हाईकोर्ट
जंतर-मंतर संपत्ति मामले में कांग्रेस की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस, केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब तलब
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामला जंतर-मंतर रोड स्थित संपत्ति के बिक्री अथवा हस्तांतरण विलेख के निष्पादन से जुड़ा है।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने केंद्र सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय और दिल्ली सरकार से इस मामले में जवाब मांगा।कांग्रेस की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और एडवोकेट आदिल बोपराय ने पक्ष रखा, जबकि केंद्र सरकार की ओर से एडवोकेट आशीष दीक्षित उपस्थित...
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तय नहीं होगी मृतक की उम्र, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस को मिलेगी प्राथमिकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी मृतक की उम्र तय करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर नहीं, बल्कि पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे सरकारी दस्तावेजों पर भरोसा किया जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज उम्र केवल अनुमानित होती है, जबकि सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी दस्तावेज अधिक विश्वसनीय माने जाएंगे।जस्टिस संदीप तनेजा ने यह टिप्पणी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई के दौरान की।मामले में हाईकोर्ट ने माना कि दुर्घटना कार...
उम्मीदवार को पात्रता प्रमाण पत्र पेश न करने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जिसे हासिल करना विभाग की ज़िम्मेदारी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि जहां किसी उम्मीदवार की राष्ट्रीयता से जुड़ा पात्रता प्रमाण पत्र हासिल करने की ज़िम्मेदारी नियुक्त करने वाले सरकारी विभाग की होती है, वहां उम्मीदवार के ख़िलाफ़ इस आधार पर कोई भी प्रतिकूल कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती कि उसने वह प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए गृह मंत्रालय से संपर्क नहीं किया।जस्टिस नूपुर भाटी की बेंच सरकारी कर्मचारी द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसके ख़िलाफ़ जारी की गई चार्जशीट रद्द करने की मांग की गई। इस चार्जशीट में आरोप...
S.233 CrPC | आरोपी को बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने का अधिकार, कोर्ट का दखल सीमित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि कोर्ट आमतौर पर CrPC की धारा 233 के तहत आरोपी के बचाव पक्ष के गवाहों को पेश करने के अधिकार में दखल नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट आरोपी द्वारा पेश किए जाने वाले गवाहों को समन जारी करने से मना करती है तो वह ऐसा केवल लिखित में कारण बताते हुए और यह देखते हुए कर सकती है कि ऐसे समन से न्याय में देरी होगी या न्याय का मकसद ही खत्म हो जाएगा।जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा,“CrPC की धारा 311 के तहत, शक्ति केवल कोर्ट के पास होती है। CrPC की धारा 233 के तहत अधिकार...
ज़मीन मालिकों की बेटियों से 'शादी' करके हासिल की नौकरियां: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दिया जांच का आदेश
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने South Eastern Coalfields Limited (Coal India की सहायक कंपनी) की ज़मीन अधिग्रहण पुनर्वास योजना के तहत हासिल की गई नियुक्तियों की जांच का आदेश दिया। कोर्ट ने पाया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर आदिवासी ज़मीन मालिकों (जिन्हें ज़मीन अधिग्रहण के बदले नौकरी पाने का अधिकार था) की बेटियों से शादी करके नौकरी हासिल की, और नौकरी मिलने के बाद शादी तोड़ दी।जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की बेंच ने टिप्पणी की कि ज़मीन उन लोगों की थी, जो आदिवासी होने के साथ-साथ अनपढ़ भी थे और कुछ चालाक लोगों ने...
अपराध से सीधे जुड़ाव के बिना पुलिस CrPC की धारा 102 के तहत बैंक अकाउंट ज़ब्त नहीं कर सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस, ज़ब्त की गई संपत्ति और कथित अपराध के बीच सीधा संबंध साबित किए बिना दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 102 के तहत बैंक अकाउंट्स को फ्रीज़ या ज़ब्त नहीं कर सकती। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अकाउंट्स को डी-फ्रीज़ करने का निर्देश देते समय फ्रीज़ की गई राशि के बराबर बैंक गारंटी देने की एक भारी शर्त लगाना, डी-फ्रीज़िंग के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देता है।जस्टिस एन.जे. जमादार दो आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे। ये याचिकाएं अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन...
मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जुआ मामले की जांच नहीं कर सकती पुलिस : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सार्वजनिक स्थान या सड़क पर जुआ खेलने से जुड़ा Public Gambling Act, 1867 की धारा 13 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस जांच शुरू नहीं कर सकती और बिना वारंट गिरफ्तारी भी नहीं की जा सकती।जस्टिस संजय कुमार पचौरी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और समन आदेश को रद्द कर दिया।मामला मिर्जापुर का था, जहां पुलिस ने चार लोगों को ताश के पत्तों...
दिल्ली हाईकोर्ट ने ससुराल वालों के शांतिपूर्ण रहने के अधिकार की रक्षा के लिए बहू को घर से निकालने का फैसला सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत एक बहू और उसके बेटे को ससुराल वालों के घर से निकालने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के तथ्यों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों के शांतिपूर्ण ढंग से रहने के अधिकार को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।जस्टिस पुरुशेंद्र कुमार कौरव ने एक विधवा और उसके बेटे की तरफ से दायर रिट याचिका खारिज की। इस याचिका में उन्होंने डिविजनल कमिश्नर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें ससुराल वालों की संपत्ति खाली...
'प्रक्रियात्मक कानून के दुरुपयोग का क्लासिक मामला': दिल्ली हाईकोर्ट ने 2016 से ट्रायल में देरी करने पर आरोपी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आरोपी पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया, क्योंकि वह 2016 से चल रहे एक आपराधिक ट्रायल को बार-बार रोकने की कोशिश कर रहा था। कोर्ट ने इस मामले को "प्रक्रियात्मक कानून के दुरुपयोग का एक क्लासिक मामला" बताया।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने आरोपी द्वारा दायर याचिका खारिज की। इस याचिका में आरोपी ने ट्रायल कोर्ट और सेशंस कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें जुलाई 2016 में शुरू हुए आपराधिक शिकायत मामले में शिकायतकर्ता से क्रॉस एग्जामिनेशन करने का उसका मौका खत्म कर दिया गया।कोर्ट ने पाया...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में 'लापरवाह जांच' के लिए पुलिस को फटकारा, सबूतों की कमी के कारण ड्राइवर को दी ज़मानत
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐसे व्यक्ति को ज़मानत दी, जिस पर एक गाड़ी चलाने का आरोप था, जिससे एक कंस्ट्रक्शन साइट पर 5 मज़दूरों की जान चली गई और 11 घायल हो गए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच "लापरवाह तरीके से" की गई और पहली नज़र में ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला जो उस व्यक्ति को दोषी ठहराता हो।जस्टिस संजीव एस. कलगांवकर की बेंच ने यह टिप्पणी की:"यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी भयानक घटना में इतनी लापरवाही से जांच की गई। पहली नज़र में केस डायरी में मौजूदा आवेदक के खिलाफ कोई सीधा दोषी ठहराने वाला सबूत नहीं...
पुलिस का काम सिर्फ़ लोगों को 'गिरफ़्तार करके जेल में डाल देना' नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने मुकदमों के दौरान सहयोग की अपील की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को NDPS Act के तहत बुक किए गए एक आरोपी को ज़मानत दी। साथ ही व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को संभालने के दिल्ली पुलिस के रवैये की कड़ी आलोचना की।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने टिप्पणी की कि बार-बार न्यायिक निर्देश दिए जाने के बावजूद, ज़मानत के मामलों में पुलिस के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ।कोर्ट ने कहा कि पुलिस की भूमिका "सिर्फ़ किसी व्यक्ति को गिरफ़्तार करके जेल में डाल देना नहीं है, बल्कि बिना किसी परवाह के मुकदमा चलाना भी है।"जस्टिस कथपालिया, भलस्वा डेयरी पुलिस...
काले हिरणों की मौत का मामला | ज़मानत खारिज होने के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका स्वीकार्य नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका खारिज की। इस व्यक्ति ने दो काले हिरणों की मौत से जुड़े मामले में अपनी अवैध हिरासत का आरोप लगाया था। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ऐसी याचिका तब स्वीकार्य नहीं है, जब याचिकाकर्ता की ज़मानत अर्जी पहले ही इस कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी हो।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"मौजूदा मामले में भी, जैसा कि ऊपर बताया गया, याचिकाकर्ता की ज़मानत अर्जी (यानी M.Cr.C. No.5598 of...
भर्ती के नतीजे घोषित होने के बाद उम्मीदवार आरक्षित उप-श्रेणी नहीं बदल सकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उम्मीदवार की वह याचिका खारिज की, जिसमें उसने भर्ती प्रक्रिया के नतीजे घोषित होने के बाद अपनी जाति की उप-श्रेणी में सुधार की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवार आवेदन के समय चुनी गई श्रेणी से बंधे होते हैं और बाद के चरण में इसमें बदलाव की मांग नहीं कर सकते।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"सहानुभूति या निष्पक्षता भर्ती की निर्धारित शर्तों से ऊपर नहीं हो सकती। अगर स्पष्ट रोक वाले नियमों के बावजूद ऐसी मांगों पर विचार किया जाता है तो इससे मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी,...
मजिस्ट्रेट की अनुमति बिना जुआ अधिनियम की धारा 13 में जांच नहीं कर सकती पुलिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने से जुड़ा सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 की धारा 13 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पुलिस मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकती और न ही बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।जस्टिस संजय कुमार पचौरी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मिर्जापुर में दर्ज आपराधिक मामले और उससे जुड़े संज्ञान व समन आदेश रद्द किया।मामला उस FIR से जुड़ा था जिसमें पुलिस ने चार लोगों को ताश के पत्तों और...
पुलिस थानों में CCTV निगरानी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट सख्त, कहा- केवल कागजी रिपोर्ट से नहीं चलेगा काम
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV कैमरों की निगरानी और उनके कामकाज को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि निगरानी समितियां यांत्रिक तरीके से काम कर रही हैं जिससे पूरी व्यवस्था का उद्देश्य ही विफल हो रहा है।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने पूछा कि पिछले पांच वर्षों में जिला स्तरीय निगरानी समितियों से मिली रिपोर्टों की वास्तव में कितनी जांच हुई और उनमें कौन-कौन सी कमियां पाई गईं।अदालत ने कहा कि केवल बड़े पैमाने पर...
गिरफ्तारी के सामान्य कारण बताना पर्याप्त नहीं, आरोपी को लिखित गिरफ्तारी के आधार देना जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने NDPS Act के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि गिरफ्तारी मेमो में केवल गिरफ्तारी के कारण लिख देना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को उसके खिलाफ व्यक्तिगत और विशिष्ट गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में बताना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने कहा कि निर्धारित समय सीमा के भीतर लिखित आधार उपलब्ध न कराना गिरफ्तारी और बाद की रिमांड प्रक्रिया को अवैध बना देता है।अदालत ने कहा,“गिरफ्तारी के आधार बताना कोई तकनीकी औपचारिकता नहीं बल्कि व्यक्तिगत...
सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक पर रोक की मांग वाली याचिका वापस, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सर रतन टाटा ट्रस्ट की 16 मई को प्रस्तावित महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति देते हुए निस्तारित किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के आचरण पर कड़ी नाराज़गी जताई और कहा कि मामला चौंकाने वाली स्थिति दर्शाता है।जस्टिस अद्वैत सेठना और जस्टिस संदेश पाटिल की अवकाशकालीन खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।याचिकाकर्ता सुरेश पाटिलखेड़े ने अदालत से मांग की थी कि सर रतन टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक पर रोक लगाई जाए। उनका दावा था कि ट्रस्ट...
उत्तराखंड हाईकोर्ट का आदेश: ओन मेरिट सिद्धांत पर AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग पदोन्नति समीक्षा पर लगाई रोक
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने AIIMS ऋषिकेश में नर्सिंग अधिकारियों की वर्ष 2022 और 2023 की पदोन्नति समीक्षा प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई। यह रोक विशेष रूप से ओन मेरिट सिद्धांत के आधार पर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को अनारक्षित पदों पर पदोन्नति देने से जुड़े मामले में लगाई गई।चीफ जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश नर्सिंग अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।याचिकाकर्ताओं ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के 7 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अंतरिम राहत...
पेट दर्द की दवा से मां को शराबी नहीं कहा जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पेट दर्द के इलाज से जुड़ी मेडिकल पर्चियों के आधार पर किसी महिला को शराब की आदी या मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे आधार पर मां को उसके बच्चे की अभिरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी करते हुए नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंप दी। अदालत ने कहा कि पांच वर्ष तक की आयु के बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक मां होती है।मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें मां ने आरोप लगाया था कि बच्चे के पिता ने जबरन बच्चे को उससे अलग कर...
अदालत में तीखी बहस अवमानना नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बैठे हुए जज के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रैक्टिस कर रहे वकील द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें हाईकोर्ट के वर्तमान जज जस्टिस सरल श्रीवास्तव के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस देवेंद्र सिंह-प्रथम की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि किसी गलत आदेश या अदालत में वकील और जज के बीच हुई तीखी बहस को आपराधिक अवमानना का आधार नहीं बनाया जा सकता।मामले में वकील अरुण मिश्रा ने दावा किया था कि नवंबर, 2025 में उन्होंने एक मामले की सुनवाई से जस्टिस सरल श्रीवास्तव से स्वयं को अलग...




















