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अनपढ़ जमानत आवेदक वकालतनामा पर हस्ताक्षर नहीं कर सका : एमपी हाईकोर्ट ने साथी कैदी को नाम लिखना सिखाने के निर्देश दिए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक जमानत आवेदक के द्वारा वकालतनामा पर अपने हस्ताक्षर करने के बजाय अंगूठे का निशान लगाए जाने पर जमानत याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी।न्यायमूर्ति विवेक रूस की पीठ ने यह देखते हुए कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि 22 साल का एक युवा पूरी तरह से निरक्षर है। यहां तक कि वह अपना नाम भी नहीं लिख सकता, जमानत अर्जी पर सुनवाई टाल दी।दिलचस्प बात यह है कि कोर्ट ने सहायक जेल अधीक्षक, सबजेल, बागली को उसे माध्यम शिक्षा देने का आदेश दिया ताकि वह अपना नाम लिख सके और वकालतनामा पर...
नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने और उसके परिवार को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए दबाव डालने का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने और उसके परिवार के सदस्यों को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए दबाव डालने के आरोपी की जमानत याचिका खारिज की।न्यायमूर्ति अजीत सिंह की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कि नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार किया गया और पूरे परिवार को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने के आरोपी अब्दुल रहमान को जमानत देने से इनकार कर दिया।संक्षेप में तथ्यरहमान पर आईपीसी की धारा 452/376/120-बी और पॉक्सो अधिनियम की धारा 3/4, 17/18 और उत्तर प्रदेश...
दिल्ली हाईकोर्ट की रजिस्ट्री ने जेल को पैरोल आदेश जारी करने में देरी के लिए स्टाफ की कमी का हवाला दिया
दिल्ली हाईकोर्ट को उसकी रजिस्ट्री द्वारा सूचित किया गया कि जेल से दो आवेदकों की रिहाई में देरी हुई, क्योंकि पैरोल के आदेश मिस प्लेस हो गए थे और स्टाफ की कमी के कारण जेल अधिकारियों को समय पर सूचित नहीं किया जा सका।न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी के समक्ष नजीम खान और इकबाल की ओर से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई।दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (आपराधिक) एच.के. अरोड़ा ने बताया कि संबंधित डीलिंग अधिकारी को भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।पिछली सुनवाई में अदालत को सूचित किया...
पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित लोक अदालत में 26,43,437 ट्रैफिक चालान और छोटे-मोटे मामलों का निपटारा किया गया
पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने हाल ही में 24 जुलाई को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया था, जिसमें काफी संख्या में विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया गया।पिछले तीन महीनों में राज्य भर की जिला अदालतों द्वारा उल्लेखनीय संख्या में 26,43,437 ट्रैफिक चालान और छोटे-मोटे मामलों का निपटारा किया गया है। पूरे राज्य में कुल 207 लोक अदालत पीठों का गठन किया गया था और लगभग 40,442 प्री-लिटिगेशन मामलों को लिया गया, जिनमें से 8,745 मामलों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया गया।इसके अलावा...
फैक्ट चेक : बेंगलुरु में सुप्रीम कोर्ट की बेंच की स्थापना के बारे में वायरल मैसेज फेक न्यूज है
सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक संदेश वायरल है कि केंद्र सरकार ने बैंगलोर में सुप्रीम कोर्ट के लिए एक बेंच की स्थापना को मंजूरी दे दी है।वायरल संदेश इस प्रकार है:"बेंगलुरू में सुप्रीम बेंच कोर्ट"भारत के महामहिम राष्ट्रपति और भारत के माननीय न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से यूनियन ऑफ इंडिया ने बैंगलोर में सर्वोच्च न्यायालय की स्थायी पीठ स्थापित करने का निर्णय लिया है।इस संबंध में दक्षिणी बार काउंसिलों, अधिवक्ता संघों और आम जनता द्वारा कई अभ्यावेदन दिए गए। यह मामला एक दशक से अधिक...
महिला पर अपने लिव-इन पार्टनर को अपनी ही नाबालिग बेटी का यौन उत्पीड़न करने की अनुमति देने का आरोप: तेलंगाना हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया
तेलंगाना हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक महिला को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर अपने लिव-इन पार्टनर को अपनी ही नाबालिग बेटी का यौन उत्पीड़न करने की अनुमति देने का आरोप लगाया गया है।न्यायमूर्ति जी.श्री देवी की खंडपीठ महिला की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। महिला के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f)(n), 376(3), 342 और 50 के तहत मुकदमा दर्ज है।कोर्ट ने केस रिकॉर्ड और अन्य भौतिक कागजात देखा और पाया कि याचिकाकर्ता/महिला के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं।अदालत ने कहा कि अपने पति की मृत्यु के...
बिना वैध दस्तावेजों के नशीले पदार्थों से युक्त कफ सिरप या दवा रखना एनडीपीएस अपराध: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने माना है कि बिना वैध दस्तावेजों के नशीले पदार्थों से युक्त कफ सिरप या दवा रखने पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के कड़े प्रावधान लागू होंगे। ऐसे मामले में जहां नशीले पदार्थों से बना कफ सिरप बिना डॉक्टर के पर्चे या किसी अन्य वैध दस्तावेज के पाया गया, जस्टिस राजीव कुमार दुबे ने एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धारा 37 के तहत सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मिसालों पर भरोसा करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। धारा 37 में कहा गया है कि कानून के तहत अपराध संज्ञेय...
राज्य के विधि अधिकारियों को अदालत की सहायता के लिए मामले तैयार करने के लिए पर्याप्त समय मिले: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाइड लाइन बनाने का निर्देश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिस तरह से राज्य के विधि अधिकारियों द्वारा उसके समक्ष जमानत आवेदनों का विरोध किया, उस पर आश्चर्य व्यक्त किया। इसके साथ ही कुछ दिशानिर्देशों के गठन का आह्वान किया, ताकि उन्हें उचित सहायता देने के लिए मामले को तैयार करने के लिए कोर्ट को उचित समय मिल सके।न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ को एजीए द्वारा सूचित किया गया था कि समय की कमी के कारण राज्य के विधि अधिकारी पूरी फाइल/केस डायरी को पढ़ने में असमर्थ हैं। अदालत की ठीक से सहायता करने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उन्हें...
दत्तक पिता ने पत्नी की मृत्यु के बाद उसको बच्चे की कस्टडी नहीं दिए जाने के खिलाफ केरल हाईकोर्ट का रुख किया; अंतरिम राहत दी गई
केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को दत्तक पिता को बच्चे की अंतरिम कस्टडी दी। दरअसल, उसकी पत्नी की अप्रत्याशित मृत्यु के बाद केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने दत्तक पिता को बच्चे की कस्टडी देने से मना कर दिया। पिता ने अपने बच्चे की कस्टडी की मांग करते हुए कोर्ट रूख किया।न्यायमूर्ति पीबी सुरेश कुमार ने एक अंतरिम आदेश के माध्यम से पिता को रिट याचिका के निपटान के लिए बच्चे की कस्टडी रखने की अनुमति दी। इस बीच कारा की ओर से पेश केंद्र सरकार के वकील ने निर्देश प्राप्त करने के लिए आठ सप्ताह का...
पोक्सो अपराध- "पीड़ित के माता-पिता/अभिभावक को जमानत याचिका और कानूनी सहायता के उनके अधिकार के बारे में सूचित किया जाना चाहिए": इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निर्देश दिया कि प्रत्येक पोक्सो मामले में जमानत आवेदन दाखिल करने की सूचना पीड़िता या शिकायतकर्ता के माता-पिता/अभिभावक को संबंधित थाने के जांच अधिकारी/एसएचओ के माध्यम से दी जानी चाहिए।न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की खंडपीठ ने जांच अधिकारी/एसएचओ के लिए भी इसे अनिवार्य कर दिया। संबंधित पुलिस थाने के नोटिस में हिंदी भाषा में कानूनी सहायता के अधिकार के बारे में विवरण भी शामिल करें, ताकि वे कानूनी सेवा प्राधिकरण से सहायता ले सकें।कोर्ट के सामने मामलाकोर्ट आईपीसी...
बेटी पर केवल पिता का ही अधिकार नहीं; हर बच्चे को मां का उपनाम इस्तेमाल करने का अधिकार है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि प्रत्येक बच्चे को अपनी मां के उपनाम का उपयोग करने का अधिकार है। इसके साथ ही सिर्फ पिता का ही बेटी पर अधिकार नहीं है जिससे पिता उसे केवल अपने उपनाम का उपयोग करने के लिए कह सके।न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की ओर से यह मौखिक टिप्पणी एक पिता की याचिका पर सुनवाई करने के दौरान की गई है। इस याचिका में संबंधित अधिकारियों को बच्ची की मां के नाम के स्थान पर अपनी नाबालिग बेटी के उपनाम के रूप में अपना नाम दर्शाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।कोर्ट ने इस तरह के किसी भी...
"क्या आप अपने जैसे नागरिकों की भी वैसे ही देखभाल करते हैं जैसे गायों की देखभाल करते हैं?: गुजरात हाईकोर्ट ने डीएम से मांगा जवाब
गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को गिर-सोमनाथ के जिलाधिकारी से पूछा कि क्या राज्य की ओर से गौवंश की जिस देखभाल का दावा किया जा रहा है, उसके अधिकार क्षेत्र के नागरिकों के लिए भी उतनी ही देखभाल की जा रही है?जस्टिस परेश उपाध्याय की बेंच गुजरात प्रिवेंशन ऑफ अ सोशल एक्टिविटीज एक्ट, 1985 के तहत डीएम द्वारा पारित निरोध आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, क्योंकि उन्होंने मवेशियों को इस तरह से बांध दिया है कि वे पानी नहीं पी सकते है।बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी की (गुजराती में)"गायों की...
'बिस्तर पर पड़े और चलने-फिरने में शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों को किए गए वैक्सीनेशन के बारे में एक हलफनामा दाखिल करें': बॉम्बे हाईकोर्ट ने ग्रेटर मुंबई नगर निगम से कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका से कहा कि बिस्तर पर पड़े और चलने-फिरने में शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों को किए गए वैक्सीनेशन के बारे में एक हलफनामा दाखिल करें।मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ ने "बिस्तर पर पड़ें और चलने-फिरने में शारीरिक रूप से असमर्थ लोगों के लिए COVID -19 टीकाकरण के लिए राज्य नीति" को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया।राज्य सरकार द्वारा न्यायालय के समक्ष यह प्रस्तुत किया गया कि बृहन्मुंबई नगर निगम द्वारा बिस्तर पर पड़े और...
पुलिस के बयान वीडियो फुटेज से नहीं मिलते, दंगों के आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मांगी
दिल्ली दंगों के एक मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में खामियां और विरोधाभास होने का तर्क देते हुए नियमित जमानत की मांग करने वाले एक आरोपी ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि अगर अदालत अभियोजन पक्ष के गवाहों और जांच के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के हेरफेर का न्यायिक नोट नहीं लेती है तो देश में कोई भी सुरक्षित नहीं है।उक्त दलील वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने एफआईआर 60/2020 में आरोपी शादाब अहमद की ओर से पेश होते हुए दी है। जॉन ने इस तथ्य पर जोर देते हुए तर्क दिया कि आपराधिक मुकदमे का पूरा स्ट्रक्चर...
बॉम्बे हाईकोर्ट में पोर्न रैकेट मामले में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा पारित रिमांड ऑर्डर को चुनौती देने वाली राज कुंद्रा की याचिका खारिज
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शनिवार को कथित पोर्न रैकेट मामले में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा पारित रिमांड ऑर्डर को चुनौती देने वाली राज कुंद्रा और उनके सहयोगी रयान थोर्प की याचिकाओं को खारिज किया। याचिका में रिहाई की मांग की गई थी।न्यायमूर्ति एएस गडकरी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, "मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा हिरासत में रखने के लिए पारित रिमांड आदेश कानून के अनुरूप है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।" याचिकाओं में अनिवार्य रूप से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 ए के गैर-अनुपालन में अवैध...
जजेज एसोसिएशन आवासीय संकट को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा; चीफ जस्टिस प्रशासनिक पक्ष की जांच करेंगे
महाराष्ट्र राज्य न्यायाधीश संघ ने अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों के लिए आवासीय क्वार्टरों के संबंध में बुनियादी ढांचे की कमी और राज्य सरकार की उदासीनता को उजागर करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।याचिका में राज्य के विभिन्न हिस्सों में बिना जनरेटर बैक-अप के बिजली कटौती और महाराष्ट्र में आवासीय सुविधाओं की सुरक्षा के संबंध में न्यायिक अधिकारियों की शिकायतों पर विचार करने लिए एकल-खिड़की पोर्टल स्थापित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है।एसोसिएशन ने राज्य के सामान्य...
टिकरी बॉर्डर पर कृषि कानून विरोधी प्रदर्शनकारी के साथ कथित बलात्कार के मामले में आरोपी को पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय ने बुधवार को टिकरी बॉर्डर पर किसान कानून विरोधी एक प्रदर्शनकारी से रेप के आरोपी एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। पीड़िता की मौत हो चुकी है।जस्टिस राजेश भारद्वाज की खंडपीठ मामले को एक गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत की रियायत के काबिल नहीं है और अभियोजन पक्ष द्वारा हिरासत में की गई पूछताछ उचित प्रतीत होती है। यह देखते हुए कि जमानत आवेदक के खिलाफ बलात्कार और अपहरण के विशिष्ट आरोप हैं, अदालत ने कहा कि वह याचिकाकर्ता को अग्रिम...
अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत शिक्षा "सामान्य व्यवसाय" नहीं; मुनाफाखोरी की अनुमति नहीं: याचिकाकर्ताओं ने निजी स्कूलों की फीस के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार और छात्रों द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली सरकार द्वारा 18 अप्रैल और 28 अगस्त 2020 को जारी दो आदेशों को रद्द करने वाले एकल न्यायाधीश की पीठ के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें COVID-19 लॉकडाउन के बीच छात्रों से निजी स्कूलों द्वारा वार्षिक फीस और डेवलपमेंट फीस की वसूली करने से रोक दिया गया था।अधिवक्ता खगेश झा ने जस्टिस फॉर ऑल एनजीओ और अन्य निजी अपीलकर्ताओं की ओर से अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि टीएमए पाई...
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने COVID-19 के कारण हुई अधिवक्ताओं की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए फुल कोर्ट का आयोजन किया
वरिष्ठ अधिवक्ता और हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष रमाकांत शर्मा और राज्य के अन्य अधिवक्ताओं के COVID-19 के कारण हुए दुखद निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए वर्चुअल मोड के माध्यम से एक फुल कोर्ट सभा का शुक्रवार को आयोजन किया गया।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायाधीश एच.पी. फुल कोर्ट रेफरेंस में हाईकोर्ट के जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर, जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर, जस्टिस अजय मोहन गोयल, जस्टिस संदीप शर्मा, जस्टिस चंद्र भूषण बरोवालिया, जस्टिस ज्योत्सना रेवाल दुआ और...
COVID-19: केरल हाईकोर्ट ने आगामी छुट्टियों को देखते हुए अंतरिम आदेशों की अवधि 27 अगस्त तक बढ़ाई
केरल हाईकोर्ट की एक फुल बेंच ने शुक्रवार को अंतरिम आदेशों की वैधता 27 अगस्त तक बढ़ा दी। बेंच यह फैसला इसलिए लिया, क्योंकि आगामी छुट्टियों से पहले आदेशों पर रोक हटने पर वकीलों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार, न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चैली ने स्वत: संज्ञान याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि 24 से 27 अगस्त के बीच की अवधि के दौरान, पक्ष इस आदेश द्वारा दिए गए स्थगन की छुट्टी लेने के हकदार हैं।महाधिवक्ता के गोपालकृष्ण कुरुप ने चार अगस्त के...




















