हाईकोर्ट

पूर्व बिजनेस पार्टनर मिहिर दिवाकर द्वारा दायर मानहानि का मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं: एमएस धोनी ने दिल्ली हाइकोर्ट में कहा
पूर्व बिजनेस पार्टनर मिहिर दिवाकर द्वारा दायर मानहानि का मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं: एमएस धोनी ने दिल्ली हाइकोर्ट में कहा

दिल्ली हाइकोर्ट में क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने बताया कि पूर्व बिजनेस पार्टनर मिहिर दिवाकर द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है।दिवाकर और उनकी पत्नी ने एक याचिका डाली। याचिका में कहा गया कि क्रिकेटर धोनी द्वारा आपत्तिजनक और दुर्भावनापूर्ण बयान न प्रकाशित न किया जाए। बयान में कहा गया कि दिवाकर और उनकी पत्नी ने मिलकर उनसे 15 करोड़ रुपये प्राप्त किए है।यह याचिका मेटा, एक्स (पूर्व में ट्विटर), गूगल, यूट्यूब और 30 मीडिया हाउस और वेब पोर्टल के खिलाफ दायर किया गया।जस्टिस...

हमें आप पर भरोसा नहीं है: गुजरात हाईकोर्ट ने बलात्कार के दोषी और आशाराम बापू के बेटे नारायण साईं से कहा
'हमें आप पर भरोसा नहीं है': गुजरात हाईकोर्ट ने बलात्कार के दोषी और आशाराम बापू के बेटे नारायण साईं से कहा

गुजरात हाईकोर्ट ने बलात्कार के दोषी और आशाराम बापू के बेटे नारायण साईं की याचिका स्वीकार करने में अनिच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी प्रार्थना पर्याप्त मेडिकल दस्तावेजों द्वारा समर्थित नहीं है। इसके साथ ही बलात्कार के दोषी और स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं ने अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए 20 दिनों की अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका वापस ले ली।जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस विमल के व्यास की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा,“तुम्हारे इतिहास को देखते हुए हमें तुम पर भरोसा नहीं है।...

Telegraph Act | बिजली लाइनें बिछाने की अनुमति देने के बाद लाइसेंसधारी को भूमि मालिकों को सूचित करने या अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती: तेलंगाना हाइकोर्ट
Telegraph Act | बिजली लाइनें बिछाने की अनुमति देने के बाद लाइसेंसधारी को भूमि मालिकों को सूचित करने या अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती: तेलंगाना हाइकोर्ट

तेलंगाना हाइकोर्ट ने SNM डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा डेवलपर्स की संपत्ति पर ओवरहेड बिजली ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने को रोकने की मांग को लेकर दायर याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि जब केंद्र सरकार किसी लाइसेंसधारी को बिजली लाइनें बिछाने की शक्ति प्रदान करती है तो लाइसेंसधारी को भूमि मालिकों को सूचित करने या अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा, यहां टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 (Telegraph Act) के प्रावधान लागू होंगे।चीफ जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस अनिल कुमार जुकांति की खंडपीठ ने एकल...

CrPc की धारा 197 के तहत सुरक्षा का दावा करने के लिए दस्तावेज तैयार करना, धन का दुरुपयोग करना आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट
CrPc की धारा 197 के तहत सुरक्षा का दावा करने के लिए दस्तावेज तैयार करना, धन का दुरुपयोग करना 'आधिकारिक कर्तव्य' का हिस्सा नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कहा कि दस्तावेज़ में हेरफेर करना या धन का दुरुपयोग करना सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सुरक्षा का दावा करने के लिए लोक सेवक के आधिकारिक कर्तव्य का हिस्सा नहीं।सीआरपीसी की धारा 197 अधिकारी को अनावश्यक उत्पीड़न से बचाने का प्रयास करती है, जिस पर अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान कार्य करते समय या कार्य करने के दौरान किए गए अपराध का आरोप है, सिवाय इसके कि सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी हो। अदालत को ऐसे अपराध का संज्ञान लेने से रोकती है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की...

पटना हाइकोर्ट ने रोजगार के कारण एलएलबी क्लासेस से छूट की मांग करने वाले साइंस टीचर द्वारा दायर जनहित याचिका खारिज की
पटना हाइकोर्ट ने रोजगार के कारण एलएलबी क्लासेस से छूट की मांग करने वाले साइंस टीचर द्वारा दायर जनहित याचिका खारिज की

पटना हाइकोर्ट ने जवाहर नवोदय विद्यालय (जिला गढ़वा, झारखंड राज्य) के साइंस टीचर द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी। उक्त टीचर ने इस आधार पर एलएलबी क्लासेस में भाग लेने से छूट मांगी थी कि याचिकाकर्ता शैक्षणिक संस्थान द्वारा नियोजित है।चीफ जस्टिस के. विनोद चंद्रन की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रतिनिधित्व को "गुमराह" माना और कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत मांगी गई छूट या की गई प्रार्थना में कोई सार्वजनिक हित नहीं है।अदालत ने कहा,''हम अधिक से अधिक यह कह सकते हैं कि प्रतिनिधित्व...

परिस्थितियों की शृंखला निश्चित रूप से अभियुक्त के अपराध की ओर इशारा करनी चाहिए: पटना हाइकोर्ट ने बलात्कार और हत्या के आरोपी की सजा खारिज की
परिस्थितियों की शृंखला निश्चित रूप से अभियुक्त के अपराध की ओर इशारा करनी चाहिए: पटना हाइकोर्ट ने बलात्कार और हत्या के आरोपी की सजा खारिज की

पटना हाइकोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत दोषसिद्धि का फैसला और सजा का आदेश पलट दिया। कोर्ट ने आरोपी के अपराध की ओर स्पष्ट रूप से इंगित करने वाली परिस्थितियों की स्पष्ट श्रृंखला स्थापित करने के महत्व पर जोर दिया।जस्टिस आलोक कुमार पांडे और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने रेखांकित किया,''हम वर्तमान मामले की सामग्री का परिस्थिति के आधार साक्ष्य पर ट्रायल कर सकते हैं, क्योंकि वर्तमान मामले का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है, बल्कि प्रत्येक परिस्थिति को उचित संदेह से...

Succession Act की धारा 67 |  प्रोबेट कार्यवाही में अदालत यह तय नहीं कर सकती कि लाभार्थी के गवाह के पति होने के कारण वसीयत रद्द हो सकती है या नहीं: बॉम्बे हाइकोर्ट
Succession Act की धारा 67 | प्रोबेट कार्यवाही में अदालत यह तय नहीं कर सकती कि लाभार्थी के गवाह के पति होने के कारण वसीयत रद्द हो सकती है या नहीं: बॉम्बे हाइकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि किसी वसीयत में भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम (Indian Succession Act) की धारा 67 के तहत लाभार्थी गवाह का जीवनसाथी होने के नाते वसीयत की शून्यता का मुद्दा वसीयत की प्रोबेट या वसीयत के साथ प्रशासन संलग्न पत्र की कार्यवाही में वसीयतनामा न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। जस्टिस मनीष पिताले ने मृत व्यक्ति की बेटियों द्वारा दायर आवेदन खारिज कर दिया, जिसमें मृतक के बेटे की वसीयत रद्द करने से संबंधित अतिरिक्त मुद्दे को वसीयत के मुकदमे में जोड़ने की मांग की गई,...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अपराधियों की उद्घोषणा के लिए निर्देश जारी किए, पुलिस को गिरफ्तारी पर पासपोर्ट, राशन कार्ड जैसे दस्तावेज प्राप्त करने का आदेश दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अपराधियों की उद्घोषणा के लिए निर्देश जारी किए, पुलिस को गिरफ्तारी पर पासपोर्ट, राशन कार्ड जैसे दस्तावेज प्राप्त करने का आदेश दिया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अपराधियों की उद्घोषणा के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत स्थापित प्रक्रियाओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस अधिकारियों और न्यायालयों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने निर्देश दिया कि जांच अधिकारी या स्टेशन हाउस ऑफिस को घोषित अपराधी की गिरफ्तारी के समय या उसके तुरंत बाद निम्नलिखित में से कम से कम दो दस्तावेज प्राप्त करने होंगे: (i) पासपोर्ट (ii) पैन कार्ड की कॉपी (iii) बैंक पासबुक (iv) फोटोग्राफ के साथ क्रेडिट...

नियोक्ता द्वारा आपराधिक इतिहास को छुपाना उम्मीदवारी रद्द करने/सेवा से बर्खास्तगी का आधार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
नियोक्ता द्वारा आपराधिक इतिहास को छुपाना उम्मीदवारी रद्द करने/सेवा से बर्खास्तगी का आधार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि रोजगार चाहने वाले किसी भी उम्मीदवार की सजा/बरी, गिरफ्तारी या लंबित आपराधिक मामले के बारे में जानकारी को छुपाया नहीं जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि यदि आपराधिक इतिहास के संबंध में कोई तथ्य छिपाया गया तो उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है या सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। अवतार सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य और राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड बनाम अनिल कंवरिया में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस सुरेंद्र...

पॉक्सो एक्ट | पीड़ित की उम्र निर्धारित करने के लिए स्कॉलर रजिस्टर पर्याप्त: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
पॉक्सो एक्ट | पीड़ित की उम्र निर्धारित करने के लिए स्कॉलर रजिस्टर पर्याप्त: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में इस बात पर जोर दिया है कि स्कूल एड‌मिशन रजिस्टर/स्कॉलर रजिस्टर एक वैध दस्तावेज है, जिस पर POCSO संबंधित अपराध की सर्वाइवर की उम्र को तय करने के लिए भरोसा किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि अभियोजक और अन्य गवाहों की गवाही को तब तक अविश्वसनीय नहीं माना जा सकता जब तक कि कोई ऐसा भौतिक विरोधाभास न हो, जो मामले की जड़ों तक जाता हो।जस्टिस प्रेम नारायण सिंह की सिंगल जज बेंच ने उम्र तय करने के ल‌िए मानदंडों को समझने के लिए जरनैल सिंह बनाम हरियाणा राज्य, (2013) 7...

पति आय की कमी के बावजूद पत्नी का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य, वह अकुशल श्रमिक के रूप में प्रति दिन 350 से 400 रुपये कमा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पति आय की कमी के बावजूद पत्नी का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य, वह अकुशल श्रमिक के रूप में प्रति दिन 350 से 400 रुपये कमा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि एक पति अपनी पत्नी को सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण प्रदान करने के लिए बाध्य है, भले ही उसकी नौकरी से कोई आय न हो, वह अकुशल श्रमिक के रूप में प्रतिदिन 350-400 रुपये रुपये कमा सकता है।जस्टिस रेनू अग्रवाल की पीठ ने अंजू गर्ग बनाम दीपक कुमार गर्ग 2022 लाइव लॉ (एससी) 805 मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें यह माना गया था कि पति को शारीरिक श्रम से भी पैसा कमाने की आवश्यकता होती है, यदि वह सक्षम है, और क़ानून में...

धारा 100(5) सीआरपीसी | तलाशी और जब्ती के गवाहों को अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि उन्हें विशेष रूप से सम्मन न किया जाए: झारखंड हाईकोर्ट
धारा 100(5) सीआरपीसी | तलाशी और जब्ती के गवाहों को अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि उन्हें विशेष रूप से सम्मन न किया जाए: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल के एक फैसले में 28 साल पुराने एक मामले में पुनरीक्षण आवेदन को आंशिक रूप से अनुमति देते हुए इस बात पर जोर दिया कि रिकवरी के तथ्य को स्थापित करने के लिए अभियोजन पक्ष को केवल जब्ती सूची को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। जस्टिस अंबुज नाथ ने कहा, “रिकवरी के तथ्य को साबित करने के लिए, अभियोजन पक्ष के लिए साक्ष्य में जब्ती सूची जोड़ना पर्याप्त है। धारा 100(5) सीआरपीसी के अनुसार तलाशी और जब्ती के गवाहों को गवाह के रूप में अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं...

एसिड अटैक | चिकित्सा अनुदान अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सत्यापित चिकित्सा बिलों के लिए अतिरिक्त मुआवजा दिया
एसिड अटैक | चिकित्सा अनुदान अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सत्यापित चिकित्सा बिलों के लिए अतिरिक्त मुआवजा दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य एसिड अटैक से घायल मां-बेटे के मेडिकल बिल वाउचर के लिए 5,26,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया है। जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस सुरेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने कहा,“यह चमेली सिंह बनाम यूपी राज्य, एआईआर 1996 एससी 1051 और उपभोक्ता शिक्षा और अनुसंधान केंद्र बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (1995) 3 एससीसी 42 के मामले में शीर्ष न्यायालय के निर्णयों से अच्छी तरह से स्थापित हो गया है कि चिकित्सा अनुदान अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है जो भारत में रहने...

यूपीजीएसटी | कर चोरी की मंशा साबित करने का बोझ सिर्फ विभाग पर है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपीजीएसटी | कर चोरी की मंशा साबित करने का बोझ सिर्फ विभाग पर है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर चोरी का इरादा साबित करने का बोझ पूरी तरह से विभाग पर है। कोर्ट ने कहा कि कर कानूनों में जुर्माना केवल महत्वहीन तकनीकी त्रुटियों पर नहीं लगाया जाना चाहिए जिनके कोई वित्तीय परिणाम नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि जुर्माना केवल वहीं लगाया जाना चाहिए जहां यह दिखाने के लिए ठोस सबूत हों कि एक करदाता जानबूझकर सिस्टम को धोखा देने की कोशिश कर रहा है, न कि अनजाने में हुई गलतियों के मामलों में। उत्तर प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 129 के तहत पारित एक दंड...

वाणिज्यिक कर | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पर्याप्त कारण पर 1365 दिनों की देरी की माफी को बरकरार रखा
वाणिज्यिक कर | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पर्याप्त कारण पर 1365 दिनों की देरी की माफी को बरकरार रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपील दायर करने में वाणिज्यिक कर न्यायाधिकरण (Commercial Tax Tribunal) द्वारा 1365 दिनों की देरी की माफी को बरकरार रखा है क्योंकि अधिकारियों द्वारा इसे पर्याप्त रूप से समझाया गया था। संशोधनवादी-निर्धारिती ने अपील दायर करने में विभाग की ओर से 1365 दिनों की देरी को माफ करने के वाणिज्यिक कर न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मैसर्स अनिल इंटरप्राइजेज बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर भरोसा किया गया था। वाणिज्यिक कर आयुक्त,...

निर्धारिती खामियों को दूर करने में विफल रहा क्योंकि दस्तावेज केंद्रीय जीएसटी प्राधिकरण की हिरासत में थे: मद्रास उच्च न्यायालय ने मूल्यांकन आदेश को रद्द किया
निर्धारिती खामियों को दूर करने में विफल रहा क्योंकि दस्तावेज केंद्रीय जीएसटी प्राधिकरण की हिरासत में थे: मद्रास उच्च न्यायालय ने मूल्यांकन आदेश को रद्द किया

मद्रास हाईकोर्ट ने मूल्यांकन आदेश को रद्द कर दिया और माना कि केंद्रीय जीएसटी प्राधिकरण की हिरासत में रिकॉर्ड की उपलब्धता के कारण दोष को ठीक नहीं किया गया था। जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने कहा है कि चार दोषों के संबंध में मूल्यांकन का एक समग्र आदेश जारी किया गया था, और रिकॉर्ड पर दस्तावेजों से पता चलता है कि केंद्रीय जीएसटी प्राधिकरण की हिरासत में ऐसे दस्तावेजों के कारण रिकॉर्ड की अनुपलब्धता निस्संदेह याचिकाकर्ता की दो दोषों का जवाब देने की क्षमता को प्रभावित करती है। ...

यूनिवर्सिटी के चांसलर्स को UGC विनियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के तहत VC को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस की वैधता और अधिकार क्षेत्र पर विचार करना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
यूनिवर्सिटी के चांसलर्स को UGC विनियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के तहत VC को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस की वैधता और अधिकार क्षेत्र पर विचार करना चाहिए: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कुलाधिपति को निर्देश दिया है कि वे यूजीसी विनियमों और प्रोफेसर (डॉ) श्रीजीत पीएस बनाम डॉ राजश्री एमएस और अन्य (2022) में सूप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के आधार पर श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कलाडी, कालीकट विश्वविद्यालय, केरल डिजिटल विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और श्री नारायण मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपतियों को जारी कारण बताओ नोटिस की वैधता और अधिकार क्षेत्र पर विचार करें । कुलाधिपति द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था जिसमें कुलपतियों को...

केवल इसलिए कि घरों का निर्माण झुग्गीवासियों के लिए है, निविदाकर्ता इसे हल्के में नहीं ले सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट ने परियोजना को पूरा करने के लिए समय बढ़ाने से इनकार किया
केवल इसलिए कि घरों का निर्माण झुग्गीवासियों के लिए है, निविदाकर्ता इसे हल्के में नहीं ले सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट ने परियोजना को पूरा करने के लिए समय बढ़ाने से इनकार किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक निर्माण कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें कर्नाटक झुग्गी विकास बोर्ड के उस आदेश पर सवाल उठाया गया था जिसमें झुग्गीवासियों के लिए आवासीय मकान बनाने के लिए कंपनी के साथ किए गए अनुबंध को पूरा करने के लिए विस्तार देने से इनकार कर दिया गया था। जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने ऐश्वर्यागिरी कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया और बोर्ड को एक उचित कार्य आदेश जारी करने और गरीब झुग्गीवासियों के घरों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने...

शादी का झूठा वादा करने का आरोप साबित नहीं हुआ: एमपी हाईकोर्ट ने मैट्रिमोनी साइट पर अभियोजक से परिचित आरोपी की बलात्कार की सजा खारिज की
शादी का झूठा वादा करने का आरोप साबित नहीं हुआ: एमपी हाईकोर्ट ने मैट्रिमोनी साइट पर अभियोजक से परिचित आरोपी की बलात्कार की सजा खारिज की

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने बलात्कार की सजा इस आधार पर रद्द कर दी कि इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि शादी का झूठा वादा करके यौन संबंधों के लिए सहमति प्राप्त की गई। अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी विश्वसनीय निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि यौन संबंध शादी के वादे जैसे तथ्य की गलत धारणा के तहत हुआ।जस्टिस प्रेम नारायण सिंह की एकल न्यायाधीश पीठ ने यह भी कहा कि अभियुक्त द्वारा अभियोजक से शादी करने से कभी भी विशेष इनकार नहीं किया गया, जैसा कि उनके बीच व्हाट्सएप चैट से स्पष्ट है। इसके अलावा, यह निर्विवाद है...

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दीपिका पादुकोण के सेल्फ केयर ब्रांड के लोटस स्पलैश के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में कमल पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दीपिका पादुकोण के सेल्फ केयर ब्रांड के 'लोटस स्पलैश' के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में 'कमल' पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के सेल्फ केयर ब्रांड 82E के 'लोटस स्पलैश' जेंटल फेस क्लींजर के खिलाफ ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में 'लोटस हर्बल्स' के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा(interim injunction order) पारित करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस सी हरिशंकर ने कहा कि उत्पाद दिखने में पूरी तरह से भिन्न हैं और कीमतों में काफी अंतर है और इसे पारित करने का कोई मामला नहीं बनाया गया क्योंकि दो चिह्नों के बीच एकमात्र सामान्य विशेषता 'कमल' शब्द है। कोर्ट ने कहा कि "एक उपभोक्ता जो ऐसे...