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यदि आपत्तिजनक वाहन चोरी हो जाता है और अनधिकृत रूप से कोई और चलाता है तब भी बीमा कंपनी दायित्व से बच नहीं सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
18 Jan 2022 8:59 AM GMT
यदि आपत्तिजनक वाहन चोरी हो जाता है और अनधिकृत रूप से कोई और चलाता है तब भी बीमा कंपनी दायित्व से बच नहीं सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि बीमा कंपनी मृतक के परिवार को मुआवजा देने की अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती, भले ही वाहन चोरी हो गया हो और किसी और द्वारा अनधिकृत रूप से चलाया जा रहा हो।

जस्टिस संजीव सचदेवा ने कहा कि देयता से बचने के लिए, बीमाकर्ता को यह स्थापित करना होगा कि बीमित व्यक्ति की ओर से जानबूझकर उल्लंघन किया गया था। कोर्ट ने मामले में ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश को बरकरार रखा जिसने बीमा कंपनी को मुआवजे की राशि का भुगतान करने और वाहन चोरी करने वाले ड्राइवर से इसे वसूल करने का निर्देश दिया था।

ट्रिब्यूनल द्वारा पारित किए गए निर्णय को सीमित सीमा तक चुनौती देते हुए एक अपील दायर की गई थी कि इसने वाहन के चालक के खिलाफ वसूली के अधिकार प्रदान किए। अपीलकर्ता का मामला था कि चूंकि वाहन चोरी हो गया था और चालक एक पेशेवर चोर था, इसलिए राशि का भुगतान करने के लिए बीमा कंपनी पर कोई दायित्व नहीं था।

मामला यह था कि एक ईको कार चालक द्वारा तेज और लापरवाही से चलाई जा रही थी, जिसने बड़ी ताकत से मृतक की स्कूटी को टक्कर मार दी, जोरदार टक्कर के परिणामस्वरूप मृतक नीचे गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। ट्रिब्यूनल ने पाया था कि वाहन चालक द्वारा चोरी की गई थी और आपत्तिजनक वाहन की चोरी के संबंध में पुलिस स्टेशन में पहले से ही एक शिकायत दर्ज की गई थी। अपीलार्थी के पास वाहन का बीमा था।

इसलिए न्यायालय ने इस सवाल पर विचार किया कि क्या वाहन चोरी होने और अनधिकृत रूप से किसी और द्वारा चलाए जाने के मामले में बीमा कंपनी राशि का भुगतान करने के दायित्व से मुक्त है?

कोर्ट ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी बनाम लेहरू और अन्य, 2003 (3) एससीसी 338 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया , जिसमें कहा गया था कि देयता से बचने के लिए, बीमाकर्ता को यह स्थापित करना होगा कि बीमित व्यक्ति की ओर से जानबूझकर उल्लंघन किया गया था।

अदालत ने कहा, "मौजूदा मामले में बीमा कंपनी अपनी देनदारी से बचने के लिए बीमित व्यक्ति की ओर से कोई उल्लंघन नहीं दिखा पाई है।"

कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम सेल्वराजमानी और अन्य में अपीलकर्ता द्वारा दिए गए निर्णय से असहमत व्यक्त की।

कोर्ट ने कहा, "उक्‍त निर्णय लेहरू (सुप्रा) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित प्रस्ताव पर विचार नहीं करता है कि क्या बीमित व्यक्ति की ओर से जानबूझकर उल्लंघन किया गया है या नहीं ताकि बीमाकर्ता को दायित्व से बचने का अधिकार मिल सके।"

"लेहरू (सुप्रा) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर, जो यह बताता है कि जब तक बीमा कंपनी यह दिखाने में सक्षम नहीं है कि बीमाधारक की ओर से पॉलिसी का जानबूझकर उल्लंघन किया गया है, बीमा कंपनी अपनी देयता से बच नहीं सकती है ।"

कोर्ट ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि ट्रिब्यूनल ने पाया कि वाहन चोरी हो गया था और बीमाधारक द्वारा बीमा पॉलिसी के नियमों और शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया था।

अदालत ने कहा आक्षेपित आदेश को बरकरार रखते हुए कहा, "तदनुसार, उस फैसले में कोई कमी नहीं है, जिसके तहत ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है और उसके बाद ड्राइवर नीरज उर्फ ​​मीका से वसूल किया है, जिसने वाहन चोरी किया था।"

केस शीर्षक: यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम श्रीमती अनीता देवी और अन्य

सिटेशन: 2022 लाइव लॉ (दिल्ली) 24

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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