हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने प्रक्रियागत खामियों का हवाला देते हुए बलात्कार के मामले में किशोर की सजा को पलट दिया; कहा- जेजे बोर्ड ने उसके 'सर्वोत्तम हित' के खिलाफ काम किया
पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में कानून का उल्लंघन करने वाले एक किशोर की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है, साथ ही बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को मुआवज़ा देने का निर्देश दिया है। किशोर न्याय बोर्ड ने 2019 में किशोर को बलात्कार का दोषी ठहराया था और उसे दो साल के लिए विशेष गृह में रखने का निर्देश दिया था; अपीलीय न्यायालय ने भी इसे बरकरार रखा था, जिसके खिलाफ किशोर ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।दोषसिद्धि को पलटते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष याचिकाकर्ता के...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहलगाम हमले के बाद सरकार पर सवाल उठाने वाले कथित पोस्ट के मामले में अग्रिम जमानत दी; कहा- 'आरोपी के कृत्य से समाज को नुकसान नहीं'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को अज़ाज़ अहमद नामक व्यक्ति को अग्रिम ज़मानत दे दी। उन पर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकवादी हमले के बाद सोशल मीडिया पर सरकार पर सवाल उठाने वाली एक पोस्ट डालने के आरोप में धारा 353(3) और 152 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। ज़मानत याचिका स्वीकार करते हुए, जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने कहा कि एजीए यह साबित नहीं कर पाए कि उन्हें राहत देने से व्यापक समाज पर कोई प्रभाव पड़ेगा, या कि अगर उन्हें ज़मानत दी जाती है, तो स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूर्ण जांच...
दुष्कर्म मामले में प्रज्वल रेवन्ना की जमानत याचिका सत्र न्यायालय भेजी, कर्नाटक हाईकोर्ट ने 10 दिन की समयसीमा तय की
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को JD(S) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को उनके खिलाफ कथित बलात्कार और यौन उत्पीड़न मामले में नियमित जमानत मांगने के लिए सत्र अदालत में आरोपित किया। हालांकि, निचली अदालत में उनका उपाय समाप्त होने के बाद अदालत ने उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की छूट दी है।लगातार दूसरी बार जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसआर कृष्ण कुमार की पीठ ने निर्देश दिया कि अगर रेवन्ना सत्र अदालत जाते हैं तो उनकी याचिका का निस्तारण 10 दिन के भीतर किया जाना चाहिए। एकल न्यायाधीश ने कई...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, BNS के तहत विधेय अपराधों के आधार पर ED PMLA के तहत मामले दर्ज कर सकता है
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंगलवार (8 जुलाई) को कहा कि नव-स्थापित भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज 'विधेय अपराधों' (Predicate Offences) को कठोर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 'अनुसूचित अपराध' माना जा सकता है, भले ही इसकी अनुसूची केवल निरस्त भारतीय दंड संहिता (IPC) को संदर्भित करती हो।सिंगल जज जस्टिस अमित बोरकर ने एक ज़मानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) BNS के तहत दर्ज विधेय अपराधों का हवाला देते हुए PMLA के तहत मामले दर्ज कर सकता है और उक्त...
चिन्नास्वामी भगदड़ मामले में CAT टिप्पणी हटाने की मांग पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने RCB की याचिका पर नोटिस जारी किया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने IPL क्रिकेट टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास मची भगदड़ के लिए टीम को दोषी ठहराने वाली केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) की टिप्पणी को हटाने की मांग की गई है।जस्टिस एसजी पंडित और जस्टिस टीएम नदाफ की खंडपीठ ने नोटिस जारी किया और मामले को अब 17 जुलाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। यह हादसा चिन्नास्वामी स्टेडियम में आईपीएल में 2025 की जीत का जश्न मनाने के लिए टीम की घोषणा से पहले हुआ। CAT के अनुसार, यह घोषणा...
हरियाणा के अपंजीकृत प्ले स्कूल में 4 साल के बच्चे की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से जवाब तलब
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरसा के मामेरा कलां गांव में एक अपंजीकृत प्ले स्कूल में 4 वर्षीय बच्चे अर्मान की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार से जवाब मांगाचीफ जस्टिस शील नागु और जस्टिस संजीव बेरी की पीठ ने महिला एवं बाल विकास विभाग के महानिदेशक और सिरसा के उपायुक्त को नोटिस जारी कर मामले में जवाब तलब किया है।हाईकोर्ट ने 'द संडे ट्रिब्यून' में 6 जुलाई, 2025 को छपी खबर के आधार पर यह संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया कि स्मॉल वंडर प्ले स्कूल नामक संस्थान बिना किसी सरकारी...
HP हाईकोर्ट ने न्यायिक पदोन्नति परीक्षा के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की, सख्त टिप्पणी की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि यदि न्यायिक अधिकारियों ने बिना किसी आपत्ति के पदोन्नति के लिए विभागीय परीक्षा में भाग लिया था तो वे बाद में उसके नियमों को चुनौती नहीं दे सकते। कोर्ट ने याचिकाओं को इस आधार पर खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता खुद न्यायिक अधिकारी हैं, जिन्हें चयन प्रक्रिया में बिना आपत्ति के भाग लेने के परिणामों की समझ होनी चाहिए।जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस संदीप शर्मा की खंडपीठ ने कहा,"याचिकाकर्ता अपने कार्य और आचरण के कारण उक्त विनियमन को चुनौती देने से रोके गए और केवल इसी...
जैन अनुष्ठान 'संथारा' से जुड़ी नाबालिग की मौत पर जनहित याचिका पर मध्य हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (8 जुलाई) को केंद्र और राज्य सरकारों को जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और विक्षिप्त व्यक्तियों के लिए 'संथारा' अनुष्ठान पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।बता दें, संथारा एक जैन अनुष्ठान है जिसमें स्वेच्छा से मृत्युपर्यंत उपवास किया जाता है। इस प्रथा के अनुसार, व्यक्ति आध्यात्मिक शुद्धि और संसार से विरक्ति प्राप्त करने के लिए मृत्युपर्यंत धीरे-धीरे भोजन और जल का सेवन कम करता है। याचिका में कहा गया कि इस प्रथा में भोजन और जल से...
Liquor Policy Case: समन के खिलाफ अरविंद केजरीवाल की याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने ED से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (AAP) प्रमुख अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें कथित शराब नीति घोटाले से संबंधित धन शोधन मामले में उन्हें जारी समन को बरकरार रखने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई।जस्टिस रविंदर डुडेजा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जवाब मांगा और उसे छह सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।ED की ओर से पेश हुए वकील ने शुरुआत में ही केजरीवाल की याचिका की स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्ति जताई। यह दलील दी गई कि यह याचिका...
'इतना आसान नहीं, इसमें भारी बुनियादी ढांचे के निवेश की आवश्यकता': आम जनता को CIC की सुनवाई में शामिल होने की अनुमति देने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को जनहित याचिका का निपटारा किया, जिसमें केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को आम जनता के साथ-साथ पत्रकारों को भी कार्यवाही में प्रत्यक्ष और वर्चुअल रूप से शामिल होने की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह मुद्दा उतना सरल नहीं है, जितना याचिकाकर्ता दर्शाना चाहते हैं। इसके लिए भारी बुनियादी ढांचे के निवेश की आवश्यकता है।यह याचिका सौरव दास सहित विभिन्न पत्रकारों द्वारा दायर की गई।CIC के समक्ष...
शिक्षकों द्वारा छात्रों को बेंत से पीटना या शारीरिक दंड देना अपराध नहीं, हालांकि अतिवादी/क्रूर कृत्य अपराध माना जाएगा: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि शिक्षकों द्वारा छात्रों को बेंत से पीटना या शारीरिक दंड देना, वर्तमान क़ानून के अनुसार, BNS और किशोर न्याय अधिनियम, (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। हालांकि, न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वह ऐसे मामलों को बाहर नहीं कर रहा है जहां बच्चे के शरीर के किसी भी "महत्वपूर्ण अंग पर शारीरिक दंड" दिया गया हो, न ही वह शिक्षकों द्वारा प्रदर्शित किसी भी "दुष्ट प्रवृत्ति" को बाहर कर रहा है। न्यायालय ने कहा कि ये असाधारण परिस्थितियां...
दिल्ली में जारी OBC सर्टिफिकेट को 'माइग्रेंट' नहीं माना जा सकता, भले ही वह पिता के अन्य राज्य के सर्टिफिकेट पर आधारित हो: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में दिल्ली सरकार द्वारा एक उम्मीदवार को जारी OBC सर्टिफिकेट को केवल इसलिए 'माइग्रेंट' मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह उसके पिता के उत्तर प्रदेश में जारी जाति सर्टिफिकेट के आधार पर बना था। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जब सर्टिफिकेट दिल्ली के अधिकारियों द्वारा जारी किया गया तो उसे माइग्रेंट प्रमाणपत्र नहीं कहा जा सकता।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस अजय दिग्पौल की खंडपीठ ने कहा,“प्रमाणपत्र को जैसा है, वैसा ही पढ़ा जाना चाहिए। इसमें यह कहीं नहीं लिखा कि यह माइग्रेंट के तौर...
स्वागत रेस्टोरेंट ने ट्रेडमार्क उल्लंघन का आरोप लगाते हुए तेलंगाना स्थित होटल सीरीज के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया
दिल्ली की लोकप्रिय रेस्टोरेंट सीरीज ने 'स्वागत' नाम के इस्तेमाल को लेकर ट्रेडमार्क उल्लंघन का आरोप लगाते हुए तेलंगाना स्थित होटल ग्रुप के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।जस्टिस अमित बंसल ने रेस्टोरेंट के मुकदमे और अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन, साथ ही होटल समूह के ट्रेडमार्क को रद्द करने की मांग वाली सुधार याचिका दोनों पर नोटिस जारी किए।स्वागत नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में फ्रैंचाइज़ी आधार पर होटल चलाता है।होटल स्वागत का दावा है कि वह 1991 से तेलंगाना में कार्यरत है। वर्तमान में विवादित नाम से 11...
उदयपुर फाइल्स विवाद: CBFC ने कहा- आपत्तिजनक हिस्से फिल्म से हटाए गए, दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्माता को आज ही स्क्रीनिंग करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (9 जुलाई) को 'Udaipur Files: Kanhaiya Lal Tailor Murder' फिल्म से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान सेंसर बोर्ड (CBFC) के इस बयान के बाद कि फिल्म के आपत्तिजनक हिस्सों को हटा दिया गया, फिल्म निर्माता को निर्देश दिया कि पक्षकारों के वकीलों के लिए आज ही फिल्म की स्क्रीनिंग आयोजित की जाए।यह मामला जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) सहित कई याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें फिल्म के खिलाफ हेट स्पीच और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आधार...
दिल्ली दंगे: पुलिस का कहा- UAPA के तहत ज़मानत के लिए सिर्फ़ देरी कोई कारण नहीं, हाईकोर्ट ने तस्लीम अहमद की ज़मानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को UAPA मामले में आरोपी तस्लीम अहमद की ज़मानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। तस्लीम अहमद ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में बड़ी साज़िश का आरोप लगाया था।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने अहमद की ओर से वकील महमूद प्राचा और दिल्ली पुलिस की ओर से एसपीपी अमित प्रसाद की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।बता दें, मंगलवार को प्राचा ने मुकदमे में देरी के आधार पर दलीलें पेश करते हुए कहा कि उन्होंने निचली अदालत से एक दिन की भी...
DNA टेस्ट का आदेश देने से पहले बच्चे के अधिकारों की रक्षा जरूरी, सिर्फ मां की सहमति ही पर्याप्त नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी बच्चे की मां उसके पितृत्व की जांच के लिए DNA टेस्ट कराने के लिए सहमत भी हो तब भी कोर्ट को बच्चे के अधिकारों का संरक्षक (Custodian) बनकर उसके हितों पर विचार करना आवश्यक है। कोर्ट को टेस्ट के पक्ष और विपक्ष दोनों पहलुओं का मूल्यांकन करना चाहिए, न कि केवल माता-पिता के विवाद को हल करने के उद्देश्य से DNA टेस्ट का आदेश दे देना चाहिए।जस्टिस आर.एम. जोशी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें महिला ने फैमिली कोर्ट द्वारा उसके बच्चे का DNA टेस्ट कराने के आदेश...
बैंक कर्मचारी को 'धोखाधड़ी' के रूप में वर्गीकृत करने संबंधी आंचलिक कार्यालय समिति की रिपोर्ट अपराधी को अवश्य दी जानी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के वर्गीकरण हेतु आंचलिक कार्यालय समिति की रिपोर्ट अपराधी कर्मचारी को अवश्य दी जानी चाहिए ताकि वह उसे चुनौती दे सके।यह भी कहा कि यदि RBI के मास्टर निर्देश में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है तो अपराधी कर्मचारी को "धोखाधड़ी" करने वाला घोषित करने वाला आदेश लागू रह सकता है और वह धोखाधड़ी के वर्गीकरण हेतु आंचलिक कार्यालय समिति की रिपोर्ट के विरुद्ध उचित कानूनी उपाय अपना सकता है।धोखाधड़ी के वर्गीकरण हेतु आंचलिक कार्यालय समिति ऐसा संगठन है, जिसके आंचलिक...
हाईकोर्ट ने भोपाल गैस त्रासदी मामले की सुनवाई कर रहे जजों के ट्रांसफर, पदोन्नति या रिटायरमेंट पर फैसला आने तक रोक लगाने की याचिका खारिज की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (8 जुलाई) को भोपाल गैस पीड़ित संघर्ष समिति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया, जिसमें 1984 की भोपाल गैस त्रासदी से संबंधित लंबे समय से लंबित मामलों की सुनवाई कर रहे जजों के ट्रांसफर, पदोन्नति या सेवानिवृत्ति को फैसला सुनाए जाने तक रोकने का अनुरोध किया गया।अदालत द्वारा मौखिक रूप से याचिका की पोषणीयता और जनहित याचिका में की गई प्रार्थनाओं पर सवाल उठाए जाने के बाद याचिकाकर्ता ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग के क्रियान्वयन में पुलिस बल उपलब्ध न कराने पर SSP को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक आदेश पारित कर गोरखपुर के सीनियर पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया कि उन्होंने हाईकोर्ट के आयोग का क्रियान्वयन कर रहे लघुवाद कोर्ट जज को आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराने के उसके आदेश का पालन क्यों नहीं किया।जस्टिस जे.जे. मुनीर की पीठ भानु प्रताप और अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी, जो गोरखपुर जिले के खजनी तहसील के टप्पा हवेली, ग्राम कटया में तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण से...
'व्यभिचार करना' और 'व्यभिचार में रहना' अलग बातें हैं, केवल एक बार की चूक पर नहीं रोका जा सकता गुज़ारा भत्ता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने गुजारा भत्ता पाने के अधिकार का निर्धारण करने के लिए पत्नी द्वारा 'व्यभिचार करने' और 'व्यभिचार में रहने' के बीच अंतर स्पष्ट किया।जस्टिस जितेंद्र कुमार ने कहा,"व्यभिचार में रहना" आचरण के एक सतत क्रम को दर्शाता है, न कि अनैतिकता के छिटपुट कृत्यों को। सद्गुणों से एक या दो चूक व्यभिचार के कृत्य माने जाएंगे, लेकिन यह दर्शाने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे कि महिला "व्यभिचार में रह रही थी"। केवल चूक, चाहे वह एक हो या दो और सामान्य जीवन में वापस लौट आना व्यभिचार में रहना नहीं कहा जा सकता।...




















