हाईकोर्ट
पत्नी से भरण-पोषण मांगने वाले पति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, झूठे हलफनामे देने पर लगाया 15 लाख रुपये का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पत्नी से भरण-पोषण मांगने वाले पति पर 15 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया। अदालत ने पाया कि पति ने अपनी आय छिपाने और खुद को बेरोजगार बताने के लिए झूठे हलफनामे दाखिल किए।जस्टिस विनोद दिवाकर ने कहा कि पति की याचिका में कोई सच्चाई नहीं है और वह अदालत की निगरानी अधिकार का लाभ पाने के योग्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि याचिका को खारिज किया जाता है और 15 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि छह सप्ताह के भीतर पत्नी को दी जाए।मामले में पति ने दावा किया था कि वह...
महिला की संपत्ति पर भाई का दावा खारिज, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पति के वारिसों को प्राथमिकता: बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15(1) पूरी तरह लागू है और जब तक इसे असंवैधानिक घोषित नहीं किया जाता इसका पालन अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि किसी महिला की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति के उत्तराधिकार का क्रम इसी प्रावधान के अनुसार तय होगा।जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला ने यह फैसला उस अंतरिम आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें मृत महिला के भाई ने खुद को एकमात्र वारिस बताते हुए संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार मांगा था और अन्य पक्षों को संपत्ति से छेड़छाड़ करने से रोकने की...
दिल्ली दंगा साजिश मामले में बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने इशरत जहां की जमानत रद्द करने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में पूर्व पार्षद इशरत जहां को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली दिल्ली पुलिस की अपील खारिज की। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि जमानत दिए हुए चार साल से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान इशरत जहां द्वारा किसी भी शर्त का उल्लंघन करने का कोई आरोप सामने नहीं आया।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“हम यह स्पष्ट करते हैं कि हमने मामले के गुण-दोष पर कोई...
उत्तम नगर होली हिंसा: दिल्ली हाईकोर्ट ने मृतक के परिवार को दी पुलिस सुरक्षा
दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 साल के तरुण बुटोलिया के परिवार वालों को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया। तरुण की इस साल उत्तम नगर में होली के जश्न के दौरान हुई एक हिंसक झड़प में मौत हो गई थी।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने एडिशनल DCP से गुज़ारिश की कि वह संबंधित SHO को निर्देश दें कि वे अपना पर्सनल मोबाइल नंबर परिवार को दें, ताकि मुश्किल के समय वे उनसे संपर्क कर सकें।कोर्ट परिवार की उस अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने अपनी जान और आज़ादी को गंभीर खतरा बताते हुए पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की मांग की थी।...
NIA ने 'बिल्कुल नई कहानी' पेश की, ATS और CBI के निष्कर्षों को नज़रअंदाज़ किया: मालेगांव धमाकों की जांच पर बॉम्बे हाईकोर्ट
2006 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में चार व्यक्तियों को आरोपमुक्त करने के अपने आदेश में, बॉम्बे हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि एनआईए ने महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की गई जांच का पालन नहीं किया और विस्फोटों के संबंध में एक 'पूरी तरह से नई कहानी' पेश कर दी।गौरतलब है कि मामले की शुरुआती जांच करने वाली एटीएस ने दावा किया था कि नौ व्यक्तियों (जिन्हें बाद में बरी कर दिया गया) ने साजिश रची थी और 8...
असम CM की पत्नी की FIR: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज की। यह याचिका असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दायर एक FIR के संबंध में थी, जिसमें रिनिकी पर कई पासपोर्ट रखने के आरोप लगाए गए थे।जस्टिस पार्थिवज्योति सैकिया की बेंच ने 21 अप्रैल को दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद अपना अंतिम आदेश सुरक्षित रख लिया था।खेड़ा की ओर से पेश होते हुए सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि CM हिमंत ने खेड़ा के खिलाफ कथित तौर पर बयान दिया। साथ ही यह भी कहा...
दूसरी शादी करने पर नौकरी से निकाला तो बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- यह 'चौंकाने वाला'
एक अहम फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (23 अप्रैल) को कहा कि हालांकि हिंदू धर्म में पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना जायज़ नहीं है। फिर भी ऐसा 'गलती' करने वाले किसी सरकारी कर्मचारी को नौकरी से निकालने जैसी 'चौंकाने वाली' सज़ा नहीं दी जा सकती।जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस हितेन वेनेगांवकर की डिवीज़न बेंच ने संतोष चव्हाण को नौकरी पर वापस लेने का आदेश दिया। संतोष चव्हाण ने शुरू में बिलासपुर में रेलवे पुलिस फोर्स (RPF) में पुलिस कांस्टेबल के तौर पर जॉइन किया था और बाद में उनका ट्रांसफर ठाणे...
राजस्थान हाईकोर्ट ने लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी को दोषी की बेटी के इलाज का इंतज़ाम करने का निर्देश दिया, बार-बार पैरोल देने से किया इनकार
AIIMS में अपनी बेटी के इलाज के लिए दोषी की इमरजेंसी पैरोल की अर्ज़ी खारिज करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़िला लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी, सिरोही को निर्देश दिया कि वह सिरोही या किसी उचित सेंटर पर उसकी बेटी के इलाज के लिए सही इंतज़ाम करे।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने पाया कि इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता की बेटी मानसिक बीमारी से पीड़ित है, उसे नियमित इलाज की ज़रूरत होगी। हालाँकि, याचिकाकर्ता को नियमित अंतराल पर इमरजेंसी पैरोल देने की इजाज़त नहीं...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भर्ती परीक्षा में नकल के मामले में कथित 'आउटसाइड सॉल्वर' को ज़मानत देने से किया इनकार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर आरोप है कि उसने एक चल रही परीक्षा में नकल की साज़िश के तहत "आउटसाइड सॉल्वर" (बाहर से सवाल हल करने वाले) के तौर पर काम किया था। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल सबूत, जिनसे पता चलता है कि परीक्षा के दौरान ही प्रश्न पत्रों को रियल-टाइम में भेजा और हल किया गया, अपने आप में एक मज़बूत प्रथम दृष्टया (prima facie) सबूत हैं।कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह के अपराध सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की शुचिता पर सीधा हमला करते हैं और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता...
पत्नी की मामूली सैलरी स्टेटस के अंतर को नहीं भर पाती, बेरोज़गार पति की 'कमाई की अच्छी-खासी क्षमता': हाईकोर्ट ने गुज़ारा भत्ता बरकरार रखा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दायर रिट याचिका खारिज की, जिसमें उसने अपनी अलग रह रही पत्नी के लिए हर महीने ₹20,000 के अंतरिम गुज़ारा भत्ते के आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि एक स्वस्थ शरीर वाला, अच्छी तरह से पढ़ा-लिखा पति बेरोज़गारी का बहाना बनाकर गुज़ारा भत्ता देने की अपनी कानूनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकता।जस्टिस डॉ. के. मनमधा राव की सिंगल जज बेंच ने 17 अप्रैल के अपने आदेश में कहा कि सिर्फ़ इस बात से कि अलग रह रही पत्नी हर महीने ₹40,000 की सैलरी कमा रही है, उसे गुज़ारा भत्ता...
दिल्ली हाईकोर्ट का Rapido को निर्देश: दृष्टिबाधित यूज़र्स के लिए पहुंच सुनिश्चित करें
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय राइड-हेलिंग सर्विस Rapido को निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसका एप्लिकेशन, जब तक भी वह चालू रहता है, अपने यूज़र्स के लिए हर तरह से 'दिव्यांग-अनुकूल' बना रहे।जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सर्विस देने वालों का यह सकारात्मक कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि डिजिटल इंटरफ़ेस स्वाभाविक रूप से सुलभ हों। साथ ही सहायक तकनीकों के साथ संगत हों; इनमें स्क्रीन रीडर और दृष्टिबाधित व्यक्तियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले अन्य पहुंच उपकरण शामिल...
सिर्फ़ FIR के आधार पर हथियार का लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि हथियार का लाइसेंस सिर्फ़ FIR के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसमें हथियार के गलत इस्तेमाल या उसे चलाने का कोई ज़िक्र न हो।इलाहाबाद हाईकोर्ट के पिछले फ़ैसले राजीव कुमार @ मोनू शुक्ला बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (प्रधान सचिव, गृह और अन्य के ज़रिए) पर भरोसा करते हुए जस्टिस इरशाद अली ने कहा:“यह बिल्कुल साफ़ है कि सिर्फ़ FIR के आधार पर—जहां साफ़ तौर पर हथियार का कभी इस्तेमाल नहीं हुआ और हथियार के गलत इस्तेमाल के कोई आरोप नहीं हैं—लाइसेंस रद्द नहीं किया जा...
नाबालिग के तौर पर छोटे-मोटे अपराध के लिए सज़ा, डिफेंस सर्विसेज़ में नौकरी में रुकावट नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act) के फ़ायदेमंद स्वभाव पर ज़ोर देते हुए फ़ैसला दिया कि नाबालिगों द्वारा किए गए छोटे-मोटे अपराध किसी उम्मीदवार को मिलिट्री फ़ोर्स में नौकरी पाने से नहीं रोकेंगे।चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ़ की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"हम माननीय सिंगल जज के इस विचार से पूरी तरह सहमत हैं कि ये अपराध छोटे-मोटे हैं और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों के अपवादों के दायरे में नहीं आते। प्रतिवादी को सिर्फ़ सज़ा मिलना उसके नौकरी पाने में रुकावट...
ट्रांसजेंडर अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।यह याचिका 'नई भोर संस्था' नामक गैर-लाभकारी संगठन ने दायर की, जो राजस्थान का पहला LGBTQ समुदाय-आधारित संगठन होने का दावा करता है।यह NGO पिछले 20 वर्षों से ट्रांसजेंडर और LGBTQ समुदाय के अधिकारों और सामाजिक विकास के लिए काम करने का दावा करता है।याचिका में कहा गया कि यह अधिनियम 'स्वयं-अनुभूत लिंग पहचान' (self-perceived gender identity) के अधिकार को छीन...
खामोश पूछताछ: कस्टडी का सवाल, बिखरी हुई परवरिश
शांत पूछताछ एक चिंतनशील श्रृंखला है जो कानून के भीतर सूक्ष्म तनावों की जांच करती है - जहां औपचारिक सिद्धांत व्यवस्थित दिखाई दे सकता है, फिर भी जीवित वास्तविकता कठिन सवाल उठा रही है। इस निबंध में, यह पता लगाने के लिए कस्टडी मुकदमेबाजी की ओर मुड़ता है कि कैसे एक बच्चे पर विवाद अक्सर माता-पिता के खंडित न्यायिक प्रबंधन में फैलते हैं, और पारिवारिक प्रक्रिया को धारावाहिक अनुप्रयोगों से अधिक विचारशील संरचनात्मक डिजाइन की ओर क्यों बढ़ना चाहिए।......................................संरक्षकता याचिका दायर...
रजिस्ट्रार जनरल अपने ही जज की सेशंस जज के बारे में की गई टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वापस लिया आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपना वह निर्देश वापस ले लिया, जिसमें रजिस्ट्रार जनरल से कहा गया था कि वे एक सेशंस जज के खिलाफ एक सिंगल जज द्वारा की गई 'अपमानजनक' टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर करें। आखिरकार, कोर्ट ने इस मुद्दे को अपने आंतरिक प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से सुलझाने का फैसला किया।यह विवाद जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता द्वारा जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान पारित आदेश से जुड़ा है। इस आदेश में, शिवपुरी जिले में सरकारी फंड के कथित बड़े पैमाने पर गबन के संबंध...
लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने के लिए पूरी कोर्ट फीस तभी देनी होगी, जब अर्जी मंजूर हो जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जब लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन जारी करने के लिए अर्जी दी जाती है तो सिर्फ़ 25 रुपये की कोर्ट फीस देनी होती है। कोर्ट ने कहा कि पूरी कोर्ट फीस तभी देनी होगी, जब कोर्ट उस अर्जी को मंजूर कर ले।जस्टिस संदीप जैन ने फैसला दिया:“इंडियन सक्सेशन एक्ट की धारा 276 के तहत लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन मांगने वाली अर्जी देते समय 25 रुपये की टोकन राशि देनी होती है, और जब कोर्ट उस अर्जी को मंजूर कर लेता है, तभी याचिकाकर्ता को लेटर ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन असल में जारी करवाने के लिए पूरी...
क्या धर्मांतरण एक इलाज है? अनुसूचित जाति के दर्जे की समाप्ति पर एक पुनर्विचार
चिन्थड़ा आनंद बनाम आंध्र प्रदेश राज्य में सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने इस कानूनी स्थिति को दोहराया कि हिंदू धर्म, जैन धर्म या सिख धर्म के अलावा अन्य धर्मों में धर्मांतरण के परिणामस्वरूप अनुसूचित जाति का दर्जा खो जाता है। याचिकाकर्ता ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उत्तरदाताओं के खिलाफ प्राथमिकी को रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी। उत्तरदाताओं ने कथित तौर पर हिंदू-मडिगा समुदाय के एक सदस्य (अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत) याचिकाकर्ता के खिलाफ जातिवादी गाली दी थी और कथित तौर पर पीटा था। हालांकि,...
पीड़िता का शोर न मचाना सहमति का संकेत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने POCSO के तहत सज़ा रखी बरकरार
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी नाबालिग पीड़िता का आचरण, जैसे कि शोर न मचाना या भागने की कोशिश न करना, उसे सहमति या अपनी मर्ज़ी का संकेत नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने आगे दोहराया कि एक बार जब पीड़िता का नाबालिग होना साबित हो जाता है तो POCSO Act के तहत सहमति कानूनी रूप से बेमानी हो जाती है। साथ ही पीड़िता की गवाही में छोटी-मोटी विसंगतियां अभियोजन पक्ष के अन्यथा विश्वसनीय मामले को कमज़ोर नहीं करतीं।इसी आधार पर कोर्ट ने POCSO Act और IPC के तहत अपराधों के लिए अपीलकर्ता की सज़ा बरकरार...
भोजशाला मंदिर-कमल मौला विवाद: सर्वे का वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करे अपलोड, ताकि याचिकाकर्ता देख सकें: हाईकोर्ट ने ASI को निर्देश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया कि वह साइट सर्वे के वीडियोग्राफिक रिकॉर्ड को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करे और मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी को उसका एक्सेस (पहुंच) प्रदान करे।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया:"सुप्रीम कोर्ट के 01.04.2026 के आदेश के पैरा 6 में की गई टिप्पणियों को देखते हुए हम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को निर्देश देते हैं कि वह भोजशाला साइट पर की गई सर्वे की कार्यवाही की वीडियोग्राफी को एक...



















