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मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने 2010 से लंबित 445 दूसरी अपीलों पर 58 दिनों में निर्णय लेने का संकल्प लिया

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने वर्ष 2010 से लंबित 445 द्वितीय अपीलों को 58 दिनों के भीतर निपटाने का संकल्प व्यक्त किया है।बार के सदस्यों को संबोधित एक पत्र में, उन्होंने स्पष्ट किया है कि लंबित मामलों के शीघ्र निपटान को सुनिश्चित करने के लिए स्थगन नहीं दिया जाएगा। 2010-2014 की अवधि की दूसरी अपीलों को संभालने की जिम्‍मेदारी उन्हीीं के पास है। उन्होंने सभी लंबित अपीलों को अप्रैल, 2022 के अंत तक निपटाने का प्रस्ताव रखा है और बार के सदस्यों से अपना पूरा सहयोग देने का आग्रह किया है।...

कोई भेदभाव नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के कर्मचारियों के भत्ते में कटौती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
"कोई भेदभाव नहीं": दिल्ली हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के कर्मचारियों के भत्ते में कटौती को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कार्यालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिसके द्वारा एयर इंडिया के कर्मचारियों के भत्ते कम कर दिए गए थे।कोर्ट ने देखा कि कोई भेदभाव नहीं है बल्कि पायलटों और इंजीनियरों के भत्ते को कम करने का एक उचित आधार है। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने कहा कि यह केंद्र और एयर इंडिया को संबंधित विचारों को ध्यान में रखते हुए तय करना है कि भत्तों में उचित कटौती क्या होनी चाहिए।अदालत ने कहा,"जब तक कटौती स्पष्ट रूप से मनमाना नहीं है, न्यायिक...

वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के बावजूद भी रिट याचिका पर सुनवाई हो सकती है : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने के बावजूद भी रिट याचिका पर सुनवाई हो सकती है : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया कि प्राकृतिक न्याय के नियमों का पालन नहीं करने पर भले ही कोई वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो, तो पीड़ित व्यक्ति संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने उसके द्वारा खरीदी गई जमीन पर अपना नाम बदलने के लिए आवेदन किया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उक्त आवेदन भूमि और पट्टादार पासबुक अधिनियम, 1971 में एपी राइट्स, विशेष रूप से अधिनियम की धारा पांच के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना खारिज...

निचली अदालत के निष्कर्ष को उलटने के लिए निष्पादन कार्यवाही के दौरान एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
निचली अदालत के निष्कर्ष को उलटने के लिए निष्पादन कार्यवाही के दौरान एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि जब निचली अदालत संपत्ति के कब्जे के सवाल का फैसला कर चुकी हो, उसके बाद निष्पादन न्यायालय निष्पादन कार्यवाही में एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति नहीं कर सकता है।जस्टिस आर रघुनंदन राव ने कहा, "मौजूदा मामले में, सक्षम क्षेत्राधिकार के ट्रायल कोर्ट ने पहले ही याचिकाकर्ता के पक्ष में संपत्ति के कब्जे के सवाल का फैसला कर लिया है। निष्पादन याचिका में आदेश पारित करते समय इस निष्कर्ष को निष्पादन न्यायालय उलट नहीं सकता है। निष्पादन न्यायालय को ऐसी स्थिति...

दिल्ली हाईकोर्ट
नाबालिग बच्चा पालन-पोषण के लिए अपने पिता से भरण-पोषण मांगने का हकदार, वह तलाक के समझौते से बंधा नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि एक नाबालिग बच्चा पिता द्वारा अपने पालन-पोषण के लिए भरण-पोषण का दावा करने का हकदार है और ऐसा बच्चा अपने माता-पिता के बीच भरण-पोषण के संबंध में तलाक के समझौते से बाध्य नहीं है।जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस जसमीत सिंह एक नाबालिग बच्चे द्वारा दायर एक अपील पर विचार कर रहे थे, जिसने फैमिली कोर्ट द्वारा 15,000 प्रति माह भरणपोषण दिए जाने से व्यथित होकर याचिका दायर की थी।उच्च न्यायालय ने 22 अप्रैल, 2021 के आदेश के जरिए उक्त भरण-पोषण राशि में वृद्धि की थी और पिता को नाबालिग को...

मद्रास हाईकोर्ट
न्यूज रिपोर्ट का दावा है कि मंदिर में भक्तों को उनके पापों के प्रायश्चित के लिए 12 ब्राह्मणों के पैर धोने के लिए मजबूर किया गया: केरल हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया

केरल हाईकोर्ट ने एक न्यूज रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया जिसमें आरोप लगाया गया है कि त्रिपुनिथुरा के श्री पूर्णाथ्रीसा मंदिर में भक्तों को उनके पापों के प्रायश्चित के लिए 12 ब्राह्मणों के पैर धोने के लिए मजबूर किया गया।न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और न्यायमूर्ति पी.जी. अजितकुमार ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की शुरुआत की।यह घटना तब सामने आई जब एक मलयालम दैनिक केरल कौमुदी ने 4 फरवरी को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें कहा गया था कि मंदिरों में 'पंथरंडु नमस्कारम' के हिस्से के रूप में इस तरह की...

दिल्ली हाईकोर्ट ने COVID-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने COVID-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार से COVID-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में जवाब मांगा। इन अनाथ बच्चों की रक्षा की मांग करते हुए दायर याचिका में कहा गया कि उक्त बच्चों पर मानव तस्करी का खतरा मंडरा रहा है।चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ अधिवक्ता जितेंद्र गुप्ता द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई कि वे उन बच्चों के हितों की रक्षा करें, जिन्होंने अपने...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पोक्सो आरोपी की जमानत याचिका की सूचना देने में विफल रहने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बुलंदशहर को निर्देश दिया कि वे उन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें जो जुनैद मामले में दिए गए निर्देशानुसार POCSO के तहत आरोपी की जमानत अर्जी की सुनवाई के संबंध में पीड़ित / पीड़ित के कानूनी अभिभावक के साथ-साथ सीडब्ल्यूसी (Child Welfare Committee) को सूचित करने देने में विफल रहे हैं।यह ध्यान दिया जा सकता है कि जुनैद के मामले में हाईकोर्ट ने अन्य बातों के साथ पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत जमानत आवेदनों के निपटान के लिए निर्देश...

यूपी पावर कॉरपोरेशन ईपीएफ घोटाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी प्रवीण कुमार गुप्ता को जमानत दी
यूपी पावर कॉरपोरेशन ईपीएफ घोटाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी प्रवीण कुमार गुप्ता को जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के पूर्व महाप्रबंधक और निगम के ईपीएफ घोटाले के मुख्य आरोपी प्रवीण कुमार गुप्ता को जमानत दे दी है।न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने उन्हें संबंधित अदालत की संतुष्टि के लिए निजी बॉन्ड भरने और 5,00,000 रुपए के दो जमानतदार पेश करने की शर्त पर जमानत दी है।पूरा मामलामामले में दर्ज एक प्राथमिकी के अनुसरण में गुप्ता को नवंबर 2019 में ईओडब्ल्यू, लखनऊ द्वारा गिरफ्तार किया गया था और फरवरी 2020 में तीन व्यक्तियों,...

हिजाब विवाद- छात्रों को शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक चिन्ह नहीं पहनना चाहिए, ड्रेस कोड का पालन करना चाहिए: कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट में कहा
हिजाब विवाद- छात्रों को शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक चिन्ह नहीं पहनना चाहिए, ड्रेस कोड का पालन करना चाहिए: कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट में कहा

राज्य सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) में कहा कि वह धार्मिक विश्वासों में हस्तक्षेप करने में दिलचस्पी नहीं रखता है, लेकिन केवल एकरूपता, सामंजस्य, अनुशासन और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए चिंतित है जो एक शैक्षणिक संस्थान के लिए अनिवार्य है।मुस्लिम लड़कियों को हिजाब (सिर पर दुपट्टा) पहनने से रोकने वाले कॉलेजों की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में राज्य सरकार ने कहा है,"ड्रेस कोड का मूल उद्देश्य छात्रों के बीच समानता बनाए रखना और संस्था में गरिमा, मर्यादा और...

जब नागरिकता के निर्धारण में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी की जाती है तो न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक: गुजरात हाईकोर्ट
जब नागरिकता के निर्धारण में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी की जाती है तो न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दरमियान कहा, "उस व्यक्ति, जिसे किसी व्यक्ति को इस आधार पर कि वह भारत का नागरिक नहीं है, निर्वास‌ित करने की सिफारिश करने की व्यापक और महत्वपूर्ण शक्तियां दी गई हैं, उससे कम से कम यह उम्मीद की जाती है कि वह संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराए।"कोर्ट यह टिप्पणी केंद्र सरकार की उन व्यापक शक्तियों के संदर्भ में किया, जिनमें किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता की जांच करने और भारतीय नागरिक नहीं पाए जाने पर उसे निर्वासित करने की श‌क्‍ति...

पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद विधवा हुई विवाहित बेटी फैमली पेंशन की हकदार नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद विधवा हुई विवाहित बेटी फैमली पेंशन की हकदार नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि फैमली पेंशन का लाभ पेंशनभोगी की विधवा बेटी को नहीं दिया जा सकता है, जिसकी शादी उसके पिता/माता की मृत्यु के समय हो चुकी थी। अदालत ने माना कि एक बेटी, जो अपने पिता/माता के निधन के बाद विधवा हुई है, उसके पास फैमली पेंशन का दावा करने का कोई मौलिक या वैधानिक अधिकार नहीं है।जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत की पीठ के समक्ष विचाराधीन मुद्दा यह था कि क्या एक पेंशनभोगी की बेटी, जो विवाहित थी, लेकिन पेंशनभोगी की मृत्यु के बाद विधवा हो गई, वह फैमली पेंशन की...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
संस्थान 'गलती से प्रवेश' पाने वाले छात्रों का नामांकन रद्द नहीं कर सकते, जब उनकी ओर से कोई गलती ना हो : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स के एमएससी नर्सिंग के छात्रों की ओर से दायर एक याचिका को स्वीकार कर लिया है। याचिका में संस्थान के ऑफिस मेमोरेंडम (ओएम) को चुनौती दी गई है, जिसके जर‌िए उनके प्रवेश को रद्द कर दिया गया था।छात्रों को एम्स के प्रॉस्पेक्टस और ऑफर लेटर में पात्रता शर्तों के आधार पर भर्ती किया गया था। हालांकि, 2 महीने बाद संस्थान ने उनके प्रवेश को रद्द करने का निर्णय लिया क्योंकि उसने नियत तारीख से बाद में योग्यता परीक्षा परिणाम जारी किया था। ऐसे में छात्रों ने राहत की गुहार लगाते हुए कोर्ट का...

हिजाब बैन मामला : कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्रों और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की, संविधान में आस्था रखने का आग्रह
हिजाब बैन मामला : कर्नाटक हाईकोर्ट ने छात्रों और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की, संविधान में आस्था रखने का आग्रह

कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिजाब पर प्रतिबंध लगाने के मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को छात्र समुदाय और आम जनता से शांति बनाए रखने की अपील की।जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित की एकल-न्यायाधीश पीठ ने मुस्लिम छात्राओं के अपने कॉलेजों में लगाए गए हिजाब प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई करते हुए यह अपील की। मुस्लिम छात्राओं ने अपनी याचिका में मांग की कि यह घोषित किया जाए कि हिजाब पहनना एक आवश्यक धार्मिक प्रथा के रूप में मुसलमानों का मौलिक अधिकार है।महाधिवक्ता प्रभुलिंग के नवदगी ने अदालत...

सजा पर सुनवाई- सेक्‍शन 235(2) सीआरपीसी का पालन न करना ट्रायल का महत्वपूर्ण चरण, न कि सेक्शन 465 के तहत उपचार योग्य अनियमितताः गुवाहाटी हाईकोर्ट
सजा पर सुनवाई- सेक्‍शन 235(2) सीआरपीसी का पालन न करना ट्रायल का महत्वपूर्ण चरण, न कि सेक्शन 465 के तहत उपचार योग्य अनियमितताः गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक आपराधिक अपील पर कहा कि जब निचली अदालत किसी आरोपी को दोषी ठहराती है तो उसे सीआरपीसी की धारा 235 (2) के तहत अनिवार्य सजा पर सुनवाई का अवसर देना होता है।प्रावधान निर्धारित करता है: यदि अभियुक्त को दोषी ठहराया जाता है तो जज जब तक कि वह धारा 360 के प्रावधानों के अनुसार आगे नहीं बढ़ता है, अभियुक्त को सजा के प्रश्न पर सुनेगा, और फिर कानून के अनुसार उसे सजा सुनाएगा।हाईकोर्ट ने अलाउद्दीन मियां और अन्य बनाम बिहार राज्य, (1989) 3 एससीसी 5 पर भरोसा किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने नोट...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
अडानी पॉवर और गुजरात ऊर्जा विकास ने समझौता किया, सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटिशन का निपटारा किया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात ऊर्जा विकास लिमिटेड (जीयूवीएल) और अडानी पॉवर लिमिटेड के बीच अदालत के बाहर समझौता स्वीकार कर लिया। 3 जजों की पीठ के फैसले के खिलाफ जीयूवीएल ने एक क्यूरेटिव पिटिशन दायर की थी। फैसले में जीयूवीएल के साथ बिजली खरीद के अडानी पॉवर के समझौते की समाप्‍त‌ि को बरकरार रखा गया था।चीफ जस्ट‌िस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित, ज‌स्टिस डीवाई चंद्रचूड़, ज‌स्टिस बीआर गवई और ज‌स्टिस सूर्यकांत की 5 जजों की पीठ के समक्ष क्यूरेटिव प‌िट‌िशन को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था।अटॉर्नी...

दोषी का दाम्पत्य संबंध रखने का अधिकार पूर्ण नहीं: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट मद्रास एचसी के हालिया फैसले से सहमति जताई
"दोषी का दाम्पत्य संबंध रखने का अधिकार पूर्ण नहीं": पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट मद्रास एचसी के हालिया फैसले से सहमति जताई

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि एक दोषी का वैवाहिक संबंध रखने का अधिकार पूर्ण नहीं है और यह 'उचित प्रतिबंध', 'सामाजिक व्यवस्था', 'सुरक्षा चिंताओं', 'अच्छे व्यवहार' के अधीन है।जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह और जस्टिस जसजीत सिंह बेदी की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के हालिया फैसले से अपनी सहमति व्यक्त की। इस मामले में यह फैसला सुनाया गया कि एक अपराधी के वैवाहिक संबंध रखने का अधिकार पूर्ण अधिकार नहीं है और एक दोषी के लिए संतान उत्पन्न न कर पाने पर उपचार प्राप्त करने का उसका अधिकार उपलब्ध है।इसके अलावा...

मद्रास हाईकोर्ट
[सीआरपीसी की धारा 167 (2)] डिफॉल्ट जमानत पर विचार करते समय रिमांड की तारीख भी शामिल किया जाना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट ने दोहराया

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने कहा कि डिफ़ॉल्ट जमानत का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए एक अपरिहार्य मौलिक अधिकार है।आगे कहा कि डिफॉल्ट जमानत पर विचार करते समय रिमांड की तारीख भी शामिल किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति एम. निर्मल कुमार की एकल-न्यायाधीश पीठ POCSO -आरोपी की याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें POCSO अधिनियम के तहत विशेष अदालत को सीआरपीसी की धारा 167 (2) के तहत दायर एक आवेदन पर डिफ़ॉल्ट जमानत देने के लिए निर्देश देने की...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े के पिता द्वारा दायर अवमानना याचिका पर राकांपा नेता नवाब मलिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े के पिता द्वारा दायर अवमानना याचिका पर राकांपा नेता नवाब मलिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने राज्य के कैबिनेट मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता नवाब मलिक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने उनसे यह बताने को कहा कि अदालत को दिए गए वचनों का उल्लंघन करने और आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े के परिवार को बदनाम करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।जस्टिस एसजे कथावाला और जस्टिस मिलिंद जाधव की खंडपीठ ने समीर के पिता ज्ञानदेव वानखेड़े द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका पर चल रहे मानहानि का आरोप लगाते हुए यह आदेश पारित किया।मलिक के हलफनामे का...

मद्रास हाईकोर्ट ने रोड किल्स रोकने के लिए सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व में नाइट ट्रैवल बैन लागू करने का निर्देश दिया
मद्रास हाईकोर्ट ने रोड किल्स रोकने के लिए सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व में नाइट ट्रैवल बैन लागू करने का निर्देश दिया

मद्रास हाईकोर्ट ने सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व में यातायात पर प्रतिबंध लगाने वाले इरोड जिला कलेक्टर द्वारा जारी 2019 अधिसूचना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए दायर एक जनहित याचिका में निर्देश दिया कि प्रतिबंध 10 फरवरी, 2022 से लागू होना चाहिए।एक्टिंग चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और जस्टिस डी. भरत चक्रवर्ती की पीठ याचिकाकर्ता एसपी चोकलिंगम की सुनवाई कर रही थी। इन्होंने आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर के आदेश को लागू न करने के कारण लगभग 155 जानवरों की जान चली गई।अदालत ने सात जनवरी, 2019 को जिला कलेक्टर...