हाईकोर्ट

रसना बनाम रसानंद : ट्रेडमार्क विवाद में एलपीए की सुनवाई योग्यता पर फैसला करेगा गुजरात हाईकोर्ट
रसना बनाम रसानंद : ट्रेडमार्क विवाद में एलपीए की सुनवाई योग्यता पर फैसला करेगा गुजरात हाईकोर्ट

रसना प्राइवेट लिमिटेड के स्वामित्व वाले दो प्रमुख पेय ब्रांडों रसना और पैटसन फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के तहत एक ब्रांड रसानंद के बीच ट्रेडमार्क विवाद गुजरात हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा। चीफ़ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस अनिरुद्ध पी. मेयी की खंडपीठ ने रसना प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष पिरुज खंबाटा को अपने ट्रेडमार्क का पंजीकरण प्रमाण पत्र जमा करने का निर्देश दिया है। इसने बताया कि हालांकि खंबाटा "रसना", "रसना", "रस", आदि शब्दों के साथ व्यापार चिह्न के मालिक होने का दावा करते हैं, "रसना" शब्द के साथ...

जांच के तहत अपराधों को आरोपी के खिलाफ कारावास के आदेश का आधार नहीं माना जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
जांच के तहत अपराधों को आरोपी के खिलाफ कारावास के आदेश का आधार नहीं माना जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बेहाई कोर्ट ने हाल ही में कहा कि जिन कथित अपराधों की जांच चल रही है और जिनके लिए आरोप पत्र दायर नहीं किया गया, उन पर आरोपी के खिलाफ निर्वासन आदेश पारित करने के लिए विचार नहीं किया जा सकता।जस्टिस एनजे जमादार ने इम्तियाज हुसैन सैय्यद नामक व्यक्ति के खिलाफ निर्वासन आदेश यह कहते हुए रद्द कर दिया कि बाहरी प्राधिकारी ने उसके खिलाफ दो अपराधों पर विचार किया, भले ही आरोप पत्र अभी तक दायर नहीं किया गया।कोर्ट ने कहा,“बाहरी प्राधिकारी ने दो मामलों की लंबितता को नोट किया, जो खंड (बी) द्वारा निर्धारित...

हिंदी से परिचित न होने पर भी IPC को IPC ही कहेंगे, भले ही इसे नए कानून द्वारा बदल दिया जाए: मद्रास हाइकोर्ट जज
हिंदी से परिचित न होने पर भी IPC को IPC ही कहेंगे, भले ही इसे नए कानून द्वारा बदल दिया जाए: मद्रास हाइकोर्ट जज

मद्रास हाइकोर्ट के जस्टिस आनंद वेंकटेश ने हाल ही में अपनी अदालत में वकीलों से कहा कि वह IPC, CrPc और साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) को उनके मूल नामों से बुलाना जारी रखेंगे, भले ही उन्हें हिंदी नामों वाले नए अधिनियमों से बदल दिया गया हो।अदालत CrPc की धारा 468 के तहत निर्धारित सीमा अवधि से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी। चर्चा के दौरान कोर्ट में मौजूद वकीलों ने नये कानून के साथ CrPc में किये गये विभिन्न संशोधनों के बारे में कोर्ट को जानकारी दी।जज ने जज पाया कि अतिरिक्त लोक अभियोजक को नए अधिनियम...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2024 के चुनावों के समापन तक पीएम मोदी को राम मंदिर का उद्घाटन करने से रोकने की जनहित याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2024 के चुनावों के समापन तक पीएम मोदी को राम मंदिर का उद्घाटन करने से रोकने की जनहित याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका (पीआईएल) को 'निरर्थक' बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित करने से रोकने की मांग की गई थी।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि प्राण प्रतिष्ठा समारोह पहले ही संपन्न हो चुका है, इसलिए जनहित याचिका निरर्थक हो गई।79 वर्षीय भोला दास द्वारा दायर जनहित याचिका में प्रार्थना की गई...

इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकारी वकील, मुख्य सरकारी वकील द्वारा ईमेल के माध्यम से नोटिस स्वीकार करने से इनकार के खिलाफ याचिका
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकारी वकील, मुख्य सरकारी वकील द्वारा ईमेल के माध्यम से नोटिस स्वीकार करने से इनकार के खिलाफ याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सरकारी वकील से उनके नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें निर्देश दिया गया कि याचिकाओं/आवेदनों की सभी सॉफ्ट प्रतियां पेनड्राइव के माध्यम से उनके कार्यालय को दिए जाएं।मुख्य सरकारी वकील और यूपी राज्य के सरकारी वकील ने 11 अक्टूबर, 2023 को नोटिस प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया कि ईमेल के माध्यम से भेजे गए किसी भी नोटिस की कोई भी पीडीएफ कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। वकील को केवल यूएसबी/थंब ड्राइव के माध्यम से पीडीएफ प्रतियां प्रदान...

मराठा आरक्षण विरोध प्रदर्शन पर शाहीन बाग के आदेश का पालन करेंगे, सड़क अवरोध रोकेंगे: बॉम्बेहाई कोर्ट में राज्य सरकार
मराठा आरक्षण विरोध प्रदर्शन पर शाहीन बाग के आदेश का पालन करेंगे, सड़क अवरोध रोकेंगे: बॉम्बेहाई कोर्ट में राज्य सरकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार का बयान दर्ज किया कि मराठा आरक्षण विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सड़कों की रुकावट या यात्रियों को असुविधा को रोकने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएंगे।अदालत ने कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल को 14 फरवरी, 2024 को वापस करने योग्य नोटिस जारी किया।गौरतलब है कि OBC कोटा से मराठा आरक्षण की वकालत करने वाले पाटिल ने 20 जनवरी को जालना से विरोध प्रदर्शन शुरू किया और 26 जनवरी को मुंबई पहुंचने की संभावना है। पाटिल का दावा है कि वह उस दिन आरक्षण के लिए अपनी अनिश्चितकालीन...

दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी के चचेरे भाई के खिलाफ फर्जी बलात्कार का मामला दर्ज करने की मांग करने वाले पति पर 25 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी के चचेरे भाई के खिलाफ फर्जी बलात्कार का मामला दर्ज करने की मांग करने वाले पति पर 25 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी पत्नी के चचेरे भाई के खिलाफ फर्जी बलात्कार का मामला दर्ज करने की मांग करने वाले पति पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। उक्त मामले में आरोप लगाया गया कि चचेरे भाई ने उसके साथ बलात्कार किया। हालांकि, पत्नी ने आरोपों से इनकार किया।जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने कहा कि प्रथम दृष्टया, पति द्वारा अपनी पत्नी के खिलाफ वैवाहिक कार्यवाही में कुछ लाभ हासिल करने के इरादे से कार्यवाही शुरू की गई।अदालत ने कहा,“आपराधिक न्याय प्रणाली के पहियों को फालतू शिकायतों से अवरुद्ध करने की...

अंतर-देशीय गोद लेने वाले बच्चे के पिता को NOC जारी करने के लिए CARA को सूचित करना होगा: कर्नाटक हाइकोर्ट
अंतर-देशीय गोद लेने वाले बच्चे के पिता को NOC जारी करने के लिए CARA को सूचित करना होगा: कर्नाटक हाइकोर्ट

कर्नाटक हाइकोर्ट ने इंटरकंट्री रिलेटिव एडॉप्शन के लिए गोद लेने की मांग करने वाले जोड़े को निर्देश दिया कि वह जर्मनी, जहां गोद लिए गए बच्चे के पिता रहते हैं, बच्चे को भारत से बाहर ले जाने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और अनुरूपता सर्टिफिकेट (CC) जारी करने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) से संपर्क करने के लिए याचिका दायर करें। जस्टिस एम नागाप्रसन्ना की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,“यदि याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई राहत मान ली जाती है तो यह स्थापित प्रक्रिया के विपरीत होगा।...

जजों को अपने परिवार के पीड़ित सदस्य के साथ खड़े होने का भी अधिकार है: दिल्ली हाईकोर्ट
जजों को अपने परिवार के 'पीड़ित' सदस्य के साथ खड़े होने का भी अधिकार है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जज होने के नाते न्यायिक अधिकारी उन मौलिक अधिकारों का त्याग नहीं करता, जो अन्य नागरिकों को उपलब्ध हैं। इनमें अपने परिवार की देखभाल करने और उनके साथ खड़े रहने के सामाजिक और निजी अधिकार भी शामिल हैं।कोर्ट ने कहा,“जिस तरह आरोपी को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता, यदि कोई न्यायिक अधिकारी या उसका परिवार का सदस्य किसी आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता है, तो न्यायिक अधिकारी और उसके परिवार को भी न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता है। वे पीड़ित हैं, क्योंकि यह न्यायिक अधिकारी और उसके...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का रजिस्ट्री अधिकारियों को निर्देश: विनम्र रहें, वकीलों/क्लर्कों के साथ धैर्यपूर्वक व्यवहार करें
इलाहाबाद हाईकोर्ट का रजिस्ट्री अधिकारियों को निर्देश: विनम्र रहें, वकीलों/क्लर्कों के साथ धैर्यपूर्वक व्यवहार करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने अपने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे वकीलों और उनके क्लर्कों के साथ बातचीत करते समय धैर्य और अत्यधिक सम्मान पर जोर देते हुए विनम्र व्यवहार रखें।हाशिए पर मौजूद लोगों का प्रतिनिधित्व करने में वकीलों की उदार भूमिका को स्वीकार करते हुए रजिस्ट्रार जनरल ने अपने अधिकारियों से संयम और विनम्र शिष्टाचार बनाए रखने को कहा। इस संबंध में कल कार्यालय आदेश जारी किया गयाषअधिसूचना में कहा गया,"इस हाईकोर्ट के विभिन्न अनुभागों के सभी अधिकारियों/कर्मचारियों को वकील और...

नूंह विध्वंस मामला | अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर गैरकानूनी तोड़फोड़ के लिए मुआवजे की मांग को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका
नूंह विध्वंस मामला | अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर 'गैरकानूनी तोड़फोड़' के लिए मुआवजे की मांग को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका

हरियाणा के मेवात क्षेत्र में अगस्त, 2023 में सांप्रदायिक झड़पों के बाद भड़की नूंह हिंसा के बाद हरियाणा सरकार द्वारा घरों के कथित "गैरकानूनी विध्वंस" के लिए मुआवजे की मांग करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष दो याचिकाएं दायर की गईं।याचिका में कहा गया कि यह स्थापित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज होने के बावजूद कि यह पूरी तरह से वैध निर्माण था, इसे "याचिकाकर्ता को कोई पूर्व सूचना दिए बिना" मनमाने ढंग से ध्वस्त कर दिया गया। सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया, जिससे वह अपने आश्रय से वंचित हो गया...

बिना वाजिब आधार के चुनाव कराने के संवैधानिक आदेश को रोका नहीं जा सकता : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
बिना वाजिब आधार के चुनाव कराने के संवैधानिक आदेश को रोका नहीं जा सकता : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि नगर निगम सहित विभिन्न निकायों के चुनाव कराने के संवैधानिक आदेश को बिना किसी "उचित और वाजिब आधार" के "रोका " नहीं जा सकता है।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस हर्ष बांगर की डिवीजन बेंच ने "कानून और व्यवस्था की स्थिति" के आधार पर चंडीगढ़ मेयर चुनाव को स्थगित करने को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए कहा, "कोई भी स्थिति को समझ सकता था, अगर कोई आकस्मिक संकट होता या प्राकृतिक आपदा। हालांकि, ऐसा कुछ भी नहीं होने के कारण, हम यह कहने के लिए बाध्य हैं कि...

पूर्ण विकसित भ्रूण को जीवन का अधिकार: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग बलात्कार पीड़िता की 31 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की याचिका खारिज की
'पूर्ण विकसित भ्रूण को जीवन का अधिकार': राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग बलात्कार पीड़िता की 31 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की याचिका खारिज की

राजस्‍थान हाईकोर्ट ने हाल ही में 11 वर्षीय एक बलात्कार पीड़िता की उन्नत गर्भावस्था की चिकित्सा समाप्ति की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा आदेश में कहा कि पूरी तरह विकसित भ्रूण को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की गारंटी है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल जज बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि एक भ्रूण जो पूरी तरह से विकसित हो चुका है, उसे इस दुनिया में प्रवेश करने और बिना किसी असामान्यता के स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट से सहमति जताते हुए, जयपुर की पीठ ने कहा कि ऐसी...

बचाव गवाह की पेशी | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 311 और 233 के दायरे की व्याख्या की (न्यायालय की शक्ति बनाम अभियुक्त का अधिकार)
बचाव गवाह की पेशी | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 311 और 233 के दायरे की व्याख्या की (न्यायालय की शक्ति बनाम अभियुक्त का अधिकार)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष के गवाहों की पेशी के संबंध में धारा 311 सीआरपीसी [महत्वपूर्ण गवाह को बुलाने या उपस्थित व्यक्ति की जांच करने की शक्ति] और धारा 233 सीआरपीसी [बचाव में प्रवेश] के दायरे के बीच अंतर को समझाया। कोर्ट ने जोर देकर कहा, "धारा 311 सीआरपीसी के तहत शक्ति केवल अदालतों में निहित है और धारा 233 सीआरपीसी के तहत अधिकार आरोपी के पास है और अदालत का हस्तक्षेप सीमित है।"संदर्भ के लिए, धारा 311 सीआरपीसी न्यायसंगत निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए किसी भी स्तर पर...

साउथ एशियन यूनिवर्सिटी को अंतरराष्ट्रीय संगठन का दर्जा प्राप्त है, रिट क्षेत्राधिकार के लिए उत्तरदायी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
साउथ एशियन यूनिवर्सिटी को अंतरराष्ट्रीय संगठन का दर्जा प्राप्त है, रिट क्षेत्राधिकार के लिए उत्तरदायी नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि साउथ एशियन यूनिवर्सिटी भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार के अधीन नहीं है क्योंकि इसे एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का दर्जा प्राप्त है और विभिन्न अधिनियमों के तहत इसे विशेषाधिकार और छूट प्राप्त है। जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि 2007 के अंतर-सरकारी समझौते से अपनी शक्तियों को प्राप्त करने वाला एक संगठन होने के नाते, यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जहां भारत सरकार का भारत में स्थित होने के बावजूद इसके कामकाज, प्रशासन और वित्त पर कोई नियंत्रण...

दिल्ली हाईकोर्ट में राहुल गांधी: नाबालिग बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने वाला ट्वीट हटा दिया गया
दिल्ली हाईकोर्ट में राहुल गांधी: नाबालिग बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर करने वाला ट्वीट हटा दिया गया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली हाइकोर्ट को बताया कि उन्होंने उस नाबालिग लड़की के बारे में कथित तौर पर पहचान और संवेदनशील विवरण का खुलासा करने वाला ट्वीट हटा लिया। उक्त लड़की के साथ 2021 में बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ को एक्स (पूर्व में ट्विटर) के वकील ने यह भी सूचित किया कि विचाराधीन ट्वीट गांधी द्वारा हटा दिया गया।वर्ष 2021 में दिल्ली छावनी क्षेत्र में श्मशान के अंदर नौ वर्षीय लड़की के साथ कथित तौर पर...

अग्रिम जमानत याचिका दायर करने से पहले भी अभियुक्त का आचरण राहत का अधिकार निर्धारित करने के लिए प्रासंगिक कारक: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
अग्रिम जमानत याचिका दायर करने से पहले भी अभियुक्त का आचरण राहत का अधिकार निर्धारित करने के लिए प्रासंगिक कारक: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी से पहले जमानत देने की याचिका पर फैसला करते समय किसी आरोपी का आचरण आवश्यक कारक है, जिस पर अदालत द्वारा विचार किया जाना आवश्यक है।जस्टिस सुमीत गोयल की पीठ ने कहा,"किसी आरोपी द्वारा अग्रिम जमानत देने की याचिका पर फैसला सुनाते समय किसी आरोपी का आचरण आवश्यक कारक है, जिस पर न्यायालय द्वारा विचार किया जाना आवश्यक है। आरोपी आश्रय नहीं मांग सकता। सीआरपीसी की धारा 41/41-ए के प्रावधान उसके आचरण को ख़राब करते हैं।"इसमें कहा गया कि अग्रिम जमानत के लिए...

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्टारबक्स फ्रेंचाइजी के लिए जनता को अनाधिकृत रूप से आवेदन आमंत्रित करने वाला Google फॉर्म प्रतिबंधित किया
दिल्ली हाइकोर्ट ने 'स्टारबक्स' फ्रेंचाइजी के लिए जनता को अनाधिकृत रूप से आवेदन आमंत्रित करने वाला Google फॉर्म प्रतिबंधित किया

दिल्ली हाइकोर्ट ने Google को "स्टारबक्स फ्रैंचाइज़" के लिए आवेदन करने के लिए आम जनता को आमंत्रित करने वाले विभिन्न Google फ़ॉर्म के यूआरएल प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया। स्टारबक्स भारत में फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम नहीं करता है।जस्टिस अनीश दयाल ने यह भी कहा कि कॉफ़ी हाउस की इंटरनेशनल चैन स्टारबक्स, Google फ़ॉर्म के अन्य समान यूआरएल को सूचीबद्ध करते हुए हलफनामा दायर करने के लिए स्वतंत्र होगी, जिसके बाद Google उसे निलंबित कर सकता है।अदालत ने कहा,“ऐसी स्थिति में प्रतिवादी नंबर 4 (Google) को किसी भी...

सीआरपीसी की धारा 125 के तहत कोई भी व्यक्ति नाबालिग की ओर से भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर कर सकता है: मद्रास हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 125 के तहत कोई भी व्यक्ति नाबालिग की ओर से भरण-पोषण की मांग करते हुए याचिका दायर कर सकता है: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 किसी भी व्यक्ति को नाबालिग की ओर से भरण-पोषण याचिका दायर करने से नहीं रोकती है। जस्टिस केके रामकृष्णन यह ‌टिप्पण‌ियां तब कि जब उन्होंने यह माना कि विवाहित महिला को नाबालिग भाई की ओर से अपने पिता से गुजारा भत्ता मांगने के लिए याचिका दायर करने से नहीं रोका जा सकता है।उन्होंने कहा, “सीआरपीसी की धारा 125 का कानून सामाजिक कल्याण के लिए है। इस धारा का लक्ष्य सामाजिक न्याय हासिल करना है। इसका उद्देश्य खानाबदोशी और गरीबी को रोकना है।...