हाईकोर्ट
विदेश यात्रा का अधिकार मौलिक मानव अधिकार: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रिश्वत मामले में दोषी पूर्व DSP को दी अनुमति
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार एक बुनियादी मानव अधिकार है। अदालत ने रिश्वत मामले में दोषी ठहराई गई पूर्व DSP को एक माह के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दी।जस्टिस अमन चौधरी की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। आवेदक 61 वर्षीय पूर्व पुलिस अधिकारी है। उसने स्पेन, स्विट्जरलैंड और चेक गणराज्य की यात्रा के लिए 10 अप्रैल 2026 से 10 मई 2026 तक की अनुमति मांगी थी।आवेदक की ओर से बताया गया कि ट्रायल के दौरान भी उन्हें दो बार विदेश यात्रा की अनुमति दी गई...
पिता की मृत्यु के बाद हुआ तलाक तो बेटी को नहीं मिलेगी पारिवारिक पेंशन: त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी बेटी का तलाक उसके पेंशनभोगी पिता की मृत्यु के बाद होता है तो वह पारिवारिक पेंशन की हकदार नहीं होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन पाने की पात्रता पिता की मृत्यु के समय ही तय होती है बाद में प्राप्त स्थिति के आधार पर नहीं।जस्टिस एस. दत्ता पुरकायस्थ ने कहा,“नियमों के अनुसार तलाकशुदा बेटी को पारिवारिक पेंशन का अधिकार है, लेकिन यह शर्त जरूरी है कि पिता की मृत्यु के समय वह तलाकशुदा हो। पेंशन का अधिकार उसी समय उत्पन्न होता है।” मामले...
क्रीमी लेयर तय करने में केवल माता-पिता की आय ही मायने रखती है: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि क्रीमी लेयर की स्थिति तय करते समय केवल अभ्यर्थी के माता-पिता की आय को ही देखा जाएगा। अभ्यर्थी की स्वयं की आय या उसके पति की आय (यदि वह क्लास-1 अधिकारी नहीं है) इस निर्धारण में प्रासंगिक नहीं मानी जाएगी।जस्टिस आशीष श्रोती की पीठ ने कहा,“क्रीमी लेयर की स्थिति निर्धारित करते समय केवल माता-पिता की आय ही देखी जानी चाहिए। अभ्यर्थी की स्वयं की आय या उसके पति की आय, यदि वह क्लास-1 अधिकारी नहीं है, प्रासंगिक नहीं है।” मामला MPPSC की...
वकीलों के लिए व्यापक मेडिकल इंश्योरेंस योजना बनाने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज की PIL
एक अहम कदम उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने का निर्देश दिया, ताकि पूरे उत्तर प्रदेश राज्य में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के लिए एक व्यापक इंश्योरेंस योजना बनाने की संभावनाओं को तलाशा जा सके।यह कदम तब उठाया गया, जब कोर्ट ने ऐसे कई मामले देखे जिनमें वकीलों को गंभीर और जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी के दौरान इलाज करवाने में भारी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने यह आदेश 2024 में दायर एक PIL...
मुस्लिम पुरुष द्वारा 'दूसरी' शादी करना IPC की धारा 494 के तहत द्विविवाह नहीं, इस्लाम में बहुविवाह की अनुमति है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि कोई मुस्लिम पुरुष, जो अपनी पहली शादी के रहते हुए 'दूसरी' शादी करता है, उस पर IPC की धारा 494 के तहत द्विविवाह का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच ने कहा कि IPC की धारा 494 उन मामलों पर लागू होती है, जहां पहली शादी के रहते हुए दूसरी शादी अमान्य हो जाती है।हालांकि, बेंच ने यह भी कहा कि चूंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत एक मुस्लिम पुरुष एक से ज़्यादा पत्नियां रख सकता है, इसलिए दूसरी शादी सिर्फ़ इस आधार पर अमान्य नहीं हो जाती कि पहली शादी अभी...
'जांच में गंभीर चूक': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग के रेप के मामले में 11 साल जेल में बिताने वाले व्यक्ति को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में ऐसे व्यक्ति को बरी किया, जिसने 2010 के एक मामले में, जिसमें 14 साल की लड़की के साथ रेप का आरोप था, 11 साल जेल में बिताए। बेंच ने टिप्पणी की कि पुलिस ने एक "गंभीर चूक" की थी, क्योंकि वे पीड़िता के शरीर पर मिले मानव वीर्य (semen) का मिलान आरोपी से करने में नाकाम रहे थे।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने 2018 के उस ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें अपीलकर्ता को IPC की धारा 376 के तहत आजीवन कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सज़ा...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़र्ज़ी PhD धोखाधड़ी FIR में राहत से किया इनकार, 'रिश्वत से कुछ भी खरीदा जा सकता है' पर लगाई फटकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में आम लोगों के बीच बढ़ती इस धारणा पर कड़ी आपत्ति जताई कि रिश्वत देकर कुछ भी खरीदा जा सकता है, जिसमें अकादमिक डिग्रियां और यूनिवर्सिटी की नौकरियां भी शामिल हैं।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने इस तरह महिला के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार किया। इस महिला पर एक उम्मीदवार से PhD डिग्री और असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के बहाने ₹22 लाख से ज़्यादा की धोखाधड़ी करने का आरोप है।एक सख़्त आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि FIR में लगाए गए आरोप समाज में एक बहुत...
'साइबर क्राइम साइलेंट वायरस जैसा': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में आरोपी की अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि देश में साइबर क्राइम "साइलेंट वायरस की तरह काम करता है," जो चुपके से फैलता है, नुकसान पहुंचाता है और समाज पर ऐसा असर डालता है, जो सिर्फ़ पैसों के नुकसान से कहीं ज़्यादा गहरा होता है।समाज और वित्तीय संस्थानों पर ऐसे अपराधों के दूरगामी प्रभावों को देखते हुए कोर्ट ने 23 साल के एक युवक की अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी खारिज की। इस युवक पर एक महिला को "डिजिटल अरेस्ट" करने का आरोप था, जिसमें महिला से ₹6 करोड़ से ज़्यादा की रकम जमा करने के लिए कहा गया।जस्टिस सुमीत...
ईरानी मिसाइल हमले में नाविक की मौत: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अवशेषों के DNA टेस्ट की याचिका पर DG शिपिंग से जवाब मांगा
बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के तहत स्थापित डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग को निर्देश दिया कि वह एक याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करे। इस याचिका में एक भारतीय नाविक के अवशेषों के DNA टेस्ट की मांग की गई, जिसकी ओमान तट के पास ईरानी मिसाइल हमले में मौत हो गई थी।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की खंडपीठ को बताया गया कि MKD व्योम नामक जहाज, जिस पर दीक्षित सोलंकी इंजन रूम में 'ऑयलर' के तौर पर काम करते थे, वहां से केवल कुछ "जली हुई...
इनक्वेस्ट रिपोर्ट में आरोपी का नाम जरूरी नहीं, सिर्फ मौत का कारण दर्ज करना उद्देश्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत तैयार की जाने वाली इनक्वेस्ट रिपोर्ट का उद्देश्य केवल मृत्यु के प्रथमदृष्टया कारण और चोटों का विवरण दर्ज करना है, न कि आरोपी का नाम लिखना।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने यह टिप्पणी हत्या के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए की।मामले में आरोपी ने दलील दी थी कि उसे एक अंधे हत्या मामले में झूठा फंसाया गया। प्रारंभिक पुलिस डायरी और अस्पताल रिकॉर्ड में हमलावर को अज्ञात बताया गया। आरोपी की ओर से यह भी...
धमकी का सामना कर रहे विवाहित जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करे राज्य: उत्तराखंड हाईकोर्ट का निर्देश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी विवाहित जोड़े को खतरे की आशंका हो तो राज्य की जिम्मेदारी है कि वह उनकी सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करे। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराए।जस्टिस राकेश थपलियाल ने यह अंतरिम आदेश दंपत्ति की याचिका पर दिया जिसमें उन्होंने शांतिपूर्वक वैवाहिक जीवन जीने के लिए सुरक्षा की मांग की थी।याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का रुख करते हुए अपनी जान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए पुलिस सुरक्षा...
करंट हादसे में बिजली विभाग की सख्त जिम्मेदारी, लापरवाही साबित करना जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि करंट लगने (इलेक्ट्रोक्यूशन) के मामलों में बिजली विभाग की सख्त जिम्मेदारी तय होती है और पीड़ित को मुआवजा पाने के लिए विभाग की लापरवाही साबित करने की आवश्यकता नहीं है।जस्टिस संदीप जैन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया,“ऐसे मामलों में सख्त जिम्मेदारी का सिद्धांत लागू होता है और वादी को यह साबित करने की जरूरत नहीं कि बिजली लाइन के रखरखाव में विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही थी। उसे केवल यह साबित करना है कि उसे करंट से चोट लगी।”मामला एक मजदूर से जुड़ा था,...
लोन की समयपूर्व वसूली विवाद में सिविल कोर्ट का अधिकार नहीं, केवल NCLT ही करेगा फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम निर्णय देते हुए कहा कि लोन की समयपूर्व वसूली (प्रीमैच्योर रिपेमेंट) से जुड़े विवादों का निपटारा सिविल अदालत नहीं कर सकती। ऐसे मामलों में अधिकार केवल राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) को है।जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 430 स्पष्ट रूप से सिविल अदालतों के अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाती है, जहां मामला NCLT के अधिकार क्षेत्र में आता है।अदालत ने कहा, “जहां किसी मामले का निर्णय NCLT द्वारा किया जाना है वहां किसी भी अदालत को हस्तक्षेप करने या...
Bihar Prohibition Act | सुप्रीम कोर्ट ने ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट को अंतिम प्रमाण नहीं कहा: पटना हाईकोर्ट की स्पष्टता, राज्य की अपील खारिज
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कभी यह नहीं कहा कि ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट शराब सेवन का निर्णायक (अंतिम) प्रमाण नहीं है। साथ ही अदालत ने राज्य की अपील खारिज करते हुए पुलिस अधिकारी की बर्खास्तगी रद्द करने का आदेश बरकरार रखा।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मामला एक सब-इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी से जुड़ा था, जिस पर ड्यूटी के दौरान शराब पीने का आरोप था और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई।राज्य का मामला मुख्य...
80 दिन काम की शर्त बताकर मातृत्व अवकाश से इनकार नहीं कर सकता राज्य: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने संस्थानों में कार्यरत महिलाओं को 80 दिन काम की शर्त का हवाला देकर मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य का दायित्व है कि वह महिलाओं के लिए कल्याणकारी उपाय सुनिश्चित करे।जस्टिस विशाल धगट की पीठ ने कहा,“मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 5(2) में 80 दिन काम करने की शर्त का प्रावधान है, लेकिन यह शर्त राज्य सरकार के संस्थानों पर लागू नहीं होगी। राज्य को अपने नागरिकों के लिए कल्याणकारी कदम उठाने...
वैवाहिक विवाद से जुड़े मामूली आपराधिक मामले के आधार पर नौकरी से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि केवल वैवाहिक विवाद से जुड़े आपराधिक मामले के लंबित होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नौकरी देने से इनकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस करुणेश सिंह पवार की पीठ ने स्पष्ट किया कि सामान्य और अस्पष्ट आरोपों वाले ऐसे मामलों को नियुक्ति से वंचित करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।अदालत ने कहा,“वैवाहिक विवाद से उत्पन्न सामान्य आरोपों पर आधारित आपराधिक मामले का लंबित होना याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने से इनकार करने का वैध आधार नहीं है।”मामले में याचिकाकर्ता ने...
ऐतिहासिक किताबों से संपत्ति का हक साबित नहीं किया जा सकता: जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि ऐतिहासिक किताबों या दस्तावेजों के आधार पर किसी संपत्ति का मालिकाना हक (title) साबित नहीं किया जा सकता।जस्टिस संजय धर की पीठ ने कहा कि Indian Evidence Act, 1872 की धारा 57 के तहत कोर्ट केवल “सार्वजनिक इतिहास” (public history) के मामलों में संदर्भ पुस्तकों का सहारा ले सकती है, न कि निजी या स्थानीय विवादों में।क्या था मामला?मामला किश्तवाड़ स्थित दो दरगाहों—जियारत फरीद-उद-दीन साहिब और जियारत अस्रार-उद-दीन साहिब—की संपत्तियों से...
19 वर्षीय महिला को अपनी पसंद के साथी के साथ रहने की इजाजत, पति और माता-पिता दोनों अलग: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में 19 वर्षीय विवाहित महिला को अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने की अनुमति दी। महिला ने अपने 40 वर्षीय पति के साथ रहने से इनकार करते हुए उसके द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेन्द्र यादव की खंडपीठ ने महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (personal liberty) को प्राथमिकता देते हुए उसे अपने साथी अनुज (प्रतिवादी) के साथ रहने की अनुमति दी।क्या था मामला?पति ने हैबियस कॉर्पस याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी को उसके प्रेमी ने...
शराब नीति मामला: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग वाली केजरीवाल की याचिका पर नोटिस जारी
दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की उस अर्जी पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने शराब नीति मामले से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने की मांग की थी।दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को CBI को नोटिस जारी किया। यह नोटिस दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल की उस अर्जी पर जारी किया गया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के मामले से हटने की मांग की थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अभी CBI की उस याचिका पर सुनवाई कर रही हैं, जिसमें कथित शराब नीति...
वकीलों के आपसी विवाद में ट्रिब्यूनल का हस्तक्षेप अस्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 से जुड़े मुआवजा मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि वकीलों के आपसी विवाद में ट्रिब्यूनल का हस्तक्षेप बिल्कुल भी उचित नहीं है।मामले में वर्ष 2019 में लोक अदालत के आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को अब तक मुआवजा राशि नहीं मिली थी। वर्ष 2026 में MACT सुल्तानपुर के पीठासीन अधिकारी ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता के पूर्व वकील को सुने बिना राशि जारी नहीं की जा सकती। इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।जस्टिस जसप्रीत...



















