हाईकोर्ट
गिरफ़्तारी/रिमांड के ख़िलाफ़ हैबियस कॉर्पस याचिका एक बार संज्ञान लिए जाने तक स्वीकार्य नहीं, आरोपी को नियमित ज़मानत लेनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पिछले हफ्ते दिए गए एक अहम फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब कोई सक्षम अदालत चार्जशीट पर संज्ञान ले लेती है तो कोई आरोपी अपनी गिरफ्तारी की वैधता या CrPC की धारा 167(2)/BNSS की धारा 187(2) के तहत पारित शुरुआती रिमांड आदेश को चुनौती देने वाली हेबियस कॉर्पस याचिका दायर नहीं कर सकता।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने तर्क दिया कि शुरुआती रिमांड आदेश केवल जांच के चरण के दौरान ही प्रभावी रहता है, क्योंकि संज्ञान लिए जाने के बाद इसका महत्व स्वाभाविक रूप से समाप्त...
पति/पत्नी का अपने पुराने पार्टनर से एक बार मिलना ही अकेले व्यभिचार नहीं माना जाएगा: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि पति या पत्नी का अपने पुराने पार्टनर से सिर्फ़ एक बार मिलना अपने आपमें व्यभिचार नहीं माना जा सकता।साथ ही कोर्ट ने दोहराया कि पति या पत्नी और उनके परिवार वालों पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाना मानसिक क्रूरता मानी जाएगी, जिसके आधार पर तलाक़ दिया जा सकता है।जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमार ने कहा,"ट्रायल कोर्ट ने अपने सही विवेक से यह भी पाया कि 11.01.2023 को पत्नी का अकेले ही दूसरे व्यक्ति (रेस्पोंडेंट...
CrPC की धारा 319 के तहत आरोपी को समन करने से पहले दर्ज किए गए सबूतों के आधार पर सज़ा नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फ़ैसला दिया कि किसी आरोपी की गैर-मौजूदगी में दर्ज किए गए सबूत, जिन पर CrPC की धारा 319 के तहत उसे समन करने के लिए भरोसा किया जाता है, बाद में उसकी सज़ा का आधार नहीं बन सकते।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने 2008 के एक मामले में हत्या के एक आरोपी को बरी करते हुए यह टिप्पणी की।ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को IPC की धारा 302 (धारा 149 के साथ), धारा 307 (धारा 149 के साथ), धारा 148 और धारा 506(2) के तहत दोषी ठहराया था। उसे आजीवन कारावास की...
लोक अदालतें तलाक़ नहीं दे सकतीं, उनके पास फ़ैसला सुनाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी लोक अदालत या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के पास तलाक़ का आदेश देने की कोई कानूनी क्षमता या अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि यह अधिकार पूरी तरह से नियमित सिविल और फ़ैमिली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।अपने 11 पन्नों के आदेश में जस्टिस शेखर बी सराफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने DLSA, उन्नाव की कड़ी आलोचना की। बेंच ने DLSA पर फ़ैमिली कोर्ट के तलाक़ देने के अधिकार पर 'कब्ज़ा करने' का आरोप लगाया। DLSA ने कुछ ऐसे 'अस्पष्ट'...
संशोधित वेतन नियम | जान-बूझकर प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर इसे छोड़ने से जुड़ा 'नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस' नहीं मांग सकते: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार को उन मेडिकल अधिकारियों का वेतन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था, जिन्होंने 'नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस' (NPA) का विकल्प नहीं चुना था, ताकि उनका वेतन उन जूनियर अधिकारियों के बराबर हो सके, जिन्होंने NPA का विकल्प चुना था।बता दें, कानून में यह प्रावधान है कि उन मेडिकल अधिकारियों को NPA (मूल वेतन का 20% की दर से गणना की जाती है) का भुगतान किया जाए, जो कोई भी प्राइवेट प्रैक्टिस न करने का विकल्प चुनते हैं; किसी भी उल्लंघन के मामले में उन पर...
न्यायिक सुधारों से लुप्त होता कोर्ट कल्चर
भारत में न्यायिक सुधार को सिर्फ़ खाली पदों, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं किया जा सकता। ये चीज़ें ज़रूरी हैं, लेकिन अदालतों की रोज़मर्रा की संस्कृति ही यह तय करती है कि औपचारिक सुधारों से लोगों की पहुँच, काम की गुणवत्ता और भरोसे में असल में सुधार होता है या नहीं।भारत में न्यायिक सुधार पर बहस की शुरुआत आम तौर पर लंबित मामलों से होती है। यह बात समझ में आती है। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड से पता चलता है कि ज़िला और तालुका अदालतों पर काम का बहुत ज़्यादा बोझ है, जहां लाखों मामले 10 साल...
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता
न्यायपालिका वह आखिरी संस्था है जिस पर भारतीयों को तब भरोसा करने को कहा जाता है, जब बाकी सब कुछ विफल हो जाता है। ठीक इसी वजह से इसके भीतर भ्रष्टाचार, दबाव या प्रभाव का ज़रा सा भी संकेत बहुत ज़्यादा परेशान करने वाला होता है। मद्रास हाईकोर्ट से आई हालिया टिप्पणियों के साथ-साथ पिछले साल की एक अलग घटना—जिसमें NCLAT चेन्नई बेंच के एक न्यायिक सदस्य ने यह कहते हुए खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था कि उन पर दबाव डाला गया था—ने एक असहज लेकिन ज़रूरी बहस को फिर से छेड़ दिया है: न्यायिक ईमानदारी कितनी मज़बूत...
POCSO Act के तहत उम्र, सहमति और अपराधीकरण पर एक नज़रिया
10 जनवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 'स्टेट ऑफ़ उत्तर प्रदेश बनाम अनिरुद्ध' मामले में केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012' (POCSO Act) के तहत 'रोमियो-जूलियट क्लॉज़' लाने पर विचार करे। यह सुझाव इस बढ़ती हुई न्यायिक चिंता को दर्शाता है कि एक ऐसा कानून, जिसे "बच्चे" को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया, उसका इस्तेमाल अब उन किशोरों के खिलाफ ज़्यादा किया जा रहा है, जो आपसी सहमति से बने रिश्तों में शामिल हैं। POCSO Act के तहत असली चुनौती सहमति की उम्र नहीं...
मीम से मूवमेंट तक: भारत की "कॉकरोच जनता पार्टी" के पीछे की संवैधानिक चिंता
लोकतंत्र अक्सर अपनी सबसे गहरी संस्थागत चिंताओं को चुनावों के दौरान नहीं, बल्कि मज़ाक-मस्ती के पलों में ज़ाहिर करते हैं। तथाकथित "कॉकरोच जनता पार्टी" (CJP) का हालिया उभार शुरू में मीम और व्यंग्य से प्रेरित एक और क्षणिक इंटरनेट घटना लग सकता है। हालांकि, इस आंदोलन को लेकर जनता में जो ज़बरदस्त गूंज सुनाई दे रही है, वह इस बात का संकेत है कि यह डिजिटल हास्य से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण चीज़ को दर्शाता है। इस व्यंग्य के पीछे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संस्थागत जवाबदेही, युवाओं में बेरोज़गारी, परीक्षाओं...
पिता बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव नहीं कर सकते: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी की गुहार पर भरण-पोषण की रकम बढ़ाने का आदेश देते हुए कहा कि पिता को बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया:"प्रतिवादी को बेटे और बेटी की पढ़ाई के खर्च में भेदभाव करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। अगर प्रतिवादी अपने बालिग बेटे की टेक्निकल पढ़ाई का काफ़ी खर्च उठा रहा है तो यह नाबालिग बेटी को उचित भरण-पोषण और पढ़ाई में मदद देने से मना करने का बहाना नहीं हो सकता।"पत्नी और नाबालिग...
पुलिस और अभियोजन पक्ष के बीच 'समन्वय की कमी' पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जताई चिंता
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग और अभियोजन पक्ष के बीच 'समन्वय की पूरी तरह से कमी' पर चिंता जताई। कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की, जब उसने पाया कि एक हत्या के मामले में, ए सब-इंस्पेक्टर की गवाही इसलिए दर्ज नहीं की जा सकी, क्योंकि उसे समन नहीं दिया जा सका था।जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने अपनी राय देते हुए कहा,"अगर पुलिस विभाग के एक सब-इंस्पेक्टर को भी समन नहीं दिया जा सका तो अन्य गवाहों की स्थिति का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसा लगता है कि अभियोजन पक्ष को इस बारे में बिल्कुल भी जानकारी...
सरकारी कर्मचारियों को ट्रांसफर या अटैचमेंट ऑर्डर के ज़रिए परेशान नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्राम रोज़गार सहायक का ट्रांसफर ऑर्डर रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी सरकारी कर्मचारी को अटैचमेंट या सज़ा के तौर पर किए गए ट्रांसफर के ज़रिए परेशान नहीं किया जा सकता। अगर सरकार किसी कर्मचारी का ट्रांसफर प्रशासनिक कारणों से करना चाहती है तो सबसे अच्छा तरीका ट्रांसफर पॉलिसी का पालन करना है।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने पाया कि शुरुआती जांच और उसके बाद आई जांच रिपोर्ट से यह साबित नहीं होता कि याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोप सही हैं।बेंच ने कहा, "इसलिए किसी भी कर्मचारी...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य से कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत को लेकर उठाए गए बचाव के कदमों की जानकारी मांगी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कान्हा टाइगर रिज़र्व में बाघों की मौत के मामले में अधिकारियों द्वारा उठाए गए बचाव और इलाज के कदमों के बारे में विस्तृत जवाब मांगा।जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकार की डिवीज़न बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए यह टिप्पणी की:"प्रतिवादी कान्हा नेशनल पार्क में बाघों की मौत के मामले में उनके द्वारा उठाए गए बचाव और इलाज के कदमों के बारे में अपनी जवाब के साथ विशिष्ट बयान देंगे, जिसे दो हफ़्तों के भीतर दाखिल किया जाना है। गर्मियों...
हाईकोर्ट ने नैनीताल मैदान में ईद की नमाज़ की इजाज़त देने के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील खारिज की
उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने शुक्रवार को राज्य द्वारा दायर विशेष अपील को 'आगे न बढ़ाने' (not pressed) के आधार पर खारिज किया। इस अपील में सिंगल-जज के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें नैनीताल के मशहूर जिमखाना और डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन के मैदान में ईद-उल-अज़हा (बकरीद) की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी गई थी।जब 29 मई को चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की बेंच के सामने इस मामले की सुनवाई हुई तो राज्य की ओर से पेश हुए स्टैंडिंग काउंसिल BPS मेर ने बताया कि वे इस अपील...
POCSO आरोपी को सशर्त जमानत: राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर लगाया एक साल का बैन
POCSO आरोपी को ज़मानत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अनोखी शर्त रखी है, जिसके तहत आरोपी 1 (एक) साल तक किसी भी तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। यह शर्त पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगाई गई।जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने यह टिप्पणी की कि अगर इस दौरान आरोपी अपने असली नाम या किसी भी काल्पनिक नाम से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए पाया जाता है तो उसकी ज़मानत रद्द कर दी जाएगी।मामले की पृष्ठभूमि यह है कि नाबालिग पीड़िता के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार...
बंटवारा कार्यवाही में मालिकाना हक का फैसला नहीं कर सकते राजस्व अधिकारी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राजस्व अधिकारी बंटवारा कार्यवाही के दौरान भूमि के मालिकाना हक से जुड़े विवादों का निपटारा नहीं कर सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति राजस्व अभिलेखों में भूमिस्वामी के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन स्वयं को भूमि का सह-स्वामी या भूमिस्वामी बताता है, उसे अपने अधिकार की घोषणा के लिए सक्षम दीवानी अदालत का दरवाजा खटखटाना होगा।जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें राजस्व मंडल और तहसीलदार के आदेशों को...
सिर्फ दीवानी विवाद लंबित होने से आपराधिक मुकदमा खत्म नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले के आरोप प्रथमदृष्टया आपराधिक अपराध का खुलासा करते हैं तो केवल इस आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती कि पक्षकारों के बीच दीवानी विवाद भी लंबित है। अदालत ने कहा कि दीवानी और आपराधिक कार्यवाही साथ-साथ चल सकती हैं।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें कुछ आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी आरोपमुक्ति याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के इंडियन ऑयल...
गोल्ड मेडल विवाद: राजस्थान हाइकोर्ट ने NLU जोधपुर से छात्र की अंकतालिका जारी करने पर मांगी जानकारी
राजस्थान हाईकोर्ट ने वर्ष 2025 के 17वें दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल से वंचित किए जाने का आरोप लगाने वाले एक छात्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) जोधपुर को छात्र की अंकतालिका जारी करने के संबंध में आवश्यक निर्देश और जानकारी पूरी करने को कहा।जस्टिस संजीत पुरोहित की पीठ ने 22 मई को मामले की सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय को यह निर्देश दिया। अदालत ने मामले को जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा कि इस बीच विश्वविद्यालय छात्र की अंकतालिका जारी...
गरीबी जमानत के अधिकार में बाधा नहीं बन सकती, जमानतदार न मिलने पर आरोपी को जेल में नहीं रखा जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि किसी आरोपी को केवल इस वजह से अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता कि वह जमानतदारों की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि गरीबी किसी व्यक्ति के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार को प्रभावित नहीं कर सकती।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने यह टिप्पणी करते हुए एक आरोपी के लिए लगाई गई दो जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त को निरस्त कर दिया और उसे बढ़े हुए निजी मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया।मामला घर में घुसपैठ के एक आरोपी...
महिला के कपड़े पहनाकर आरोपी को बाजार में घुमाना गरिमा पर सीधा हमला: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी को कथित तौर पर महिला के कपड़े पहनाकर भीड़भाड़ वाले बाजार में घुमाने और उसका सिर मुंडवाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि ऐसी घटना मानव गरिमा और संवैधानिक नैतिकता के मूल सिद्धांतों पर सीधा प्रहार करती है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के आरोप सही हैं तो उसके पास हर्जाना, मुआवजा या व्यक्तिगत क्षति से संबंधित कानूनी कार्यवाही शुरू करने का विकल्प खुला है।मामला एक धोखाधड़ी के आरोपी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि पुलिस...




















