हाईकोर्ट

जिस जज ने फैसला सुरक्षित रखा, उसे ट्रांसफर के बावजूद फैसला सुनाना होगा, उत्तराधिकारी जज दोबारा सुनवाई का आदेश नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
जिस जज ने फैसला सुरक्षित रखा, उसे ट्रांसफर के बावजूद फैसला सुनाना होगा, उत्तराधिकारी जज दोबारा सुनवाई का आदेश नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब किसी क्रिमिनल ट्रायल में फाइनल बहस पूरी हो जाती है और मामला फैसले के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है तो जिस जज ने केस सुना है, उसे फैसला सुनाना ही होगा, भले ही बाद में उसका ट्रांसफर हो जाए।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी 18.11.2025 और 26.11.2025 के आदेशों पर भरोसा किया, जिसमें कहा गया कि सभी ट्रांसफर किए गए ज्यूडिशियल अधिकारियों को उन मामलों के बारे में सूचित करना होगा, जिनमें चार्ज छोड़ने से पहले फैसले या आदेश सुरक्षित रखे गए और उन्हें...

धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से बरी होने पर धारा 409 आईपीसी में दोषसिद्धि का आधार खत्म: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की
धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से बरी होने पर धारा 409 आईपीसी में दोषसिद्धि का आधार खत्म: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की

दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा 409 आईपीसी (आपराधिक विश्वासघात) के तहत दोषसिद्ध कंपनी निदेशक की सजा निलंबित कर दी है। अदालत ने कहा कि जब निदेशक को धोखाधड़ी (धारा 420) और जालसाजी (धाराएं 468 व 471 आईपीसी) के आरोपों से बरी कर दिया गया है, तो धारा 409 के तहत दोषसिद्धि का मूल आधार (substratum) कमजोर हो जाता है।जस्टिस विकास महाजन ने यह आदेश उस अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें संयुक्त उद्यम कंपनी से लगभग ₹3 करोड़ की धनराशि के गबन का आरोप था। अदालत ने कहा कि धारा 409 का आरोप जालसाजी और धोखाधड़ी के...

एयर प्यूरीफायर पर GST रेट तय करना संवैधानिक ढांचे को बिगाड़ देगा: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा
एयर प्यूरीफायर पर GST रेट तय करना संवैधानिक ढांचे को बिगाड़ देगा: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) का विरोध किया, जिसमें एयर प्यूरीफायर को "मेडिकल डिवाइस" घोषित करने और उन पर 18% GST हटाने की मांग की गई।अपने हलफनामे में सरकार ने कहा कि GST काउंसिल ही एकमात्र संवैधानिक रूप से नामित संस्था है, जो GST से जुड़े मामलों पर सिफारिशें करती है। ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रक्रिया को दरकिनार कर देगा।हलफनामे में कहा गया कि ऐसा हस्तक्षेप भारत के संविधान के अनुच्छेद 279A द्वारा संरक्षित संघीय संतुलन को भी...

POCSO पीड़िता की उम्र तय करने के लिए केवल किशोर न्याय कानून ही एकमात्र आधार नहीं, मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य भी मान्य: केरल हाइकोर्ट
POCSO पीड़िता की उम्र तय करने के लिए केवल किशोर न्याय कानून ही एकमात्र आधार नहीं, मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य भी मान्य: केरल हाइकोर्ट

केरल हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के मामलों में पीड़िता की उम्र निर्धारित करने के लिए किशोर न्याय अधिनियम अथवा उसके नियम ही एकमात्र तरीका नहीं हैं।अदालत ने कहा कि पीड़िता की आयु तय करने के लिए मौखिक साक्ष्य और दस्तावेजी साक्ष्य पर भी भरोसा किया जा सकता है।जस्टिस बेच्चू कुरियन थॉमस ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम की धारा 34 तथा पूर्व के खंडपीठ के निर्णयों का परीक्षण करते हुए यह टिप्पणी की।अदालत ने कहा कि यह...

सुलभ न्याय की मांग वाली जनहित याचिका में दिव्यांग व्यक्ति को हस्तक्षेप की अनुमति, राज्य सरकार और हाइकोर्ट प्रशासन से जवाब तलब
सुलभ न्याय की मांग वाली जनहित याचिका में दिव्यांग व्यक्ति को हस्तक्षेप की अनुमति, राज्य सरकार और हाइकोर्ट प्रशासन से जवाब तलब

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने दिव्यांगजनों, दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों, महिलाओं और सीनियर सिटीजन के लिए न्यायालय परिसरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और हाइकोर्ट प्रशासन को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया। साथ ही अदालत ने एक दिव्यांग व्यक्ति को इस याचिका में हस्तक्षेप करने की अनुमति भी दी।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने दिव्यांग नरेंद्र कुमार मिश्रा द्वारा दायर हस्तक्षेप आवेदन स्वीकार करते...

दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत पुनरीक्षण अधिकार सीमित, तथ्यात्मक निष्कर्षों में दखल नहीं दे सकता: हाइकोर्ट
दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत पुनरीक्षण अधिकार सीमित, तथ्यात्मक निष्कर्षों में दखल नहीं दे सकता: हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 25बी की उपधारा (8) के तहत उसका पुनरीक्षण अधिकार केवल पर्यवेक्षणात्मक प्रकृति का है। इसके अंतर्गत न तो साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन किया जा सकता है और न ही किराया नियंत्रक द्वारा दर्ज किए गए तथ्यात्मक निष्कर्षों पर दोबारा विचार किया जा सकता है।जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने यह टिप्पणी एक किरायेदार द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें मकान मालिक की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर पारित बेदखली आदेश को...

ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना के विरोध से जुड़े मामले में पूर्व बार अध्यक्ष को जमानत, गिरफ्तारी अवैध: हाइकोर्ट
ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना के विरोध से जुड़े मामले में पूर्व बार अध्यक्ष को जमानत, गिरफ्तारी अवैध: हाइकोर्ट

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने बुधवार को हाईकोर्ट परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना के विरोध में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए गए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा को जमानत दी। अदालत ने पुलिस की कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए कहा कि गिरफ्तारी के दौरान कानून द्वारा अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस आशीष श्रोती की खंडपीठ ने कहा कि पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 के तहत गिरफ्तारी के...

भावनाओं के साथ खिलवाड़: हाईकोर्ट ने गुरु ग्रंथ साहिब के लापता स्वरूपों को लेकर SGPC कर्मचारियों के रिटायरमेंट बेनिफिट्स रोकने के फैसले को सही ठहराया
'भावनाओं के साथ खिलवाड़': हाईकोर्ट ने गुरु ग्रंथ साहिब के लापता स्वरूपों को लेकर SGPC कर्मचारियों के रिटायरमेंट बेनिफिट्स रोकने के फैसले को सही ठहराया

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के पूर्व कर्मचारियों द्वारा रिटायरमेंट बेनिफिट्स जारी करने की मांग वाली रिट याचिकाओं के एक बैच को खारिज कर दिया, जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों के लापता होने से संबंधित है।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि हालांकि SGPC के खिलाफ रिट याचिकाएं सुनवाई योग्य हैं, लेकिन याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं मिल सकती, क्योंकि उनका सस्पेंशन/टर्मिनेशन SGPC सेवा नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए विधिवत...

गरीबी पैरोल में रुकावट नहीं बन सकती: राजस्थान हाईकोर्ट ने गरीब उम्रकैद के कैदी के लिए ज़मानत की शर्त माफ की, जारी किए दिशा-निर्देश
गरीबी पैरोल में रुकावट नहीं बन सकती: राजस्थान हाईकोर्ट ने गरीब उम्रकैद के कैदी के लिए ज़मानत की शर्त माफ की, जारी किए दिशा-निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी गरीब कैदी से पैरोल पर रिहा होने की शर्त के तौर पर ज़मानत देने पर ज़ोर देना, जो उस शर्त को पूरा नहीं कर सकता, खासकर पिछले कई न्यायिक दखल के बाद जब यह शर्त माफ कर दी गई, संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का उल्लंघन है और नैतिक रूप से गलत है।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस फरजंद अली की डिवीजन बेंच ने कहा कि राजस्थान कैदियों की पैरोल पर रिहाई नियम, 2021 (नियम) के नियम 4 के तहत बताए गए पर्सनल बॉन्ड और/या ज़मानत देने की शर्त निर्देश देने वाली थी, अनिवार्य या सज़ा देने वाली नहीं।...

Civil Service Rules | आरोपी की गैरमौजूदगी में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाले की जांच करना, ICC रिपोर्ट के बिना अनुशासनात्मक कार्रवाई को अमान्य करता है: दिल्ली हाईकोर्ट
Civil Service Rules | आरोपी की गैरमौजूदगी में यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाले की जांच करना, ICC रिपोर्ट के बिना अनुशासनात्मक कार्रवाई को अमान्य करता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सेंट्रल सिविल सर्विसेज (क्लासिफिकेशन, कंट्रोल एंड अपील) रूल्स 1965 के नियम 14(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही, जो इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) की जांच पर आधारित है, तब अमान्य हो जाती है जब शिकायतकर्ताओं की जांच दोषी कर्मचारी की गैरमौजूदगी में की जाती है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने इस तरह केंद्र की अपील खारिज की और CAT के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें IIHT गुवाहाटी में एक प्रोबेशनर की बर्खास्तगी रद्द कर दी गई, जिस पर यौन उत्पीड़न का आरोप...

आम बिजनेस में पेमेंट का डायरेक्टर का आश्वासन अपने आप धोखाधड़ी का आरोप नहीं बन सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
आम बिजनेस में पेमेंट का डायरेक्टर का आश्वासन अपने आप धोखाधड़ी का आरोप नहीं बन सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कमर्शियल लेनदेन के सामान्य कोर्स में डायरेक्टर द्वारा दिया गया पेमेंट का आश्वासन अपने आप में धोखाधड़ी वाला लालच नहीं माना जा सकता, जिससे IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध लगे।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह टिप्पणी मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए की, जिस पर धोखाधड़ी का आरोप था। आरोप था कि उनकी कंपनी को पेमेंट के आश्वासन पर माल सप्लाई किया गया, जिसे बाद में पूरा नहीं किया गया।बेंच ने कहा,“आरोपों में बताए गए पेमेंट का “आश्वासन” बिजनेस...

वकीलों की हड़ताल के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने शनिवार को काम करने के फैसले की समीक्षा के लिए पांच जजों का पैनल बनाया
वकीलों की हड़ताल के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने शनिवार को काम करने के फैसले की समीक्षा के लिए पांच जजों का पैनल बनाया

राजस्थान हाईकोर्ट ने 5 (पांच) जजों की कमेटी बनाई, जो इस बात पर अपनी रिपोर्ट देगी कि क्या हर महीने दो (2) शनिवार को राजस्थान हाईकोर्ट के काम करने के बारे में फुल कोर्ट के फैसले की समीक्षा करने की ज़रूरत है:1. माननीय जस्टिस समीर जैन2. माननीय जस्टिस कुलदीप माथुर 3. माननीय जस्टिस अनिल कुमार उपमन 4. माननीय जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित 5. माननीय जस्टिस सुनील बेनीवाल कमेटी को संबंधित बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सीनियर वकीलों के साथ-साथ राजस्थान बार काउंसिल के चेयरमैन के साथ अलग-अलग मीटिंग करनी...

झारखंड हाईकोर्ट ने पांच साल की बच्ची के रेप और मर्डर के दोषी व्यक्ति की मौत की सज़ा उम्रकैद में बदली
झारखंड हाईकोर्ट ने पांच साल की बच्ची के रेप और मर्डर के दोषी व्यक्ति की मौत की सज़ा उम्रकैद में बदली

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में पांच साल की बच्ची के रेप और मर्डर के दोषी एक आरोपी की मौत की सज़ा को उम्रकैद में यह मानते हुए बदल दिया कि आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की डिवीजन बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी इंदर उरांव को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 6 के तहत अपराधों के लिए दोषी पाया गया। उसे IPC की धारा 302 के तहत मौत की सज़ा और...

पुलिस-रिपोर्ट वाले मामलों में सिर्फ़ राज्य या आरोपी ही जल्द सुनवाई के लिए निर्देश मांग सकते हैं, पीड़ित नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
पुलिस-रिपोर्ट वाले मामलों में सिर्फ़ राज्य या आरोपी ही जल्द सुनवाई के लिए निर्देश मांग सकते हैं, पीड़ित नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट से जुड़े मामलों में, सिर्फ़ राज्य या आरोपी ही ट्रायल को जल्दी निपटाने के लिए निर्देश मांग सकते हैं।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने साफ़ किया कि असल शिकायतकर्ता या पीड़ित ऐसी याचिका दायर नहीं कर सकता।बेंच ने कहा,“क्योंकि यह मामला राज्य का है, इसलिए असल शिकायतकर्ता की भूमिका सिर्फ़ गवाह तक सीमित है। इसलिए सिर्फ़ राज्य या आरोपी ही ऐसी याचिका दायर कर सकते हैं।”इस तरह कोर्ट ने शिकायतकर्ता द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें ट्रायल कोर्ट से IPC की धारा 420 के तहत दर्ज...

झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली ड्यूटी लगाने के लिए नेट चार्ज फॉर्मूला रद्द किया, अत्यधिक डेलीगेशन पर सवाल उठाया
झारखंड हाईकोर्ट ने बिजली ड्यूटी लगाने के लिए 'नेट चार्ज' फॉर्मूला रद्द किया, अत्यधिक डेलीगेशन पर सवाल उठाया

झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को बिहार बिजली ड्यूटी एक्ट, 1948 में राज्य के एक संशोधन द्वारा लाए गए एक प्रावधान रद्द कर दिया, जिसके तहत उपभोक्ताओं के "नेट चार्ज" के प्रतिशत के रूप में बिजली ड्यूटी लगाने की अनुमति थी। कोर्ट ने कहा कि विधायिका ने बिना किसी पॉलिसी गाइडेंस के अपनी टैक्स लगाने की शक्ति कार्यपालिका को सौंप दी थी।कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को बिना किसी स्टैंडर्ड या लिमिट तय किए, वैल्यू-बेस्ड फॉर्मूले पर बिजली ड्यूटी तय करने का अधिकार देना, विधायी शक्ति का अत्यधिक डेलीगेशन था और इससे...

पुलिस रिपोर्ट से दर्ज मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ अपील का अधिकार केवल राज्य को, तीसरे पक्ष को नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट
पुलिस रिपोर्ट से दर्ज मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ अपील का अधिकार केवल राज्य को, तीसरे पक्ष को नहीं: दिल्ली हाइकोर्ट

दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन आपराधिक मामलों की शुरुआत पुलिस रिपोर्ट के आधार पर होती है, उनमें अभियुक्त के बरी होने के खिलाफ अपील दायर करने का अधिकार केवल राज्य सरकार को प्राप्त है। ऐसे मामलों में कोई तीसरा पक्ष दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 372 के प्रावधान का सहारा लेकर अपील नहीं कर सकता, जब तक वह विधि में परिभाषित “पीड़ित” की श्रेणी में न आता हो।जस्टिस अमित महाजन ने यह निर्णय एक महिला द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए दिया।याचिका में महिला ने एक संपत्ति से जुड़े...

बच्ची की मौत के बाद ई-रिक्शा नियमों के सख्त पालन की मांग पर दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस
बच्ची की मौत के बाद ई-रिक्शा नियमों के सख्त पालन की मांग पर दिल्ली हाइकोर्ट ने जारी किया नोटिस

दिल्ली हाइकोर्ट ने राजधानी में ई-रिक्शा के संचालन से जुड़े कानूनों और नियमों के सख्त पालन की मांग वाली जनहित याचिका पर बुधवार को नोटिस जारी किया।न्यायालय ने इस मामले में दिल्ली सरकार, परिवहन विभाग, दिल्ली यातायात पुलिस और नगर निगम दिल्ली से जवाब मांगा है।मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ के समक्ष यह जनहित याचिका मनीष पराशर द्वारा दायर की गई।याचिकाकर्ता की आठ वर्षीय पुत्री की अगस्त माह में जाफराबाद क्षेत्र में उस समय मृत्यु हो गई थी,...

IBC मामलों में NCLT पर हाईकोर्ट समानांतर अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग नहीं कर सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट
IBC मामलों में NCLT पर हाईकोर्ट समानांतर अवमानना क्षेत्राधिकार का प्रयोग नहीं कर सकते: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि दिवालियापन के मामलों में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा पारित आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली अवमानना याचिकाएं सीधे हाईकोर्ट में दायर नहीं की जा सकतीं।जस्टिस मिलिंद एन जाधव की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि एक बार जब कानून द्वारा NCLT को अवमानना की शक्तियां दे दी जाती हैं तो हाईकोर्ट को समानांतर क्षेत्राधिकार का प्रयोग नहीं करना चाहिए।कोर्ट ने कहा,“एक बार जब ट्रिब्यूनल को ऐसा अवमानना क्षेत्राधिकार मिल जाता है तो इस कोर्ट को अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा...

उत्तर प्रदेश पुलिस की वेबसाइट पर सभी आरोप पत्र अपलोड करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
उत्तर प्रदेश पुलिस की वेबसाइट पर सभी आरोप पत्र अपलोड करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज

इलाहाबाद हाइकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वर्ष 2020 में दायर उस जनहित याचिका खारिज की, जिसमें उत्तर प्रदेश पुलिस को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि प्रत्येक मामले में जांच पूरी होने के 24 घंटे के भीतर आरोप पत्र को उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के निर्णय पर भरोसा करते हुए कहा कि आरोप पत्र सार्वजनिक दस्तावेज नहीं होते और उन्हें सार्वजनिक मंच पर उपलब्ध कराना दंड प्रक्रिया संहिता की व्यवस्था के विपरीत...