अदीना मस्जिद-आदिनाथ मंदिर विवाद: कलकत्ता हाइकोर्ट पहुंचा मामला, याचिका में दावा- 'हिंदू देवताओं से भरा है स्थल'
Amir Ahmad
19 Jan 2026 5:35 PM IST

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित ऐतिहासिक अदीना स्मारक को लेकर एक नई कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। कलकत्ता हाइकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर दावा किया गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अदीना मस्जिद के रूप में इस स्थल को गलत तरीके से वर्गीकृत किया, जबकि वहां हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और मंदिर के स्पष्ट अवशेष मौजूद हैं।
चीफ जस्टिस सुजय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने सोमवार (19 जनवरी 2026) को इस मामले पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने मांग की कि ASI को इस संरक्षित स्मारक के धार्मिक चरित्र की पुन: जांच करने का निर्देश दिया जाए और जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक हिंदू समुदाय को वहां पूजा-अर्चना की अनुमति दी जाए।
अदालत के महत्वपूर्ण सवाल
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने यह सवाल उठाया कि क्या ASI के पास किसी स्थल के धार्मिक चरित्र को एक बार अधिसूचित करने के बाद उसे दोबारा बदलने की शक्ति है?
अदालत ने मौखिक रूप से कहा,
"जब तक किसी स्मारक का धार्मिक चरित्र कानूनी रूप से निर्धारित नहीं हो जाता, तब तक पूजा की अनुमति या नाम बदलने जैसे राहत संबंधी आदेश जारी नहीं किए जा सकते।"
अदालत ने याचिकाकर्ता से यह भी पूछा कि कानून की कौन-सी धारा ASI को पहले से तय किए गए चरित्र की समीक्षा करने या उसे फिर से निर्धारित करने का अधिकार देती है।
प्राचीन स्मारक अधिनियम (1958) का हवाला
याचिकाकर्ता ने प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा 16(1) का सहारा लिया। उन्होंने दलील दी कि यह अधिनियम ASI पर यह जिम्मेदारी डालता है कि वह सुनिश्चित करे कि किसी भी पूजा स्थल या स्मारक का उपयोग उसके मूल चरित्र के विपरीत न हो। याचिकाकर्ता का तर्क है कि वर्तमान में इस स्थल का मस्जिद के रूप में उपयोग इसके वास्तविक चरित्र (मंदिर) के साथ "असंगत" है।
उन्होंने दावा किया कि जब 1916 में पहली बार इस स्मारक को अधिसूचित किया गया, तब इसके धार्मिक चरित्र की कभी जांच ही नहीं की गई। याचिका में यह भी कहा गया कि राज्यसभा और संसद के पटल पर दिए गए कई जवाबों में भी यह स्वीकार किया गया कि वहां हिंदू देवी-देवताओं के अवशेष मौजूद हैं।
अगली सुनवाई और संसद के दस्तावेज
अदालत ने गौर किया कि याचिकाकर्ता ने संसद में दिए गए उन जवाबों या सहायक दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर नहीं रखा है, जिनका वे जिक्र कर रहे हैं। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को 10 दिनों के भीतर एक पूरक हलफनामा (Supplementary Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी, 2026 को होगी।
विवाद की पृष्ठभूमि
अदीना स्मारक का विवाद अक्टूबर, 2025 में तब सुर्खियों में आया था, जब क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद यूसुफ पठान ने इस मस्जिद का दौरा किया और सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें साझा की थीं। इसके जवाब में पश्चिम बंगाल भाजपा ने दावा किया कि यह संरचना वास्तव में आदिनाथ मंदिर है, जिसे बाद में परिवर्तित किया गया।

