हाईकोर्ट
हिंसक विरोध करना, सरकार के खिलाफ नारेबाजी या असहमति व्यक्त करना राजद्रोह नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि केवल हिंसक विरोध प्रदर्शन में भाग लेना, सरकार के खिलाफ नारे लगाना या असहमति व्यक्त करना स्वचालित रूप से देशद्रोह का अपराध नहीं है।जस्टिस विनोद एस भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर ने कहा,"हिंसक विरोध को दंगा माना जा सकता है, लेकिन हिंसा की ऐसी कार्रवाई को सरकार के खिलाफ नफरत या अवमानना का कार्य नहीं माना जाएगा। एक निर्वाचित लोकतंत्र में सरकार या शासन के खिलाफ नारेबाजी, उसके नागरिकों के खिलाफ राजद्रोह के आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।"न्यायालय ने आगे...
2017 डेरा हिंसा: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम के समर्थकों को बरी करने के फैसले को सही ठहराया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की उस अपील को खारिज किया, जिसमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के चार समर्थकों को बरी किए जाने को चुनौती दी गई। इन समर्थकों पर अगस्त 2017 में डेरा प्रमुख को दोषी ठहराए जाने के बाद भड़की हिंसा के दौरान कैथल के कलायत में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVN) के ऑफिस में तोड़फोड़ करने और आग लगाने का आरोप था। [2026 LiveLaw (PH) 230]कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष न तो आरोपियों की पहचान...
महिला कॉन्स्टेबल के बिना महिला के बेडरूम में पुलिस का घुसना निजता का उल्लंघन: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मोबाइल ज़ब्त करने को गैर-कानूनी बताया
बॉम्बे हाई कोर्ट (नागपुर बेंच) ने कहा कि पुलिस अधिकारी जांच के नाम पर कानूनी सुरक्षा उपायों की अनदेखी नहीं कर सकते। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रात में महिला कॉन्स्टेबल के बिना किसी महिला के बेडरूम में घुसना और 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) के तहत तय प्रक्रिया का पालन किए बिना उसका मोबाइल फोन ज़ब्त करना, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन है।जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस निवेदिता मेहता की बेंच ने कहा कि धारा 185 के तहत जांच अधिकारी के लिए यह ज़रूरी है कि वह...
Right To Be Forgotten: FIR रद्द होने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने ऑनलाइन कोर्ट रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता का नाम छिपाने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वह उस याचिकाकर्ता की पहचान छिपाएं (मास्क करें), जिसने अपने "भूल जाने के अधिकार" (right to be forgotten) का इस्तेमाल किया था। कोर्ट ने माना कि जब किसी व्यक्ति के कथित अपराध में शामिल होने से जुड़ी कानूनी कार्यवाही रद्द कर दी जाती है तो इंटरनेट पर उस जानकारी को बनाए रखने से कोई जनहित नहीं सधता।कोर्ट ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि निजता का अधिकार (Right to Privacy), जो संविधान के अनुच्छेद 21 का एक अहम हिस्सा है, उसमें 'भूल जाने का...
एमपी हाईकोर्ट ने नाबालिग़ उम्र में शादी के आरोप वाली FIR में वायरल कुंभ मेला स्टार और उनके पति को अंतरिम सुरक्षा दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वायरल कुंभ मेला स्टार और उनके पति को अंतरिम राहत दी। उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उनकी अलग-अलग धर्मों की शादी को अपराध साबित करने के लिए महिला के जन्म प्रमाण पत्र में हेरफेर किया गया। जोड़े ने जन्म प्रमाण पत्र को बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित धोखाधड़ी की स्वतंत्र जांच के आदेश देने की भी मांग की।मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस गजेंद्र सिंह की बेंच ने उन्हें नाबालिग़ उम्र में शादी के आरोपों पर दर्ज FIR में अंतरिम सुरक्षा दी।"मौजूद पक्षों के वकीलों की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिकेटर अभिषेक शर्मा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, डीपफेक और बिना अनुमति वाले मर्चेंडाइज़ को हटाने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा करते हुए कई सोशल मीडिया अकाउंट्स, ऑनलाइन सेलर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को उनकी सहमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, आवाज़, शक्ल-सूरत और व्यक्तित्व से जुड़ी अन्य विशेषताओं का इस्तेमाल करने से रोक दिया।जस्टिस ज्योति सिंह ने शर्मा द्वारा दायर एक मुकदमे में यह अंतरिम आदेश पारित किया। शर्मा ने आरोप लगाया कि AI से बनी तस्वीरों, मॉर्फ्ड कंटेंट, डीपफेक, झूठे वीडियो और उनके नाम व शक्ल-सूरत वाले मर्चेंडाइज़ की बिना अनुमति बिक्री के...
पति की नेट इनकम का 25% गुज़ारा-भत्ता तय करना ज़रूरी नहीं; कोर्ट कम या ज़्यादा भी दे सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी को पति की नेट सैलरी का 25% गुज़ारा-भत्ता देने का जो पैमाना (बेंचमार्क) अक्सर इस्तेमाल किया जाता है, वह सिर्फ़ एक "सामान्य गाइडलाइन" है, न कि कोई अनिवार्य नियम।जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने साफ़ किया कि हर मामले के तथ्यों के आधार पर कोर्ट के पास कम या ज़्यादा भत्ता तय करने का अधिकार है।कोर्ट ने यह भी साफ़ किया कि गुज़ारा-भत्ता तय करने के लिए "नेट इनकम" का मतलब आम तौर पर ज़रूरी कटौतियों और टैक्स के बाद बची हुई इनकम से होता है, न कि ग्रॉस सैलरी से।कोर्ट असल में दो...
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का सर्टिफिकेट लेकर एलोपैथी नहीं कर सकते, बिना मान्यता इलाज करना झोलाछाप डॉक्टरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का सर्टिफिकेट रखने वाला व्यक्ति एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति से मरीजों का इलाज नहीं कर सकता।अदालत ने कहा कि मान्यता प्राप्त मेडिकल योग्यता के बिना एलोपैथी करना झोलाछाप डॉक्टरी है और ऐसे लोगों को मरीजों का इलाज करने की अनुमति देना जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने एटा के चीफ मेडिकल ऑफिसर द्वारा एक प्राइवेट अस्पताल को सील किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए यह...
सेशन जज सुनवाई के बीच लंबित मुकदमा उसी न्यायिक अधिकारी की नई अदालत में स्थानांतरित कर सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी आपराधिक मुकदमे की आंशिक सुनवाई कर रहे न्यायिक अधिकारी का तबादला उसी सत्र प्रभाग के भीतर किसी अन्य सक्षम अदालत में हो जाता है, तो सेशन जज दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC)। की धारा 408 के तहत अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए उस लंबित मुकदमे को अधिकारी की नई अदालत में स्थानांतरित कर सकते हैं।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने इस संबंध में दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि स्थानांतरण का उद्देश्य उस न्यायिक अधिकारी को गवाहों के हावभाव और आचरण का लाभ बनाए...
लंबे समय तक आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध 'रेप' नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्यक्ति को आरोपों से मुक्त किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आपसी सहमति से बालिगों के बीच लंबे समय तक चले शारीरिक संबंधों को शादी का वादा पूरा न होने पर 'रेप' नहीं कहा जा सकता, खासकर तब जब मूल विवाद मुख्य रूप से सिविल और आर्थिक प्रकृति का हो।दो जुड़ी हुई आपराधिक अपीलों को स्वीकार करते हुए जस्टिस संतोष राय की बेंच ने आरोपी (सौरभ पाल सिंह) को IPC की धाराओं 376, 420, 406, 504 और 506, और SC/ST (अत्याचार निवारण) Act की धारा 3(2)(v) के तहत सभी आरोपों से मुक्त किया।इस प्रकार कोर्ट ने प्रयागराज के स्पेशल जज (SC/ST Act) के उन...
छात्रावास शुल्क विवाद में परीक्षा से रोकने के खिलाफ लॉ स्टूडेंट पहुंची मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस
छात्रावास शुल्क को लेकर विवाद के कारण एलएलबी की स्टूडेंट को द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने से रोकने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया।अदालत ने दोनों पक्षों से जवाब तलब करते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की।जस्टिस दीपक खोत की पीठ ने कहा,"प्रतिवादियों को सात कार्य दिवस के भीतर प्रक्रिया शुल्क जमा करने पर नोटिस जारी किया जाए। नोटिस चार सप्ताह में प्रत्यावर्तनीय हो। इसके बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाए।"याचिकाकर्ता तीन वर्षीय एलएलबी...
निरसन कानून का लाभ नहीं मिलेगा यदि अतिरिक्त भूमि का कब्जा पहले ही लिया जा चुका हो, देरी से दायर याचिका भी खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शहरी भूमि (सीमा निर्धारण एवं विनियमन) अधिनियम, 1976 के तहत अतिरिक्त घोषित भूमि का कब्जा शहरी भूमि (सीमा निर्धारण एवं विनियमन) निरसन अधिनियम, 1999 लागू होने से पहले ही प्रशासन द्वारा ले लिया गया था, तो भू-स्वामी निरसन अधिनियम का लाभ लेकर उस भूमि पर अपना अधिकार बरकरार रखने का दावा नहीं कर सकता।हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कब्जा लिए जाने के कई वर्षों बाद ऐसे भूमि सीमा निर्धारण की कार्यवाही को चुनौती दी जाती है तो अत्यधिक देरी के आधार पर भी याचिका खारिज की जा...
परिवार के लोग घर में मौजूद थे, ऐसे में दुष्कर्म की घटना संभव नहीं लगती; पीड़िता के बयान में भी विरोधाभास, बरी करने का फैसला बरकरार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 के दुष्कर्म मामले में राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए आरोपी को बरी करने का ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।अदालत ने कहा कि जिस समय कथित घटना हुई, उस समय पीड़िता के बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य घर में मौजूद थे। ऐसे हालात में आरोपी द्वारा पीड़िता को घसीटकर कमरे में ले जाकर दुष्कर्म करना अत्यंत असंभव प्रतीत होता है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने जुलाई 2019 में गोंडा की ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को सही ठहराया। ट्रायल कोर्ट...
POCSO Act की धारा 42 में शामिल नहीं IPC की धारा 354, अलग सजा न देकर ट्रायल कोर्ट से हुई त्रुटि: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत दोषसिद्धि होने पर अलग से सजा दी जानी चाहिए क्योंकि यह अपराध POCSO Act की धारा 42 के दायरे में नहीं आता। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने धारा 354 के लिए पृथक सजा न देकर कानूनी त्रुटि की।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने छह वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी की अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।मामले में आरोपी को POCSO Act की धारा 9(एम) सहपठित धारा 10 तथा IPC की धारा 354, 354ए, 354बी और 506 के तहत दोषी ठहराया...
सिर्फ संदेह के आधार पर पेट्रोल पंप की डीलरशिप रद्द नहीं की जा सकती, तकनीकी साक्ष्य जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल इस आशंका के आधार पर कि ईंधन वितरण मशीन से छेड़छाड़ की गई है किसी पेट्रोल पंप की डीलरशिप समाप्त नहीं की जा सकती।अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक ठोस तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों से यह साबित न हो जाए कि कथित अनियमितता ईंधन की आपूर्ति में हेरफेर करने में सक्षम थी और उसका संबंध डीलर से था तब तक डीलरशिप समाप्त करने जैसी दंडात्मक कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।जस्टिस इरशाद अली की पीठ ने यह टिप्पणी मार्केटिंग अनुशासन दिशानिर्देश, 2012 के खंड...
भारत में बाल विवाह: विवाह को मान्यता, लेकिन नाबालिग पत्नी से यौन संबंध को अपराध मानने का कानूनी विरोधाभास
भारत में बाल विवाह को नियंत्रित करने वाला वैधानिक ढांचा एक गंभीर ढांचागत अंतर्विरोध (Structural Contradiction) से ग्रसित है। एक तरफ, हमारा दीवानी कानून (Civil Law) बाल विवाह को पूर्णतः शून्य (Void) न मानकर उसे तब तक वैध मानता है जब तक कि उसे निरस्त न करा दिया जाए। दूसरी तरफ, हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) उसी विवाह के उपभोग (Consummation) को एक गंभीर अपराध मानती है। यह विधिक विसंगति लाखों नाबालिगों को एक ऐसे कानूनी शून्य (Legal Vacuum) में धकेल देती है जहाँ वे राज्य की नजर...
मां ने पति पर लगाया बेटियों के यौन शोषण का आरोप, बेटियों ने कोर्ट में कहा— 'आरोप झूठे हैं, पिता के साथ रहेंगे'
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने पारिवारिक विवाद और झूठे आरोपों से जुड़े एक मामले में बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग लड़की को उसकी मां के पास भेजने के बजाय उसके पिता और बड़ी बहन के साथ रहने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने यह फैसला तब लिया जब नाबालिग लड़की ने साफ शब्दों में कहा कि उसकी मां ने वैवाहिक विवाद (Matrimonial Dispute) के चलते उसके पिता को फंसाने के लिए यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाया था।पूरा मामला क्या है?यह मामला जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी...
एक बार की प्रतिकूल टिप्पणी से वकील को हमेशा के लिए नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी वकील के खिलाफ अतीत में दर्ज की गई एक बार की प्रतिकूल टिप्पणी उसे भविष्य में सरकारी विधि अधिकारी के पद पर नियुक्ति से हमेशा के लिए अयोग्य नहीं ठहरा सकती। अदालत ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी बाद में उसके कार्य का मूल्यांकन कर उसे उपयुक्त पाता है, तो उसकी नियुक्ति को केवल पुरानी प्रतिकूल टिप्पणियों के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता।यह फैसला जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने सुनाया। अदालत ने सरकारी विधि अधिकारी के रूप में वकील की नियुक्ति को चुनौती...
सिर्फ उग्रवादी की पत्नी होना और मुठभेड़ स्थल पर बच्चे के साथ मौजूद रहना दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सिर्फ किसी उग्रवादी की पत्नी होना और डेढ़ साल की बच्ची के साथ मुठभेड़ स्थल पर मौजूद रहना किसी महिला को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि जब तक अभियोजन यह साबित न करे कि आरोपी ने कोई आपराधिक कृत्य किया या वह किसी उग्रवादी संगठन की सदस्य थी, तब तक उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।यह फैसला जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने प्रमिला देवी की अपील स्वीकार करते हुए सुनाया। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा रद्द करते हुए...
RTI Act | सुनवाई का अवसर दिए बिना सूचना अधिकारी पर जुर्माना नहीं लगाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act), 2005 की धारा 20 के तहत सूचना देने में देरी पर लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर जुर्माना लगाने से पहले उसे सुनवाई का उचित अवसर देना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि केवल बिना आधार के राय बनाकर दंड नहीं लगाया जा सकता, बल्कि उपलब्ध अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर विधिसम्मत राय बनाना आवश्यक है।यह फैसला जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सुनाया।मामले में याचिकाकर्ता एक खंड शिक्षा अधिकारी होने के...




















