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जब तक जन्म दस्तावेज/स्कूल रिकॉर्ड को चुनौती न दी जाए, तब तक डीएनए जांच संबंधी याचिका की सुनवाई नहीं हो सकती : त्रिपुरा हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
15 Jan 2022 9:09 AM GMT
जब तक जन्म दस्तावेज/स्कूल रिकॉर्ड को चुनौती न दी जाए, तब तक डीएनए जांच संबंधी याचिका की सुनवाई नहीं हो सकती : त्रिपुरा हाईकोर्ट
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त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि जब तक किसी व्यक्ति के जन्म दस्तावेजों और स्कूल के रिकॉर्ड को स्पष्ट चुनौती नहीं दी जाती है, तब तक उसके डीएनए परीक्षण को लेकर दायर याचिका पर अदालत द्वारा विचार नहीं किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति टी. अमरनाथ गौड़ उस याचिका पर निर्णय दे रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता का मामला यह था कि प्रतिवादी (पार्थ घोष) मृतक क्षितिज घोष का पुत्र नहीं था और मृतक द्वारा कथित तौर पर की गयी कुछ वसीयत की आड़ में, प्रतिवादी उन संपत्तियों को बेचता जा रहा था, जो ट्रायल कोर्ट के समक्ष विवादित थी।

याचिका में एक बार फिर डीएनए परीक्षण करने की अनुमति देने के निर्देश के लिए प्रार्थना की गई थी, जिसके लिए एक आवेदन पहले खारिज कर दिया गया था।

डीएनए परीक्षण कराने की याचिका की अनुमति देने से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा,

"जब तक जन्म दस्तावेजों और स्कूल रजिस्टर को यह दिखाने के लिए चुनौती नहीं दी जाती कि क्षितिज घोष पहले प्रतिवादी पार्थ घोष के पिता नहीं हैं, तब तक यह घोषित करने के लिए पहले प्रतिवादी के डीएनए का परीक्षण करने के लिए कोई निर्देश नहीं हो सकता है कि वह मृतक क्षितिज घोष और फुलु रानी घोष का पुत्र है या नहीं।"

कार्यवाही के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रतिवादी विवादित संपत्तियों की बिक्री तीसरे पक्ष से कर रहा था और यदि ट्रायल कोर्ट के समक्ष लंबित मामले में याचिकाकर्ताओं की जीत भी होती है तो उन भाई-बहनों के लिए कोई प्रॉपर्टी नहीं बचेगी।

दूसरी ओर, प्रतिवादी के वकील ने दलील दी कि प्रतिवादी, मृतक क्षितिज घोष और उसकी पत्नी फुलु रानी घोष का पुत्र है और उसके सभी दस्तावेज जैसे स्कूल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र भी यही संकेत देते हैं। ''गौतम कुंडू बनाम पश्चिम बंगाल सरकार और अन्य'' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी भरोसा जतागया गया था जिसमें यह माना गया था कि माता-पिता की वास्तविकता को साबित करने के लिए रक्त परीक्षण किया जाना चाहिए।

प्रतिद्वंद्वी की दलीलें पर विचार विमर्श के बाद, कोर्ट ने कहा कि यह विवादित नहीं है कि याचिकाकर्ता को पता है कि प्रतिवादी के सभी दस्तावेज, जैसे- जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल रिकॉर्ड, राजस्व विभाग से प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, राशन कार्ड और मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रमाणपत्र, सभी यह दर्शाते हैं कि प्रतिवादी क्षितिज घोष और फुलु रानी घोष का पुत्र है। तदनुसार, कोर्ट ने कहा कि डीएनए परीक्षण के लिए याचिका पर विचार करने से पहले याचिकाकर्ता को पहले इन दस्तावेजों को चुनौती देनी होगी।

कोर्ट ने आगे विवादित तथ्यों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और तदनुसार टिप्पणी की,

"यह इस कोर्ट के लिए नहीं है कि जब पार्टियों के लिए उचित उपाय उपलब्ध हो तो तथ्यों के विवादित प्रश्न पर जाएं। याचिकाकर्ताओं, जो मृतक के भाई-बहन हैं द्वारा व्यक्त की गई चिंता कि जैविक भाई के रूप में कानूनी वारिस होने के नाते उनके पास उनकी संपत्ति पर निहित अधिकार है और अगर पहला प्रतिवादी और उसकी पत्नी संपत्तियों को बेचकर हटा रहे हैं तो इससे तीसरे पक्ष का हित पैदा होता है। इस पहलू को तय करना इस अदालत का काम नहीं है।''

तदनुसार, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को विवादित संपत्तियों की रक्षा के अपने दावे के समर्थन में उचित उपाय की मांग के लिए संबंधित अदालत के समक्ष आवेदन करने की स्वतंत्रता प्रदान की।

केस शीर्षक: निर्मल घोष बनाम पार्थ घोष

केस साइटेशन: 2022 लाइव लॉ (त्रिपुरा) 2

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