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हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

LiveLaw News Network
23 Jan 2022 4:30 AM GMT
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
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देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (17 जनवरी, 2022 से 21 जनवरी, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

ऑर्डर VII रूल्स 11 सीपीसी के तहत आवेदन पर विचार करते समय लिखित बयान में दी गई प्रतिवादी की दलील पूरी तरह अप्रासंगिक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दीवानी न्यायालय के ऑर्डर के खिलाफ दीवानी पुनरीक्षण पर निर्णय करते हुए माना कि ऑर्डर VII रूल 11 सीपीसी के तहत प्रस्तुत आवेदन को अस्वीकार करना अवैध होगा यदि अदालत ने प्रतिवादी के लिखित बयान की मांग की है, बजाय शिकायत में दिए बयानों पर निर्णय करने पर।

जस्टिस अनिल वर्मा ने कहा, "ऑर्डर VII रूल 11 सीपीसी के क्लॉज (ए) और (डी) के तहत एक आवेदन पर निर्णय लेने के उद्देश्य के लिए वाद में दिए बयान महत्वर्ण हैं; प्रतिवादी द्वारा लिखित बयान में दी गई दलीलें उस स्तर पर पूरी तरह से अप्रासंगिक होंगी, इसलिए, ऑर्डर VII रूल 11 सीपीसी के तहत आवेदन पर निर्णय लिए बिना लिखित बयान दर्ज करने का निर्देश निचली अदालत द्वारा अधिकार क्षेत्र के प्रयोग को छूने वाली प्रक्रियात्मक अनियमितता नहीं हो सकता है।"

केस टाइटल: Foti Rakabchand Jain through LRs Vs. Foti Ratanlal Jain through LRs

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वरिष्ठ नागरिक अधिनियम के तहत संक्षिप्त निष्कासन कार्यवाही के आधार पर महिलाओं के 'साझा परिवार' में रहने के अधिकार को पराजित नहीं किया जा सकता : गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने माना है कि एक साझेघर के संबंध में निवास का आदेश प्राप्त करने के एक महिला के अधिकार को वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 के तहत संक्षिप्त प्रक्रिया अपनाते हुए बेदखली का आदेश प्राप्त करने के सरल उपाय द्वारा पराजित नहीं किया जा सकता।

डॉ. जस्टिस अशोककुमार सी. जोशी की खंडपीठ ने एस वनिथा बनाम उपायुक्त, बेंगलुरु शहरी जिले के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का उल्लेख किया, जिसमें यह माना गया था कि एक साझेघर के संबंध में निवास का आदेश प्राप्त करने के एक महिला के अधिकार को वरिष्ठ नागरिक अधिनियम 2007 के तहत सारांश प्रक्रिया अपनाते हुए बेदखली का आदेश प्राप्त करने के सरल उपाय द्वारा पराजित नहीं किया जा सकता है।

केस का शीर्षक - जगदीपभाई चंदूलाल पटेल बनाम रेशमा रुचिन पटेल

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'मृत लोगों को फंड जारी किया': कलकत्ता हाईकोर्ट ने सरकारी योजना के फंड के कथित दुरुपयोग की जांच तीन महीने में करने का निर्देश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को दक्षिण 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट को प्रधानमंत्री आवास योजना योजना के तहत आवंटित धन के कथित हेराफेरी की जांच करने और तीन महीने की अवधि के भीतर एक तर्कसंगत आदेश पारित करने का निर्देश दिया।

चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की पीठ एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के सूत्रधार ने सरकारी योजना के तहत आवंटित धन का कथित रूप से दुरुपयोग किया।

केस शीर्षक: रायच लस्कर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य

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'केवल अपराध का परिमाण जमानत से इनकार का मानदंड नहीं हो सकता': दिल्ली हाईकोर्ट ने हैलो टैक्सी घोटाला मामले में आरोपियों को राहत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये के घोटाले के दो आरोपियों को जमानत देते हुए हाल ही में कहा कि अपराध की भयावहता जमानत से इनकार करने का एकमात्र मानदंड नहीं हो सकता है।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा, "जमानत का उद्देश्य मुकदमे के समय आरोपी की उपस्थिति को सुरक्षित करना है; इस प्रकार, यह उद्देश्य न तो दंडात्मक है और न ही निवारक, और जिस व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया गया है उसे केवल तभी हिरासत में रखा जाना चाहिए जब विश्वास करने के कारण हों कि वे भाग सकते हैं या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं या गवाहों को धमका सकत हैं।"

केस शीर्षक: सुरेंद्र सिंह भाटी बनाम राज्य (दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) और अन्य जुड़े मामले

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वरिष्ठ नागरिक अधिनियम: बॉम्बे हाईकोर्ट ने किराएदार बनकर मां के घर में रह रहे बेटे को राहत देने से इनकार किया, जल्द से जल्द घर खाली करने को कहा

एक बेटे, जिसने अपनी मां को सामान्य जीवन जीना भी दूभर कर दिया था, बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने उसे जल्द से जल्द घर खाली करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मां ने पांच साल से ज्यादा समय अत्यधिक पीड़ा में गुजारा है।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी ने कहा कि यह "आश्चर्यजनक" है कि कैसे 48 वर्षीय बेटे ने बूढ़ी मां के घर में घुसने का एक अनोखा तरीका ईजाद किया। उसने अपनी मां के साथ एक रेंट एग्रीमेंट किया, जबकि उसका इरदा एग्रीमेंट का सम्‍मान करने का बिल्कुल भी नहीं था। उसने उन्हें किराये कि रूप में एक रुपया भी नहीं है, जब तक कि उन्होंने किराये के लिए अथॉरटीज़ से संपर्क नहीं किया।

केस शीर्षक: सूर्यकांत किसान पवार बनाम डिप्टी कलेक्टर, मुंबई और अन्य

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सेवानिवृत्ति की आयु घटाने का बैंक का निर्णय अतार्किक; प्रभावित कर्मचारी सेवा से बाहर अवधि के लिए वेतन के हकदार: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय सहकारी बैंक के आयु को कम करने के बाद के 'अतार्किक' निर्णय के कारण सेवा से बाहर रहने वाले सेवानिवृत्ति कर्मचारी उक्त अवधि के लिए वेतन के हकदार हैं। बैंक ने एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें सेवानिवृत्ति की आयु 60 से घटाकर 58 वर्ष कर दी गई।

जस्टिस रेखा बोराना ने कहा, "याचिकाकर्ता उस अवधि के लिए वेतन के हकदार होंगे जिसके दौरान वे सेवा से बाहर रहे। उन्हें इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर भुगतान किया जाए।"

केस शीर्षक: कैलाश चंद्र अग्रवाल बनाम राजस्थान राज्य और अन्य, जुड़े मामलों के साथ

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अनुकंपा नियुक्ति - यह धारणा कि विवाहित बेटी पिता के घर का हिस्सा नहीं बल्कि पति के घर का हिस्सा, पुरानी मानसिकता; राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मृतक कर्मचारी की विवाहित बेटी अनुकंपा नियुक्ति के लिए 'आश्रितों' की परिभाषा के अंतर्गत आती है।

जस्टिस डॉ पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने कहा, "यह धाराण कि के बाद बेटी अपने पिता के घर का हिस्सा नहीं है और अपने पति के घर का हिस्सा बन रही है, पुराना दृष्टिकोण और मानसिकता है।"

केस शीर्षक: शोभा देवी बनाम जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और अन्य।

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सबऑर्डिनेट कोर्ट को अवमानना नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालयों की अवमानना के लिए नोटिस जारी करने की शक्ति केवल हाईकोर्ट के पास है, जो इस पर अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करता है।

जस्टिस अमित बंसल ने कहा, "सबऑर्डिनेट कोर्ट क्षेत्राधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते। वे कारण बताओ नोटिस जारी नहीं कर सकते। अवमानना कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जा सकती। एक सबऑर्डिनेट कोर्ट केवल अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए हाईकोर्ट को मामला भेज सकता है।"

केस शीर्षक: आईसीआईसीआई बैंक बनाम रश्मि शर्मा, सीएम (एम) 36/2022

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विशेष/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विद्युत अधिनियम के तहत अपराधों का संज्ञान ले सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि एक विशेष न्यायाधीश (ईसी अधिनियम) / अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के पास विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत अपराधों का संज्ञान लेने का अधिकार क्षेत्र है।

न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा की खंडपीठ ने विद्युत अधिनियम [बिजली की चोरी] की धारा 135-1 (ए) और विशेष न्यायाधीश (ईसी एक्ट)/अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गाजियाबाद के संज्ञान लेने के आदेश के तहत उसके खिलाफ दायर आरोप पत्र को चुनौती देने वाले एक गुलफाम द्वारा दायर धारा 482 आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

केस का शीर्षक - गुलफाम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एंड अन्य

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आवाज का नमूना लेने के लिए आरोपी की सहमति जरूरी नहीं, यह संविधान के अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन नहींः केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि आवाज के नमूने लेने के लिए (तुलना/मिलान के उद्देश्य से) किसी आरोपी की सहमति आवश्यक नहीं है, क्योंकि यह पहले ही स्थापित हो चुका है कि अभियुक्त की आवाज के नमूने प्राप्त करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 20 (3) का उल्लंघन नहीं करता।

हाईकोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है,जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी को उसकी आवाज का नमूना पेश करने का निर्देश देने से पहले सुनवाई का मौका नहीं दिया गया था।

केस का शीर्षक- महेश लाल एन.वाई बनाम केरल राज्य

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सार्वजनिक पार्क के लिए आरक्षित भूमि का उपयोग विवाह/कार्यक्रम जैसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सार्वजनिक पार्क के लिए आरक्षित भूमि का उपयोग विवाह /कार्यक्रम आदि जैसे व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने यह फैसला सुरेश थानवी द्वारा दायर एक जनहित याचिका में दिया।

न्यायमूर्ति विनोद कुमार भरवानी और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि प्रतिवादी संख्या 2 नगर निगम, जोधपुर यह सुनिश्चित करेगा कि आरक्षित भूमि का सार्वजनिक पार्क के रूप में सख्ती से उपयोग किया जाएगा और कोई विचलन नहीं होगा। इसके साथ ही किसी भी व्यावसायिक गतिविधियों जैसे विवाह / कार्यक्रम आदि की अनुमति नहीं दी जाएगी।"

केस का शीर्षक: सुरेश थानवी बनाम राजस्थान राज्य एंड अन्य।

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"व्हाट्सएप के जरिए से समन की तस्वीर भेजना न्यायिक प्रणाली का अतिक्रमण नहीं": दिल्ली हा‌ईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वादी द्वारा व्हाट्सएप के जरिए प्रतिवादी को समन की तस्वीर भेजे जाने के बाद आपराधिक अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी करने की सीमा तक एक कमर्शियल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह न्यायिक प्रणाली का अतिक्रमण या न्यायिक प्रणाली के समानांतर प्रणाली चलाने के बराबर नहीं हो सकता है।

जस्टिस अमित बंसल वाणिज्यिक न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर विचार कर रहे थे, जिसमें अध्यक्ष के माध्यम से याचिकाकर्ता आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया था।

केस शीर्षक: आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड बनाम रश्मी शर्मा

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दिल्ली हाईकोर्ट ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम को संविदा कर्मियों के संबंध में नीति बनाने के लिए समिति गठित करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को संविदा कर्मियों के संबंध में अपने सभी प्रतिष्ठानों के लिए एक व्यापक नीति तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि समिति में प्रस्तावित नीति तैयार करने के लिए कम से कम दो विशेषज्ञ, कामगारों के दो प्रतिनिधि और ठेकेदारों के दो प्रतिनिधि, साथ ही अन्य अधिकारी, जैसा कि ईएसआईसी उचित समझे, शामिल होंगे।

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एक महिला के लिए 1500 रुपए प्रति माह में खुद का भरण-पोषण करना बेहद मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि यह कल्पना करना बेहद मुश्किल है कि एक महिला 1500 रुपये प्रति माह की राशि के साथ खुद का भरण-पोषण करने की स्थिति में होगी।

कोर्ट ने आगे कहा कि पति का कर्तव्य और जिम्मेदारी है कि वह अपनी पत्नी की पूरी गरिमा के साथ देखभाल करे। न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की खंडपीठ ने आगे टिप्पणी की कि अंतरिम भरण-पोषण के रूप में 1500 रुपए की राशि न केवल एक अल्प राशि है, बल्कि पत्नी के लिए खुद की देखभाल करने के लिए भी अपर्याप्त है।

केस का शीर्षक - संजीव राय बनाम यू.पी. राज्य एंड अन्य

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यदि आपत्तिजनक वाहन चोरी हो जाता है और अनधिकृत रूप से कोई और चलाता है तब भी बीमा कंपनी दायित्व से बच नहीं सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि बीमा कंपनी मृतक के परिवार को मुआवजा देने की अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती, भले ही वाहन चोरी हो गया हो और किसी और द्वारा अनधिकृत रूप से चलाया जा रहा हो।

जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि देयता से बचने के लिए, बीमाकर्ता को यह स्थापित करना होगा कि बीमित व्यक्ति की ओर से जानबूझकर उल्लंघन किया गया था। कोर्ट ने मामले में ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश को बरकरार रखा जिसने बीमा कंपनी को मुआवजे की राशि का भुगतान करने और वाहन चोरी करने वाले ड्राइवर से इसे वसूल करने का निर्देश दिया था।

केस शीर्षक: यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम श्रीमती अनीता देवी और अन्य

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पूरक चालान दाखिल करने को केवल इसलिए स्थगित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि अग्रिम जमानत आवेदन लंबित है: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में माना है कि सीआरपीसी की धारा 173 के तहत एक पूरक चालान दाखिल करने को केवल इसलिए स्थगित नहीं किया जा सकता है क्योंकि एक अग्रिम जमानत आवेदन लंबित है। इस तरह की फाइलिंग को लंबी अवधि के लिए स्थगित नहीं किया जाना चाहिए और जब भी इसे स्थगित किया जाता है, तो इसके लिए विशिष्ट और वास्तविक कारण मौजूद होने चाहिए।

केस शीर्षकः सुखविंदर कौर @ राजवीर कौर बनाम स्टेट ऑफ पंजाब

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अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान की मूल विशेषता, यह किसी भी कानून से कम नहीं की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया है कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों में निहित न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान की मूल विशेषताओं में से एक है और कोई भी कानून इस तरह के अधिकार क्षेत्र को ओवरराइड या कम नहीं कर सकता है।

जस्टिस पुष्पेंद्र भाटी ने कहा कि हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए अधिनियम के प्रावधानों में प्रकट विधायी मंशा पर ध्यान देंगे और अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करेंगे।

केस शीर्षक: एलएनजे पावर वेंचर्स लिमिटेड बनाम राजस्थान विद्युत नियामक आयोग और अन्य

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लुक आउट सर्कुलर यात्रा के अधिकार पर प्रतिबंध लगाता है, केवल असाधारण परिस्थितियों में और ठोस कारणों पर इसे जारी किया जाना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि राज्य द्वारा एक लुकआउट सर्कुलर जारी करके किसी व्यक्ति के विदेश यात्रा के अधिकार को प्रतिबंधित करना अनुचित था, जब वह कोई सबूत स्थापित नहीं कर सका कि यह अधिकार 'भारत के आर्थिक हितों के लिए हानिकारक' होगा।

ज‌स्टिस रेखा पल्ली दिल्ली स्थित परिधान निर्माण के एक व्यवसायी द्वारा प्रतिवादी, गृह मंत्रालय और आयकर विभाग द्वारा उसके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) को रद्द करने के लिए दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थीं।

केस शीर्षक: विकास चौधरी बनाम यूनियन ऑफ इं‌डिया और अन्य;

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उचित प्राधिकार के बिना प्रतिनिधि क्षमता में दायर रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने माना है कि उचित प्राधिकार या प्रस्ताव के बिना प्रतिनिधि क्षमता में दायर एक रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विनोद कुमार भरवानी की खंडपीठ ने कहा, "हमारा दृढ़ मत है कि रिट याचिका उचित प्राधिकार/प्रस्ताव के बिना दायर की गई है और इसलिए, यह सुनवाई योग्य नहीं है।"

केस शीर्षक: आयकर आकस्मिक कर्मचारी यूनियन और अन्य। बनाम यूनियन ऑफ इंडिया और अन्य।

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मोटर दुर्घटना का दावा- गैर-कमाई वाले सदस्य के लिए प्रति वर्ष अनुमानित आय के रूप में 15 हजार तय करना अतार्किक: इलाहाबाद हाईकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के 2021 में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक परिवार के गैर-कमाई वाले सदस्यों के लिए प्रति वर्ष 15,000/- रुपये की काल्पनिक आय तय करना गैर-न्यायोचित और अतार्किक है।

न्यायमूर्ति डॉ. कौशल जयेंद्र ठाकर और न्यायमूर्ति अजय त्यागी की खंडपीठ सात-वर्षीय मृत लड़के के माता-पिता द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुआवजे के रूप में 1,80,000 रुपये और 7.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज देने के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के आदेश को चुनौती दी गयी थी। अपीलकर्ता ने इसे बढ़ाने का हाईकोर्ट से अनुरोध किया था।

केस का शीर्षक : रूप लाल और अन्य बनाम सुरेश कुमार यादव और 2 अन्य।

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ट्रस्टियों को हटाना और ट्रस्ट को चुनाव कराने का निर्देश देना पब्ल‌िक ट्रस्ट रजिस्ट्रार के अधिकार क्षेत्र से बाहर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना है कि रजिस्ट्रार ऑफ पब्लिक ट्रस्ट के पास मध्य प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1951 के तहत मौजूदा ट्रस्टियों को हटाने और ट्रस्ट को उसी के लिए चुनाव कराने का निर्देश देने का कोई विवेकाधीन अधिकार नहीं है।

जस्टिस सुबोध अभयंकर एक रिट याचिका का निस्तारण कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने रजिस्ट्रार ऑफ पब्लिक ट्रस्ट, जिला बड़वानी द्वारा 17.11.2021 को पारित आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसमें दो ट्रस्टियों को उनके पद से हटा दिया गया था, और ट्रस्ट श्री दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावंगजाजी को ट्रस्टी के पद के लिए चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था।

केस शीर्षक: सौरभ और अन्य बनाम एमपी और अन्य राज्य

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जब तक जन्म दस्तावेज/स्कूल रिकॉर्ड को चुनौती न दी जाए, तब तक डीएनए जांच संबंधी याचिका की सुनवाई नहीं हो सकती : त्रिपुरा हाईकोर्ट

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि जब तक किसी व्यक्ति के जन्म दस्तावेजों और स्कूल के रिकॉर्ड को स्पष्ट चुनौती नहीं दी जाती है, तब तक उसके डीएनए परीक्षण को लेकर दायर याचिका पर अदालत द्वारा विचार नहीं किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति टी. अमरनाथ गौड़ उस याचिका पर निर्णय दे रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता का मामला यह था कि प्रतिवादी (पार्थ घोष) मृतक क्षितिज घोष का पुत्र नहीं था और मृतक द्वारा कथित तौर पर की गयी कुछ वसीयत की आड़ में, प्रतिवादी उन संपत्तियों को बेचता जा रहा था, जो ट्रायल कोर्ट के समक्ष विवादित थी।

केस शीर्षक: निर्मल घोष बनाम पार्थ घोष

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