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केरल हाईकोर्ट
सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय हड़ताल में शामिल नहीं हो सकते : केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को सरकारी कर्मचारियों को केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ चल रही दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल में भाग लेने से रोक दिया। साथ ही राज्य सरकार को विरोध को कानूनी प्रक्रिया के रूप में न मानने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस एस मणिकुमार और जस्टिस शाजी पी शैली की एक खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों की चल रही हड़ताल अवैध है और राज्य को निर्देश दिया कि वह इसे प्रतिबंधित करने के निर्देश जारी करे। कोई भी सरकारी कर्मचारी हड़ताल में भाग नहीं लेगा।यह घटनाक्रम...

एसोसिएशन की ओर से दायर रिट याचिका तभी सुनवाई योग्य, जब कोर्ट संतुष्ट हो कि सभी सदस्य मुकदमे से बंधे हुए: एमपी हाईकोर्ट
एसोसिएशन की ओर से दायर रिट याचिका तभी सुनवाई योग्य, जब कोर्ट संतुष्ट हो कि सभी सदस्य मुकदमे से बंधे हुए: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक एसोसिएशन की रिट याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उसके सदस्यों द्वारा पारित प्रस्ताव में न तो यह निर्दिष्ट किया गया था कि एसोसिएशन को उनकी ओर से याचिका दायर करने के लिए अधिकृत किया जा रहा था और न ही स्पष्ट किया गया था कि क्या सदस्य याचिका में दिए गए निर्णय का पालन करेंगे। हाईकोर्ट ने उक्त निर्णय के साथ एकल न्यायाधीश के निर्णय की पुष्टि की।चीफ जस्टिस रवि मलीमठ और जस्टिस पीके कौरव अपीलकर्ता/एसोसिएशन द्वारा दायर एक रिट अपील से निपट रहे थे, जो न्यायालय की...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
'याचिकाकर्ता की उम्र सीमा तक पहुंच गई है': बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को प्रतिवादी के स्थानांतरण याचिका के बावजूद बुजूर्ग की जिरह को पूरा करने का निर्देश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक वादी की परिपक्व उम्र को महत्व देते हुए स्मॉल कॉज़ कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह 92 वर्षीय व्यक्ति की जिरह पूरी करे, भले ही उस अदालत के प्रधान न्यायाधीश के समक्ष दूसरे पक्ष द्वारा दायर स्थानांतरण आवेदन लंबित हो।जस्टिस एएस गडकरी ने इस महीने की शुरुआत में याचिकाकर्ता त्रिलोक सिंह गांधी की उम्र को ध्यान में रखते हुए आदेश प्राप्त होने के दो महीने के भीतर जिरह पूरी करने का निर्देश दिया और प्रतिवादी को मुकदमे में सहयोग करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने आदेश में कहा, "यह स्पष्ट किया...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
अनुच्छेद 226 - हाईकोर्ट को रिट याचिका में उठाए गए आधारों/मुद्दों पर विचार करना होता है और तर्कयुक्त आदेश पारित करना होता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिट याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों/आधारों का ‌निस्तारण करना और उसके बाद एक तर्कपूर्ण आदेश पारित करना अदालत का कर्तव्य है।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की टीम ने कहा, "जब संविधान हाईकोर्ट को राहत देने की शक्ति प्रदान करता है तो उचित मामलों में ऐसी राहत देना कोर्ट का कर्तव्य बन जाता है और यदि पर्याप्त कारणों के बिना राहत से इनकार कर दिया जाता है तो अदालतें अपना कर्तव्य निभाने में विफल हो जाएंगी।"अदालत बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर विचार कर रही...

पत्नी द्वारा केवल आपराधिक मामला दर्ज करवाना और अलग घर की मांग क्रूरता नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट ने तलाक की डिक्री खारिज की
पत्नी द्वारा केवल आपराधिक मामला दर्ज करवाना और अलग घर की मांग 'क्रूरता' नहीं : कर्नाटक हाईकोर्ट ने तलाक की डिक्री खारिज की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि केवल इसलिए कि पत्नी एक अलग घर की मांग कर रही थी और उसे वैवाहिक घर छोड़कर अपनी बहन और माता-पिता के घर जाने की आदत थी, इसे पति द्वारा तलाक की डिक्री मांगने के उद्देश्य से 'क्रूरता' नहीं कहा जा सकता है। जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस एस विश्वजीत शेट्टी की खंडपीठ ने यह भी कहा कि, ''विवाह की असाध्य विफलता के आधार पर तलाक का डिक्री केवल भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट न्यायालय द्वारा दी जा सकती है। ऐसी राहत अन्य...

स्पष्ट अवमानना: पटना हाईकोर्ट ने कानून विभाग के दो अधिकारियों को एक लोक अभियोजक की पुनर्नियुक्ति के लिए दिए आदेश की अवहेलना करने पर कड़ी फटकार लगाई
"स्पष्ट अवमानना": पटना हाईकोर्ट ने कानून विभाग के दो अधिकारियों को एक लोक अभियोजक की पुनर्नियुक्ति के लिए दिए आदेश की अवहेलना करने पर कड़ी फटकार लगाई

पटना हाईकोर्ट ने लोक अभियोजक की पुनर्नियुक्ति संबंधित मामले में बिहार लॉ सेक्रेटरी-इन-चार्ज ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और ज्वाइंट सेक्रेटरी उमेश कुमार शर्मा के खिलाफ आदेश की अवहेलना करने पर सोमवार को अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की।जस्टिस पीबी बजथरी की एकल पीठ ने सेक्रेटरी ज्योति स्वरूप श्रीवास्तव और ज्वाइंट सेक्रेटरी उमेश कुमार शर्मा, लॉ ‌डिपार्टमेंट, बिहार सरकार को अवमानना ​​कार्यवाही का सामना करने के लिए अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।यह मामला 12 दिसंबर, 2021 को पार‌ित कोर्ट के आदेश की...

Gujarat High Court
पत्नी के एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का आरोप संदेहास्पद और इससे बच्चों को कोई नुकसान नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने पिता को बच्चों की कस्टडी देने से इनकार किया

"हाईकोर्ट अधीक्षण की अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए कानून या तथ्य की त्रुटियों को ठीक करने के लिए हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, केवल इसलिए कि ट्रिब्यूनल या उसके अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा लिया गया एक अलग दृष्टिकोण एक संभावित दृष्टिकोण है।"गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने यह टिप्पीण अनुच्छेद 226 और 227 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने बच्चों की अंतरिम कस्टडी सौंपने की प्रार्थना की, जिसे फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था। याचिकाकर्ता ने मुख्य रूप से तर्क...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
विभाजन वाद दायर करने भर से, जबकि उसे डिफॉल्ट रूप से खारिज कर दिया गया था, अविभाजित हिंदू परिवार से नाबालिग का विच्छेद हो जाता है? बॉम्बे हाईकोर्ट विचार करेगा

बॉम्बे हाईकोर्ट कानून की एक जटिल स्थिति पर विचार करेगा कि क्या नाबलिग की ओर से विभाजन वाद दायर करना हिंदू अविभाजित परिवार से संबंध विच्छेद करना होगा, भले ही मुकदमा अंततः गैर-अभियोजन के कारण खारिज कर दिया गया हो, या उस नाबालिग को हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) का हिस्सा माना जाए।बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष यह सवाल एक ऐसे मामले में जहां नाबालिग ने मार्च 2020 में वयस्क होने के बाद अपने माता-पिता द्वारा एचयूएफ के एक हिस्से के रूप में निष्पादित गिफ्ट डीड को चुनौती दी। यह गिफ्ट डीड तब निष्पादित की गई थी,...

दिल्ली हाईकोर्ट ने एससी कॉलेजियम की दिसंबर, 2018 की बैठक के विवरण से इनकार करते हुए सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने एससी कॉलेजियम की दिसंबर, 2018 की बैठक के विवरण से इनकार करते हुए सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को 12 दिसंबर, 2018 को हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा लिए गए निर्णयों के संबंध में मांगी गई जानकारी से इनकार करने वाले केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया।याचिकाकर्ता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण की सुनवाई के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा ने आदेश सुरक्षित रख लिया।भारद्वाज ने 12 दिसंबर, 2018 को एससी की कॉलेजियम बैठक के बारे में जानकारी मांगने के लिए एक आरटीआई आवेदन दायर किया। इसमें...

सीजेआई यूयू ललित
मुफ्त कानूनी सहायता का मतलब खराब कानूनी सहायता नहीं है, इसका मतलब गुणवत्तापूर्ण सेवा होना चाहिएः जस्टिस यूयू ललित

सुप्रीम कोर्ट के जज और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस उदय उमेश ललित ने मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करते हुए गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया है।जस्टिस ललित ने कानूनी सेवा प्राधिकरण के पास आने वाले मामलों के बेहद कम प्रतिशत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "मुफ्त कानूनी सहायता का मतलब खराब कानूनी सहायता नहीं है, मुफ्त कानूनी सहायता का मतलब गुणवत्तापूर्ण सेवा होना चाहिए"।आंकड़ों का हवाला देते हुए जस्टिस ललित ने कहा कि कानूनी सेवा प्राधिकरण मुकदमेबाजी...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में 6800 अतिरिक्त सहायक शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाने के कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट (डिवीजन बेंच) ने हाल ही में 27 जनवरी, 2022 के एकल न्यायाधीश के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य में प्राथमिक सहायक शिक्षक के रूप में 6800 अतिरिक्त उम्मीदवारों को नियुक्त करने के निर्णय पर रोक लगा दी है।इसके साथ, न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव- I की पीठ ने 27 जनवरी, 2022 के एकल पीठ के आदेश का समर्थन किया, जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया था कि यूपी सरकार उसी के संबंध में विज्ञापन जारी किए बिना...

केवल धारा 33(5), पोक्सो एक्ट के कारण अभियुक्त को जिरह के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
केवल धारा 33(5), पोक्सो एक्ट के कारण अभियुक्त को जिरह के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी द्वारा जिरह के लिए एक बाल गवाह को बुलाने से केवल यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 33(5) के कारण इनकार नहीं किया जा सकता है। विशेष रूप से, प्रावधान के तहत विशेष न्यायालय के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बच्चे (अभियोजन पक्ष) को अदालत में गवाही देने के लिए बार-बार ना बुलाया जाए।कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा और जस्टिस आरसी खुल्बे ने कहा,"... विद्वान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश / एफटीएससी की ओर से बाल गवाह को फिर से बुलाने के आवेदन...

गुजरात हाईकोर्ट ने अंतरजातीय जोड़े को सुरक्षा दी; कानून हाथ में लेने के खिलाफ परिवार वालों और खाप पंचायतों को सावधान किया
गुजरात हाईकोर्ट ने अंतरजातीय जोड़े को सुरक्षा दी; कानून हाथ में लेने के खिलाफ परिवार वालों और खाप पंचायतों को सावधान किया

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अंतरजातीय जोड़े को पुलिस सुरक्षा प्रदान करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के कानून अपने हाथ में लेने के किसी भी प्रयास से पुलिस सख्ती से निपटेगी।जस्टिस मौना भट्ट की खंडपीठ ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि अपने परिवार द्वारा कस्टडी में रखी गई महिला अपने परिवार की कड़ी प्रतिक्रियाओं से डर गई है। इसके परिणामस्वरूप एक हलफनामा दायर किया। इसमें दावा किया गया कि उसका आवेदक-पति ने धोखे से अपहरण कर लिया है और वह अपनी गरिमा और सम्मान को बनाए रखने के लिए अपने परिवार के साथ रहना...

मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को धारा 73 सीआरपीसी के तहत फरार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया

तिरुमंगलम आन्ट्रप्रनर (उद्यमी) एक्सटॉर्शन केस में मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों सहित फरार आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपी गिरफ्तारी से बच रहे हैं और जांच अधिकारी के पास एकमात्र उपाय सीआरपीसी की धारा 73 के तहत मजिस्ट्रेट से गैर-जमानती वारंट प्राप्त करना है।जस्टिस एडी जगदीश चंडीरा पुलिस उपाधीक्षक, सीबीसीआईडी ​​द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें गैर-जमानती वारंट जारी करने की याचिका को खारिज करने के मजिस्ट्रेट के आदेश को...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
अगर एक समान परिस्थिति वाले वयस्क अपराधी को जमानत दी गई है तो एक किशोर को जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने दोहराया कि एक किशोर को जमानत पर रिहा होने का अधिकार है, जहां एक समान परिस्थिति वाले वयस्क अपराधी को पहले ही वह स्वतंत्रता दी जा चुकी है।न्यायमूर्ति शमीम अहमद (Justice Shamim Ahmed) की खंडपीठ ने आगे कहा कि एक बार वयस्क सह-आरोपी को जमानत दी गई है, तो किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12 की उप-धारा 1 के तहत प्रावधान की आवश्यकताओं के संदर्भ में किशोर के मामले का अतिरिक्त परीक्षण करने का कोई औचित्य नहीं होगा।यह ध्यान दिया जा सकता है कि उक्त प्रावधान में यह...

एनआई एक्ट-नोटिस और भुगतान का अवसर मिलने के बावजूद चेक राशि का भुगतान न करने वाला  व्यक्ति आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्यः दिल्ली हाईकोर्ट
एनआई एक्ट-नोटिस और भुगतान का अवसर मिलने के बावजूद चेक राशि का भुगतान न करने वाला व्यक्ति आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्यः दिल्ली हाईकोर्ट

इस बात पर जोर देते हुए कि जब एक बार कोई व्यक्ति चेक जारी करता है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि नोटिस जारी करने और चेक की राशि का भुगतान करने का अवसर दिए जाने के बावजूद भी चेक की राशि का भुगतान नहीं करने वाला व्यक्ति आपराधिक मुकदमे का सामना करने और उसके परिणाम भुगतने के लिए बाध्य है। यह देखते हुए कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट चेक जारी करने वाले व्यक्ति को पर्याप्त अवसर प्रदान करता है, जस्टिस रजनीश भटनागर ने कहा कि, ''एक बार जब कोई व्यक्ति चेक जारी कर देता...

कलकत्ता हाईकोर्ट
सीआरपीसी धारा 498ए के तहत दर्ज आपराधिक शिकायत के बारे में भली नीयत में पति के सीनियर को लिखा गया पत्र आपराधिक मानहानि का गठन नहीं करता है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि पति के सीनियर को भली नीयत से पत्र लिखकर पति के खिलाफ प्रताड़ना के आरोप में दर्ज अपराधिक मामले में बारे में जानकारी देना आईपीसी की धारा 499 के तहत आपराधिक मानहानि नहीं होगी।मौजूदा मामले में पत्नी (याचिकाकर्ता) ने 24 मई 1997 को इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंधक को पत्र लिखकर बताया था कि उसके पति, जो ओवरसीज बैंक के सहायक प्रबंधक थे, उसने उसे प्रताड़ित किया और उसे वैवाहिक घर से बाहर निकाल दिया। पति के खिलाफ धारा 498ए सीआरपीसी (क्रूरता) के तहत एक आपराधिक मामला शुरू किया गया...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
जिला जज के रूप में नियुक्ति के लिए अधिवक्ता को आवेदन की तिथि पर सात साल तक 'लगातार प्रैक्टिस' जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 233 (2) के अनुसार न्यायिक अधिकारी/जिला जज के रूप में नियुक्ति पाने के लिए एक अधिवक्ता को (बिना किसी रुकावट के) कम से कम 7 वर्षों तक निरंतर अभ्यास में रहना होगा...।उल्लेखनीय है कि संविधान का अनुच्छेद 233 जिला जजों की नियुक्ति से संबंधित है और इसके उपखंड (2) में कहा गया है कि एक व्यक्ति, जो पहले से संघ या राज्य की सेवा में नहीं है, और यदि वह कम से कम सात साल से एक एडवोकेट या प्लीडर के रूप में अभ्यासरत है और नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट ने...

कलकत्ता हाईकोर्ट
'यौन पीड़िता के सबूतों को वैसे संदेह के साथ परीक्षण की जरूरत नहीं, जैसे कि किसी सह-अपराधी के सबूतों के: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा

कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह मानते हुए कि यौन पीड़िता का एक ही सबूत दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त है, कहा कि पीड़िता के सबूतों को वैसे ही संदेह के साथ परीक्षण करने की जरूरत नहीं है, जैसे कि किसी सह-अपराधी के। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस केसांग डोमा भूटिया की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न फैसलों में कहा है कि गंभीर अपवादों को छोड़कर, यौन पीड़िता का सबूत सजा के लिए पर्याप्त है।कोर्ट ने कहा, "एक लड़की, जो यौन उत्पीड़न की शिकार है, अपराध की सहभागी नहीं है, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति की वासना की...