मुख्य सुर्खियां
झारखंड हाईकोर्ट ने आरटीआई नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया
झारखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को हाईकोर्ट के सूचना के अधिकार नियमों के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने की मामले की सुनवाई की। पीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से जवाब मांगा। पीठ ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर यह बताने का निर्देश दिया कि याचिका को क्यों स्वीकार नहीं किया जाए।याचिकाकर्ता के मामले में झारखंड हाईकोर्ट (सूचना का अधिकार) नियम, 2007 के नियम 9 (ए) (आई) और (बी) ने धारा 6 (2), 7(9) और 22 आरटीआई...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निवारक निरोध के आदेश को रद्द कर दिया क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट आदेश को सरकार को तत्काल भेजने में विफल रहे
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित निवारक निरोध के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वह अपने दायित्व का निर्वहन करने में विफल रहे, क्योंकि उन्होंने संबंधित आदेश पारित करने के लगभग 10 दिनों के बाद मामले को राज्य सरकार को अग्रेषित नहीं किया।जस्टिस शील नागू और जस्टिस डीडी बंसल की खंडपीठ याचिकाकर्ता द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें वह कालाबाजारी रोकथाम और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का रखरखाव अधिनियम, 1980 की धारा 3(1) को लागू करके जिला मजिस्ट्रेट,...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरबीआई को महाराष्ट्र निवासी एक व्यक्ति के नोटबंदी के बाद चलन से बाहर हुए पुराने नोट बदलने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को नोटबंदी (डिमोनेटाइज़ेशन) के बाद महाराष्ट्र निवासी एक व्यक्ति के एक लाख 60 हज़ार रुपए के पुराने नोटों को नए नोटों से बदलने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक को 1.6 लाख रुपये के पुराने नोटों को नए और वैध नोटों से बदलने का निर्देश दिया।जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस माधव जामदार की खंडपीठ ने किशोर सोहोनी द्वारा दायर याचिका में यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने डिमोनेटाइजेशन से पहले अदालत के आदेश के अनुसार उक्त राशि थाने में नकद में जमा की...
सेक्शन 306 आईपीसी | केवल सुसाइड नोट में नाम होने से अभियुक्त का दोष सिद्ध नहीं होता, कथित उकसावे और आत्महत्या के बीच नजदीकी संबंध होना चाहिए: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने को स्थापित करने के लिए उकसाने की सामग्री को पूरा किया जाना चाहिए और आरोपी के नाम के साथ केवल एक सुसाइड नोट पर्याप्त नहीं होगा।जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने माना कि मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए आरोपी द्वारा उकसाने की ओर इशारा करते आशय (mens rea) के अलावा, इस तरह के उकसाने और परिणामी आत्महत्या के बीच एक निकट और जीवंत लिंक मौजूद होना चाहिए, यह स्थापित करने के लिए आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए...
लड़के की उम्र 21 वर्ष से अधिक नहीं होने से विवाह अमान्य नहीं होगा, वयस्क अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रह सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि यह बखूबी स्थापित है कि एक वयस्क को किसी के साथ अपनी मर्जी से रहने का अधिकार है, यह तथ्य कि विवाहित लड़के की आयु 21 वर्ष से अधिक नहीं है, विवाह को अमान्य नहीं करेगा।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस शमीम अहमद की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अधिक से अधिक, यह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 18 के तहत दंड के लिए उत्तरदायी व्यक्ति को उत्तरदायी बना सकता है।मामलादरअसल, एक लड़की के पिता ने धारा 363 और 366 आईपीसी के तहत एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था...
केवल यह अस्पष्ट विश्वास कि आरोपी जांच प्रभावित कर सकता है, उसे लंबे समय तक जेल में रखने का आधार नहीं हो सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल यह अस्पष्ट विश्वास कि आरोपी जांच को विफल कर सकता है, उसे लंबा समय तक जेल में रखने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त द्वारा आपराधिक मुकदमे में न्याय के प्रशासन में हस्तक्षेप की कोई आशंका नहीं है तो न्यायालय को अभियुक्तों को उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने पर विचार करते हुए चौकस होना चाहिए।उन्होंने कहा,"अपराध की भयावहता जमानत से इनकार करने का एकमात्र मानदंड नहीं हो सकता। जमानत का उद्देश्य मुकदमे के समय अभियुक्त की...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 40 साल बाद हत्या के दोषी की अपील को अनुमति दी, दोषसिद्धि खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 40 साल बाद हत्या के दोषी की अपील पर सत्र न्यायालय का आदेश खारिज कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने जेल अधिकारियों को दोषी को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस विवेक वर्मा की पीठ मंगलवार, 22 फरवरी, 2022 को 1982 में रिंगू पासी द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई कर रही थी। इस पीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, उन्नाव द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 34 और धारा 404 के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया था।पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष उचित...
सिर्फ इसलिए कि लिव-इन रिलेशनशिप अस्वीकार्य है, महिला को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकताः लिएंडर पेस घरेलू हिंसा के लिए जिम्मेदार
मुंबई स्थित एक मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने टेनिस स्टार लिएंडर पेस और मॉडल व आर्ट ऑफ लिविंग की प्रशिक्षक रिया पिल्लई के रिश्ते को 'विवाह की प्रकृति' में मानते हुए पेस को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आर्थिक और मानसिक हिंसा के लिए उत्तरदायी ठहराया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब टेनिस स्टार लिएंडर ने रिया पिल्लई के साथ वर्ष 2003-2005 में रहना शुरू किया था तो वह यह बात जानते थे कि रिया पिल्लई की शादी अभिनेता संजय दत्त से हुई थी।अदालत ने पेस को आदेश दिया है कि वह पिल्लई को प्रतिमाह...
राजस्व दस्तावेज में संपत्ति का म्यूटेशन स्वामित्व का निर्माण या समापन नहीं करता है: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि जब दोनों न्यायालयों के एक सुविचारित आदेश में समवर्ती निष्कर्ष हों तो दूसरी अपील कानून के किसी भी महत्वपूर्ण प्रश्न के बिना सुनवाई योग्य नहीं होगी।तथ्यवादी ने वाद दायर किया था, जिसमें वाद अनुसूची संपत्ति के कब्जे की घोषणा और रिकवरी की मांग की गई थी। वादी ने तर्क दिया कि वह वाद भूमि की मालिक और कब्जाधारी थी। वह अपनी मां की एकमात्र कानूनी उत्तराधिकारी है, और सपंत्ति उन्हीं से प्राप्त की थी। प्रतिवादी उसके पिता भाई यानि चाचा था और वह उसकी मां...
क्या मंदिरों को सरकार के नियंत्रण में होना चाहिए? क्या मस्जिदों और चर्चों पर सरकार को समान नियंत्रण रखने का तर्क उचित नहीं है? मद्रास हाईकोर्ट ने पूछा
मद्रास हाईकोर्ट ने श्रीरंगम मंदिर प्रशासन (श्रीरंगम भगवान रंगनाथस्वामी मंदिर) के बारे में कथित रूप से सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में मंदिर एक्टिविस्ट रंगराजन नरसिम्हन के खिलाफ दर्ज दो एफआईआर रद्द कर दी।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन एफआईआर रद्द करते हुए ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 199 मानहानि के लिए एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगाती है। अदालत ने रेखांकित किया कि सीआरपीसी की धारा 199 अदालत के बारे में आईपीसी [मानहानि] के अध्याय XXI में अपराधों का संज्ञान नहीं लेने के बारे में बताती है, जब तक...
"अंतरिम आदेशों के विस्तार की आवश्यकता नहीं": इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत सहित अपने और अधीनस्थ न्यायालयों के समक्ष लंबित सभी मामलों में अंतरिम आदेशों के विस्तार के लिए दर्ज स्वत: संज्ञान याचिका के संबंध में अपनी याचिका का निपटारा किया।चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने आदेश दिया कि यह नोट किया गया कि COVID-19 महामारी की स्थिति में सुधार हुआ है। अब दैनिक जीवन के सामान्य कार्य किए जा रहे हैं और न्यायालय फिजिकल रूप से काम कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि यूपी राज्य की विभिन्न एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार...
दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों को दो मार्च से अगले आदेश तक गाउन पहनने से छूट दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने दो मार्च, 2022 से अगले आदेश तक वकीलों को हाईकोर्ट में प्रैक्टिस के दौरान पहने जाने वाले गाउन पहनने से छूट दी। इस संबंध में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने एक नोटिस जारी किया।Wearing of Gowns by Advocates practicing in the Delhi High Court has been dispensed with, with effect from March 2, 2022 till further orders.#Advocates#Gowns#DelhiHighCourt pic.twitter.com/PVDBzvbOta— Live Law (@LiveLawIndia) February 25, 2022
हिजाब प्रतिबंध : कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच ने 11 दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा
कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच ने शुक्रवार को मुस्लिम छात्राओं द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इन याचिकाओं में एक सरकारी पीयू कॉलेज द्वारा हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनकर मुस्लिम छात्राओं को प्रवेश करने से इनकार करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्णा एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की पूर्ण पीठ के समक्ष सुनवाई 11 दिनों तक चली। उल्लेखनीय है कि कोर्ट का वह अंतरिम आदेश अब भी लागू है, जिसमें स्टूडेंट को कक्षाओं में किसी भी तरह के धार्मिक...
[आदेश VI नियम 18 सीपीसी] तय समय में अगर वाद में संशोधन नहीं किया गया तो बाद में उसमें संशोधन नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हाल ही में कहा कि एक बार वाद में संशोधन के लिए एक आवेदन की अनुमति मिलने के बाद, उसे दी गई समय सीमा के भीतर संशोधित किया जाना चाहिए।भारत संघ बनाम प्रमोद गुप्ता, (2005) 12 एससीसी 1 में सर्वोच्च न्यायालय का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि यदि संशोधित याचिका निर्धारित समय के भीतर दायर नहीं की जाती है, तो उसके बाद इसमें संशोधन नहीं किया जा सकता है।पीठ ने कहा, "यह कानून में तय स्थिति है कि एक बार संशोधन के लिए एक आवेदन की अनुमति दी जाती है,...
चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन में नाबालिग को कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया, मां ने जेजे एक्ट के प्रावधानों को चुनौती दी, 5 करोड़ मुआवजा मांगा, दिल्ली हाईकोर्ट नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 बाल कल्याण समितियों की संरचना, कार्य और शक्ति से संबंधित, के विभिन्न प्रावधानों के खिलाफ दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया।यह याचिका एक नाबालिग लड़की की मां ने दायर की है, जिस पर यौन शोषण का आरोप लगाया गया है और उसे चाइल्ड केयर इस्टीट्यूट में धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया है, जहां उसे जेजे एक्ट के तहत बाल कल्याण समिति द्वारा रिमांड पर लिया गया...
प्रेम संबंध और सहमति से शारीरिक संबंध का मामला, अगर विवाह का झूठा वादा न हो तो बलात्कार नहींः जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू, कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि विवाह का वादा, जिसमें दो वयस्कों के बीच शारीरिक संबंध में शामिल हैं, प्रेम संबंध का मामला है और यह किसी भी रूप में आईपीसी की धारा 375 [बलात्कार] की परिभाषा के दायरे में नहीं आएगा।जस्टिस मोहन लाल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा जब झूठे वादे के मामला होता है, जिसे यौन संबंध के लिए एक महिला की सहमति पाने के लिए किया जाता है, तो गलत बयानी के बराबर होता है, और इस प्रकार से पाई गई सहमति किसी व्यक्ति को बलात्कार के अपराध से मुक्त नहीं कर सकती...
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बेटी द्वारा स्थापित विभाजन मुकदमे में दहेज के रूप में दी गई संपत्तियों को भी शामिल किया जाएगा: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि बेटी की शादी के समय जो संपत्ति दहेज या किसी अन्य रूप में दी गई है, वह विभाजन के लिए उत्तरदायी होगी और बेटी की ओर से विभाजन के स्थापित मुकदमे में उसे शामिल करना होगा। जस्टिस सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने विभाजन के लिए दायर एक मुकदमे में यह टिप्पणी की।मामलायाचिकाकर्ता हेमलता ने 8 अगस्त, 2018 को सिटी सिविल जज बेंगलुरु की ओर से पारित आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने अपने आदेश में याचिकाकर्ता द्वारा दायर विभाजन के मुकदमे में उसके भाई के ओर से दायर आवेदन को अनुमति दी थी,...
दिल्ली हाईकोर्ट ने यूएपीए मामले में कश्मीरी फोटो जर्नलिस्ट की न्यायिक रिमांड के विस्तार के खिलाफ दायर याचिका पर एनआईए से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को मोहम्मद मनन डार की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। 24 वर्षीय कश्मीरी फोटो जर्नालिस्ट मोहम्मद मनन डार के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत दर्ज एक मामले में मामला दर्ज किया।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भंभानी की खंडपीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जवाब मांगा और मामले को आगे की सुनवाई के लिए आठ अप्रैल को पोस्ट किया। यूएपीए की धारा 43डी (2)(बी) के प्रावधान के तहत...
मोटर दुर्घटना दावा | परिवहन वाहन चलाने के लिए अनुमोदन का अभाव वैध ड्राइविंग लाइसेंस के अभाव के बराबर नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि कानून का यह सुस्थापित सिद्धांत है कि "लाइसेंस में ट्रांसपोर्ट वीहिकल चलाने के लिए अनुमोदन के अभाव की यह व्याख्या नहीं होगी कि चालक के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है।"जस्टिस संदीप भट्ट ने मोटर वाहन अधिनियम ('एमवी एक्ट') की धारा 173 के तहत पहली अपील के संबंध में यह टिप्पणी की, जिसमें अपीलकर्ता-बीमा कंपनी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेश से व्यथित थी। ट्रिब्यूनल ने दावेदारों (चालक) और मालिक को संयुक्त रूप से और अलग-अलग 9% ब्याज दर...
आरोपियों को लाभ देने के लिए उचित धाराओं के तहत केस दर्ज नहीं किया गया: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने हाल ही में पुलिस अधीक्षक, जिला शहडोल को आरोपी को कथित रूप से लाभ देने के लिए उचित धाराओं के तहत केस दर्ज नहीं करने पर 'अपराधी' पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा अनिवार्य रूप से आईपीसी धारा 409, 420 और 34 के तहत आवेदक आरोपी द्वारा दायर दूसरी जमानत याचिका पर विचार कर रहे थे।अभियोजन पक्ष के अनुसार, आवेदक ने गलत बयानी द्वारा शिकायतकर्ता को धोखा दिया था। कुछ निवेश शिकायतकर्ता द्वारा और अन्य आवेदक...


















