हाईकोर्ट

बैंकों को मानहानि के लिए आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
बैंकों को मानहानि के लिए आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह व्यवस्था दी कि बैंकों को मानहानि के लिए आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनमें अपराध के गठन के लिए आवश्यक आपराधिक मनःस्थिति या दुर्भावना की कमी होती है।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बैंकों द्वारा किसी कंपनी को धोखाधड़ी घोषित करने का कार्य जो उन्होंने अपने बैंकिंग गतिविधियों के निर्वहन और सद्भाव में किया, वह मानहानि नहीं माना जा सकता है।कोर्ट चार बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं के बैच पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल...

2013 संशोधन से पहले के मामलों में बलात्कार दोषसिद्धि के लिए पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से कम साबित करना जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
2013 संशोधन से पहले के मामलों में बलात्कार दोषसिद्धि के लिए पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से कम साबित करना जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि 2013 के आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम लागू होने से पहले दर्ज हुए बलात्कार के मामलों में, अभियोजन पक्ष को यह साबित करना आवश्यक है कि पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से कम थी, तभी आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक व्यक्ति को बरी किया, जिसे वर्ष 2005 में 11 वर्षीय बच्ची के बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने कहा कि अपराध 2005 में हुआ था, जब भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत सहमति की आयु 16...

सिविल सर्विस ट्रिब्यूनल में वकीलों-पक्षकारों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा मिलेगी: राजस्थान सरकार
सिविल सर्विस ट्रिब्यूनल में वकीलों-पक्षकारों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा मिलेगी: राजस्थान सरकार

राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया है कि राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल में वकीलों और वादकारियों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी और हर कार्य दिवस पर कम से कम एक पीठ कार्यरत रहेगी।याचिकाकर्ताओं ने शिकायत की थी कि ट्रिब्यूनल में पीठें उपलब्ध नहीं रहतीं, सुनवाई रद्द हो जाती है और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद वीसी सुविधा नहीं है। कर्मचारी विभाग की सचिव ने जस्टिस अशोक कुमार जैन को बताया कि— • 27 अक्टूबर 2025 से हर पीठ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू होगी, ...

बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: एक बार ट्रायल का मुद्दा साबित होने पर बचाव का अधिकार देने के लिए अत्यधिक जमा राशि नहीं लगाई जा सकती
बॉम्बे हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: एक बार ट्रायल का मुद्दा साबित होने पर बचाव का अधिकार देने के लिए अत्यधिक जमा राशि नहीं लगाई जा सकती

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि एक बार जब सारांश मुकदमे में प्रतिवादी किसी परीक्षणीय मुद्दे को सफलतापूर्वक स्थापित कर देता है तो उसे मुकदमे का बचाव करने के लिए बिना शर्त अनुमति मिलनी चाहिए। न्यायालय बचाव का अधिकार देने के लिए दावा राशि का एक बड़ा हिस्सा जमा कराने जैसी अत्यधिक बोझिल या कठोर शर्त नहीं थोप सकता।जस्टिस प्रफुल्ल एस. खुबलकर की पीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सिविल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई थी। सिविल जज ने अपने आदेश में HDFC लिमिटेड द्वारा दायर सारांश...

किंगफिशर के बकाया कर्ज की जानकारी मांगने वाली विजय माल्या की याचिका पहली नजर में स्वीकार्य नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
किंगफिशर के बकाया कर्ज की जानकारी मांगने वाली विजय माल्या की याचिका पहली नजर में स्वीकार्य नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को मौखिक रूप से कहा कि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या द्वारा दायर याचिका — जिसमें उसने अपने और किंगफिशर (United Breweries Holdings Ltd) से जुड़ी बकाया रकम की जानकारी मांगी है — स्वीकार्य नहीं है।जस्टिस ललिता कन्नेगांटी ने कहा कि माल्या को यह याचिका इस अदालत में नहीं, बल्कि कंपनी कोर्ट में दायर करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, “यह याचिका इस अदालत में कैसे बनी रह सकती है? अगर जानकारी चाहिए, तो कंपनी कोर्ट में आवेदन करें।” माल्या का कहना था कि किंगफिशर एयरलाइंस के...

गुवाहाटी हाईकोर्ट का फैसला: सेना कर्मियों के बच्चों को नागालैंड के सेंट्रल पूल MBBS कोटे से बाहर रखना वैध
गुवाहाटी हाईकोर्ट का फैसला: सेना कर्मियों के बच्चों को नागालैंड के सेंट्रल पूल MBBS कोटे से बाहर रखना वैध

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने उस मेडिकल उम्मीदवार को राहत देने से इनकार किया, जिसे कट-ऑफ अंक हासिल करने के बावजूद नागालैंड सरकार को आवंटित सेंट्रल पूल MBBS कोटे की सीट से वंचित कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए पहले से ही समर्पित कोटा होने के कारण उन्हें सेंट्रल पूल के 'कमी वाले राज्य के कोटे से बाहर रखना भेदभावपूर्ण नहीं है।चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के उस फैसले को पलट दिया, जिसने उम्मीदवार के पक्ष में फैसला सुनाया था।मामला और...

संजीव भट्ट को जेल ट्रांसफर की मांग करने का कोई अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने पति के पालनपुर जेल से स्थानांतरण के खिलाफ पत्नी की याचिका खारिज की
संजीव भट्ट को जेल ट्रांसफर की मांग करने का कोई अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने पति के पालनपुर जेल से स्थानांतरण के खिलाफ पत्नी की याचिका खारिज की

गुजरात हाईकोर्ट ने पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की पत्नी द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने मांग की कि उनके पति को पालनपुर जेल से किसी अन्य जेल में ट्रांसफर या बेदखल न किया जाए। न्यायालय ने कहा कि भट्ट को जेल ट्रांसफर की मांग करने का कोई पूर्ण अधिकार नहीं है।भट्ट को जामनगर सेशन जज ने 20.06.2019 को एक कथित हिरासत में मौत के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई और वह जामनगर जेल में बंद हैं। इसी दौरान NDPS मुकदमे में बनासकांठा सेशन कोर्ट ने 27.03.2024 को पूर्व आईपीएस अधिकारी को संबंधित...

मादक पदार्थ बरामदगी की वीडियोग्राफी न होने पर पुलिस की बात पर शक नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
मादक पदार्थ बरामदगी की वीडियोग्राफी न होने पर पुलिस की बात पर शक नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एनडीपीएस कानून के तहत मादक पदार्थों की तलाशी और बरामदगी की कार्रवाई को सिर्फ इसलिए झूठा नहीं माना जा सकता क्योंकि उसकी वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी नहीं की गई थी।जस्टिस रविंदर दुडेचा ने यह टिप्पणी करते हुए दो विदेशी नागरिकों — स्टैनली चिमेइजी अलासोन्ये और हेनरी ओकोली — की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि तकनीक जांच में मदद करती है, लेकिन पहले यह प्रक्रिया अनिवार्य नहीं थी, इसलिए इसकी गैर मौजूदगी से पुलिस की कार्रवाई पर शक नहीं किया जा सकता। दोनों आरोपियों पर...

जेंडर निर्धारण महिलाओं के जीवन के मूल्य को कम करता है: दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
जेंडर निर्धारण महिलाओं के जीवन के मूल्य को कम करता है: दिल्ली हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि जेंडर निर्धारण की प्रथा महिला जीवन के मूल्य को कम करती है और एक भेदभाव-मुक्त समाज की उम्मीद पर प्रहार करती है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह अवलोकन करते हुए व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की, जिस पर गैरकानूनी लिंग निर्धारण करने और एक महिला की मौत का कारण बनने का आरोप है।समाज पर गंभीर प्रभावजस्टिस शर्मा ने कहा कि यह प्रथा ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देती है, जिसमें लड़कियों को समुदाय के समान सदस्य के बजाय बोझ के रूप में देखा जाता है। यह गर्भवती...

मेडिकल जांच से पहले POCSO पीड़िता के कपड़े बदलना अभियोजन पक्ष के साक्ष्य को कमज़ोर नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
मेडिकल जांच से पहले POCSO पीड़िता के कपड़े बदलना अभियोजन पक्ष के साक्ष्य को कमज़ोर नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO Act के तहत नाबालिग बलात्कार पीड़िता के मेडिकल जांच से पहले उसके कपड़े बदलना अभियोजन पक्ष के साक्ष्य को कमज़ोर नहीं कर सकता।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने कहा,"जहां तक पीड़िता के मेडिकल टेस्ट से पहले चादर न जब्त करने और माँ द्वारा कपड़े न बदलने का सवाल है, यह न्यायालय मानता है कि ऐसे कृत्य, अपने आप में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य की विश्वसनीयता पर कोई उचित संदेह पैदा नहीं करते।"कोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा अपनी दोषसिद्धि और 10 साल की सज़ा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।...

केवल सुरक्षा उद्देश्य से जारी किए गए चेक किसी भी मौजूदा ऋण के लिए भुनाए नहीं जा सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
केवल सुरक्षा उद्देश्य से जारी किए गए चेक किसी भी मौजूदा ऋण के लिए भुनाए नहीं जा सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सुरक्षा उद्देश्य से जारी किए गए चेक, न कि बैंक में जमा करने के लिए किसी भी मौजूदा ऋण या देनदारी के लिए भुनाए नहीं जा सकते।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा,"इस प्रकार, यह माना जाता है कि विवादित चेक एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए दिए गए सुरक्षा चेक थे। बाद में उत्पन्न होने वाली किसी देनदारी के लिए भुनाए नहीं जा सकते।"कोर्ट श्री साईं सप्तगिरि स्पंज प्राइवेट लिमिटेड नामक संस्था द्वारा दायर पांच याचिकाओं पर विचार कर रहा था, जिसमें मेसर्स मैग्निफिको मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड...

भूमि पर अतिक्रमण का खतरा और सार्वजनिक उद्देश्य के लिए प्रस्तावित उपयोग, भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 17 के तहत तात्कालिकता खंड लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भूमि पर अतिक्रमण का खतरा और सार्वजनिक उद्देश्य के लिए प्रस्तावित उपयोग, भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 17 के तहत तात्कालिकता खंड लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया है कि केवल अतिक्रमण का खतरा और यह कहना कि भूमि का उपयोग सार्वजनिक उद्देश्य के लिए नियोजित विकास हेतु किया जाना है, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 17 के तहत तात्कालिकता खंड लागू करने और भूस्वामियों की आपत्तियाँ मांगने, उनकी सुनवाई करने और उन पर निर्णय लेने की वैधानिक आवश्यकता से छूट देने को उचित नहीं ठहराएगा।गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा शुरू की गई 2004 की अधिग्रहण कार्यवाही पर विचार करते हुए और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए जस्टिस मनोज...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन मेडिकल देखभाल की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन मेडिकल देखभाल की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) पर भारत संघ, पंजाब और हरियाणा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ से जवाब मांगा, जिसमें दुर्घटना पीड़ितों को प्रारंभिक और आपातकालीन मेडिकल देखभाल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की गई।यह याचिका लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल द्वारा प्रसिद्ध पंजाबी गायक राजवीर सिंह जवंदा की दुखद मृत्यु के मद्देनजर दायर की गई, जिनकी 8 अक्टूबर, 2025 को एक सड़क दुर्घटना में लगी चोटों के कारण मृत्यु हो गई।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव...

महर की वापसी केवल खुला नामा से ही नहीं, पक्षकारों के बयान से भी सुनिश्चित की जा सकती है: केरल हाईकोर्ट
'महर' की वापसी केवल 'खुला नामा' से ही नहीं, पक्षकारों के बयान से भी सुनिश्चित की जा सकती है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि 'महर' (विवाह में पति द्वारा पत्नी को दिया जाने वाला प्रतिफल) की वापसी केवल 'खुला नामा' से ही नहीं, बल्कि 'खुला' द्वारा तलाक की घोषणा के लिए मुस्लिम पत्नी की याचिका पर विचार करते समय पक्षकारों के बयान से भी सुनिश्चित की जा सकती है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ, फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक को चुनौती देने वाली पति द्वारा दायर अपील पर विचार कर रही थी।अपीलकर्ता व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए उन्होंने तर्क दिया कि फैमिली कोर्ट का...

अगर वह वाकई वकील है तो यह चिंताजनक है: केरल हाईकोर्ट ने महिला वकील के दुर्व्यवहार और जजों पर संदेह के लिए आलोचना की
'अगर वह वाकई वकील है तो यह चिंताजनक है': केरल हाईकोर्ट ने महिला वकील के दुर्व्यवहार और जजों पर संदेह के लिए आलोचना की

केरल हाईकोर्ट ने खुद को वादी बताकर अपने तलाक के आदेश को चुनौती देने के लिए स्वयं अदालत में पेश होने वाली महिला वकील को उसके (दुर्व्यवहार) के लिए फटकार लगाई।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम.बी. स्नेहलता की खंडपीठ, एर्नाकुलम फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश और फैसले को अमान्य करने की याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।इस मामले की सुनवाई इस बात पर विचार करने के लिए की जा रही थी कि क्या रिट याचिका को क्रमांकित करने की आवश्यकता है, क्योंकि रजिस्ट्री ने मामले में कई खामियां चिह्नित की हैं।...