मुख्य सुर्खियां

बॉम्बे हाईकोर्ट ने संजय राउत को कंगना रनौत के मामले में एक पार्टी के रूप में शामिल होने की अनुमति दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने संजय राउत को कंगना रनौत के मामले में एक पार्टी के रूप में शामिल होने की अनुमति दी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्यसभा सांसद और शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत को कंगना रनौत की याचिका पर एक पक्ष बनने की अनुमति दे दी, जो बांद्रा में अपनी संपत्ति के विध्वंस को चुनौती दे रही थी, क्योंकि अभिनेत्री ने नगर निगम ग्रेटर मुंबई द्वारा उसके खिलाफ की गई कार्रवाई में दुर्भावना का आरोप लगाते हुए कहा था कि राउत ने एक वीडियो में उन्होंने कथित रूप से कहा था "उखाड़ देंगे"। न्यायमूर्ति एसजे कथावाला और न्यायमूर्ति आरआई छागला की खंडपीठ ने भागवंत लेट डिजाइन अधिकारी, एच वेस्ट वार्ड को मामले...

सुदर्शन टीवी लिमिटेड पर भारत की एकता के खिलाफ कार्य करने के लिए कार्यवाही शुरू की जाए: प्रो जगदीप छोकर और वेंकटेश नाइक ने सरकार को लिखा पत्र
सुदर्शन टीवी लिमिटेड पर भारत की एकता के खिलाफ कार्य करने के लिए कार्यवाही शुरू की जाए: प्रो जगदीप छोकर और वेंकटेश नाइक ने सरकार को लिखा पत्र

ट्रांसपेरेंसी राइट्स एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक और प्रसिद्ध अकादमिक प्रोफेसर जगदीप छोकर ने गृह मंत्रालय और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक व्यवस्‍था और भारत की एकता के खिलाफ कार्य करने के लिए सुदर्शन टीवी चैनल का संचालन को समाप्त करने की कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया है।नायक और छोकर ने आरोप लगाया है कि चैनल ने "झूठे बयानों" को लगातार प्रसारित करके, "घृणा फैलाने और सार्वजनिक व्यवस्‍था को खतरे में डालने" का इरादा करके विश्वसनीय पत्रकारिता के प्रत्येक...

कंगना रनौत ने लगाया मुंबई सिविक बॉडी पर भेदभाव करने का आरोप, कहा पड़ोसी मनीष मल्होत्रा को  दिया डिमोलिशन नोटिस का जवाब देने के लिए सात दिन का समय
कंगना रनौत ने लगाया मुंबई सिविक बॉडी पर भेदभाव करने का आरोप, कहा पड़ोसी मनीष मल्होत्रा को दिया डिमोलिशन नोटिस का जवाब देने के लिए सात दिन का समय

अपने खिलाफ पक्षपात और निजी प्रतिशोध का आरोप लगाते हुए, अभिनेता कंगना रनौत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के समक्ष एक पत्युत्तर दायर किया है। कंगना ने अपने रिजाॅइंडर या पत्युत्तर में कहा है कि ग्रेटर मुंबई के नगर निगम की तरफ से दायर अतिरिक्त हलफनामे में यह कहा गया था कि वह लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, परंतु सच यह है कि एमसीजीएम ने ''अपने गैर कानूनों कामों को कवर करने के लिए अंतिम प्रयास करते हुए यह बात कही है।'' इस मामले में अभिनेत्री ने अपनी याचिका में संशोधन करते हुए आरोप लगाया था कि ''सत्ता...

सरकारी वकील निजी पक्षों के लिए हुए पेश: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया, राज्य बार काउंसिल से जवाब तलब किया
सरकारी वकील निजी पक्षों के लिए हुए पेश: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया, राज्य बार काउंसिल से जवाब तलब किया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के खिलाफ मामलों में कथित तौर पर निजी पक्षों की ओर से पेश हुए केंद्र के सरकारी वकील का पंजीकरण रद्द करने की मांग संबंधी रिट याचिका पर सोमवार को नोटिस जारी किये। न्यायमूर्ति विवेक चौधुरी की पीठ ने केंद्र सरकार, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, बार काउंसिल ऑफ वेस्ट बंगाल, सरकारी वकील सयानतन बसु और अन्य निजी प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। एकल पीठ का यह निर्देश कनिष्क सिन्हा की याचिका पर आया है, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि...

BCI ने केंद्र से अटॉर्नी-क्लाइंट के संचार की गोपनीयता सुनिश्चित करने वाले वीसी ऐप्स निर्दिष्ट करने का अनुरोध किया
BCI ने केंद्र से अटॉर्नी-क्लाइंट के संचार की गोपनीयता सुनिश्चित करने वाले वीसी ऐप्स निर्दिष्ट करने का अनुरोध किया

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने केंद्र सरकार से वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के लिए आवेदन निर्दिष्ट करने का अनुरोध करने का फैसला किया है, जो अटॉर्नी-क्लाइंट विशेषाधिकार प्राप्त संचार की गोपनीयता सुनिश्चित करेगा।COVID-19 के चलते निखिल हसीजा द्वारा प्रस्तुत प्रतिनिधित्व पर विचार करते हुए, उक्त निर्णय किया गया था कि वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग ऐप के माध्यम से होने वाले अटॉर्नी-क्लाइंट संचार के डेटा संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए उचित नियमों और विनियमों की मांग करता है। उक्त प्रतिनिधित्व को 20/07/20 को दिल्ली...

घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्यवाही को रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका सुनवाई योग्य नहींः केरल हाईकोर्ट
घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्यवाही को रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका सुनवाई योग्य नहींः केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि एक मजिस्ट्रेट को प्रोटेक्शन ऑफ वूमन फ्रम डोमेस्टिक वाॅयलेंस एक्ट की धारा 12 के तहत दायर आवेदन की अनुरक्षणीयता पर विचार करना होगा, यदि दूसरे पक्ष द्वारा इस तरह का विवाद कोर्ट के समक्ष उठाया जाता है तो। हाईकोर्ट ने दोहराया है कि एक पक्ष जिसके खिलाफ अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्यवाही शुरू की जाती है, वह इस कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकता। शिकायतकर्ता महिला की सास और ननद ने घरेलू हिंसा...

संसद ने महामारी खर्चों को पूरा करने के लिए मंत्रियों के वेतन और भत्तों को एक वर्ष के लिए कम करने के लिए विधेयक पारित किया [विधेयक पढ़ें]
संसद ने महामारी खर्चों को पूरा करने के लिए मंत्रियों के वेतन और भत्तों को एक वर्ष के लिए कम करने के लिए विधेयक पारित किया [विधेयक पढ़ें]

लोकसभा ने रविवार को मंत्रियों के वेतन और भत्ते (संशोधन) विधेयक, 2020 को ध्वनिमत से पारित कर दिया।इस बिल को राज्यसभा ने 18 सितंबर 2020 को पास किया था।संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में मंत्रियों के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1952 में संशोधन करने और मंत्रियों के वेतन और शानदार भत्तों को एक वर्ष की अवधि (1 अप्रैल, 2020 से शुरू) के लिए 30% तक कम करने और कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए केंद्र के वित्तीय संसाधनों को पूरा करने की मांग की गई है। इस आशय का अध्यादेश इस वर्ष अप्रैल में...

कर्नाटक हाईकोर्ट का निर्देश, सांसदों/विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के निस्तारण के लिए स्वत संज्ञान याचिका दायर की जाए
कर्नाटक हाईकोर्ट का निर्देश, सांसदों/विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों के निस्तारण के लिए स्वत संज्ञान याचिका दायर की जाए

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए निर्देशों के मद्देनजर, जिसमें हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों से कहा गया है कि वे विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के युक्तिसंगत निस्तारण के लिए एक कार्य योजना तैयार करें, स्वत संज्ञान याचिका दायर करें।चीफ जस्टिस अभय ओका और जस्टिस अशोक एस किनागी की खंडपीठ ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि यचिका को सुनवाई के लिए 23 सितंबर को पेश किया जाए। जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है...

[अनुच्छेद 227] रिट याचिका तभी सुनवाई योग्य हो सकती है यदि आर्बिट्रेटर के आदेश में उसके अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र की प्रत्यक्ष कमी नजर आये : सुप्रीम कोर्ट
[अनुच्छेद 227] रिट याचिका तभी सुनवाई योग्य हो सकती है यदि आर्बिट्रेटर के आदेश में उसके अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र की प्रत्यक्ष कमी नजर आये : सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 16 के तहत याचिका को खारिज किये जाने के खिलाफ भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत दायर रिट याचिका पर तभी विचार किया जा सकता है जब आदेश दुराग्रहपूर्ण हो तथा जिसमें अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र की प्रत्यक्ष कमी नजर आती हो।अधिनियम की धारा 16 में प्रावधान है कि एक मध्यस्थ न्यायाधिकरण मध्यस्थता समझौते के अस्तित्व या वैधता के संबंध में किसी भी आपत्ति पर फैसला देने सहित खुद के अधिकार क्षेत्र पर निर्णय दे सकता है। इस मामले में, आर्बिट्रेटर ने...

(ऑनलाइन परीक्षा) तकनीकी खामियों से इनकार नहीं जा सकता , गुजरात हाईकोर्ट ने फेल हुए छात्र को अगले चरण में परीक्षा देने की अनुमति दी
(ऑनलाइन परीक्षा) 'तकनीकी खामियों से इनकार नहीं जा सकता ', गुजरात हाईकोर्ट ने 'फेल' हुए छात्र को अगले चरण में परीक्षा देने की अनुमति दी

गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार (18 सितंबर) को एक 'फेल हुए छात्र' (विश्वविद्यालय द्वारा घोषित) को परीक्षा के अगले चरण (23 सितंबर को होने वाली परीक्षा) में बैठने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने माना कि ऑनलाइन परीक्षा के दौरान कई बार तकनीकी खामियों का सामना करना पड़ जाता है। न्यायमूर्ति संगीता के विष्णु की एकल पीठ ने आगे कहा कि ''जब तकनीक के साथ काम किया जा रहा है, तो तकनीकी गड़बड़ियों या खामियों से इनकार नहीं किया जा सकता है और इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।'' क्या था मामला सूरत के एक इंजीनियरिंग छात्र...

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया दिल्ली के स्कूलों को निर्देश ,ऑनलाइन कक्षाओं के लिए ईडब्ल्यूएस के छात्रों को पर्याप्त गैजेट और इंटरनेट पैकेज प्रदान करें
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया दिल्ली के स्कूलों को निर्देश ,ऑनलाइन कक्षाओं के लिए ईडब्ल्यूएस के छात्रों को पर्याप्त गैजेट और इंटरनेट पैकेज प्रदान करें

दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों और सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और अन्य वंचित समूहों (डीजी) के छात्रों को पर्याप्त गैजेट और इंटरनेट पैकेज प्रदान करें ताकि उनकी वर्चुअल कक्षाओं तक पहुंच संभव हो सकें। इस समय COVID19 लॉकडाउन के कारण स्कूल ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए ही छात्रों को पढ़ा रहे हैं।विशेषाधिकार प्राप्त और वंचितों के बीच डिजिटल विभाजन को खत्म करने के सिद्धांत को लागू करते हुए, न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की...

कंप्यूटर साइंस के नंबरों को भी बीएससी (ऑनर्स) फिजिक्स और संबंधित विषयों में प्रवेश के लिए विचार किया जाना चाहिएः दिल्ली हाईकोर्ट
कंप्यूटर साइंस के नंबरों को भी बीएससी (ऑनर्स) फिजिक्स और संबंधित विषयों में प्रवेश के लिए विचार किया जाना चाहिएः दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला किया कि बीएससी (ऑनर्स) फिजिक्स और अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए योग्यता की गणना के लिए कंप्यूटर साइंस को विषय के रूप में को शामिल नहीं करना तर्कपूर्ण नहीं है। न्यायालय ने हालांकि यह स्वीकार किया कि प्रवेश के लिए मापदंड में बदलाव वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए उपयुक्त नहीं होगा क्योंकि प्रवेश की प्रक्रिया पहले से ही चल रही है।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की एकल पीठ ने दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि वह अपने पाठ्यक्रम ढांचे और पात्रता मानदंड में...

(COVID-19 के बीच स्कूल फीस में छूट) गुजरात हाईकोर्ट ने सरकार से कहाः उचित और संतुलित निर्णय लें
(COVID-19 के बीच स्कूल फीस में छूट) गुजरात हाईकोर्ट ने सरकार से कहाः 'उचित और संतुलित निर्णय लें'

गुजरात उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (18 सितंबर) को COVID-19 महामारी के बीच स्कूलों के बंद होने की अवधि के दौरान ट्यूशन फीस और स्व-वित्तपोषित स्कूलों के अन्य शुल्क के लिए उचित आदेश पारित करने की मांग करने वाले एक आवेदन पर विचार करने से इंकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला की खंडपीठ ने सभी हितधारकों के हित को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से इस पर एक उचित और संतुलित निर्णय लेने के लिए कहा।कोर्ट का पिछला आदेश,यह ध्यान दिया जा सकता है कि न्यायालय के आदेश से दिनांक...

COVID-19 मृतकों को अनुच्छेद 21 और 25 के तहत धर्म अनुसार अंतिम संस्‍कार का अधिकार, कलकत्ता हाईकोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश
COVID-19 मृतकों को अनुच्छेद 21 और 25 के तहत धर्म अनुसार अंतिम संस्‍कार का अधिकार, कलकत्ता हाईकोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश

यह कहते हुए कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 में उचित अंतिम संस्कार के अधिकार ‌को ढूंढ़ा जा सकता है, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाया कि COVID-19 पीड़ितों के परिजनों को मृतक व्यक्ति के अंतिम संस्कार की अनुमति दी जाए। उन्हें घातक वायरस, जिससे दुनिया भर में अनगिनत लोगों की जान चली गई, से संक्रमित होने के जोखिम को खत्म करने/ कम करने के लिए कुछ एहतियाती दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। न्यायालय का दृढ़ मत था कि मृत व्यक्ति के पर‌िजनों द्वारा उसके अंतिम संस्‍कार का अधिकार संविधान के...

केंद्र सरकार ने NCLAT के अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बंसीलाल भट का कार्यकाल बढ़ाया
केंद्र सरकार ने NCLAT के अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बंसीलाल भट का कार्यकाल बढ़ाया

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के अध्यक्ष (कार्यवाहक) के रूप में एक बार फिर न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बंसीलाल भट का कार्यकाल एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। इस आशय की जारी अधिसूचना में सूचित किया गया कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बंसीलाल भट अक्टूबर, 2020 तक राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष बने रहेंगे।उन्हें 12 मार्च, 2020 को उक्त कार्यालय में नियुक्त किया गया और 15 मार्च को उन्होंने पदभार ग्रहण किया। इसके बाद उनका कार्यकाल केंद्र सरकार द्वारा...

SC/ST  (अत्याचार निवारण) अधिनियम CrPC की धारा 439 के तहत आत्मसमर्पण करने और साथ ही अंतरिम जमानत लेने पर प्रतिबंध नहीं लगाता : हिमाचल हाईकोर्ट
SC/ST  (अत्याचार निवारण) अधिनियम CrPC की धारा 439 के तहत आत्मसमर्पण करने और साथ ही अंतरिम जमानत लेने पर प्रतिबंध नहीं लगाता : हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने माना है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एक अभियुक्त, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 439 का सहारा लेता है और सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करता है और साथ ही अंतरिम जमानत प्राप्त कर लेता है तो ये अधिनियम की धारा 18 और 18-ए में लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करना नहीं है। न्यायमूर्ति अनूप चितकारा ने पाया कि किसी भी व्यक्ति पर किसी भी दंडात्मक कानून के तहत, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण)...

(बीफ मामला) : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ ट्विटर पोस्ट के लिए कार्रवाई करने की मांग वाली याचिका खारिज की
(बीफ मामला) : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ ट्विटर पोस्ट के लिए कार्रवाई करने की मांग वाली याचिका खारिज की

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुवार (17 सितंबर) को बॉलीवुड अभिनेत्री, कंगना रनौत के खिलाफ सोशल मीडिया (ट्विटर) पर एक पोस्ट डालने के मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए दायर याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि कंगना ने कथित रूप से ''गोमांस की खपत को बढ़ावा'' दिया है। न्यायमूर्ति मनोज बजाज की एकल पीठ ने कहा कि- ''कथित (सोशल-मीडिया) पोस्ट को देखने के बाद प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता है कि यह पोस्ट किसी भी रूप में आईपीसी की धारा 295-ए के तहत दंडनीय अपराध के समान...