर सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विवादित पृथक्करण विलेख (सेपरेशन डीड) के आधार पर पिता द्वारा अभिरक्षा का दावा करने से माँ द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका की ग्राह्यता पर कोई असर नहीं पड़ता।जस्टिस एन.एस. संजय गौड़ा और जस्टिस डी.एम....
विवाह के बाद स्थानांतरण की आशंका के आधार पर अविवाहित महिला को नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी अविवाहित महिला को इस आशंका के आधार पर सरकारी नौकरी से वंचित करना कि वह भविष्य में विवाह कर अन्य स्थान पर चली जाएगी, मनमाना और असंवैधानिक है तथा समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। जस्टिस मौलिक जे. शेलत ने नियुक्ति प्राधिकारी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा तर्क स्पष्ट पक्षपात (फेवरिटिज़्म) दर्शाता है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आधार नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि किसी अविवाहित...
सगी बहन की हत्या में सजा निलंबित करने से इनकार, कोर्ट ने कहा- ईर्ष्या से उपजी मानसिक विकृति, राज्य बनाए मानसिक स्वास्थ्य नीति
मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने सगी बहन की कथित हत्या के मामले में दोषियों की सजा निलंबित करने से इंकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला भाई-बहन की ईर्ष्या से उपजी मानसिक विकृति का प्रतीत होता है।अदालत ने राज्य सरकार को व्यापक मानसिक स्वास्थ्य नीति बनाने और स्कूल–कॉलेजों व जिला अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की खंडपीठ ने आदेश में कहा कि आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को दी जाए ताकि नागरिकों विशेषकर...
यदि यौन शोषण का इरादा होता तो माता-पिता को क्यों बुलाता”: आसाराम की राजस्थान हाइकोर्ट में दलील
कथित दुष्कर्म मामले में स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की ओर से राजस्थान हाइकोर्ट में विस्तृत दलीलें पेश की गईं।जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ के समक्ष बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी को असंभाव्य, साक्ष्यहीन और गढ़ी हुई साजिश करार दिया।आसाराम की ओर से एडवोकेट ने तर्क दिया कि अभियोजन का घटनाक्रम सामान्य मानवीय व्यवहार की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।उन्होंने कहा कि यदि किसी का उद्देश्य यौन शोषण होता तो वह कथित पीड़िता के माता-पिता को साथ आने के लिए क्यों कहता।बचाव पक्ष ने सवाल उठाया,“अगर...
पूर्णकालिक दायित्व निभाने वाले विधि अधिकारियों को केवल संविदा नहीं कहा जा सकता, वे मेडिकल लाभ व अर्जित अवकाश के हकदार: पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा नियुक्त सहायक एडवोकेट जनरल (AAG) और डिप्टी एडवोकेट जनरल (DAG) को केवल संविदा नियुक्ति का नाम देकर मूल सेवा लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिकारियों को अवकाश यात्रा रियायत, मेडिकल प्रतिपूर्ति और अर्जित अवकाश सहित अन्य लाभ दिए जाने चाहिए।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,“याचिकाकर्ता AAG/DAG के रूप में राज्य सरकार के अन्य विधि अधिकारियों की तुलना में अधिक दायित्व और कार्यभार निभा रहे हैं। वे...
राजस्थान हाइकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण को अवमानना नोटिस जारी किया
राजस्थान हाइकोर्ट ने विवाह उद्यान को सील करने के आदेश पर रोक लगाए जाने के बावजूद उसे नहीं खोले जाने के मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को अवमानना का नोटिस जारी किया।मामले में याचिकाकर्ता विवाह उद्यान का संचालन करता है, जिसे JDA ने सील कर दिया।इस कार्रवाई को चुनौती दिए जाने पर जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की खंडपीठ ने 8 जनवरी को पारित आदेश में सीलिंग आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाई।खंडपीठ के आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने विवाह उद्यान को खोलने के लिए JDA के समक्ष...
अनिल अंबानी को झटका: बॉम्बे हाइकोर्ट ने धोखाधड़ी वर्गीकरण पर रोक का अंतरिम आदेश किया रद्द
बॉम्बे हाइकोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी को बड़ा झटका देते हुए तीन बैंकों बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और आईडीबीआई बैंक की अपीलों को मंजूर कर लिया है।इन बैंकों ने एकल जस्टिस के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी, जिसमें अंबानी के खिलाफ शुरू की गई धोखाधड़ी वर्गीकरण की कार्यवाही पर रोक लगा दी गई।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने सोमवार को अपना फैसला सुनाया। हालांकि आदेश की विस्तृत प्रति अभी उपलब्ध नहीं कराई गई।इससे पहले एकल जस्टिस मिलिंद जाधव ने 24 जनवरी को दिए अपने आदेश...
निजी संस्थान में सेवा समाप्ति के विरुद्ध रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं, सार्वजनिक तत्व का अभाव: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि किसी निजी संस्थान द्वारा की गई सेवा समाप्ति के विरुद्ध रिट याचिका तब तक सुनवाई योग्य नहीं है, जब तक मामले में सार्वजनिक विधि का तत्व स्पष्ट रूप से विद्यमान न हो।अदालत ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च के एक कर्मचारी द्वारा दायर याचिका खारिज की।जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता और संस्थान के बीच संबंध निजी सेवा अनुबंध पर आधारित है। चूंकि विवाद सेवा संबंधी है और किसी वैधानिक प्रावधान द्वारा शासित नहीं है। इसलिए यह...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कॉलेज NOC को अच्छे इंस्पेक्शन के बावजूद दबाए रखने पर राज्य की आलोचना की, 'समय पर सर्विस का अधिकार' पक्का किया
इंस्पेक्शन के 8 महीने बाद भी NOC जारी करने में “बहुत ज़्यादा इनएक्टिविटी” के लिए राज्य की आलोचना करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि रूटीन क्लियरेंस को प्रोसेस करने में इस तरह की चूक से पब्लिक इंटरेस्ट की अनदेखी और पब्लिक ड्यूटी निभाने में ढिलाई का पता चलता है।इस तरह की इनएक्टिविटी पर नाराज़गी और हैरानी जताते हुए जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने कहा कि इस तरह की गलतियों की वजह से एंटिटीज़ को कोर्ट में रिट ऑफ़ मैंडेमस के लिए जाना पड़ा, जिससे लिटिगेशन का एक खतरनाक चक्र चलता रहा, जिसमें...
EPF Act के तहत मेडिकल ट्रेनी 'एम्प्लॉई' नहीं: कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द की PF की मांग
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड अपीलेट ट्रिब्यूनल का आदेश बरकरार रखा, जिसमें प्राइवेट कंपनी के खिलाफ लगाए गए प्रोविडेंट फंड का बकाया रद्द कर दिया गया था। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत अप्रेंटिस के तौर पर रखे गए ट्रेनी मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को EPF Act के तहत प्रोविडेंट फंड कंट्रीब्यूशन के लिए "एम्प्लॉई" नहीं माना जा सकता।जस्टिस शम्पा दत्त ने रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर और दूसरी EPFO अथॉरिटीज़ की रिट याचिका खारिज की, जिसमें मेसर्स क्लार सेहेन प्राइवेट लिमिटेड...
सिर्फ़ 'आम गलत इस्तेमाल' के दावों पर रिश्तेदारों पर केस नहीं चलाया जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने IPC की धारा 498A के तहत शादी के दौरान क्रूरता का केस रद्द किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शादी के दौरान क्रूरता के केस में आपराधिक कार्रवाई को कुछ हद तक रद्द किया। कोर्ट ने पति-पत्नी के खिलाफ खास आरोपों और परिवार के दूसरे सदस्यों के खिलाफ अस्पष्ट, हर तरह के आरोपों के बीच एक साफ़ लाइन खींची है। साथ ही दोहराया कि कोर्ट को क्रिमिनल कार्रवाई का इस्तेमाल रिश्तेदारों को “पूरी तरह फंसाने” के लिए होने से रोकना चाहिए।जस्टिस उदय कुमार, प्रैक्टिसिंग वकील आशीष कुमार दत्ता और उनके भाई तपस कुमार दत्ता की तरफ़ से CrPC की धारा 482 (BNSS की धारा 528) के तहत दायर याचिका पर सुनवाई...
पति का पत्नी को छोड़ना और भरण-पोषण न देना, शादी टूटने का विरोध करने का अधिकार खो देता है: राजस्थान हाईकोर्ट
शादी टूटने की इजाज़त देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि पति का कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह से छोड़ना, कानूनी निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन करना और कोर्ट के आदेश के अनुसार भरण-पोषण का लगातार भुगतान न करना, लगातार मानसिक क्रूरता है, जिससे पत्नी के लिए पति के साथ रहने की उम्मीद करना नामुमकिन हो जाता है।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने कहा कि पति द्वारा जानबूझकर अपनी शादी की ज़िम्मेदारियों के साथ-साथ कानूनी ज़िम्मेदारियों को छोड़ना, मामले का विरोध करने के उसके...
तीन घंटे में पालन करें: AI-जनरेटेड कंटेंट और डीपफेक के लिए भारत के नए नियम
सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) नियम, 2021 में फरवरी 2026 का संशोधन एआई-जनित सामग्री में भारत के अब तक के सबसे मुखर नियामक हस्तक्षेप का प्रतिनिधित्व करता है। टेकडाउन समयसीमा को संपीड़ित करके, तकनीकी पता लगाने की क्षमता को अनिवार्य करके और मध्यस्थ दायित्वों को फिर से परिभाषित करके, सरकार प्रतिक्रियाशील संयम से सक्रिय एल्गोरिदमिक शासन की ओर स्थानांतरित हो गई है।10 फरवरी को भारत की तकनीकी नीति परिदृश्य से एक बड़ा अपडेट सामने आया जब इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना...
भूल जाने से लेकर पाए जाने तकः सूचना के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता के साथ डिजिटल प्रतिष्ठा का संतुलन
भूल जाने का अधिकार प्रौद्योगिकी और व्यक्तिगत डेटा संरक्षण के आगमन के साथ तेजी से मुद्रा प्राप्त की है। व्यक्तिगत निजता और गरिमा में निहित, यह व्यक्तियों को व्यक्तिगत जानकारी को हटाने या डी-इंडेक्सिंग की तलाश करने की अनुमति देता है जो पुरानी है, या शायद असमान रूप से हानिकारक है।भारत, जस्टिस के. एस. पुट्टास्वामी (सेवानिवृत्त) और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य में सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देने के बाद , न्यायिक आदेशों के माध्यम से...
बिना कारण कैदी को 800–1000 किमी दूर जेल में भेजना असंवैधानिक: राजस्थान हाइकोर्ट ने आदेश किया रद्द
राजस्थान हाइकोर्ट ने एक विचाराधीन बंदी को उसके गृह नगर से 800–1000 किलोमीटर दूर स्थित जेल में स्थानांतरित करने के आदेश को निरस्त किया। अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस कारण के किया गया ऐसा स्थानांतरण बंदी के परिवार पर अनुचित और अत्यधिक बोझ डालता है।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के परिवार को इतनी लंबी दूरी तय कर मिलने के लिए बाध्य करना, जबकि स्थानांतरण के लिए कोई सुरक्षा या प्रशासनिक आवश्यकता दर्शाई नहीं गई, पूर्णतः अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण है। इसलिए यह आदेश विधि की दृष्टि में...
गैग ऑर्डर से प्रेस की स्वतंत्रता पर रोक नहीं, लेकिन नाबालिग की पहचान की सुरक्षा अनिवार्य: द्वारका SUV हादसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को द्वारका में हुए हालिया एसयूवी हादसे से जुड़े 17 वर्षीय नाबालिग आरोपी की पहचान सार्वजनिक करने पर रोक लगाने का आदेश दिया। इस दुर्घटना में 23 वर्षीय युवक की मृत्यु हो गई थी। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने केंद्र सरकार, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया सहित संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक एफआईआर से संबंधित नाबालिग के रिकॉर्ड या पहचान को चरित्र प्रमाणपत्र या किसी अन्य उद्देश्य से उजागर न किया जाए।यह याचिका नाबालिग के पिता द्वारा दायर की गई थी,...
गिरफ्तारी या रिमांड को चुनौती न देना मान लेना है: पटना हाईकोर्ट ने गैर-कानूनी हिरासत के लिए मुआवज़ा देने से मना किया
पटना हाईकोर्ट ने माना कि सही कोर्ट में गिरफ्तारी या रिमांड के आदेश को चुनौती न देना मान लेना है, और कोई व्यक्ति बाद में गैर-कानूनी हिरासत का आरोप लगाकर मुआवज़ा नहीं मांग सकता।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 30.07.2020 से 01.08.2020 तक सोनपुर पुलिस स्टेशन द्वारा याचिकाकर्ता की हिरासत को गैर-कानूनी घोषित करने और मुआवज़े का दावा करने की मांग की गई।याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसे बिना किसी FIR या कानूनी वजह के तीन दिनों तक गैर-कानूनी हिरासत में रखा गया।...
अगर मुस्लिम ड्राइवर, पैसेंजर मुंबई एयरपोर्ट के पास टेम्पररी शेड में नमाज़ पढ़ सकते हैं तो 'इंसानी' आधार पर विचार करें: बॉम्बे हाईकोर्ट ने MMRDA से कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) को अगले हफ़्ते तक एक बयान देने का निर्देश दिया, जिसमें यह बताया जाए कि क्या वह पूरी तरह से 'इंसानी' आधार पर ऑटोरिक्शा, टैक्सी, ओला-उबर ड्राइवरों और यहां तक कि पैसेंजर को भी छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट (CSMIA) के डोमेस्टिक टर्मिनल के पास एक टेम्पररी शेड में नमाज़ पढ़ने की इजाज़त देने पर विचार करेगा, कम-से-कम रमज़ान के पवित्र महीने के लिए तो।जस्टिस बर्गेस कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की डिवीजन...
ट्रांसफर पिटीशन में पत्नी की सुविधा अब सबसे ज़रूरी नहीं, वीसी सुविधा या आने-जाने का मुआवज़ा दिया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि शादी के झगड़ों में ट्रांसफर पिटीशन पर फैसला करने के लिए पत्नी की सुविधा अब अकेली या सबसे ज़रूरी बात नहीं है, क्योंकि अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा या आने-जाने के खर्च का मुआवज़ा जैसे सही विकल्प मौजूद हैं।जस्टिस दीपक खोत की बेंच ने कहा,"ट्रांसफर एप्लीकेशन पर फैसला करने के लिए पत्नी/महिला की सुविधा सबसे ज़रूरी बात नहीं है और ट्रांसफर की कार्रवाई के विकल्प दिए गए , जैसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए। अगर मामले को उस जगह के गवाहों से साबित करना है जहाँ मामला चल रहा...



















