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दिल्ली दंगों के दौरान शिव विहार में मदीना मस्जिद में आग लगाने का मामलाः दिल्ली कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
2 Feb 2021 10:42 AM GMT
दिल्ली दंगों के दौरान शिव विहार में मदीना मस्जिद में आग लगाने का मामलाः दिल्ली कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया
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दिल्ली के एक कोर्ट ने पिछले साल दिल्ली दंगों के दौरान मदीना मस्जिद, शिव विहार में आ लगाने और उजाड़ने की कथित घटना में दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, मयूरी सिंह ने करावल नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया कि वे एफआईआर दर्ज करे। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट रूप से एक संज्ञेय अपराध है और इस मामले में उचित जांच की जानी चाहिये।

यह आदेश अधिवक्ता एम. आर. शमशाद द्वारा दायर एक अर्जी पर दिया गया है, जो 156 (3) Cr.P.C. के तहत दायर की गई थी। उक्त धारा मजिस्ट्रेट को संज्ञेय मामलों की जांच का आदेश देने का अधिकार देती है।

शिकायत के अनुसार, 25 फरवरी 2020 को मदीना मस्जिद गली में शाम 6 बजे के करीब 20 से 25 लोग इकट्ठा हुए थे, जो लाठी, डंडे, तेजाब, छड़ और पेट्रोल की बोतलों से लैस थे। इसके बाद आरोपी व्यक्तियों ने मस्जिद को तोड़ना शुरू कर दिया और दो एलपीजी सिलेंडरों से विस्फोट करके आग लगाकर मस्जिद परिसर को नष्ट कर दिया।

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 26 फरवरी 2020 को एक आरोपी कथित रूप से मस्जिद के शीर्ष पर चढ़ गया था और मस्जिद के ऊपर भगवा ध्वज फहराने के बाद जय श्री राम का नारा लगाया था।

इसे देखते हुए कोर्ट ने आदेश दिया:

"मेरे विचार में अगर संज्ञेय अपराध किया जाता है तो एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। मदीना मस्जिद, शिव विहार में आग आदि की घटना के बारे में शिकायत में शामिल आरोपों के अनुसार, संज्ञेय अपराध स्पष्ट रूप से किया गया है। इस मामले और उचित जांच की आवश्यकता है, क्योंकि यह नहीं कहा जा सकता है कि सभी साक्ष्य शिकायतकर्ता की पहुंच के भीतर हैं, भले ही उसने कथित रूप से अपराध में शामिल कुछ व्यक्तियों का नाम दिया हो। "

अदालत ने करावल नगर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को कानून की उचित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने संकेत दिया कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश नहीं है।

अदालत ने आदेश दिया,

"एसएचओ/जांच एजेंसी को पहले मामले की जांच करनी चाहिए और पता लगाना चाहिए कि क्या वास्तव में कोई अपराध हुआ है या नहीं। अब यह कानून का एक सुलझा हुआ प्रस्ताव है कि गिरफ्तारी की शक्ति ऐसा करने के औचित्य से अलग है।"

अब इस मामले की सुनवाई 9 फरवरी 2021 को होगी।

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