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परिस्थितिजन्य सबूत न केवल आरोपी के अपराध के अनुरूप होना चाहिए, बल्कि उसकी बेगुनाही से भी असंगत होना चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में कहा कि परिस्थितिजन्य सबूत न केवल आरोपी के अपराध के अनुरूप होना चाहिए बल्कि उसकी बेगुनाही के साथ असंगत होना चाहिए।न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिड़ला और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने प्रतिवादी को आईपीसी की धारा 302, 34 के तहत आरोपों से बरी करने के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, बदायूं के आदेश के खिलाफ पीड़िता द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।यह देखते हुए कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है और अभियोजन द्वारा स्थापित की...
दिल्ली दंगे: कथित हेट स्पीच पर राजनेताओं की जांच के लिए याचिका की स्थिरता को चुनौती देने वाले आवेदन पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को 2020 के दिल्ली दंगों को भड़काने के लिए कथित रूप से नफरत फैलाने वाले भाषण (हेट स्पीच) देने के लिए विभिन्न राजनेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका की स्थिरता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।शेख मुजतबा द्वारा दायर उस याचिका में अभियोग आवेदन दायर किया गया, जिसमें भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग की गई।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भंभानी की...
पति दूसरी पत्नी को भरण-पोषण देने से इनकार नहीं कर सकता जब उसने पहले विवाह की सच्चाई को छुपाया हो: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने माना कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत एक व्यक्ति अपनी दूसरी पत्नी के भरण-पोषण के दायित्व से बच नहीं सकता है, जब उसने उससे अपने पहले विवाह की सत्यता को छिपा लिया था।निचली अदालत द्वारा पारित भरण-पोषण के आदेश को रद्द करने के लिए पति (याचिकाकर्ता) द्वारा किए गए आवेदन को खारिज करते हुए, जस्टिस रॉबिन फुकन की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा, "धारा 125 सीआरपीसी सामाजिक न्याय का एक उपाय है, जो महिलाओं, बच्चों और कमजोर माता-पिता जैसे समाज के कमजोर वर्ग की रक्षा के लिए अधिनियमित है और यह...
न्यायालयों को देरी में माफी देने के आवेदनों पर निर्णय करते समय पक्षकारों के आचरण की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए: मणिपुर हाईकोर्ट
मणिपुर हाईकोर्ट ने कहा कि अदालतों को पक्षकारों के आचरण की "पूरी तरह से" जांच करनी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी गैर-माजूदगी (पेश होने में विफलता) एक विलक्षण घटना है या ऐसा पहले भी होता रहा है।चीफ जस्टिस संजय कुमार की एकल न्यायाधीश पीठ ने याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार करते हुए कहा,"इस न्यायालय को यह सुनिश्चित करने के लिए पक्षकार के आचरण की उचित जांच करनी होगी कि क्या 'पेश होने में विफलता कोई विलक्ष घटना है या यह किसी पुरानी आदत की तरह पहले भी होता रहा है। जैसा...
[साइबर क्राइम] अगर एफआईआर दर्ज करने से इनकार करते हैं तो बिहार पुलिस को अदालती कार्यवाही की अवमानना का सामना करना पड़ेगा: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने सोमवार को बिहार पुलिस के अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि वे साइबर अपराध के मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार करते हैं, तो उन्हें अदालत की अवमानना की कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।न्यायमूर्ति संदीप कुमार की खंडपीठ ने अदालत के समक्ष दूरसंचार कंपनियों द्वारा किए गए सबमिशन पर ध्यान देने के बाद कहा कि कुछ थानों में साइबर अपराध से संबंधित एफ.आई.आर. के पंजीकरण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन थानों के प्रभारी अधिकारी एफ.आई.आर. दर्ज करने से इनकार कर...
'हर छात्र को 100% अंक देना परीक्षा के उद्देश्य को खत्म कर देगा': केरल हाईकोर्ट ने बोर्ड एग्जाम पैटर्न बदलने के लिए राज्य के प्रस्ताव को बरकरार रखा
केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार के राज्य बोर्ड एग्जाम के छात्रों के लिए एग्जाम पैटर्न को पिछले आदेश के विपरीत इस शैक्षणिक वर्ष में बदलने के प्रस्ताव में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।प्रस्तावित एग्जाम पैटर्न में 70% प्रश्न फोकस क्षेत्र से और शेष 30% गैर-फोकस क्षेत्र से होंगे। इसके अलावा, फोकस क्षेत्र और गैर-फोकस क्षेत्र के लिए 50% विकल्प प्रश्न होंगे।जस्टिस अमित रावल ने कहा कि इस तरह के प्रश्न पैटर्न और मूल्यांकन से बाकी लोगों में से सबसे योग्य की पहचान की जा सकती है।उन्होंने...
व्हाट्सएप ग्रुप का एडमिन ग्रुप मेंबर द्वारा की गई आपत्तिजनक पोस्ट के लिए जिम्मेदार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को एक उल्लेखनीय फैसले में कहा कि यदि व्हाट्सएप ग्रुप का कोई सदस्य ग्रुप में आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करता है तो ग्रुप के एडमिन को परोक्ष रूप से (vicariously) उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है।जस्टिस कौसर एडप्पागथ ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि आपराधिक कानून में परोक्ष दायित्व (Vicarious liabilty) केवल तभी तय किया जा सकता है, जब कोई कानून ऐसा निर्धारित करे।"एक परोक्ष आपराधिक दायित्व केवल कानून के प्रावधान के तहत ही तय किया जा सकता है, अन्यथा नहीं। किसी विशेष दंडात्मक कानून...
सुनिश्चित करें कि सभी पुलिस स्टेशनों में यौन उत्पीड़न पीड़ितों की सहायता के लिए वकीलों का पैनल हो: गुजरात हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में गुजरात राज्य के पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों में सुप्रीम कोर्ट के 1995 के फैसला में दिए गए निर्देशों के अनुसार यौन उत्पीड़न अपराधों के पीड़ितों की सहायता के लिए वकीलों का एक पैनल हो।जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस अनिरुद्ध पी. माई की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली घरेलू कामकाजी महिला मंच बनाम भारत संघ [(1995) 1 एससीसी 14] में निम्नलिखित 4 निर्देश जारी किए थे। इनका भी...
पति राजेश्वर सिंह लखनऊ की सरोजिनी नगर सीट से भाजपा की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ आईजी के ट्रांसफर की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सोमवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) खारिज कर दी, जिसमें पुलिस महानिरीक्षक (आईजी), लखनऊ रेंज लक्ष्मी सिंह को इस आधार पर ट्रांसफर करने की मांग की गई थी कि उनके पति राजेश्वर सिंह [पूर्व संयुक्त निदेशक ईडी] लखनऊ जिले की सरोजिनी नगर सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से चुनाव लड़ रहे हैं।मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने इसे छद्म मुकदमा करार देते हुए इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि दायर याचिका में महत्वपूर्ण विवरण का...
निजता | हाईकोर्ट ने कक्षाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाने को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली माता-पिता संघ और सरकारी स्कूल शिक्षक संघ द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में दिल्ली सरकार के सभी सरकारी स्कूलों में कक्षाओं के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने के फैसले को अनुच्छेद 14, 19(1)(ए) और संविधान के 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार, उसके शिक्षा विभाग, शिक्षा निदेशालय और पीडब्ल्यूडी से 30 मार्च तक जवाब मांगा।अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई के माध्यम से दायर की गई...
जाति प्रमाण पत्र को यह कहते हुए अस्वीकार नहीं किया जा सकता है कि दावेदार की जीवन शैली सामुदाय की पारंपरिक शैली से मेल नहीं खाती; एफिनिटी टेस्ट लिटमस टेस्ट नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले में याचिकाकर्ता को कोर्ट के समक्ष ही जाति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि आत्मीयता परीक्षण (एफिनिटी टेस्ट )जाति वैधता प्रमाण पत्र के लिए लिटमस टेस्ट नहीं है, जब 1927 से परिवार के सदस्यों के दस्तावेज में एक ही जाति का उल्लेख होता रहा है।औरंगाबाद बेंच के जस्टिस एसवी गंगापुरवाला और जस्टिस एसजी डिगे की खंडपीठ ने हाल ही में कहा,"हमारे विचार में, यदि कोई दावा करता है कि वह विशेष जाति से संबंधित है तो कोई यह उम्मीद नहीं कर सकता है कि ऐसा व्यक्ति अपने...
'यूनियन ऑफ इंडिया के साथ सुनियोजित धोखाधड़ी की गई': दिल्ली हाईकोर्ट ने आयात शुल्क से बचने के लिए लग्जरी कार की जब्ती के खिलाफ दायर याचिका पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने आयात शुल्क का भुगतान न करने पर एक लग्जरी कार की जब्ती और सीमा शुल्क अधिनियम के तहत कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।यह देखते हुए कि याचिकाकर्ता ने शुल्क-मुक्त आयात की शर्तों का उल्लंघन किया था और कथित रूप से एंट्री बिल भी जाली था, चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा, "यह एक बिल्कुल पूर्व नियोजित, अच्छी तरह से डिज़ाइन किया गया आयात और यूनियन ऑफ इंडिया के साथ धोखाधड़ी है। एक संप्रभु निकाय...
महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक तीन मार्च तक के लिए ईडी की हिरासत में
महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री और राकांपा नेता नवाब मलिक को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को तीन मार्च तक के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की की हिरासत में भेज दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के परिवार के सदस्यों के साथ कथित संपत्ति सौदों के लिए नवाब मलिक को आज गिरफ्तार किया था।मलिक को आज शाम मुंबई सत्र न्यायालय में विशेष न्यायाधीश राहुल रोकाडे के समक्ष पेश किया गया। ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल सिंह ने 15 दिन की हिरासत मांगी।मलिक की ओर से वरिष्ठ...
पूर्व में दी गई अंतरिम सुरक्षा अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा, "केवल लंबे समय तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान करना आरोपी को अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं होगा। वह भी तब जब आवेदक को अग्रिम जमानत के लिए अयोग्य घोषित किया जाता है।"जस्टिस इलेश जे वोरा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307, 397, 452, 324, 323, 143, 147, 148, 504 और धारा 506 (2) के तहत अपराधों के लिए प्राथमिकी के संबंध में सीआरपीसी की धारा 438 के तहत एक अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे।आवेदक ने सात लोगों के साथ वॉशबेसिन पाइप से लैस धातु के बोल्ट से पीड़ित आनंद पर कथित रूप से हमला...
हिजाब केस - शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक प्रतीकों की अनुमति धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ : कॉलेजों और शिक्षकों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा
कर्नाटक हाईकोर्ट की फुल बेंच ने मुस्लिम छात्राओं द्वारा दायर याचिकाओं में प्रतिवादियों को हिजाब (हेडस्कार्फ़) पहनकर उन्हें प्रवेश करने से रोकने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी। फुल बेंच के समक्ष सुनवाई का आज नौवां दिन था।सरकारी पीयू कॉलेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एस नागानंद , इसके प्राचार्य और व्याख्याताओं ने आज मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी , न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित और न्यायमूर्ति जेएम खाजी की खंडपीठ को बताया कि याचिकाकर्ताओं को दिसंबर 2021 तक ड्रेस कोड...
हिजाब बैन मामला - धार्मिक पोशाक पर प्रतिबंध लगाने का आदेश डिग्री कॉलेजों और पीयू कॉलेजों पर लागू, जहां यूनिफॉर्म निर्धारित वहां केवल स्टूडेंट पर लागू : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 10 फरवरी को उसके द्वारा पारित अंतरिम आदेश, जो कक्षाओं में स्टूडेंट द्वारा धार्मिक पोशाक पहनने पर रोक लगाता है, डिग्री कॉलेजों और प्री-यूनिवर्सिटी (पीयू) कॉलेजों दोनों पर लागू होगा, जहां वर्दी यूनिफॉर्म लागू की गई है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका आदेश केवल स्टूडेंट पर लागू होता है, शिक्षकों पर नहीं।मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की पूर्ण पीठ ने हिजाब प्रतिबंध मामले में आज की सुनवाई के अंत में यह...
किसी भी व्यक्ति को दो जन्म प्रमाण पत्र रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि किसी व्यक्ति को दो जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।आगे कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान न केवल नाम और माता-पिता से बल्कि जन्म तिथि से भी स्थापित होती है। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने कहा, "दो अलग-अलग जन्म तिथियों वाले दो जन्म प्रमाणपत्रों को जारी रखने का मतलब यह होगा कि एक व्यक्ति दो अलग-अलग व्यक्तियों के रूप में पेश हो सकता है। इस तरह की त्रुटि को कायम रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।" अदालत 24 सितंबर, 2013 को...
जुहू भूमि अधिग्रहण विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को अमिताभ बच्चन का प्रतिनिधित्व तय करने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को अभिनेता अमिताभ बच्चन और उनकी पत्नी जया बच्चन को सड़क चौड़ीकरण के लिए जुहू भूमि के एक हिस्से के अधिग्रहण के नोटिस पर 11 सप्ताह के लिए राहत दी।जुहू में यह वही प्लॉट है जिस पर अभिनेता अमिताभ बच्चन का बंगला प्रतीक्षा बना है।जस्टिस आरडी धानुका और जस्टिस एसएम मोदक की खंडपीठ ने नगर आयुक्त को 17 फरवरी, 2022 को परिवार द्वारा छह सप्ताह के भीतर किए गए प्रतिनिधित्व पर फैसला करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता या आयुक्त की जरूरत है तो व्यक्तिगत सुनवाई की जा सकती...
सरकारी चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट से 141 बच्चे लापता: कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सरकारी स्वामित्व वाले चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट से लापता 141 बच्चों का पता लगाने के लिए की गई जांच की एक रिपोर्ट दो सप्ताह के समय में रिकॉर्ड में रखे।चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस सूरज गोविंदराज की खंडपीठ ने राजन्ना के सी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए कहा,"एजीए को मामले में निर्देश लेने और 141 लापता बच्चों का पता लगाने के लिए की गई जांच की रिपोर्ट को रिकॉर्ड करने के लिए दो सप्ताह का समय...
"बुहत अधिक असंवेदनशील और कुटिल व्यक्ति": इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित तौर पर प्रेमिका की अंतरंग तस्वीरें उसके परिवार को भेजने वाले व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसने कथित तौर पर अपने परिवार के सदस्यों के साथ अपनी प्रेमिका की अंतरंग तस्वीरें साझा कीं।कोर्ट ने कहा कि यह आवेदक द्वारा पीड़िता के विश्वास के साथ विश्वासघात का एक विशेष मामला है। न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह भी देखा कि पीड़िता ने आरोपी को कुछ विश्वास और समझ के तहत उन तस्वीरों को रखने की अनुमति दी थी, लेकिन आवेदक/आरोपी ने उसकी पीठ में छुरा घोंपा और उसके साथ धोखा किया।क्या है...



















