हाईकोर्ट

मंदिर के दान का सरकारी योजनाओं में उपयोग भक्तों के विश्वास से धोखा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मंदिर के दान का सरकारी योजनाओं में उपयोग भक्तों के विश्वास से धोखा: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि मंदिरों में श्रद्धालु जो धन दान करते हैं, वह केवल देवी-देवताओं की देखभाल मंदिर के रखरखाव और धार्मिक कार्यों के लिए ही इस्तेमाल होना चाहिए।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर के दान को राज्य के सामान्य राजस्व या सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में खर्च करना भक्तों के अटूट विश्वास को धोखा देना है।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस राकेश कैंथला की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"मंदिर के कोष का हर रुपया मंदिर के धार्मिक उद्देश्य या धर्मार्थ कार्यों के लिए ही उपयोग...

दंगा मामले में नाबालिगों को झूठा फंसाए जाने पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहराइच के एसपी को निर्देश दिया
दंगा मामले में नाबालिगों को झूठा फंसाए जाने पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहराइच के एसपी को निर्देश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने हाल ही में बहराइच के पुलिस अधीक्षक को भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) और SC/ST Act के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज FIR में 13 और 11 वर्ष की आयु के दो नाबालिगों को 'झूठे फंसाए जाने' की जांच करने का निर्देश दिया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यदि एसपी को लगता है कि नाबालिगों को झूठा फंसाया गया है तो दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।खंडपीठ ने यह आदेश छह याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका...

HMA के तहत तलाक की दूसरी याचिका उसी अदालत में स्थानांतरित की जानी चाहिए, जहां पहली याचिका दायर की गई थी: बॉम्बे हाईकोर्ट
'HMA के तहत तलाक की दूसरी याचिका उसी अदालत में स्थानांतरित की जानी चाहिए, जहां पहली याचिका दायर की गई थी': बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि जब एक ही पक्ष के बीच तलाक या न्यायिक पृथक्करण के लिए दो याचिकाएं अलग-अलग अदालतों में दायर की जाती हैं तो हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 21-ए के अनुसार, दूसरी याचिका उसी अदालत में स्थानांतरित की जानी चाहिए, जहां पहली याचिका दायर की गई थी।जस्टिस राजेश एस. पाटिल पति-पत्नी द्वारा दायर दो स्थानांतरण आवेदनों पर सुनवाई कर रहे थे। पत्नी ने अपने पति की तलाक याचिका को मुंबई के बांद्रा स्थित फैमिली कोर्ट से कल्याण के सीनियर कैटेगरी के सिविल जज के यहां ट्रांसफर करने का अनुरोध...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कथित पीड़िता द्वारा रिहाई की गुहार लगाने पर व्यक्ति की POCSO के तहत दोषसिद्धि निलंबित की और जमानत दी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कथित पीड़िता द्वारा रिहाई की गुहार लगाने पर व्यक्ति की POCSO के तहत दोषसिद्धि निलंबित की और जमानत दी

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की का कथित रूप से अपहरण, बलात्कार और गंभीर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में फंसे व्यक्ति के खिलाफ दोषसिद्धि और सजा का आदेश निलंबित कर दिया। पीड़िता ने स्वयं उसकी सजा को निलंबित करने और जमानत पर रिहा करने की गुहार लगाई थी।चीफ जस्टिस जी. नरेंद्र और जस्टिस आलोक माहरा की खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट का फैसला "बिना किसी सबूत" पर आधारित है और आलोचनात्मक टिप्पणी की -"अपराध के स्थान से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य, या आरोपी को अपराध से जोड़ने वाले किसी भी...

डेस्क पर तैनात ED क्लर्क द्वारा समन तामील कराने पर गंभीर संदेह: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PMLA मामले में अनुचित सेवा की ओर इशारा किया
डेस्क पर तैनात ED क्लर्क द्वारा समन तामील कराने पर गंभीर संदेह: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने PMLA मामले में 'अनुचित' सेवा की ओर इशारा किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने हाल ही में कथित उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती पेपर लीक से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा समन तामील कराने की कार्रवाई पर गंभीर संदेह जताया, जबकि एक उच्च श्रेणी लिपिक (UDC), जिसे आमतौर पर डेस्क पर काम सौंपा जाता है, वह समन तामील कराता है।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने आरोपी को अग्रिम जमानत देते हुए कहा कि ED क्लर्क द्वारा समन तामील उचित तरीके से नहीं किया गया और उसे समन तामील कराने में इस्तेमाल की जा सकने वाली आधुनिक तकनीक की जानकारी नहीं थी।पीठ ने...

नौकरी के विज्ञापन के अनुसार पुरानी पेंशन योजना को इसलिए अस्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि कर्मचारी अंतिम तिथि के बाद नियुक्त हुए: झारखंड हाईकोर्ट
नौकरी के विज्ञापन के अनुसार पुरानी पेंशन योजना को इसलिए अस्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि कर्मचारी अंतिम तिथि के बाद नियुक्त हुए: झारखंड हाईकोर्ट

चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की झारखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि 01.01.2004 से पहले जारी विज्ञापनों के आधार पर चयनित कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना के लाभों के हकदार हैं, भले ही उनकी वास्तविक नियुक्ति या कार्यभार नई पेंशन योजना लागू होने के बाद हुआ हो।पृष्ठभूमि तथ्यभारतीय खनन विद्यालय, धनबाद द्वारा 02.09.2003 को सीनियर मेडिकल अधिकारी के पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि इस पद पर सामान्य भविष्य निधि (GPF)-सह-पेंशन लाभ मिलेगा। प्रतिवादी इंडियन...

रद्दीकरण रिपोर्ट के बावजूद अभियुक्त को समन जारी करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को पुनर्विचार क्षेत्राधिकार में चुनौती दी जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
रद्दीकरण रिपोर्ट के बावजूद अभियुक्त को समन जारी करने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश को पुनर्विचार क्षेत्राधिकार में चुनौती दी जा सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस द्वारा रद्दीकरण रिपोर्ट दाखिल करने के बावजूद, मजिस्ट्रेट द्वारा किसी अभियुक्त को समन जारी करने या प्रक्रिया जारी करने के आदेश को सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट में पुनर्विचार क्षेत्राधिकार में चुनौती दी जा सकती है।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा,"इस प्रकार, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 200 से 204 के तहत किसी अभियुक्त को समन जारी करने या प्रक्रिया जारी करने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश CrPC की धारा 397(2) के अंतर्गत नहीं आता है।...

व्यवस्थागत विफलता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता संबंधी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी पर न्यायिक अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा
'व्यवस्थागत विफलता': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता संबंधी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों की अनदेखी पर न्यायिक अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक कड़े आदेश में घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत गुजारा भत्ता संबंधी मामलों में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने में अधीनस्थ कोर्ट द्वारा "व्यवस्थागत विफलता" और "उदासीनता की स्थिति" पर गंभीर चिंता व्यक्त की।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने वाराणसी में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित अधिनियम, 2005 की धारा 12 के तहत एक शिकायत मामले में कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह...

रविवार की सुनवाई | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में पुलिस अधीक्षक को तलब करने के बाद FIR का आरोप लगाने वाले वकील को राहत दी
रविवार की सुनवाई | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में पुलिस अधीक्षक को तलब करने के बाद FIR का आरोप लगाने वाले वकील को राहत दी

रविवार की एक तत्काल सुनवाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक वकील को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया, जिसने आरोप लगाया कि फतेहगढ़ की पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के कहने पर उसके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण FIR दर्ज की गई। यह आरोप अदालत द्वारा अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में पुलिस अधीक्षक को तलब किए जाने के कुछ ही दिनों बाद लगाया गया।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता (वकील अवधेश मिश्रा) को संगठित अपराध, आपराधिक षडयंत्र, जबरन वसूली और अन्य कथित अपराधों के लिए...

समान कार्य करने वाले एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के बीच वर्गीकरण अनुचित: राजस्थान हाईकोर्ट
समान कार्य करने वाले एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के बीच वर्गीकरण अनुचित: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने माना कि समान कार्य करने वाले एलोपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टरों के बीच वर्गीकरण अनुचित है। आयुर्वेदिक डॉक्टर भी सभी परिणामी लाभों के साथ 62 वर्ष की समान बढ़ी हुई सेवानिवृत्ति आयु के हकदार हैं।पृष्ठभूमि तथ्ययाचिकाकर्ता राजस्थान सरकार के आयुर्वेद एवं भारतीय चिकित्सा विभाग के अंतर्गत कार्यरत आयुर्वेदिक डॉक्टर है। उन्होंने अपनी रिटायरमेंट आयु बढ़ाने के संबंध में पूर्व के न्यायिक निर्देशों को लागू करने के लिए राजस्थान...

दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में व्यक्ति को बरी किया, कहा- बिना सबूत के शारीरिक संबंध का आरोप बलात्कार की पुष्टि नहीं करता
दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में व्यक्ति को बरी किया, कहा- बिना सबूत के 'शारीरिक संबंध' का आरोप बलात्कार की पुष्टि नहीं करता

POCSO मामले में एक व्यक्ति को बरी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना किसी सबूत के केवल "शारीरिक संबंध" शब्द का प्रयोग बलात्कार या गंभीर यौन उत्पीड़न की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण मामला है, जहां पीड़िता के माता-पिता ने बार-बार कहा कि "शारीरिक संबंध" स्थापित हुए, लेकिन इस अभिव्यक्ति का क्या अर्थ था, यह स्पष्ट नहीं था।कोर्ट ने कहा,"इस मामले के विशिष्ट तथ्यों और परिस्थितियों में बिना किसी सबूत के "शारीरिक संबंध" शब्द का प्रयोग यह...

भावी नियमितीकरण से पहले मानद सेवा अवधि के लिए बकाया वेतन का दावा नहीं किया जा सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट
भावी नियमितीकरण से पहले मानद सेवा अवधि के लिए बकाया वेतन का दावा नहीं किया जा सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट

जस्टिस माइकल ज़ोथनखुमा और जस्टिस अंजन मोनी कलिता की गुवाहाटी हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि यदि नियुक्ति की शर्तें स्वीकार कर ली गई हों और नियमितीकरण आदेश के तहत लाभ केवल भावी रूप से प्रदान किए गए हों तो कोई कर्मचारी नियमितीकरण से पहले मानद सेवा अवधि के लिए बकाया वेतन का दावा नहीं कर सकता।पृष्ठभूमि तथ्यअपीलकर्ता को तर्कशास्त्र और दर्शनशास्त्र विषय के शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया। उन्हें शासी निकाय के दिनांक 03.03.2000 के प्रस्ताव नंबर 6 के अनुसरण में विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा पारित...

वास्तविक स्वामियों को कष्टकारी मुकदमों से बचाने के लिए कोर्ट संपत्ति को लिस पेंडेंस के सिद्धांत से मुक्त कर सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
वास्तविक स्वामियों को कष्टकारी मुकदमों से बचाने के लिए कोर्ट संपत्ति को लिस पेंडेंस के सिद्धांत से मुक्त कर सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट किसी संपत्ति को लिस पेंडेंस के सिद्धांत से मुक्त कर सकते हैं ताकि वास्तविक स्वामियों को कष्टकारी मुकदमों से बचाया जा सके।यह सिद्धांत संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम, 1882 की धारा 52 से लिया गया। यह निर्धारित करता है कि किसी लंबित मुकदमे के दौरान उस संपत्ति को प्रभावित करने वाला संपत्ति का कोई भी हस्तांतरण मुकदमे के परिणाम के अधीन है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने फैसला सुनाया,“लिस पेंडेंस का सिद्धांत समता और न्याय पर आधारित है।...

दिल्ली हाईकोर्ट ने पैरोल याचिकाओं पर निष्पक्ष निर्णय के लिए निर्देश जारी किए, अस्वीकृति के बार-बार होने वाले पैटर्न का हवाला दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने पैरोल याचिकाओं पर निष्पक्ष निर्णय के लिए निर्देश जारी किए, अस्वीकृति के 'बार-बार होने' वाले पैटर्न का हवाला दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए कि दोषियों के पैरोल और फर्लो के आवेदनों पर निष्पक्ष और तर्कसंगत तरीके से निर्णय लिया जाए ताकि बिना उचित कारण के उनकी अस्वीकृति के "बार-बार होने" वाले पैटर्न से बचा जा सके।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट रूप से दर्ज करे, जिसमें दोषियों द्वारा किए गए कदाचार या प्रतिकूल आचरण के विशेष उदाहरणों का स्पष्ट रूप से उल्लेख हो। साथ ही अस्वीकृति के आधार के रूप में उद्धृत प्रासंगिक...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा एडीए परीक्षा के लिए जनरल नॉलेज-आधारित कोर्स रद्द किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा एडीए परीक्षा के लिए जनरल नॉलेज-आधारित कोर्स रद्द किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा सहायक जिला अटॉर्नी (ADA) पदों के लिए जारी विज्ञापन रद्द किया, जिसमें स्क्रीनिंग परीक्षा में कानून को मुख्य विषय के रूप में शामिल न करते हुए जनरल नॉलेज-आधारित कोर्स शामिल था। अदालत ने कहा कि हजारों स्टूडेंट सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद में LLB की डिग्री हासिल करते हैं और ADA जैसे पदों के लिए कानूनी ज्ञान आवश्यक है।हरियाणा ADA स्क्रीनिंग परीक्षा के नए कोर्स में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं,...

रविवार की सुनवाई | 2 नवंबर को मार्च को निकालने के लिए नया आवेदन प्रस्तुत करे RSS: कर्नाटक हाईकोर्ट
रविवार की सुनवाई | 2 नवंबर को मार्च को निकालने के लिए नया आवेदन प्रस्तुत करे RSS: कर्नाटक हाईकोर्ट

रविवार को एक विशेष सुनवाई में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कलबुर्गी स्थित RSS के संयोजक अशोक पाटिल को 2 नवंबर को चित्तपुर कस्बे में शांतिपूर्ण ढंग से RSS मार्च (पथ संचलन) निकालने की अनुमति के लिए एक नया आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।RSS द्वारा 19 अक्टूबर (आज) को मार्च निकालने की अनुमति मांगने वाले आवेदन पर अधिकारियों द्वारा विचार न किए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। इसके बाद कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा 18 अक्टूबर के एक आदेश द्वारा इस आधार पर मार्च निकालने की अनुमति देने से...

बिना आधिकारिक प्रतिनियुक्ति के उच्च अध्ययन के दौरान अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि के लिए कोई वेतन देय नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
बिना आधिकारिक प्रतिनियुक्ति के उच्च अध्ययन के दौरान अनधिकृत अनुपस्थिति की अवधि के लिए कोई वेतन देय नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने कहा कि बिना आधिकारिक प्रतिनियुक्ति या अनुमति के पोस्ट-ग्रेजुएट अध्ययन करने पर सरकारी कर्मचारी जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा विनियम, 1956 के अनुच्छेद 44-ए के तहत वेतन पाने के हकदार नहीं होते।पृष्ठभूमि तथ्यप्रतिवादियों को 28.10.2011 के सरकारी आदेश संख्या 592-एचएमई, 2011 के तहत जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य विभाग में सहायक शल्य चिकित्सक और चिकित्सा अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। अपनी नियुक्ति के समय दोनों प्रतिवादी पहले...

मकान मालिक अपनी ज़रूरतों का सबसे अच्छा निर्णायक होता है, किरायेदार या अदालत का नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
मकान मालिक अपनी ज़रूरतों का सबसे अच्छा निर्णायक होता है, किरायेदार या अदालत का नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मकान मालिक अपनी ज़रूरतों का सबसे अच्छा निर्णायक होता है। उसे किरायेदार या अदालत की राय के आगे नहीं झुकाया जा सकता।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि एक बार जब मकान मालिक यह स्थापित कर लेता है कि जिस संपत्ति से वह किरायेदार को बेदखल करना चाहता है, उसकी उसे सद्भावनापूर्वक आवश्यकता है, तो वैकल्पिक आवास की उपलब्धता का मुद्दा केवल आकस्मिक है।अदालत ने कहा,"इसके अलावा, यह मकान मालिक का विशेषाधिकार है कि वह अपने व्यक्तिपरक आकलन के आधार पर अपनी आवश्यकताओं को यथोचित रूप से पूरा करने...

धमकाने की कोशिश: झारखंड हाईकोर्ट ने जज के साथ तीखी बहस करने वाले वकील को जारी किया अवमानना ​नोटिस
'धमकाने की कोशिश': झारखंड हाईकोर्ट ने जज के साथ तीखी बहस करने वाले वकील को जारी किया अवमानना ​नोटिस

झारखंड हाईकोर्ट ने एक वकील को आपराधिक अवमानना ​​का नोटिस जारी किया। बता दें, उक्त वकील गुरुवार को अदालती कार्यवाही के दौरान सिंगल जज के साथ तीखी बहस करते हुए वीडियो में दिखाई दिया था। कोर्ट ने कहा कि वकील ने जज को धमकाने की कोशिश की।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय, जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस राजेश शंकर की पांच जजों की पीठ ने शुक्रवार (17 अक्टूबर) को वकील के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना ​​का मामला शुरू किया था।अपने आदेश में कोर्ट...

सद्गुरु के पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने Google से कहा
सद्गुरु के पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने Google से कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने Google LLC से कहा कि वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास करे कि ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव के पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन करने वाली भ्रामक और डीपफेक सामग्री को उसकी तकनीक के माध्यम से हटाया और हटाया जाए।जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने गूगल और सद्गुरु को आपसी बैठक करने का निर्देश दिया, जहां सद्गुरु विशेष रूप से उन सामग्रियों की पहचान कर सकें जो "गूगल ऐड्स की नीति के अपवाद के अंतर्गत आती हैं।"यह तब हुआ, जब गूगल के वकील ने कहा कि मई में समन्वय पीठ द्वारा पारित...