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केन्द्रीय विद्यालय : एडमिशन के लिए न्यूनतम आयु छह वर्ष के खिलाफ माता-पिता ने हाईकोर्ट का रुख किया
बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक रिट याचिका दायर की गई। इस याचिका में केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश मानदंड को इस आधार पर चुनौती दी गई कि वह कक्षा एक में एक बच्चे के प्रवेश के लिए न्यूनतम छह वर्ष की आयु निर्धारित करता है।याचिकाकर्ता पांच साल की छात्रा है। उसने अपने पिता विष्णु पीएस लंगावत के माध्यम से अदालत का दरवाजा खटखटाया।पांच साल के बच्चे के पिता की ओर से दाखिले के मानदंड को चुनौती देने वाले एक एनजीओ सोशल ज्यूरिस्ट द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष भी इसी तरह की याचिका दायर की गई।बॉम्बे हाईकोर्ट के...
सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए फिटनेस| मेडिकल बोर्ड की राय प्राइवेट/सरकारी डॉक्टरों की राय पर प्रभावी होगी; जब तक दुर्भावना न हो अनुच्छेछ 226 के तहत कोई हस्तक्षेप नहींः दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि सशस्त्र बलों में चयन के लिए उम्मीदवारों को पूरी तरह से फिट होना चाहिए और उन्हें इस संबंध में संदेह का कोई लाभ नहीं दिया जा सकता है।कोर्ट ने आगे कहा कि सशस्त्र बलों के डॉक्टर, जो ड्यूटी की मांगों और उन्हें पूरा करने के लिए आवश्यक शारीरिक मानकों से अच्छी तरह वाकिफ हैं, उनकी चिकित्सा राय को खारिज नहीं किया जा सकता है और वास्तव में, उनकी राय निजी या यहां तक कि सरकारी डॉक्टर की अन्य राय पर प्रबल होगी।न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया कि यह नहीं कहा जा सकता है कि बलों में...
अगर आधिकारिक गवाहों के साक्ष्य भरोसे को प्रेरित करते हों तो पक्षदोही हो चुके स्वतंत्र गवाहों की ओर से पुष्टि ना भी हो तो अभियोजन का मामला कमजोर नहीं होगाः कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कि यदि आधिकारिक गवाहों के साक्ष्य विश्वास को प्रेरित करते हैं तो स्वतंत्र गवाहों द्वारा पुष्टि का ना होना, जो पक्षद्रोही हो गए हैं, अभियोजन मामले को कमजोर नहीं करेगा जस्टिस बिवास पटनायक और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच नकली नोटों की जब्ती से जुड़े एक मामले पर फैसला सुना रही थी।कोर्ट ने रेखांकित किया, "यह तय कानून है कि अगर आधिकारिक गवाहों के सबूत स्पष्ट, आश्वस्त और विश्वास को प्रेरित करते हैं तो स्वतंत्र गवाहों से समर्थन की कमी जो पक्षद्रोही हो गए हैं,...
आर्टिकल 226 के तहत राहत का हकदार नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की नागरिकता पर संदेह करने वाले UIDAI द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में हस्तक्षेप करने से इनकार किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक हिंदू व्यक्ति की नागरिकता के विवाद में हस्तक्षेप करने से यह देखते हुए इनकार कर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कोई राहत नहीं दी जा सकती है। व्यक्ति का दावा था कि उसने अपना धर्म इस्लाम से बदलकर हिंदू किया है।याचिकाकर्ता ने 27 जनवरी, 2022 को यूआईडीएआई द्वारा जारी एक कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि अगर वह भारत में अपनी नागरिकता या निवास को प्रमाणित करने वाले किसी भी निर्णय को प्रदान करने में विफल रहता है तो उसका आधार कार्ड निष्क्रिय कर...
एनडीपीएसः आरोप पत्र दाखिल करने में वैधानिक अवधि से आगे विस्तार आरोपी को सुनवाई का मौका दिए बिना नहीं दिया जा सकता: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने दोहराया है कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (एनडीपीएस एक्ट) के तहत अपराधों से संबंधित मामलों में चार्जशीट दायर करने के लिए वैधानिक अवधि से परे समय बढ़ाने से पहले नोटिस जारी करना और आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई प्रदान करना अनिवार्य है।राज्य के तर्कों को खारिज करते हुए, जस्टिस शशिकांत मिश्रा की एकल न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा, "... यह स्पष्ट है कि 27.01.2021 को विद्वान विशेष न्यायाधीश ने अभियुक्तों को पेश किए बिना और उन्हें मामले में अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना...
नवाब मलिक की गिरफ्तारी: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर ईडी से सात मार्च तक जवाब मांगा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को नवाब मलिक द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Plea) पर सुनवाई सात मार्च तक स्थगित कर दी। इस याचिका में उनकी गिरफ्तारी और उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेजने के आदेश को चुनौती दी गई है।जस्टिस सुनील शुक्रे और जस्टिस जीए सनप की खंडपीठ ने ईडी को इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा। कोर्ट ने देखा कि मलिक की दूसरी रिमांड की अवधि गुरुवार को पूरी होने वाली है, इससे उनके या अभियोजन पक्ष के अधिकारों और दलीलों पर...
कोटपुतली रोड पर अवैध अतिक्रमण: राजस्थान हाईकोर्ट ने ढांचा गिराने की सार्वजनिक नोटिस रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने नगर पालिका द्वारा जारी किए गए सार्वजनिक नोटिस को रद्द कर दिया है, जिसमें कोटपुतली रोड पर रहने वाले सभी लोगों को अपने ढांचे को हटाने के लिए कहा गया है।मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी और न्यायमूर्ति सुदेश बंसल की खंडपीठ ने आदेश दिया,"कोई भी अपीलकर्ता-मूल याचिकाकर्ता, जिसे उक्त नोटिस दिनांक 14/15.12.2021 प्राप्त हुआ हो, अधिकारियों के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकता है। यदि कोई आपत्ति नहीं की जताई जाती है, तो वह आज से 30 दिनों की अवधि के भीतर किया जा सकता है। ...
एफआईआर रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका में आरोपी के बचाव पर विचार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका पर विचार करते समय आरोपी के बचाव पर ध्यान नहीं दिया जा सकता।जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा और जस्टिस दीपक वर्मा की खंडपीठ ने कालीचरण द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए उक्त टिप्पणी की। इस याचिका में आरोपित एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया।दरअसल, याचिकाकर्ता कालीचरण पर मृतका को परेशान करने, जिंदा जलाकर उसकी हत्या करने का...
प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण | मजिस्ट्रेट शिकायत का संज्ञान तब तक नहीं ले सकते, जब तक कि शिकायत सरकार द्वारा अधिसूचित 'उचित प्राधिकारी' ने दायर नहीं की हैः कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया है कि प्री-कॉसेप्शन एंड प्री नैटल डालग्नोस्टिक टेक्निक (प्रॉहिबिशन ऑफ सेक्स सेलेक्शन) एक्ट, 1994 के सेक्शन 28 के तहत, मजिस्ट्रेट कोर्ट किसी शिकायत का संज्ञान नहीं ले सकती, जब तक कि इसे ' केंद्र या राज्य सरकार की ओर से अधिसूचित 'उपयुक्त प्राधिकारी' ने पंजीकृत ना किया हो।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की सिंगल जज बेंच ने हाल ही में तालुका स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर धोंडीबा अन्ना जाधव और गोकक स्थित श्री धोंडीडा अन्ना जाधव मेमोरियल अस्पताल चलाने वाले...
'नियोक्ता ने कर्मचारी को उसकी पेंशन से वंचित करके उसके पैसे का दुरुपयोग किया': मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य परिवहन निगम की खिंचाई की
मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने हाल ही में राज्य परिवहन निगम की 2009 के बाद से बकाया के साथ-साथ 75 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति के पेंशन पर रोक लगाने के फैसले की आलोचना की है।अपीलकर्ता निगम की कार्रवाई को मनमाना बताते हुए जस्टिस एस वैद्यनाथन और मोहम्मद शफीक की पीठ ने कहा कि पेंशन की पात्रता पहले से ही श्रम न्यायालय द्वारा तय की गई थी और उच्च न्यायालय के साथ-साथ शीर्ष अदालत द्वारा पुष्टि की गई थी। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे परिदृश्य में, पेंशन का भुगतान नहीं करना उचित नहीं है, जिसका पूर्व...
शराब की एमआरपी पर छूट पर रोक लगाने वाले दिल्ली सरकार के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एक याचिका दायर कर दिल्ली सरकार द्वारा शहर में शराब के एमआरपी पर खुदरा लाइसेंसधारियों द्वारा छूट या रियायतें देने पर रोक लगाने के आदेश को चुनौती दी गई है।एडवोकेट संजय एबॉट, एडवोकेट तन्मया मेहता और एडवोकेट हनी उप्पल के माध्यम से दायर याचिका दिल्ली सरकार के उत्पाद, मनोरंजन और विलासिता कर विभाग द्वारा पारित 28 फरवरी, 2022 के आदेश को चुनौती देती है।वैध L7Z लाइसेंस रखने वाले पांच निजी खिलाड़ियों द्वारा याचिका दायर की गई है। याचिका पिछले साल जून में दिल्ली सरकार...
यस बैंक लोन धोखाधड़ी मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने अवंथा समूह के प्रमोटर गौतम थापर की जमानत याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को यस बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में अवंथा ग्रुप के प्रमोटर गौतम थापर द्वारा दायर जमानत याचिका खारिज कर दी।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने इस महीने की शुरुआत में उक्त याचिका को सुरक्षित रखने के बाद आदेश सुनाया। कोर्ट ने मामले में थापर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी को सुना। प्रवर्तन निदेशालय का प्रतिनिधित्व कर रहे अमित महाजन ने जमानत याचिका का विरोध किया।थापर को पिछले साल अगस्त में यस बैंक से लोन के रूप में मिले धन के हेराफेरी के आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार किया...
निलंबित बोर्ड निदेशक के पास आईबीसी के तहत आरपी को बदलने की कोई शक्ति नहीं: एनसीएलएटी, चेन्नई
एनसीएलएटी, चेन्नई ने अनिल कुमार ओझा बनाम चंद्रमौली रामसुब्रमण्यम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल ऑफ एसएलओ इंडस्ट्रियल लिमिटेड और अन्य के मामले में यह माना कि निलंबित बोर्ड निदेशक के पास आईबीसी के तहत एक समाधान पेशेवर नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसा करने की शक्ति केवल लेनदारों की समिति (सीओसी) और फिर निर्णायक प्राधिकरण (एए) में निहित है।खंडपीट में न्यायमूर्ति एम. वेणुगोपाल, न्यायिक सदस्य और कांति नरहरि, टेक्निकल टीम शामिल थी। NCLAT ने अपीलकर्ता द्वारा IBC की धारा 60(5) के तहत दायर अपील को खारिज...
[17-करोड़ की धोखाधड़ी का मामला] "निजी लाभ के लिए जनता के धन के दुरुपयोग ने देश को बुरी तरह प्रभावित किया": इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 करोड़ रूपये के जनता के धन की धोखाधड़ी के संबंध में आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि निजी लाभ के लिए सार्वजनिक कार्यालय का दुरुपयोग दायरा और पैमाने पर बढ़ गया है। यह देश को बुरी तरह प्रभावित करता है। इससे होने वाला भ्रष्टाचार राजस्व को कम करता है। आर्थिक गतिविधि को धीमा करता है और आर्थिक विकास को रोकता है।जस्टिस राजीव गुप्ता की पीठ दुर्गा दत्त त्रिपाठी द्वारा दायर सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर आवेदन पर सुनवाई कर रही थी।...
18 साल जेल में रहने के आधार पर धारा 57 आईपीसी का लाभ नही मिलता, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के दोषियों की अपील खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2003 की हत्या के मामले में 5 दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए हाल ही में कहा कि धारा 57 आईपीसी के तहत प्रदान किया गया लाभ अपीलकर्ताओं को केवल इस आधार पर नहीं दिया जा सकता है कि वे लगभग 18 साल से जेल में रहे हैं।मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद, जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस ओम प्रकाश VII की खंडपीठ अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वकील के तर्क से असहमत रही कि उन्हें धारा 57 आईपीसी का सहारा लेकर रिहा किया जा सकता है क्योंकि वे पहले ही 18 साल से...
केरल हाईकोर्ट ने मीडिया वन चैनल पर प्रसारण प्रतिबंध को बरकरार रखा, एकल पीठ के फैसले के खिलाफ अपील खारिज की
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने मलयालम समाचार चैनल मीडिया वन (MediaOne) पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा हाल ही में लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया।मुख्य न्यायाधीश एस. मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी. चाली की खंडपीठ ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा मीडिया वन को दिए गए प्रसारण लाइसेंस को नवीनीकृत करने से इनकार करने वाले आदेश को बरकरार रखा है।केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (KUWJ) ने...
पंजीकरण की आवश्यकता न होने पर, बिक्री विलेख का पंजीकरण उस समय से संचालित होगा, जब से यह संचालित होना शुरू हो जाएगा, न कि पंजीकरण के समय सेः राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 23, 47 और 74 पर भरोसा करते हुए दोहराया कि पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होने पर, बिक्री विलेख का पंजीकरण उस समय से संचालित होगा, जब से यह संचालित होना शुरू हो जाएगा, न कि पंजीकरण के समय से।दरअसल, याचिकाकर्ता ने रिटेल आउटलेट डीलरशिप और झालावाड़ में पेट्रोल पंप के आवंटन के लिए प्रतिवादी-आईओसीएल द्वारा आयोजित चयन के लिए आवेदन किया था। आवेदन पत्र को जमा करने की अंतिम तिथि 12/01/2019 थी। उन्हें 19/03/2019 को कार्यालय उप-पंजीयक, खोड़ा से एक...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मराठी फिल्म में निर्देशक महेश मांजरेकर और निर्माताओं के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को फिल्म के ट्रेलर में बच्चों के आपत्तिजनक चित्रण के संबंध में POCSO अधिनिमय के तहत दर्ज की गई एफआईआर में निर्देशक महेश मांजरेकर और मराठी फिल्म 'नय वारन भट लोंचा कोन ने कोंचा' के निर्माताओं के खिलाफ तीन सप्ताह तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।जस्टिस पीबी वराले की अगुवाई वाली खंडपीठ ने मांजरेकर, नरेंद्र हीरावत और श्रेयांस हीरावत की याचिका पर सुनवाई की। इसमें एक एनजीओ की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने वाले पोक्सो कोर्ट के आदेश को रद्द...
पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर कथित तौर पर सुअर के चेहरे के साथ साझा की गई; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन को राहत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में मोहम्मद इमरान मलिक, जो एक व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन हैं, के खिलाफ एक आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया।उस व्हाट्सएप ग्रुप में कथित तौर पर एक सुअर के चेहरे के साथ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की तस्वीर साझा की गई थी।न्यायमूर्ति मो. असलम ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत आवेदन को खारिज कर दिया और यह नोट किया गया कि वह एक 'ग्रुप एडमिन' था और व्हाट्सएप ग्रुप का सह-विस्तृत सदस्य भी था।अनिवार्य रूप से, न्यायालय सूचना प्रौद्योगिकी...
धारा 203 सीआरपीसी के तहत प्रक्रिया का विधिवत पालन किया गया, गुजरात हाईकोर्ट ने निजी शिकायत को खारिज करने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने से इनकार किया
गुजरात हाईकोर्ट ने एक निजी शिकायत को इस आधार पर खारिज करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले की पुष्टि करते हुए कि विवाद दीवानी प्रकृति का था, पाया है कि ट्रायल कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 203 के तहत प्रक्रिया का विधिवत पालन किया था।जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ धारा 227 के तहत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता के पुनरीक्षण आवेदन को खारिज करने के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें धारा 203 सीआरपीसी के तहत उसकी निजी...














![[17-करोड़ की धोखाधड़ी का मामला] निजी लाभ के लिए जनता के धन के दुरुपयोग ने देश को बुरी तरह प्रभावित किया: इलाहाबाद हाईकोर्ट [17-करोड़ की धोखाधड़ी का मामला] निजी लाभ के लिए जनता के धन के दुरुपयोग ने देश को बुरी तरह प्रभावित किया: इलाहाबाद हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2021/10/21/500x300_402691-allahabadhc.jpg)




