हाईकोर्ट

दावा करने वाले का लापरवाही से गाड़ी चलाने का अपराध स्वीकार करना लापरवाही की बात मानना ​​है, जिससे वह दुर्घटना के मुआवज़े का हकदार नहीं रहता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
दावा करने वाले का लापरवाही से गाड़ी चलाने का अपराध स्वीकार करना लापरवाही की बात मानना ​​है, जिससे वह दुर्घटना के मुआवज़े का हकदार नहीं रहता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी मोटर दुर्घटना से जुड़े आपराधिक मामले में दावा करने वाले ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है तो इसका मतलब यह है कि उसने मान लिया है कि दुर्घटना उसकी लापरवाही और तेज़ी से गाड़ी चलाने के कारण हुई थी। कोर्ट ने कहा कि भले ही आपराधिक मामले में दर्ज निष्कर्षों का असर अलग हो सकता है, लेकिन दावा करने वाले का खुद अपनी मर्ज़ी से अपराध स्वीकार करना उसे दुर्घटना के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार ठहराने का आधार बन सकता है।जस्टिस रवींद्र मैठाणी मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 140 और...

महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 41A के तहत असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर ट्रस्ट के चल रहे चुनावों में दखल नहीं दे सकते: हाईकोर्ट
महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 41A के तहत असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर ट्रस्ट के चल रहे चुनावों में दखल नहीं दे सकते: हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट, 1950 की धारा 41A के तहत मिली शक्ति केवल पब्लिक ट्रस्ट के सही कामकाज के लिए निर्देश जारी करने तक सीमित है और इसका इस्तेमाल चल रही चुनाव प्रक्रिया में दखल देने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद असिस्टेंट चैरिटी कमिश्नर धारा 41A का इस्तेमाल करके चुनाव नोटिस को रद्द नहीं कर सकते या इस आधार पर चुनाव नहीं रोक सकते कि मौजूदा मैनेजिंग कमेटी की वैधता पर संदेह है।जस्टिस अनिल एस. किलोर और राज डी....

जांच में देरी भ्रष्टाचार की FIR रद्द करने का आधार नहीं, जब तक आरोपी निष्पक्ष सुनवाई में बाधा साबित न करे: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
जांच में देरी भ्रष्टाचार की FIR रद्द करने का आधार नहीं, जब तक आरोपी निष्पक्ष सुनवाई में बाधा साबित न करे: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) के तहत दर्ज FIR को सिर्फ़ जांच या चार्ज-शीट दाखिल करने में हुई देरी के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता, जब तक कि आरोपी यह साबित न कर दे कि इस देरी से निष्पक्ष सुनवाई पर बुरा असर पड़ा है।धर्मशाला नगर समिति द्वारा कचरा कंटेनर खरीदने में कथित अनियमितताओं से जुड़ी भ्रष्टाचार की कार्यवाही रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में जनहित शामिल होता है और इन्हें आमतौर पर केवल समय...

दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: 30 सितंबर तक नए चुनाव कराए AITA, संविधान में बदलाव के लिए तय की समय-सीमा
दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश: 30 सितंबर तक नए चुनाव कराए AITA, संविधान में बदलाव के लिए तय की समय-सीमा

दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) को निर्देश दिया कि वह अपने संविधान में बदलाव करे और 30 सितंबर, 2026 तक नए चुनाव कराए।जस्टिस तेजस करिया और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के उस पहले के आदेश में बदलाव किया, जिसमें सितंबर 2024 में हुए चुनाव के नतीजे घोषित करने की अनुमति दी गई।कोर्ट ने यह अंतरिम निर्देश तब जारी किए, जब वह AITA और पूर्व भारतीय टेनिस खिलाड़ी सोमदेव किशोर देववर्मन की क्रॉस-अपील पर सुनवाई कर रही थी। ये अपीलें फेडरेशन के कामकाज से जुड़े सिंगल जज के फैसले के...

सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी कंपनी को निविदाओं से बाहर नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने NTPC का आदेश रद्द किया
सुनवाई का अवसर दिए बिना किसी कंपनी को निविदाओं से बाहर नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट ने NTPC का आदेश रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कंपनी को भविष्य की निविदाओं में भाग लेने से रोकने वाला आदेश, जो व्यवहारिक रूप से प्रतिबंध या काली सूची में डालने जैसा प्रभाव रखता हो, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना जारी नहीं किया जा सकता।जस्टिस तेजस करिया और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने सौर मॉड्यूल निर्माता कंपनी ग्रू एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ NTPC रिन्यूएबल एनर्जी द्वारा जारी निलंबन आदेश रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।अदालत ने कहा कि कारोबारी गतिविधियों से निलंबन के आदेश के गंभीर नागरिक और...

पंचनामा रिपोर्ट पर गवाह के हस्ताक्षर न होने से उसकी गवाही खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पंचनामा रिपोर्ट पर गवाह के हस्ताक्षर न होने से उसकी गवाही खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1998 के एक चर्चित हत्या मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर किसी प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता कि उसके हस्ताक्षर पंचनामा रिपोर्ट या अन्य पुलिस दस्तावेजों पर नहीं हैं।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने कहा कि कानून में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं है कि पंचनामा रिपोर्ट में FIR का विवरण, आरोपियों के नाम, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के नाम या उनके बयानों का सार दर्ज...

ममता बनर्जी की चुनाव याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की मुहर, EVM-VVPAT और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
ममता बनर्जी की चुनाव याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की मुहर, EVM-VVPAT और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को ममता बनर्जी की उस चुनाव याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया, जिसमें उन्होंने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से सुवेंदु अधिकारी के निर्वाचन को चुनौती दी। अदालत ने माना कि याचिका में प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य आधार मौजूद हैं और यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की आवश्यकताओं को पूरा करती है।जस्टिस गौरांग कांत ने याचिका को प्रारंभिक चरण में खारिज करने से इनकार करते हुए निर्वाचन आयोग, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी...

महा वैल्यू लिखना अपने आप में भ्रामक नहीं, बिना ठोस सबूत किसी उत्पाद को गलत ब्रांडिंग वाला नहीं कहा जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
महा वैल्यू लिखना अपने आप में भ्रामक नहीं, बिना ठोस सबूत किसी उत्पाद को गलत ब्रांडिंग वाला नहीं कहा जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी खाद्य उत्पाद के पैकेट पर "महा वैल्यू" लिख देना मात्र से उसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत गलत ब्रांडिंग वाला उत्पाद नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो जाए कि उक्त शब्द उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला, भ्रामक या धोखापूर्ण है, तब तक गलत ब्रांडिंग का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।जस्टिस रवींद्र मैठाणी ने यह फैसला पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड की अपील पर सुनाते हुए दिया। कंपनी ने उन...

मुबारात से हुए तलाक को मान्यता देना फैमिली कोर्ट का दायित्व: गुजरात हाईकोर्ट ने पति-पत्नी का विवाह समाप्त घोषित किया
मुबारात से हुए तलाक को मान्यता देना फैमिली कोर्ट का दायित्व: गुजरात हाईकोर्ट ने पति-पत्नी का विवाह समाप्त घोषित किया

गुजरात हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि शरीयत कानून के अधीन आने वाले मुस्लिम पति-पत्नी आपसी सहमति से 'मुबारात' के माध्यम से विवाह समाप्त करते हैं तो फैमिली कोर्ट का दायित्व है कि वह उस समझौते को स्वीकार करे और वैवाहिक संबंध समाप्त होने की घोषणा करे।जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर. टी. वच्छाणी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक पति की अपील पर सुनवाई करते हुए की, जिसने फैमिली कोर्ट द्वारा उसकी याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।मामले के अनुसार पति और पत्नी का विवाह 21 फरवरी 2015 को...

10 साल से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- त्वरित न्याय के लिए सभी पक्षों को निभानी होगी जिम्मेदारी
10 साल से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा- त्वरित न्याय के लिए सभी पक्षों को निभानी होगी जिम्मेदारी

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लगभग दस वर्षों से न्यायिक हिरासत में बंद एक हत्या के आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि त्वरित सुनवाई का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुकदमे के जल्द पूरा होने की संभावना न होने पर किसी विचाराधीन कैदी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।जस्टिस आलोक महरा ने यह आदेश हत्या और शस्त्र अधिनियम से जुड़े एक मामले में नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।मामले के अनुसार...

पेंशन कर्मचारी का वैधानिक अधिकार, गंभीर कदाचार साबित हुए बिना नहीं रोकी जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
पेंशन कर्मचारी का वैधानिक अधिकार, गंभीर कदाचार साबित हुए बिना नहीं रोकी जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पेंशन किसी सरकारी कर्मचारी का वैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकार है, जिसे विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना छीना या रोका नहीं जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन में कटौती या उसे रोके जाने जैसी कठोर सजा तभी दी जा सकती है जब कर्मचारी के खिलाफ गंभीर कदाचार का स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज हो और यह भी स्थापित हो कि यदि वह सेवा में होता तो उसके कृत्य के कारण उसे बर्खास्त किया जा सकता था। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने यह टिप्पणी...

राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए आदेश: सेवा अधिकरण में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोपों की होगी जांच
राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए आदेश: सेवा अधिकरण में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोपों की होगी जांच

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में रिकॉर्ड से कथित छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों को लेकर जांच के आदेश दिए। अदालत ने कार्मिक विभाग के सचिव को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।जस्टिस रवि चिरानिया ने 17 अप्रैल को पारित आदेश में अधिकरण के रजिस्ट्रार की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर असंतोष जताते हुए कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी एक लिपिक पर डालने का प्रयास कर रहे हैं।अदालत ने कहा,"यह न्यायालय पाता है कि यह स्पष्टीकरण अत्यंत अव्यावहारिक है और रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम...

BJP MLA संजय पाठक के खिलाफ मानहानि शिकायत पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का नोटिस, राज्य सरकार से मांगा जवाब
BJP MLA संजय पाठक के खिलाफ मानहानि शिकायत पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का नोटिस, राज्य सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी विधायक (BJP MLA) संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ दायर मानहानि शिकायत पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। यह याचिका कटनी के लाइसेंसी शस्त्र विक्रेता नाजिम खान ने दायर की, जिसमें उनकी शिकायत पर विचार कर निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगने की प्रार्थना स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की।याचिका के अनुसार वर्ष 2024...

46 साल की बकाया दिव्यांग पेंशन देने का आदेश, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- सरकारी लापरवाही का खामियाजा पूर्व वायुसेना कर्मी नहीं भुगत सकता
46 साल की बकाया दिव्यांग पेंशन देने का आदेश, राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- सरकारी लापरवाही का खामियाजा पूर्व वायुसेना कर्मी नहीं भुगत सकता

राजस्थान हाईकोर्ट ने भारतीय वायुसेना के पूर्व कॉर्पोरल को बड़ी राहत देते हुए सरकार को 46 वर्षों की बकाया दिव्यांग पेंशन चार महीने के भीतर अदा करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकारी निष्क्रियता या देरी के कारण किसी पूर्व सैनिक को उसके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस नुपुर भाटी की खंडपीठ ने सशस्त्र बल अधिकरण के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें दिव्यांग पेंशन बहाल तो की गई, लेकिन उसके बकाये का भुगतान केवल वर्ष...

सीनियर ऑफिसर की पत्नी के साथ अफेयर के लिए ITBP कॉन्स्टेबल को नौकरी से निकालना बहुत कड़ी सज़ा, अनिवार्य रिटायरमेंट सही: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
सीनियर ऑफिसर की पत्नी के साथ अफेयर के लिए ITBP कॉन्स्टेबल को नौकरी से निकालना बहुत कड़ी सज़ा, अनिवार्य रिटायरमेंट सही: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि ITBP के कॉन्स्टेबल को अपने सीनियर ऑफिसर की पत्नी के साथ आपसी सहमति से अवैध संबंध बनाने के लिए नौकरी से निकालने की सज़ा, इस मामले के खास हालात को देखते हुए बहुत ज़्यादा है।कोर्ट ने गौर किया कि सीनियर ऑफिसर के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और वह अपने लैपटॉप पर सेक्सुअल एक्ट रिकॉर्ड करने का दोषी पाया गया, लेकिन उसे बहुत कम सज़ा मिली। इसलिए कोर्ट ने कॉन्स्टेबल को नौकरी से निकालने की सज़ा को बदलकर अनिवार्य रिटायरमेंट किया और कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई में...

पश्चिम बंगाल सरकार करेगी 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्रों की जांच: CPIM(L) ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
पश्चिम बंगाल सरकार करेगी 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्रों की जांच: CPIM(L) ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की। इसमें पश्चिम बंगाल सरकार के उस मेमोरेंडम को चुनौती दी गई, जिसमें 2011 से राज्य में जारी सभी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के जाति प्रमाण पत्रों का बड़े पैमाने पर दोबारा वेरिफिकेशन करने का निर्देश दिया गया।याचिका में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा 14 मई, 2026 को जारी मेमोरेंडम पर सवाल उठाए गए। इसमें कहा गया कि इससे लगभग 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्र...

पार्टनरशिप एक्ट के तहत वकीलों की पार्टनरशिप फर्म रजिस्टर करने के लिए ट्रेड लाइसेंस की ज़रूरत नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
पार्टनरशिप एक्ट के तहत वकीलों की पार्टनरशिप फर्म रजिस्टर करने के लिए ट्रेड लाइसेंस की ज़रूरत नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ वकालत का काम करने के लिए बनी पार्टनरशिप फर्म को इंडियन पार्टनरशिप एक्ट, 1932 के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए ट्रेड लाइसेंस दिखाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि पार्टनरशिप फर्मों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े कानूनी नियमों में ऐसी कोई शर्त नहीं है।जलपाईगुड़ी में सर्किट बेंच में बैठे जस्टिस बिवास पट्टनायक ने वकील डॉ. अर्जुन चौधरी की रिट याचिका मंज़ूरी की। उन्होंने वेस्ट बंगाल के रजिस्ट्रार ऑफ़ फर्म्स, सोसाइटीज़ एंड नॉन-ट्रेडिंग कॉरपोरेशन्स के उस फ़ैसले को...

प्रक्रिया से जुड़ी उलझन को दूर करने के लिए मांगी गई स्पष्टीकरण की पुनर्विचार याचिका पर विचार किया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
प्रक्रिया से जुड़ी उलझन को दूर करने के लिए मांगी गई स्पष्टीकरण की पुनर्विचार याचिका पर विचार किया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर समीक्षा याचिका, जिसमें प्रक्रिया से जुड़ी उलझन या भविष्य में बेकार के मुकदमों को रोकने के लिए स्पष्टीकरण मांगा गया हो, उस पर विचार किया जा सकता है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने कहा:"भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत समीक्षा अधिकार क्षेत्र का दायरा स्वाभाविक रूप से सीमित है। न्यायिक अनुशासन का यह स्थापित सिद्धांत है कि समीक्षा असल में अपील नहीं होती है। हालांकि, जब कोई पक्ष प्रक्रिया से जुड़ी उलझन को दूर करने और यह...