हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पतंजलि को 4 करोड़ रुपये जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया, मंगलम ऑर्गेनिक्स के साथ विवाद को सुलझाने का सुझाव दिया
बंबई हाईकोर्ट ने पतंजलि समूह पर अदालत के आदेश का उल्लंघन करने के कारण सिंगल जज द्वारा लगाए गए चार करोड़ रुपये के जुर्माने को जमा करने की समयसीमा शुक्रवार को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी।जस्टिस अतुल चंदुरकर और जस्टिस राजेश पाटिल की खंडपीठ ने पतंजलि आयुर्वेद और मंगलम ऑर्गेनिक्स को एक साथ बैठने और ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में अपने विवाद को सुलझाने की कोशिश करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, 'आप दोनों साथ बैठकर विवाद क्यों नहीं सुलझा लेते। पतंजलि और मंगलम ऑर्गेनिक्स की ओर से पेश वकील से जस्टिस पाटिल ने...
वकील जो पहले से मामले में नहीं था, वह पुनर्विचार याचिका दायर करके मामले में फिर से बहस नहीं कर सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक वकील, जो इस मामले में पहले दाखिल या बहस करने वाला वकील भी नहीं था, मामले में फिर से बहस करने के लिए मामले की समीक्षा दायर नहीं कर सकता है।अदालत ने 20,000 रुपये की अनुकरणीय लागत के साथ समीक्षा आवेदन को खारिज कर दिया और कहा कि समीक्षा दायर करने का कोई कारण नहीं था और समीक्षा याचिका दायर करके मामले में फिर से बहस नहीं की जा सकती है। जस्टिस अलका सरीन ने कहा कि वकील ने समीक्षा आवेदन की विचारणीयता पर बहस नहीं की, और न तो दाखिल करने वाले वकील और...
पति या पत्नी के भरण-पोषण के साधनों की कमी को साबित करने का भार उस पक्ष पर, जो ऐसी असमर्थता व्यक्त करता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि भरण-पोषण के लिए दायर मुकदमे में यह साबित करना प्रतिवादी पर है कि उसके पास दावेदार का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति के साधनों को साबित करने के लिए साक्ष्य उसके अनन्य ज्ञान के भीतर होंगे और इसलिए याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए दावे को गलत साबित करना उस पर है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस एम. बी. स्नेहलता की खंडपीठ ने यह टिप्पणी फैमलीं कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील पर विचार करते हुए की, जिसमें भरण-पोषण के लिए दायर मुकदमा इस आधार...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बदलापुर यौन उत्पीड़न के विरोध में राजनीतिक दलों द्वारा बुलाए गए बंद पर रोक लगाई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महा विकास अघाड़ी (MVA) को 24 अगस्त को महाराष्ट्र में राज्यव्यापी बंद बुलाने से रोक दिया।बंद का आह्वान MVA ने किया था, जो कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) का राजनीतिक गठबंधन है। उक्त बंद का उद्देश्य ठाणे के बदलापुर में एक स्कूल में दो नाबालिग किंडरगार्टन लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न का विरोध करना है।बंद को अवैध और असंवैधानिक घोषित करने की मांग करते हुए जनहित याचिका (PIL) दायर की गई।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अमित बोरकर की खंडपीठ ने...
गुजरात हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने माफीनामा छापा
गुजरात हाईकोर्ट के निर्देश के बाद समाचार पत्रों इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को अपने अहमदाबाद एडिशन में माफीनामा प्रकाशित किया। हाईकोर्ट ने उन्हें एक आदलती मामले में जजों की टिप्पणियों को गलत तरीके से रिपोर्ट करने के लिए फटकार लगाई थी।चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस प्रणव त्रिवेदी की पीठ ने गुरुवार को माफीनामा प्रकाशित न करने की स्थिति में दोनों समाचार पत्रों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी करने की चेतावनी दी थी। समाचार पत्रों ने आज अपने पहले पन्ने पर...
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया, “अदीब” की योग्यता कक्षा 10वीं की योग्यता के बराबर
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में यह दोहराते हुए कि "अदीब" के रूप में वर्णित शैक्षणिक योग्यता माध्यमिक परीक्षा (10वीं कक्षा) के समकक्ष है, एक महिला को स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) के पद पर नियुक्त करने का निर्देश दिया, जिसके लिए पात्रता मानदंड 10वीं कक्षा की योग्यता थी। जाहिदा सलमा बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य (2022) में एक समन्वय पीठ (जयपुर में) के निर्णय का हवाला देते हुए जस्टिस विनीत कुमार माथुर की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा, "जाहिदा सलमा के मामले में जयपुर में समन्वय पीठ ने विवाद पर विस्तार से...
मुकदमा दायर करते समय पक्षकारों के अधिकारों को मुकदमेबाजी के दौरान होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तनों के अनुकूल होना चाहिए: जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसला में कहा कि जबकि पक्षों के अधिकार आम तौर पर मुकदमा दायर करने के समय मौजूद परिस्थितियों से निर्धारित होते हैं, न्यायालयों को न्यायोचित परिणाम सुनिश्चित करने के लिए मुकदमेबाजी प्रक्रिया के दौरान होने वाले महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर भी विचार करना चाहिए। यह टिप्पणी तब की गई जब हाईकोर्ट ने व्यक्तिगत आवश्यकता के आधार पर मूल रूप से दिए गए निष्कासन आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मकान मालिक की मृत्यु को एक महत्वपूर्ण घटना बताया गया जिसने निष्कासन के...
दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों में ईडब्ल्यूएस/डीजी श्रेणी में 'सुलभ' दाखिलों के लिए निर्देश जारी किए
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में ईडब्ल्यूएस/डीजी श्रेणी के तहत सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों में छात्रों के "सम्मानजनक और सुलभ" प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए। जस्टिस स्वर्ण कांता ने सभी हितधारकों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भावना के अनुसार स्कूलों में ईडब्ल्यूएस और नॉन-ईडब्ल्यूएस छात्रों का निर्बाध रूप से शामिल किया जाए।अदालत ने निर्देश दिया कि दिल्ली में प्रत्येक निजी गैर-सहायता प्राप्त...
"आंतरिक नोट उचित आलोचना हैं": मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट पर टिप्पणी के लिए राजस्व अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर स्थित पीठ ने निचली अपीलीय अदालत की ओर से पारित निर्णय पर कथित रूप से प्रतिकूल टिप्पणी करने के लिए राजस्व अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही को खारिज कर दिया। यह मामला इस बात पर केंद्रित था कि अपीलीय अदालत के आदेश के संबंध में तहसीलदार और उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) की ओर से की गई टिप्पणी अदालत की अवमानना है या नहीं। न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि टिप्पणियां नौकरशाही उद्देश्यों के लिए आंतरिक टिप्पणियां थीं और अवमानना नहीं थीं।जस्टिस विवेक जैन की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, चेक डिसऑनर मामलों में आरोपी अक्सर सबूतों के अभाव में बच निकलते हैं; अदालतों को पार्टियों के बीच दोस्ताना नकद ऋण को स्वीकार करना चाहिए
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत चेक बाउंस के मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अदालतों के लिए यह स्वीकार करना विवेकपूर्ण होगा कि मौजूदा दस्तावेज़ों के बिना भी पार्टियों के बीच अनुकूल नकद ऋण प्रदान किए जाते हैं, और अक्सर आरोपी बरी हो जाते हैं क्योंकि शिकायतकर्ता ऋण के अस्तित्व को साबित करने में असमर्थ होता है।जस्टिस अनीश दयाल की सिंगल जज बेंच ने आदेश में यह भी कहा कि अक्सर यह पाया गया है कि धारा 138 एनआई एक्ट की कार्यवाही में बरी होने पर ऋण के अस्तित्व को साबित...
BREAKING | कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल द्वारा कथित अनियमितताओं की SIT जांच को CBI को सौंपा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष द्वारा कथित अनियमितताओं की SIT जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया।विशेष रूप से CBI 9 अगस्त को अस्पताल परिसर में रेजिडेंट डॉक्टर के बलात्कार-हत्या के मामले में भी घोष की जांच कर रही है।जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की एकल पीठ आरजी कार के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य के अधिकारियों के समक्ष घोष के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की थीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।...
पति की प्रेमिका उसकी रिश्तेदार नहीं, इसलिए उस पर धारा 498ए IPC के तहत क्रूरता का मामला दर्ज नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि पति की प्रेमिका पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत दंडनीय घरेलू हिंसा या क्रूरता के आरोपों के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस वृषाली जोशी की खंडपीठ ने चंद्रपुर जिले की अदालत में वैशाली गावंडे के खिलाफ लंबित आरोपपत्र और अन्य कार्यवाही रद्द कर दी।न्यायाधीशों ने कहा,"आवेदक शिकायतकर्ता के पति का रिश्तेदार नहीं है, इसलिए भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए लागू नहीं होगी। क्योंकि आरोप-पत्र इस आवेदक के...
दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के आरोपों पर यूनियन बैंक के कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति के खिलाफ याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक के रूप में पंकज द्विवेदी की नियुक्ति के खिलाफ एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर नोटिस जारी किया। द्विवेदी पर एक महिला ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्हें 27 मार्च को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया था। नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने महिला की याचिका पर नोटिस जारी किया।महिला की ओर से पेश हुए एडवोकेट प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत स्तर पर आरटीआई एक्ट के कार्यान्वयन पर हरियाणा सरकार से जवाब मांगा, ग्रामीणों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक और विशेष सचिव को ग्राम पंचायत स्तर पर आरटीआई अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया है, जिसमें अनुदान/निधि प्राप्ति और उसके उपयोग के बारे में प्रासंगिक जानकारी अपलोड करना शामिल है। कोर्ट ने प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए राज्य लोक सूचना अधिकारी (एसपीआईओ) की नियुक्ति के बारे में भी जानकारी मांगी है।जस्टिस महावीर सिंह सिंधु ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ग्रामीणों...
2001 विरोध प्रदर्शन मामला | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने AAP सांसद संजय सिंह को सुनाई गई 3 महीने की जेल की सजा पर रोक लगाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को 2001 के विरोध प्रदर्शन मामले में सुनाई गई 3 महीने की जेल की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, यह देखते हुए कि ट्रायल कोर्ट का फैसला प्रथम दृष्टया विकृत था।जस्टिस करुणेश सिंह पवार की पीठ ने कहा,"प्रथम दृष्टया धारा 143 और 341 IPC के तत्व गायब हैं और दोनों निचली अदालतों के फैसले विकृत हैं।"उन्होंने ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के लिए 50,000/ रुपये का निजी मुचलका भरने की शर्त पर उनकी सजा पर रोक लगा दी।न्यायालय ने...
झारखंड हाईकोर्ट ने किसी भी दंडात्मक कार्यवाही के अभाव में कर भुगतान में देरी के लिए आपराधिक कार्यवाही रद्द की
झारखंड हाईकोर्ट ने आयकर अधिनियम 1961 (INCOME TAX Act ) के तहत कर चोरी के आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इस मामले में आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ट्रैक्टर डीलर अपने दाखिल किए गए रिटर्न में राशि घोषित करने के बावजूद आकलन वर्ष 2011-12 के लिए अपने आयकर रिटर्न से जुड़ी कर देयता का भुगतान करने में विफल रहा।कार्यवाही रद्द करने का कोर्ट का निर्णय इस तथ्य पर टिका था कि कर का भुगतान अंतत किया गया। हालांकि कुछ देरी के साथ और याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई वसूली कार्यवाही लंबित नहीं...
सह-आरोपी द्वारा लगाए गए बेबुनियाद आरोपों के कारण आरोपी सलाखों के पीछे है, कोई सबूत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत आरोपी को रिहा किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि आरोप पत्र में केवल यह उल्लेख करना कि किसी व्यक्ति के खिलाफ NDPS Act की धारा 29 के तहत अपराध किया गया, उस व्यक्ति को तब तक सलाखों के पीछे रखने के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक कि आरोप पत्र में उस व्यक्ति की संलिप्तता या भागीदारी को दर्शाने वाली कोई सामग्री संलग्न न की जाए।NDPS Act की धारा 29 NDPS Act के तहत अपराध करने के लिए उकसाने या साजिश रचने के लिए दंड का प्रावधान करती है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ NDPS Act के तहत आरोपित आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही...
नियुक्तियों में जाति-आधारित वरीयता केवल तभी दी जा सकती है, जब न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी हो: एमपी हाईकोर्ट ने ASHA Worker की बर्खास्तगी खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में अपनी जबलपुर बेंच में मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHA Worker) की बर्खास्तगी खारिज की। वर्कर को अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवारों को उन क्षेत्रों में वरीयता देने वाली राज्य नीति के कारण बर्खास्त किया गया था, जहां उनकी आबादी 50% से अधिक है। अदालत ने माना कि इस मामले में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता के कारण इस नीति का आवेदन गलत था।जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने बर्खास्तगी को अनुचित माना और कहा कि आशा कार्यकर्ता के लिए न्यूनतम शैक्षणिक...
न्यायालय धारा 125 CrPc या धारा 144 BNSS के तहत एकपक्षीय अंतरिम भरण-पोषण दे सकता है, जब पुष्ट तथ्य दिखाए जाएं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय धारा 125 CrPc या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 144 के तहत एकपक्षीय अंतरिम भरण-पोषण दे सकता है।जस्टिस सुमीत गोयल ने स्पष्ट किया,"न्यायालय को न्यायिक विवेक और न्याय के सुस्थापित मानदंडों के अनुसार एकपक्षीय अंतरिम भरण-पोषण/अंतरिम भरण-पोषण देने की याचिका पर विचार करना चाहिए। इस तरह की शक्ति के प्रयोग के लिए कोई सार्वभौमिक संपूर्ण दिशा-निर्देश निर्धारित नहीं किए जा सकते। न्यायालय द्वारा किसी दिए गए मामले के तथ्यों/परिस्थितियों...
Negotiable Instruments Act | न्यायालय दोषसिद्धि के बाद भी धारा 147 के तहत अपराधों को समन कर सकता है: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (Negotiable Instruments Act) (NI Act) की धारा 147 के तहत न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि दर्ज किए जाने के बाद भी अपराधों को समन किया जा सकता है।जस्टिस संदीप शर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसे NI Act की धारा 147 के साथ पढ़ा गया।याचिकाकर्ता ने एक्ट की धारा 138 के तहत अपराध के समन की मांग की और अनुरोध किया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, शिमला...




















