Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

LiveLaw News Network
24 Oct 2021 5:30 AM GMT
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
x

देशभर के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (11 अक्टूबर, 2021 से 14 अक्टूबर, 2021 तक) क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप।

पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

एंटी-सीएए ड्रामा पर स्कूल के बच्चों से पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है: कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट में कहा

राज्य सरकार ने शुक्रवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय को मौखिक रूप से सूचित किया कि पिछले साल बीदर में शाहीन एजुकेशन सोसाइटी में एक सीएए विरोधी ड्रामा पर देशद्रोह मामले के संबंध में बच्चों से पूछताछ के दौरान वर्दी पहने और हथियार लिए हुए (अदालत को प्रस्तुत तस्वीरों में) दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी और न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा, "एजीए ने निर्देशों के आधार पर कहा कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है और पुलिस महानिदेशक द्वारा सभी पुलिस थानों को परिपत्र जारी किया गया है कि भविष्य में जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 का कड़ाई से अनुपालन किया जाएगा।"

केस का शीर्षक: नयना ज्योति झावर बनाम कर्नाटक राज्य

ऑर्डर डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

POCSO मामला-जम्मू एंड कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने और शादी के वादे पर यौन उत्पीड़न करने के मामले में आरोपी को जमानत देने से इनकार किया

जम्मू एंड कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने एक नाबालिग लड़की को आत्महत्या के लिए उकसाने और उसका यौन उत्पीड़न करने के मामले में आरोपी एक युवक को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

न्यायमूर्ति जावेद इकबाल वानी की पीठ ने आरोपी-याचिकाकर्ता की तरफ से दिए गए उन सामान्य तर्क पर विचार करने से इनकार कर दिया,जिनमें कहा गया था कि उसे कथित अपराध से जोड़ने के लिए कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। उक्त तर्क को खारिज करते हुए, पीठ ने नीरू यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य (2014) के मामले में सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले पर भरोसा किया।

केस का शीर्षकः रणजीत सिंह बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

'यह महामारी नहीं बनना चाहिए': त्रिपुरा हाईकोर्ट ने राज्य को जेलों में बंद कैदियों की एचआईवी जांच और उपचार सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और केंद्र को निर्देश दिया कि राज्य भर की जेलों में एचआईवी के प्रसार को रोकने के लिए एड्स कंट्रोल सोसाइटी के सहयोग से अपने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दें।

नियुक्त चीफ जस्टिस इंद्रजीत महंती और जस्टिस सुभाशीष तालापात्रा की पीठ ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया था। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे राज्य की जेलों में बंद सभी लोगों, जिनमें सजायाफ्ता कैदी और विचाराधीन कैदी सभी शामिल हों, जो एचआईवी पीड़ित हो सकते हैं, उन पर गहन शोध करवाएं।

केस शीर्षक: कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम त्रिपुरा राज्य और अन्य

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

कैसे विशेषज्ञों की राय के बिना हाइब्रिड सुनवाई के बुन‌ियादी ढांचे के लिए 79 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को सवाल किया कि बिना विशेषज्ञों की भागीदारी के कैसे 79 करोड़ से अधिक के संशोधित अनुमान को दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में जिला अदालतों में हाइब्रिड सुनवाई के लिए बुनियादी ढांचा और अन्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए मंजूरी दी थी।

जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा, "यह काफी कौतुहलपूर्ण है। हम इस बात की सराहना करने में विफल रहते हैं कि कैसे विशेषज्ञों की भागीदारी के बिना पीडब्ल्यूडी द्वारा संशोधित अनुमान तैयार किया गया था, अनुमोदन के लिए रखा गया था और वित्त मंत्री द्वारा अनुमोदित भी किया गया था।"

केस का शीर्षक: अनिल कुमार हजले और अन्य बनाम माननीय दिल्‍ली उच्च न्यायालय

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

'मंदिरों से संबंधित भूमि को संरक्षित करने के लिए एचआर और सीई विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए': मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर एंड सीई) विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर के एक हलफनामे को रिकॉर्ड पर लिया, जिसे एक जनहित याचिका के संबंध में दायर किया गया था।

याचिका में तिरुवरूर जिले के तिरुकन्नमंगई में भक्तवत्सला पेरुमल मंदिर में लगभग 400 एकड़ भूमि के अतिक्रमण का मामला उठाया गया था। पिछली सुनवाई पर चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और पीडी ऑदिकेसवालु की पीठ ने संयुक्त आयुक्त द्वारा जवाबी हलफनामा दायर करने के 'अश्लील तरीके' के खिलाफ कड़ी आपत्ति व्यक्त की थी।

केस शीर्षक: एलीफेंट जी राजेंद्रन बनाम सचिव और अन्य

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

मौत की सजा- "हमें उस व्यक्ति को समझने की आवश्यकता, जिसके साथ हम सजा के चरण में काम कर रहे हैं": उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मुरलीधर ने कहा

उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एस मुरलीधर ने मानसिक स्वास्थ्य और डेथ पेनल्टी पर प्रोजेक्ट 39ए की रिपोर्ट जारी करने के मौके पर आयोजित एक पैनल चर्चा में कहा, "इस रिपोर्ट का एक पहलू हमें उस व्यक्ति के संबंध में एक और नैरेटिव देना है, जिसे अपराध का दोषी ठहराया गया है।"

उन्होंने कहा, "यह रिपोर्ट बताती है कि आपको कम से कम उस व्यक्ति को मौत की सजा देने के चरण में स्वीकार करने की आवश्यकता है, जिसके साथ आप काम कर रहे हैं।"

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

झारखंड हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि मामले में कोई कठोर कदम नहीं उठाने का आदेश सात दिसंबर तक बढ़ाया

झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ उनके कथित बयान "सभी चोर मोदी उपनाम वाले क्यों हैं" के लिए दायर मानहानि के एक मामले के संबंध में 'कोई कठोर कदम नहीं उठाने' के आदेश को बुधवार को सात दिसंबर तक बढ़ा दिया।

न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने 27 फरवरी, 2020 को पारित हाईकोर्ट के आदेश की अवधि बढ़ा दी। इसमें निर्देश दिया गया कि रांची कोर्ट के समक्ष उनके खिलाफ दायर मानहानि मामले के संबंध में राहुल गांधी के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाए।

केस का शीर्षक - राहुल गांधी बनाम झारखंड राज्य और अन्य।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

तकनीकी खामियां टैक्स रिफंड देने में बाधा नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता को टैक्स रिफंड देते समय फैसला सुनाया कि तकनीकी गड़बड़ियां करदाताओं को रिफंड के माध्यम से अंतिम राहत देने के रास्ते में नहीं आनी चाहिए।

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने यह देखते हुए कि इस तरह की बाधा राज्य वस्तु और सेवा कर (एसजीएसटी) अधिनियम की धारा 129 के तहत आवश्यक राशि जमा करने के लिए करदाताओं के विश्वास को प्रभावित करेगी, प्रतिवादी अधिकारियों को कर वापसी का निर्देश दिया, "सभी तकनीकी गड़बड़ियां जो बीच में हो सकती हैं, याचिकाकर्ता को रिफंड के अनुदान की अंतिम राहत के रास्ते में नहीं खड़ी होंगी, अन्यथा राज्य वस्तु और सेवा कर अधिनियम की धारा 129 की पूरी योजना की पवित्रता खो जाएगी। राज्य वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 129 के तहत अपेक्षित राशि जमा करने के लिए निर्धारितियों का विश्वास प्रभावित होगा।"

केस शीर्षक: दंतारा ज्वैलर्स बनाम केरल राज्य और अन्य।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

अन्य विवाह न करने वाली पूर्व पत्नी जो खुद का भरण-पोषण करने में असमर्थ है, उसे इद्दत अवधि से परे भरण-पोषण का अधिकार: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि एक मुस्लिम पुरुष मेहर का भुगतान करने के बावजूद, यदि उसकी पूर्व पत्नी अन्य विवाह नहीं करती है और अविवाहित रहती है और खुद का भरण पोषण करने में सक्षम नहीं है तो वह इद्दत अवधि के बाद भी उसके भरण-पोषण का प्रावधान करने के लिए बाध्य है।

जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित ने कहा, "मुसलमानों के बीच विवाह अनुबंध के साथ शुरू होता है और जैसा कि आमतौर पर अन्य समुदायों में होता है परिपक्व स्थिति में आता है; यह स्थिति कुछ न्यायसंगत दायित्वों को जन्म देती है ... तलाक के जर‌िए भंग ऐसा विवाह स्वयं सभी कर्तव्यों को समाप्त नहीं करता है....कानून में नए दायित्व भी पैदा हो सकते हैं, उनमें से एक परिस्थितिजन्य कर्तव्य पूर्व पत्नी को सहारा देना है, जो तलाक के बाद मुफल‌िसी की हालत में है।"

केस शीर्षक: एजाजुर रहमान बनाम शायरा बानो

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

केवल शिकायतकर्ता को गाली देना धारा 504 आईपीसी के तहत अपराध नहीं, उसे सार्वजनिक शांति भंग करने के लिए उकसाना जरूरी: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक फैसले में कहा है कि केवल यह आरोप कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को गाली दी है, आईपीसी की धारा 504 के तहत अपराध की सामग्री को संतुष्ट नहीं करता है। धारा 504 'शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान' की बात करती है।

जस्टिस रोहित बी देव की खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में रिकॉर्ड की गई सामग्री आईपीसी की धारा 504 के अवयवों का खुलासा नहीं करती है और उन्होंने इस प्रावधान के तहत प्रक्रिया जारी करने के आदेश को रद्द कर दिया।

केस शीर्षक: सुभाष मिश्रीलाल जैन बनाम लक्ष्मण कोंडीबा असवार

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

'पिता बेटी का रक्षक है, इससे गंभीर कोई अपराध नहीं हो सकता': केरल हाईकोर्ट ने पिता द्वारा लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में कहा

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में आईपीसी की धारा 376 के तहत एक व्यक्ति को दोषी करार देने के फैसले को बरकरार रखते हुए और उसे 12 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए कहा कि''पिता द्वारा अपनी ही बेटी के साथ बलात्कार करने से ज्यादा गंभीर और जघन्य अपराध कुछ भी नहीं हो सकता।''

न्यायमूर्ति आर. नारायण पिशारदी की पीठ उस 16 साल की लड़की के मामले की सुनवाई कर रही थी, जो अपने पिता के बार-बार यौन उत्पीड़न का शिकार हुई और आखिरकार एक साल बाद उसने अपने पिता के बच्चे को जन्म दिया।

केस का शीर्षकः उन्नीकृष्णन बनाम केरल राज्य

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

T20 वर्ल्ड कप 2021: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टार इंडिया के प्रसारण अधिकारों का उल्लंघन करने वाली वेबसाइटों को प्रतिबंधित किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा दी है। कोर्ट ने स्टार इंडिया के ICC मैन्य T20 वर्ल्ड कप 2021 के स्ट्रीमिंग और प्रसारण अधिकारों का उल्लंघन करने वाली वेबसाइटों को प्रतिबंधित किया। स्टार इंडिया का दावा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद से आठ साल की अवधि के लिए यानी 2015-2023 तक विभिन्न आईसीसी आयोजनों के लिए विशेष वैश्विक मीडिया अधिकार हासिल किया हैं।

केस का शीर्षक: स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एंड अन्य बनाम Filmyclub.wapkiz.com एंड अन्य

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

जांच पूरी हो जाने और पुलिस द्वारा बी-रिपोर्ट दाखिल करने के बाद आरटीआई के तहत मामले की जानकारी देने पर कोई रोक नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि एक बार जांच पूरी हो जाने और पुलिस द्वारा बी-रिपोर्ट दाखिल करने के बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मामले के बारे में जानकारी देने पर कोई रोक नहीं है।

न्यायमूर्ति एनएस संजय गौड़ा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने राज्य सूचना आयुक्त (एसआईसी) के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा, "मेरे विचार में, आयुक्त (एसआईसी) ने बी-रिपोर्ट और उसके संलग्नकों को प्रस्तुत करने का निर्देश देना बिल्कुल उचित है जैसा कि प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा मांगा गया था, खासकर जब मामले में जांच पूरी हो गई हो।"

केस का शीर्षक: जन सूचना अधिकारी बनाम मल्लेशप्पा एम चिक्केरी

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

"पीड़िता को बेरहमी से कुचला गया; महिलाएं इस्तेमाल की वस्तु नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामूहिक बलात्कार के आरोपी को जमानत देने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक रेप आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा, आरोपी सितंबर 2020 हुई घटना में शामिल था, जिसमें पीड़‌िता के शरीर को "आद‌िम होमो सेपियंस ने कुचला और मसल दिया।"

जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि महिलाएं इस प्रकार इस्तेमाल की जाने वाली वस्तु नहीं है। उन्होंने जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आरोपी द्वारा कथित रूप से किए गए अपराध के प्रति सभ्य समाज में कोई सहानुभूति नहीं है।

केस का शीर्षक - वाशु बनाम स्टेट ऑफ यूपी और 2 अन्य

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

मध्यस्थ न्यायाधिकरण एकपक्षीय अंतरिम आदेश पारित नहीं कर सकता; मध्‍यस्‍थता अधिनियम के तहत अग्रिम नेटिस जारी करना अनिवार्य: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण केवल एक अंतरिम आवेदन दाखिल करने पर एक पक्षीय अंतरिम आदेश पारित नहीं कर सकता क्योंकि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 के तहत किसी भी सुनवाई के लिए अग्रिम नोटिस जारी करना अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी ने कहा कि अधिनियम की धारा 18,19 और 24 (2) को संयुक्त रूप से पढ़ने के लिए सभी पक्षों के साथ सभी चरणों में उचित व्यवहार करने की आवश्यकता है। साथ ही, ट्रिब्यूनल को उन्हें अपना मामला पेश करने का पर्याप्त अवसर देना चाहिए, जिसमें अंतरिम आदेश के समय सुनवाई का मौका भी शामिल है।

केस का शीर्षक: गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड बनाम गोल्डब्रिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

केरल हाईकोर्ट ने 'बॉन्ड' और 'एग्रीमेंट' के बीच अंतर समझाया

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में अनुबंध (agreement) और बॉन्ड (bond) के बीच के अंतर स्थापित करते हुए दोहराया कि किसी इंस्ट्रूमेंट के बॉन्ड के चरित्र में आने के लिए यह आवश्यक है कि इंस्ट्रूमेंट (साधन) में ही दायित्व उत्पन्न हो। न्यायालय के समक्ष प्रश्न यह था कि क्या पक्षकारों द्वारा किया गया एग्रीमेंट केरल स्टाम्प अधिनियम, 1959 की धारा 2 (ए) के तहत परिभाषित एक बॉन्ड है या एक समझौता।

केस शीर्षक: सफीर बनाम साजिद

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

'वादी को अंधेरे में नहीं रखा जा सकता': केरल हाईकोर्ट ने कहा मुंसिफ आयोग की रिपोर्ट को रद्द करने के बावजूद सीमा निर्धारण के लिए संपत्ति का मुकदमा तय करने के लिए बाध्य

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट वादी की संपत्ति की सीमा तय करने की मांग संबंधी मुकदमे का निस्तारण करने, उस पर फैसला देने के लिए बाध्य है, इस तथ्य के बावजूद कि आयोग की रिपोर्ट और उसकी योजना कार्यवाही के दरमियान रद्द कर दी गई है।

जस्टिस ए बधरुद्दीन ने आदेश जारी करते हुए कहा, "...जब वादी ने अपनी संपत्ति की दक्षिणी सीमा तय करने के लिए मुंसिफ से संपर्क किया तो मुंसिफ विवाद का निस्तारण करने और फैसला देने के लिए बाध्य है। यदि आयोग की रिपोर्ट और ऐसा करने के लिए प्राप्त योजना...... बिना किसी और आदेश के रद्द कर दी जाती है तो वह बदले में वादी को उपचारहीन स्थिति में या अंधेरे में डाल देगी।"

केस शीर्षक: युदाथादेवस बनाम जोसेफ

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

रणजीत सिंह हत्याकांड: डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम और चार अन्य को सीबीआई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई

पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और चार अन्य को रणजीत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई।

विशेष सीबीआई जज सुशील गर्ग ने 8 अक्टूबर को उन्हें आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया था। मामले में जिन अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, उनमें अवतार सिंह, कृष्ण लाल, जसबीर सिंह और सबदिल सिंह शामिल हैं। एक आरोपी इंदर सेन की 2020 में मौत हो गई थी।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

SC/ST Act- "कोई अपराध तब तक नहीं माना जाएगा जब तक यह नहीं दिखाया जाता कि मृतक शरीर को केवल जाति के कारण कस्टडी में रखा गया": बॉम्बे हाईकोर्ट ने अस्पताल के कर्मचारियों को अग्रिम जमानत दी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अस्पताल के कर्मचारियों को अग्रिम जमानत दी, जिन पर कथित तौर पर शिकायतकर्ता, अन्य लोगों (जो अनुसूचित जाति समुदाय के सदस्य हैं) के रिश्तेदार का शव कस्टडी में रखने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अधिनियम (SC/ST Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

यह देखते हुए कि अस्पताल के बिल को पूरा नहीं भरने के कारण शव को कस्टडी में रखा गया था, न्यायमूर्ति संदीप के शिंदे की खंडपीठ ने कहा कि मृत शरीर को कस्टडी में रखना एससी / एसटी अधिनियम 1989 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा जब तक कि यह नहीं दिखाया जाता है कि शरीर अस्पताल प्रशासन/कर्मचारियों द्वारा केवल इसलिए कस्टडी में लिया गया क्योंकि मृतक अनुसूचित जाति का था।

केस का शीर्षक - इंद्रजीत दिलीप पाटिल एंड अन्य बनाम महाराष्ट्र राज्य एंड अन्य

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

गुजरात 'एंटी-लव जिहाद' कानून: हाईकोर्ट ने आरोपी-पति और उसके रिश्तेदारों को उसकी और शिकायतकर्ता-पत्नी की संयुक्त समझौता याचिका पर अंतरिम जमानत दी

गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को एक आरोपी/पति, उसके रिश्तेदारों को उसकी और उसकी शिकायतकर्ता-पत्नी द्वारा दायर एक संयुक्त समझौता याचिका पर अंतरिम जमानत दी, जिसमें गुजरात धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2021 [एंटी लव जिहाद कानून] के तहत प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति इलेश जे. वोरा की खंडपीठ अंतरधार्मिक जोड़े की संयुक्त याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया था कि मुद्दों को सुलझा लिया गया है और वे अपने वैवाहिक संबंधों को जारी रखना चाहते हैं।

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

एनडीपीएस अधिनियम के तहत फोरेंसिक रिपोर्ट मामले की नींव रखती है; इसकी अनुपस्थिति में अभियोजन के मामले का आधार खत्म हो जाता है: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अवलोकन में कहा कि एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) अधिनियम के तहत फॉरेंसिक रिपोर्ट मामले की नींव रखती है और इसकी अनुपस्थिति में अभियोजन के मामले का आधार खत्म हो जाता है।

न्यायमूर्ति गुरविंदर सिंह गिल की खंडपीठ ने यह बात विनय कुमार को जमानत देते हुए कही। दरअसल, आरोपी के पास से 'क्लोविडोल -10 एसआर' (ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड) की 7000 गोलियां कथित तौर पर बरामद की गई थीं।

केस का शीर्षक - विनय कुमार @ विक्की बनाम हरियाणा राज्य

आगे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Next Story