हाईकोर्ट

स्कीयर मनजीत को 2026 शीतकालीन ओलंपिक टीम से बाहर करना मनमाना: दिल्ली हाइकोर्ट ने IOA को लगाई फटकार
स्कीयर मनजीत को 2026 शीतकालीन ओलंपिक टीम से बाहर करना मनमाना: दिल्ली हाइकोर्ट ने IOA को लगाई फटकार

दिल्ली हाइकोर्ट ने क्रॉस-कंट्री स्कीयर मनजीत को 2026 के मिलानो–कोर्तिना शीतकालीन ओलंपिक खेलों के लिए भारतीय दल से बाहर किए जाने को मनमाना, अनुचित और अंतरराष्ट्रीय योग्यता ढांचे के विपरीत करार दिया।हाइकोर्ट ने भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की चयन प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी करते हुए मनजीत की ओलंपिक में भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।जस्टिस जस्मीत सिंह ने मनजीत द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि IOA और उसकी ऐड-हॉक कमेटी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसे पात्रता मानदंड लागू किए, जो...

दिल्ली महिला आयोग में अध्यक्ष व स्टाफ की नियुक्ति की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
दिल्ली महिला आयोग में अध्यक्ष व स्टाफ की नियुक्ति की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

दिल्ली महिला आयोग (DCW) में अध्यक्ष और अन्य स्टाफ पदों की लंबे समय से रिक्तियों को भरने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। यह याचिका राजद सांसद सुधाकर सिंह ने अपने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की है।याचिका में कहा गया है कि वैधानिक रूप से गठित और महिलाओं को संस्थागत सहायता, शिकायत निवारण, परामर्श और संकट हस्तक्षेप प्रदान करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद, दिल्ली महिला आयोग लंबे समय से न तो भौतिक रूप से सुलभ है और न ही प्रभावी रूप से...

18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से सिर्फ दोस्ताना रिश्ते भी कानूनन मंज़ूर नहीं, इसी वजह से कई युवा जेलों में सड़ रहे हैं: गुजरात हाईकोर्ट
18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से सिर्फ दोस्ताना रिश्ते भी कानूनन मंज़ूर नहीं, इसी वजह से कई युवा जेलों में सड़ रहे हैं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में एक नाबालिग लड़की के कथित अपहरण के मामले में दो युवकों की सजा को रद्द करते हुए कहा कि वे 'गुड समैरिटन' (Good Samaritans) थे, जिन्होंने संकट में फंसी लड़की की मदद की, लेकिन इसके बदले उन्हें जेल जाना पड़ा। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के साथ किसी भी प्रकार के संबंध—even यदि वह मित्रतापूर्ण हों—को कानून की मंजूरी न होने के कारण कई युवा सख्त कानूनों के तहत जेलों में सड़ रहे हैं।जस्टिस गीता गोपी ने यह टिप्पणी दो युवकों—रोहन और...

कर्ज की वापसी की मांग को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाइकोर्ट
कर्ज की वापसी की मांग को आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता: मध्यप्रदेश हाइकोर्ट

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति द्वारा अपने कर्ज की रकम वापस मांगना या उसके बदले मृतक की मोटरसाइकिल अपने पास रखना, आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं माना जा सकता।हाइकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत लगाए गए आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप रद्द कर दिया।जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की एकल पीठ ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध तभी बनता है जब आरोपी की मंशा स्पष्ट रूप से मृतक को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की हो। केवल कर्ज की वापसी की मांग को ऐसी मंशा नहीं माना...

चेक बाउंस मामले में यदि आरोपी की दलील प्रथम दृष्टया विश्वसनीय हो तो अंतरिम मुआवजा नहीं दिया जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट
चेक बाउंस मामले में यदि आरोपी की दलील प्रथम दृष्टया विश्वसनीय हो तो अंतरिम मुआवजा नहीं दिया जा सकता: गुवाहाटी हाइकोर्ट

गुवाहाटी हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि चेक बाउंस मामले में ऐसे विवादित तथ्य हों जिनका निपटारा साक्ष्यों के माध्यम से किया जाना आवश्यक हो, तो उस अवस्था में परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 143-ए के तहत अंतरिम मुआवजा देना उचित नहीं होगा।जस्टिस प्रांजल दास ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें आरोपी को चेक राशि का 20 प्रतिशत अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।हाइकोर्ट ने कहा कि अंतरिम मुआवजा देने से पहले कोर्ट का यह संतुष्ट होना आवश्यक है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में...

कानून से ऊपर कोई नहीं: न्यायिक आदेशों की अवहेलना पर राजस्थान हाईकोर्ट ने डिप्टी कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया
'कानून से ऊपर कोई नहीं': न्यायिक आदेशों की अवहेलना पर राजस्थान हाईकोर्ट ने डिप्टी कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने 70 वर्षीय विधवा महिला द्वारा माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत दायर आवेदन पर समयबद्ध निर्णय न देने और अदालत के आदेशों की बार-बार अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह अधिनियम त्वरित राहत के उद्देश्य से बनाया गया है और कोई भी प्राधिकारी मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित रखकर अदालत के निर्देशों की जानबूझकर अनदेखी नहीं कर सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने...

1991 विधानसभा हंगामा मामले को हाईकोर्ट ने किया रद्द, यूपी सरकार को पुराने मुकदमों पर नीति बनाने का निर्देश
1991 विधानसभा हंगामा मामले को हाईकोर्ट ने किया रद्द, यूपी सरकार को पुराने मुकदमों पर नीति बनाने का निर्देश

न्यायपालिका के सीमित संसाधनों और लंबित मामलों के बढ़ते बोझ पर गंभीर टिप्पणी करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में कथित हंगामे से जुड़े 34 वर्ष पुराने आपराधिक मुकदमे को रद्द कर दिया। अदालत ने ऐसे पुराने और निष्प्रभावी मुकदमों को “निरर्थक (futile) अभ्यास” करार देते हुए राज्य सरकार से कहा कि वह विभिन्न अदालतों में लंबित ऐसे मामलों के “डेडवुड को काटे”।जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने धारा 482 दंप्रसं के तहत दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 1991 में विधानसभा के गेट...

हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ को लाइफस्टाइल डिज़ीज़ बताकर सैन्य कर्मियों को दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट
हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ को 'लाइफस्टाइल डिज़ीज़' बताकर सैन्य कर्मियों को दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाइकोर्ट

बॉम्बे हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज़, स्पॉन्डिलाइटिस जैसी बीमारियों को केवल 'लाइफस्टाइल' या 'संवैधानिक' रोग बताकर सशस्त्र बलों के कर्मियों को दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। हाइकोर्ट ने सशस्त्र बल अधिकरण (AFT), मुंबई का निर्णय बरकरार रखा, जिसमें सेना और नौसेना के कर्मियों को यह मानते हुए दिव्यांगता पेंशन देने का निर्देश दिया गया कि ये बीमारियां उनकी सेवा के दौरान उत्पन्न हुईं या सेवा की परिस्थितियों के कारण बढ़ीं।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड...

Article 21 | आपात स्थिति में गैर-सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज पर मेडिकल रिइम्बर्समेंट से इनकार नहीं किया जा सकता: पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट
Article 21 | आपात स्थिति में गैर-सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज पर मेडिकल रिइम्बर्समेंट से इनकार नहीं किया जा सकता: पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह एक सरकारी कर्मचारी की पत्नी के आपातकालीन इलाज पर गैर-सूचीबद्ध निजी अस्पताल में हुए शेष मेडिकल खर्च का भुगतान करे। हाइकोर्ट ने कहा कि बिना कारण बताए मेडिकल रिइम्बर्समेंट से इनकार करना मनमाना है और यह संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि जीवन-रक्षक आपात परिस्थितियों में मरीज या उसके परिजन के पास PGIMER जैसे सरकारी अस्पताल में भर्ती होने की प्रतीक्षा करने का कोई वास्तविक विकल्प नहीं...

UP STF IG पर रिश्वत लेकर अपराधी छोड़ने के आरोप वाली खबर मामले में न्यूज़18 के पत्रकारों को हाइकोर्ट से राहत नहीं
UP STF IG पर रिश्वत लेकर अपराधी छोड़ने के आरोप वाली खबर मामले में न्यूज़18 के पत्रकारों को हाइकोर्ट से राहत नहीं

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ बेंच ने न्यूज़18 चैनल के एग्जीक्यूटिव एडिटर और अन्य पत्रकारों द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उनके खिलाफ जारी समन आदेश को चुनौती दी गई थी। यह समन सीनियर आईपीएस अधिकारी अमिताभ यश द्वारा दायर आपराधिक मानहानि के मामले में जारी किया गया।जस्टिस ब्रिज राज सिंह की पीठ ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई करते समय हाइकोर्ट “मिनी ट्रायल” नहीं कर सकता और न ही इस स्तर पर पत्रकारों की निर्दोषता से संबंधित साक्ष्यों का मूल्यांकन किया जा...

बिना जांच के प्रोबेशनरी टीचर को नौकरी से निकालने के लिए स्टूडेंट को रोमांटिक मैसेज भेजना काफी: बॉम्बे हाईकोर्ट
बिना जांच के प्रोबेशनरी टीचर को नौकरी से निकालने के लिए स्टूडेंट को 'रोमांटिक' मैसेज भेजना काफी: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फैसला सुनाया कि अगर कोई प्रोबेशन पर टीचर स्कूल के घंटों के बाद किसी स्टूडेंट के साथ लगातार मैसेजिंग करता है, जो उत्पीड़न के बराबर हो सकता है, ऐसी स्थिति में स्कूल मैनेजमेंट महाराष्ट्र प्राइवेट स्कूल कर्मचारी (सेवा की शर्तें) रेगुलेशन एक्ट, 1977 के प्रावधानों का इस्तेमाल करके बिना किसी जांच वगैरह के टीचर की सर्विस खत्म कर सकता है।सिंगल-जज जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन ने गावित गुलाबसिंह सुका की याचिका पर सुनवाई की, जिन्होंने रायगढ़ जिले के म्हासाला के स्कूल के फैसले को...

कोर्ट्स में सर्विस मैटर्स की बाढ़: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य को इन-हाउस कर्मचारी विवाद समाधान प्रणाली बनाने का सुझाव दिया
कोर्ट्स में सर्विस मैटर्स की बाढ़: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य को इन-हाउस कर्मचारी विवाद समाधान प्रणाली बनाने का सुझाव दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (28 जनवरी) को राज्य सरकार को अपने कर्मचारियों की शिकायतों को आंतरिक रूप से हल करने के लिए एक विवाद समाधान प्रणाली स्थापित करने का सुझाव दिया।जस्टिस विनय सर्राफ की बेंच ने देखा कि हाई कोर्ट्स में सर्विस मैटर्स की बाढ़ आ गई है, जिन्हें शुरुआती चरण में ही हल किया जा सकता था।बेंच ने कहा;"मैंने राज्य सरकार को यह सुझाव देना उचित समझा कि वह राज्य सरकार के कर्मचारियों के विवादों या शिकायतों को शुरुआती चरण में ही तय करने के लिए नीति बनाए ताकि मामलों की संख्या न बढ़े। इसके...

आरोपी को सबूत बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, CrPC की धारा 91 के तहत फैक्ट्स मेमो का ड्राफ्ट: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व जज को CBI नोटिस को गलत ठहराया
आरोपी को सबूत बनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, CrPC की धारा 91 के तहत फैक्ट्स मेमो का ड्राफ्ट: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व जज को CBI नोटिस को गलत ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस इशरत मसरूर कुरैशी को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा CrPC की धारा 91 के तहत जारी किए गए नोटिस को गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे नोटिस का इस्तेमाल "आरोपी को मजबूर करने" के लिए नहीं किया जा सकता ताकि वह अपनी पर्सनल जानकारी के आधार पर तथ्यों का खुलासा करे।कोर्ट ने कहा कि विवादित नोटिस, जिसमें आरोपी से बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और कर्मचारियों की डिटेल्स मांगी गईं, वह संविधान के अनुच्छेद 20(3) के तहत प्रतिबंधित गवाही देने के...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बहुत ज़्यादा लंबी होने के कारण जमानत याचिका खारिज करने का आदेश रद्द किया, कहा- आज़ादी कागज़ों की संख्या पर निर्भर नहीं हो सकती
दिल्ली हाईकोर्ट ने "बहुत ज़्यादा लंबी" होने के कारण जमानत याचिका खारिज करने का आदेश रद्द किया, कहा- आज़ादी कागज़ों की संख्या पर निर्भर नहीं हो सकती

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें सिर्फ़ इस आधार पर बेल याचिका खारिज कर दी गई थी कि वह "बहुत ज़्यादा लंबी और भारी" थी।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि न्यायिक अनुशासन के लिए ज़रूरी है कि मामलों का फ़ैसला सार के आधार पर किया जाए, न कि रूप के आधार पर खारिज किया जाए। साथ ही किसी आरोपी की आज़ादी कोर्ट के सामने रखे गए कागज़ों की कथित 'संख्या' पर निर्भर नहीं हो सकती।कोर्ट ने कहा,"किसी व्यक्ति की आज़ादी को वकील की ड्राफ़्टिंग शैली या उसके द्वारा बेल याचिका के...

डिक्री होल्डर समझौता नहीं तोड़ सकता या जजमेंट देनदार का चेक लेने से मना करके एग्जीक्यूशन शुरू नहीं कर सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
डिक्री होल्डर समझौता नहीं तोड़ सकता या जजमेंट देनदार का चेक लेने से मना करके एग्जीक्यूशन शुरू नहीं कर सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक डिक्री होल्डर जानबूझकर जजमेंट देनदार द्वारा डिक्री के कानूनी निपटारे के लिए दिए गए चेक को लेने या कैश कराने से मना करके समझौते की डिक्री की शर्तों को नाकाम नहीं कर सकता या एग्जीक्यूशन की कार्यवाही शुरू नहीं कर सकता।जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि जहां समझौते की डिक्री में पेमेंट का कोई खास तरीका, ब्याज या देरी से किस्तों के लिए कोई नतीजा तय नहीं है, वहां तय समय के अंदर चेक का कानूनी तौर पर पेश किया जाना वैध माना जाएगा और कानून की नज़र में डिक्री को...

बार एसोसिएशन नियोक्ता नहीं, POSH Act के अनुसार इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी का गठन नहीं कर सकता: केरल हाईकोर्ट
बार एसोसिएशन 'नियोक्ता' नहीं, POSH Act के अनुसार इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी का गठन नहीं कर सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोल्लम बार एसोसिएशन द्वारा इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) का गठन कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 [POSH Act] के उद्देश्य और आवश्यकता के खिलाफ है।जस्टिस पी.एम. मनोज ने तर्क दिया कि एक बार एसोसिएशन एक्ट के अर्थ में 'नियोक्ता' नहीं है। इसलिए गठित ICC एक्ट के अनुसार नहीं है।उन्होंने कहा:“बार एसोसिएशन के संबंध में एकमात्र उल्लेख केरल एडवोकेट्स वेलफेयर फंड एक्ट, 1980 में मिलता है। वह पूरी तरह से उन व्यक्तियों का रोल बनाए...

ऑनलाइन मानहानि का मुकदमा केवल वहीं चलेगा, जहां प्रतिवादी स्थित हो या जहां वास्तविक नुकसान हुआ हो: दिल्ली हाईकोर्ट
ऑनलाइन मानहानि का मुकदमा केवल वहीं चलेगा, जहां प्रतिवादी स्थित हो या जहां वास्तविक नुकसान हुआ हो: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने आईआरएस अधिकारी समीर ज्ञानदेव वानखेड़े द्वारा नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज़ Ba***ds of Bollywood के खिलाफ दायर मानहानि वाद को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऑनलाइन मानहानि का मुकदमा केवल उसी न्यायालय में दायर किया जा सकता है, जहां प्रतिवादी स्थित हो या जहां वास्तव में प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची हो।अदालत ने यह भी दोहराया कि इंटरनेट पर सामग्री की हर जगह उपलब्धता मात्र से किसी भी मंच पर मुकदमा दायर करने का असीमित अधिकार नहीं मिल जाता।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि ऑनलाइन मानहानि...

गौशाला में गायों की मौत, खुर और सींग गायब: हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब
गौशाला में गायों की मौत, खुर और सींग गायब: हाइकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब तलब

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने चंडीगढ़ के रायपुर कलां स्थित एक गौशाला में बड़ी संख्या में मवेशियों की संदिग्ध मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा।मीडिया रिपोर्ट्स में गौशाला में कथित क्रूरता, लापरवाही और शवों के अवैध निपटान के गंभीर आरोप सामने आए।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की पीठ ने चंडीगढ़ यूटी प्रशासन को इस संबंध में अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया।इससे पहले 16 जनवरी को जस्टिस संजय वशिष्ठ ने प्रारंभिक आदेश पारित करते हुए...

30 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 5,000 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पुलिस ASI की सज़ा बरकरार रखी
30 साल बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 5,000 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पुलिस ASI की सज़ा बरकरार रखी

दिल्ली हाईकोर्ट ने लगभग तीन दशक पुराने भ्रष्टाचार के एक मामले में एक पुलिस असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) की सज़ा और दोषसिद्धि बरकरार रखी।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा की बेंच ने कहा कि गवाहों की गवाही में मामूली कमियां अवैध रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार करने के स्पष्ट सबूत को छिपा नहीं सकतीं।बेंच ने कहा,"रिकॉर्ड पर मौजूद पूरे सबूतों को पढ़ने से पता चलता है कि कमियां मामूली हैं और बहुत ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने अभियोजन पक्ष के मुख्य मामले पर कोई असर नहीं डाला।"बेंच ने बलदेव सिंह द्वारा दायर...