हाईकोर्ट

अविवाहित पोती की सीमित संपत्ति पहले से मौजूद अधिकार के आधार पर पूर्ण स्वामित्व में बदल सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
अविवाहित पोती की सीमित संपत्ति पहले से मौजूद अधिकार के आधार पर पूर्ण स्वामित्व में बदल सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पहले से मृत बेटे की अविवाहित नाबालिग बेटी का भरण-पोषण करने का कर्तव्य "पहले से मौजूद अधिकार" हो सकता है, जो हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14(1) के तहत उसकी सीमित संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में बदलने में सक्षम है।जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शास्त्रीय हिंदू कानून महिलाओं की सुरक्षा और भरण-पोषण के लिए निरंतर पारिवारिक दायित्व को मान्यता देता है, जो मुख्य अभिभावक की मृत्यु के साथ समाप्त नहीं होता है, बल्कि निकटतम रिश्तेदारों...

सुप्रीम कोर्ट बैन के बाद भी यूपी में बुलडोज़र कार्रवाई जारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा— क्या यह सत्ता का गलत इस्तेमाल है?
'सुप्रीम कोर्ट बैन के बाद भी यूपी में बुलडोज़र कार्रवाई जारी': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूछा— क्या यह सत्ता का गलत इस्तेमाल है?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बुलडोज़र से मकान गिराने की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के “बुलडोज़र जस्टिस” फैसले के बाद भी राज्य में दंड के तौर पर मकान तोड़े जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि क्या किसी अपराध के तुरंत बाद मकान गिरा देना सरकार की शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं है। अदालत ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहाँ एफआईआर दर्ज होते ही पहले नोटिस दिए गए और बाद...

PMLA जमानत के लिए नाजुक संतुलन ज़रूरी, गुनाह या बेगुनाही पर आखिरी फैसला नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
PMLA जमानत के लिए नाजुक संतुलन ज़रूरी, गुनाह या बेगुनाही पर आखिरी फैसला नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि PMLA के तहत बरी करने या दोषी ठहराने के आखिरी फैसले और जमानत देने या न देने के आदेश के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखना होगा।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा कि बेल के स्टेज पर कोर्ट को यह पॉजिटिव नतीजा देने की ज़रूरत नहीं है कि आरोपी ने कथित अपराध नहीं किया।कोर्ट ने कहा,"ऐसे आवेदनों पर विचार करते समय कोर्ट से यह उम्मीद नहीं की जाती है कि वह जांचकर्ता द्वारा इकट्ठा किए गए सबूतों का बारीकी से विश्लेषण करके आरोप की खूबियों में गहराई से जाए; कोर्ट को खुद को सिर्फ इस बात...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने खसरा नंबर ठीक करने के लिए याचिका में संशोधन को सही ठहराया, कहा- कार्रवाई के कारण पर कोई असर नहीं पड़ा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने खसरा नंबर ठीक करने के लिए याचिका में संशोधन को सही ठहराया, कहा- कार्रवाई के कारण पर कोई असर नहीं पड़ा

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वह याचिका खारिज की, जिसमें एक गलत खसरा नंबर को ठीक करने के लिए याचिका में संशोधन की अनुमति देने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के सीमित संशोधन से कार्रवाई का कारण नहीं बदलता है और न ही मुकदमे की प्रकृति बदलती है।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की:"अनुमति दिया गया संशोधन, जो केवल संपत्ति के खसरा नंबर में बदलाव तक सीमित है, उसे न तो कार्रवाई का कारण बदलने वाला कहा जा सकता है और न ही मुकदमे की प्रकृति बदलने वाला, क्योंकि प्रतिवादियों को याचिका की...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोग्य एसपी विधायक इरफ़ान सोलंकी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोग्य एसपी विधायक इरफ़ान सोलंकी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते समाजवादी पार्टी (एसपी) के पूर्व विधायक इरफ़ान सोलंकी की याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 (UAPA) के तहत उनके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने BNSS की धारा 528 के तहत उनकी याचिका खारिज की, क्योंकि कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि ट्रायल एडवांस्ड स्टेज पर है और उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं।सोलंकी ने 2022 के विधानसभा चुनाव कानपुर नगर के...

प्राकृतिक संसाधनों की सरेआम लूट और डकैती: हाईकोर्ट ने अरावली पहाड़ियों में अवैध खनन पर चिंता जताई, मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा
'प्राकृतिक संसाधनों की सरेआम लूट और डकैती': हाईकोर्ट ने अरावली पहाड़ियों में अवैध खनन पर चिंता जताई, मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चरखी दादरी जिले के पिछोपा कलां गांव में बड़े पैमाने पर अवैध खनन पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जनहित पर दूरगामी परिणाम होंगे, जो निजी पार्टियों के आपसी विवादों से कहीं ज़्यादा हैं।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर ने ड्रोन सर्वे रिपोर्ट देखते हुए कहा,"जो खुली आंखों से दिख रहा है, वह न सिर्फ परेशान करने वाला है, बल्कि हैरान करने वाला भी है। पहली नज़र में यह एनवायरनमेंट क्लीयरेंस सर्टिफिकेट में दिए गए पर्यावरण...

CPC की धारा 24 के तहत वैवाहिक मामलों के आपसी सहमति से ट्रांसफर पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
CPC की धारा 24 के तहत वैवाहिक मामलों के आपसी सहमति से ट्रांसफर पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब केस लड़ने वाले पक्ष सहमत हों तो सिविल प्रोसीजर कोड (CPC) की धारा 24 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करके केस ट्रांसफर करने का आदेश देने में कोई कानूनी रुकावट नहीं है।कोर्ट ने आगे कहा कि आपसी सहमति से ट्रांसफर के मामलों में सुविधा के संतुलन की विस्तृत तुलनात्मक जांच की ज़रूरत काफी हद तक कम हो जाती है।यह टिप्पणी जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने तलाक के मुकदमे में ट्रांसफर एप्लीकेशन को मंज़ूरी देते हुए की। कोर्ट ने कहा कि हालांकि वादी आमतौर पर मुकदमे का मालिक...

श्रम संहिता के नियम फरवरी के अंत तक फाइनल हो जाएंगे: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में बताया
श्रम संहिता के नियम फरवरी के अंत तक फाइनल हो जाएंगे: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में बताया

केंद्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में बताया कि नए इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020 के तहत नियम फरवरी के अंत तक फाइनल कर दिए जाएंगे।SGI तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच को बताया कि नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है और जनता से सुझाव मांगे गए।SGI ने कहा कि मौजूदा कमियों को दूर करने और पुराने श्रम कानून व्यवस्था से नए कोड में आसानी से बदलाव सुनिश्चित करने के लिए दो नोटिफिकेशन जारी किए गए।मेहता ने आगे कहा कि पुराने श्रम कानूनों के तहत स्थापित...

क्या BNSS की धारा 175 (4) पर सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या ने लोक सेवकों के खिलाफ शिकायतें कठिन बना दीं?
क्या BNSS की धारा 175 (4) पर सुप्रीम कोर्ट की व्याख्या ने लोक सेवकों के खिलाफ शिकायतें कठिन बना दीं?

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में XXX बनाम केरल राज्य और अन्य में कहा कि धारा 175 (4) बीएनएसएस एक स्टैंडअलोन प्रावधान नहीं है और इसे धारा 175 (3) के साथ पढ़ा जाना चाहिए, जिसमें शिकायतकर्ता को एक लोक सेवक के खिलाफ मजिस्ट्रेट को स्थानांतरित करने से पहले एक लिखित, हलफनामे-समर्थित शिकायत के माध्यम से पहले पुलिस और पुलिस अधीक्षक से संपर्क करने की आवश्यकता होती है। प्रक्रियात्मक अनुशासन के उद्देश्य से, निर्णय चिंता पैदा करता है कि यह झूठे मामलों के खिलाफ मौजूदा सुरक्षा उपायों के बावजूद लोक सेवकों को...

प्रतिकूल आदेश ट्रायल स्थानांतरण का आधार नहीं, फोरम हंटिंग पर लगाम जरूरी: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट
प्रतिकूल आदेश ट्रायल स्थानांतरण का आधार नहीं, फोरम हंटिंग पर लगाम जरूरी: पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मामले में प्रतिकूल आदेश पारित होना या ऐसा आदेश जो बाद में उच्च अदालत द्वारा निरस्त कर दिया जाए, अपने आप में न्यायिक पक्षपात या पूर्वाग्रह का आधार नहीं बन सकता। हाइकोर्ट ने कहा कि न्यायिक त्रुटि और न्यायिक पक्षपात को एक समान नहीं माना जा सकता और केवल मनचाहा आदेश न मिलने के आधार पर ट्रायल के स्थानांतरण की मांग करना न्यायिक प्रक्रिया की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा कि अक्सर वादी या आरोपी किसी प्रतिकूल आदेश को जज की कथित...

साहिबगंज में समानांतर प्रशासन चलने पर चिंता, पहाड़िया समुदाय की सुरक्षा के आदेश: झारखंड हाइकोर्ट
साहिबगंज में समानांतर प्रशासन चलने पर चिंता, पहाड़िया समुदाय की सुरक्षा के आदेश: झारखंड हाइकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने साहिबगंज जिले में पहाड़िया आदिवासी समुदाय के कथित सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार के गंभीर आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस और जिला प्रशासन को समुदाय के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। हाइकोर्ट ने कहा कि किसी भी समूह को राज्य के अधिकार अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।यह आदेश जस्टिस संजय प्रसाद की एकल पीठ ने उस आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें तीन अपीलकर्ताओं ने अग्रिम जमानत की मांग की थी। अपीलकर्ता बारहरवा थाना...

आधार और वोटर आईडी नागरिकता का प्रमाण नहीं, रिकॉर्ड में विदेशी नागरिकता होने पर वीज़ा नियमों का पालन अनिवार्य: तेलंगाना हाईकोर्ट
आधार और वोटर आईडी नागरिकता का प्रमाण नहीं, रिकॉर्ड में विदेशी नागरिकता होने पर वीज़ा नियमों का पालन अनिवार्य: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने जन्म से भारतीय नागरिक होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति को राहत देने से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने पुलिस और इमिग्रेशन अधिकारियों को उसे लॉन्ग टर्म वीज़ा (LTV) के लिए आवेदन करने के लिए बाध्य करने से रोकने की मांग की थी।जस्टिस नागेश भीमाबाका ने रिट याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और शैक्षणिक प्रमाणपत्र अपने आप में भारतीय नागरिकता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, खासकर तब जब आधिकारिक रिकॉर्ड में विदेशी नागरिकता...

हेरिटेज संपत्तियों के आसपास इमारतों का सर्वे करेगा MCD, अवैध निर्माण की जांच के आदेश: दिल्ली हाइकोर्ट
हेरिटेज संपत्तियों के आसपास इमारतों का सर्वे करेगा MCD, अवैध निर्माण की जांच के आदेश: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में अधिसूचित हेरिटेज संपत्तियों के आसपास स्थित इमारतों में अवैध निर्माण की जांच के लिए नगर निगम दिल्ली (MCD) को व्यापक सर्वे कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा है कि यह सर्वे यह पता लगाने के लिए आवश्यक है कि क्या हेरिटेज स्थलों के निकट की जा रही या पहले से की गई निर्माण गतिविधियां भवन उपविधियों और स्वीकृत नक्शों के अनुरूप हैं या नहीं।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने यह निर्देश उन याचिकाओं के समूह पर सुनवाई के दौरान दिया,...

एक ही वैवाहिक घटना पर दूसरी शिकायत कानून का दुरुपयोग: कलकत्ता हाइकोर्ट ने 498A का मामला किया रद्द
एक ही वैवाहिक घटना पर दूसरी शिकायत कानून का दुरुपयोग: कलकत्ता हाइकोर्ट ने 498A का मामला किया रद्द

कलकत्ता हाइकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि एक ही वैवाहिक घटना को लेकर समान आरोपों के आधार पर दूसरी आपराधिक कार्यवाही चलाना न केवल असंवैधानिक है बल्कि यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग भी है।कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न और हत्या के प्रयास से जुड़े एक मामले में पति और उसके परिवारजनों के खिलाफ दर्ज दूसरी FIR रद्द की।जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने कहा कि जब किसी घटना को लेकर पहले ही एक FIR दर्ज हो चुकी हो, तो उसी घटना के संबंध में दूसरी शिकायत अलग मंच पर दायर करना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने माना कि ऐसी कार्यवाही...

भरण-पोषण बकाया में एक साथ वसूली और गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध: इलाहाबाद हाइकोर्ट
भरण-पोषण बकाया में एक साथ वसूली और गिरफ्तारी वारंट जारी करना अवैध: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में प्रचलित उस प्रक्रिया पर सख्त आपत्ति जताई, जिसके तहत भरण-पोषण की बकाया राशि की वसूली के लिए एक ही समय पर वसूली वारंट और गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए जाते हैं।हाइकोर्ट ने इस प्रथा को अवैध और अमानवीय बताते हुए कहा है कि इसे तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भरण-पोषण देने के दायित्व में चूक करने वाले व्यक्ति को किसी आपराधिक मामले के अभियुक्त की तरह नहीं माना जा सकता। अदालतों को यह ध्यान रखना होगा कि...

जाली दस्तावेज़ों पर नौकरी मिली? : हाईकोर्ट ने 6 महीने में यूपी के सभी असिस्टेंट टीचरों की जांच का आदेश दिया, नौकरी रद्द करने और सैलरी रिकवर करने का भी आदेश
जाली दस्तावेज़ों पर नौकरी मिली? : हाईकोर्ट ने 6 महीने में यूपी के सभी असिस्टेंट टीचरों की जांच का आदेश दिया, नौकरी रद्द करने और सैलरी रिकवर करने का भी आदेश

एक महत्वपूर्ण आदेश में उत्तर प्रदेश (यूपी) में कई असिस्टेंट टीचरों द्वारा जाली और मनगढ़ंत सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी पाने के 'परेशान करने वाले' पैटर्न पर कड़ा रुख अपनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैंडमस जारी किया, जिसमें पूरे राज्य में उनकी व्यापक जांच करने का निर्देश दिया गया।कोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक शिक्षा को यह काम, हो सके तो छह महीने के भीतर पूरा करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि न केवल अवैध नियुक्तियों को रद्द किया जाए, बल्कि सैलरी भी रिकवर की जाए और...

जनसंख्या वृद्धि रोकने के समर्थन में आया उड़ीसा हाईकोर्ट, कहा- युद्ध स्तर पर कड़े कदम उठाने की ज़रूरत
जनसंख्या वृद्धि रोकने के समर्थन में आया उड़ीसा हाईकोर्ट, कहा- युद्ध स्तर पर कड़े कदम उठाने की ज़रूरत

उड़ीसा हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सदस्य को दो से ज़्यादा बच्चे होने के कारण अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को सही ठहराया, जो ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम, 1964 ['1964 का अधिनियम'] की धारा 25(1)(v) के अनुसार अयोग्यता का एक कानूनी आधार है।एक सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए जस्टिस दीक्षित कृष्णा श्रीपाद और जस्टिस चित्तरंजन डैश की डिवीजन बेंच ने दिलचस्प टिप्पणी की,“कहा जाता है कि सर विंस्टन चर्चिल (1874-1965) ने कहा था कि "भारत एक राष्ट्र नहीं, बल्कि सिर्फ़ आबादी है"। यह बंटवारे...

हस्ताक्षर दिखाकर दस्तावेज़ छिपाकर क्रॉस-एग्जामिनेशन करना अस्वीकार्य, राजस्थान हाईकोर्ट ने पिजन होल थ्योरी पर लगाई समय-सीमा
हस्ताक्षर दिखाकर दस्तावेज़ छिपाकर क्रॉस-एग्जामिनेशन करना अस्वीकार्य, राजस्थान हाईकोर्ट ने 'पिजन होल थ्योरी' पर लगाई समय-सीमा

राजस्थान हाईकोर्ट जज जस्टिस संजीत पुरोहित की एकल पीठ ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक पुराने सिविल मुकदमे में साक्ष्य कानून की महत्वपूर्ण व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया कि किसी गवाह से जिरह के दौरान दस्तावेज़ का केवल हस्ताक्षर वाला भाग दिखाकर शेष सामग्री छिपाना सामान्यतः स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि ऐसी पद्धति भ्रामक हो सकती है और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों के विपरीत है।याचिकाकर्ता राजेश कुमार ने पाली स्थित मरुधर होटल से संबंधित संपत्ति को संयुक्त हिन्दू परिवार की संपत्ति बताते हुए...