हाईकोर्ट
पत्नी का दूसरों के साथ शॉपिंग पर जाना, पति को घरेलू काम करने के लिए मजबूर करना 'आत्महत्या के लिए उकसाना' नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पत्नी का समय पर खाना न बनाना, पति को घर का काम करने के लिए मजबूर करना और खरीदारी के लिए अन्य व्यक्तियों के साथ बाजार जाना आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनता है।अपने पति को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए पत्नी के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत आरोप तय करने के उमरिया के सत्र न्यायाधीश के आदेश को रद्द करते हुए, जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की पीठ ने कहा, “आत्महत्या के लिए उकसाने के मामलों में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कृत्यों या...
किसी विधवा के सिर पर एक-पक्षीय तलाक का कलंक, उसे पूर्व-सैनिक की जीवनसाथी होने के लाभों से वंचित करने के लिए, लगाए नहीं रखा जा सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि किसी पूर्व सैनिक के पति या पत्नी को इस आधार पर विधवा पहचान पत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि पति की याचिका पर पत्नी के खिलाफ तलाक की एक पक्षीय डिक्री दी गई थी, बाद में एकपक्षीय डिक्री वापस लेने की मांग संबंधी आवेदन के लंबित रहने के दरमियान उसका निधन हो गया।जस्टिस एम नागाप्रसन्ना की सिंगल जज बेंच ने पर्वतम्मा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और संयुक्त निदेशक, सैनिक कल्याण और पुनर्वास को याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर विधवा पहचान पत्र जारी करने का निर्देश...
मुबारत समझौता करने वाले जोड़े को फैमिली कोर्ट द्वारा विवाह विच्छेद की घोषणा का अधिकार: कर्नाटक हाइकोर्ट
कर्नाटक हाइकोर्ट ने दोहराया कि जब पक्षकारों (सुन्नी मुसलमानों) ने मुबारत समझौता किया और उक्त समझौते द्वारा उनके बीच दर्ज विवाह को खत्म करने का फैसला किया तो फैमिली कोर्ट को आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन पर विचार करने का अधिकार है।जस्टिस अनु शिवरामन और जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े की खंडपीठ ने जोड़े द्वारा दायर अपील स्वीकार कर ली और मुबारत समझौते को स्वीकार करते हुए पक्षकारों के बीच विवाह को खत्म कर दिया।दंपत्ति ने फैमिली कोर्ट में यह घोषणा करने की मांग की कि दिनांक 07-04-2019 को नंद गार्डन,...
NDPS Act | जांच एजेंसी अदालत से कार्यवाही नहीं छिपा सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने FSL द्वारा उठाई गई आपत्ति को छिपाने पर आरोपी को बरी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस अधिनियम (NDPS Act) के तहत मामले में दोषसिद्धि इस आधार पर रद्द कर दी कि अभियोजन पक्ष ने ट्रायल कोर्ट से यह छिपाया कि जांच एजेंसी द्वारा भेजे गए सैंपल पर फोरेंसिक लैब द्वारा आपत्तियां उठाई गई थीं।जस्टिस पंकज जैन ने कहा,"जांच एजेंसी न्यायालय से कार्यवाही को छिपा नहीं सकती। जांच एजेंसी का दायित्व अपराध की जांच करना है न कि यह सुनिश्चित करना कि आरोपी को सजा मिले। आखिरकार खोज सत्य की ही है। अभियोजन पक्ष से जांच की निष्पक्षता की...
कर्मकार मुआवजा अधिनियम | मृत्यु के मामले में दावे की पात्रता रोजगार के दौरान और उसके कारण हुई दुर्घटना को साबित करने की क्षमता पर निर्भर करती है: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट ने हाल ही में श्रमिकों के मुआवजे के दावों में दुर्घटनाओं और रोजगार के बीच एक कारण संबंध स्थापित करने के महत्व को रेखांकित किया। कोर्ट ने फैसले में कहा कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के मामले में, श्रमिक मुआवजा अधिनियम, 1923 की धारा 3 के तहत मुआवजे का पात्र होने के लिए दावेदारों को दुर्घटना और रोजगार के बीच एक स्पष्ट संबंध दिखाना होगा। जस्टिस संजीव कुमार ने कहा, “कर्मचारी की मृत्यु के मामले में 1923 अधिनियम की धारा 3 के तहत मुआवजे के दावे का पात्र होने के लिए, उसके कानूनी...
राजस्थान हाइकोर्ट ने फिजिकल टेस्ट में गलत लंबाई मापने के कारण कांस्टेबल भर्ती से बाहर की गई महिला की उम्मीदवारी बहाल की, मुआवजे का आदेश दिया
कांस्टेबल भर्ती के तहत फिजिकल टेस्ट के दौरान महिला उम्मीदवार की लंबाई गलत मापने की गलती करने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को भुगतान करने के लिए राज्य पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।जस्टिस गणेश राम मीणा की एकल पीठ ने कहा कि प्रतिवादियों के कृत्य के कारण याचिकाकर्ता उम्मीदवार को बहुत मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी का खर्च उठाना पड़ा। ऐसी परिस्थितियों में न्यायालय ने प्रतिवादियों पर भारी जुर्माना लगाना उचित समझा।जयपुर स्थित पीठ ने आदेश में कहा,"इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की...
वक्फ बोर्ड के आदेश को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिका हाइकोर्ट के नियमों के अनुसार 90 दिनों में दायर की जानी है: कर्नाटक हाइकोर्ट
कर्नाटक हाइकोर्ट ने माना कि यद्यपि वक्फ एक्ट, 1995 के तहत पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए कोई विशिष्ट अवधि निर्धारित नहीं है, फिर भी कर्नाटक हाइकोर्ट नियम 1959 के प्रावधानों के अनुसार किसी भी न्यायालय के आदेश या कार्यवाही को संशोधित करने के लिए याचिकाएं आदेश की तिथि से 90 दिनों की अवधि के भीतर हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जानी चाहिए।जस्टिस जी बसवराज की एकल पीठ ने सैयद मोहम्मद हुसैन नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। उन्होंने कर्नाटक वक्फ न्यायाधिकरण, कलबुर्गी के पीठासीन अधिकारी द्वारा...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निर्धारित समय सीमा के भीतर मध्यस्थता अपील दायर न कर पाने पर अधिकारियों के खिलाफ जांच का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव/अपर मुख्य सचिव, सिंचाई, उत्तर प्रदेश को उन अधिकारियों के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया है, जिन पर मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत अपील दायर करने की जिम्मेदारी थी, मगर वो 513 दिनों की देरी के बाद दायर की गई थीं। मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत दायर अपीलों को खारिज करते हुए, चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस विकास बधवार की पीठ ने कहा कि "कार्यवाही लापरवाह तरीके से की गई है, जो वास्तविकता से अलग है।"न्यायालय ने माना कि अपीलकर्ता...
SC/ST Act | अग्रिम जमानत केवल इस आधार पर खारिज नहीं की जा सकती कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, विशेष अदालत को गुण-दोष के आधार पर फैसला सुनाना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 (SC/ST Act) के तहत अग्रिम जमानत याचिका केवल इस आधार पर खारिज नहीं की जा सकती कि ऐसी याचिका अधिनियम की धारा 18/18(ए) में निहित वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।रुपयों के विवाद के आधार पर SC/ST Act के तहत दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी से पहले जमानत याचिका को अनुमति देते हुए जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,"विशेष अदालत सत्र न्यायालय, जिसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की...
PC Act | भ्रष्टाचार के मामलों में इस आधार पर जमानत मांगना 'बेकार' है कि सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSPV) एस्टेट अधिकारी की गिरफ्तारी से पहले जमानत खारिज करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामले में इस आधार पर जमानत मांगना कि "सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ, बेकार है।जस्टिस अनूप चितकारा ने कहा कि याचिकाकर्ता ने इस आधार पर भी जमानत मांगी कि सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ।उन्होंने कहा,"यह तर्क निरर्थक है। यदि यह तर्क स्वीकार कर लिया जाता है तो ऐसा कृत्य करने वाला प्रत्येक सरकारी कर्मचारी, जिससे सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ, जमानत का...
सरकारी कर्मचारी द्वारा दिया गया इस्तीफा स्वीकार होने से पहले किसी भी समय वापस लिया जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा दिया गया इस्तीफा, स्वीकृति से पहले किसी भी समय वापस लिया जा सकता है।जस्टिस मंजीव शुक्ला की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक त्यागपत्र नियमावली, 2000 के नियम 6 और 7 की जांच करते हुए यह टिप्पणी की। ये नियम सरकारी सेवकों द्वारा सेवा से त्यागपत्र के मामलों से संबंधित हैं। अदालत पूर्णिमा सिंह की ओर से दायर एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, एटा द्वारा पारित एक आदेश को चुनौती दी थी। जिला बेसिक शिक्षा...
जांच में बाधा डालने के लिए अधिकारियों द्वारा हर संभव प्रयास किया गया: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच की मंजूरी देने में देरी के लिए PUDA,GMAD को फटकार लगाई
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने आपराधिक मामलों में जांच में देरी के लिए राज्य प्राधिकरणों पंजाब शहरी नियोजन एवं विकास प्राधिकरण (PUDA) तथा ग्रेटर मोहाली क्षेत्र विकास प्राधिकरण (GMAD) को फटकार लगाई, जिसके लिए उसे मंजूरी देने का अधिकार दिया गया था।जस्टिस एन.एस. शेखावत ने कहा,"एसएसपी फतेहगढ़ साहिब द्वारा प्रस्तुत हलफनामे से यह स्पष्ट है कि PUDA/GMAD के अधिकारियों ने जांच की प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए हर संभव प्रयास किया, जो कि जाहिर तौर पर उक्त मामलों में आरोपियों के प्रभाव में है। इस न्यायालय...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने ड्रग्स मामले की जांच में अनियमितताओं को लेकर NCB जांच में समीर वानखेड़े के खिलाफ 10 अप्रैल तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज IRS अधिकारी समीर वानखेड़े को उनके द्वारा जांचे गए ड्रग मामलों में अनियमितताओं के संबंध में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा शुरू की गई जांच में दंडात्मक कार्रवाई से अस्थायी संरक्षण प्रदान किया।जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की खंडपीठ ने NCB द्वारा उन्हें जारी किए गए नोटिस के खिलाफ वानखेड़े की याचिका पर 10 अप्रैल तक जवाब देने का निर्देश दिया, जिसमें कहा गया कि तब तक उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।NCB ने राजपूत की मौत से जुड़े...
दिल्ली हाईकोर्ट ने विपक्षी गठबंधन का नाम 'I.N.D.I.A' के इस्तेमाल के खिलाफ जनहित याचिका पर जवाब देने का अंतिम अवसर दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को विपक्षी राजनीतिक दलों को नए गठबंधन के लिए संक्षिप्त नाम I.N.D.I.A (भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन) के उपयोग के खिलाफ जनहित याचिका पर एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई पहले करने से इनकार किया। इसे पहले से तय तारीख 10 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।कोर्ट ने कहा कि वह 10 अप्रैल को मामले की सुनवाई और निपटारा करने का प्रयास करेगा। 2024 के...
हरियाणा कैबिनेट विस्तार: मंत्रियों की संख्या विधानसभा के 15% से अधिक होने के मुद्दे पर याचिका, हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य से जवाब मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 17 मार्च को किए गए हरियाणा सरकार के मंत्रिमंडल के विस्तार के खिलाफ एक जनहित याचिका पर केंद्र, राज्य सरकार और अन्य अधिकारियों से जवाब मांगा। याचिका में कहा गया है कि मंत्रियों की संख्या विधानसभा के पंद्रह प्रतिशत से अधिक है, और यह संविधान के अनुच्छेद 164 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 164(1ए) के अनुसार, किसी राज्य में मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या उस राज्य की विधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। कार्यवाहक चीफ...
चुनाव आयोग ने पहले ही कदम उठाएं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 'NOTA' के लिए मतदाता जागरूकता पैदा करने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में जनहित याचिका खारिज कर दिया। उक्त याचिका में भारत के चुनाव आयोग (ECI) को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर इनमें से कोई नहीं (NOTA) विकल्प के बारे में जनता में जागरूकता पैदा करने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस रवींद्र वी घुगे और जस्टिस आरएम जोशी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता सुहास वानखेड़े ने पहले भी समान जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें अदालत ने इस मुद्दे को पर्याप्त रूप से संबोधित किया।कहा गया,"हमें पता चला है कि चुनाव आयोग पहले ही व्यवस्थित मतदाता शिक्षा और...
मृत्यु की घोषणा के लिए सिविल मुकदमा केवल इसलिए विशिष्ट राहत अधिनियम की धारा 34 के तहत वर्जित नहीं कि आगे राहत का दावा नहीं किया गया: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने फैसला सुनाया कि मृत्यु की घोषणा के लिए सिविल मुकदमा केवल इसलिए सुनवाई योग्य है और विशिष्ट राहत अधिनियम 1963 की धारा 34 के तहत वर्जित नहीं है, क्योंकि वादी ने आगे राहत का दावा नहीं किया।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने आगे कहा कि 1963 अधिनियम की धारा 34 के तहत किसी अन्य व्यक्ति की मृत्यु की घोषणा के लिए सिविल मुकदमा दायर करने पर कोई रोक नहीं है। यदि वादी ऐसे व्यक्ति का कानूनी उत्तराधिकारी है। मृत्यु का ऐसा कानूनी चरित्र उसके लाभ के लिए है और इसे ऐसे कानूनी चरित्र के...
केरल हाईकोर्ट ने सीबीएसई और राज्य सरकार को यौन अपराधों की घटनाओं को कम करने और जागरूकता बढ़ाने के लिए आयु-उपयुक्त रोकथाम-उन्मुख पाठ्यक्रम डिजाइन करने के लिए समिति बनाने का निर्देश दिया
केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार यौन शोषण पर आयु-उपयुक्त रोकथाम-उन्मुख कार्यक्रम (age-appropriate prevention-oriented programme) प्रदान करने के लिए एक पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का निर्देश दिया है। जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा,“कभी-कभी यौन कृत्य इस भरोसे के साथ किए जाते हैं कि दोनों भागीदारों की सहमति, उन्हें अपराध से मुक्त करने के लिए पर्याप्त होगी। जब तक उन्हें अपनी धारणाओं के गलत होने का एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, और स्थिति विनाशकारी हो जाती...
कानून की किताबें छापने वाले प्रकाशकों को अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए, कोई भी गलती अवमानना या झूठी गवाही की कार्यवाही को आमंत्रित कर सकती है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जो लोग क़ानून और वैधानिक दस्तावेज़ों को छापते और प्रकाशित करते हैं, उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए अन्यथा, उन्हें अदालत की अवमानना, झूठी गवाही और इसी तरह के अपराधों के लिए दोषी ठहराया जा सकता है, साथ ही उनके प्रकाशनों को ब्लैक लिस्ट भी किया जा सकता है। चीफ जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने फादर वेलेरियन फर्नांडीस की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिन्होंने ने एकल न्यायाधीश पीठ के आदेश पर सवाल उठाया, जिसने...
कर्मचारी-नियोक्ता संबंध स्थापित करने का दायित्व दावेदार पर: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस चंद्र धारी सिंह की सिंगल जज बेंच ने सुनील कुमार और अन्य बनाम राज्य एवं अन्य के मामले में एक रिट याचिका पर दिए फैसले में दोहराया कि प्रबंधन और कामगार के बीच कर्मचारी-नियोक्ता का संबंध स्थापित करने का दायित्व दावेदार पर है, यानी उस व्यक्ति पर, जो पार्टियों के बीच इस तरह के रिश्ते के अस्तित्व की दलील पेश करता है। मामले में अदालत ने पाया कि श्रम न्यायालयों ने इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पूरे मामले पर विचार किया था कि याचिकाकर्ता उस अवधि में प्रतिवादी के साथ अपने रोजगार...




















