हाईकोर्ट

सिर्फ़ इसलिए राहत नहीं रोकी जा सकती कि अधिकारी कोर्ट नहीं आया: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां रद्द कीं
सिर्फ़ इसलिए राहत नहीं रोकी जा सकती कि अधिकारी कोर्ट नहीं आया: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां रद्द कीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा न सिर्फ़ याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारी, बल्कि एक दूसरे अधिकारी के खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की राहत दी, जो राहत के लिए कोर्ट नहीं आया।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि दूसरा अधिकारी कोर्ट नहीं आया, यह नहीं कहा जा सकता कि उसके खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां सही थीं। समानता के सिद्धांत के आधार पर यह माना गया कि जब कोई खास कार्रवाई कानूनी रूप से गलत पाई जाती है तो एक पक्ष को दिया गया फ़ायदा उसी तरह की स्थिति वाले दूसरे...

पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास पुलिस की रिक्वेस्ट के बिना पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास पुलिस की रिक्वेस्ट के बिना पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

यह मानते हुए कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास CrPC की धारा 167 के तहत पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है, जब तक कि ऐसी रिक्वेस्ट इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी से न आए, जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस कस्टडी पुलिस द्वारा बताई गई जांच की ज़रूरत पर आधारित होनी चाहिए, न कि प्रॉसिक्यूशन के विवेक पर।जस्टिस संजय परिहार ने राज्य द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन खारिज करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि एक बार चार्जशीट दायर हो जाने के बाद इसका मतलब यह होता है कि कस्टडी में...

गलत आरोप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जड़ पर चोट: राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF कांस्टेबल को बहाल किया
गलत आरोप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जड़ पर चोट: राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF कांस्टेबल को बहाल किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट का फॉर्म भले ही उसके सब्सटेंस पर भारी पड़ता हो, लेकिन जब उसकी नींव ही गलत आरोप पर आधारित हो तो राज्य बाद में जांच के नतीजे के हिसाब से आरोप को हल्का या दोबारा इंटरप्रेट नहीं कर सकता।याचिकाकर्ता-कांस्टेबल का सस्पेंशन रद्द करते हुए जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि अनुशासनात्मक अथॉरिटी को सज़ा देने से पहले दुर्व्यवहार को सही ढंग से क्लासिफाई करना होगा, नहीं तो पूरी कार्रवाई मनमानी हो जाएगी।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता के सस्पेंशन के...

पूरे उत्तर प्रदेश में कोई जुवेनाइल रिहैब इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- JJ Act बेकार, स्कूलों, शिक्षकों की भूमिका पर विचार किया
पूरे उत्तर प्रदेश में कोई जुवेनाइल रिहैब इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- JJ Act 'बेकार', स्कूलों, शिक्षकों की भूमिका पर विचार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में स्थिति पर गहरी चिंता जताई, जब राज्य सरकार ने उसके सामने यह माना कि पूरे राज्य में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, (JJ Act) 2015 को लागू करने में इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी कमियां हैं।असल में उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि पूरे राज्य में JJ Act, 2015 और JJ रूल्स, 2016 के तहत बताए गए मान्यता प्राप्त संस्थानों, जैसे "फिट पर्सन," "ग्रुप फॉस्टर केयर संस्थान," "ग्रुप फॉस्टर केयर देने वाले," और "केस वर्कर" की उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी नहीं है।बता दें, ये...

कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर दोबारा नौकरी पाने वाले पूर्व सैनिक सिविल पेंशन के हकदार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर दोबारा नौकरी पाने वाले पूर्व सैनिक सिविल पेंशन के हकदार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

एक पूर्व सैनिक द्वारा अपनी सिविल दोबारा नौकरी के लिए पेंशन लाभ मांगने वाली रिट याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ लंबी सर्विस के आधार पर पेंशन का दावा नहीं किया जा सकता, जब तक कि अपॉइंटमेंट पक्का, स्थायी न हो और पेंशन देने वाले नियमों के तहत न आता हो।जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा,"शुरू से ही याचिकाकर्ता को इस बात की जानकारी थी कि वह एक अस्थायी कर्मचारी है, जिसकी सेवाएं किसी भी समय खत्म की जा सकती हैं। इसलिए ऐसा कोई मौका नहीं आया, जहां उसे अपनी नौकरी की प्रकृति के आधार पर एक...

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में क्लास XII पास करने वालों के लिए एडिशनल सब्जेक्ट की सुविधा खत्म करने के CBSE का फैसला रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में क्लास XII पास करने वालों के लिए 'एडिशनल सब्जेक्ट' की सुविधा खत्म करने के CBSE का फैसला रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने CBSE के दो नोटिफिकेशन रद्द किया, जिसमें 2025 में क्लास XII पास करने वाले स्टूडेंट्स के लिए प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर "एडिशनल सब्जेक्ट" में बैठने की सुविधा वापस ले ली गई। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला मनमाना था, इसे पिछली तारीख से लागू किया गया और यह वैध उम्मीद के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।जस्टिस जसमीत सिंह ने 2025 में क्लास XII बोर्ड परीक्षा पास करने वाले स्टूडेंट्स द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच को मंज़ूरी दी और कहा कि विवादित पॉलिसी में बदलाव बिना किसी उचित नोटिफिकेशन और बिना...

दिल्ली हाईकोर्ट ने SSC से प्रश्न पत्र और आंसर-की को फाइनल करने में सिस्टमैटिक तरीका अपनाने को कहा, गंभीर कमियों पर ध्यान दिलाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने SSC से प्रश्न पत्र और आंसर-की को फाइनल करने में सिस्टमैटिक तरीका अपनाने को कहा, गंभीर कमियों पर ध्यान दिलाया

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) से भर्ती परीक्षाओं में प्रश्न पत्र और आंसर-की बनाने, जांचने और फाइनल करने में ज़्यादा सिस्टमैटिक और सख्त तरीका अपनाने को कहा।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने कहा कि अस्पष्टताओं और आपत्तियों को दूर करने के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाने से न केवल परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि बेवजह के मुकदमों में भी काफी कमी आएगी।बेंच ने कहा कि SSC को भविष्य की सभी परीक्षाओं में ज़्यादा अकादमिक सख्ती और प्रशासनिक सावधानी बरतनी...

ये सड़कें किसकी हैं? सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान और शहरी सुरक्षा का सवाल
ये सड़कें किसकी हैं? सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान और शहरी सुरक्षा का सवाल

सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों के आसपास की बढ़ती चिंताओं का स्वतः संज्ञान लेने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक प्रतिक्रियावादी कदम के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि एक रोजमर्रा की वास्तविकता के लिए एक संवैधानिक प्रतिक्रिया के रूप में समझा जाना चाहिए जो लंबे समय से प्रशासनिक रूप से अनसुलझा रहा है। अदालत का हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक सुरक्षा, पशु कल्याण और शहरी शासन उन तरीकों से एक दूसरे को काटते हैं जो नारों के बजाय बारीकियों की मांग करते हैं। इस मुद्दे की जांच करने में,...

CrPC की धारा 125 का मकसद महिला की पीड़ा और वित्तीय कठिनाई को कम करना है: झारखंड हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामले में देरी पर चिंता जताई
'CrPC की धारा 125 का मकसद महिला की पीड़ा और वित्तीय कठिनाई को कम करना है': झारखंड हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामले में देरी पर चिंता जताई

झारखंड हाईकोर्ट ने दोहराया कि CrPC की धारा 125 के तहत कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है। इसका मकसद बेघर होने और गरीबी को रोकना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी कानूनी तौर पर भरण-पोषण की हकदार है ताकि वह गरिमा के साथ और उसी तरह के जीवन स्तर के साथ रह सके जैसा कि वह अपने ससुराल में रहती थी। हालांकि, मौजूदा मामले के तथ्यों को देखते हुए, कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए भरण-पोषण को बढ़ाने से इनकार किया।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच रांची की फैमिली कोर्ट का आदेश के खिलाफ पति और...

कस्टडी विवादों के कारण मां के उच्च शिक्षा और पर्सनल डेवलपमेंट के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
कस्टडी विवादों के कारण मां के उच्च शिक्षा और पर्सनल डेवलपमेंट के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक मां का पर्सनल डेवलपमेंट, गरिमा और आज़ादी का अधिकार, जिसमें विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करना भी शामिल है, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक ज़रूरी हिस्सा है। इसे सिर्फ़ इसलिए कम नहीं किया जा सकता, क्योंकि कस्टडी और मुलाक़ात की कार्यवाही पेंडिंग है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि यह तथ्य कि एक मां बच्चे की प्राइमरी केयरटेकर है और उसके पालन-पोषण के लिए ज़िम्मेदार है, उसे शिक्षा, पर्सनल ग्रोथ या खुद को आगे बढ़ाने के अधिकार को छोड़ने...

कथित जबरन धर्मांतरण मामले में पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत, एमपी हाइकोर्ट का आदेश
कथित जबरन धर्मांतरण मामले में पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत, एमपी हाइकोर्ट का आदेश

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट, इंदौर ने कथित जबरन धर्मांतरण के मामले में आरोपी पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत दी। अनवर कादरी अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में थे। उन पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत अपराध दर्ज हैं।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ सीमित सामग्री ही सामने आती है, जबकि सह-आरोपी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।आवेदक की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता ने अपनी शिकायत में अनवर कादरी...

पुलिस कागजात की आपूर्ति निष्पक्ष सुनवाई का मूल तत्व: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने BNSS की धारा 230 के उल्लंघन पर आरोप निरस्त किए
पुलिस कागजात की आपूर्ति निष्पक्ष सुनवाई का मूल तत्व: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने BNSS की धारा 230 के उल्लंघन पर आरोप निरस्त किए

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने यह कहते हुए एक आरोपी के खिलाफ तय किए गए आरोपों को रद्द कर दिया है कि आरोपी को पुलिस रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराना कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि निष्पक्ष सुनवाई का मूल तत्व है।अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 230 का पालन किए बिना की गई कार्यवाही निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई के सिद्धांत के विरुद्ध है।जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ ने BNSS की धारा 528 के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि BNSS की धारा 230 का अनुपालन अनिवार्य है। इसके...

नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने के आरोप: झारखंड हाइकोर्ट FIR दर्ज करने का दिया आदेश
नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने के आरोप: झारखंड हाइकोर्ट FIR दर्ज करने का दिया आदेश

झारखंड हाइकोर्ट ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को कथित रूप से HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने के मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया।जस्टिस गौतम कुमार चौधरी की एकल पीठ इस मामले में दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि अक्टूबर, 2025 में चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में नाबालिग याचिकाकर्ताओं को संक्रमित रक्त चढ़ाया गया, जिसके बाद वे एचआईवी से संक्रमित हो गए।याचिकाकर्ताओं ने हाइकोर्ट से आग्रह किया कि इस...

सबरीमला स्वर्ण चोरी मामले में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को भी मिली वैधानिक जमानत
सबरीमला स्वर्ण चोरी मामले में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को भी मिली वैधानिक जमानत

सबरीमला मंदिर से जुड़े स्वर्ण चोरी मामले में केरल की कोल्लम स्थित जांच आयुक्त एवं विशेष जज की अदालत ने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को वैधानिक जमानत प्रदान की। यह आदेश गुरुवार, 5 फरवरी को पारित किया गया।स्पेशल जज मोहित सी.एस. ने उन्नीकृष्णन पोट्टी को जमानत देने का आदेश दिया। बता दें, उन्नीकृष्णन पोट्टी सबरीमला में पूर्व सहायक शांति रह चुके हैं और इस मामले में प्रमुख आरोपी माने जाते हैं।पोट्टी को अक्टूबर, 2025 में इस प्रकरण से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया। इससे पहले 21 जनवरी को उन्हें...

सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 को चुनौती खारिज, प्रतियोगी परीक्षाओं में न्यायिक समीक्षा बेहद सीमित: दिल्ली हाइकोर्ट
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 को चुनौती खारिज, प्रतियोगी परीक्षाओं में न्यायिक समीक्षा बेहद सीमित: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2023, विशेष रूप से पेपर-2 (सीसैट) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा अत्यंत सीमित होता है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने असफल अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह को खारिज किया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 के सीसैट पेपर में पूछे गए कुछ प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर थे।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि...

मंदिरों, स्कूलों और अस्पतालों के 100 मीटर दायरे में मांसाहार की बिक्री व सेवन को लेकर नीति बनाए राज्य: तेलंगाना हाइकोर्ट
मंदिरों, स्कूलों और अस्पतालों के 100 मीटर दायरे में मांसाहार की बिक्री व सेवन को लेकर नीति बनाए राज्य: तेलंगाना हाइकोर्ट

तेलंगाना हाइकोर्ट ने राज्य सरकार और ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम को निर्देश दिया कि वह मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों के 100 मीटर के दायरे में मांसाहारी और मांस उत्पादों की बिक्री व सेवन को विनियमित करने के लिए एक समग्र नीति तैयार करें। हाइकोर्ट ने यह नीति चार सप्ताह के भीतर बनाने का निर्देश दिया।जस्टिस बी. विजयसेन रेड्डी ने यह निर्देश एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए दिया। यह याचिका एक रेस्तरां संचालक द्वारा दायर की गई, जिसमें पुलिस और नगर निगम अधिकारियों द्वारा कथित उत्पीड़न और उसके...

विवेक ओबेरॉय के पर्सनालिटी रइट्स की सुरक्षा पर दिल्ली हाइकोर्ट करेगा अंतरिम आदेश पारित
विवेक ओबेरॉय के पर्सनालिटी रइट्स की सुरक्षा पर दिल्ली हाइकोर्ट करेगा अंतरिम आदेश पारित

दिल्ली हाइकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह एक्टर और उद्यमी विवेक ओबेरॉय के पर्सनालिटी रइट्स की सुरक्षा को लेकर अंतरिम आदेश पारित करेगा।यह टिप्पणी जस्टिस तुषार राव गेडेला ने उस समय की जब विवेक ओबेरॉय की ओर से वकील सना रईस खान अदालत में पेश हुईं।सुनवाई की शुरुआत में ही जस्टिस गेडेला ने कहा,“हम आदेश पारित करेंगे।”इस पर वकील सना रईस खान ने पूछा कि क्या उन्हें कोई दलील रखनी होगी।इसके जवाब में जस्टिस गेडेला ने कहा,“जब अदालत कह रही है कि वह आदेश पारित करेगी, तो क्या दलील की आवश्यकता है?”यह वाद एडवोकेट...

अप्रमाणित व्यभिचार के आरोपों के आधार पर अंतरिम भरण-पोषण से इनकार नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाइकोर्ट
अप्रमाणित व्यभिचार के आरोपों के आधार पर अंतरिम भरण-पोषण से इनकार नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल व्यभिचार के आरोप, यदि वे प्रमाणित न हों तो घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण देने से इनकार करने का आधार नहीं बन सकते।हाइकोर्ट ने कहा कि बिना ठोस सबूत लगाए गए ऐसे आरोप अंतरिम चरण में स्वीकार्य नहीं हैं।जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125(4) के विपरीत घरेलू हिंसा अधिनियम में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जो केवल इस आधार पर महिला को राहत से वंचित कर दे कि वह कथित रूप से व्यभिचार में रह रही...

जहां स्थिति मिलिट्री सर्विस से संबंधित नहीं है, वहां कोई दिव्यांगता पेंशन नहीं: केरल हाईकोर्ट
जहां स्थिति मिलिट्री सर्विस से संबंधित नहीं है, वहां कोई दिव्यांगता पेंशन नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल के उस आदेश को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज की, जिसमें पूर्व सैनिक की जनरलाइज्ड एंग्जायटी डिसऑर्डर के लिए विकलांगता पेंशन न दिए जाने के खिलाफ आवेदन को खारिज कर दिया गया।जस्टिस के. नटराजन और जस्टिस जॉनसन जॉन की डिवीजन बेंच ने कहा कि कैजुअल्टी पेंशनरी अवार्ड्स, 1982 के एंटाइटेलमेंट नियमों के तहत सेवा में शामिल होने के समय सदस्य की अच्छी मानसिक स्थिति के बारे में जो अनुमान लगाए जाते हैं, वे तब लागू नहीं होते जब मेडिकल असेसमेंट से यह पता नहीं...