हाईकोर्ट
CGST Act की धारा 107(6) अदालत को अपील दायर करते समय प्री-डिपॉजिट माफ करने का विवेकाधिकार नहीं देती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पास केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 (CGST Act) की धारा 107(6) के तहत अपील दायर करने के लिए निर्धारित प्री-डिपॉजिट शर्त को माफ करने का कोई विवेकाधिकार नहीं है।अधिनियम की धारा 107(6) के अनुसार, जहां तक स्वीकार की गई कर, ब्याज या जुर्माने की बात है तो पूरी राशि जमा करना अनिवार्य है। जहां तक विवादित राशि का सवाल है, वहां अपील के साथ कर की 10% राशि प्री-डिपॉजिट के रूप में जमा करनी होगी।इस मामले में याचिकाकर्ता ने इस आधार पर प्री-डिपॉजिट से छूट मांगी कि उसे...
हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में साक्ष्य दबाने के लिए भोपाल के DIG पर 5 लाख का जुर्माना लगाया, ट्रायल कोर्ट के दृष्टिकोण की आलोचना की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने भोपाल के वर्तमान उप महानिरीक्षक को दतिया जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात रहते हुए हत्या के मामले में जानबूझकर साक्ष्य दबाने के लिए 5 लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया।ऐसा करते हुए न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का भी निर्देश दिया।जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकल पीठ ने कहा,“यह वास्तव में चौंकाने वाली स्थिति है, जहां पुलिस ने उनसे अपेक्षित न्यूनतम स्तर के कर्तव्यों का पालन नहीं किया।”न्यायालय हत्या...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुवेंदु अधिकारी को मुर्शिदाबाद के वक्फ विधेयक हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की अनुमति दी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को मुर्शिदाबाद के उन क्षेत्रों का दौरा करने की अनुमति दी, जो हाल ही में संसद में पारित वक्फ विधेयक के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान व्यापक हिंसा से प्रभावित हुए थे।जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस राजा बसु चौधरी की खंडपीठ ने यह अनुमति दी। साथ ही यह स्पष्ट किया,"वे न तो कोई जुलूस निकालेंगे, न कोई रैली करेंगे और न ही कोई ऐसा सार्वजनिक भाषण देंगे, जिससे शांति भंग हो सकती है। यह क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के...
आपराधिक पृष्ठभूमि का कोई खुलासा नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने IRCTC द्वारा ऑनबोर्ड कैटरिंग सेवा के लिए दिया गया टेंडर किया रद्द
दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेनों में ऑनबोर्ड कैटरिंग सेवाओं के लिए पांच वर्षों के अनुबंध हेतु IRCTC द्वारा एक बोलीदाता को दिया गया टेंडर रद्द कर दिया।कोर्ट ने पाया कि सफल बोलीदाता ने कोई आपराधिक पृष्ठभूमि या भ्रष्टाचार से संबंधित उल्लंघन का खुलासा नहीं किया, जो कि सार्वजनिक अनुबंधों में निष्पक्षता के सिद्धांत के विरुद्ध है।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि सफल बोलीदाता (उत्तरदाता नंबर 2) ने उस इंटीग्रिटी पैक्ट (Integrity Pact) का पालन नहीं किया जो टेंडर...
मध्यस्थता समझौते को समाप्त करने का एकतरफा विकल्प उसे अवैध नहीं बनाता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरसन की पीठ ने मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए एक आवेदन का निपटारा करते हुए कहा कि मध्यस्थता खंड जो केवल एक पक्ष को मध्यस्थता समझौते से बाहर निकलने का विकल्प देता है, वह अपने आप में अमान्य नहीं है। इस तरह के मध्यस्थता समझौते को एकतरफा विकल्प को समाप्त करके या ऐसे अधिकार को द्विपक्षीय बनाकर बचाया जा सकता है। तथ्यवर्तमान आवेदन मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 के तहत दायर किए गए हैं, जिसमें 31 जनवरी, 2016 के एक ऋण समझौते और 31 अक्टूबर, 2017 के एक अन्य...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई यूनिवर्सिटी में लॉ स्टूडेंट्स की अनुपस्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई पूरी की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार 24 अप्रैल को उन लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ अनिवार्य उपस्थिति नियमों को लागू कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को यह कहते हुए निपटा दिया कि याचिकाकर्ता ने ऐसे किसी कॉलेज का विवरण प्रस्तुत नहीं किया, जहां स्टूडेंट को कम उपस्थिति के बावजूद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाती है।चीफ जस्टिस अलोक अराधे और जस्टिस एम.एस. कर्णिक की खंडपीठ ने यह आदेश दिया।याचिका मुंबई यूनिवर्सिटी की एक लॉ प्राध्यापक द्वारा दायर की गई थी, जिसमें यह आरोप लगाया गया कि कई कॉलेजों में स्टूडेंट्स की...
पहले से बेची गई और फिर से शुरू की गई साइट को बहाल करने के लिए दूसरी बार एससी/एसटी भूमि के हस्तांतरण पर रोक लगाने वाले अधिनियम को लागू करना गैरकानूनी है: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि अनुदान प्राप्तकर्ता के पक्ष में पहले से ही बहाल की गई भूमि को फिर से बेचा जाता है, तो अनुदान प्राप्तकर्ता को दूसरी बार कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (कुछ भूमि के हस्तांतरण का निषेध) (पीटीसीएल) अधिनियम लागू करने और भूमि की बहाली और पुनर्स्थापन की मांग करने का अधिकार नहीं है। इसने आगे कहा कि यदि ऐसी प्रक्रिया - अनुदान की शर्तों के उल्लंघन में दी गई भूमि को बेचना, फिर उसका पुनर्ग्रहण सुनिश्चित करना और उसके बाद, फिर से पुनर्ग्रहण की मांग करने से पहले...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सेशन जज के खिलाफ भ्रष्टाचार की FIR दर्ज करने की मांग करने वाली वादी से रजिस्ट्री में शिकायत दर्ज कराने को कहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सेशन जज के खिलाफ भ्रष्टाचार की FIR दर्ज करने की मांग करने वाली महिला से हाईकोर्ट रजिस्ट्री में शिकायत दर्ज करने को कहा।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर न्यायिक पक्ष में विचार नहीं किया जा सकता।न्यायालय ने शुरू में कहा,"याचिकाकर्ता जो व्यक्तिगत रूप से पेश हुई है, उसका तर्क है कि वह उक्त न्यायिक अधिकारी के समक्ष लंबित मुकदमे में कथित अवैधानिकता के कृत्य से व्यथित है।"इसके बाद न्यायालय ने कहा,"भ्रष्टाचार और अवैधता के कुछ कृत्यों...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ मामले में आरोपी की सजा घटाकर पहले से काटी गई सजा तक सीमित की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस (NDPS Act) मामले में दोषसिद्धि पर नरम रुख अपनाते हुए एक युवक की छह महीने की सज़ा को घटाकर केवल उस अवधि तक सीमित कर दिया जो उसने पहले ही जेल में बिताई थी।अपीलकर्ता को NDPS Act की धारा 22(b) के तहत दोषी ठहराया गया। उसे छह महीने के कठोर कारावास तथा 5,000 जुर्माने की सज़ा सुनाई गई। उस पर आरोप था कि वह 115 नशीली गोलियों के साथ संज्ञानात्मक कब्जे में पकड़ा गया था।जस्टिस एन.एस. शेखावत ने कहा,“अपीलकर्ता एक युवा व्यक्ति है, जिसकी उम्र लगभग 27 वर्ष है। वह अपने परिवार...
केवल तीन तलाक प्रतिबंधित, तलाक-ए-अहसन नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (23 अप्रैल) को कहा कि मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 केवल तत्काल और अपरिवर्तनीय "तीन तलाक" को प्रतिबंधित करता है। इसे "तलाक-ए-बिद्दत" भी कहा जाता है, लेकिन इस्लाम के तहत तलाक के पारंपरिक तरीके को प्रतिबंधित नहीं करता है, जिसे "तलाक-ए-अहसन" कहा जाता है।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस संजय देशमुख की खंडपीठ ने एक व्यक्ति और उसके माता-पिता के खिलाफ दर्ज FIR खारिज की। उन पर शिकायतकर्ता पत्नी को कथित तौर पर तलाक-ए-बिद्दत कहने का आरोप लगाया गया था।जजों ने...
'पहले आओ पहले पाओ' नीति स्वाभाविक रूप से दोषपूर्ण है, सार्वजनिक रोजगार के मामलों में इसका सहारा नहीं लिया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने दोहराया कि पहले आओ पहले पाओ की नीति 'स्वाभाविक रूप से दोषपूर्ण' है और राज्य को सार्वजनिक रोजगार के मामलों में इसे लागू नहीं करना चाहिए। न्यायालय ने जल शक्ति मंत्रालय और जल संसाधन विभाग को भविष्य में उक्त नीति का सहारा न लेने का निर्देश दिया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने कहा, “…प्रतिवादियों द्वारा पहले आओ पहले पाओ के सिद्धांत पर अपनाई गई नीति स्वाभाविक रूप से त्रुटिपूर्ण थी, और यह सिद्धांत किसी भी सार्वजनिक रोजगार के मामले में भी लागू होगा और हालांकि, इस...
कानून के शासन, संघीय निष्ठा और संवैधानिक सर्वोच्चता के बचाव में सुप्रीम कोर्ट
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में संविधान के अनुच्छेद 201 के तहत विधेयकों को आरक्षित करने के राष्ट्रपति के अधिकार पर अस्थायी सीमाओं को स्पष्ट करते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय में इस तरह के आरक्षण को तीन महीने तक सीमित कर दिया। तमिलनाडु राज्य बनाम भारत संघ (2023) से उत्पन्न इस न्यायशास्त्रीय मील के पत्थर ने संघीय शिष्टाचार, राज्यपालीय औचित्य और शक्तियों के पृथक्करण पर एक महत्वपूर्ण संवैधानिक बहस को जन्म दिया है। शीर्ष न्यायालय द्वारा राज्यपाल आर एन रवि को दस विधेयकों को अनिश्चित काल के लिए रोके रखने...
सेवानिवृत्ति के एक महीने से अधिक समय तक ग्रेच्युटी भुगतान में देरी पर 10% ब्याज लगेगा: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस रवींद्र वी घुगे और जस्टिस अश्विन डी भोबे की खंडपीठ ने माना कि नौरोसजी वाडिया कॉलेज को एक सेवानिवृत्त शिक्षक को 10% ब्याज के साथ ग्रेच्युटी का भुगतान करना था, क्योंकि उनके सेवानिवृत्ति लाभों में बिना किसी औचित्य के देरी की गई थी। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान एक महीने से अधिक समय तक ग्रेच्युटी नहीं रोक सकते, भले ही पेंशन गणना पर विवाद हो। पृष्ठभूमिनौरोसजी कॉलेज ने डॉ. चेतना राजपूत को 25 साल के लिए प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया था, जब तक कि वह 2023 में सेवानिवृत्त...
बेची गई संपत्ति पर पुनर्ग्रहण कार्यवाही लागू नहीं की जा सकती, यह अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन होगा: P&H हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पंजीकृत सेल डीड के जरिए बेची गई संपत्ति को पुनर्ग्रहण कार्यवाही के माध्यम से वापस नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि ऐसा करना अनुच्छेद 300-ए के तहत संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन होगा। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी ने कहा,"किसी भी सुप्रा शर्त के कथित उल्लंघन पर, जो अन्यथा केवल विक्रय अनुबंध (अनुलग्नक पी-8) में मौजूद है और पंजीकृत हस्तांतरण विलेख (अनुलग्नक पी-9) में शामिल नहीं है, इस प्रकार, ग्रहण की शक्ति का तत्काल आह्वान, स्वाभाविक रूप से...
कनाडाई आदेश का उल्लंघन कर पिता ने बच्चे को कस्टडी में लिया, P&H हाईकोर्ट ने बच्चे को मां को सौंपने का निर्देश दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक कनाडाई महिला की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें उसने अपने बच्चे की कस्टडी अपने पिता से मांगी है, जिसने कथित तौर पर कनाडाई न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए उन्हें कस्टडी में लिया था। जस्टिस मंजरी नेहरू कौल कहा, "भारतीय न्यायालयों को अपने अधिकार क्षेत्र में न्यायिक कार्यवाही से बचने के इच्छुक विदेशी नागरिकों के लिए मुकदमेबाजी के लिए सुविधा के साधन तक सीमित नहीं किया जा सकता। भारतीय न्यायालयों के संवैधानिक रिट अधिकार क्षेत्र...
दो वयस्कों का एक-दूसरे को विवाह के लिए चुनना संवैधानिक अधिकार, परिवार या जाति की सहमति आवश्यक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
व्यक्तिगत स्वायत्तता और संवैधानिक स्वतंत्रता को मजबूती से दोहराते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने नवविवाहित जोड़े द्वारा दायर सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दो वयस्कों द्वारा एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में चुनना एक संवैधानिक अधिकार है, जो परिवार या समुदाय की स्वीकृति पर निर्भर नहीं करता।जस्टिस वसीम सादिक नारगल की एकल पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के महत्व को दोहराते हुए कहा,“जब दो वयस्क आपसी सहमति से एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में...
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य विद्युत वितरण कंपनी और NTPC के संयुक्त उद्यम के खिलाफ जनहित याचिका पर 1.5 लाख का जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के एक रिटायर मुख्य अभियंता पर 1,50,000 का जुर्माना लगाते हुए उनकी जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) के संयुक्त उद्यम (JV) को रद्द करने की मांग की थी।न्यायालय ने इस याचिका को स्वार्थ प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।याचिकाकर्ता का तर्क था कि बिजली उत्पादन के क्षेत्र में उनके अनुभव के आधार पर यह संयुक्त उद्यम भविष्य में बिजली की महंगी दरों की ओर ले...
CBI की 'Undesirable Contact Men' सूची में नाम शामिल किए जाने के कारण RTI Act से अपवाद नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति का नाम खुफिया एजेंसी की Undesirable Contact Men (अवांछनीय संपर्क व्यक्ति) सूची में शामिल करना और उसका प्रकाशन समाचार पत्रों तथा आधिकारिक वेबसाइट पर करना प्रथम दृष्टया (Prima Facie) मानवाधिकारों का उल्लंघन है, जैसा कि सूचना का अधिकार एक्ट (RTI Act) की धारा 24(1) के तहत परिभाषित किया गया है।प्रसंग के रूप में RTI Act की धारा 24(1) कहती है कि एक्ट उन खुफिया और सुरक्षा संगठनों पर लागू नहीं होता, जो द्वितीय अनुसूची में सूचीबद्ध हैं। हालांकि, इस धारा में यह अपवाद...
हाईकोर्ट ने जमानत पर बाहर आकर बार-बार मादक पदार्थ की तस्करी करने के आरोपी को 6 महीने हिरासत में रखने का आदेश बरकरार रखा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 21 वर्षीय एक युवक को छह महीने तक हिरासत में रखने के आदेश को बरकरार रखा है। वह कथित तौर पर जमानत पर रिहा होने के बाद भी मादक पदार्थों की लगातार अवैध तस्करी में शामिल था। न्यायालय ने कहा कि यह आदेश वांछनीय है और समाज के हित में है।जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस गजेंद्र सिंह की खंडपीठ ने कहा,“याचिकाकर्ता, जिसकी आयु लगभग 21 वर्ष है, NDPS Act के प्रावधानों के तहत तीन मामलों और मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत एक मामले में शामिल पाया गया है। जमानत पर रिहा होने के बाद, वह लगातार...
S.498 IPC | क्रूरता आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने पर निर्भर नहीं, गंभीर मानसिक या शारीरिक चोट पहुंचाना अपराध को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त: जेएंड के हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में दिए गए फैसलो में धारा 498ए आईपीसी के सुरक्षात्मक दायरे की और मजबूत किया। कोर्ट के समक्ष दायर दो याचिकाओं धारा 498ए और 109 आईपीसी के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी, जिन्हें रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि “यदि पति या उसके रिश्तेदारों का आचरण किसी महिला को गंभीर चोट पहुंचाने के इरादे से किया जाता है यह धारा 498ए आईपीसी के अर्थ में क्रूरता होगी, भले ही वह आत्महत्या करने के लिए प्रेरित हुई हो या ना या खुद को गंभीर चोट पहुंचाया हो या...




















