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कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को COVID-19 मामलों में हो रही वृद्धि के मद्देनजर 4 निकाय चुनावों को 4 से 6 सप्ताह के लिए स्थगित करने पर विचार करने का निर्देश दिया

LiveLaw News Network
14 Jan 2022 7:32 AM GMT
कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को COVID-19 मामलों में हो रही वृद्धि के मद्देनजर 4 निकाय चुनावों को 4 से 6 सप्ताह के लिए स्थगित करने पर विचार करने का निर्देश दिया
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 जनवरी, पश्‍चिम बंगाल चुनाव आयोग को सिलीगुड़ी, चंद्रनगर, बिधाननगर और आसनसोल नगरपालिका चुनावों को 4 से 6 सप्ताह तक के ‌लिए स्थगित करने पर विचार करने का निर्देश दिया। पश्चिम बंगाल में COVID मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को 48 घंटे के भीतर निर्णय लेने के लिए कहा है।

हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिसमें चार नगरपालिका चुनावों को स्थगित करने की मांग की गई थी। वहां 22 जनवरी, 2022 को चुनाव होना है।

गुरुवार को कोर्ट ने मामले मे फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार और पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग की ओर से राज्य की 4 नगर पालिकाओं में COVID-19 स्थिति संबंधित एक रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड पर लिया था ।

चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज की पीठ ने कहा,

"हम मौजूदा याचिका का निस्तारण राज्य चुनाव आयोग को इस निर्देश के साथ करते हैं कि जिस गति से COVID मामले बढ़ रहे हैं, उस पर विचार करें और इस मुद्दे को भी ध्यान में रखें कि क्या ऐसी स्थिति में चुनाव कराना जनहित में होगा और क्या अधिसूचित तिथियों पर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संभव होगा और उक्त चार नगर निकायों के चुनाव की तिथि को 4 से 6 सप्ताह की अल्प अवधि के लिए स्थगित करने के संबंध में निर्णय लेने के लिए प्रतिवादी राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाता है....।"

कोर्ट ने 2002 के Special Reference No. 1 of 2002, In Re, (2002) 8 SCC 237 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा किया और यह माना कि चुनावी भूमिकाओं और आचरण की तैयारी का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग के विशेष अधिकार क्षेत्र के तहत है और यह चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि वह जल्द से जल्द स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए।

पीठ ने कहा, "उपरोक्त घोषणा के मद्देनजर, यह स्पष्ट है कि राज्य चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव की तारीख को स्थगित करने के संबंध में निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त है।"

कोर्ट ने इस दलील पर विचार करने से इनकार कर दिया कि कोर्ट को अनुच्छेद 226 के तहत दी गई शक्ति का प्रयोग करते हुए चुनाव की तारीख को स्थगित करने का निर्देश जारी करना चाहिए। इसके बजाय, न्यायालय ने कहा कि मौजूदा मामले के तथ्यों में, राज्य चुनाव आयोग को राज्य और नगर निगमों में मौजूदा COVID स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए, जहां चुनाव होने हैं और मतदान की तारीखों को स्थगित करने के लिए उचित निर्णय लेना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अनुच्छेद 243-जेडए के अनुसार, नगर निगम के चुनावों के संचालन के संबंध में शक्तियां राज्य चुनाव आयोग के पास हैं। यह भी नोट किया गया था कि पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग अधिनियम की धारा 5 (1) इसी यह प्रावधान करती है कि नगर पालिकाओं के सभी चुनावों के लिए चुनावी भूमिकाओं की तैयारी का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण आयोग के पास होगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 243-जेडजी (ए) में निहित बार केवल न्यायालयों पर लागू होता है, न कि चुनाव आयोग पर जो चुनावी भूमिकाओं की तैयारियों का पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करता है और नगर पालिकाओं के चुनावों का संचालन करता है। यह बहुत स्पष्ट रूप से माना गया है कि यह पूरी तरह से राज्य चुनाव आयोग पर निर्भर है कि वह चुनाव प्रक्रिया को गति प्रदान करे या, किसी भी मामले में जहां संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान का पालन नहीं किया जाता है या उल्लंघन किया जाता है, जब तक कि इस तरह की अवैध कार्रवाई का उपचार नहीं किया जाता है, तब तक चुनाव प्रक्रिया को स्थगित करे।

राज्य में मौजूदा COVID-19 मामलों पर आगे विचार करते हुए, खंडपीठ ने कहा,

"याचिकाकर्ता ने यह दिखाते हुए रिकॉर्ड सामग्री रखी है कि राज्य में COVID ​​​​संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और COVID- ​​​​19 महामारी की स्थिति अच्छी नहीं है। यह बताया गया है कि कि 9 जनवरी, 2022 को पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 24287 मामले आए और उत्तर 24 परगना और हुगली जिले में 5053 और 1276 मामले दर्ज किए गए थे।"

पृष्ठभूमि

न्यायालय बिमल भट्टाचार्य की जनहित याचिका पर विचार कर रहा था, जिन्होंने कहा था कि COVID की मौजूदा ​​​​स्थिति को देखते हुए चार नगर निगमों यानि सिलीगुड़ी, चंद्रनगर, बिधाननगर और आसनसोल के चुनाव 22 जनवरी, 2022 को कराना बड़े हित में नहीं होगा। यह भी दलील दी गई कि इन नगर निकायों के कई इलाकों को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया गया है और यहां तक ​​कि चुनाव आयोग द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देश भी पर्याप्त नहीं हैं। जनहित याचिका में यह प्रार्थना की गई थी कि COVID की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, इन नगर निगमों के चुनाव शुरू में कम से कम चार सप्ताह के लिए टाल दिए जाएं।

केस शीर्षक- बिमल भट्टाचार्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और अन्य

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