हाईकोर्ट
ज़िला कोर्ट को CBI जांच का आदेश देने का अधिकार नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि ज़िला कोर्ट (जिसमें सेशन कोर्ट और मजिस्ट्रेट शामिल हैं) के पास किसी अपराध की जांच के लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने दोहराया कि यह अधिकार सिर्फ़ संवैधानिक अदालतों के पास है, जो संविधान के आर्टिकल 32 और 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि ज़मानत से जुड़े मामले की सुनवाई करते समय सेशन कोर्ट CBI जांच का आदेश नहीं दे सकता।जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच CBI की रिट याचिका पर सुनवाई कर...
रद्द की गई परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों से बरी होने पर बाद की भर्तियों में नियुक्ति का पक्का अधिकार नहीं मिलता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि रद्द की गई भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों से बरी होने का मतलब यह नहीं है कि उम्मीदवार को नियुक्ति का पक्का अधिकार मिल गया। कोर्ट ने कहा कि भले ही जांच रिपोर्ट से यह साबित हो जाए कि उम्मीदवार किसी गड़बड़ी में शामिल नहीं था, लेकिन इससे न तो रद्द की गई भर्ती प्रक्रिया फिर से शुरू होती है और न ही बाद के भर्ती विज्ञापनों के तहत निकलने वाली खाली जगहों पर नियुक्ति का अधिकार मिलता है।जस्टिस पंकज पुरोहित उन उम्मीदवारों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जिन्होंने 2015...
सरकारी ज़मीन मामले में 12 साल तक कोई कार्रवाई न करने का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेवेन्यू अधिकारियों के खिलाफ़ क्रिमिनल और डिपार्टमेंटल कार्रवाई की मंज़ूरी दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को उन लापरवाह रेवेन्यू अधिकारियों के खिलाफ़ डिपार्टमेंटल और क्रिमिनल कार्रवाई करने की मंज़ूरी दी, जिन्हें सरकारी ज़मीन से जुड़े सिविल विवाद की जानकारी होने के बावजूद मामले की ठीक से पैरवी नहीं की और 12 साल बाद अपील दायर की। [2026 LiveLaw (MP) 231]जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने अपीलीय कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें राज्य की अपील में हुई देरी को माफ़ किया गया था। बेंच ने 'पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन' (जनता के विश्वास का सिद्धांत) पर ज़ोर देते हुए कहा कि राज्य...
'SC/ST Act के तहत प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं': हाईकोर्ट ने मारपीट के मामले में नर्मदापुरम बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को अग्रिम ज़मानत दी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम ज़िला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष को मारपीट के मामले में अग्रिम ज़मानत दी। इस मामले में उनके बेटे और चुने हुए कोषाध्यक्ष (जो अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय से है) शामिल है। कोर्ट ने पाया कि अध्यक्ष के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। [2026 LiveLaw (MP) 232]चूंकि दोनों पक्ष ज़िला बार एसोसिएशन के चुने हुए सदस्य हैं, इसलिए जस्टिस रामकुमार चौबे की बेंच ने मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की...
नाबालिग की गैर-कानूनी हिरासत का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी का डिमोशन सही ठहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) का डिमोशन सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि यह सज़ा गंभीर गलत व्यवहार को देखते हुए सही है। इस गलत व्यवहार में जूनियर कर्मचारियों द्वारा रात में 16 साल के एक लड़के को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखना और उसे छोड़ने के लिए गैर-कानूनी पैसे की मांग करना शामिल है। [2026 LiveLaw (MP) 230]अधिकारी की इस दलील को खारिज करते हुए कि उसकी सज़ा उसके साथ दोषी पाए गए जूनियर अधिकारियों की सज़ा की तुलना में बहुत ज़्यादा है, जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने ज़ोर दिया कि...
रेलवे कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सामान्य नोटिस से अनधिकृत कब्ज़ा करने वालों को नहीं हटा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि रेलवे की ज़मीन पर गैर-कानूनी कब्ज़ा करने वाले व्यक्ति को भी कानून की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सामान्य प्रशासनिक नोटिस के ज़रिए नहीं हटाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कानूनी मंज़ूरी के बिना किसी संपत्ति से ज़बरदस्ती बेदखल करना संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है, और बेदखली केवल कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन करके ही की जा सकती है।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें सीनियर सेक्शन इंजीनियर (वर्क्स), नॉर्दर्न रेलवे, देहरादून...
कस्टडी के मामलों में देरी से बच्चे का नुकसान होता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे की कस्टडी से जुड़े विवादों को सुलझाने में देरी से बच्चे का ही नुकसान होता है। कोर्ट ने जीवनसाथी को बच्चा सौंपने में देरी करने के लिए बार-बार कोर्ट जाने के चलन के खिलाफ भी चेतावनी दी।जस्टिस तेजस करिया और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने एक मां की अपील खारिज करते हुए यह बात कही। मां ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील की थी, जिसमें पिता को गर्मियों की छुट्टियों के दौरान अपनी नाबालिग बेटी की अंतरिम कस्टडी दी गई।कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कस्टडी के मामलों में बच्चे...
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मामला: CRPF जवान को जमानत, 15 लाख रुपये जमा कराने का आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूलने के आरोप में गिरफ्तार CRPF जवान और उसके कथित सहयोगी को जमानत दी।अदालत ने जमानत देते हुए CRPF जवान को ट्रायल कोर्ट में 15 लाख रुपये जमा कराने का निर्देश भी दिया। जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर की पीठ ने कहा कि आरोपियों के न्याय से भागने की संभावना नहीं है। उनके खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास भी सामने नहीं आया है। ऐसे में उन्हें लगातार जेल में रखने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता।अदालत ने अपने आदेश में कहा,“न्याय से फरार होने की...
निजी स्थान पर भी जातिसूचक अपमान सार्वजनिक दृष्टि में माना जा सकता है, यदि कई लोग मौजूद हों: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि किसी निजी स्थान पर की गई जातिसूचक टिप्पणी भी सार्वजनिक दृष्टि के दायरे में आ सकती है, यदि वहां अन्य लोग मौजूद हों और अपमानजनक शब्द सुन सकें।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने SC/ST Act से जुड़े मामलों की विशेष अदालत, त्रिशूर द्वारा अग्रिम जमानत अर्जी खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर यह फैसला सुनाया।अदालत ने कहा,“यह स्थापित विधिक सिद्धांत है कि 'सार्वजनिक...
ढाई साल की बच्ची से दुष्कर्म मामले में दोषी को 30 साल की कैद
ओडिशा की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने ढाई साल की मासूम बच्ची के साथ जघन्य दुष्कर्म (Aggravated Penetrative Sexual Assault) के मामले में एक 24 वर्षीय युवक को दोषी करार देते हुए 30 साल की सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) की सजा सुनाई है।भुवनेश्वर के फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (POCSO) के तदर्थ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Ad-hoc Additional Sessions Judge) सरोज कुमार साहू ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए आरोपी को कड़ी सजा से दंडित किया।अमरूद देने के बहाने ले गया था आरोपीअभियोजन पक्ष...
'नाबालिग लड़के भी सुरक्षित नहीं': अप्राकृतिक यौनाचार मामले में वचनानंद स्वामी की अग्रिम जमानत रद्द करगा हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने POCSO मामले में आरोपी वचनानंद स्वामी को मिली अग्रिम जमानत पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इस आदेश को रद्द करेगा और आरोपी को नियमित जमानत के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता देगा।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ शिकायतकर्ता की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सत्र अदालत के 2 मई के आदेश को चुनौती दी गई है।सत्र अदालत ने वचनानंद स्वामी को अग्रिम जमानत दी थी। उनके खिलाफ POCSO Act की धाराओं 4, 6, 8, 10 और 12 के तहत मामला दर्ज है। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश सीनियर...
अंतरिम आदेश से किसी पक्ष को असंगत नुकसान नहीं होना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाद लंबित रहने तक शराब दुकान को संचालन की अनुमति दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम आदेशों का उद्देश्य विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों पक्षों के हितों में संतुलन बनाए रखना होता है। ऐसे आदेश किसी एक पक्ष पर अनावश्यक या असंगत बोझ नहीं डालने चाहिए।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक शराब दुकान संचालक को आबकारी विभाग द्वारा स्वीकृत नए स्थान से दुकान चलाने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि दुकान का स्थानांतरण उसी आबकारी क्लस्टर के भीतर किया गया और अंतरिम रोक के कारण लाइसेंसधारी को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़...
फर्जी जमानत आदेश बनाकर ₹10 लाख से अधिक की ठगी का मामला: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वकील को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फर्जी जमानत आदेश तैयार कर शिकायतकर्ताओं से 10 लाख रुपये से अधिक की कथित ठगी करने के आरोपी एक वकील की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल वकील होना अग्रिम जमानत दिए जाने का आधार नहीं हो सकता। जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा,"सिर्फ इसलिए कि याचिकाकर्ता एक प्रैक्टिस करने वाले वकील है, उसे अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। किसी व्यक्ति का पेशा उसे कानून से ऊपर नहीं रखता और न ही अग्रिम जमानत पर विचार के लिए अलग मानक तय करता है।" अदालत ने कहा कि अग्रिम...
साइबर सेल के गैर-जिम्मेदार रवैये पर MP हाईकोर्ट की टिप्पणी, कंपनी का बैंक खाता अनफ्रीज करने का आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक कंपनी का बैंक खाता अनफ्रीज करने का निर्देश देते हुए विभिन्न राज्यों की साइबर क्राइम सेल के "खराब कार्यप्रदर्शन और गैर-जिम्मेदार रवैये" पर नाराजगी जताई।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की पीठ ने कहा कि अदालत के अंतरिम आदेश के बाद बैंक ने संबंधित साइबर सेल को ईमेल भेजे थे, लेकिन बेंगलुरु साइबर सेल को छोड़कर किसी भी एजेंसी ने जवाब नहीं दिया।याचिकाकर्ता कंपनी ने तर्क दिया कि उसका खाता बिना किसी नोटिस या सुनवाई के केवल साइबर सेल के निर्देशों पर फ्रीज कर दिया गया था। वहीं, बैंक ने कहा...
शादी का वादा शुरुआती बलात्कार के अपराध को खत्म नहीं कर सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की बलात्कार मामले में सजा बरकरार रखते हुए कहा कि प्रारंभिक जबरन यौन संबंध के बाद किया गया शादी का वादा आरोपी को आपराधिक दायित्व से मुक्त नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि बाद में दिए गए झूठे आश्वासनों ने केवल पीड़िता के शोषण को लंबा किया।जस्टिस चैताली चटर्जी (दास) ने आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा कि जांच में खामियां होने के बावजूद पीड़िता की विश्वसनीय गवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की, “केवल त्रुटिपूर्ण...
इलाज के लिए विदेश जाने का मामला: हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की अर्ज़ी पर तुरंत सुनवाई से किया इनकार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को तुरंत राहत देने से इनकार किया। उन्होंने अपनी आँख के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी, जिसकी पहले सर्जरी हो चुकी थी।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य के सामने मामला रखते हुए बनर्जी के वकील ने कहा कि इस अर्ज़ी पर तुरंत विचार करने की ज़रूरत है, क्योंकि कोर्ट ने पहले ही उन्हें मामले की कार्यवाही में अंतरिम सुरक्षा दी थी।वकील ने कहा,"माई लॉर्ड, यह मामला ज़रूरी है। इस कोर्ट ने उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी है। उनकी आँख की सर्जरी पहले हो...
हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच का अहम फैसला: अपील पेंडिंग होने की वजह से कैदियों की अस्थायी रिहाई को अनिश्चित काल के लिए रोका नहीं जा सकता
मद्रास हाईकोर्ट की 5 जजों की बेंच ने हाल ही में कहा कि छुट्टी (Leave) और अस्थायी रिहाई मानवीय गरिमा का हिस्सा हैं, जिन्हें सिर्फ़ अपील पेंडिंग होने की वजह से अनिश्चित काल के लिए रोका नहीं जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 276]कोर्ट ने कहा,"हमें फिर से यह दोहराना होगा कि जेल में बंद होने का मतलब यह नहीं है कि मौलिक अधिकार सिर्फ़ 'कागज़ी वादे' बनकर रह जाएं... इन अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 226 के तहत इस कोर्ट की शक्ति हमारे संविधान के मूल ढांचे का एक अटूट हिस्सा है... इसलिए हमारी...
भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली: जांच प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान
हमारी कानूनी प्रणाली का विकास और बदलाव सदियों, सभ्यताओं और ऐतिहासिक दौरों में लगातार होता रहा है। आज हम जिस देश को गर्व से देखते हैं, उसने समय के साथ कई कानूनी सिद्धांतों और संस्थागत ढांचों को अपनी मौजूदा कानूनी संरचना में शामिल किया है, जबकि समाज की बदलती ज़रूरतों के हिसाब से अनुपयुक्त माने जाने वाले कई अन्य को छोड़ भी दिया है। इस तरह का अनुकूलन और बदलाव असल में कानून की प्रकृति में निहित गतिशीलता को दर्शाता है।भारत की मौजूदा आपराधिक न्याय प्रणाली में, खासकर जांच प्रक्रियाओं के संबंध में,...
WhatsApp से नोटिस भेजना कानूनी रूप से मान्य नहीं: BNSS की धारा 35 और अनौपचारिक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस की सीमाएं
क्या होता है जब किसी व्यक्ति को इसलिए गिरफ्तार कर लिया जाता है, क्योंकि उसने कोर्ट द्वारा भेजे गए नोटिस का पालन नहीं किया, जबकि उसे वह नोटिस मिला ही नहीं था (इसके विपरीत, कोर्ट द्वारा वारंट तामील करने की प्रक्रिया अलग होती है)? यही मुद्दा सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम CBI मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुख्य आधार है।जब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) लागू हुई तो कई पुलिस अधिकारियों ने धारा 35 के तहत नोटिस भेजने के लिए WhatsApp और ईमेल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इस तरीके के पीछे की...
व्यक्तिगत सुविधा से ऊपर राष्ट्रीय हित: राजस्थान हाईकोर्ट ने माता-पिता की मेडिकल दिक्कतों के बावजूद IAF अधिकारी का ट्रांसफर सही ठहराया
राजस्थान हाईकोर्ट ने भारतीय वायु सेना (IAF) के स्क्वाड्रन लीडर के ट्रांसफर को सही ठहराया, जिन्होंने अपने माता-पिता की गंभीर मेडिकल स्थिति के कारण इसे चुनौती दी थी। [2026 LiveLaw (Raj) 254]कोर्ट ने माना कि मानवीय आधार या सहानुभूतिपूर्ण परिस्थितियों को सशस्त्र बलों के संगठनात्मक अनुशासन, ऑपरेशनल तैयारी और सेवा की ज़रूरतों जैसे अहम पहलुओं से ऊपर नहीं रखा जा सकता।कोर्ट ने कहा,"हालांकि ट्रांसफर ऑर्डर की वैधता या निष्पक्षता की जांच करते समय सहानुभूतिपूर्ण परिस्थितियां निश्चित रूप से एक अहम कारक हो...




















