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कर्नाटक में चरणबद्ध तरीके से खोले जाएंगे जिला/ विचारण न्यायालय

LiveLaw News Network
20 Sep 2020 6:19 AM GMT
कर्नाटक में चरणबद्ध तरीके से खोले जाएंगे  जिला/ विचारण न्यायालय
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राज्य में जिला और ट्रायल कोर्ट फिर से खोलने की कवायद शुरू हो गई है,इसी के तहत 28 सितंबर से कोर्ट चरणबद्ध तरीके से खोले जाएंगे।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शनिवार को जिला/ट्रायल अदालतों के फिर से खोलने के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है, ताकि COVID19 के प्रसार को रोका जा सके।

संशोधित एसओपी के अनुसार, एसओपी में उल्लिखित 55 तालुका कोर्ट को 28 सितंबर से फिर से खोल दिया जाएगा। सभी तेरह जिलों में स्थित कोर्ट यानी दावणगेरे, हावेरी, चित्रदुर्ग, चिक्काबल्लपुरा, रायचूर, बीदर, रामनगर, उडुपी, गडग, कोडागुमादिकेरी, कोप्पल, चामराजनगर और यादगीर के सभी न्यायालय 5 अक्टूबर, 2020 से फिर से खोले जाएंगे। शेष जिलों की अदालतों को 12 अक्टूबर, 2020 से फिर से खोल दिया जाएगा।

कोर्ट रूम और कोर्ट कॉम्प्लेक्स के अंदर विशेष व्यवस्था की जाएगी,जो इस प्रकार है-

- राज्य के सभी न्यायालयों के कोर्टरूम में साक्ष्य की रिकाॅर्डिंग के उद्देश्य से बदलाव किए जाएंगे। इसके लिए साक्षी बॉक्स और आरोपी के कटघरे को कवर किया जाएगा।

- अदालतों के पास यह खुला विकल्प होगा कि वह प्रत्येक कामकाजी दिवस में सुबह के सत्र में अधिकतम पांच गवाहों के बयान फिजिकली रिकाॅर्ड कर सकती है। प्रत्येक न्यायालय सुबह के सत्र में और दोपहर के सत्र में पंद्रह-पंद्रह मामले सूचीबद्ध करेगी। मामलों को सूचीबद्ध करते समय इंटरलोक्युटरी अप्लीकेशन, अंतिम मौखिक दलीलें सुनने और सिविल व आपराधिक (पार्ट-हर्ड)मामलों में साक्ष्य की रिकॉर्डिंग को प्राथमिकता दी जाएगी।

-न्यायालय परिसरों में वादियों या मुविक्कलों का प्रवेश निषिद्ध रहेगा।

-हालांकि, गवाहों और अभियुक्तों (जो जमानत पर रिहा है) को अदालतों के परिसरों में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। परंतु इसके लिए उनको उसी तारीख की एन्टिजन टेस्ट की नकारात्मक रिपोर्ट,गवाह के सम्मन या एंट्री पास पेश करना होगा।

-किसी भी समय, कोर्ट हॉल में उपस्थित व्यक्तियों की संख्या बीस से अधिक नहीं होनी चाहिए,जिसमें अधिवक्ता और कोर्ट स्टाफ भी शामिल होंगे। यदि किसी भी समय 20 से अधिक व्यक्ति किसी भी अदालत में उपस्थित होते हैं, तो न्यायिक अधिकारी द्वारा न्यायालय के कामकाज को रोक दिया जाएगा। जैसा कि पहले कहा गया है, सबूतों की रिकॉर्डिंग के समय, गवाहों व पक्षकारों (जब स्पष्ट रूप से अनुमति दी गई हो), और उनके संबंधित अधिवक्ता के अलावा किसी को भी कोर्ट हॉल में बैठने की अनुमति नहीं होगी।

-कोर्ट परिसर में निर्धारित स्थानों पर अधिवक्ताओं के वाहनों की पार्किंग की अनुमति होगी। परंतु फोटो-पहचान पास दिखाने के बाद अधिवक्ताओं द्वारा स्वंय चलाकर लाए गए वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। इसके लिए कोर्ट प्रशासन मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशनों के जरिए मिले आवेदनों के आधार पर अधिवक्ताओं को फोटो-पहचान पास जारी करेगा।

-सभी बार एसोसिएशनों के परिसर सभी अदालती कामकाजी दिनों में सुबह 10.30 से शाम 4.00 बजे तक खुले रहेंगे। हालाँकि, इन परिसर को खोलने से पहले, परिसर के अंदर की आधी कुर्सियाँ हटा दी जाएंगी।

-फिलहाल, फोटोकॉपी मशीन ऑपरेटरों, नोटरी वालों और टाइपिस्टों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं कोर्ट परिसर में कैंटीन खोलने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।

रजिस्ट्रार जनरल राजेंद्र बादामीकर द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि ''किसी भी आकस्मिक स्थिति के मामले में, मुख्य न्यायाधीश सैनिटाइजेशन के लिए अदालतों को बंद करने और फिजिकल हियरिंग को स्थगित करने के बारे में निर्णय लेंगे। इस एसओपी के बावजूद, 5 अगस्त, 2020 को जारी पूर्व अधिसूचना(सभी अदालतों को बंद करने संबंधी), केवल लिमिटेशन एक्ट 1963 की धारा 4 के संबंध में 30 सितंबर, 2020 तक लागू रहेगी।''

एसओपी को काॅपी यहां से डाॅउनलोड करें।



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