मुख्य सुर्खियां
केवल धारा 33(5), पोक्सो एक्ट के कारण अभियुक्त को जिरह के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी द्वारा जिरह के लिए एक बाल गवाह को बुलाने से केवल यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 33(5) के कारण इनकार नहीं किया जा सकता है। विशेष रूप से, प्रावधान के तहत विशेष न्यायालय के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बच्चे (अभियोजन पक्ष) को अदालत में गवाही देने के लिए बार-बार ना बुलाया जाए।कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा और जस्टिस आरसी खुल्बे ने कहा,"... विद्वान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश / एफटीएससी की ओर से बाल गवाह को फिर से बुलाने के आवेदन...
गुजरात हाईकोर्ट ने अंतरजातीय जोड़े को सुरक्षा दी; कानून हाथ में लेने के खिलाफ परिवार वालों और खाप पंचायतों को सावधान किया
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अंतरजातीय जोड़े को पुलिस सुरक्षा प्रदान करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के कानून अपने हाथ में लेने के किसी भी प्रयास से पुलिस सख्ती से निपटेगी।जस्टिस मौना भट्ट की खंडपीठ ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि अपने परिवार द्वारा कस्टडी में रखी गई महिला अपने परिवार की कड़ी प्रतिक्रियाओं से डर गई है। इसके परिणामस्वरूप एक हलफनामा दायर किया। इसमें दावा किया गया कि उसका आवेदक-पति ने धोखे से अपहरण कर लिया है और वह अपनी गरिमा और सम्मान को बनाए रखने के लिए अपने परिवार के साथ रहना...
मद्रास हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को धारा 73 सीआरपीसी के तहत फरार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया
तिरुमंगलम आन्ट्रप्रनर (उद्यमी) एक्सटॉर्शन केस में मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों सहित फरार आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आरोपी गिरफ्तारी से बच रहे हैं और जांच अधिकारी के पास एकमात्र उपाय सीआरपीसी की धारा 73 के तहत मजिस्ट्रेट से गैर-जमानती वारंट प्राप्त करना है।जस्टिस एडी जगदीश चंडीरा पुलिस उपाधीक्षक, सीबीसीआईडी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें गैर-जमानती वारंट जारी करने की याचिका को खारिज करने के मजिस्ट्रेट के आदेश को...
अगर एक समान परिस्थिति वाले वयस्क अपराधी को जमानत दी गई है तो एक किशोर को जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने दोहराया कि एक किशोर को जमानत पर रिहा होने का अधिकार है, जहां एक समान परिस्थिति वाले वयस्क अपराधी को पहले ही वह स्वतंत्रता दी जा चुकी है।न्यायमूर्ति शमीम अहमद (Justice Shamim Ahmed) की खंडपीठ ने आगे कहा कि एक बार वयस्क सह-आरोपी को जमानत दी गई है, तो किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12 की उप-धारा 1 के तहत प्रावधान की आवश्यकताओं के संदर्भ में किशोर के मामले का अतिरिक्त परीक्षण करने का कोई औचित्य नहीं होगा।यह ध्यान दिया जा सकता है कि उक्त प्रावधान में यह...
एनआई एक्ट-नोटिस और भुगतान का अवसर मिलने के बावजूद चेक राशि का भुगतान न करने वाला व्यक्ति आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्यः दिल्ली हाईकोर्ट
इस बात पर जोर देते हुए कि जब एक बार कोई व्यक्ति चेक जारी करता है तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि नोटिस जारी करने और चेक की राशि का भुगतान करने का अवसर दिए जाने के बावजूद भी चेक की राशि का भुगतान नहीं करने वाला व्यक्ति आपराधिक मुकदमे का सामना करने और उसके परिणाम भुगतने के लिए बाध्य है। यह देखते हुए कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट चेक जारी करने वाले व्यक्ति को पर्याप्त अवसर प्रदान करता है, जस्टिस रजनीश भटनागर ने कहा कि, ''एक बार जब कोई व्यक्ति चेक जारी कर देता...
सीआरपीसी धारा 498ए के तहत दर्ज आपराधिक शिकायत के बारे में भली नीयत में पति के सीनियर को लिखा गया पत्र आपराधिक मानहानि का गठन नहीं करता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि पति के सीनियर को भली नीयत से पत्र लिखकर पति के खिलाफ प्रताड़ना के आरोप में दर्ज अपराधिक मामले में बारे में जानकारी देना आईपीसी की धारा 499 के तहत आपराधिक मानहानि नहीं होगी।मौजूदा मामले में पत्नी (याचिकाकर्ता) ने 24 मई 1997 को इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंधक को पत्र लिखकर बताया था कि उसके पति, जो ओवरसीज बैंक के सहायक प्रबंधक थे, उसने उसे प्रताड़ित किया और उसे वैवाहिक घर से बाहर निकाल दिया। पति के खिलाफ धारा 498ए सीआरपीसी (क्रूरता) के तहत एक आपराधिक मामला शुरू किया गया...
जिला जज के रूप में नियुक्ति के लिए अधिवक्ता को आवेदन की तिथि पर सात साल तक 'लगातार प्रैक्टिस' जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 233 (2) के अनुसार न्यायिक अधिकारी/जिला जज के रूप में नियुक्ति पाने के लिए एक अधिवक्ता को (बिना किसी रुकावट के) कम से कम 7 वर्षों तक निरंतर अभ्यास में रहना होगा...।उल्लेखनीय है कि संविधान का अनुच्छेद 233 जिला जजों की नियुक्ति से संबंधित है और इसके उपखंड (2) में कहा गया है कि एक व्यक्ति, जो पहले से संघ या राज्य की सेवा में नहीं है, और यदि वह कम से कम सात साल से एक एडवोकेट या प्लीडर के रूप में अभ्यासरत है और नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट ने...
'यौन पीड़िता के सबूतों को वैसे संदेह के साथ परीक्षण की जरूरत नहीं, जैसे कि किसी सह-अपराधी के सबूतों के: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह मानते हुए कि यौन पीड़िता का एक ही सबूत दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त है, कहा कि पीड़िता के सबूतों को वैसे ही संदेह के साथ परीक्षण करने की जरूरत नहीं है, जैसे कि किसी सह-अपराधी के। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस केसांग डोमा भूटिया की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न फैसलों में कहा है कि गंभीर अपवादों को छोड़कर, यौन पीड़िता का सबूत सजा के लिए पर्याप्त है।कोर्ट ने कहा, "एक लड़की, जो यौन उत्पीड़न की शिकार है, अपराध की सहभागी नहीं है, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति की वासना की...
आरोपी की पत्नी को प्रतिबंधित सामग्री के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, उसके पास से कुछ बरामद भी नहीं हुआ : गुजरात हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में दोषमुक्ति बरकरार रखी
गुजरात हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (एनडीपीएस) एक्ट, 1985 के तहत एक आरोपी को बरी करने की पुष्टि की। कोर्ट ने यह पुष्टि इस आधार पर कि वह केवल अपने पति के साथ थी और उसे बैग में प्रतिबंधित पदार्थ ले जाने की कोई जानकारी नहीं थी।जस्टिस एसएच वोरा की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि कानून के तहत समझी गई समझ के अनुसार उनके पास एक उचित संदेह भी नहीं है।एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8 (सी), 20 (बी) और 29 के तहत अपराधों के लिए आरोपी नंबर दो (आरोपी नंबर एक की पत्नी) को बरी करने वाले विशेष...
बुलंदशहर हिरासत में मौत : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच रिपोर्ट पर यूपी सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव को अपना व्यक्तिगत हलफनामा दायर करने के लिए कहा है, जिसमें मुख्य सचिव को यह बताने के लिए कहा गया है कि बुलंदशहर हिरासत में मौत मामले में न्यायिक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए राज्य ने क्या कदम उठाए। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रजनीश कुमार की खंडपीठ ने उक्त आदेश यह नोट करते हुए दिया कि न्यायिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि पीड़ित की पुलिस हिरासत में मृत्यु हुई और इसके लिए पुलिस कर्मी जिम्मेदार हैं।हिरासत...
मेघालय हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले को खारिज करते हुए कहा, नाबालिग 'पीड़ित' ने पत्नी के रूप में आरोपी के साथ रहते हुए बच्चे को जन्म दिया
मेघालय हाईकोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012 (पॉक्सो) मामले में एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने नोट किया कि आरोपी व्यक्ति और पीड़िता-पत्नी एक-दूसरे के साथ पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं और उक्त जोड़े से एक बच्चे का जन्म हुआ।जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह की खंडपीठ ने जोर देकर कहा कि एक वयस्क पुरुष द्वारा एक कम उम्र की लड़की के साथ सहमति या स्वैच्छिक संभोग का ऐसा मामला बहुत जटिल है, क्योंकि वे पति-पत्नि के रूप में रह रहे...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (18 मार्च, 2022 से 25 मार्च, 2022) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट| नोटिस और भुगतान के अवसर के बावजूद चेक की राशि का भुगतान नहीं करने पर जारीकर्ता आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्य: दिल्ली हाईकोर्टदिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि एक बार जब कोई व्यक्ति चेक जारी करता है तो उसका भुगतान जरूर किया जाना चाहिए, कहा कि ऐसा...
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट| नोटिस और भुगतान के अवसर के बावजूद चेक की राशि का भुगतान नहीं करने पर जारीकर्ता आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए बाध्य: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर देते हुए कि एक बार जब कोई व्यक्ति चेक जारी करता है तो उसका भुगतान जरूर किया जाना चाहिए, कहा कि ऐसा व्यक्ति आपराधिक मुकदमे का सामना करने और परिणाम भुगतने के लिए बाध्य है, यदि नोटिस जारी करने और उक्त राशि का भुगतान करने का अवसर देने के बावजूद भुगतान नहीं किया जाता है। यह देखते हुए कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट चेक जारीकर्ता को पर्याप्त अवसर प्रदान करता है, जस्टिस रजनीश भटनागर ने कहा,"एक बार जब कोई व्यक्ति चेक जारी कर देता है, तो उसका भुगतान किया जाना चाहिए और...
अगर नियोक्ता की संपत्ति को हानि होती है तो कर्मचारी की ग्रेच्युटी जब्त हो सकती है, ज़ब्ती केवल क्षति या हानि की सीमा तक हो सकती है : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी कार्य या चूक या लापरवाही के लिए, जिससे नियोक्ता की संपत्ति को कोई क्षति या हानि होती है, किसी कर्मचारी को बर्खास्त किया जाता है तो नियोक्ता किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी को जब्त कर सकता है।जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने हालांकि कहा कि इस तरह की ज़ब्ती केवल क्षति या हानि की सीमा तक हो सकती है, और इससे आगे नहीं।कोर्ट कर्मचारी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बीच विवादों से संबंधित दो याचिकाओं पर विचार कर रहा था। एक याचिका में, कर्मचारी के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया था...
"प्रथम दृष्टया आर्म्स एक्ट के तहत अपराध": दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्लाइट बैगेज में 50 जिंदा कारतूस के साथ कनाडा के नागरिक के खिलाफ एफआईआर रद्द करने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कनाडाई नागरिक के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया। उसका फ्लाइट चेक-इन बैगेज 50 जिंदा कारतूस के साथ मिला था। न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया, शस्त्र अधिनियम, 1959 के तहत अपराध किया गया।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने आर्म्स एक्ट की धारा 25 धारा के तहत दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। याचिकाकर्ता के पास कनाडा का नागरिक होने के कारण ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड है।मामले के तथ्यों के अनुसार, याचिकाकर्ता पिछले साल फरवरी में कनाडा से दिल्ली आया था और...
मद्रास हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी सोमवार को दो नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाएंगे
मद्रास हाईकोर्ट चीफ जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी दो नए न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाएंगे। इन न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी की की गई। एडवोकेट निदुमोलु माला और एडवोकेट एस. सौंथर सोमवार (28.03.2022) को मद्रास हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।चीफ जस्टिस दो नवनियुक्त न्यायाधीशों को हाईकोर्ट के अतिरिक्त पुस्तकालय भवन के बैठक हॉल में आयोजित एक समारोह में पद की शपथ दिलाएंगे।केंद्र ने एडवोकेट निदुमोलु माला और एडवोकेट एस सौंथर को मद्रास...
COVID-19 मौतें | उड़ीसा हाईकोर्ट ने मेडिकल लापरवाही के लिए राज्य को मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया
उड़ीसा हाईकोर्ट ने चिकित्सा लापरवाही के लिए एक राज्य द्वारा संचालित चिकित्सा सुविधा यानी वीर सुरेंद्र साईं इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (VIMSAR) को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले में दो COVID-19 रोगियों की मौत हो गई थी।चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर और जस्टिस आर.के. पटनायक ने कहा,"वर्तमान मामले में न्यायालय भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत और संरक्षित पीड़ितों के स्वास्थ्य के अधिकार के उल्लंघन से निपट रहा है। पं. परमानंद कटारा बनाम भारत संघ और अन्य, 1989 एआईआर 2039 और...
सार्वजनिक स्थान पर अगर 'भगवान' के नाम पर अतिक्रमण किया गया तो उसे भी हटाने का आदेश देंगे: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि "भले ही भगवान के नाम पर सरकारी स्थान पर अतिक्रमण हुआ हो तो अदालतें ऐसे अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश देंगी, क्योंकि सरकारी हित और कानून के शासन को सुरक्षित बनाए रखा जाना चाहिए।हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़क पर अरुलमिघू पालपट्टराई मरिअम्मन तिरुकोइल द्वारा किए गए अतिक्रमण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अतिक्रमण अब 'किससे या किस नाम से' होता है, इससे अदालतों को कोई सरोकार नहीं है।जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश निचली अपीलीय अदालत के फैसले के खिलाफ मंदिर द्वारा दायर दूसरी अपील पर...
कारण बताओ नोटिस और जवाब का अवसर ना देने की स्थिति में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बावजूद कर्मचारी की सेवा समाप्त नहीं की जा सकती: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में भ्रष्टाचार के लिए दोषी ठहराए गए एक कर्मचारी की बर्खास्तगी के आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि उसे इस तरह टर्मिनेट करने से पहले न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया था और न ही अपने पक्ष को रखने का अवसर दिया गया था।जस्टिस बीरेन वैष्णव की खंडपीठ ने नियोक्ता को परिणामी लाभ और बैकवेज के साथ कर्मचारी को उसके मूल पद पर बहाल करने का निर्देश दिया। फिर भी याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देने और दायर किए जा सकने वाले उत्तर पर विचार करने के बाद कानून के अनुसार नए सिरे से उचित आदेश...
दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित पिता के नाबालिग बच्चे से मिलने के अधिकार को बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि एक कथित पिता मुलाकात के अधिकारों का हकदार है और एक नाबालिग बच्चे को उसके व्यक्तिगत विकास और उत्थान के लिए माता-पिता के स्पर्श और प्रभाव से अछूता नहीं रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि,''इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं हो सकता है कि प्रतिवादी,एक कथित पिता होने के नाते मुलाक़ात के अधिकारों का हकदार होगा। ऐसे अधिकारों का निर्धारण और राहत प्रदान करते समय, विशेष रूप से जब बच्चा तीन साल से कम उम्र का होता है, तो निश्चित रूप से उसका कल्याण सबसे महत्वपूर्ण होता है। साथ ही,...



















