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दिल्ली हाईकोर्ट ने चांदनी चौक पुनर्विकास से संबंधित 14 साल पुरानी जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति दी

LiveLaw News Network
14 Jan 2022 5:20 AM GMT
दिल्ली हाईकोर्ट ने चांदनी चौक पुनर्विकास से संबंधित 14 साल पुरानी जनहित याचिका वापस लेने की अनुमति दी
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दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को चांदनी चौक क्षेत्र के पुनर्विकास और गैर-मोटर चालित वाहनों के लिए गलियों के निर्माण से संबंधित एक 14 साल पुरानी जनहित याचिका का निपटारा किया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में शामिल विभिन्न प्राधिकरण याचिका के लंबित रहने के दौरान पारित उसके निर्देशों का पालन करना जारी रखेंगे।

एक नागरिक समाज संगठन याचिकाकर्ता मानुषी संगठन की ओर से पेश अधिवक्ता इंदिरा उन्नीनार ने 2007 में दायर याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी। हाईकोर्ट ने साथ ही मामले को बंद करने का आग्रह करने के बाद यह आदेश पारित किया।

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस जयराम भंभानी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा,

"याचिकाकर्ता अपने इस दावे के मद्देनजर कि वर्तमान कार्यवाही में आगे कोई निर्देश नहीं मांगे गए हैं। अब इसका कोई उद्देश्य नहीं रह गया है, इसलिए याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी गई है। तदनुसार, रिट याचिका खारिज की जाती है।"

उल्लेखनीय है कि चांदनी चौक सर्व व्यापार मंडल (प्रतिवादी नंबर छह) का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव रैली ने याचिका को वापस लेने का मुखर विरोध किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा जारी किए गए कई निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है और पीठ से नोडल अधिकारी से रिपोर्ट मांगने का आग्रह किया।

बेंच ने रैली से पूछा,

"कानून में क्या एक याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने से रोका जा सकता है?"

उन्होंने जवाब दिया,

"अगर इससे अदालत द्वारा पारित आदेश कमजोर होते हो तो।"

बेंच ने हालांकि रैली को अगर वह किसी न्यायिक अधिकारी के गैर-अनुपालन से व्यथित है तो एक अवमानना ​​याचिका दायर करने को कहा।

जस्टिस मृदुल ने टिप्पणी की,

"यदि वे अनुपालन नहीं करते हैं तो आप अवमानना ​​​​याचिका दायर कर सकते हैं। यह अनंत काल तक नहीं चल सकता। यह अदालत शाहजहां नहीं है। हम शाहजहांनाबाद का पुनर्निर्माण नहीं करने जा रहे हैं।"

इसके अलावा, बेंच ने यह स्पष्ट किया कि आधिकारिक प्रतिवादी याचिका के दौरान अदालत द्वारा जारी सभी निर्देशों का पालन करना जारी रखेंगे।

इन निर्देशों में शामिल हैं:

1. साइकिल रिक्शा लाइसेंसों की संख्या पर संख्यात्मक प्रतिबंध/कैप पर 99000 की सीमा को मनमाना घोषित करना

2. मालिक-मस्ट-बी-प्लेयर नीति और उपनियम को मनमाना और शून्य घोषित करना;

3. डीएमसी अधिनियम के विपरीत साइकिल रिक्शा को प्रतिबंधित करने को घोषित करना;

4. साइकिल रिक्शा की पार्किंग के लिए उचित प्रावधान और यह सुनिश्चित करने के लिए कि आम लोगों को परेशान नहीं किया जाएगा;

5. दिल्ली में सड़क यातायात आदि से संबंधित प्रश्नों का पता लगाने के लिए एक विशेष कार्य बल (एसटीएफ) का गठन करना।

याचिका में चांदनी चौक पुनर्विकास परियोजना की निगरानी, ​​​​साइकिल रिक्शा के पंजीकरण के लिए एक अंतरिम उपाय के मसौदा कानून के कार्यान्वयन आदि को भी बढ़ाने की मांग की गई थी।

गौरतलब है कि बेंच चांदनी चौक क्षेत्र के पैदल चलने वालों के लिए परियोजना से संबंधित मामले से जुड़ी अपनी स्वत: संज्ञान याचिका (कोर्ट स्वतः संज्ञान बनाम शाहजहानाबाद पुनर्विकास निगम) पर सुनवाई जारी रखेगी। इस संदर्भ में रैली ने पीठ को सूचित किया कि भले ही परियोजना का उद्घाटन किया गया हो, लेकिन कई पहलुओं को पूरा किया जाना बाकी है।

इसी के तहत कोर्ट ने अतिरिक्त सरकारी वकील नौशाद अहमद खान को चार हफ्ते के अंदर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।

स्वत: संज्ञान लेने पर अब तीन मार्च को सुनवाई होगी।

केस शीर्षक: मानुषी संगठन, दिल्ली बनाम जीएनसीटीडी और अन्य।

केस नंबर: डब्ल्यूपी (सी) 4572/2007

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