गौहाटी हाईकोर्ट

S.482(4) BNSS | 'और' को 'या' के रूप में पढ़ा जाना चाहिए; यदि व्यक्ति BNS की धारा 65 या धारा 70 के तहत आरोपी है तो अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 482(4) के तहत अग्रिम जमानत देने पर प्रतिबंध भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 65 या धारा 70(2) के तहत अपराधों पर लागू होगा।न्यायालय ने माना कि BNSS की धारा 482(4) में आने वाले शब्द "और" को विधायिका के इरादे को प्रभावी बनाने के लिए "या" के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।BNS की धारा 65 16 वर्ष से कम आयु की महिला के साथ बलात्कार के अपराध से संबंधित है। धारा 70(2) 18 वर्ष से कम आयु की महिला के साथ सामूहिक...

दोनों पक्षों के बीच कोई वैध विवाह नही: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने IPC की धारा 498ए के तहत व्यक्ति की दोषसिद्धि खारिज की
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मंगलवार (3 जून) को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित उस निर्णय और आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत उसने भारतीय दंड संहितता (IPC) की धारा 498ए के तहत आरोपी को दोषी ठहराया और सजा सुनाई इस आधार पर कि कोई वैध विवाह नहीं है, जो पीड़िता को IPC की धारा 498ए लागू करने के लिए आवश्यक पत्नी का दर्जा प्रदान कर सके।जस्टिस मिताली ठाकुरिया की एकल पीठ ने इस प्रकार टिप्पणी की,“अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित दिनांक 20.12.2012 के निर्णय और आदेश की जांच करने पर ऐसा प्रतीत होता है कि IPC की धारा 498ए की...

S.187 BNSS | अस्पताल में भर्ती गिरफ्तार व्यक्ति की स्थिति अज्ञात नहीं रह सकती, मजिस्ट्रेट को विजिट या वीसी के माध्यम से सत्यापन करना होगा: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 2 जून को दिए गए आदेश में इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मामलों में जहां गिरफ्तार व्यक्ति को चिकित्सा संबंधी अत्यावश्यकता के कारण गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया जाता है, मजिस्ट्रेट को ऐसे गिरफ्तार व्यक्ति की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में भी मजिस्ट्रेट को व्यक्तिगत मुलाकात या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायिक या पुलिस हिरासत में रिमांड आदेश पारित करके गिरफ्तार व्यक्ति की स्थिति की पुष्टि करनी होती...

पति का बच्चे के रंग के कारण पितृत्व पर संदेह के कारण पत्नी पर हमला, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अलग होने की दी अनुमति
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बुधवार (4 जून) को महिला को CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का उसका अधिकार स्वीकार करते हुए उसे अपने पति से अलग रहने की अनुमति दी। न्यायालय ने पाया कि पत्नी के पास अपने पति से दूर रहने के पर्याप्त कारण थे, जिसे अपने बच्चे के गोरे रंग पर निराधार संदेह था और उसने उसके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया।जस्टिस पार्थिवज्योति साइका की पीठ ने कहा,"याचिकाकर्ता और प्रतिवादी दोनों ही सांवले रंग के लोग हैं। लेकिन उनका बच्चा गोरा था। यही कारण है कि पत्नी और पति के बीच विवाद पैदा हुआ। पति ने...

'विदेशी' घोषित किए गए गुमशुदा बंदियों के परिवारों की याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा असम सरकार से जवाब
गुवाहाटी हाईकोर्ट की जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस मालाश्री नंदी की खंडपीठ ने गुरुवार को राज्य सरकार के वकील को नोटिस जारी कर निर्देश दिया कि वे असम के कामरूप जिले के दो निवासियों के ठिकाने के बारे में निर्देश प्राप्त करें, जिनका 25 मई को असम पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद से कोई पता नहीं चल पाया, जैसा कि उनके परिवार ने दावा किया।वर्तमान याचिका याचिकाकर्ता के चाचाओं के ठिकाने की मांग करते हुए दायर की गई, जो असम पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद से लापता हैं।याचिकाकर्ता ने...

बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए मज़बूत नीति और नियमित प्रशिक्षण जरूरी: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में बच्चों को यौन हिंसा और शोषण से बचाने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण सुझाव दिए।जस्टिस कौशिक गोस्वामी की एकल पीठ ने कहा कि संविधान के तहत राज्य का यह कर्तव्य है कि वह बच्चों की रक्षा करे। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चे अपनी कोमल उम्र के कारण अक्सर यौन शिकार का आसान लक्ष्य बन जाते हैं, और कई बार वे सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श में अंतर भी नहीं कर पाते।ऐसे में यह आवश्यक है कि बाल संरक्षण से जुड़े सभी पक्ष सरकारी कर्मचारी, बाल कल्याण संस्थान और स्कूल सजग और कड़े कदम उठाएं ताकि...

असम पुलिस द्वारा पहले विदेशी घोषित किए गए भारतीयों की दोबारा गिरफ्तारी पर वकील ने NHRC से की शिकायत
गुवाहाटी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एक वकील ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक "तत्काल शिकायत" लिखी है, जिसमें पुलिस द्वारा 23 मई तक असम में "भारतीय नागरिकों की मनमानी पुन: गिरफ्तारी और हिरासत और पहले रिहा घोषित विदेशियों की हिरासत में" स्वत: संज्ञान लेने के लिए कहा गया है।पत्र में कथित 'जबरन निर्वासन' को रोकने के लिए आयोग द्वारा 'तत्काल हस्तक्षेप' की मांग की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन व्यक्तियों को असम पुलिस द्वारा नए सिरे से गिरफ्तारी और हिरासत में लेने के बाद...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बलात्का के मामले में आरोपी 10 लोगों को जमानत रद्द करने की याचिका पर स्वत: संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया क्योंकि पीड़िता की बात नहीं सुनी गई
इटानगर स्थित गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बलात्कार और तस्करी के एक मामले में दस आरोपियों की जमानत रद्द करने की याचिका पर नोटिस जारी किया है। इस याचिका में पीड़िता या शिकायतकर्ता को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था और निचली अदालत ने पीड़िता/शिकायतकर्ता की सुनवाई किए बिना ही जमानत दे दी थी। जस्टिस संजय कुमार मेधी प्रथम एपीपी बटालियन के निलंबित सहायक कमांडेंट (याचिकाकर्ता) के खिलाफ स्वप्रेरणा से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिन्हें 14 मई, 2024 को आईपीसी की धारा 373 (वेश्यावृत्ति आदि के लिए नाबालिग...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने प्रथागत न्यायालयों के गठन के लिए नागालैंड सरकार को छह सप्ताह का समय दिया
कोहिमा स्थित गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में नागालैंड सरकार को नागालैंड में न्याय और पुलिस प्रशासन के नियम (पांचवां संशोधन) अधिनियम 2025 के अनुसार प्रथागत न्यायालयों और अधीनस्थ जिला प्रथागत न्यायालयों का गठन करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया।जस्टिस काखेतो सेमा और जस्टिस मिताली ठाकुरिया की खंडपीठ दीमापुर के प्रधान जिला और सेशन जज के आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने यह कहते हुए अपील खारिज कर दी थी कि नियमों के तहत ग्राम प्राधिकरण द्वारा पारित निर्णय के...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सजा पूरी करने के बावजूद 1457 दिनों से अवैध रूप से हिरासत में रखे गए नाइजीरियाई नागरिक को वापस भेजने का निर्देश दिया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम और केंद्र सरकार से एक नाइजीरियाई नागरिक को वापस भेजने के लिए उचित कार्रवाई करने को कहा है, जो अपनी सजा काटने के बाद 1457 दिनों से अवैध हिरासत में है। कोर्ट ने कहा ऐसा नहीं किया जाता है तो वह व्यक्ति को रिहा करने के लिए बाध्य होगी। जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस मालाश्री नंदी की खंडपीठ संघीय गणराज्य नाइजीरिया के नागरिक कमरदीन ओलादेजी ओलादिमेजी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (द्वितीय) करीमगंज द्वारा 18 अगस्त, 2021 को...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने यॉबिन समुदाय को अनुसूचित जनजाति लाभ न देने के मामले में केंद्र और अरुणाचल प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया
गुवाहाटी हाईकोर्ट (ईटानगर पीठ) ने सोमवार (5 मई) को केंद्र और अरुणाचल प्रदेश सरकारों को एक जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें दावा किया गया था कि राज्य के योबिन जनजाति समुदाय के लोगों को अन्य अनुसूचित जनजाति समुदायों को प्रदान किए जाने वाले लाभ नहीं मिल रहे हैं।याचिकाकर्ता द्वारा यह तर्क दिया गया था कि अरुणाचल प्रदेश की योबिन जनजाति की अपनी संस्कृति, परंपराएं, प्रथागत कानून और वेशभूषा अरुणाचल प्रदेश राज्य की अन्य जनजातियों से अलग है। इस बात पर प्रकाश डाला गया कि संविधान (अनुसूचित जनजातियां)...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत दायर दावा याचिकाओं में सामग्री विवरण का खुलासा सुनिश्चित करने के लिए अभ्यास निर्देश जारी किए
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक स्वप्रेरणा मामले में पारित निर्देशों के अनुसरण में, गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 2 मई को सभी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों (एमएसीटी)/न्यायालय के संबंध में मोटर वाहन अधिनियम के तहत दावा आवेदन दाखिल करते समय "महत्वपूर्ण विवरणों का खुलासा" सुनिश्चित करने के लिए "अभ्यास निर्देश" जारी किए। संदर्भ के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशों का एक सेट पारित किया था कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 या श्रमिक मुआवजा अधिनियम, 1923 के तहत दावेदारों को भुगतान किया...

अनुच्छेद 22 का उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी के लिए जांच अधिकारी को उत्तरदायी बनाया जाना चाहिए: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने राज्य से पुलिस को संवेदनशील बनाने को कहा
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक गिरफ्तारी के अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले जांच अधिकारियों के खिलाफ कदम नहीं उठाए जाते, तब तक संवैधानिक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन और छेड़छाड़ जारी रहेगी। एनडीपीएस के एक आरोपी की जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए जस्टिस कौशिक गोस्वामी ने कहा,"मैं जांच/गिरफ्तारी करने वाले अधिकारी द्वारा गिरफ्तार व्यक्ति को भारत के संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत उसके अधिकार के बारे में सूचित करने की संवैधानिक आवश्यकता का पालन न करने के संबंध में अपनी असंतुष्टि और नाराजगी...

गुवाहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से बार निकाय से इस्तीफे पर पुनर्विचार करने को कहा
गुहाटी हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (GHCBA) ने गुरुवार (1 मई) को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को पत्र लिखकर उनसे पुनर्विचार करने और संस्था और कानूनी बिरादरी के बड़े हित में जीएचसीबीए की सदस्यता से अपना इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया।बार बॉडी की प्रतिक्रिया तब आई है जब मुख्यमंत्री ने बुधवार को राष्ट्रपति जीएचसीबीए को पत्र लिखकर बार बॉडी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद GHCBA ने हाईकोर्ट को गुहाटी से कामरूप (ग्रामीण) जिले में रामरूप (ग्रामीण) जिले में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने आरक्षित वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे की जनहित याचिका की सुनवाई बंद की, कहा- जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली
ईटानगर स्थित गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सोमवार (28 अप्रैल) को ऩमसाई वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र में कथित अवैध भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (Land Possession Certificates) / अनापत्ति प्रमाणपत्र (No Objection Certificates) के जारी होने के संबंध में दायर जनहित याचिका (PIL) को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया कि सरकार द्वारा कराई गई जांच में कोई अवैधता नहीं पाई गई।चीफ जस्टिस विजय बिश्नोई और जस्टिस कार्दक एते की खंडपीठ ने कहा,“हम यह मानते हैं कि चूंकि प्रतिवादियों ने पहले ही नमसाई वन प्रभाग के आरक्षित वन...

POCSO अधिनियम | अगर पीड़िता की गवाही अविश्वसनीय पाई जाती है तो अदालत को उसकी पुष्टि करनी चाहिए: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित POCSO अधिनियम की धारा 10 के तहत एक दोषसिद्धि को इस आधार पर खारिज कर दिया कि पीड़िता के साक्ष्य को गुणवत्ता के मामले में सही नहीं पाया गया और बिना पुष्टि के उसका उपयोग किया गया। जस्टिस मृदुल कुमार कलिता की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,"यह न्यायालय इस बात पर विचार कर रहा है कि एक बार जब यह पाया जाता है कि अभियोक्ता ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष सच्चाई से गवाही नहीं दी है, तो उसका साक्ष्य गुणवत्ता के मामले में सही नहीं रह जाता है और इसलिए ट्रायल...

असम एजी ने गुवाहाटी हाईकोर्ट स्थानांतरण विवाद पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और दो अन्य अधिवक्ताओं के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की; फैसला सुरक्षित
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने मंगलवार (8 अप्रैल) को महाधिवक्ता देवजीत सैकिया द्वारा न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 11, 12 और 15(1)(ए) के साथ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत दायर आपराधिक अवमानना याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि गुवाहाटी हाईकोर्ट के अनिल कुमार भट्टाचार्य (सीनियर एडवोकेट) और एक अन्य अधिवक्ता (पल्लवी तालुकदार) ने एक व्यक्तिगत न्यायाधीश के साथ-साथ हाईकोर्ट के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करके आपराधिक अवमानना की है। सीनियर एडवोकेट कमल नयन चौधरी,...

2024 लोकसभा चुनाव: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने BJP उम्मीदवार के खिलाफ Congress उम्मीदवार की याचिका खारिज की
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में कांग्रेस के हाफिज राशिद अहमद चौधरी की याचिका खारिज की, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में असम के नंबर 7 करीमगंज निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था- जिसमें विजयी भाजपा उम्मीदवार कृपानाथ मल्लाह के चुनाव को चुनौती दी गई थी।अदालत ने याचिका के उचित सत्यापन के अभाव के आधार पर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मल्लाह द्वारा चौधरी की चुनाव याचिका को इस आधार पर खारिज करने की मांग करने वाली एक याचिका को भी स्वीकार कर लिया कि इसकी प्रस्तुति कानून के अनुसार नहीं थी और चुनाव याचिका...

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने खोज समिति की पात्रता और गठन के प्रावधानों के संबंध में नागालैंड लोकायुक्त अधिनियम में संशोधन पर रोक लगाने से इनकार किया
गुवाहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा स्थित पीठ ने हाल ही में नागालैंड लोकायुक्त अधिनियम, 2017 के क्रमशः 2019 और 2022 के दो संशोधन अधिनियमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस देवाशीष बरुआ और जस्टिस बुदी हबंग की खंडपीठ ने कहा,“विधानसभा के अधिनियम या उसके संशोधनों पर रोक लगाने के संबंध में कानून बहुत स्पष्ट है। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शक्ति का प्रयोग तब किया जा सकता है जब यह न्यायालय इस राय का हो कि विवादित अधिनियम संविधान के विरुद्ध है, या केंद्रीय अधिनियम के विरुद्ध है, या राज्य के पास...

आरोपी को 'गिरफ्तारी का आधार' बताना गिरफ्तारी की सूचना से अलग: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम पुलिस को निर्देश जारी किए
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने हाल ही में असम के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि बिना वारंट के गिरफ्तारी करने की शक्ति का प्रयोग करते समय, पुलिस या कोई अन्य प्राधिकारी BNSS की धारा 47 या किसी विशेष कानून के किसी अन्य प्रासंगिक प्रावधान के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताते हुए नोटिस जारी करे। जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मृदुल कुमार कलिता की एकल पीठ ने कहा,"यह नोटिस, जिसे गिरफ्तारी के समय गिरफ्तार व्यक्ति को दिया जाना चाहिए, उसमें गिरफ्तारी के...
