हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने लोक अदालतों में ट्रैफिक चालान के निपटारे की अनुमति पर राज्य से जवाब मांगा
पटना हाईकोर्ट ने लोक अदालतों में ट्रैफिक चालान के निपटारे की अनुमति पर राज्य से जवाब मांगा

पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा कि क्या ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों का निपटारा लोक अदालतों में किया जा सकता है।चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की बेंच एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई कि वे ट्रैफिक और मोटर वाहनों से जुड़े कंपाउंडिंग मामलों (समझौते योग्य मामले)—जिनमें निजी मोटर वाहनों और उनके मालिकों को जारी किए गए लंबित ट्रैफिक चालान भी शामिल हैं—की सुनवाई और निपटारे के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी...

क्या मीटिंग्स पर पूरी तरह बैन लगाना आर्टिकल 19 का उल्लंघन नहीं होगा?: हाईकोर्ट ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन पर रोक को लेकर DU और दिल्ली पुलिस को जारी किया नोटिस
'क्या मीटिंग्स पर पूरी तरह बैन लगाना आर्टिकल 19 का उल्लंघन नहीं होगा?': हाईकोर्ट ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन पर रोक को लेकर DU और दिल्ली पुलिस को जारी किया नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (12 मार्च) को याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के अंदर सार्वजनिक मीटिंग्स पर बैन लगाने वाले आदेशों को चुनौती दी गई।बता दें, 17 फरवरी को यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर ने एक महीने के लिए यूनिवर्सिटी कैंपस में किसी भी तरह की सार्वजनिक मीटिंग्स, जुलूस, प्रदर्शन और विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था।सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीज़न बेंच को बताया गया कि पुलिस सब-डिवीजन सिविल लाइंस द्वारा CrPC...

फर्जी दावों को रोकने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट
फर्जी दावों को रोकने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्र का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है सरकार: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने उन याचिकाओं के समूह को खारिज कर दिया, जिनमें राज्य सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत पिछले पाँच वर्ष या उससे अधिक समय से दिव्यांग (PwD) कोटे में नियुक्त कर्मचारियों की 'बेंचमार्क डिसेबिलिटी' का अनिवार्य पुनर्मूल्यांकन (reassessment) कराने का निर्देश दिया गया था।जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने कहा कि राज्य का यह कर्तव्य है कि वह आरक्षण नीतियों को कानूनी और पारदर्शी तरीके से लागू करे, ताकि समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। अदालत ने कहा कि व्यवस्था समावेशी...

नाबालिग होने पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की
नाबालिग होने पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय यदि उसका आश्रित निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है तो वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को इस आधार पर अनिश्चित समय तक इंतजार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि नाबालिग आश्रित बाद में वयस्क हो जाएगा।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने सरकारी कर्मचारी के बेटे द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन को खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी...

केवल प्रशासनिक असुविधा बताकर डॉक्टर को उच्च अध्ययन से नहीं रोका जा सकता: राजस्थान हाइकोर्ट
केवल प्रशासनिक असुविधा बताकर डॉक्टर को उच्च अध्ययन से नहीं रोका जा सकता: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक मेडिकल अधिकारी को बड़ी राहत देते हुए कहा कि केवल प्रशासनिक असुविधा का हवाला देकर किसी डॉक्टर को उच्च अध्ययन करने से रोका नहीं जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि चयनित डॉक्टर को तुरंत सेवा से मुक्त किया जाए ताकि वह सीनियर रेजिडेंसी कोर्स में समय पर शामिल हो सके।जस्टिस नुपुर भाटी की पीठ ने यह अंतरिम आदेश उस याचिका पर दिया, जिसमें राज्य सेवा में कार्यरत एक महिला मेडिकल अधिकारी ने शिकायत की थी कि सीनियर रेजिडेंसी कोर्स में चयनित होने के बावजूद सरकार ने उन्हें पद...

सरकारी अनुमति के बिना मुकदमा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने JDA अधिकारी के खिलाफ अवैध तोड़फोड़ का मामला रद्द किया
सरकारी अनुमति के बिना मुकदमा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने JDA अधिकारी के खिलाफ अवैध तोड़फोड़ का मामला रद्द किया

राजस्थान हाइकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के प्रवर्तन अधिकारी के खिलाफ दर्ज अवैध प्रवेश और तोड़फोड़ का आपराधिक मामला रद्द किया। अदालत ने कहा कि सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कानून के तहत पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है और इसके बिना कार्रवाई जारी नहीं रह सकती।जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा प्रवर्तन अधिकारी के खिलाफ संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई।शिकायतकर्ता का आरोप था कि करीब 50–60 लोग उसके परिसर में जबरन घुस आए...

नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द किया
नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने पंचायत सदस्य का चुनाव रद्द किया

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है। अदालत ने इस आधार पर जनपद पंचायत सदस्य के चुनाव परिणाम रद्द किया।जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने वार्ड नंबर-1 के जनपद सदस्य के चुनाव को निरस्त करते हुए कहा कि उम्मीदवार द्वारा नामांकन पत्र और हलफनामे में गलत जानकारी देना गंभीर अनियमितता है, जिसका चुनाव परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ता है।अदालत ने कहा,“नामांकन पत्र में गलत जानकारी देना भ्रष्ट आचरण है। यह मतगणना से जुड़ा मामला...

घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के आरोप पर इलाहाबाद हाइकोर्ट सख्त, व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश
घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के आरोप पर इलाहाबाद हाइकोर्ट सख्त, व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने बरेली के एक मुस्लिम व्यक्ति को कथित तौर पर अपने घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए उसे चौबीसों घंटे पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यदि उसके या उसकी संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचता है तो उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य की मानी जाएगी।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि हसीन खान की सुरक्षा के लिए 24 घंटे दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएं और वे जहां भी जाएं उनके साथ रहें।मामले में हसीन खान ने पहले...

राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफ़ाई पर असंतोष जताया, कहा - कचरा ठीक से न फेंकने पर नागरिकों पर जुर्माना लग सकता है
राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफ़ाई पर असंतोष जताया, कहा - कचरा ठीक से न फेंकने पर नागरिकों पर जुर्माना लग सकता है

राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की सफ़ाई के मामले में नगर निगम के काम-काज पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कुछ ऐसे कदम उठाने का सुझाव दिया, जिनमें उन नागरिकों पर जुर्माना लगाना भी शामिल है, जिन्होंने अपने इलाके से कचरा हटवाने की अपनी ज़िम्मेदारी पूरी नहीं की।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की डिवीज़न बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में यह तर्क दिया गया कि नगर निगम द्वारा भर्ती किए गए लगभग 8000 सफ़ाई कर्मचारियों के मुकाबले, ज़मीनी स्तर पर बहुत कम लोग ही काम कर रहे हैं।आरोप...

ब्रिटिश नागरिकता विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के 2019 के राहुल गांधी को दिए नोटिस का पूरा रिकॉर्ड तलब किया
ब्रिटिश नागरिकता विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के 2019 के राहुल गांधी को दिए नोटिस का पूरा रिकॉर्ड तलब किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा 2019 में जारी किए गए नोटिस से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड तलब किया।बता दें, BJP सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत के बाद MHA ने 29 अप्रैल, 2019 को गांधी से उनकी नागरिकता के संबंध में "तथ्यात्मक स्थिति" बताने को कहा था। अपनी 2015 की शिकायत में डॉ. स्वामी ने आरोप लगाया कि गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं।जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) सदस्य एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर...

प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार एक वैध अपेक्षा, शादी के आधार पर हुआ ट्रांसफर इसे खत्म नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार एक वैध अपेक्षा, शादी के आधार पर हुआ ट्रांसफर इसे खत्म नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी कर्मचारी का प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार एक वैध अपेक्षा है, जिसे सिर्फ इसलिए खत्म नहीं किया जा सकता कि किसी दूसरे कर्मचारी का ट्रांसफर शादी के आधार पर उस पद पर कर दिया गया।कोर्ट ने आगे स्पष्ट किया कि प्रशासनिक ट्रांसफर का इस्तेमाल इस तरह से नहीं किया जाना चाहिए जिससे किसी कर्मचारी की करियर में आगे बढ़ने की वैध अपेक्षा खत्म हो जाए।चीफ जस्टिस जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की एक डिवीज़न बेंच ने टिप्पणी की:"प्रमोशन के लिए विचार...

रिश्तेदार को घर से निकालने के लिए सीनियर सिटिज़न का आवेदन, बिना किसी आर्थिक मदद की मांग के भी मान्य: बॉम्बे हाईकोर्ट
'रिश्तेदार को घर से निकालने के लिए सीनियर सिटिज़न का आवेदन, बिना किसी आर्थिक मदद की मांग के भी मान्य': बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी सीनियर सिटिज़न द्वारा अपने बच्चे या रिश्तेदार को उस प्रॉपर्टी से निकालने के लिए दायर किया गया आवेदन मान्य है, जिसमें सीनियर सिटिज़न का अधिकार है, भले ही उसने किसी आर्थिक मदद की मांग न की हो। कोर्ट ने कहा कि 'माता-पिता और सीनियर सिटिज़न के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत "भरण-पोषण" की परिभाषा में सीनियर सिटिज़न के लिए एक सामान्य और गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए ज़रूरी रहने की जगह और सुरक्षा का प्रावधान भी शामिल है।जस्टिस एन. जे. जमादार भोलेनाथ मेवालाल...

चेक बाउंस के सभी मामलों को आरोपी को नोटिस मिलने के बाद मीडिएशन के लिए भेजा जाना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
चेक बाउंस के सभी मामलों को आरोपी को नोटिस मिलने के बाद मीडिएशन के लिए भेजा जाना चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) के तहत चेक बाउंस के सभी मामलों में ट्रायल कोर्ट को आरोपी को नोटिस मिलने के तुरंत बाद मामलों को मीडिएशन के लिए भेजना चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे विवाद मुख्य रूप से मुआवज़े से जुड़े होते हैं और बातचीत से सुलझाने पर बेहतर तरीके से हल हो जाते हैं।कोर्ट ने कहा कि NI Act के मामलों को देखने वाले हर ट्रायल कोर्ट और सेशन कोर्ट को ऐसे विवादों को सक्रिय रूप से मीडिएशन के लिए भेजना चाहिए, जब तक कि...

रांची ऑफिस में आरोपी पर कथित हमले को लेकर ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज: हाईकोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश
रांची ऑफिस में आरोपी पर कथित हमले को लेकर ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज: हाईकोर्ट ने दिया CBI जांच का आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ झारखंड पुलिस द्वारा दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। साथ ही यह निर्देश दिया कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया जाए। यह मामला पेयजल घोटाले के एक आरोपी से पूछताछ के दौरान ED के रांची जोनल ऑफिस में हुई एक घटना से जुड़े आरोपों से संबंधित है।इससे पहले, हाईकोर्ट ने जांच पर रोक लगाई थी। उस चरण में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की यह दलील दर्ज की थी कि 15 जनवरी, 2026 को सुबह लगभग 6:00 बजे, देर...