मुख्य सुर्खियां
"दिव्यांग को मिला आरक्षण ऊर्ध्वाधर " एमपी हाईकोर्ट ने सिविल जज चयन में एससी - पीडब्लूडी उम्मीदवार की याचिका मंज़ूर की
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने माना है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(4) के संबंध में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के पक्ष में क्षैतिज (Vertical) आरक्षण दिया जा सकता है और शारीरिक रूप से दिव्यांग के पक्ष में आरक्षण को भारत के संविधान के अनुच्छेद 16(1) के तहत एक ऊर्ध्वाधर ( Horizontal) आरक्षण के रूप में माना जा सकता है।ऐसा मानते हुए, उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जाति के एक उम्मीदवार और एक दिव्यांग व्यक्ति द्वारा सिविल जज परीक्षा में चयन की मांग करने वाली याचिका...
अभिनेत्री कंगना रनौत के पासपोर्ट के नवीनीकरण का मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने जावेद अख्तर के हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को कंगना रनौत की दिद्दा कॉपीराइट मामले पर दायर गीतकार जावेद अख्तर के हस्तक्षेप आवेदन पर सुनवाई करने से इनकार किया।इस मामले में उन्हें शिकायतकर्ता या लोक अभियोजक से संपर्क करने के लिए कहा गया था, क्योंकि वह वर्तमान कार्यवाही में एक पक्षकार नहीं है।अख्तर ने आरोप लगाया कि रनौत ने अदालत को गुमराह करने के लिए अपने खिलाफ लंबित मानहानि के मामले को जानबूझकर छुपाया और अपनी खिलाफ दायर याचिका को रद्द कराने के लिए एक अंतरिम आवेदन दायर करके अपना पासपोर्ट नवीनीकृत करने के लिए एक...
'देश/राज्य के नेताओं से संबंधित मामलों को प्रकाशित करते समय उन्हें सम्मान दें': मद्रास हाईकोर्ट ने तमिल समाचार पत्र को निर्देश दिए
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में एक तमिल पत्रिका के प्रकाशक को निर्देश दिया कि,"देश या राज्य के नेताओं से संबंधित मामलों को छापते और प्रकाशित करते समय उन्हें ( याचिकाकर्ताओं) को सम्मान देना चाहिए और उसी के अनुसार संबोधित करना चाहिए।"दरअसल, तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता से संबंधित एक मामले की रिपोर्ट करते समय एक तमिल पत्रिका/समाचार पत्र 'दिनमलर' ने उन्हें 'जे' के रूप में संदर्भित किया था। न्यायमूर्ति वी. भवानी सुब्बारायन की पीठ संपादक (मृत होने के बाद) और तमिल अखबार के प्रकाशक द्वारा...
झारखंड हाईकोर्ट ने मामला दर्ज करने में तीन महीने से अधिक की देरी के लिए रजिस्ट्री को फटकार लगाई
झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक मामले को दर्ज करने और स्टाम्प रिपोर्ट करने में तीन महीने से अधिक की देरी के लिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्री और न्यायिक अनुभागों की आलोचना की। यह देखते हुए कि सात अप्रैल को दर्ज किया गया मामला 36 दिनों के बाद दर्ज किया गया और अभी तक स्टाम्प की रिपोर्ट नहीं की गई है, न्यायमूर्ति आनंद सेन ने कहा कि भले ही कार्यालय और न्यायिक अनुभाग अपनी 50% क्षमता के साथ काम कर रहे हैं, फिर भी यह केस दर्ज करने में 36 दिन का समय नहीं लगना चाहिए था।बेंच ने टिप्पणी की,"यह न्यायालय ऐसी...
मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट प्रशासनिक आदेश / निर्देश के समान नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में COVID-19 महामारी के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के आरोपी की हिरासत को बरकरार रखते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को प्रशासनिक आदेश / निर्देश के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है।जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस अनिल वर्मा की खंडपीठ ने आगे कहा कि यह जरूरी नहीं है कि एक सरकारी अधिकारी के हर सोशल मीडिया पोस्ट को प्रशासनिक पदानुक्रम में देखा/पढ़ा जाए और उसका पालन किया जाए।तर्कआवेदक के वकील मुदित माहेश्वरी ने राज्य के मुख्यमंत्री के विभिन्न सोशल मीडिया...
पश्चिम बंगाल सरकार ने पेगासस स्पाइवेयर द्वारा जासूसी से संबंधिति मामले की जांच के लिए न्यायमूर्ति मदन लोकुर की अध्यक्षता में पैनल गठित किया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ज्योतिर्मय भट्टाचार्य की अध्यक्षता में पेगासस स्पाइवेयर द्वारा जासूसी से संबंधित आरोपों की जांच के लिए एक जांच आयोग का गठन किया।कुछ दिनों पहले यह पता चला कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के समय मुख्यमंत्री के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की कथित तौर पर पेगासस स्पाइवेयर द्वारा जासूसी की गई थी। नए पोर्टल द वायर ने 16 अन्य...
"बताएं कि गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी कैसे दी जाती है": दिल्ली हाईकोर्ट ने 'प्रवर्तन निदेशालय' से पूछा
दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक को यह बताने के लिए कहा कि डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य एआईआर 1997 एससी 610 मामले सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के आधार पर किस प्रकार जानकारी दी जाती है।न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की खंडपीठ एक निचली अदालत के आदेश पर ईडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे (ईडी) राजद के राज्यसभा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) की एक प्रति देने का निर्देश...
"यह निश्चित रूप से मॉब-लिंचिंग का मामला है": उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आरोपियों को जमानत देने से इनकार किया, मृतक को चिकित्सा सहायता प्रदान नहीं करने पर पुलिस के खिलाफ जांच के निर्देश दिए
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 'मॉब लिंचिंग' का दुर्भाग्यपूर्ण मामला बताते हुए आरोपी द्वारा अपनी महिला मित्र के साथ कथित तौर पर देखे जाने पर एक युवा लड़के की बेरहमी से पिटाई करने और हत्या करने के आरोपियों (पांच आरोपी) को जमानत देने से इनकार किया।न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी की खंडपीठ ने थाने के प्रभारी के खिलाफ भी जांच का निर्देश दिया, जिन्होंने सीएचसी के एक डॉक्टर की चिकित्सा सलाह को आगे बढ़ाने के बजाय मृतक को पुलिस थाने में बंद रखा था।संक्षेप में तथ्यप्राथमिकी के अनुसार मृतक सह-आरोपी 'डी' (नाम गुप्त रखा...
प्रपोजल ठुकराने पर महिला पर तेजाब से हमला करने वाले व्यक्ति के प्रति कोई नरमी नहींः कर्नाटक हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास और 10 लाख जुर्माने की सजा बरकरार रखी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि,''एसिड अटैक बुनियादी मानवाधिकारों के खिलाफ एक अपराध है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत सबसे पोषित मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।''न्यायमूर्ति बी वीरप्पा और न्यायमूर्ति वी श्रीशानंद की खंडपीठ ने एक ठुकराए हुए प्रेमी महेशा (32) को भारतीय दंड संहिता की धारा 326 (ए) के तहत दी गई आजीवन कारावास की सजा की पुष्टि करते हुए कहा कि, ''पीडब्ल्यू नंबर-8 पर आरोपी द्वारा कथित तेजाब हमला केवल इस आधार पर किया गया था कि उसने उससे शादी करने से इनकार कर दिया था...
दिल्ली हाईकोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ एलोपैथी के बारे में गलत सूचना फैलाने को लेकर दायर याचिका पर 30 जुलाई तक सुनवाई स्थगित की
दिल्ली हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी के बीच बाबा रामदेव द्वारा अपने बयान से एलोपैथी के खिलाफ कथित रूप से गलत सूचना फैलाने के खिलाफ सात डॉक्टर्स मेडिकल एसोसिएशनों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई 30 जुलाई तक स्थगित कर दी है।यह स्थगन उस समय हुआ जब मामले की सुनवाई करने वाले न्यायमूर्ति हरि शंकर एक दिन के लिए छुट्टी पर थे।याचिका में आरोप लगाया गया है कि योग गुरु बाबा रामदेव गलत सूचना फैलाकर बड़े पैमाने पर जनता को गलत बयानी दे रहे थे कि एलोपैथी COVID-19 मौतों के लिए जिम्मेदार है। इसके साथ ही एलोपैथी दवाओं...
'बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अधिसूचना यूएपीए के समान अपनी आलोचना को प्रतिबंधित करती है': बॉम्बे हाईकोर्ट में बीसीआई के संशोधित नियमों के खिलाफ याचिका दायर
मुंबई के एक वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ता ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के संशोधित नियमों की तुलना गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम से की। याचिकाकर्ता का कहना है कि संशोधित नियम का उपयोग बीसीआई या एक जज की सार्वजनिक आलोचना या असहमति को दबाने के लिए किया जाएगा।बीसीआई के नियम एडवोकेट एक्ट की धारा 35 के तहत प्रिंट, सोशल या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से आलोचना को 'कदाचार' और अयोग्यता, निलंबन या बार काउंसिल से सदस्यता हटाने का आधार बनाते हैं। बीसीआई ने कहा कि उसने...
दिल्ली हाईकोर्ट ने कैदी को सर्जरी के लिए अस्पताल नहीं ले जाने पर तिहाड़ जेल अधीक्षक को दी अवमानना की चेतावनी
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में तिहाड़ जेल के अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में उनसे उस कारण को बताने के लिए कहा गया है कि अदालत के निर्देशों और सामान्य सर्जरी की बहाली के बावजूद एक कैदी को आवश्यक सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराने में विफल रहने के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए।कोर्ट ने जेल अधीक्षक को संबंधित कैदी के इलाज के लिए तत्काल कदम उठाने और उसकी मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट को सौंपने का भी निर्देश दिया।इस संबंध में न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने...
"मानव जीवन के नुकसान के प्रति अधिकारियों में चिंता का पूर्ण अभाव": एनजीटी ने कारखाने में आग के कारण हुई मौतों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए संयुक्त समिति का गठन किया
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मानव जीवन के नुकसान के प्रति चिंता की कमी को देखते हुए अधिकारियों की खिंचाई करते हुए इस सप्ताह दिल्ली के उद्योग नगर में एक कारखाने में आग लगने के बारे में एक समाचार लेख के आधार पर स्वत: संज्ञान कार्यवाही शुरू की।इस हादसे में 6 लोग मारे गए थे।एनजीटी के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने घटना के कारण को पता लगाने के लिए जल अधिनियम, वायु अधिनियम और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 या इस विषय पर किसी अन्य कानून के अनुपालन की स्थिति का पता लगाने और सुझाव देने...
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने बार एसोसिएशन की शिकायत पर निलंबित जज को 'मानवीय आधार' पर बहाल किया
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने सिविल जज इम्तियाज अहमद लोन के निलंबन के आदेश को रद्द किया, जिन्हें पिछले साल बार एसोसिएशन, उरी की शिकायत पर निलंबित कर दिया गया था।लोन को जिन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें ध्यान में रखते हुए 'मानवीय आधार' पर निलंबन रद्द कर दिया गया है। उन्हें उनकी बहाली की तारीख से पूरा वेतन दिया जाएगा। उन्हें सिविल जज (सीनियर जज) के लीव रिजर्व पद की जगह हाईकोर्ट के श्रीनगर विंग में तैनात किया गया है।पिछले शुक्रवार को एक आधिकारिक आदेश सार्वजनिक...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप पीड़ित नाबालिग को 20 हफ्ते की प्रेग्नेंसी खत्म करने की इजाजत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को किंग जॉर्जेस मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ (केजीएमयू) के कुलपति द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड के परामर्श के बाद एक नाबालिग बलात्कार पीड़िता को 20 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी।न्यायमूर्ति रितु राज अवस्थी और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ नाबालिग के पिता द्वारा दायर एक रिट याचिका पर फैसला सुना रही थी, जिसमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरदोई द्वारा गर्भपात कराने के लिए कोर्ट की इजाज़त की मांग की गई थी।इस मामले में सर्वेश नाम के आरोपी ने नाबालिग...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में वकीलों का वैक्सीनेशन नहीं किए जाने के खिलाफ याचिका दायर: राज्य सरकार बार एसोसिएशन के परामर्श से 45 से अधिक आयु वर्ग के लोगों के लिए वैक्सीनेशन ड्राइव का आयोजन करेगी
वकीलों का टीकाकरण न करने के खिलाफ दायर एक याचिका पर जवाब देते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट को सूचित किया कि संबंधित बार एसोसिएशन के परामर्श से 45 वर्ष से अधिक आयु के कानूनी बिरादरी के सदस्यों को टीके लगाए जाएंगे।कोर्ट ने दर्ज किया कि,"एस.श्रीराम (एडवोकेट जनरल) का कहना है कि 45 वर्ष से अधिक आयु के कानूनी बिरादरी के सदस्यों को प्रत्येक जिले में दो स्थानों पर टीकाकरण किया जाएगा और इस तरह के टीकाकरण के लिए बार एसोसिएशन के परामर्श से काम किया जाएगा।"मुख्य न्यायाधीश अरूप कुमार...
'वे सबसे अच्छे लाइसेंसधारी हैं': कलकत्ता हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अपने घर में रहने के अधिकार को बरकरार रखा, बेटे और बहू को बेदखल करने के आदेश दिए
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दोहराया कि एक वरिष्ठ नागरिक के अपने घर में विशेष रूप से रहने के अधिकार और यदि आवश्यक हो तो अपने बेटे और बहू को बेदखल करने के अधिकार को भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत देखा जाना चाहिए।न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने कहा कि,"एक राष्ट्र जो अपने वृद्ध और दुर्बल नागरिकों की देखभाल नहीं कर सकता, उसे पूर्ण सभ्यता प्राप्त नहीं माना जा सकता है।"कोर्ट ने दो वरिष्ठ नागरिकों (याचिकाकर्ताओं) द्वारा बेटे और बहू को उनके घर से बेदखल करने की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुनाते...
सभी पुरुष कर्मचारी घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करके बताएंगे कि शादी पर उन्होंने दहेज नहीं लिया : केरल सरकार
केरल की राज्य सरकार ने हाल ही में अपने सभी पुरुष कर्मचारियों को एक घोषणा पत्र (Undertaking) पर हस्ताक्षर करने का निर्देश देकर एक साहसिक कदम उठाया है, जिसमें घोषणा की गई है कि वे शादी पर दहेज को बढ़ावा नहीं देंगे या दहेज स्वीकार नहीं करेंगे। 16 जुलाई 2021 के एक सर्कुलर के माध्यम से राज्य ने राज्य में बढ़ती दहेज मौतों की चिंता को दूर करने के लिए कई प्रमुख निर्देश भी दिए। यह सर्कुलर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी किया गया, जो पूरे राज्य में दहेज निषेध से संबंधित कार्यों के संचालन और समन्वय...
केरल हाईकोर्ट ने मुस्लिम, कुछ ईसाई वर्ग को पिछड़े वर्ग की सूची से हटाने और उन्हें सरकारी लाभ देने से रोकने की मांग वाली याचिका 25 हजार जुर्माने के साथ खारिज की
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में मुस्लिम, लैटिन कैथोलिक और अन्य अनुसूचित जातियों को प्रदान किए गए आरक्षण और वित्तीय सहायता को रद्द करने की घोषणा की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चाली ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने याचिका दायर करने से पहले उचित रिसर्च नहीं की थी और याचिकाकर्ता संगठन पर पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। याचिकाकर्ता हिंदू समुदाय के खिलाफ अन्याय से लड़ने के लिए स्थापित एक पंजीकृत ट्रस्ट है। उनका...
UAPAऔर देशद्रोह-गलत तरीके से गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए सभी लोगों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए: जस्टिस मदन लोकुर
जस्टिस मदन बी लोकुर ने शनिवार को कहा, "मेरा विचार है कि देशद्रोह कानून और UAPA कहीं नहीं जा रहे हैं, वे जहां हैं वहीं रहेंगे। और वास्तव में, लोगों को बात करने से रोकने के लिए एनएसए को अब इसमें जोड़ा जा रहा है।"सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सीजेएआर के एक वेबिनार में बोल रहे थे, जिसका विषय था- "लोकतंत्र, असहमति और कठोर कानून पर चर्चा- क्या UAPA और राजद्रोह को हमारी कानून की किताबों में जगह मिलनी चाहिए?"जस्टिस लोकुर मुख्य रूप से इन कानूनों के तहत लंबी अवधि की कैद के बाद बरी किए गए लोगों के लिए...




















