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अधिवक्ताओं के लिए बीमा योजना- बीमा कंपनियों के साथ बातचीत करके दो सप्ताह के अंदर फाइनल की जाए पाॅलिसी, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया दिल्ली सरकार को निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह भारत की तीन शीर्ष राष्ट्रीयकृत बीमा कंपनियों - न्यू इंडिया इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और ओरिएंटल इंश्योरेंस के साथ बातचीत करे और 2 सप्ताह के भीतर अधिवक्ताओं को ग्रुप-मेडिक्लेम प्रदान करने की नीति को अंतिम रूप दे। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए, न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह की एकल पीठ ने इन बीमा कंपनियों को बयाना राशि जमा करने (ईएमडी) और अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता से भी छूट दे दी है।अदालत ने दिल्ली...
वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपने शिखर पर है लेकिन डायन-शिकार (Witch-Hunting) की प्रथा इस सदी में भी बहुत अधिक सक्रिय है: उड़ीसा हाईकोर्ट ने इसको लेकर समान कानून की वकालत की
उड़ीसा राज्य में डायन-शिकार (Witch-Hunting) की अमानवीय और बर्बर प्रथा की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए, उड़ीसा उच्च न्यायालय ने हाल ही में देखा कि डायन शिकार, जो कि संस्कृति, धर्म और क्षेत्र में प्रचलन में है, वह मानव के तथाकथित सभ्य समाज के भयानक चेहरे को उजागर करता है और अशिक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग इस प्रथा के नरम लक्ष्य हैं। न्यायमूर्ति एस. के. पाणिग्रही की पीठ ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि चुड़ैलों/डायनों या जादू टोना का विचार, आदिवासी समाज में वर्तमान शताब्दी में भी प्रचलित है,...
उड़ीसा हाईकोर्ट ने डॉक्टरों से कहा, परचे पर दवाओं के नाम बड़े अक्षरों में या पढ़ने योग्य लिखें
उड़ीसा हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि सरकारी या निजी या अन्य मेडिकल सेट-अप में काम कर रहे डॉक्टरों को दवाओं का नाम "बड़े अक्षरों" में लिखना चाहिए, ताकि वह पढ़ा जा सके। जस्टिस एसके पाणिग्रही की पीठ ने यह टिप्पणी एक जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए की, जिसमें आवेदक ने अपनी बीमार पत्नी की देखभाल के लिए अंतरिम राहत मांगी थी। आवदेक ने अपनी पत्नी का मेडिकल रिकॉर्ड पेश किया था। अदालत ने पाया कि उक्त मेडिकल रिकॉर्ड को पढ़ना बहुत कठिन है और आम आदमी की समझ से परे है। कोर्ट ने जमानत याचिका की अनुमति...
किसी एक श्रेणी में उम्मीदवारों की उपलब्धता न होने का मामला : राजस्थान हाईकोर्ट ने विधवाओं और तलाकशुदा महिलाओं के बीच आरक्षित रिक्तियों की अंतर्विनिमेयता (Interchangeability) को वैध ठहराया
हमें विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को दिए गए आरक्षण को अंतर्विनिमेय बनाने यानी श्रेणीवार, एक उप-वर्ग के रिक्त पदों को दूसरे उप-वर्ग से भरने में कोई संवैधानिक बाधा नजर नहीं आ रही है।
'एक दिन जब रिश्तों में खटास आई तो उसने शिकायत दायर कर दी' : बाॅम्बे हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को दी ज़मानत
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को 24 वर्षीय एक महिला से बलात्कार करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी। इस महिला से उसकी दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई थी। आरोपी को 20 मार्च, 2020 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में बंद है। न्यायमूर्ति भारती डांगरे की बेंच ने अताउल्लाह अंसारी की तरफ से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई की। अंसारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (2) (एन) के तहत किए गए अपराध के मामले में कांदिवली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने 18 जून, 2020 को आरोप पत्र...
NLSIU में 25 प्रतिशत डोमिसाइल आरक्षण के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंची
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की है कि नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया (संशोधन) एक्ट 2020 (जो कर्नाटक के छात्रों के लिए 25 प्रतिशत हॉरिजान्टल डोमिसाइल याने एक समान निवास स्थान के आधार पर आरक्षण की अनुमति देता है) को भारत के संविधान के उल्लंंघन करने के रूप मेंं घोषित किया जाए। याचिका में दावा किया गया है कि बीसीआई से परामर्श लिए बिना ही राज्य ने अधिनियम में संशोधन कर दिया है। इस संशोधन के तहत सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों को एक...
राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी की मौत की सज़ा बरकरार रखी
राजस्थान हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते एक हत्या के आरोपी को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा। मोहन सिंह @ महावीर पर एक महिला की गला दबाकर हत्या करने और उसके बाद उसके पेट को काटकर उसके शरीर से कुछ अंगों को निकाल लिया गया था। पोस्टमार्टम जांच रिपोर्ट एक्ज़िबिट P36 के अनुसार मृतक की आंत, यकृत, अंडाशय, मूत्राशय, गर्भाशय और आंत का हिस्सा गायब था। ट्रायल कोर्ट ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 392 और 201 के तहत दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई। जस्टिस सबीना और जस्टिस चंद्र कुमार सोंगरा की...
न्यायमूर्ति कुरैशी का युवा वकीलों को सुझाव, 'असाधारण वकील बनने के लिए बच्चों जैसी जिज्ञासा का विकास करें'
लाइवलॉ ने हाल ही में एक वेबिनार का आयोजन किया, जिसका विषय था- क्लासरूम ट्रेनिंग का उपयोग बढ़िया वकालत के लिए कैसे करें। कार्यक्रम में त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अकिल कुरैशी ने वकालत के पेशे से संबंधित कई विषयों पर अपनी बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की। जस्टिस कुरैशी ने छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए लॉ स्कूलों की वर्तमान शैक्षणिक संरचना की पर्याप्तता सहित न्याय वितरण प्रणाली में मजबूत बार की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया।भाई-भतीजावाद पर उन्होंने कहा कि...
अनुच्छेद 341 के तहत राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित सूची को संशोधित करने की शक्ति राज्य सरकार को नहीं : पंजाब एवं हरियाणा कोर्ट ने हरियाणा सरकार की अधिसूचनाओं पर लगायी रोक
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 'गड़रिया' समुदाय को अनुसूचित जाति में शामिल करने की हरियाणा सरकार की दो अधिसूचनाओं पर सोमवार को यह कहते हुए रोक लगा दी कि राज्य सरकार को संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत किसी भी जाति, वर्ग या जनजाति या समुदाय के किसी हिस्से या समूह को अनुसूचित जाति में वर्गीकृत करने का अधिकार नहीं है। हरियाणा प्रांत में समय-समय पर संशोधित संवैधानिक आदेश 1950 के तहत 'सांसी' अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है। राज्य सरकार द्वारा पांच जुलाई 2019 को जारी...
डीयू ओपन बुक परीक्षा : दिल्ली यूनिवर्सिटी ने दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा जारी निर्देशों के खिलाफ अपील दायर की
दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा आयोजित करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह की बेंच द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार ( 7 अगस्त) को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को अपनी ऑनलाइन ओपन बुक एक्ज़ाम (ओबीई) आयोजित करने की अनुमति दी थी। हालांकि, छात्रों द्वारा उठाए गई विभिन्न चिंताओं को दूर करने के लिए न्यायालय ने कई निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने डीयू को निर्देश दिया...
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग द्वारा घोषित वार्षिक परिणाम रद्द करने व पुनर्मूल्यांकन की मांग करते हुए दसवीं कक्षा के छात्रों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की
मार्च-अप्रैल की पब्लिक एक्ज़ामिनेशन 2020 के परिणाम का पुनर्मूल्यांकन करने की मांग करते हुए दसवीं कक्षा के कुल बीस छात्रों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की है, क्योंकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) ने दसवीं कक्षा की परीक्षाओं को रद्द कर दिया था। साथ ही निर्णय लिया था कि प्रैक्टिकल एक्ज़ाम और ट्यूटर मार्कड असेस्मेंट में मिले अंकों के आधार पर ही थ्योरी एग्जाम के अंकों का आकलन किया जाएगा। याचिका में कहा गया है कि यह एनआईओएस की स्वयं की मूल्यांकन योजना का उल्लंघन...
क्षेत्राधिकार का ध्यान दिए बिना दायर याचिका रद्द करते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में मुंबई की एक कंपनी के निदेशकों से मुकदमे की लागत वसूलने का आदेश दिया। निदेशक अपने खिलाफ पारित अयोग्यता आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पेश हुए थे, जिनका मकसद, अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना, हाईकोर्ट की ओर से तय एक मिसाल का लाभ लेना था। जस्टिस अलका सरीन की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि न तो याचिकाकर्ता पंजाब, हरियाणा या चंडीगढ़ के निवासी हैं और न ही वह कंपनी, जिसके निदेशक के रूप में उन्हें कार्य करने के लिए अयोग्य ठहराया गया है, यहां पंजीकृत है। उन्होंने कहा कि...
निजी शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ रिट याचिका सुनवाई योग्य, क्योंकि ऐसे संस्थान भी सार्वजनिक कार्य में शामिल हैंः जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह दोहराया कि विशुद्ध रूप से निजी, बिना मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के खिलाफ दायर याचिकाएं, यह ध्यान में रखते हुए कि ऐसे संस्थान सार्वजनिक कार्य कर रहे हैं, भी सुनवाई योग्य हैं। जस्टिस जावेद इकबाल वानी एक गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूल में नियुक्त शिक्षक की याचिका पर विचार कर रहे थे, जिसे नौकरी से निकाल दिया गया था। याचिकाकर्ता ने आग्रह किया था कि उत्तरदाता-विद्यालय, राज्य की ओर से अपनी संप्रभु क्षमता अनुसार प्रदान की जा रही शैक्षिक गतिविधियों...
जनहित याचिका सभी मर्ज़ का इलाज नहीं, इसका इस्तेमाल संदेहास्पद उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बुधवार (05 अगस्त) को एक याचिका की सुनवाई की, जिसमे 'हिमाचल प्रदेश सबऑर्डिनेट एलाइड सर्विसेज (मुख्य) परीक्षा -2019' को स्थगित करने की मांग की गयी थी कि यह कहा गया था कि परीक्षा को COVID-19 संकट सामान्य होने के बाद आयोजित किया जाए। [नोट: उक्त परीक्षा 6 (गुरुवार) और 7 (शुक्रवार) अगस्त को शिमला, मंडी और धर्मशाला में स्थापित विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई।] जस्टिस तारलोक सिंह चौहान और जस्टिस ज्योत्सना रेवल दुआ की पीठ ने याचिकाकर्ता (हिमांशु) द्वारा दायर...
हाई पावर्ड कमेटी के मानदंड के अनुसार आर्थिक अपराध के अंडरट्रायल कैदी नहीं हैंं अंतरिम ज़मानत के हकदार : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाई पावर्ड कमेटी की 28 मार्च की बैठक के मिनट्स को रद्द करने से इनकार कर दिया है। यह कमेटी जेलों में भीड़ कम करने के लिए गठित की गई थी। कमेटी ने अपनी बैठक में उन कैदियों को अंतरिम जमानत के दायरे से बाहर रखा था,जो आर्थिक अपराध के आरोप में जेलों में बंद हैं या जिनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच की जा रही है। हालांकि न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की एकल खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के कैदियों को आपराधिक प्रक्रिया संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत जमानत मांगने की स्वतंत्रता है। ...
फेसबुक पर पवित्र कुरान की तुलना कोरोना वायरस से की थी, कर्नाटक हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 32 वर्षीय एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत दी है। उस व्यक्ति ने अप्रैल महीने में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक संदेश पोस्ट किया था, जिसमें कथित रूप से कोरोनोवायरस की तुलना पवित्र कुरान के साथ की गई थी। इस प्रकार, पवित्र कुरान का अपमान किया गया था और मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को आहत किया गया था। जस्टिस के नटराजन ने जांच अधिकारी की संतुष्टि के लिए एक निश्चित सीमा के साथ 25,000 रुपए के निजी मुचलके पर कुसुमधारा कनियूर @ कुसुमधारा एच को अग्रिम जमानत दी। साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया...
(आरटीआई) पत्नी को नहीं है पति के आयकर रिटर्न की जानकारी मांगने का अधिकार-सीआईसी
केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा है कि एक पत्नी को आरटीआई आवेदन दायर करके उसके पति द्वारा दाखिल आयकर रिटर्न की जानकारी मांगने का अधिकार नहीं है। सूचना आयुक्त नीरज कुमार गुप्ता ने कहा कि आयकर विभाग के पास किसी व्यक्ति द्वारा आयकर रिटर्न दाखिल करना कोई सार्वजनिक गतिविधि नहीं है। आयोग ने कहा कि, ''यह एक दायित्व की प्रकृति में आता है,जो एक नागरिक का अपने राज्य के प्रति करों का भुगतान करने के लिए होता है। इसलिए इस तरह की जानकारी आवेदक को किसी बड़े सार्वजनिक हित के अभाव में नहीं बताई जा सकती है।'' इस...
वकीलों को लोकल ट्रेन में यात्रा की इजाज़त फिलहाल नहीं दी जा सकती : वकीलों के प्रतिनिधित्व पर राज्य ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा
राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट से शुक्रवार को कहा कि बार के सदस्यों ने याचिका दायर कर वकीलों को लोकल ट्रेन में यात्रा की अनुमति देने की जो अनुमति मांगी थी, इस समय कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति के कारण उसे नहीं स्वीकार किया जा सकता। राज्य सरकार ने अपने वक़ील के माध्यम से कहा कि सचिव, राज्य आपदा प्रबंधन, राहत और पुनर्वास ने इस आग्रह को मानने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति एएस गड़करी की खंडपीठ से एडवोकेट जनरल एए कुंभकोनी ने कहा कि उक्त अधिकारियों...
"वर्चुअल कोर्ट क़ानूनी बिरादरी के लिए वरदान, मुफ़स्सिल एडवोकेट भी कहीं भी अपने मामले को पेश कर सकता है : वीसी द्वारा सुनवाई के विरोध पर मद्रास हाईकोर्ट ने कहा
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा है कि "यह वर्चुअल कोर्ट पूरी क़ानूनी बिरादरी के लिए वरदान है।" मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के न्यायमूर्ति बी पुगलेंधि उस मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए मामले को सूचीबद्ध करने का विरोध किया गया था। पीठ ने कहा, "सौभाग्य से तमिलनाडु में, हमारे पास इंटरनेट की अच्छी सुविधा कुछ दूर दराज के गांवों सहित अमूमन हर जगह है।" पीठ ने कहा, "जब वर्चुअल अदालत की यह व्यवस्था मामले को दायर करने के लिए आसान है तो इस अदालत को यह समझ में नहीं आ रहा...
कैदी को गैरकानूनी हिरासत में रखने का मामला : दिल्ली हाईकोर्ट ने DSLSA को जेल अधिकारियों को कानून, केस लॉ, बंदियों के अधिकार बताने के निर्देश दिए
चेक बाउंस के मामलों में जमानत दिए जाने के बावजूद 10 दिनों तक किसी कैदी को गैरकानूनी हिरासत में रखने के एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि जेलों में तैनात अधिकारियों विशेष रूप से पुलिस अधीक्षकों उप-अधीक्षकों के रैंक के अधिकारी और सहायक अधीक्षकों को कानून के दायरे में अपने कर्तव्यों और दायित्वों से अवगत कराया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। न्यायमूर्ति हेमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की बेंच ने पिछले महीने महानिदेशक (कारागार) दिल्ली को निर्देश...


















