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सेबी ने टेलीग्राम, व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए स्टॉक प्राइस में हेरफेर पर सचेत किया; प्रतिभूति बाजार में प्रवेश से 6 व्यक्तियों को रोका

LiveLaw News Network
13 Jan 2022 1:45 PM GMT
सेबी ने टेलीग्राम, व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए स्टॉक प्राइस में हेरफेर पर सचेत किया; प्रतिभूति बाजार में प्रवेश से 6 व्यक्तियों को रोका
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों पर नकेल कसी है, जिसमें शेयर की कीमतों को बढ़ाने के लिए स्टॉक-टिप्स साझा किए जा रहे थे। एक अंतरिम आदेश में, बाजार नियामक ने छह व्यक्तियों को प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से रोक दिया है। इनके बारे में प्रथम दृष्टया यह पाया गया था कि उन्होंने सोशल मीडिया ग्रुपों के माध्यम से आधारहीन स्टॉक सिफारिशें करके धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त थे।

2021 में सेबी ने शिकायतों पर एक जांच शुरू की थी कि जिन लोगों के पास सेबी के साथ कोई पंजीकरण नहीं है, वे एक मध्यस्थ के रूप में प्रतिभूति बाजारों में कार्य करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग स्टॉक की कीमतों को कृत्रिम रूप से प्रभावित करने के लिए कर रहे हैं।

कार्यप्रणाली यह थी कि वे पहले स्मॉल-कैप कंपनियों में थोक मात्रा में एक पोजिशन (शेयरों की खरीद) लेते; फिर वे सोशल मीडिया ग्रुपों में आधारहीन और कपटपूर्ण संदेश भेजते, जो इस तरह के शेयरों में तत्काल मूल्य वृद्धि की प्रबल संभावनाओं का संकेत देते, जिससे दूसरों को उन शेयरों में तेजी की पोजिशन लेने के लिए उकसाया जाता; और अंततः कीमतें बढ़ने के बाद, वे विपरीत पोजिशन(अपने पहले अर्जित शेयरों को बेचकर) लेते हैं, जिससे ऐसे ट्रेडों से लाभ होता है।

सेबी ने एक टेलीग्राम चैनल "बुलरन2017"/"बुल रन इन्वेस्टमेंट एजुकेशनल चैनल" की जांच की, जिसके लगभग 50,000 ग्राहक थे और एक व्हाट्सएप ग्रुप "स्टॉक गुजराती 3" था। यह पाया गया कि इन व्यक्तियों द्वारा 2,84,29,948 रुपये का गलत लाभ कमाया गया। सेबी ने छह व्यक्तियों- हिमांशु महेंद्रभाई पटेल, राज महेंद्रभाई पटेल, जयदेव जाला, महेंद्रभाई बेचारदास पटेल, कोकिलाबेन महेंद्रभाई पटेल और अवनिबेन किरणकुमार पटेल- को गैरकानूनी लाभ की राशि का भुगतान करने के लिए कहा है।

इस तरह के कृत्यों में लिप्त होकर, उन्होंने पीएफयूटीपी (धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं का निषेध) मानदंडों के प्रावधानों का उल्लंघन किया। ग्रुप के एडमिनेस्ट्रेटर, हिमांशु, राज और जयदेव ने खुद 40 से अधिक वर्षों के अनुभव वाले रिसर्च एनलिस्ट के रूप में पेश किया था और झूठा दावा किया कि वे सेबी के रिसर्च एनलिस्ट पंजीकरण प्राप्त करने की प्रक्रिया में थे।

सेबी ने कहा कि जांच में "चौंकाने वाले खुलासे" के बाद उनसे सेबी अधिनियम की धारा 11 के तहत "प्रतिभूति बाजार को अनुचित और धोखाधड़ी से भरे कृत्यों से बचाने के लिए" शक्तियों का तत्काल आह्वान किया। इस तरह के कृत्य "प्रतिभूति बाजार के व्यवस्थित विकास के लिए विरोधी और हानिकारक" हैं।

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य एसके मोहंती ने 37-पृष्ठ के आदेश में कहा, "... देश के माननीय न्यायालयों ने प्रतिभूति बाजार में हेरफेर और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने की आवश्यकता के बारे में बार-बार जोर दिया है।"

नियामक ने अपने आदेश में कहा,

"कुछ प्रतिभूतियों में सौदा करने के लिए दूसरों को लुभाने और प्रेरित करने की कथित योजना, जिससे उन शेयरों की कीमत और मात्रा पर प्रतिकूल और कृत्रिम प्रभाव पैदा हुआ है, को सरलता से तैयार किया गया है और इसे इस तरह से लागू किया गया है कि आम निवेशकों के लिए पहचान करना एक असंभव कार्य था। ऐसे संदेशों और युक्तियों के पीछे किसी भी तरह की संदिग्ध छिपी मंशा जो उनके बीच टेलीग्राम चैनल के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा था।"

सेबी ने व्यक्तियों को 45 दिन का कारण बाताओ नोटिस दिया है कि सेबी अधिनियम, 1992 और पीएफयूटीपी विनियमों के कथित उल्लंघन के लिए उन पर सेबी अधिनियम, 1992 की धारा 11बी (2) और 11(4ए) सहपठित धारा 15HA के तहत उचित जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।

आदेश पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

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