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रणजीत सिंह हत्याकांड: डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम और चार अन्य को सीबीआई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई

LiveLaw News Network
18 Oct 2021 12:15 PM GMT
रणजीत सिंह हत्याकांड: डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम और चार अन्य को सीबीआई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई
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पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और चार अन्य को रणजीत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई।

विशेष सीबीआई जज सुशील गर्ग ने 8 अक्टूबर को उन्हें आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया था। मामले में जिन अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, उनमें अवतार सिंह, कृष्ण लाल, जसबीर सिंह और सबदिल सिंह शामिल हैं। एक आरोपी इंदर सेन की 2020 में मौत हो गई थी।

उल्‍लेखनीय है कि रणजीत सिंह डेर प्रबंधक थे और गुरमीत राम रहीम के अनुयायी थे। गुरमीत राम रहीम पहले से ही बलात्कार के अपराध में सजा काट रहा है।

सीबीआई के अनुसार, रणजीत सिंह की 10 जुलाई, 2002 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गुरमीत राम रहीम को संदेह था कि मृतक एक गुमनाम पत्र के प्रसार के पीछे था, जिसमें डेरा प्रमुख द्वारा महिला अनुयायियों के यौन शोषण के मामलों को उजागर किया गया था।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में रणजीत सिंह के बेटे की ओर से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें विशेष सीबीआई जज, पंचकूला के समक्ष लंबित राम रहीम सिंह के खिलाफ हत्या के मुकदमे को स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। हालांकि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ हत्या के मामले को स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी

मृतक रणजीत सिंह के बेटे ने मामले को पंजाब, हरियाणा या चंडीगढ़ में किसी अन्य सीबीआई अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी। उसकी दलील थी कि मुकदमे का संचालन करने वाले पीठासीन जज सीबीआई के लोक अभियोजक के माध्यम से आरोपी द्वारा अनुचित रूप से प्रभावित थे।

हालांकि, उनकी याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस अवनीश झिंगन की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की आशंकाएं उचित नहीं थीं, बल्कि अनुमानों पर आधारित थीं।

याचिका के खारिज होने से सीबीआई अदालत को फैसला सुनाने का रास्ता साफ हो गया था। विशेष सीबीआई जज पंचकूला, सुशील कुमार गर्ग, 26 अगस्त को फैसला सुनाने के लिए तैयार थे, हालांकि न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान की पीठ ने अदालत को ऐसा करने से रोक दिया था।

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