हाईकोर्ट

IT Rules Amendment | नागरिकों को सूचित करने के कथित उद्देश्य के बावजूद FCU को सच्चाई का खुलासा करने का अधिकार नहीं: कुणाल कामरा
IT Rules Amendment | नागरिकों को सूचित करने के कथित उद्देश्य के बावजूद FCU को सच्चाई का खुलासा करने का अधिकार नहीं: कुणाल कामरा

याचिकाकर्ताओं ने 2021 आईटी नियम संशोधन (IT Rules Amendment) को चुनौती देने वाली याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि नागरिकों को सूचित रखने के अपने कथित इरादे को पूरा करने के लिए सरकारी फैक्ट चेक यूनिट (FCU) के लिए कोई प्रावधान नहीं है।कामरा के लिए सीनियर एडवोकेट नवरोज़ सीरवई ने कहा,“नियम का स्पष्ट उद्देश्य नागरिकों को सूचित करना है। लेकिन नियम को केवल यह कहने से अधिक कुछ भी आवश्यक नहीं है कि कथन A गलत है। सत्य क्या है? किसी प्रकटीकरण की कोई आवश्यकता नहीं। ये महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर ऐसा...

आम चुनाव 2024: केरल हाईकोर्ट में दायर याचिका में अट्टिंगल निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों का आरोप
आम चुनाव 2024: केरल हाईकोर्ट में दायर याचिका में अट्टिंगल निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों का आरोप

केरल हाईकोर्ट के समक्ष लोकसभा चुनावों से पहले सांसद अडूर प्रकाश की ओर से एक याचिका दायर की गई है, जिसमें अट्टिंगल संसदीय क्षेत्र में अंतिम मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों का आरोप लगाया गया है। याचिका में मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए प्रौद्योगिकी तैनात करने का अनुरोध किया गया है।जस्टिस शोबा अन्नम्मा ईपेन ने मंगलवार को सांसद के मुख्य चुनाव अभिकर्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। सांसद अडूर प्रकाश 26.04.2024 को होने वाले मतदान में अट्ट‌िंगल संसदीय...

जनहित याचिका में मांग-आधिकारिक दस्तावेजों में इलाहाबाद हाईकोर्ट का नाम बदलकर हाईकोर्ट ऑफ उत्तर प्रदेश किया जाए; वकील को नसीहत-क़ानून पर बहस करें, भावनाओं से बचें
जनहित याचिका में मांग-आधिकारिक दस्तावेजों में इलाहाबाद हाईकोर्ट का नाम बदलकर 'हाईकोर्ट ऑफ उत्तर प्रदेश' किया जाए; वकील को नसीहत-'क़ानून पर बहस करें, भावनाओं से बचें'

इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें आधिकारिक दस्तावेजों में हाईकोर्ट का नाम बदलकर "उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट" करने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से अपनी भावनाओं को एक तरफ रखते हुए केवल कानूनी दलीलें पेश करने की नसीहत दी। चीफ जस्टिस भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने मौखिक रूप से कहा, "अगर आपको यही सब बोलना है तो 5 मिनट और बोलिए। अगर कानूनी दलीलें देंगे तो सुना जाएगा आपको। भावनात्मक दलीलें मत...

मानहानि: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया के खिलाफ ट्वीट हटाने का निर्देश दिया, यूट्यूब वीडियो को निजी बनाने का आदेश दिया
मानहानि: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया के खिलाफ ट्वीट हटाने का निर्देश दिया, यूट्यूब वीडियो को निजी बनाने का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को गौतम बुद्ध नगर जिला और सत्र न्यायालय में एक वकील की हड़ताल के दौरान पिछले महीने उन पर हमले के मामले में विभिन्न यूट्यूब चैनलों और एक्स उपयोगकर्ताओं के खिलाफ मानहानि के मुकदमे में सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया के पक्ष में एक अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश पारित किया।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने भाटिया के उस आवेदन का निस्तारण कर दिया जिसमें उन्होंने यूट्यूब चैनलों और एक्स यूजर्स के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे में अंतरिम राहत की मांग की थी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि भाटिया के...

मजिस्ट्रेट शिकायत के सच या झूठ का पता लगाने के लिए अभिव्यक्ति का उपयोग सीआरपीसी के Chapter XVI के तहत आगे बढ़ने के इरादे को इंगित करता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट "शिकायत के सच या झूठ का पता लगाने के लिए" अभिव्यक्ति का उपयोग सीआरपीसी के Chapter XVI के तहत आगे बढ़ने के इरादे को इंगित करता है: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संहिता की धारा 202 के संदर्भ में शिकायत की सच्चाई या झूठ का पता लगाने के लिए अभिव्यक्ति का उपयोग करना दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के chapter 16 के तहत आगे बढ़ने की मंशा को इंगित करता है, जो शिकायतों की पूछताछ और जांच से संबंधित है।जस्टिस संजय धर ने आगे विस्तार से बताया कि संहिता की धारा 156 (3) के तहत निर्देश जारी करते समय "सच या झूठ का पता लगाने के लिए" अभिव्यक्ति का उपयोग नहीं किया जाता है। मामले की पृष्ठभूमि: इस मामले में एक महिला ने...

लोकसभा चुनाव 2024: केरल हाईकोर्ट में याचिका में आरोप- वडकारा लोकसभा सीट पर सीपीआई (एम) कर रही मतदाता धोखाधड़ी; मतदान प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग
लोकसभा चुनाव 2024: केरल हाईकोर्ट में याचिका में आरोप- वडकारा लोकसभा सीट पर सीपीआई (एम) कर रही मतदाता धोखाधड़ी; मतदान प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग

केरल हाईकोर्ट के समक्ष एक कांग्रेस उम्‍मीदवार के मुख्य चुनाव अभ‌िकर्ता ने चुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के इशारे पर मतदाता धोखाधड़ी किए जाने का आरोप लगाया है। केरल की वडकारा लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार शफी परम्‍बिल के मुख्य चुनाव अभ‌िकर्ता एडवोकेट प्रवीण कुमार ने केरल हाईकोर्ट के समक्ष दायर याचिका में कहा है कि आगमी लोकसभा चुनाव में उनकी लोकसभा सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के इशारे पर मतदाता धोखाधड़ी की जा सकती है।याचिका में निर्वाचन प्रक्रिया की वीडियो...

व्यावसायिक या तकनीकी शिक्षकों के लिए सभी राज्यों में चयन का समान मानक बनाए रखा जाना चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
व्यावसायिक या तकनीकी शिक्षकों के लिए सभी राज्यों में चयन का समान मानक बनाए रखा जाना चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि व्यावसायिक या तकनीकी पाठ्यक्रमों के शिक्षकों के लिए सभी राज्यों में चयन का समान मानक बनाए रखा जाना चाहिए।जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि "यह देखा जाना चाहिए कि जहां तक तकनीकी या व्यावसायिक शिक्षा का संबंध है, मानक को पूरे भारत में सार्वभौमिक रूप से बनाए रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, चूंकि एक उम्मीदवार को किसी भी राज्य में रोजगार प्राप्त करने का अधिकार है, आरएसी की आवश्यकता सभी राज्यों में सभी छात्रों को समान स्तर की शिक्षा...

सेवानिवृत्ति की उम्र के करीब, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेटे को अनुकंपा नियुक्ति प्रतीक्षा सूची में उसकी जगह लेने की अनुमति दी
सेवानिवृत्ति की उम्र के करीब, बॉम्बे हाईकोर्ट ने बेटे को अनुकंपा नियुक्ति प्रतीक्षा सूची में उसकी जगह लेने की अनुमति दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मृत कर्मचारी की 55 वर्षीय विधवा को अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रतीक्षा सूची में उनके 18 वर्षीय बेटे द्वारा प्रतिस्थापित करने की अनुमति दी, क्योंकि नियुक्ति दिए जाने पर वह किसी भी सेवानिवृत्त लाभ की हकदार नहीं होगी।जस्टिस रवींद्र वी घुगे और जस्टिस आरएम की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि विधवा पात्र है, लेकिन उसे 4-5 साल के लिए अनुकंपा नियुक्ति देना उद्देश्यहीन होगा, क्योंकि वह किसी भी सेवा या सेवानिवृत्ति लाभ की हकदार नहीं होगी। खंडपीठ ने कहा, 'अगर इस कोर्ट को विधवा को...

कानूनी सबूत के अभाव में आरोपी को नैतिक रूप से दोषी नहीं ठहरा सकती है लोअर कोर्ट: कर्नाटक हाईकोर्ट ने हत्या की सजा, उम्रकैद की सजा को खारिज किया
कानूनी सबूत के अभाव में आरोपी को नैतिक रूप से दोषी नहीं ठहरा सकती है लोअर कोर्ट: कर्नाटक हाईकोर्ट ने हत्या की सजा, उम्रकैद की सजा को खारिज किया

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महिला को जलाने के तीन आरोपियों की हत्या की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी। उचित संदेह से परे अपने मामले को स्थापित करने में अभियोजन पक्ष की विफलता का हवाला देते हुए, जस्टिस श्रीनिवास हरीश कुमार और जस्टिस एस रचैया की खंडपीठ ने कहा कि “ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रायल कोर्ट ने कानूनी सबूतों के अभाव में आरोपी को नैतिक रूप से दोषी ठहराया है”शादीशुदा महिला का कथित तौर पर तीसरे आरोपी के साथ संबंध था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, तीनों आरोपियों (तीसरे आरोपी के माता-पिता...

अगर कार में शुरू से ही मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्‍ट हो तो ग्राहक को उसे बदलने का हक: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
अगर कार में शुरू से ही मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्‍ट हो तो ग्राहक को उसे बदलने का हक: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल में एक फैसले में कहा कि अगर एक कार में शुरू से ही मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्‍ट है तो ग्राहक उसे बदलने का हकदार है।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस पुनीत गुप्ता की पीठ ने टूट-फूट की समस्याओं के लिए मरम्मत और मैन्यूफैक्चरिं की अंतर्निहित गड़बड़ियों के कारण रिप्लेसमेंट के बीच अंतर पर पर चर्चा करते हुए कहा, "अगर उपयोग के दरमियान खरीदे गए वाहनों में कोई तकनीकी खराबी हो तो मरम्मत की मांग की जा सकती है, न कि जहां वाहन में मैन्यूफैक्चरिंग ड‌िफेक्ट हो।"मामले में जम्मू...

संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत पेंशन कर्मचारी का संवैधानिक अधिकारः झारखंड हाईकोर्ट
संविधान के अनुच्छेद 300-ए के तहत पेंशन कर्मचारी का संवैधानिक अधिकारः झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने हाल ही में बिरसा एग्र‌िकल्चर यूनिवर्सिटी बनाम झारखंड राज्य के मामले में एक लेटर्स पेटेंट अपील पर दिए निर्णय में माना‌ कि किसी कर्मचारी को पेंशन लाभ से वंचित करना, उसे संविधान के अनुच्छेद 300 ए के तहत पेंशन के रूप में संवैधानिक अधिकार से वंचित करना है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस नवनीत कुमार की खंडपीठ ने कहा कर्मचारी पेंशन अपनी सराहनीय सेवाओं के कारण अर्जित करता है। निर्णय में अदालत ने कहा कि प्रतिवादी ने लगभग तीन दशकों तक यूनिवर्सिटी में काम...

दिल्ली हाइकोर्ट ने मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन को भंग करने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
दिल्ली हाइकोर्ट ने मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन को भंग करने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाइकोर्ट ने मंगलवार को मौलाना आज़ाद एजुकेशन फाउंडेशन (MAEF) को भंग करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसे शैक्षिक रूप से पिछड़े अल्पसंख्यकों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1989 में स्थापित किया गया था।एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मिनी पुष्करणा की खंडपीठ ने डॉ. सैयदा सैय्यदैन हमीद जॉन दयाल और दया सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी।अदालत ने पाया कि फाउंडेशन को भंग करने के लिए MAEF की आम सभा द्वारा लिया गया निर्णय सुविचारित निर्णय...

जमानत के लिए कठोर शर्तें प्रथम दृष्टया लागू नहीं होंगी| बॉम्बे हाईकोर्ट ने मकोका आरोपी को जमानत दी, उस पर चैन स्नैचिंग के 24 मामलों का आपराधिक  इतिहास
जमानत के लिए कठोर शर्तें प्रथम दृष्टया लागू नहीं होंगी| बॉम्बे हाईकोर्ट ने मकोका आरोपी को जमानत दी, उस पर चैन स्नैचिंग के 24 मामलों का आपराधिक इतिहास

बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही चैन स्नैचिंग के एक कथित आरोपी को यह कहते हुए जमानत दे दी कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 (मकोका) के तहत जमानत के लिए कठोर शर्तें तब लागू नहीं होंगी, जब आरोपित व्यक्ति का आपराधिक इतिहास केवल चेन स्नैचिंग से ही जुड़ा हो। जस्टिस माधव जे जामदार ने पुणे में चेन स्नैचरों के एक गिरोह के कथित सरगना दीपक पी माली को यह कहते हुए जमानत दी, "हालांकि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम, 1999 के प्रावधान लागू किए गए हैं, लेकिन सभी अपराध चेन-स्नैचिंग के हैं और...

अनुशासित बलों द्वारा अनुशासन की कमी सबसे गंभीर कदाचार: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
अनुशासित बलों द्वारा अनुशासन की कमी सबसे गंभीर कदाचार: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट की जस्टिस नमित कुमार की बेंच ने पंजाब राज्य और अन्य बनाम पूर्व कांस्टेबल अमरजीत सिंह के मामले में अपील पर निर्णय लेते हुए माना कि अनुशासन एक अनुशासित बल की पहली आवश्यकता है और अनुशासित बल के सदस्य द्वारा ड्यूटी से अनुपस्थित रहना पंजाब पुलिस नियम (PPR) के नियम 16.2 के तहत सबसे गंभीर कदाचार है, जहां कदाचार शब्द में कोई भी गलत कार्य शामिल है जो अनुशासन को बाधित करता है।पृष्ठभूमिअमरजीत सिंह (प्रतिवादी) पीएपी जालंधर कैंट में कांस्टेबल के रूप में शामिल हुए और बीमारी के कारण...

जब तक कोई मामला साबित न हो जाए, आगे जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता: कर्नाटक हाइकोर्ट
जब तक कोई मामला साबित न हो जाए, आगे जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता: कर्नाटक हाइकोर्ट

कर्नाटक हाइकोर्ट ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत सहायक आयकर आयुक्त के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच में आरोप पत्र को खारिज कर दिया गया और पदोन्नति के लिए उनके मामले पर विचार करने के लिए दो महीने के भीतर समीक्षा डीपीसी आयोजित करने का निर्देश दिया गया।जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस जी बसवराज की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा,“जांच अधिकारी ने 14.03.2014 की रिपोर्ट के अनुसार उन्हें...

पिछली याचिका खारिज होने के बाद भी लगातार अग्रिम जमानत याचिकाएं सुनवाई योग्य: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
पिछली याचिका खारिज होने के बाद भी लगातार अग्रिम जमानत याचिकाएं सुनवाई योग्य: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 438 के तहत दायर की गई लगातार जमानत याचिकाएं तब भी सुनवाई योग्य हैं, जब पिछली याचिका खारिज कर दी गई हो।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,"दूसरी/लगातार अग्रिम जमानत याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं, चाहे पिछली याचिका वापस ले ली गई हो/अभियोजन पक्ष के लिए दबाव न डाले जाने के कारण खारिज कर दी गई हो/या फिर पहले की याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दी गई हो।"न्यायालय ने निम्नलिखित सिद्धांतों का भी सारांश दिया:i) सीआरपीसी 1973 की धारा 438 के तहत दायर की गई...

कलकत्ता हाइकोर्ट ने हावड़ा में राम नवमी जुलूस की अनुमति दी, कहा- यदि राज्य भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सकता है तो केंद्रीय बलों की मांग करे
कलकत्ता हाइकोर्ट ने हावड़ा में राम नवमी जुलूस की अनुमति दी, कहा- यदि राज्य भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सकता है तो केंद्रीय बलों की मांग करे

कलकत्ता हाइकोर्ट ने अंजनी पुत्र सेना द्वारा 17 अप्रैल को हावड़ा में अपनी वार्षिक राम नवमी यात्रा (जुलूस) निकालने की याचिका को अनुमति दी।जस्टिस जय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने जुलूस की अनुमति देते हुए कहा कि कोई नारेबाजी या घृणास्पद भाषण नहीं होना चाहिए। साथ ही उपस्थित लोगों की संख्या 200 तक सीमित की गई।न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया कि राज्य के पास 200 लोगों की भीड़ को प्रबंधित करने के लिए संसाधन उपलब्ध होने की अपेक्षा की जाती है तथा यदि उसे ऐसा करने में कठिनाई हो रही है तो वह 24 घंटे का नोटिस देकर...

अदालतों को जघन्य अपराध करने के आरोपी सिलसिलेवार अपराधियों के लिए एक साथ सजा का आदेश नहीं देना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
अदालतों को जघन्य अपराध करने के आरोपी सिलसिलेवार अपराधियों के लिए एक साथ सजा का आदेश नहीं देना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने कहा कि जहां व्यक्ति सिलसिलेवार अपराधी है और वह भी जघन्य अपराध करने के लिए अदालतों को ऐसे मामलों में सजा के साथ-साथ चलने का आदेश नहीं देना चाहिए। जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने कहा,"एक ऐसी सजा नीति, जो अपने संचालन में असामान्य रूप से हल्की और सहानुभूतिपूर्ण है, उसका समाज पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा और कानून की प्रभावकारिता में जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचाएगी। इसलिए प्रत्येक न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए उचित...

IT Rules 2021 | FCU का मतलब किसी भी चीज़ पर फुल सेंसरशिप, सरकार नहीं चाहती कि लोग जानें, चर्चा करें, बहस करें या सवाल करें: कुणाल कामरा
IT Rules 2021 | FCU का मतलब किसी भी चीज़ पर फुल सेंसरशिप, सरकार नहीं चाहती कि लोग जानें, चर्चा करें, बहस करें या सवाल करें: कुणाल कामरा

2021 आईटी संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि सरकारी फैक्ट चेक यूनिट (FCU) का उद्देश्य जनता को गलत सूचना से बचाना नहीं है, बल्कि किसी भी चीज़ पर कुल राज्य सेंसरशिप लाना है, जो सरकार नहीं चाहती कि लोग जानें, चर्चा करें, बहस करें या सवाल करें।कामरा के लिए सीनियर एडवोकेट नवरोज़ सीरवई ने तर्क दिया,“आक्षेपित नियम के तहत यह सामग्री की वास्तविक मिथ्या या नकलीपन नहीं है, बल्कि सरकारी FCU द्वारा सामग्री की पहचान करने का कार्य है, जिससे मध्यस्थ सुरक्षित...

इलाहाबाद हाईकोर्ट को उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट के रूप में संदर्भित करने की मांग को लेकर याचिका दायर
इलाहाबाद हाईकोर्ट को 'उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट' के रूप में संदर्भित करने की मांग को लेकर याचिका दायर

इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई। उक्त याचिका में केंद्र सरकार और अन्य प्राधिकारियों को सभी अधिसूचनाओं, संचार, निर्णय, आदेश और फरमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट को 'उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट' के रूप में संदर्भित करने का निर्देश देने की मांग की गई।लखनऊ के रहने वाले वकील दीपांकर कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका में हाईकोर्ट के अधिकारियों को इसके नियमों (इलाहाबाद हाईकोर्ट नियम, 1952) का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट नियम करने और अपने आदेशों/निर्णय, नोटिसों और अधिसूचनाओं में हाईकोर्ट के...