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दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
जेल में कैदी ने की आत्महत्या, जेल अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट निखिल नैयर को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने पिछले साल जेल में कैदी द्वारा की गई आत्महत्या की घटना पर सोमवार को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया, जिसने जेल की कोठरी में लगभग 19 मिनट तक संघर्ष किया, लेकिन जेल अधिकारियों द्वारा समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद एक याचिका पर विचार कर रहे थे, जो मृतक कैदी के पिता लाभ सिंह द्वारा दिए गए बयान पर आधारित है। उन्होंने एक पत्र लिख कर आरोप लगाया गया था कि उनके बेटे सोहन सिंह को जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है। दुर्भाग्य से सोहन सिंह ने 11...

घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पत्नी को दिए गए भरण-पोषण में सीआरपीसी की धारा 127 के तहत वृद्धि नहीं की जा सकतीः कर्नाटक हाईकोर्ट
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पत्नी को दिए गए भरण-पोषण में सीआरपीसी की धारा 127 के तहत वृद्धि नहीं की जा सकतीः कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत अलग हो चुकी पत्नी को देय भरण-पोषण को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 127 के तहत दायर आवेदन पर बढ़ाया नहीं जा सकता।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा,"सीआरपीसी की धारा 125 के तहत दिया जाने वाले भरण-पोषण, सीआरपीसी की धारा 127 के तहत दायर आवेदन में भ‌िन्न-‌भिन्न हो सकता है। अनिवार्य यह है कि भरण-पोषण का आदेश सीआरपीसी की धारा 127 के तहत दायर याचिका से पहले होना चाहिए, जिसमें विफल होने पर,...

सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज गवाह का बयान केवल क्रॉस एक्ज़ामिनेशन के लिए है, साक्ष्य के दायरे में नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज गवाह का बयान केवल क्रॉस एक्ज़ामिनेशन के लिए है, साक्ष्य के दायरे में नहीं आता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा, "यह निर्णय की श्रेणी में स्पष्ट है कि सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज गवाह का बयान साक्ष्य के दायरे में नहीं आता। इस तरह के सबूत केवल आमने सामने क्रॉस एक्ज़ामिनेशन के लिए हैं। सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दर्ज गवाह का बयान सबूत में पूरी तरह से अस्वीकार्य होने के कारण इस पर विचार नहीं किया जा सकता है।"जस्टिस ओम प्रकाश त्रिपाठी और जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता ने यह टिप्पणी विशेष न्यायाधीश, बुलंदशहर द्वारा पारित दोषसिद्धि के आदेश और अपीलकर्ताओं को भारतीय दंड...

सहायक सामग्री के बिना चार्जशीट में सुधार सीआरपीसी की धारा 482 के तहत कार्यवाही रद्द करने का आधार है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
सहायक सामग्री के बिना चार्जशीट में सुधार सीआरपीसी की धारा 482 के तहत कार्यवाही रद्द करने का आधार है: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने हाल ही में फैसला सुनाया कि प्राथमिकी (FIR) या सीआरपीसी की धारा 161के तहत बयान में किसी भी सहायक सामग्री के बिना चार्जशीट में जोड़ा गया बयान अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और कार्यवाही को सीआरपीसी की धारा 482 के तहत रद्द किया जा सकता है।क्या है पूरा मामला?शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर, आईपीसी की धारा 506 (आपराधिक धमकी), 188 (लोक सेवक द्वारा विधिवत घोषित आदेश की अवज्ञा), 149 (गैरकानूनी सभा), 341 (गलत संयम) के विभिन्न अपराधों के तहत...

न तो वकील और न ही जज तकनीकी परिवर्तनों को नहीं जानने का जोखिम उठा सकते हैं: उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मुरलीधर ने हर स्तर पर पेपरलेस कोर्ट की कल्पना पेश की
"न तो वकील और न ही जज तकनीकी परिवर्तनों को नहीं जानने का जोखिम उठा सकते हैं": उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मुरलीधर ने हर स्तर पर पेपरलेस कोर्ट की कल्पना पेश की

उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस एस मुरलीधर ने ओडिशा में हर स्तर पर पेपरलेस कोर्ट पर अपना विचार व्यक्त किया है। उन्होंने इस तथ्य पर भी संतोष व्यक्त किया है कि उनकी पहल के बाद हाईकोर्ट में पहले से ही तीन जजों की अदालतें पूरी तरह से पेपरलेस हो चुकी हैं, और दो और जजों की अदालतें जल्द ही पेपरलेस हो सकती हैं।जस्टिस मुरलीधर उड़ीसा हाईकोर्ट, 2021 की वार्षिक रिपोर्ट जारी करने और जिला जज सम्मेलन का उद्घाटन करने के लिए शुक्रवार को ओडिशा न्यायिक अकादमी में आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे ।उन्होंने...

दिल्ली दंगा: कथित हेट स्पीच के लिए राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले आवेदनों पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
दिल्ली दंगा: कथित 'हेट स्पीच' के लिए राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले आवेदनों पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को विभिन्न राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों के खिलाफ मामले दायर करने की मांग करने वाले आवेदनों पर नोटिस जारी किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 2020 के दौरान कथित 'हेट स्पीच' के लिए राजनेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली याचिकाओं में उन्हें पक्षकार प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाना चाहिए या नहीं।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप कुमार मेंदीरत्ता की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता शेख मुजतबा और वकीलों की आवाज द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।शेख मुजतबा द्वारा...

केरल हाईकोर्ट
[SC/ST Act] पीड़ित के मुकदमे की कार्यवाही रिकॉर्ड करने के अनुरोध को खारिज नहीं किया जा सकता, भले ही यौन अपराध शामिल हो: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने हाल ही में फैसला सुनाया कि जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अपराधों की शिकार मुकदमे की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्ड करने का अनुरोध करती है, तो अदालत इसे ठुकरा नहीं सकती, भले ही यौन अपराध शामिल हो।न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने उल्लेख किया कि अधिनियम की धारा 15 ए (10) जो सभी कार्यवाही की वीडियो-रिकॉर्डिंग की अनुमति देती है, सीआरपीसी की धारा 327 (2) जो यौन अपराधों से जुड़े मामलों के अनुरूप है जो इन-कैमरा ट्रायल का प्रावधान करती...

मुद्दा संवैधानिक न्यायालय के समक्ष लंबित है, इसलिए विरोध का अधिकार खत्म नहीं जाताः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
मुद्दा संवैधानिक न्यायालय के समक्ष लंबित है, इसलिए विरोध का अधिकार खत्म नहीं जाताः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले में कहा कि एक याचिकाकर्ता को किसी मुद्दे पर विरोध करने के अधिकार से केवल इसलिए वंचित नहीं किया जाएगा क्योंकि उसने उसी विषय पर एक संवैधानिक अदालत का दरवाजा खटखटाया है।आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष हाल ही में एक रिट याचिका में, ज‌स्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस बीएस भानुमति ने कहा,"शिकायतों के निवारण के लिए एक संवैधानिक अदालत का दरवाजा खटखटाना वास्तव में एक नागरिक को उसी विषय-वस्तु के संबंध में विरोध करने से वंचित नहीं करेगा। हम ऐसा इसलिए कहते...

दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्षय कुमार अभिनीत पृथ्वीराज फिल्म के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्षय कुमार अभिनीत 'पृथ्वीराज' फिल्म के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने यशराज फिल्म्स द्वारा निर्मित फिल्म 'पृथ्वीराज' का टाइटल बदलने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया। मुख्य भूमिकाओं में अभिनेता अक्षय कुमार और मानुषी छिल्लर अभिनीत फिल्म 10 जून, 2022 को रिलीज़ होने वाली है।याचिकाकर्ता, राष्ट्रीय प्रवासी परिषद ने प्रस्तुत किया कि यह फिल्म भारतीय सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन पर आधारित है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता संजीव बेनीवाल ने दलील दी कि फिल्म एक 'महान योद्धा' पर आधारित है। हालांकि, इसका नाम उसी का...

पटना हाईकोर्ट ने बिहार माइनिंग कॉर्पोरेशन द्वारा केवल सीएनएलयू स्नातकों को लॉ ऑफिसर के रूप में भर्ती करने पर रोक लगाई
पटना हाईकोर्ट ने बिहार माइनिंग कॉर्पोरेशन द्वारा केवल सीएनएलयू स्नातकों को लॉ ऑफिसर के रूप में भर्ती करने पर रोक लगाई

पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड में विधि अधिकारी के पद पर चयन प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।यह आदेश निगम की भर्ती अधिसूचना को इस आधार पर चुनौती देने वाली याचिका पर आया है कि उसने केवल चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, पटना (सीएनएलयू) से कानून स्नातकों को ही उक्त पद के लिए आवेदन करने की अनुमति दी है। न्यायमूर्ति पी बी बजंथरी की खंडपीठ ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 8 मार्च की तारीख तय की है और याचिकाकर्ता को अगली सुनवाई की तारीख से पहले विधि अधिकारी या...

रूढ़िवादी समाज के सिद्धांतों के दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा प्रदान की
'रूढ़िवादी समाज के सिद्धांतों के दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा प्रदान की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) ने लिव-इन रिलेशनशिप कपल को पुलिस सुरक्षा प्रदान करते हुए कहा कि रूढ़िवादी समाज के सिद्धांतों के दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है, जो धर्मों द्वारा समर्थित नैतिकता के मजबूत तारों से बंधे हैं जो कि मूल्यों को व्यक्ति के जीवन से ऊपर मानते हैं।न्यायमूर्ति अनूप चितकारा की खंडपीठ ने जय नरेन और उसके लिव-इन पार्टनर, एक विवाहित महिला द्वारा दायर एक सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।याचिकाकर्ता ने निजी प्रतिवादियों के...

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों/सड़कों पर मांस उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों/सड़कों पर मांस उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई

त्रिपुरा हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह राज्य सरकार को सार्वजनिक स्थानों और/या सड़कों पर मांस उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने और बूचड़खाने के चालू होने तक उन स्थानों को उपलब्ध कराने पर विचार करने का निर्देश दिया जहां वध किया जा सकता है।चीफ जस्टिस इंद्रजीत महंती और जस्टिस एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार को एडवोकेट अंकन तिलक पॉल द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर कई निर्देश जारी किए। इसमें राजधानी शहर सहित पूरे त्रिपुरा में सार्वजनिक/सड़कों पर जानवरों की बिक्री और वध पर प्रतिबंध लगाने और बंद...

आरोपी के खिलाफ अस्पष्ट आरोप के आधार पर दी गई जमानत रद्द नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आरोपी के खिलाफ अस्पष्ट आरोप के आधार पर दी गई जमानत रद्द नहीं की जा सकती: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि अगर किसी ठोस सबूत के बिना आरोपी के खिलाफ अस्पष्ट आरोप हैं तो दी गई जमानत को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 439 (2) के तहत रद्द नहीं किया जा सकता है।पूरा मामलाआरोपी को मिली जमानत रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 439 (2) के तहत आपराधिक याचिका दायर की गई थी। यह डबल मर्डर का मामला है।एक मृतक की पत्नी ने उक्त अपराध में आरोपी को दी गई उक्त जमानत को इस आधार पर रद्द करने के लिए याचिका दायर की कि दो पूर्व जमानत आवेदनों के खारिज होने के बाद जमानत देने के...

पति पर पत्नी को पीटने का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को परिवार को फिर से मिलाने के लिए ससुराल में 1 महीने रहने का निर्देश दिया
पति पर पत्नी को पीटने का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को 'परिवार को फिर से मिलाने' के लिए ससुराल में 1 महीने रहने का निर्देश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति (पति) को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी के साथ ससुराल में एक महीने तक रहे ताकि परिवार आने वाले समय में फिर से मिल जाए। पति पर अपनी पत्नी की पिटाई करने का आरोप है।यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित आर्य की पीठ ने पत्नी (गीता रजक) द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया। दो साल की उम्र के अपने बच्चे (कॉर्पस) को पेश करने की मांग करते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट दायर की गई थी।पत्नी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि...

[मोटर दुर्घटना] बीमा कंपनी लाइसेंस की वैधता के मुद्दे को अपील में नहीं उठा सकती, अगर यह ट्रिब्यूनल के समक्ष दलील नहीं दी गई थी: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
[मोटर दुर्घटना] "बीमा कंपनी लाइसेंस की वैधता के मुद्दे को अपील में नहीं उठा सकती, अगर यह ट्रिब्यूनल के समक्ष दलील नहीं दी गई थी": जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बीमा कंपनी द्वारा दायर एक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए निर्णय को इस आधार पर चुनौती दी थी कि आपत्तिजनक वाहन चालक द्वारा चलाया जा रहा था, जिसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।न्यायमूर्ति रजनीश ओसवाल की खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ता-बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के समक्ष अपनी आपत्तियों में लाइसेंस की वैधता के संबंध में कुछ भी दलील नहीं दी थी और इसलिए, इसे अपील में उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।क्या...

शादी के झूठे वादे पर बलात्कार- विवाहित, शिक्षित महिला को शादी से पहले यौन संबंध बनाने के परिणामों के बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए : राजस्थान हाईकोर्ट
शादी के झूठे वादे पर बलात्कार- विवाहित, शिक्षित महिला को शादी से पहले यौन संबंध बनाने के परिणामों के बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने शादी के झूठे वादे के आधार पर बलात्कार करने से संबंधित एक मामले में कहा है कि शादीशुदा शिक्षित महिला को (प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर) शादी से पहले किसी पुरुष के साथ संभोग करने के परिणामों से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए। अदालत ने कहा कि भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) की धारा 375 के तहत एक महिला की सहमति को केवल तभी तथ्यों की गलतफहमी के आधार पर गलत ठहराया जा सकता है, जहां इस तरह की गलतफहमी शारीरिक संबंध स्थापित करने के लिए उसके आत्मसमर्पण का आधार थी। अदालत...

आईपीआर उल्लंघन के खिलाफ मजबूत प्रवर्तन प्रावधानों की आवश्यकता: सीजेआई एनवी रमाना
आईपीआर उल्लंघन के खिलाफ मजबूत प्रवर्तन प्रावधानों की आवश्यकता: सीजेआई एनवी रमाना

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने भारत में आईपीआर विवादों के न्यायनिर्णयन पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते हुए शनिवार को कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन के कृत्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।सीजेआई रमाना ने कहा, "उल्लंघन के खिलाफ सख्त प्रवर्तन और कार्रवाई के प्रावधान समय की जरूरत है।" उन्होंने यह भी कहा कि आईपीएबी से उच्च न्यायालयों में आईपीआर क्षेत्राधिकार का अधिकार ऐसे समय में आया है जब सिस्टम बैकलॉग से अधिक बोझ है।इस संदर्भ में, सीजेआई ने न्यायिक बुनियादी ढांचे...