हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने व्यभिचार के आधार पर तलाक को ठहराया सही, धारा 65-बी प्रमाणपत्र को अनिवार्य नहीं माना
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने व्यभिचार के आधार पर तलाक को ठहराया सही, धारा 65-बी प्रमाणपत्र को अनिवार्य नहीं माना

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि वैवाहिक विवादों में भारतीय साक्ष्य अधिनियम का कठोरता से पालन आवश्यक नहीं है। ऐसे मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिए धारा 65-बी का प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं माना जाएगा। न्यायालय ने पत्नी की व्यभिचार संबंधी तस्वीरों के आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील को खारिज कर दिया।जस्टिस विशाल धगट एवं जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 के अंतर्गत फैमिली कोर्ट को...

बाइबल बांटना, धर्म का प्रचार करना अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण मामले में हद पार करने पर यूपी पुलिस को फटकारा
बाइबल बांटना, धर्म का प्रचार करना अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण मामले में हद पार करने पर यूपी पुलिस को फटकारा

एक कड़े आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सिर्फ़ बाइबल बांटना या किसी धर्म का प्रचार करना उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम 2021 के तहत अपराध नहीं है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने यूपी पुलिस को भी फटकारा, जिसे उन्होंने FIR दर्ज होने के तुरंत बाद आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए हद पार करना कहा, जबकि उस समय जबरन धर्मांतरण के दावों को साबित करने के लिए कोई पीड़ित सामने नहीं आया था।हाईकोर्ट ने ये टिप्पणियां आरोपी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए...

BNSS की धारा 35 | गिरफ्तारी व्यक्तिगत कार्रवाई, हर आरोपी के लिए अलग-अलग ठोस कारण जरूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट
BNSS की धारा 35 | गिरफ्तारी व्यक्तिगत कार्रवाई, हर आरोपी के लिए अलग-अलग ठोस कारण जरूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट

एक अहम फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी एक पूरी तरह व्यक्तिगत कार्रवाई होती है। जांच एजेंसियां कई आरोपियों को एक साथ पकड़ने के लिए एक जैसे या सामूहिक कारणों का सहारा नहीं ले सकतीं। अदालत ने कहा कि हर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके खुद के मामलों और भूमिका से जुड़े ठोस अलग-अलग और दस्तावेजों से समर्थित कारण दर्ज करना अनिवार्य है।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस श्याम सी. चांडक की खंडपीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 की व्याख्या करते हुए कहा कि...

पचास हज़ार बच्चे, एक नाज़ुक सिस्टम: न्यू इंडिया जस्टिस रिपोर्ट हमें जुवेनाइल जस्टिस के बारे में क्या बताती है?
पचास हज़ार बच्चे, एक नाज़ुक सिस्टम: न्यू इंडिया जस्टिस रिपोर्ट हमें जुवेनाइल जस्टिस के बारे में क्या बताती है?

संसद द्वारा कानून के साथ संघर्ष में बच्चों के लिए कानून को फिर से लिखने के दस साल बाद, जिन संस्थानों को उस वादे को पूरा करने का काम सौंपा गया था, वे चिंताजनक रूप से उन लोगों के समान दिखते हैं जिन्हें कानून को बदलने के लिए था। किशोर न्याय पर इंडिया जस्टिस रिपोर्ट के नए अध्ययन के शुभारंभ पर, कमरे में बातचीत उसी परेशान करने वाले विषय पर वापस घूमती रही: पुनर्वास पर निर्मित एक अधिनियम, और एक ऐसी प्रणाली जो आपराधिक अदालतों की प्रवृत्ति में चूक करती रहती है। संख्याएं एक कहानी बताती हैं, लेकिन...

यूनिवर्सिटी उसी क्वालिफिकेशन के आधार पर PhD के लिए कैंडिडेट को स्वीकार करने के बाद भर्ती के लिए उसकी डिग्री रिजेक्ट नहीं कर सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
यूनिवर्सिटी उसी क्वालिफिकेशन के आधार पर PhD के लिए कैंडिडेट को स्वीकार करने के बाद भर्ती के लिए उसकी डिग्री रिजेक्ट नहीं कर सकती: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कोई यूनिवर्सिटी कैंडिडेट की मास्टर डिग्री को PhD एडमिशन के लिए एलिजिबल सब्जेक्ट मानकर, लेकिन असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए सिलेक्शन के दौरान उसी क्वालिफिकेशन को नज़रअंदाज़ करके अलग-अलग स्टैंडर्ड लागू नहीं कर सकती।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:“रिस्पॉन्डेंट्स को M.Sc. (बॉटनी) को PhD के लिए 'संबंधित' सब्जेक्ट मानते समय अलग-अलग पैमाने अपनाने और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद के लिए उसे नज़रअंदाज़ करने से रोका जाता है।”याचिकाकर्ता सीमा शर्मा फॉरेस्ट प्रोडक्ट्स डिपार्टमेंट...

सिविल कोर्ट एग्रीकल्चरल रिजम्पशन केस में दखल नहीं दे सकते, सिर्फ़ रेवेन्यू अथॉरिटीज़ के पास अधिकार क्षेत्र: जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट
सिविल कोर्ट एग्रीकल्चरल रिजम्पशन केस में दखल नहीं दे सकते, सिर्फ़ रेवेन्यू अथॉरिटीज़ के पास अधिकार क्षेत्र: जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा, “एग्रीकल्चरल रिफॉर्म्स एक्ट से जुड़े मामले, खासकर रिजम्पशन की कार्रवाई, सिर्फ़ रेवेन्यू अथॉरिटीज़ के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। सिविल कोर्ट के पास दखल देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, यहां तक कि इंजंक्शन स्टेज पर भी।” यह फैसला दो केस करने वालों की याचिका खारिज करते हुए सुनाया गया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के एक साथ दिए गए फैसलों को चुनौती दी गई।जम्मू-कश्मीर एग्रीकल्चरल रिफॉर्म्स एक्ट, 1976 की धारा 25 के तहत बनाए गए कानूनी अधिकार क्षेत्र पर रोक की पुष्टि करते...

दिव्यांग आश्रित की देखभाल करने वाले को ट्रांसफर में छूट का हक, दिव्यांगों के हित एडमिनिस्ट्रेटिव सुविधा से ज़्यादा ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिव्यांग आश्रित की देखभाल करने वाले को ट्रांसफर में छूट का हक, दिव्यांगों के हित एडमिनिस्ट्रेटिव सुविधा से ज़्यादा ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने माना कि दिव्यांग आश्रित के हित एडमिनिस्ट्रेटिव सुविधा से ज़्यादा ज़रूरी हैं। साथ ही दिव्यांग लोगों की देखभाल करने वाले रेगुलर ट्रांसफर से छूट के हकदार हैं। उनके लिए सही सुविधा ज़रूरी है।मामले की पृष्ठभूमि के तथ्ययाचिकाकर्ता बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की 171वीं बटालियन में पोस्टेड असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर/जनरल ड्यूटी है। उसका बेटा दिल्ली में रहता है। उसे अपने निचले अंगों में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी है, जो 50%...

हिंदू देवी-देवताओं के अपमान के खिलाफ कानूनों के बेअसर होने का दावा करने वाली PIL पर हाईकोर्ट ने कहा- लागू करना एग्जीक्यूटिव का अधिकार क्षेत्र
हिंदू देवी-देवताओं के अपमान के खिलाफ कानूनों के 'बेअसर' होने का दावा करने वाली PIL पर हाईकोर्ट ने कहा- लागू करना एग्जीक्यूटिव का अधिकार क्षेत्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने गुरुवार को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) का निपटारा किया, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक किताबों को अपमान से बचाने के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे के असर का रिव्यू करने की मांग की गई।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा कि कानून बनाना या उनमें बदलाव करना पूरी तरह से लेजिस्लेचर के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि मौजूदा कानूनों को लागू करना एग्जीक्यूटिव के अधिकार क्षेत्र में आता है।इस तरह बेंच ने याचिकाकर्ताओं को भारत सरकार के संबंधित...

बच्चे का हाथ पकड़ना और सेक्सुअल फेवर के लिए पैसे देना POCSO Act के तहत सेक्सुअल असॉल्ट माना जाएगा: बॉम्बे हाईकोर्ट
बच्चे का हाथ पकड़ना और सेक्सुअल फेवर के लिए पैसे देना POCSO Act के तहत 'सेक्सुअल असॉल्ट' माना जाएगा: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर बेंच) ने माना कि नाबालिग लड़की का हाथ पकड़ना, जब सेक्सुअल फेवर के बदले पैसे देने की पेशकश की जाती है, तो यह POCSO Act की धारा 7 के तहत 'सेक्सुअल असॉल्ट' की परिभाषा में आता है, जो धारा 8 के तहत सज़ा के लायक है।इस तरह जस्टिस निवेदिता पी मेहता की बेंच ने 25 साल के आदमी की अपील खारिज कr और उसकी सज़ा को सही ठहराया और जुर्म की गंभीरता को देखते हुए उसे प्रोबेशन का फ़ायदा देने से भी मना कर दिया।संक्षेप में मामलादोषी-अपील करने वाले ने हाईकोर्ट में एडिशनल सेशन जज-2, यवतमाल के 2019...

पेपर सेट करने वाला व्यक्ति ही वेरिफाई करने के लिए सबसे सही व्यक्ति, कोर्ट एग्जाम के मामलों में एक्सपर्ट की राय को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता: हिमाचल हाईकोर्ट
पेपर सेट करने वाला व्यक्ति ही वेरिफाई करने के लिए सबसे सही व्यक्ति, कोर्ट एग्जाम के मामलों में एक्सपर्ट की राय को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सब्जेक्ट एक्सपर्ट की राय को कोर्ट तब तक नहीं बदल सकता, जब तक कि वह रिकॉर्ड के हिसाब से साफ तौर पर गलत न हो।जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की, "एक्सपर्ट द्वारा दी गई राय को कोर्ट तब तक नहीं बदल सकता, जब तक कि वह साफ तौर पर गलत न हो सही होने की जांच करने के लिए सबसे सही व्यक्ति वह है, जिसने पेपर सेट किया।"याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में यह आरोप लगाते हुए संपर्क किया कि जून, 2025 में हुए कांस्टेबल के स्क्रीनिंग टेस्ट में एक सवाल के लिए उसे एक नंबर नहीं दिया...

तीस हजारी मेट्रो परियोजना विवाद: हाईकोर्ट ने DMRC के पक्ष में 70 लाख रुपये का मध्यस्थता अवॉर्ड बरकरार रखा
तीस हजारी मेट्रो परियोजना विवाद: हाईकोर्ट ने DMRC के पक्ष में 70 लाख रुपये का मध्यस्थता अवॉर्ड बरकरार रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के पक्ष में पारित उस मध्यस्थता अवॉर्ड को बरकरार रखा, जिसमें पारसवनाथ डेवलपर्स लिमिटेड (PDL) पर लगभग 70 लाख रुपये से अधिक की देनदारी तय की गई थी।जस्टिस जस्मीत सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि कंसेशन एग्रीमेंट के तहत A की ओर से किसी तरह का उल्लंघन नहीं किया गया और परियोजना के पूरा न हो पाने का कारण पारसवनाथ और उसके सब-लाइसेंसी की लापरवाही थी, जिन्होंने आवश्यक स्थानीय निकाय की मंजूरी के लिए उचित आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया।यह विवाद तिस हजारी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारी से टीचर की मौत के एक साल बाद उसे नौकरी से निकालने का आदेश देने पर स्पष्टीकरण मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारी से टीचर की मौत के एक साल बाद उसे नौकरी से निकालने का आदेश देने पर स्पष्टीकरण मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य शिक्षा अधिकारियों के रवैये पर हैरानी जताई, जिन्होंने COVID-19 महामारी के कारण एक असिस्टेंट टीचर की मौत के एक साल से ज़्यादा समय बाद उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू की।इस बात पर ज़ोर देते हुए कि मरे हुए व्यक्ति के खिलाफ जांच शुरू नहीं की जा सकती, जस्टिस प्रकाश पाडिया की बेंच ने यूपी के डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (बेसिक) को एक पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें यह बताया जाए कि उन्होंने कानून के किन प्रावधानों के तहत एक मृत कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू...

दिल्ली हाईकोर्ट ने फील्ड टेस्ट के दौरान ड्रग की पहचान में अंतर होने पर NDPS आरोपी को ज़मानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने फील्ड टेस्ट के दौरान ड्रग की पहचान में अंतर होने पर NDPS आरोपी को ज़मानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत पकड़े गए एक आदमी को ज़मानत दी, क्योंकि ज़ब्त की गई ड्रग की फील्ड टेस्टिंग और फोरेंसिक टेस्टिंग में पहचान में अंतर था।जस्टिस अमित महाजन ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि याचिकाकर्ता दो साल से ज़्यादा समय से जेल में था, लेकिन ट्रायल शुरू नहीं हुआ और सिर्फ़ आरोप तय किए गए।प्रॉसिक्यूशन ने आवेदक की जेब से मिली एक पॉलीथीन से 67g MDMA मिलने का आरोप लगाया। बाद में FSL में ड्रग को मेथामफेटामाइन बताया गया।प्रॉसिक्यूशन...

मजिस्ट्रेट इकोनॉमिक ऑफेंस विंग को कस्टोडियल टॉर्चर के आरोपों की जांच करने का निर्देश नहीं दे सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट इकोनॉमिक ऑफेंस विंग को कस्टोडियल टॉर्चर के आरोपों की जांच करने का निर्देश नहीं दे सकते: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, श्रीनगर के पास लागू नोटिफिकेशन के तहत कस्टोडियल टॉर्चर और हत्या से जुड़े आरोपों की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है।कोर्ट ने कहा कि एक मजिस्ट्रेट को सिर्फ़ उस एजेंसी को जांच करने का निर्देश देने का अधिकार है, जिसके पास कथित अपराध का अधिकार क्षेत्र हो।कोर्ट, इकोनॉमिक ऑफेंस विंग, कश्मीर के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें कस्टोडियल टॉर्चर और मौत के आरोपों के संबंध में FIR दर्ज करने और उक्त विंग...

सिर्फ़ जालसाज़ी के दावे विवादित कंपनी रिकॉर्ड की जांच करने के NCLT के अधिकार क्षेत्र को खत्म नहीं करते: दिल्ली हाईकोर्ट
सिर्फ़ जालसाज़ी के दावे विवादित कंपनी रिकॉर्ड की जांच करने के NCLT के अधिकार क्षेत्र को खत्म नहीं करते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सिर्फ़ धोखाधड़ी या जालसाज़ी के आरोपों का इस्तेमाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के अधिकार क्षेत्र को खत्म करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सिविल कोर्ट एक जैसे मुकदमों पर सुनवाई नहीं कर सकते, जब वही मुद्दे पहले से ही किसी ज़ुल्म और मिसमैनेजमेंट के मामले में NCLT के सामने हों।इसके बाद जस्टिस अमित महाजन की सिंगल बेंच ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एक डिफेंस-टेक स्टार्टअप के फाउंडर्स द्वारा दायर सिविल केस खारिज करने से...

सुप्रीम कोर्ट के 2016 के फैसले में सेंसिटिव FIR को ज़रूरी ऑनलाइन अपलोडिंग से छूट, पीड़ित व्यक्ति SP/CP से कॉपी मांग सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के 2016 के फैसले में 'सेंसिटिव' FIR को ज़रूरी ऑनलाइन अपलोडिंग से छूट, 'पीड़ित व्यक्ति' SP/CP से कॉपी मांग सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

'सेंसिटिव' मामलों में, जहां FIR ऑनलाइन अपलोड नहीं की जाती है, उनकी कॉपी पाने के तरीके को साफ़ करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ऐसे मामलों में कोई "पीड़ित व्यक्ति" सीधे सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (SP) या कमिश्नर ऑफ़ पुलिस को अप्लाई कर सकता है, जैसा भी मामला हो, और FIR की कॉपी मांग सकता है।हाईकोर्ट ने यूथ बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया और अन्य में सुप्रीम कोर्ट के 2016 के फैसले में दिए गए अपवादों का ज़िक्र किया, जो पुलिस को यौन अपराधों, बगावत और आतंकवाद से जुड़ी FIR को...