हाईकोर्ट

क्षत्रिय करणी सेना के प्रमुख कहीं भी आने-जाने के लिए आज़ाद, लेकिन किसी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उन्हें कानून का पालन करना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (25 अगस्त) को कहा कि क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत कहीं भी आने-जाने के लिए आज़ाद हैं, लेकिन अगर वह किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें कानून के अनुसार ही ऐसा करना होगा।कोर्ट ने यह आदेश क्षत्रिय करणी सेना/अखंड करणी पार्टी के अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत को पेश करने की मांग वाली 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया।दलील दी गई कि वह...

राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी अदालतों को अपनी बिल्डिंग में खामियों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सुरक्षा देने से रोका

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की सभी अदालतों को जोधपुर में अपनी बिल्डिंग में स्ट्रक्चरल खामियों (बनावट में कमी) के लिए कथित तौर पर ज़िम्मेदार किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को सुरक्षा देने से रोक दिया।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराना की डिवीज़न बेंच ने कहा कि अगर सुरक्षा देने का कोई आदेश दिया जाता है तो उसे तब तक बेअसर माना जाएगा जब तक कि उसे कोर्ट की डिवीज़न बेंच या सुप्रीम कोर्ट ने पास न किया हो।आगे कहा गया,"सुरक्षा के मकसद से पास किया गया कोई भी आदेश, या ऐसा कोई आदेश जिससे ज़िम्मेदार...

दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना नदी में बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज बहने से रोकने के लिए 25 इंडस्ट्रियल इलाकों के रीडेवलपमेंट का समर्थन किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने DDA को निर्देश दिया कि वह शहर के 25 नॉन-कन्फर्मिंग इंडस्ट्रियल इलाकों के रीडेवलपमेंट पर दूसरी अथॉरिटीज के साथ बैठक करे। कोर्ट ने कहा कि यह रीडेवलपमेंट ज़रूरी है ताकि यह पक्का किया जा सके कि बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज का पानी यमुना नदी में न जाए।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि कोर्ट के कई आदेशों के बाद इन 25 नॉन-कन्फर्मिंग इंडस्ट्रियल इलाकों के रीडेवलपमेंट का काम शुरू होना था।इन इलाकों के लिए प्लान बनाने वाली...

बॉम्बे हाईकोर्ट का केंद्र को सुझाव- आधार एक्ट में बदलाव करे ताकि ​​नकली पहचान का इस्तेमाल करने वाले विदेशी नागरिकों को वापस भेजा जा सकें

भारत की सीमाओं में घुसपैठ करने वाले और अपनी पहचान छिपाने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड जैसे ज़रूरी दस्तावेज़ धोखाधड़ी से हासिल करने वाले विदेशियों के 'चिंताजनक पैटर्न' पर ध्यान देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार और यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) को आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) एक्ट, 2016 में बदलाव करने पर विचार करने का आदेश दिया। यह आदेश ऐसे विदेशी नागरिकों का तुरंत पता लगाने और उन्हें वापस भेजने के लिए दिया गया, जो भारत में...

अर्ध-न्यायिक आदेश रद्द करने से ही उस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती, जिसने उसे पारित किया था: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि रिट कोर्ट द्वारा किसी अर्ध-न्यायिक आदेश रद्द करने से ही उस अधिकारी के खिलाफ 'ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968' के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का आधार नहीं बनता, जिसने वह आदेश पारित किया। ऐसी कार्यवाही का निर्देश तभी दिया जा सकता है जब स्पष्ट, ठोस और सत्यापन योग्य तथ्य कदाचार को साबित करें।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कहा,"हम पाते हैं कि किसी सफल रिट याचिका के मामले में, जहां निचली अथॉरिटी का आदेश रद्द कर दिया जाता है तो केवल...

शिकायत के बाद लेकिन फ़ैसले से पहले जारी स्पष्टीकरण वाला सर्कुलर, लंबित पब्लिक टेंडर शिकायत पर लागू होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई स्पष्टीकरण वाला सर्कुलर (Clarificatory Circular) जो किसी सह-बोलीदाता (Co-Bidder) के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज होने के बाद, लेकिन उस शिकायत पर अंतिम फ़ैसला होने से पहले लागू होता है, वह आम तौर पर लंबित शिकायत पर लागू होता है।कोर्ट ने कहा कि ऐसा सर्कुलर तब लागू नहीं होगा, जब यह किसी ऐसे अधिकार को प्रभावित करे जो पहले ही तय हो चुका हो, या जब यह साबित हो जाए कि इसे किसी खास शिकायत को नाकाम करने के लिए बनाया गया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने...

विभागों को शोक-संतप्त परिवारों का मार्गदर्शन करना चाहिए कि पात्र आश्रित अनुकंपा नियुक्ति का दावा कैसे कर सकते हैं: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का निर्णय लेने वाले सक्षम अधिकारी को तकनीकी और कठोर दृष्टिकोण के बजाय सहानुभूतिपूर्ण और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। [2026 LiveLaw (MP) 344]इस बात पर जोर देते हुए कि अक्सर मृतक के परिवार को गलत सलाह मिलती है, एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा;"अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति से संबंधित मामलों में सक्षम अधिकारी को कठोर और तकनीकी रवैये के बजाय वास्तविक सहानुभूति और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। अक्सर मृतक के...

हाईकोर्ट ने लखनऊ में ई-रिक्शा ट्रैफिक की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई, सरकार से नीति बनाने को कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने लखनऊ में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि शहर की सड़कों पर इनकी बढ़ती मौजूदगी से "ट्रैफिक की बड़ी समस्या" पैदा हो रही है और सरकार इस मुद्दे पर "सो नहीं सकती"।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कहा कि यह मुद्दा 'गंभीर' है और एक सही पॉलिसी बनाकर इसे जल्द-से-जल्द हल करने की ज़रूरत है।कोर्ट लखनऊ में ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रहा था।सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस का एक अलग कैडर...

बेदखली के खिलाफ अपील में देरी को माफ़ करने से पहले भी किरायेदार को अंतरिम सुरक्षा दी जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलीय अदालत की अपील में अंतरिम सुरक्षा देने की शक्ति केवल इसलिए खत्म नहीं होती कि उस अपील के साथ देरी को माफ़ करने (Condonation of Delay) की अर्ज़ी पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि प्रस्तावित अपील के विषय-वस्तु (Subject Matter) को सुरक्षित रखने का आदेश, उस अपील को सुनने या उस पर फैसला करने के आदेश से अलग होता है।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा,"देरी को माफ़ करने की अर्ज़ी का लंबित होना, अपने आप में अपीलीय अदालत को उचित सुरक्षात्मक आदेश पारित...

झारखंड हाईकोर्ट ने 2022 में लातेहार कोर्ट पर हुए हमले के मामले में शुरू की गई कार्यवाही बंद की, न्यायिक अधिकारियों के लिए सुरक्षा का निर्देश दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार सिविल कोर्ट में 2022 में हुए हमले और तोड़-फोड़ के बाद स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका (PIL) का निपटारा किया। कोर्ट ने कहा कि राज्य के सभी जिलों में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों के लिए एक जैसी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनाक और जस्टिस राजेश शंकर की डिवीजन बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के उपाय करने के लिए अधिकारियों को लातेहार जैसी किसी और घटना का इंतजार करने की कोई वजह नहीं है।यह स्वतः संज्ञान कार्यवाही 11...

नाबालिग के आंसू पोंछना या बिना सेक्सुअल इरादे के उसका हाथ पकड़ना सेक्सुअल असॉल्ट नहीं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आम मानवीय व्यवहार के दौरान होने वाला कोई भी संपर्क - जैसे हाथ पकड़ना, कंधे को छूना, आंसू पोंछना और किसी को सांत्वना देना - अपने आप में सेक्सुअल नहीं माना जाएगा। किसी सेक्सुअल इरादे का पता आसपास की परिस्थितियों से ही लगाया जा सकता है। [2026 LiveLaw (Mad) 408]जस्टिस आर विजयकुमार ने कॉन्स्टेबल के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द किया। उस पर POCSO Act के तहत अपराधों का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि उस व्यक्ति ने केवल उस नाबालिग लड़की को सांत्वना दी थी, जिसके साथ उसका...

पति को उसकी आश्रित विधवा माँ से अलग करने के लिए पत्नी का ज़ोर देना क्रूरता: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी का यह ज़ोर देना कि उसका पति अपनी आश्रित विधवा माँ से रिश्ते तोड़ ले और अलग रहे, इस मामले के तथ्यों के आधार पर मानसिक क्रूरता माना जाएगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अलग घर में रहने की पत्नी की मांग का आधार उनके नाबालिग बेटे के साथ छेड़छाड़ का आरोप है, जो पूरी तरह से बेबुनियाद साबित हुआ।जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतिम भट्टाचार्य की डिवीज़न बेंच ने कहा कि हालांकि अलग घर में रहने की मांग को अकेले क्रूरता नहीं माना जा सकता, लेकिन पत्नी के व्यवहार को उस खास...

गार्जियन बनने के लिए अयोग्य ठहराये जाने तक पिता को नाबालिग बेटी की कस्टडी देने से मना नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 की धारा 6 के तहत अपनी नाबालिग बेटी का स्वाभाविक गार्जियन (अभिभावक) होने के नाते पिता को उसकी कस्टडी देने से तब तक मना नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसे गार्जियन बनने के लिए अयोग्य न साबित कर दिया जाए।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की बेंच ने कहा,"हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 की धारा 6 के प्रावधानों को देखते हुए बच्चों की कस्टडी का मुख्य अधिकार पिता का होता है; उसे नाबालिग बच्चे की कस्टडी से तब तक...

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत फर्म को हमेशा के लिए प्रतिबंधित करना, अनुच्छेद 144 की घोर उपेक्षा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना कि राज्य प्राधिकारी जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के तहत किसी फर्म को अनिश्चित काल के लिए काली सूची में डालते हैं, वह संविधान के अनुच्छेद 144 के तहत संवैधानिक जनादेश की घोर अवहेलना करते हैं।अनुच्छेद 144 में प्रावधान है कि भारत के क्षेत्र में सभी प्राधिकरण, नागरिक और न्यायिक, सुप्रीम कोर्ट की सहायता में कार्य करेंगे। न्यायालय ने माना कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधिकारिक तौर पर घोषित कानून, उस आदेश के आधार पर, राज्य और उसके अधिकारियों पर बाध्यकारी है।इरूसियन...

ऑटोरिक्शा और कैब परमिट के लिए मराठी भाषा की जानकारी अनिवार्य करने वाले फ़ैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती

महाराष्ट्र सरकार ने सभी ऑटोरिक्शा, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों के लिए 'मराठी भाषा की कामकाजी जानकारी' ज़रूरी करने के अपने फ़ैसले को 'सख्ती' से लागू करना शुरू किया। इसके कुछ दिनों बाद ही बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। इस याचिका में फ़ैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया गया कि जो 'भारतीय नागरिक' अपनी रोज़ी-रोटी कमाने के लिए महाराष्ट्र आते हैं, उनके साथ 'बाहरी' लोगों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।यह PIL चार उबर (Uber) कैब ड्राइवरों ने दायर की। वे राज्य के गृह (परिवहन) विभाग की...

धारा 498ए में दहेज की मांग होना जरूरी नहीं, संपत्ति की कोई भी अवैध मांग क्रूरता के दायरे में: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत अपराध के लिए दहेज की मांग का आरोप होना जरूरी नहीं है। किसी महिला को संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की किसी भी अवैध मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से किया गया उत्पीड़न भी इस धारा के तहत क्रूरता माना जा सकता है।जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने पति और उसके परिवार के सदस्यों को धारा 498ए और 323 के तहत दोषी ठहराने वाले...

उचित समय का नोटिस दिए बिना जमीन का अस्थायी अधिग्रहण नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रद्द किए अधिग्रहण आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 की धारा 81 के तहत किसी जमीन का अस्थायी अधिग्रहण उचित समय पहले नोटिस दिए बिना नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी व्यक्ति को उसकी जमीन के इस्तेमाल से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस रविंद्र मैठाणी ने मेसर्स डेक्कन चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला...

बॉम्बे हाईकोर्ट: RTI के तहत निजी संस्था से जानकारी जुटाकर देना सार्वजनिक प्राधिकरण की जिम्मेदारी नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत कोई सार्वजनिक प्राधिकरण निजी संस्था से जानकारी हासिल कर RTI आवेदक को उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं है। हालांकि, उसके पास आवेदन के समय जो जानकारी उपलब्ध है, उसे कानून के अनुसार देना उसकी जिम्मेदारी है।जस्टिस मनीष पिताले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की खंडपीठ ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की ओर से दायर याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई की। याचिकाओं में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के उन...