हाईकोर्ट
जमीन आवंटन के बाद भी खत्म नहीं होती SDM की जिम्मेदारी: इलाहाबाद हाइकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि जमीन का आवंटन करने के बाद भी उपजिलाधिकारी (SDM) की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती बल्कि उन्हें आवंटी के कब्जे की सुरक्षा तब तक करनी होती है, जब तक जमीन का स्वामित्व राज्य के पास रहता है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 65 के तहत SDM को यह अधिकार और कर्तव्य है कि वह अवैध कब्जे को हटाकर आवंटी को जमीन पर कब्जा दिलाएं और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।अदालत ने कहा कि यदि SDM की भूमिका...
हाईवे निर्माण में दखल नहीं दे सकता वक्फ ट्रिब्यूनल: पटना हाइकोर्ट का सख्त फैसला
पटना हाइकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामलों में वक्फ ट्रिब्यूनल को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।अदालत ने साफ किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 अपने आप में पूर्ण कानून है। इसी के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया संचालित होती है।जस्टिस बिबेक चौधरी की एकल पीठ ने बिहार राज्य वक्फ ट्रिब्यूनल, पटना के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को समस्तीपुर जिले में कब्रिस्तान और मस्जिद दर्ज जमीन पर हाईवे निर्माण से...
नाबालिग से छेड़छाड़ के बाद आत्महत्या का मामला: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने POCSO आरोपी की जमानत रद्द की
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने गंभीर मामले में POCSO आरोपी की जमानत रद्द की, जिस पर आरोप है कि जमानत पर छूटने के बाद उसने नाबालिग पीड़िता को फिर से परेशान किया, जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली।जस्टिस बृज राज सिंह की पीठ ने पाया कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया और मिली स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया। अदालत ने उसे दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।मामले में पीड़िता के पिता ने अदालत का रुख करते हुए आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग की थी।आरोप है कि आरोपी पहले से ही नाबालिग के साथ...
45 साल बाद जमीन बहाली का दावा खारिज: झारखंड हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, 1947 से पहले के सौदों पर नहीं लागू होंगे नियम
झारखंड हाइकोर्ट ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि 1947 से पहले हुए भूमि हस्तांतरण पर धारा 46 लागू नहीं होती और 45 साल की देरी से दायर बहाली याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल पीठ ने यह निर्णय देते हुए निचली प्राधिकरणों के आदेशों को रद्द किया, जिनमें जमीन बहाली की अनुमति दी गई थी।मामले में याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उनके पूर्वज को वर्ष 1939-40 में विधिवत पंजीकृत पट्टा के जरिए जमीन दी गई। बाद में 1952 में सिविल कोर्ट...
एटा में मिली जैन प्रतिमा को प्रयागराज के सेंट्रल म्यूजियम में सुरक्षित रखने का निर्देश, विशेषज्ञ समिति गठित करने को कहा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा में मिली एक प्राचीन जैन प्रतिमा को प्रयागराज के सेंट्रल म्यूजियम में सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने प्रतिमा के स्वरूप, प्रकृति और उससे जुड़े जैन समुदाय के संप्रदाय (दिगंबर या श्वेतांबर) की पहचान तय करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने को कहा है।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि प्रतिमा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे 9वीं-10वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। साथ ही, जैन समुदाय के दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदायों के...
पेड़ काटने की अनुमति से इनकार से पहले सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 की धारा 5 के तहत यदि सक्षम प्राधिकारी किसी व्यक्ति के पेड़ काटने या हटाने के आवेदन को खारिज करना चाहता है, तो उससे पहले आवेदक को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि धारा 5(2) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि बिना सुनवाई का अवसर दिए अनुमति को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अधिकारी धारा 5(1) के तहत प्राप्त रिपोर्ट से...
ड्यूटी के दौरान हादसे में 5 साल से कोमा में सिपाही, राजस्थान हाइकोर्ट ने दिलाई वेतन की राहत
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण मानवीय फैसले में उस महिला को राहत दी, जिसके पति एक सिपाही ड्यूटी के दौरान हुए हादसे के बाद पिछले कई वर्षों से कोमा में हैं और उनका वेतन रोका गया था।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सिपाही को विशेष दिव्यांग अवकाश (स्पेशल डिसएबिलिटी लीव) प्रदान किया जाए, 2021 से बकाया वेतन जारी किया जाए और आगे भी नियमित वेतन का भुगतान जारी रखा जाए।मामले के अनुसार सिपाही 2021 में ड्यूटी के दौरान एक दुर्घटना का शिकार हो गया था, जिसके बाद से वह कोमा में है।...
सिर्रा सॉन्ग विवाद: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गायक गुरु रंधावा के खिलाफ कार्यवाही पर लगाई रोक
पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने पंजाबी गायक गुरु रंधावा के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई।बता दें, यह मामला उनके गाने 'सिर्रा' के एक बोल को लेकर दर्ज शिकायत से जुड़ा है, जिसमें जाट-सिख समुदाय की मानहानि का आरोप लगाया गया।जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही स्थगित रहेगी।शिकायत में आरोप लगाया गया कि गीत की एक पंक्ति “जम्मेया नूं गुड़ती च मिलदी अफीम आ” जाट-सिख समुदाय की छवि को खराब करती है और धार्मिक परंपरा...
पेपर लीक होने पर परीक्षा पूरी कराने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी परीक्षा में पेपर लीक हो जाए और उससे अभ्यर्थियों को लाभ मिलने की आशंका हो तो उम्मीदवार राज्य को परीक्षा प्रक्रिया पूरी कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि चयन का कोई अटूट अधिकार नहीं होता और यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठ जाए तो उसे रद्द करना उचित है।कोर्ट ने कहा,“परीक्षा की निष्पक्षता सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति में इससे समझौता नहीं किया जा सकता।”मामला उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा सहायक...
अनुशासनात्मक कार्रवाई की समय-सीमा कोर्ट खुद बढ़ा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि गंभीर कदाचार के मामलों में सजा से बचने की स्थिति न बने, इसके लिए अदालत अपने आप (स्वतः संज्ञान लेते हुए) अनुशासनात्मक कार्यवाही की तय समय-सीमा बढ़ा सकती है।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि यदि नियोक्ता समय बढ़ाने के लिए कोर्ट नहीं भी जाता है तब भी अदालत मामले की सुनवाई करते समय परिस्थितियों का आकलन कर सकती है और आवश्यक होने पर समय-सीमा बढ़ा सकती है।कोर्ट ने कहा,“ऐसे मामलों में जहां कार्यवाही तय समय में पूरी...
RTI Act के तहत जानकारी देने में जानबूझकर देरी या बाधा हो तभी लगेगा जुर्माना: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार कानून (RTI Act) को लेकर एक अहम फैसला देते हुए कहा कि केवल देरी या कमी के आधार पर दंड नहीं लगाया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो कि सूचना देने में जानबूझकर बाधा डाली गई या दुर्भावना से देरी की गई तब तक दंड नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि RTI Act, 2005 की धारा 20 के तहत दंड लगाने से पहले आयोग को यह संतोष करना जरूरी है कि संबंधित अधिकारी ने बिना उचित कारण के सूचना देने से इनकार किया, गलत...
बेटे-बेटी की शादी तय करने के लिए पैरोल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि किसी दोषी कैदी को केवल अपने बच्चों की शादी तय करने या उसके लिए प्रयास करने के आधार पर पैरोल नहीं दी जा सकती।अदालत ने यह भी कहा कि जिन कैदियों के खिलाफ अन्य आपराधिक मामले लंबित हैं, वे कानूनन पैरोल के हकदार नहीं हैं।यह फैसला पूर्व विधायक अंगद यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने दिया।बता दें, अंगद यादव 1995 के एक हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और उनकी अपीलें पहले ही हाइकोर्ट और...
रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार 'कोर्ट' नहीं, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार 'कोर्ट' नहीं हैं। इसलिए रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाहियों पर लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं होगी।जस्टिस इरशाद अली ने फैसला सुनाया:“रजिस्ट्रार, एडिशनल रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय को 'कोर्ट' नहीं माना जा सकता। तदनुसार, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 में निहित प्रावधान लागू नहीं होगा। लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 स्पष्ट रूप से समय सीमा (Limitation...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के हत्या के प्रयास के मामले में व्यक्ति की सज़ा बरकरार रखने के लिए पीड़ित पत्नी की गवाही पर भरोसा किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक व्यक्ति की सज़ा और 7 साल की कठोर कारावास बरकरार रखी। इस व्यक्ति ने फ़रवरी 1983 में अपने वैवाहिक घर के अंदर अपनी पत्नी को गोली मार दी थी, क्योंकि मोटरसाइकिल की दहेज की मांग पूरी नहीं हुई।1985 में पति द्वारा दायर की गई आपराधिक अपील खारिज करते हुए कोर्ट ने घायल पत्नी की गवाही पर बहुत ज़्यादा भरोसा किया और उसे एक "बेहतरीन गवाह" बताया, जिसकी गवाही पूरी तरह से भरोसेमंद थी।पति की सज़ा बरकरार रखने वाले अपने 16-पृष्ठ के आदेश में जस्टिस अब्दुल शाहिद की बेंच ने पत्नी की...
CrPC की धारा 482 याचिका NIA कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज से इनकार के खिलाफ स्वीकार्य नहीं, भले ही राज्य पुलिस ने शेड्यूल अपराध की जांच की हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) एक्ट के तहत एक स्पेशल कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज से इनकार करने वाले आदेश के खिलाफ CrPC की धारा 482 या BNSS की धारा 528 के तहत दायर याचिका स्वीकार्य नहीं है, भले ही राज्य पुलिस ने शेड्यूल अपराध की जांच की हो।कोर्ट ने माना कि ऐसे आदेशों के खिलाफ उपाय NIA Act, 2008 की धारा 21(1) के तहत एक वैधानिक अपील दायर करना है।इस प्रकार, जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने मोहम्मद फैजान और 2 अन्य द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने स्पेशल जज...
पश्चिमी यूपी में 'गैंग' मौत के बिस्तर पर पड़े लोगों का इंश्योरेंस करवा रहा है, पुलिस सहयोग नहीं कर रही: HDFC Life ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया
HDFC Life Insurance Company ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक संगठित गैंग काम कर रहा है, जो उन लोगों के लिए जीवन बीमा पॉलिसी हासिल करने में कामयाब हो जाता है, जो पहले से ही मौत के बिस्तर पर पड़े हैं या जिनकी मौत हो चुकी है।कंपनी ने यह भी बताया कि शिकायतें मिलने के बावजूद, इनमें से ज़्यादातर मामलों में पुलिस निष्पक्ष जांच करके दोषियों को सज़ा दिलाने में सहयोग नहीं करती है।यह बात जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच के सामने रखी गई, जिसने हाल ही में बिचौलियों के ज़रिए...
ग्राम पंचायत से नगर निगम में शामिल किए गए कर्मचारियों को 'समान काम के लिए समान वेतन' का अधिकार: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि ग्राम पंचायतों से नगर निगम में शामिल किए गए कर्मचारी, यदि नियमित कर्मचारियों के समान ही काम करते हैं, तो वे वेतन में समानता (बराबरी) के हकदार हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी परिस्थितियों में 'समान काम के लिए समान वेतन' से इनकार करना भेदभाव के समान है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है।जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की डिवीज़न बेंच 28 कर्मचारियों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन कर्मचारियों को मूल रूप से ग्राम...
कथित तौर पर 45 साल पहले हुई बिक्री विलेख के आधार पर म्यूटेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भले ही राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन (नाम परिवर्तन) के लिए कोई समय सीमा निर्धारित न हो, लेकिन कथित तौर पर 45 साल पहले हुई किसी बिक्री विलेख (Sale Deed) के आधार पर इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस चंद्र कुमार राय ने टिप्पणी की:"यह बताना महत्वपूर्ण है कि निजी प्रतिवादियों ने 45 साल से भी अधिक समय बाद म्यूटेशन के लिए आवेदन दायर किया। यह आवेदन उस सेल डीड के आधार पर किया गया, जिसके बारे में दावा है कि वह उनके पक्ष में निष्पादित किया गया। इसकी अनुमति नहीं दी जानी...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बच्चे के रेप-मर्डर केस में मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदला, 50 साल की जेल और ₹75 लाख का जुर्माना लगाया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि हालांकि POCSO Act और IPC के तहत नाबालिग के रेप और मर्डर का आरोप पूरी तरह से साबित हो गया। फिर भी यह मामला "दुर्लभतम से दुर्लभ" (Rarest of Rare) श्रेणी में नहीं आता, जिसके लिए मौत की सज़ा दी जाए। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी छूट के 50 साल की असल जेल की सज़ा अपराध की गंभीरता और सज़ा तय करने के तय सिद्धांतों के बीच सही संतुलन बनाएगी।जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की एक डिवीज़न बेंच मौत की सज़ा की पुष्टि के लिए आए एक मामले (Death Reference) के...
केवल एक ही वारिस हो और कोई प्रतिस्पर्धी दावा न हो, वहां उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए ज़मानत की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 375 के तहत उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने के लिए ज़मानत की शर्त हर मामले में बिना सोचे-समझे नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में केवल एक ही वारिस हो, या किसी एक वारिस को प्रमाण पत्र जारी करने पर कोई आपत्ति न हो, वहां ऐसी शर्तें नहीं लगाई जानी चाहिए।भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 372 उन आवेदनों के बारे में बताती है, जो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ज़िला जज के समक्ष किए जा सकते हैं।...




















