मुख्य सुर्खियां

गैंगस्टर विकास दुबे के कथित एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग करने वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की
गैंगस्टर विकास दुबे के कथित एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग करने वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को कानपुर गैंगस्टर विकास दुबे की कथित मुठभेड़ की न्यायिक जांच की मांग वाली एक याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि यूपी सरकार ने पहले ही उस दिशा में कदम उठा लिया है। जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार की पीठ ने कहा, "इस तथ्य पर विचार करते हुए कि यूपी राज्य द्वारा विशेष जांच दल और न्यायिक आयोग का गठन पहले ही कर लिया गया है, ताकि प्रश्न में कथित घटना की जांच हो सके, हम वर्तमान रिट याचिका को खारिज करते हैं।" उत्तर प्रदेश...

समझौता आवेदन, सहमति से तलाक़ की अर्ज़ी और श्योरिटी स्वीकार करने के लिए पक्षकारों को कोर्ट में सशरीर मौजूद रहने की ज़रूरत नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट
समझौता आवेदन, सहमति से तलाक़ की अर्ज़ी और श्योरिटी स्वीकार करने के लिए पक्षकारों को कोर्ट में सशरीर मौजूद रहने की ज़रूरत नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि पक्षकारों की हस्ताक्षर युक्त सुलह की अर्ज़ी को उनके वकील अदालत में अगर पेश करते हैं तो उसके आधार पर फ़ैसला करना अदालत के लिए क़ानून सम्मत है, भले ही पक्षकर सशरीर अदालत में मौजूद न हों। इसके अलावा यह भी कहा गया कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13B और विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 28 के तहत मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो सकती है। मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और जस्टिस विश्वजीत शेट्टी की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में...

यह छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं की अनुमति देने के गृह मंत्रालय के आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश के क़ानून के छात्रों ने सीजेआई को पत्र लिखा
यह छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन : यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं की अनुमति देने के गृह मंत्रालय के आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश के क़ानून के छात्रों ने सीजेआई को पत्र लिखा

विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षा लेने के केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश के ख़िलाफ़ क़ानून के छात्रों ने देश के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा है कि ऐसा करना छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। भोपाल विश्वविद्यालय में क़ानून के अंतिम वर्ष के छात्र और यूथ बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (स्टूडेंट विंग) के सर्कल हेड यश दुबे ने यह पत्र लिखा है। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेने और विश्वविद्यालय के अकादमिक कैलेंडर को कोरोना महामारी के शांत होने तक स्थगित...

P&H High Court Dismisses Protection Plea Of Married Woman Residing With Another Man
गवाह से यह उम्‍मीद नहीं की जा सकती कि उसकी याददाश्त पिक्चर जैसी हो, तथ्यों/बयानों में सुधार या बदलाव प्राकृतिकः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मामले में, "किसी से आइडेटिक/ फोटोग्राफिक मेमोरी की उम्मीद नहीं की जा सकती है" और "तथ्यों मामूली बदलाव या या कथित सुधार होना स्वाभाविक है।" जस्टिस अनिल क्षेतरपाल ने कहा, "प्राकृतिक बदलाव होते हैं और ऐसे निक्षेपों पर सावधानीपूर्ण विश्लेषण के बाद अदालतों द्वारा विचार और भरोसा किया जाता है।" सिंगल बेंच उक्त टिप्‍पणी दो दोषियों - एक महिला और उसके जीजा (बहन के पति) की अपील को खारिज करते हुए की - ‌जिन पर अपनी खुद की नाबालिग बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप...

संविधान निर्माताओं ने जाति और पितृसत्ता की नींव पर खड़े समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन की कोशिश कीः जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
संविधान निर्माताओं ने जाति और पितृसत्ता की नींव पर खड़े समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन की कोशिश कीः जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़

पूर्व चीफ जस्ट‌िस ऑफ इंडिया, जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ की जन्म शताब्दी के अवसर पर इंडियन लॉ सोसायटी, ILS लॉ कॉलेज ने एक उत्सव का आयोजन किया। यह कॉलेज जस्टिस चंद्रचूड़ का अल्मा मेटर भी है। इस अवसर पर एक चर्चा का आयोजन किया गया, जिसका विषय "परिवर्तनशीन समाज और संवैधानिक निरंतरता - न्याय की तलाश में अनुभव।" चर्चा में सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "अपने पिता के जीवन को देखे हुए हुए, ऐसा लगता है कि हमारा समय अलग-अलग है, जबकि, जिस संवैधानिक ढांचे की रक्षा की शपथ हमने ली है,...

आरोपी नहीं जानता था पीड़ित की पहचान, प्रथम दृष्टया एससी/एसटी  एक्ट के तहत  कोई  मामला नहीं बनता :  गुजरात हाईकोट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दी अग्रिम जमानत
आरोपी नहीं जानता था पीड़ित की पहचान, प्रथम दृष्टया एससी/एसटी एक्ट के तहत कोई मामला नहीं बनता : गुजरात हाईकोट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दी अग्रिम जमानत

गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत एक आरोपी व्यक्ति को अग्रिम जमानत देते हुए कहा है कि आरोपी को पीड़ित की पहचान नहीं थी और वह उसकी पहचान के बारे में नहीं जानता था। इसलिए विशेष कानून के तहत गिरफ्तारी से पूर्व जमानत देने के संबंध में लगाई गई रोक इस मामले पर लागू नहीं होती।न्यायमूर्ति भार्गव डी करिया की पीठ इस मामले में एससीएसटी अधिनियम की धारा 14 ए के तहत दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। अपीलकर्ता के खिलाफ भारतीय दंड...

दिल्ली हाईकोर्ट ने COVID-19 के मद्देनजर अपने सभी अंतरिम आदेशों की अवधि 31 अगस्त तक बढ़ाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने COVID-19 के मद्देनजर अपने सभी अंतरिम आदेशों की अवधि 31 अगस्त तक बढ़ाई

दिल्ली में कोरोना महामारी को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने सभी अंतरिम आदेशों की मियाद 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी है।इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल, सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सभी ऐसे अंतरिम आदेशों की मियाद अगले आदेश तक स्वतः 31 अगस्त 2020 तक बढ़ जाएगी। यह आदेश उन आदेशों पर लागू नहीं होंगे जिनके बारे में कोई अलग आदेश सुप्रीम कोर्ट ने इस अवधि के दौरान दिया है।दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए संविधान के अनुच्छेद...

वर्तमान प्रणाली के साथ तकनीकी का परस्पर जुड़ाव होना चाहिए; ठोस जिरह को छोड़ विभिन्न प्रक्रियाएं को अभासी माध्यमों से किया जा सकता हैः जस्टिस सूर्यकांत
वर्तमान प्रणाली के साथ तकनीकी का परस्पर जुड़ाव होना चाहिए; ठोस जिरह को छोड़ विभिन्न प्रक्रियाएं को अभासी माध्यमों से किया जा सकता हैः जस्टिस सूर्यकांत

तमिलनाडु की डॉ अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी (TNDALU) की ओर से आयोजित एक ऑनलाइन सेमिनार, जिसका विषय- "न्याय की उपलब्‍धता और न्यायिक सुधार- समकालीन परिप्रेक्ष्य" था, में सुप्रीम कोर्ट के जज, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आभासी न्यायालयों को वास्तविक न्यायालयों के अस्‍थायी प्रतिस्‍थापन के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्‍कि तकनीक वर्तमान प्रणाली के साथ जोड़ा जाना चाहिए। ज‌स्टिस कांत ने कहा कि वास्तविक न्यायालयों के साथ-साथ आभासी न्यायालयों का मिश्र‌ित प्रयोग 'कथित डॉकेट विस्फोट' को हल करने के लिए आदर्श होगा। ...

PM CARES फंड और आकस्मिक निधि का उपयोग वकीलों के वित्तीय संकट को दूर करने में करने की मांग : दिल्ली बार काउंसिल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा
PM CARES फंड और आकस्मिक निधि का उपयोग वकीलों के वित्तीय संकट को दूर करने में करने की मांग : दिल्ली बार काउंसिल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने भारत के आकस्मिक निधि और PM CARES फंड से 500 करोड़ की धनराशि जारी करने का अनुरोध किया है, जिससे दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे वकीलों को सरकार से तत्काल वित्तीय सहायता मिल सके। पत्र में कहा गया कि एनसीआर क्षेत्र में कानूनी बिरादरी के लोग इस समय गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं और उन्हें सरकार से तत्काल वित्तीय सहायता की आवश्यकता है।मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए...

उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास दुबे के साथ पुलिस की मिलीभगत की जांच करने के लिए SIT का गठन किया
उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास दुबे के साथ पुलिस की मिलीभगत की जांच करने के लिए SIT का गठन किया

उत्तर प्रदेश सरकार ने गैंगस्टर विकास दुबे द्वारा की गई आपराधिक गतिविधियों और अधिकारियों द्वारा उस पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए उठाए गए कदमों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस SIT का नेतृत्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी संजय भुसरेड्डी को सौंपा गया है।अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, हरिराम शर्मा और डीआईजी रवींद्र गौड़ भी इस एसआईटी में शामिल किया गया है और इसे 31 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रस्तुत करने को कहा गया है।* दुबे के खिलाफ लंबित आरोपों के संबंध में...

आम चाहत को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से पूरा करना क्या लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?: वक़ील ने विकास दुबे मामले में पुलिस के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने के लिए CJI को पत्र लिखा
"आम चाहत को ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से पूरा करना क्या लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?": वक़ील ने विकास दुबे मामले में पुलिस के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने के लिए CJI को पत्र लिखा

मुंबई के एक वक़ील अटल बिहारी दुबे ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश के उन पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की मांग की है जिन्होंने मध्य प्रदेश में गिरफ़्तार हुए कुख्यात बदमाश विकास दुबे को शुक्रवार को फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया। दुबे को 3 जुलाई को गिरफ़्तार करने गए आठ पुलिस वालों को मार देने के बाद यह बदमाश ग़ायब हो गया था। बाद में उसे उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ़्तार किया गया था।अटल बिहारी दुबे ने अपने पत्र में लिखा है कि विकास दुबे ख़ुद ही महाकाल...

संविधान मे प्रति असंतोष पैदा करना, भारत की संप्रभुता को बाधित करने के बराबर, दिल्ली पुलिस ने शारजील इमाम के ‌खिलाफ UAPA लगाते हुए कहा
'संविधान मे प्रति असंतोष पैदा करना, भारत की संप्रभुता को बाधित करने के बराबर', दिल्ली पुलिस ने शारजील इमाम के ‌खिलाफ UAPA लगाते हुए कहा

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र शारजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम, 1967 (UAPA) की धारा 13 लगाने के ‌लिए दिल्ली पुलिस ने उनके एक कथ‌ित भाषण का हवाला दिया है, जिसमें उन्होंने भारत के संविधान को 'फासीवादी दस्तावेज' करार देते हुए, इसे खारिज़ किए जाने का आह्वान किया था। पुलिस ने यह कहते हुए शारजील के खिलाफ जांच की अवधि 90 दिनों से आगे बढ़ाने की मांग की है, कि उनके खिलाफ यूएपीए की धारा 13- जो कि 'गैरकानूनी गतिविधि' से संबंधित है - के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है,...

व‌िकास दुबे एनकाउंटर प्रकरण की न्यायिक जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को वकीलों ने लिखा पत्र, बोले- आम आदमी का न्याय से भरोसा उठ जाएगा
व‌िकास दुबे एनकाउंटर प्रकरण की न्यायिक जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को वकीलों ने लिखा पत्र, बोले- "आम आदमी का न्याय से भरोसा उठ जाएगा"

इलाहाबाद हाईकोर्ट को लिखे एक पत्र में विकास दुबे एनकाउंटर प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग की गई है। चीफ जस्टिस को संबोध‌ित पत्र में कहा गया है, "ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना एक भयावह उदाहरण है, जब पुलिस ने एक्‍स्ट्रा जुडिशल फैशन में, बिना उचित जांच-पड़ताल किए और बिना अदालत के समक्ष उचित और न्यायपूर्ण ट्रायल का अवसर दिए, एक अपराधी को मारकर, संविधान के तहत स्थापित कोर्ट ऑफ लॉ की शक्तियों और कार्यों को अपना मान लेने और हथ‌िया लेने की कोश‌िश की है। यह एक भयावह और विस्मयकारी संदेश देता है कि न्यायिक...

कानून की छात्रा ने COVID-19 महामारी को देखते हुए सेमेस्टर परीक्षा रद्द कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट को पत्र लिखा
कानून की छात्रा ने COVID-19 महामारी को देखते हुए सेमेस्टर परीक्षा रद्द कराने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट को पत्र लिखा

क़ानून के अंतिम वर्ष के एक छात्रा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को COVID-19 महामारी को देखते हुए पत्र लिखकर छात्रों और परीक्षा से जुड़े अन्य संबंधित लोगों की सुरक्षा का सवाल उठाया है। आईएलएस लॉ कॉलेज, पुणे की छात्रा अंश्रिता ने यह याचिका दायर की है और उसने देश और महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण की बढ़ती संख्या को देखते हुए पत्र में लिखा है, "एम्स के आंकड़ों के अनुसार भारत में नवंबर के मध्य में COVID-19 संक्रमण अपने चरम पर होगा और इसको ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अंतिम वर्ष...

जांच शुरू होने के बाद किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस अधिकारी को दिये या भेजे जाने वाले पत्र पर सीआरपीसी की धारा 162 के तहत प्रतिबंध लागू होता है: केरल हाईकोर्ट
जांच शुरू होने के बाद किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस अधिकारी को दिये या भेजे जाने वाले पत्र पर सीआरपीसी की धारा 162 के तहत प्रतिबंध लागू होता है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि एक व्यक्ति द्वारा अपराध की जांच शुरू होने के बाद पुलिस अधिकारी को भेजा जाने वाला पत्र अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 की धारा 162 (एक) के प्रतिबंध के दायरे में आता है। संहिता की धारा 162 (एक) में यह प्रावधान है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी पुलिस अधिकारी को जांच के दौरान दिये गये बयान को यदि लिखित में दिया जाता है तो वह व्यक्ति उस पर हस्ताक्षर करेगा। इसमें आगे कहा गया है कि इस तरह का बयान या इससे संबंधित कोई दस्तावेज वैसे किसी भी अपराध से संबंधित जांच या...

ऑनलाइन क्लास की सुविधा देने वाले निजी स्कूल ट्यूशन फ़ीस वसूल सकते हैं : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को सही ठहराया; सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुमति याचिका वापस ली
ऑनलाइन क्लास की सुविधा देने वाले निजी स्कूल ट्यूशन फ़ीस वसूल सकते हैं : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को सही ठहराया; सुप्रीम कोर्ट से विशेष अनुमति याचिका वापस ली

प्रिंसिपल ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी विशेष अनुमति याचिका वापस ले ली। इस आदेश में कोरोना महामारी के कारण निजी स्कूलों को ट्यूशन फ़ीस वसूलने से रोक दिया था। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 3 जुलाई 2020 को अपने आदेश में ऑनलाइन क्लास उपलब्ध कराने वाले निजी स्कूलों को ट्यूशन फ़ीस वसूलने की अनुमति देने के सरकारी आदेश में किसी भी तरह के हस्तक्षेप से मना कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोबडे, आर सुभाष रेड्डी और एएस बोपन्ना...