हाईकोर्ट
वक्फ एक्ट के लागू होने से पहले शुरू किए गए लंबित संपत्ति मुकदमों पर वक्फ ट्रिब्यूनल विचार नहीं कर सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि वक्फ ट्रिब्यूनल के पास विवादित संपत्ति के स्वामित्व की प्रकृति के संबंध में सिविल न्यायालयों में लंबित मामलों पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है, जो वक्फ (मध्य प्रदेश संशोधन) अधिनियम1994 के लागू होने से पहले शुरू किए गए।जस्टिस संजय द्विवेदी की एकल न्यायाधीश पीठ ने निम्नलिखित निर्णय दिया,“धारा 7 की उपधारा (5) के मद्देनजर अधिनियम उन लंबित मुकदमों या कार्यवाही या अपील या पुनर्विचार पर लागू नहीं होगा, जो 01.01.1996 से पहले शुरू हुए हैं, अर्थात वक्फ अधिनियम,...
धारा 311 सीआरपीसी | पिछले वकील द्वारा अपर्याप्त जांच के आधार पर गवाह को वापस बुलाने का आवेदन वैध: मेघालय हाईकोर्ट
मेघालय हाईकोर्ट ने पाया कि अभियुक्त द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 311 के तहत गवाह को वापस बुलाने की मांग करने वाला आवेदन इस आधार पर उचित है कि पिछले वकील ने आवश्यक तथ्यों पर गवाह की जांच नहीं की थी और नए वकील द्वारा फिर से जांच करना मुकदमे के परिणाम के लिए महत्वपूर्ण है। जस्टिस बी भट्टाचार्जी याचिकाकर्ताओं/राज्य द्वारा ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक याचिका पर फैसला कर रहे थे, जिसने गवाह को वापस बुलाने के लिए धारा 311 सीआरपीसी के तहत अभियुक्त/प्रतिवादी द्वारा...
बीमा लोकपाल नियम | नियम 17 लोकपाल को मुआवज़ा देने का अधिकार देता है लेकिन बीमाकर्ता को निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं देता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि बीमा लोकपाल को शिकायतकर्ता को मुआवज़ा देने के लिए पुरस्कार पारित करने का अधिकार है, लेकिन बीमा लोकपाल नियम, 2017 के नियम 17 के अनुसार बीमाकर्ता को निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय इस बात पर विचार कर रहा था कि क्या बीमा लोकपाल बीमा कंपनी को अपीलकर्ता और उसके पात्र परिवार के सदस्यों को पॉलिसी के नवीनीकरण के दौरान बिना किसी वृद्धि के उसी प्रीमियम दर पर चिकित्सा बीमा पॉलिसी जारी करने का निर्देश दे सकता है।जस्टिस ए मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस शोभा अन्नाम्मा इपेन...
दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर CBI को नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। उक्त याचिका में कथित शराब नीति घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार मामले में उनकी गिरफ्तारी और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तीन दिन की रिमांड को चुनौती दी गई।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने जांच एजेंसी से जवाब मांगा और मामले की सुनवाई 17 जुलाई को तय की।केजरीवाल ने भ्रष्टाचार मामले में अपनी तत्काल रिहाई की भी मांग की।उनका कहना है कि अपराध में 7 साल की सजा होने के बावजूद जांच अधिकारी ने सीआरपीसी की धारा 41ए और...
'मंडी' के लिए अधिग्रहित भूमि पर बना स्कूल सार्वजनिक उद्देश्य पूरा करता है: पी एंड एच हाईकोर्ट ने अधिग्रहित भूमि को छोड़ने के लिए पूर्व मालिक की याचिका खारिज की, 25 हजार का जुर्माना लगाया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा मंडी के विकास के लिए अधिग्रहित भूमि को मुक्त करने की मांग करने वाली याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिसका बाद में स्कूल बनाने के लिए उपयोग किया गया था, यह देखते हुए कि इससे सार्वजनिक उद्देश्य पूरा होता है। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस ललित बत्रा की खंडपीठ ने कहा, "कारण बहुत ही सामान्य और सरल है, क्योंकि एक इमारत भी स्कूल जाने वाले बच्चों की शिक्षा के लिए काम आती है, इसलिए यह सार्वजनिक हित और सार्वजनिक उद्देश्य के लिए काम आती है,...
प्रेस के अधिकार का उल्लंघन: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट मालिक के खिलाफ वीडियो बनाने वाले पत्रकार को गिरफ्तार करने के लिए राज्य के 'अत्याचारों' पर स्पष्टीकरण मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आज पंजाब सरकार से अत्याचार और सत्ता के संभाव्य इस्तेमाल के आरोपों पर जवाब मांगा है, जिसके तहत एक पंजाब पत्रकार को एक रियल एस्टेट मालिक के खिलाफ खबर प्रकाशित करने के लिए जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पत्रकार राजिंदर सिंह तग्गड़ को अंतरिम जमानत देते हुए जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा, "पंजाब राज्य से आग्रह है कि वह सत्ता के संभाव्य प्रयोग और अत्याचार के मामले में जवाब दाखिल करे, जो न केवल कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, बल्कि प्रेस के अधिकार यानी...
धार्मिक समूहों में धर्मांतरण नहीं रोका गया तो एक दिन भारत की बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज कहा कि यदि धार्मिक सभाओं में धर्मांतरण की वर्तमान प्रवृत्ति को जारी रहने दिया गया तो देश की बहुसंख्यक आबादी अंततः एक दिन खुद को अल्पमत में पा सकती है। इस टिप्पणी के साथ, जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की पीठ ने कहा कि धार्मिक सभाएं, जहां धर्मांतरण हो रहा है और जहां भारत के नागरिकों का धर्म बदला जा रहा है, उन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए।न्यायालय ने कहा, "यदि इस प्रक्रिया को जारी रहने दिया गया तो एक दिन इस देश की बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जाएगी और ऐसे धार्मिक सभाओं को तुरंत...
99% पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, फुटेज को 18 महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा: तमिलनाडु सरकार में मद्रास हाईकोर्ट बताया
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका बंद की। वक्त याचिका में पुलिस स्टेशनों के अंदर सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने उसकी सुरक्षा करने और उसे बनाए रखने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने और संभावित मानवाधिकार उल्लंघन को रोकने के लिए इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई थी।एक्टिंग चीफ जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस मोहम्मद शफीक की पीठ ने राज्य की इस दलील पर विचार करने के बाद याचिका बंद कर दी कि लगभग 99% पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और फुटेज को 18 महीने की अवधि तक...
केरल हाईकोर्ट ने जजमेंट डेली प्लेटफ़ॉर्म किया लॉन्च, व्हाट्सएप द्वारा दी जाएगी जजमेंट की प्रमाणित कॉपी
केरल हाईकोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए केरल हाईकोर्ट डेली जजमेंट (KHJ - Daily) प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च किया है कि पूरी तरह से प्रमाणित रिपोर्ट किए गए जजमेंट व्हाट्सएप के माध्यम से दैनिक आधार पर सभी के लिए सुलभ बनाए जाएं।चीफ जस्टिस ए जे देसाई ने 27 जुलाई 2024 को KHJ - Daily प्लेटफॉर्म का अनावरण किया। संपादकीय समिति के सदस्य- जस्टिस ए मुहम्मद मुस्ताक, जस्टिस वी जी अरुण, जस्टिस सी एस डायस, जोसेफ राजेश, (आईटी के निदेशक), जुबिया ए (केरल राज्य मध्यस्थता और सुलह केंद्र के निदेशक), राकेश एमजी (उप निदेशक,...
हमारे समाज में कोई भी माता-पिता अपनी बेटी की पवित्रता को लेकर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचा सकता: पटना हाईकोर्ट ने बलात्कार की सजा बरकरार रखी
पटना हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के लिए धारा 3 पोक्सो अधिनियम और बलात्कार के लिए धारा 376 आईपीसी के तहत अपीलकर्ता की सजा के खिलाफ एक आपराधिक अपील पर फैसला करते हुए कहा, “हमारे समाज में किसी भी लड़की का कोई भी माता-पिता अपनी बेटी की पवित्रता को लेकर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। हमारे समाज में यह देखा गया है कि यौन उत्पीड़न के मामले में भी, पीड़ित और उनके माता-पिता आपराधिक मामला दर्ज कराने के लिए सार्वजनिक रूप से जाने में हिचकिचाते/अनिच्छुक होते हैं, क्योंकि ऐसी घटना के बाद लड़की का...
यौन हिंसा मामले को मुआवजे के आधार पर रद्द करने का मतलब होगा न्याय बिकाऊ है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यौन हिंसा के आरोपों से जुड़े आपराधिक मामलों को मौद्रिक भुगतान के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता। इससे ऐसा करने से यह माना जाएगा कि न्याय बिकाऊ है।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने बलात्कार के आरोपी द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें महिला द्वारा दर्ज की गई एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। उक्त याचिका इस आधार पर दायर की गई कि मामला पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया और वह 1.5 लाख रुपये में अपने दावों का निपटान करने के लिए सहमत हो गई।महिला...
[NIA Act] अभियुक्त को जमानत देने से इनकार करने या देने के आदेश को धारा 21(4) के तहत अपील योग्य माना जा सकता है, CrPc के तहत याचिका के रूप में नहीं: मणिपुर हाईकोर्ट
मणिपुर हाईकोर्ट ने माना कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम 2008 (NIA Act) के तहत अपराधों के लिए अभियुक्त को जमानत देने या देने से इनकार करने के आदेश को अधिनियम की धारा 21(4) के तहत अपील के रूप में चुनौती दी जा सकती है न कि धारा 439(2)/482 सीआरपीसी के तहत दायर याचिका के रूप में सकती है।इसके अलावा यह माना गया कि राज्य सरकार द्वारा गठित एजेंसी द्वारा की गई मामले की जांच अधिनियम की धारा 21 के दायरे में आती है।जस्टिस गोलमेई गैफुलशिलु इस बात पर विचार कर रहे थे कि याचिकाकर्ता/राज्य द्वारा विशेष न्यायालय...
सरकार किसी उम्मीदवार को नौकरी के विज्ञापन में उल्लेख न किए गए आधार पर अयोग्य घोषित नहीं कर सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, राजस्थान सरकार का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें उम्मीदवार को सरकारी पद के लिए इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि अयोग्यता के कारण को पद के लिए विज्ञापन में अयोग्यता मानदंड के रूप में उल्लेख नहीं किया गया। न्यायालय ने आदेश को पूरी तरह से अवैध, मनमाना और अनुचित करार दिया। उन्होंने कहा:"याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी खारिज करने का आधार पूरी तरह से अवैध और मनमाना प्रतीत होता है, क्योंकि विज्ञापन की शर्तों और नियमों में कहीं भी किसी विशेष बोर्ड से...
समझौता किए गए बयान देना IPC की धारा 295ए के तहत अपराध नहीं, शांति भंग करने के लिए उकसाने वाला जानबूझकर अपमान करना आवश्यक: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना कि केवल धार्मिक रूप से समझौता किए गए बयान देना मजिस्ट्रेट अदालत के लिए IPC की धारा 295 ए के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त कार्य नहीं है। यह प्रावधान किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों को अपराध मानता है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि अपराध कायम करने के लिए आरोपी को इस हद तक जानबूझकर अपमान करना होगा कि यह किसी व्यक्ति को सार्वजनिक शांति भंग करने या कोई अन्य...
अपराध की आय से जुड़ी न होने वाली संपत्तियों को PMLA के तहत कुर्क नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि PMLA के तहत कुर्क की जाने वाली संपत्तियां अपराध की आय से अर्जित संपत्तियां होनी चाहिए। इसने कहा कि PMLA के प्रावधानों का अनुचित तरीके से उन संपत्तियों को कुर्क करने के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता, जो किसी आपराधिक गतिविधि से संबंधित नहीं हैं।वर्तमान मामले में याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (PMLA Act) के तहत जांच के दौरान बैंक अकाउंट फ्रीज करने और अचल संपत्ति के खिलाफ अनंतिम कुर्की के आदेश को चुनौती दी...
हाईकोर्ट ने बिजली खरीद की जांच करने वाले आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाने वाली के. चंद्रशेखर राव की याचिका खारिज की
तेलंगाना हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव द्वारा दायर याचिका खारिज की। उक्त याचिका में उन्होंने 2014 से 2023 के बीच उनकी सरकार के दौरान बिजली खरीद से उत्पन्न कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग के गठन को चुनौती दी थी।जस्टिस एल नरसिम्हा रेड्डी आयोग का गठन छत्तीसगढ़ से बिजली की खरीद, भद्राद्री थर्मल पावर स्टेशन (बीटीपीएस) की स्थापना और यदाद्री थर्मल पावर स्टेशन (वाईटीपीएस) की स्थापना से संबंधित निर्णयों की सत्यता और औचित्य की जांच के लिए किया गया था।पूर्व मुख्यमंत्री...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के लोकसभा चुनाव को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के रायबरेली लोकसभा सीट से सांसद के रूप में चुनाव रद्द करने के लिए दायर जनहित याचिका (पीआईएल) को वापस लेने की अनुमति दी।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने जनहित याचिका को वापस लेते हुए खारिज कर दिया, जबकि याचिकाकर्ता को नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(2) के तहत सक्षम प्राधिकारी से संपर्क करने की अनुमति दी, जहां तक कानून में इसकी अनुमति है।खंडपीठ ने यह आदेश इसलिए दिया, क्योंकि याचिकाकर्ता (एस...
IT Rules 2021 | अगर फर्जी और झूठी खबरों को नहीं रोका गया तो अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सत्य जानने के अधिकार का उल्लंघन होगा: बॉम्बे हाईकोर्ट में केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने 2023 आईटी संशोधन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं में बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा कि फर्जी या झूठी खबरों को नहीं रोकना ऐसी खबरों के प्राप्तकर्ता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा कि वह सही जानकारी प्राप्त करे और गुमराह न हो, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) से भी आता है।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि जानने का अधिकार और गुमराह न होने का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार जितना ही महत्वपूर्ण है।मेहता ने कहा,"जब तक आप अपने भाषण और अभिव्यक्ति के...
प्रदर्शनकारियों द्वारा टोल प्लाजा पर कब्ज़े के खिलाफ NHI की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHI) द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। उक्त याचिका में प्रदर्शनकारियों द्वारा जबरन टोल प्लाजा को बंद करने और अवैध संचालन के खिलाफ पंजाब में टोल प्लाजा के सुचारू संचालन के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक सहायता की मांग की गई।किसान यूनियन के कार्यकर्ता पिछले 15 दिनों से टोल शुल्क में लगातार बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि NHI पर्याप्त सुविधाएं प्रदान किए बिना अपनी मर्जी से टोल शुल्क बढ़ा रहा है।जस्टिस...
पुलिस कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग सार्वजनिक कार्य के निर्वहन में बाधा नहीं मानी जाएगी: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कि पुलिस कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को कर्तव्य में बाधा नहीं माना जा सकता।हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया,“बिना किसी प्रत्यक्ष कृत्य के केवल विरोध या असंयमित भाषा का प्रयोग किसी अधिकारी को सार्वजनिक कार्य के निर्वहन में बाधा डालने का आपराधिक अपराध नहीं माना जाएगा।”जस्टिस संदीप शर्मा की पीठ ने मामले पर निर्णय लेते हुए कहा,“याचिकाकर्ता के खिलाफ इस मामले में सटीक आरोप यह है कि वह फेसबुक पर लाइव हुआ और कुछ टिप्पणियां कीं, लेकिन निश्चित रूप से, उसके द्वारा किया गया ऐसा कोई...












![[NIA Act] अभियुक्त को जमानत देने से इनकार करने या देने के आदेश को धारा 21(4) के तहत अपील योग्य माना जा सकता है, CrPc के तहत याचिका के रूप में नहीं: मणिपुर हाईकोर्ट [NIA Act] अभियुक्त को जमानत देने से इनकार करने या देने के आदेश को धारा 21(4) के तहत अपील योग्य माना जा सकता है, CrPc के तहत याचिका के रूप में नहीं: मणिपुर हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2020/05/23/500x300_375231-manipur.jpg)






