हाईकोर्ट

बालाघाट में बैगा समुदाय के 25 बच्चों की मौत का मामला, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बैगा समुदाय के 25 बच्चों की कथित तौर पर संक्रामक बीमारियों और कुपोषण के कारण हुई मौतों का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया।इस मामले में दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह के बच्चों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें गंभीर बीमारियों और कुपोषण का सामना करना पड़ रहा है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस...

ई-रिक्शा के लिए देशभर में नीति बनाए केंद्र, 60 दिन में सभी राज्यों को भेजे: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को देशभर में ई-रिक्शा के संचालन को नियंत्रित करने के लिए 60 दिन के भीतर एक समान नीति तैयार कर सभी राज्यों को भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा की संख्या और उनके मार्गों को विनियमित करने की व्यवस्था जरूरी है, ताकि शहरों की सड़कों पर बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को कम किया जा सके।जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि ई-रिक्शा के संचालन के लिए ऐसी नीति तैयार की जाए, जिसमें किसी शहर की सड़क पर इनकी...

किराएदार के खिलाफ बेदखली मुकदमे में स्वतंत्र मालिकाना हक जताने वाला तीसरा व्यक्ति जरूरी पक्षकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किराए की संपत्ति पर स्वतंत्र मालिकाना हक का दावा करने वाला तीसरा व्यक्ति केवल इसलिए स्मॉल कॉज कोर्ट में बेदखली के मुकदमे का जरूरी या उचित पक्षकार नहीं बन जाता, क्योंकि उसका दावा मकान मालिक के मालिकाना हक से टकराता है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 10 के तहत किसी तीसरे व्यक्ति को पक्षकार बनाने की प्रक्रिया का इस्तेमाल सीमित अधिकार क्षेत्र वाली बेदखली कार्यवाही में अलग मालिकाना विवाद लाने के लिए नहीं किया जा सकता। जस्टिस डॉ. योगेंद्र...

अक्ल दांत और शरीर पर बाल से नाबालिग साबित नहीं होती लड़की, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपहरण मामले में दोषी को किया बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2011 के अपहरण मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366 के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि केवल अक्ल दांत का न निकलना या बगल और जननांगों पर बाल होने के आधार पर किसी लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम नहीं मानी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कहा कि तीसरी दात यानी अक्ल दांत का न निकलना इस निष्कर्ष का आधार नहीं हो सकता कि संबंधित व्यक्ति ने 18 वर्ष की उम्र पूरी नहीं की...

लोगों को विरोध करने से नहीं रोक सकते, हम एक लोकतंत्र हैं: मराठा नेता मनोज जारांगे के मुंबई मार्च के खिलाफ याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सवाल किया कि वह मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे-पाटिल को विरोध करने से कैसे रोक सकता है, यह देखते हुए कि भारत एक लोकतंत्र है और "आंदोलन करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है"।चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की डिवीजन बेंच पाटिल द्वारा दिए गए "मुंबई मार्च" के आह्वान के संबंध में निर्देश मांगने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पाटिल ने हाल ही में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग को लेकर अपनी 12 दिन की भूख हड़ताल खत्म की थी।याचिकाकर्ता का...

गणेश चतुर्थी पर 12 दिन की शराबबंदी तर्कहीन: बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकारा, कहा- अस्पताल मरीजों से भर जाएंगे

गणेश चतुर्थी के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से खासकर पुणे जिले में 12 दिनों तक शराब की बिक्री पर लगाए गए व्यापक प्रतिबंध पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ ने ऐसी व्यापक शराबबंदी को तर्कहीन बताते हुए कहा कि केवल यह मान लेना उचित नहीं है कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करेगा।चीफ जस्टिस ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि अदालत ऐसी व्यापक पाबंदी की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने कहा...

सड़क पर दो लोगों का जोर-जोर से चिल्लाना संज्ञेय अपराध नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक सड़क पर दो लोगों का एक-दूसरे से सिर्फ जोर-जोर से चिल्लाकर बात करना, अपने आप में महाराष्ट्र निषेध अधिनियम, 1949 की धारा 85(1) के तहत संज्ञेय अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आरोप के आधार पर कि दोनों व्यक्ति शराब के नशे में एक-दूसरे पर चिल्ला रहे थे, उनके खिलाफ आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता, जब तक अश्लीलता, अनैतिकता या आपत्तिजनक आचरण का कोई ठोस आरोप न हो।जस्टिस मिलिंद एन. जाधव दो आरोपियों की उस अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पिंपरी पुलिस...

रिश्तेदारों को शादी पसंद नहीं तो FIR के जरिए बालिग दंपती को धमका-प्रताड़ित नहीं कर सकते: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी बालिग दंपती की शादी उनके रिश्तेदारों को पसंद नहीं है तो महज इस वजह से FIR दर्ज कराकर पुलिस मशीनरी का इस्तेमाल करते हुए उन्हें धमकाया या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने एक विवाहित जोड़े को पुलिस सुरक्षा देते हुए निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि उन्हें न तो परेशान किया जाए और न ही उनके खिलाफ किसी तरह की हिंसा होने दी जाए।जस्टिस एमके ठक्कर की अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक महिला के परिवार की ओर से उसके पति के खिलाफ दर्ज FIR को...

विनेश फोगाट को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, वर्ल्ड चैंपियनशिप ट्रायल में शामिल होने की अंतरिम अनुमति नहीं

पहलवान विनेश फोगाट को 2026 सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के भारतीय टीम चयन ट्रायल में शामिल होने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 14 सितंबर को होने वाले महिला चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए पात्रता मानदंड से अंतरिम छूट देने से इनकार किया।कोर्ट ने कहा कि 7 सितंबर 2026 के भारतीय कुश्ती महासंघ के परिपत्र में तय पात्रता मानदंड सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होते हैं और निर्धारित प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेने वाला खिलाड़ी, कारण चाहे जो...

अच्छी अदालत की पहली जरूरत अच्छा बार, वकील जज को वह दिखा सकता है जो शायद छूट जाए: चीफ जस्टिस अल्पेश कोगजे

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने अपने स्वागत समारोह में स्वतंत्र और मजबूत बार को बेहतर न्याय व्यवस्था की पहली शर्त बताया। उन्होंने कहा कि एक जज के पास ज्ञान, अनुभव और अच्छे संस्थान का समर्थन हो सकता है, लेकिन एक अच्छा वकील जज को वह पक्ष दिखा सकता है, जो अन्यथा उसकी नजर से छूट जाता। यही प्रतिद्वंद्वी न्याय प्रणाली की खूबसूरती है वकील अपनी दलील रखता है और जज उसे सुनता है।चीफ जस्टिस कोगजे ने कहा कि गुजरात हाईकोर्ट से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट आना उनके लिए सम्मान और...

नाबालिगों को गाड़ी के बोनट से बांधकर घुमाने का मामला: पुणे पुलिस कमिश्नर के खिलाफ FIR की मांग

महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने पुणे में तीन नाबालिग लड़कों को पुलिस वाहन के बोनट से बांधकर सड़कों पर घुमाने और उनके साथ मारपीट किए जाने के मामले में पुणे पुलिस कमिश्नर समेत कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की।आयोग ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि मामले की जांच तेजी से पूरी कराई जाए और जांच ऐसे अधिकारी को सौंपी जाए, जो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक या उससे ऊपर के पद का हो। मामला पुणे के भारती विद्यापीठ थाना क्षेत्र का है। 21 जुलाई को एक युवक की हत्या के...

नैनीताल में दूषित पानी पर हाईकोर्ट सख्त, 24 घंटे में हेल्पलाइन बनाने का आदेश

नैनीताल जिले के कई इलाकों में दूषित पेयजल और जलजनित बीमारियों के फैलने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। हाईकोर्ट ने नैनीताल के जिलाधिकारी को 24 घंटे के भीतर आम लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर शुरू करने और उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। इस हेल्पलाइन के जरिए लोग दूषित पानी से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने वकील रवि बिष्ट की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। अदालत के सामने खबरों...

S. 197 CrPC | कस्टडी में हिंसा पुलिस की आधिकारिक ड्यूटी नहीं, यह अपराध है: इलाहाबाद हाईकोर्ट का पुलिसकर्मियों को राहत देने से इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कस्टडी में लोगों को बार-बार पीटने और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपी पुलिसकर्मियों की डिस्चार्ज (आरोप से बरी करने) की अर्जी खारिज करने का फैसला सही ठहराया।कोर्ट ने कहा कि ऐसी हिंसा को पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना जा सकता और इसे केवल अपराध ही कहा जा सकता है।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने पाया कि कस्टडी में लोगों के हाथ-पैर रस्सी से बांधकर और उन्हें उल्टा लिटाकर बार-बार पीटा गया था।कोर्ट पुलिसकर्मियों (जिनमें एक महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थी) की दो जुड़ी हुई...

राजनीतिक भाषण मामले में विधायक हुमायूं कबीर को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

पश्चिम बंगाल के आम जनता उन्नयन पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर को कथित राजनीतिक भाषण से जुड़े मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली। हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दी।कोर्ट ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत अपराध के प्रथम दृष्टया आवश्यक तत्व मामले में दिखाई नहीं देते और कबीर से हिरासत में पूछताछ की जरूरत भी नहीं है। जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने 10 सितंबर को हुमायूं कबीर की अग्रिम जमानत याचिका पर यह आदेश पारित किया।बता दें, मामला रेजीनगर थाने में दर्ज FIR से जुड़ा है।...

सरकारी कर्मचारी के लिए इस्तीफा देकर चुनाव लड़ना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने खारिज की री-जॉइनिंग की याचिका

चुनाव लड़ने के लिए सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी को चुनाव हारने के बाद दोबारा सेवा में लौटने की कोशिश भारी पड़ी। राजस्थान हाईकोर्ट ने साफ किया कि राजनीतिक दल के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने के बाद सरकारी कर्मचारी राजनीतिक निष्पक्षता का दावा नहीं कर सकता।हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यह पता चलना कि इस्तीफा देने के बाद पेंशन संबंधी लाभ नहीं मिलेंगे, इस्तीफा वापस लेने के लिए बाध्यकारी कारण नहीं माना जा सकता। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने उत्तर पश्चिम...

लिखित बयान में दिए गए बचाव को CPC ऑर्डर 7 नियम 11 के तहत शिकायत खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई ऐसा बचाव जो, अगर साबित हो जाए तो वादी के दावे को खारिज कर सकता है, उसे आम तौर पर सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर VII नियम 11(a) के तहत शिकायत खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि जांच केवल शिकायत में कही गई बातों पर निर्भर करती है और प्रतिवादी द्वारा अपने लिखित बयान में उठाए गए तर्क यह तय करने के लिए प्रासंगिक नहीं हैं कि शिकायत में कार्रवाई का कारण (cause of action) बताया गया है या नहीं।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा,“कार्रवाई...

पीड़िता की उम्र साबित नहीं हुई: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने POCSO के तहत 20 साल की सज़ा रद्द की; रेप के लिए 12 साल की सज़ा सुनाई

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO Act की धारा 4 के तहत सज़ा तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि पीड़िता की उम्र 18 साल से कम थी, भले ही IPC की धारा 376(1) के तहत रेप का अपराध अलग से साबित हो गया हो।जस्टिस माइकल ज़ोथानखुमा और जस्टिस शमीमा जहान की डिवीज़न बेंच ने कहा,"हमारा मानना ​​है कि भले ही POCSO Act, 2012 की धारा 4 के तहत सज़ा नहीं दी जा सकती - क्योंकि ट्रायल के दौरान पीड़िता की उम्र 18 साल से कम होना साबित नहीं हो पाया - लेकिन अपीलकर्ता द्वारा पीड़िता के साथ रेप की...

साफ़ तौर पर अवैध ढांचा: दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी स्कूल की ज़मीन पर अवैध रूप से बने मंदिर को हटाने का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने नर्सरी स्कूल के लिए तय ज़मीन पर बने मंदिर को रेगुलर करने की मांग वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा कि मंदिर बिना मंज़ूरी के और सरकारी ज़मीन के निपटारे से जुड़े नियमों के खिलाफ बनाया गया।जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि मंदिर "साफ़ तौर पर एक अवैध ढांचा" था और इसे उस ज़मीन पर बने रहने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।याचिकाकर्ता रजिस्टर्ड सोसाइटी है। उसने कोर्ट से DDA के 2021 का फैसला रद्द करने और वहां बने मंदिर को रेगुलर करने की मांग की थी।कोर्ट ने पाया कि यह ज़मीन मूल रूप से नर्सरी स्कूल...