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आरोपी की पत्नी को प्रतिबंधित सामग्री के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, उसके पास से कुछ बरामद भी नहीं हुआ : गुजरात हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में दोषमुक्ति बरकरार रखी
आरोपी की पत्नी को प्रतिबंधित सामग्री के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, उसके पास से कुछ बरामद भी नहीं हुआ : गुजरात हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में दोषमुक्ति बरकरार रखी

गुजरात हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत एक आरोपी को बरी करने की पुष्टि की। कोर्ट ने यह पुष्टि इस आधार पर कि वह केवल अपने पति के साथ थी और उसे बैग में प्रतिबंधित पदार्थ ले जाने की कोई जानकारी नहीं थी।जस्टिस एसएच वोरा की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि कानून के तहत समझी गई समझ के अनुसार उनके पास एक उचित संदेह भी नहीं है।एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8 (सी), 20 (बी) और 29 के तहत अपराधों के लिए आरोपी नंबर दो (आरोपी नंबर एक की पत्नी) को बरी करने वाले विशेष...

बुलंदशहर हिरासत में मौत : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच रिपोर्ट पर यूपी सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण मांगा
बुलंदशहर हिरासत में मौत : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच रिपोर्ट पर यूपी सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव को अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने के लिए कहा है, जिसमें मुख्य सचिव को यह बताने के लिए कहा गया है कि बुलंदशहर हिरासत में मौत मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए राज्य ने क्या कदम उठाए। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रजनीश कुमार की खंडपीठ ने उक्त आदेश यह नोट करते हुए दिया कि न्यायिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि पीड़ित की पुलिस हिरासत में मृत्यु हुई और इसके लिए पुलिस कर्मी जिम्मेदार हैं।हिरासत...

मेघालय हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले को खारिज करते हुए कहा, नाबालिग पीड़ित ने पत्नी के रूप में आरोपी के साथ रहते हुए बच्चे को जन्म दिया
मेघालय हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले को खारिज करते हुए कहा, नाबालिग 'पीड़ित' ने पत्नी के रूप में आरोपी के साथ रहते हुए बच्चे को जन्म दिया

मेघालय हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012 (पॉक्सो) मामले में एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी व्यक्ति और पीड़िता-पत्नी एक-दूसरे के साथ पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं और उक्त जोड़े से एक बच्चे का जन्म हुआ।जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह की खंडपीठ ने जोर देकर कहा कि एक वयस्क पुरुष द्वारा एक कम उम्र की लड़की के साथ सहमति या स्वैच्छिक संभोग का ऐसा मामला बहुत जटिल है, क्योंकि वे पति-पत्नि के रूप में रह रहे...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
नेगोशिएबल इंस्‍ट्रूमेंट्स एक्ट| नोटिस और भुगतान के अवसर के बावजूद चेक की राशि का भुगतान नहीं करने पर जारीकर्ता आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्य: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि एक बार जब कोई व्यक्ति चेक जारी करता है तो उसका भुगतान जरूर किया जाना चाहिए, कहा कि ऐसा व्यक्ति आपराधिक मुकदमे का सामना करने और परिणाम भुगतने के लिए बाध्य है, यदि नोटिस जारी करने और उक्त राशि का भुगतान करने का अवसर देने के बावजूद भुगतान नहीं किया जाता है। यह देखते हुए कि नेगोशिएबल इंस्‍ट्रूमेंट्स एक्ट चेक जारीकर्ता को पर्याप्त अवसर प्रदान करता है, जस्टिस रजनीश भटनागर ने कहा,"एक बार जब कोई व्यक्ति चेक जारी कर देता है, तो उसका भुगतान किया जाना चाहिए और...

अगर नियोक्ता की संपत्ति को हानि होती है तो कर्मचारी की ग्रेच्युटी जब्त हो सकती है, ज़ब्ती केवल क्षति या हानि की सीमा तक हो सकती है : दिल्ली हाईकोर्ट
अगर नियोक्ता की संपत्ति को हानि होती है तो कर्मचारी की ग्रेच्युटी जब्त हो सकती है, ज़ब्ती केवल क्षति या हानि की सीमा तक हो सकती है : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी कार्य या चूक या लापरवाही के लिए, जिससे नियोक्ता की संपत्ति को कोई क्षति या हानि होती है, किसी कर्मचारी को बर्खास्त किया जाता है तो नियोक्ता किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी को जब्त कर सकता है।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने हालांकि कहा कि इस तरह की ज़ब्ती केवल क्षति या हानि की सीमा तक हो सकती है, और इससे आगे नहीं।कोर्ट कर्मचारी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बीच विवादों से संबंधित दो याचिकाओं पर विचार कर रहा था। एक याचिका में, कर्मचारी के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया था...

प्रथम दृष्टया आर्म्स एक्ट के तहत अपराध: दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्लाइट बैगेज में 50 जिंदा कारतूस के साथ कनाडा के नागरिक के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
"प्रथम दृष्टया आर्म्स एक्ट के तहत अपराध": दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्लाइट बैगेज में 50 जिंदा कारतूस के साथ कनाडा के नागरिक के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कनाडाई नागरिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। उसका फ्लाइट चेक-इन बैगेज 50 जिंदा कारतूस के साथ मिला था। न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया, शस्त्र अधिनियम, 1959 के तहत अपराध किया गया।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने आर्म्स एक्ट की धारा 25 धारा के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता के पास कनाडा का नागरिक होने के कारण ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड है।मामले के तथ्यों के अनुसार, याचिकाकर्ता पिछले साल फरवरी में कनाडा से दिल्ली आया था और...

मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी सोमवार को दो नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाएंगे

मद्रास हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी दो नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाएंगे। इन न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी की की गई। एडवोकेट निदुमोलु माला और एडवोकेट एस. सौंथर सोमवार (28.03.2022) को मद्रास हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।चीफ जस्टिस दो नवनियुक्त न्यायाधीशों को हाईकोर्ट के अतिरिक्त पुस्तकालय भवन के बैठक हॉल में आयोजित एक समारोह में पद की शपथ दिलाएंगे।केंद्र ने एडवोकेट निदुमोलु माला और एडवोकेट एस सौंथर को मद्रास...

COVID-19 मौतें | उड़ीसा हाईकोर्ट ने मेडिकल लापरवाही के लिए राज्य को मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया
COVID-19 मौतें | उड़ीसा हाईकोर्ट ने मेडिकल लापरवाही के लिए राज्य को मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने चिकित्सा लापरवाही के लिए एक राज्य द्वारा संचालित चिकित्सा सुविधा यानी वीर सुरेंद्र साईं इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (VIMSAR) को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले में दो COVID-19 रोगियों की मौत हो गई थी।चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस आर.के. पटनायक ने कहा,"वर्तमान मामले में न्यायालय भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत और संरक्षित पीड़ितों के स्वास्थ्य के अधिकार के उल्लंघन से निपट रहा है। पं. परमानंद कटारा बनाम भारत संघ और अन्य, 1989 एआईआर 2039 और...

सार्वजनिक स्थान पर अगर भगवान के नाम पर अतिक्रमण किया गया तो उसे भी हटाने का आदेश देंगे: मद्रास हाईकोर्ट
सार्वजनिक स्थान पर अगर 'भगवान' के नाम पर अतिक्रमण किया गया तो उसे भी हटाने का आदेश देंगे: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि "भले ही भगवान के नाम पर सरकारी स्थान पर अतिक्रमण हुआ हो तो अदालतें ऐसे अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश देंगी, क्योंकि सरकारी हित और कानून के शासन को सुरक्षित बनाए रखा जाना चाहिए।हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़क पर अरुलमिघू पालपट्टराई मरिअम्मन तिरुकोइल द्वारा किए गए अतिक्रमण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अतिक्रमण अब 'किससे या किस नाम से' होता है, इससे अदालतों को कोई सरोकार नहीं है।जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश निचली अपीलीय अदालत के फैसले के खिलाफ मंदिर द्वारा दायर दूसरी अपील पर...

Gujarat High Court
कारण बताओ नोटिस और जवाब का अवसर ना देने की ‌स्थिति में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद कर्मचारी‌ ‌की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में भ्रष्टाचार के लिए दोषी ठहराए गए एक कर्मचारी की बर्खास्तगी के आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि उसे इस तरह टर्मिनेट करने से पहले न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया था और न ही अपने पक्ष को रखने का अवसर दिया गया था।जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने नियोक्ता को परिणामी लाभ और बैकवेज के साथ कर्मचारी को उसके मूल पद पर बहाल करने का निर्देश दिया। फिर भी याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देने और दायर किए जा सकने वाले उत्तर पर विचार करने के बाद कानून के अनुसार नए सिरे से उचित आदेश...

कोर्ट के आदेशों की अवज्ञा स्पष्ट रूप से अवमानना है: पटना हाईकोर्ट ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की पुनर्नियुक्ति से संबंधित अवमानना मामले में दो शीर्ष अधिकारियों को फटकार लगाई
"कोर्ट के आदेशों की अवज्ञा स्पष्ट रूप से अवमानना है": पटना हाईकोर्ट ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की पुनर्नियुक्ति से संबंधित अवमानना मामले में दो शीर्ष अधिकारियों को फटकार लगाई

पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) सोमवार को बिहार के विधि सचिव प्रभारी ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और संयुक्त सचिव उमेश कुमार शर्मा के खिलाफ लोक अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की पुनर्नियुक्ति से संबंधित मामले में अपने आदेश की अवज्ञा के लिए अवमानना कार्यवाही शुरू की है।न्यायमूर्ति पीबी बजंथरी (Justice P.B.Bajanthri) की एकल पीठ ने कहा कि बिहार के विधि सचिव प्रभारी ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और संयुक्त सचिव उमेश कुमार शर्मा व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहेंगे।यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस कोर्ट के...

अगर जांच पूरी करने के लिए वैधानिक अवधि को 180 दिनों की समाप्ति से पहले धारा 36A(4) एनडीपीएस एक्ट के तहत बढ़ाया गया है तो कोई ‌डिफॉल्ट जमानत नहींः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
अगर जांच पूरी करने के लिए वैधानिक अवधि को 180 दिनों की समाप्ति से पहले धारा 36A(4) एनडीपीएस एक्ट के तहत बढ़ाया गया है तो कोई ‌डिफॉल्ट जमानत नहींः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में निर्धारित किया कि अगर गांजे की वाणिज्यिक मात्रा के अवैध कब्जे के मामले में जांच नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 36 ए (4) के तहत काफी पहले से दिए गए विस्तार के आधार पर 180 दिनों की वैधानिक सीमा से परे लंबित है तो धारा 167 (2) सीआरपीसी के तहत डिफॉल्ट जमानत नहीं दी जा सकती।कोर्ट ने कहा, "एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी की तारीख से 180 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होती है। उक्त अवधि 11.12.2021 तक समाप्त हो...

राजस्थान हाईकोर्ट
पैन और अन्य दस्तावेजों पर कानूनी अभिभावक के रूप में केवल माता का नाम प्राप्त करने में कठिनाई: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court), जयपुर ने हाल ही में पैन (PAN) और अन्य दस्तावेजों पर कानूनी अभिभावक के रूप में केवल अपनी मां का नाम प्राप्त करने में किसी व्यक्ति के सामने आने वाली कठिनाई को देखते हुए स्वत: संज्ञान लिया है।न्यायमूर्ति समीर जैन ने 08.03.2022 को द हिंदू में प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया है। न्यूज रिपोर्ट का शीर्षक था- "दस्तावेज़ों पर मां का नाम चाहिए? इसके लिए तैयार हो जाओ"। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी 08.03.2022 को कोर्ट की फाइल पर मामला दर्ज किया...

उत्पीड़न के संबंध में अस्पष्ट आरोप प्रथम दृष्टया आईपीसी धारा 498ए के तहत अपराध नहीं बनता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
उत्पीड़न के संबंध में अस्पष्ट आरोप प्रथम दृष्टया आईपीसी धारा 498ए के तहत अपराध नहीं बनता: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट (Andhra Pradesh High Court) ने हाल ही में फैसला सुनाया कि जब दहेज उत्पीड़न के मामले में पति के रिश्तेदारों के खिलाफ कोई विशेष आरोप नहीं लगाया जाता है, तो यह प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत अपराध नहीं बनता है।क्या है पूरा मामला?याचिकाकर्ताओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता यानी 498A (पति या पति के रिश्तेदार को क्रूरता के अधीन करने के लिए सजा), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 34 (सामान्य इरादा) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।याचिकाकर्ताओं को उनकी...

दिल्ली हाईकोर्ट ने नकली उत्पादों की जब्ती पर ट्रेडमार्क BOAT के मालिक को ₹15 लाख का हर्जाना देने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने नकली उत्पादों की जब्ती पर ट्रेडमार्क 'BOAT' के मालिक को ₹15 लाख का हर्जाना देने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कोर्ट द्वारा नियुक्त स्थानीय आयुक्तों द्वारा किए गए निरीक्षण के आधार पर विभिन्न नकली उत्पादों की जब्ती पर ट्रेडमार्क 'BOAT' के मालिक को 15 लाख रुपये का हर्जाना देने का निर्देश दिया।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि प्रतिवादियों ने ट्रेडमार्क और लोगो के साथ-साथ वादी के उत्पादों की पैकेजिंग का भी खुले तौर पर उल्लंघन किया।जब्त किए गए नकली उत्पादों की मात्रा को देखते हुए अदालत ने दो प्रतिवादियों एक और छह के खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला किया। जबकि प्रतिवादी नंबर एक के खिलाफ पांच लाख...

Gujarat High Court
गुजरात हाईकोर्ट ने 'लोक व्यवस्था' और 'कानून और व्यवस्था' के बीच के अंतर को समझाया; एनडीपीएस एक्ट के तहत बंदियों को रिहा किया

गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने कहा कि जब तक यह मामला बनाने के लिए सामग्री न हो कि व्यक्ति समाज के लिए खतरा बन गया है और सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ सकते हैं और सभी सामाजिक तंत्र को खतरे में डाल सकता है तब तक ऐसे व्यक्ति के बारे में यह नहीं कहा जा सकता है कि बंदी अधिनियम की धारा 3(1) के अर्थ में एक व्यक्ति है।न्यायमूर्ति एपी ठाकर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट 1988 में अवैध तस्करी की रोकथाम की धारा 3 (2) के तहत प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ता को हिरासत में लिए जाने...