हाईकोर्ट

भजन, अज़ान और क्लब इवेंट्स के दौरान पूरी तरह से उल्लंघन: नागपुर में बार-बार होने वाले नॉइज़ पॉल्यूशन पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर PIL दर्ज की
भजन, अज़ान और क्लब इवेंट्स के दौरान पूरी तरह से उल्लंघन: नागपुर में बार-बार होने वाले नॉइज़ पॉल्यूशन पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर PIL दर्ज की

बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर बेंच) ने हाल ही में नागपुर शहर में नॉइज़ पॉल्यूशन के 'बार-बार होने' वाले मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया और खास क्लबों, मंदिरों और दरगाहों का नाम लिया। साथ ही कहा कि 'भजन', 'अज़ान' और अलग-अलग सेलिब्रेशन और इवेंट्स जैसी एक्टिविटीज़ कानून का उल्लंघन करके की जाती हैं।जस्टिस अनिल एल पानसरे और जस्टिस राज डी वाकोडे की बेंच ने कहा कि जब तक कोई असरदार तरीका नहीं बनाया जाता, नॉइज़ कंट्रोल पर राज्य के आदेश "आँखों में धूल झोंकने" जैसे ही रहेंगे।इन बातों के साथ बेंच ने एक मस्जिद में...

पहलगाम हमले पर X पोस्ट PM के खिलाफ, उनके नाम का गलत इस्तेमाल: हाईकोर्ट ने नेहा राठौर को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
पहलगाम हमले पर 'X' पोस्ट 'PM के खिलाफ', उनके नाम का गलत इस्तेमाल: हाईकोर्ट ने नेहा राठौर को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने लोक सिंगर नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की। यह अर्जी उनके खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पहलगाम आतंकी हमले के बारे में सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के लिए दर्ज FIR के संबंध में दायर की गई थी।जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने देखा कि राठौर द्वारा पोस्ट किए गए 'X' पोस्ट/ट्वीट भारत के प्रधानमंत्री के खिलाफ हैं और कथित पोस्ट में PM के नाम का 'गलत तरीके से' इस्तेमाल किया गया।कोर्ट ने आगे कहा कि हालांकि संविधान का आर्टिकल 19 बोलने की...

बिना NBW के तभी सही है, जब दोषी मर चुका हो या देश छोड़कर भाग गया हो; 1984 की अपील में पूरे भारत में उस आदमी का पता लगाएं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा
'बिना NBW के तभी सही है, जब दोषी मर चुका हो या देश छोड़कर भाग गया हो; 1984 की अपील में पूरे भारत में उस आदमी का पता लगाएं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी का नॉन-बेलेबल वारंट (NBW) बिना तामील किए सिर्फ़ दो खास हालात में वापस किया जा सकता है: अगर भगोड़ा मर चुका हो या अगर वह इसे साबित करने के लिए ठोस सबूत के साथ देश छोड़कर भाग गया हो।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की डिवीजन बेंच ने यह देखते हुए मंगलवार को प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर की उस रिपोर्ट को मानने से इनकार किया, जिसमें असल में कहा गया कि 41 साल पुरानी क्रिमिनल अपील में एक दोषी बिना किसी निशान के गायब हो गया था।कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि पुलिस...

दिल्ली सरकार को MCD की फाइनेंशियल हालत देखने की ज़रूरत है: हाईकोर्ट ने MCD कमिश्नर और चीफ सेक्रेटरी के बीच मीटिंग का निर्देश दिया
दिल्ली सरकार को MCD की फाइनेंशियल हालत देखने की ज़रूरत है: हाईकोर्ट ने MCD कमिश्नर और चीफ सेक्रेटरी के बीच मीटिंग का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (5 दिसंबर) को दिल्ली सरकार से कहा कि वह दिल्ली नगर निगम (MCD) की फाइनेंशियल तंगी को देखे और निर्देश दिया कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए MCD कमिश्नर और चीफ सेक्रेटरी के बीच एक मीटिंग की जाए।कोर्ट महारानी बाग इलाके में ड्रेनेज और बाढ़ की समस्याओं से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था।कुछ देर मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने अपने ऑर्डर में कहा:"जहां तक ​​नाले के तीसरे चैंबर को ढकने और नाले की बैरिकेडिंग की...

सीधा कैरेक्टर पर हमला: तेजिंदर बग्गा ने हाईकोर्ट में मानहानि केस में सुब्रमण्यम स्वामी के समन को चुनौती देने का विरोध किया
'सीधा कैरेक्टर पर हमला': तेजिंदर बग्गा ने हाईकोर्ट में मानहानि केस में सुब्रमण्यम स्वामी के समन को चुनौती देने का विरोध किया

BJP नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि सुब्रमण्यम स्वामी के उनके खिलाफ किए गए ट्वीट, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वह कई बार जेल जा चुके हैं, उन्होंने सीधे तौर पर उनके कैरेक्टर और ईमानदारी पर हमला किया। साथ ही समाज में उनकी इज़्ज़त भी गिराई।ऐसा इसलिए है, क्योंकि क्रिमिनल बैकग्राउंड का आरोप किसी पॉलिटिकल पार्टी में पद पर बैठे व्यक्ति के लिए नुकसानदायक होता है, बग्गा ने स्वामी की उस याचिका के जवाब में कहा, जिसमें बग्गा द्वारा स्वामी के खिलाफ दायर मानहानि केस में ट्रायल कोर्ट...

एमपी हाईकोर्ट ने पुलिस वाले के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना
एमपी हाईकोर्ट ने पुलिस वाले के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पुलिस ऑफिसर के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज की कि याचिका एक खास पुलिस ऑफिसर को टारगेट करती दिख रही है।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की डिवीजन बेंच ने कहा;"याचिकाकर्ता के व्यवहार और Facebook स्क्रीनशॉट के रूप में हमारे सामने रखे गए मटीरियल को देखते हुए हमारा मानना ​​है कि यह जनहित याचिका गलत इरादे से फाइल की गई। यह असली PIL नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।"यह जनहित याचिका सचिन सिसोदिया ने फाइल की थी,...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मॉडिफाइड टाउनशिप प्लान में नोटिस प्रोसेस की लीगैलिटी पर सवाल उठाए, CEO नोएडा से एफिडेविट मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मॉडिफाइड टाउनशिप प्लान में नोटिस प्रोसेस की लीगैलिटी पर सवाल उठाए, CEO नोएडा से एफिडेविट मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में न्यू ओखला डेवलपमेंट अथॉरिटी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) से पर्सनल एफिडेविट मांगा। यह एफिडेविट उन अखबारों 'बिजनेस स्टैंडर्ड' और 'महामेधा' के सर्कुलेशन एरिया को तय करने के लिए है, जिनके ज़रिए मॉडिफाइड टाउनशिप प्लान मैप पर ऑब्जेक्शन मंगाए गए।याचिकाकर्ता एसोसिएशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स ऑफ पवेलियन कोर्ट एंड पवेलियन हाइट अपार्टमेंट्स ने 23.03.2011 के मंज़ूर लेआउट प्लान में किए गए कथित गैर-कानूनी बदलाव के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जो उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट...

झारखंड हाईकोर्ट ने शेयर्ड पेरेंटिंग ऑर्डर को खारिज किया, कहा- बच्चे की भलाई पिता के नेचुरल गार्जियन होने के स्टेटस से ज़्यादा ज़रूरी
झारखंड हाईकोर्ट ने शेयर्ड पेरेंटिंग ऑर्डर को खारिज किया, कहा- बच्चे की भलाई पिता के नेचुरल गार्जियन होने के स्टेटस से ज़्यादा ज़रूरी

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट की धारा 6 को धारा 13 के साथ पढ़ा जाना चाहिए। साथ ही बच्चे की भलाई सबसे ज़रूरी है, भले ही पिता को नेचुरल गार्जियन बनाया गया हो। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस ऑर्डर को खारिज कर दिया, जिसमें “शेयर्ड पेरेंटिंग अरेंजमेंट” का निर्देश दिया गया था और पत्नी को कस्टडी दी गई थी।झारखंड हाईकोर्ट की जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच फैमिली कोर्ट्स एक्ट की धारा 19(1) के तहत फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ...

भविष्य की फीस वसूलने के लिए स्टूडेंट्स के मूल दस्तावेज रोकना अवैध: राजस्थान हाईकोर्ट
भविष्य की फीस वसूलने के लिए स्टूडेंट्स के मूल दस्तावेज रोकना अवैध: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी या शैक्षणिक संस्थान किसी स्टूडेंट के मूल दस्तावेजों को भविष्य की फीस वसूली के साधन के रूप में अपने पास नहीं रख सकते। अदालत ने कहा कि एडमिशन के समय जमा कराए गए दस्तावेज केवल सत्यापन और पात्रता जांच के उद्देश्य से होते हैं, न कि स्टूडेंट को फीस भुगतान के लिए बाध्य करने के उपकरण के रूप में।जस्टिस अनुरूप सिंघी की सिंगल बेंच एक पूर्व MBBS स्टूडेंट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। स्टूडेंट ने अदालत से अपने मूल दस्तावेज वापस दिलाने का निर्देश...

2018 तेजू पुलिस स्टेशन लिंचिंग केस | गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरोपियों की रिहाई का आदेश रद्द किया, हत्या के आरोप तय करने का निर्देश दिया
2018 तेजू पुलिस स्टेशन लिंचिंग केस | गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरोपियों की रिहाई का आदेश रद्द किया, हत्या के आरोप तय करने का निर्देश दिया

राज्य द्वारा दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई और जिसमें 2018 में अरुणाचल प्रदेश के तेजू पुलिस स्टेशन से दो बलात्कार और हत्या के संदिग्धों को बाहर निकालकर सार्वजनिक रूप से पीट-पीटकर मार डालने के आरोपी छह प्रतिवादियों को बरी कर दिया गया था, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों से आरोपियों के खिलाफ गंभीर संदेह पैदा होता है। इसलिए साजिश, सरकारी कर्मचारियों को काम करने से रोकने और हत्या सहित आरोपों पर पूरी सुनवाई की...

भूमि पासबुक जारी होने के बाद आवंटी का अधिकार व स्वामित्व तब तक बना रहता है, जब तक रद्द न किया जाए : गुवाहाटी हाईकोर्ट
भूमि पासबुक जारी होने के बाद आवंटी का अधिकार व स्वामित्व तब तक बना रहता है, जब तक रद्द न किया जाए : गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि जब सरकारी भूमि के आवंटन का हस्तांतरण सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित हो जाता है और आवंटी के पक्ष में भूमि पासबुक जारी हो जाती है तो वह व्यक्ति उस भूमि पर अधिकार और स्वामित्व बनाए रखता है। यह अधिकार तब तक बना रहता है, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत रूप से आवंटन को रद्द या वापस न लिया जाए।जस्टिस अंजन मोनी कलिता ने यह टिप्पणी अपील खारिज करते हुए की। उन्होंने कहा कि यह दलील स्वीकार्य नहीं है कि भूमि पासबुक केवल राजस्व भुगतान या वित्तीय...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली मस्जिद की निचली दो मंज़िलों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली मस्जिद की निचली दो मंज़िलों पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला नगर निगम को नोटिस जारी कर संजौली मस्जिद के ढांचे के अलग-अलग हिस्सों की वैधता पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा।कोर्ट ने शिमला में पांच मंज़िला संजौली मस्जिद के ग्राउंड फ्लोर और पहली मंज़िल के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। हालांकि, उन्होंने वक्फ बोर्ड द्वारा पहले शिमला नगर निगम कमिश्नर के सामने दिए गए अपने ही हलफनामे पर भरोसा करते हुए दूसरी, तीसरी और चौथी मंज़िल को गिराने का आदेश दिया।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की,"ग्राउंड फ्लोर और पहली मंज़िल के...

उच्च मेरिट पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को सामान्य वर्ग में समायोजित करना अनिवार्य: राजस्थान हाईकोर्ट
उच्च मेरिट पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को सामान्य वर्ग में समायोजित करना अनिवार्य: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि यदि किसी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ने शुल्क छूट के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की आरक्षण-सुविधा का लाभ नहीं लिया और उसके अंक सामान्य वर्ग की अंतिम चयन कट-ऑफ से अधिक हैं तो उसे अनिवार्य रूप से सामान्य वर्ग में समायोजित किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में मेरिट माइग्रेशन का सिद्धांत लागू होता है, जिसके तहत खुली श्रेणी (जनरल कैटेगरी) में सभी समुदायों के योग्य अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलता है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए...

बार काउंसिल से बरी होना आपराधिक मुकदमा रद्द करने का आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बार काउंसिल से बरी होना आपराधिक मुकदमा रद्द करने का आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में साफ कहा कि बार काउंसिल द्वारा की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही में किसी वकील का बरी या दोषमुक्त होना अपने-आप में उसके खिलाफ दर्ज किसी वैध आपराधिक मामले को समाप्त करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक कार्यवाही और अनुशासनात्मक कार्यवाही अलग-अलग प्रकृति की होती हैं और दोनों एक साथ चल सकती हैं, क्योंकि उनके उद्देश्य प्रक्रिया और प्रमाण के मानक भिन्न होते हैं।यह टिप्पणी जस्टिस जय प्रकाश तिवारी ने उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें पेशे...

दिव्यांग व्यक्ति को कोर्ट पहुंचने में हुई भारी परेशानी के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी सुविधाओं की पूरी जानकारी
दिव्यांग व्यक्ति को कोर्ट पहुंचने में हुई भारी परेशानी के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मांगी सुविधाओं की पूरी जानकारी

एक दिव्यांग व्यक्ति के कोर्ट परिसर में प्रवेश के दौरान हुई कठिनाइयों को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह परिसर में दिव्यांगजन (PwDs) के लिए उपलब्ध सुविधाओं और सहायता प्रणालियों का पूरा विवरण रिकॉर्ड पर पेश करे।यह आदेश जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने उस समय पारित किया जब पत्नी के माता-पिता से जान का खतरा बताए जाने वाले मामले की सुनवाई के लिए अदालत आए पति को जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, कोर्ट तक पहुंचने में भारी संघर्ष करना पड़ा।...

अवैध हिरासत और हथकड़ी लगाना अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन : एमपी हाईकोर्ट ने SHO से जुड़े मामले में सख़्त रुख अपनाया
अवैध हिरासत और हथकड़ी लगाना अनुच्छेद 21 का घोर उल्लंघन : एमपी हाईकोर्ट ने SHO से जुड़े मामले में सख़्त रुख अपनाया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने एक व्यक्ति को बिना किसी अपराध दर्ज किए और अदालत की अनुमति के बिना पुलिस थाने में अवैध रूप से बंद रखने तथा हथकड़ी लगाने के मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कड़ी नाराज़गी जताई। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन के मौलिक अधिकार का घोर उल्लंघन करार दिया। साथ ही इंदौर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करें कि संबंधित थाना प्रभारी (SHO) के खिलाफ विभागीय और आपराधिक स्तर पर क्या कार्रवाई प्रस्तावित की जा रही है।यह आदेश जस्टिस विजय...

हाईकोर्ट ने रायबरेली से राहुल गांधी के लोकसभा चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका की खारिज
हाईकोर्ट ने रायबरेली से राहुल गांधी के लोकसभा चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका की खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक वकील की याचिका खारिज की, जिसमें विपक्ष के नेता राहुल गांधी के रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के मामले में उनके खिलाफ क्वो वारंटो रिट की मांग की गई थी।याचिकाकर्ता अशोक पांडे ने दावा किया था कि "सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों है" वाली टिप्पणी पर क्रिमिनल मानहानि केस में गांधी को दोषी ठहराए जाने के कारण उन्हें सांसद चुने जाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।इस दलील को खारिज करते हुए जस्टिस शेखर बी सराफ और जस्टिस मंजीव शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि एक बार जब ऊपरी...