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हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

LiveLaw News Network
8 Feb 2021 12:19 PM GMT
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
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01 फरवरी 2021 से 05 फरवरी 2021 तक हाईकोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

धारा 377 आईपीसी और पोक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के ‌खिलाफ ‌हुए अपराधों के मामले को पक्ष आपस में समझौता करके खत्म नहीं कर सकतेःदिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि अदालत केवल इस आधार पर एफआईआर को रद्द करने की अनुमति नहीं दे सकती है कि पक्षों ने आपस में समझौता कर लिया है, जबकि एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 377 और पोक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों से संबंधित है। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने पटेल नगर थाने में आईपीसी की धारा 377, पोक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत दर्ज एफआईआर, जिसे धारा 482 सीआरपीसी के तहत रद्द करने की प्रार्थना की गई थी, को रद्द करने से इनकार कर दिया।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने आज तक, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार को गणतंत्र दिवस पर किसानों के विरोध प्रदर्शन को लेकर भ्रामक रिपोर्टिंग के आरोप लगाने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को यानी आज पूर्व सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा की न्यूज चैनल आजतक, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया और केंद्र पर भ्रामक रिपोर्टिंग के आरोप लगाने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि चैनल द्वारा एक वीडियो रिपोर्ट में दिखाए जा रहे हैं किसानों के विरोध प्रदर्शन को "मनगढ़ंत कहानी" के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिसमें भ्रामक तरीके से बताया जा रहा है, "विरोध का तथ्यों से कोई लेना-देना नहीं है।"

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हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई विधवा, पारिवारिक पेंशन पाने की हकदार है क्योंकि यह मामला पति की मौत से संबंधित नहीं है: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते फैसला सुनाया कि एक विधवा को पारिवारिक पेंशन, उसके दोष (हत्या के अपराध के लिए) वजह से देने से इनकार नहीं किया जा सकता है, जो उसके पति की मृत्यु से संबंधित नहीं है। न्यायमूर्ति जी.एस.संधवलिया की खंडपीठ बलजिंदर कौर के मामले की सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने हरियाणा राज्य प्राधिकरणों द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। राज्य प्राधिकरण द्वारा कौर की ओर से मांग की गई (ए) मासिक वित्तीय सहायता और (बी) परिवार पेंशन के बकाया के अनुदान को खारिज कर दिया गया था।

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दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की रिहाई की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें न सिर्फ किसानों को बल्कि सभी व्यक्तियों को रिहा करने की मांग की गई है, जिन्हें कथित तौर पर 26 जनवरी को या उसके बाद राजधानी दिल्ली में आयोजित किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिया गया है।

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"वह हमेशा वकीलों के लिए खड़े हुए हैं", पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने एजी अतुल नंदा को सदस्यता से हटाने के पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रस्ताव पर रोक लगाई

पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (HCBA) के एजी अतुल नंदो को सदस्यता से हटाने के एक प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। काउंसिल ने कहा है क‌ि एजी अतुल नंदा को सदस्यता के हटाने के एचसीबीए के फैसला को मनमाने तरीके से लिया गया था। काउंस‌िल ने कहा, "... अतुल नंदा हमेशा अधिवक्ताओं के लिए खड़े हुए हैं। एचसीबीए का संकल्प तथ्यों के खिलाफ है। अतुल नंदा ने सार्वजनिक रूप से कई बार न्यायालयों के ‌‌फ‌िजिकल कामकाज को फिर से शुरू करने का समर्थन किया है।"

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फिजिकल सुनवाई फिर से शुरू नहींं करने पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया

पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, चंडीगढ़ ने चीफ जस्टिस रवि शंकर झा के ट्रांसफर के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है। यह प्रस्ताव न्यायालय में फिजिकल सुनवाई को फिर से शुरू न करने के चलते पास किया गया है। बार एसोसिएशन ने आज प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि, ''माननीय पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का लगातार बंद होना, जो कि संविधान का संरक्षक और मौलिक अधिकारों का रक्षक है, समाज में एक गलत संकेत भेज रहा है। इसके अलावा कानूनी क्षेत्र से जुड़े वकीलों,स्टेनो, क्लर्कों और अन्य लोगों की आजीविका भी छीनी जा रही है और न्याय से वंचित करने का एक निरंतर साधन बन गया है।''

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महिलाओं/बच्चों के लिए आश्रय गृहों में स्मार्ट टेलीविजन स्क्रीन स्थापित करें और रिकॉर्डेड शिक्षा पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएं: राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य को निर्देश दिया

राजस्थान उच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी बालिका गृह, बाल अवलोकन गृह और नारी निकेतन में स्मार्ट टेलीविजन स्क्रीन स्थापित किए जाएं और शिक्षा विभाग के पहले से रिकार्ड किए गए पाठ्यक्रम प्रदान किए जाएँ ताकि इन संस्थानों में रखे गए महिलाओं/बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा सके। न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति देवेंद्र कच्छवाहा की खंडपीठ ने यह निर्देश, एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए और एमिकस क्यूरी डॉ. नूपुर भाटी द्वारा दिए गए सुझावों को ध्यान में रखते हुए दिया।

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मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु में अधीनस्थ न्यायालयों को 8 फरवरी से बिना किसी प्रतिबंध के साथ पूर्ण क्षमता से काम करने की अनुमति दी

मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार (01 फरवरी) को जारी किए एक आधिकारिक ज्ञापन (मेमोरेंडम) में अधीनस्थ न्यायालयों (तमिलनाडु राज्य और पुडुचेरी यूटी में) को पूर्ण क्षमता (पूर्व COVID-19 महामारी से पहले) में 08.02.2021 से बिना किसी प्रतिबंध/सीमा के काम करने की अनुमति दी है। तमिलनाडु राज्य और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में COVID-19 महामारी की मौजूदा स्थिति और तमिलनाडु राज्य में अधीनस्थ न्यायालयों के वर्तमान कामकाज और पुडुचेरी के अधीनस्थ न्यायालयों के वर्तमान कामकाज का आकलन करने के बाद यह ज्ञापन जारी किया गया है।

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यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष सिद्दीकी कप्पन के साथ गिरफ्तार किए गए तीन लोगों को जेल में वकीलों से मिलने की मंजूरी दी

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को सूचित किया है कि 3 कथित पीएफआई सदस्यों को, जिन्हें पत्रकार सिद्दीक कप्पन के साथ हाथरस के रास्ते पर गिरफ्तार किया था, उन्हें जेल में उनके वकीलों से मिलने की अनुमति दी। एएजी मनीष गोयल ने जस्टिस सूर्य प्रकाश केसरवानी और जस्टिस शमीम अहमद की डिवीजन बेंच से कहा कि वकील जेल के नियमों के अनुसार याचिकाकर्ताओं से मिल सकते हैं। यह घटनाक्रम तब प्रकाश में आया जब याचिकाकर्ताओं के वकील ने आरोप लगाया कि जेल अधीक्षक, मथुरा उन्हें अपने क्लाइंट से मिलने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया कोई 'एंटरप्राइज (उद्यम)' नहीं है: भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने बीसीआई के खिलाफ प्रभुत्व के दुरुपयोग की शिकायत खारिज की

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने शिकायत को खारिज कर दिया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया कानूनी शिक्षा में प्रवेश करने के लिए अधिकतम आयु सीमा लगाकर "अपने प्रमुख पद का दुरुपयोग कर रही है"। केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग में 52 वर्षीय कार्यकारी इंजीनियर थुपिली रवेन्द्र बाबू द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसने रिटायरमेंट के बाद कानूनी शिक्षा लेने की इच्छा जताई थी। शिकायतकर्ता का आरोप कानूनी शिक्षा नियमों 2008 के खंड 28 पर है, जिसमें सामान्य वर्ग से संबंधित उम्मीदवारों को कानूनी शिक्षा पाने के लिए 30 वर्ष की आयु से अधिक होने पर रोक दिया। आरोप थे कि बार काउंसिल को भारत में कानूनी शिक्षा और अभ्यास को नियंत्रित करने में एक प्रमुख स्थान प्राप्त है और इसने कानूनी सेवा पेशे में नए प्रवेशकों के लिए अप्रत्यक्ष अवरोध पैदा करके प्रतियोगिता अधिनियम की धारा 4 के उल्लंघन में ऐसी स्थिति का दुरुपयोग किया है।

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राज्य अधिकारियों की ओर से प्रथम दृष्ट्या सत्ता के पक्षपात या दुर्भावनापूर्ण अभ्यास जांच को सीबीआई को ट्रांसफर करने के लिए आवश्यक : कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को माना कि अदालत को केवल उन मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच स्थानांतरित करने का अधिकार है, जहां राज्य अधिकारियों की ओर से सत्ता के पक्षपात या दुर्भावनापूर्ण अभ्यास का विशिष्ट उदाहरण है। न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य पिछले साल सिलीगुड़ी में एक युवा मोर्चा के दौरान मारे गए एक उलेन रॉय की मौत के मामले में सुनवाई कर रही थीं।

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'जमानत नियम है, जेल अपवाद ': दिल्ली कोर्ट ने किसान आंदोलन के दौरान गिरफ्तार पत्रकार मनदीप पुनिया को जमानत दी

रोहिणी कोर्ट (दिल्ली) के उत्तरी जिला के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने किसान आंदोलन को कवर करते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा सिंघु बॉर्डर से 30 जनवरी को हिरासत में लिए गए स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया को जमानत दी। यह देखते हुए कि कोई संभावना नहीं है कि अभियुक्त / आवेदक किसी भी पुलिस अधिकारी को प्रभावित करने में सक्षम है और उससे कोई जब्ती नहीं की जानी है, मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सतवीर सिंह लांबा ने उन्हें 25,000 रुपये की राशि या इसके समान राशि में जमानत बांड प्रस्तुत करने पर जमानत दी।

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कोर्ट विवादित मुद्दों पर '' अंतिम या कम से कम प्रथम दृष्ट्या निष्कर्ष के बिना सीलबंद लिफाफे में पेश सीबीआई जांच रिपोर्ट की सील पक्षकारों की उपस्थिति में नहीं तोड़ सकता : मेघालय हाईकोर्ट

मेघालय हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने गुरुवार को कहा कि कोर्ट विवादित मुद्दों पर '' अंतिम या कम से कम प्रथम दृष्ट्या निष्कर्ष निकाले '' बिना पक्षकारों की उपस्थिति में सीलबंद लिफाफे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट की सील नहीं तोड़ सकता। मुख्य न्यायाधीश विश्वनाथ सोमाद्दर और न्यायमूर्ति थांगख्यू कि खंडपीठ ने यह टिप्पणी की। हाईकोर्ट की खंडपीठ मेघालय लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) एवं तीन अन्य व्यक्तियों की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जो एकल खंडपीठ द्वारा नौ दिसंबर 2020 को दिए गए आदेश के खिलाफ दायर की गई थी।

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दिल्ली दंगों के दौरान शिव विहार में मदीना मस्जिद में आग लगाने का मामलाः दिल्ली कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया

दिल्ली के एक कोर्ट ने पिछले साल दिल्ली दंगों के दौरान मदीना मस्जिद, शिव विहार में आ लगाने और उजाड़ने की कथित घटना में दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, मयूरी सिंह ने करावल नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया कि वे एफआईआर दर्ज करे। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट रूप से एक संज्ञेय अपराध है और इस मामले में उचित जांच की जानी चाहिये। यह आदेश अधिवक्ता एम. आर. शमशाद द्वारा दायर एक अर्जी पर दिया गया है, जो 156 (3) Cr.P.C. के तहत दायर की गई थी। उक्त धारा मजिस्ट्रेट को संज्ञेय मामलों की जांच का आदेश देने का अधिकार देती है।

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जन गण मन'वीडियो में युवक की मौत का मामलाः दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली पर हलफनामा दायर करने को कहा

23 वर्षीय फैजान की मौत के मामले में कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच करवाने की मांग करने वाली एक याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा है कि वह दस्तावेजों के संरक्षण और पुलिस स्टेशन में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली के संबंध में एक हलफनामा दायर करें। गौरतबल है कि पिछले साल वायरल हुए एक वीडियो में फैजान को देखा गया था। इस वीडियो में दिल्ली दंगों के दौरान पुलिस अधिकारी जमीन पर पड़े पांच घायल लोगों को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर कर रहे थे।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साढ़े सात साल से अधिक समय से जेल में बंद हत्या के आरोपी को जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में साढ़े सात सालों से अधिक समय से जेल में बंद हत्या के एक आरोपी को जमानत दी। लंबे समय से जेल में बंद रहने के बावजूद, ट्रायल कोर्ट में आरोपी के खिलाफ किसी भी भौतिक गवाह या सबूत को पेश नहीं किया जा सका था। आरोपी के तीसरे जमानत आवेदन को अनुमति देते हुए हाईकोर्ट ने कहा, "हालांकि, जिस अपराध के लिए आवेदक को आरोपित किया गया है, वह गंभीर है, लेकिन विचार के लिए यह भी एक प्रासंगिक कारक है कि आरोप दो गवाहों की गवाही पर आधारित है, जबकि दोनों में से किसी को भी सीबीआई ने पेश नहीं किया है, और मुकदमा 2013 से लंबित है। सीबीआई का जवाबी हलफनामा भी उस समय सीमा के संबंध में मौन है, जिसमें उन दोनों गवाहों को मुकदमे की कार्यवाही में पेश किया जाना है।"

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दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार को निर्देश देने के लिए याचिका, फास्ट-ट्रैक और POCSO न्यायालयों के लिए अतिरिक्त लोक अभियोजकों के अधिक पद सृजित करने की मांग

अतिरिक्त लोक अभियोजकों के और अधिक पद सृजित करने के लिए दिल्ली सरकार के एनसीटी को निर्देशित करने की मांग वाली याचिका दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष दायर की गई है और उसके बाद नियुक्त किए गए अतिरिक्त लोक अभियुक्तों को दिल्ली के 55 फास्ट ट्रैक और पोक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस) कोर्ट में नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। दिल्ली अभियोजक वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा अधिवक्ता कुशाल कुमार, एडवोकेट आदित्य कपूर, एडवोकेट हर्ष आहुजा और एडवोकेट आकाशदीप गुप्ता [इरुदाइट लीगल] के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

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बॉम्बे हाईकोर्ट का कंगना रनौत को निर्देश, क्या वह निर्माण के नियमितीकरण के लिए आवेदन करना चाहती है या नहीं, अंतरिम संरक्षण बढ़ाया

अभिनेत्री कंगना रनौत ने मुंबई उपनगर में अपने तीन फ्लैटों के कथित अनधिकृत समामेलन के बारे में बीएमसी के विध्वंस आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मंगलवार को अदालत ने यह स्पष्ट करने के लिए रनौत को 5 फरवरी तक का समय दिया कि क्या वह "अवैध हिस्सों" के नियमितीकरण के लिए नागरिक निकाय से संपर्क करेगी। अंतरिम राहत के लिए कंगना की याचिका पहले दिसंबर 2020 में डिंडोशी के सिटीसिलिव कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई थी। इसमें कहा गया था कि परिवर्तन "स्वीकृत योजना का गंभीर उल्लंघन था।" हालांकि कोर्ट ने उसे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था।

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सरकार में उच्चतम स्तर पर लिए गए निर्णय पर एक अपीलीय प्राधिकारी के रूप में कार्य नहीं कर सकतेः दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को माना है कि वह सरकार में उच्चतम स्तर पर लिए गए निर्णय पर अपीलीय प्राधिकारी के रूप में नहीं बैठ सकता है। यह टिप्पणी करते हुए, कोर्ट ने दिल्ली सरकार के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसके तहत सरकार ने याचिकाकर्ता को पीजीआई चंडीगढ़ से पेडियाट्रिक्स में पोस्टग्रेजुएट करने के लिए स्टडी लीव देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि कि प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाए कि उसे रिलीव करें और साथ में उसे स्टडी लीव भी दी जाएं ताकि वह पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च

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