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तलाकशुदा मुस्लिम महिला जब तक पुनर्विवाह नहीं करती, तब तक वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पति से गुजारे भत्ते का दावा कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तलाकशुदा मुस्लिम महिला जब तक पुनर्विवाह नहीं करती, तब तक वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पति से गुजारे भत्ते का दावा कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शबाना बानो बनाम इमरान खान के मामले में निर्धारित कानून को दोहराते हुए कहा कि एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला इद्दत की अवधि समाप्त होने के बाद भी जब तक वह पुनर्विवाह नहीं करती, सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अपने पति से भरण-पोषण का दावा करने की हकदार होगी।जस्टिस करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने मई 2008 में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, प्रतापगढ़ द्वारा पारित निर्णय और आदेश के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका को अनुमति देते हुए जनवरी, 2007 में पारित ट्रायल कोर्ट के आदेश को संशोधित करते हुए उक्त...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में स्कूल में मृत मिली नाबालिग लड़की के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के एक बोर्डिंग स्कूल में एक नाबालिग लड़की की मौत के मामले में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी। बेंच ने उत्तर प्रदेश राज्य और हरियाणा राज्य को चार सप्ताह के भीतर सीबीआई को जांच के संबंध में कागजात/ दस्तावेज सौंपने का निर्देश दिया।जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की खंडपीठ ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर एक विशेष अनुमति याचिका में निर्देश जारी किया, जिसमें यूपी और हरियाणा में स्थानीय पुलिस से सीबीआई को जांच...

जीवन को खतरे के आरोप सही हुए तो उन्हें अपरिवर्तनीय नुकसान होगा: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल को सुरक्षा प्रदान की
जीवन को खतरे के आरोप सही हुए तो उन्हें अपरिवर्तनीय नुकसान होगा: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन कपल को सुरक्षा प्रदान की

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने परिजनों से अपनी जान के लिए खतरा महसूस कर रहे एक लिव-इन कपल की सुरक्षा के लिए कदम उठाया है। जस्टिस अनूप चितकारा की पीठ ने यह कहते हुए उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया कि यदि आशंका के आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे "अपरिवर्तनीय नुकसान" हो सकता है।कोर्ट ने आदेश दिया,"यह उचित होगा कि संबंधित पुलिस अधीक्षक, एसएचओ या कोई भी अधिकारी, जिसे ऐसी शक्तियां प्रत्यायोजित की गई हैं या इस संबंध में अधिकृत किया गया है, आज से एक सप्ताह के लिए याचिकाकर्ताओं को उचित सुरक्षा प्रदान...

युगल ने दो विवाह समारोह आयोजित किए, सप्तपदी के जर‌िए बाद में विवाह किया: गुजरात हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को तिथि में परिवर्तन के लिए आवेदन पर विचार करने का आदेश दिया
युगल ने दो विवाह समारोह आयोजित किए, सप्तपदी के जर‌िए बाद में विवाह किया: गुजरात हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को तिथि में परिवर्तन के लिए आवेदन पर विचार करने का आदेश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने एक र‌िट याचिका को अनुमति दी है, जिसमें विवाह पंजीयक को एक नया विवाह प्रमाण पत्र जारी करने के लिए याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर विचार करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।विवाह प्रमाणपत्र पर उस तारीख के बजाय, जिसमें जोड़े ने एक छोटी सी सभा की मौजूदगी में एक दूसरे को वरमाला पहनाई थी, उस तारीख का उल्‍लेख किया गया है, जिसमें 'सप्तपदी' के साथ धूमधाम से शादी की गई थी।COVID-19 की महामारी और सार्वजनिक स्तर पर भीड़ जुटाए जाने पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण, रिट आवेदकों ने...

गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच के बिना सेवा समाप्त करने का आदेश निरस्त किया, कर्मचारी को बहाल करने का निर्देश दिया

गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी बिना किसी जांच के सेवा समाप्ति (termination) का आदेश रद्द कर दिया।कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को बहाल किया जाए, लेकिन उसे नो वर्क, नो पे के सिद्धांत पर विचार करते हुए वेतन देने से इनकार कर दिया। उक्त फैसला गुजरात राज्य बनाम चेतन जयंतीलाल राजगोर में इसी तरह के तथ्यों में एक डिवीजन बेंच द्वारा लागू किया गया है।जस्टिस बीरेन वैष्णव की पीठ प्रतिवादी प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश को...

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोषी की आकस्मिक पैरोल पर निर्णय लेने में देरी पर जिला कलेक्टर, जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने दोषी की आकस्मिक पैरोल पर निर्णय लेने में देरी पर जिला कलेक्टर, जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में बीकानेर में जेल अधीक्षक और जिला कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक दोषी की आपातकालीन पैरोल अर्जी पर निर्णय लेने में एक महीने की देरी पर स्पष्टीकरण मांगा। उक्त कैदी की मां का निधन हो गया था।जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस रामेश्वर व्यास की पीठ ने कहा कि अदालत ने समय-समय पर जेल के साथ-साथ पैरोल अधिकारियों को आकस्मिक पैरोल आवेदनों पर निर्णय लेते समय सतर्क रहने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि प्रस्तुति के सात दिनों के भीतर आदेश पारित किए जाएं।इसके अलावा,...

कोविशील्ड टीकाकरण के बाद 19 साल की लड़की की मौत : केरल हाईकोर्ट ने माता-पिता की याचिका पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
कोविशील्ड टीकाकरण के बाद 19 साल की लड़की की मौत : केरल हाईकोर्ट ने माता-पिता की याचिका पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब

एक 19 वर्षीय छात्रा के माता-पिता ने न्याय की मांग करते हुए केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की मौत कोविशील्ड वैक्सीन के डोज़ लेने के कारण हुई है। उन्होंने अपनी इकलौती बेटी की मौत के लिए मुआवजे के रूप में एक करोड़ रुपये की मांग की।जस्टिस एन नागरेश ने याचिका पर केंद्र सरकार से राय मांगी है।याचिकाकर्ताओं की बेटी एक स्नातकोत्तर छात्रा थी। उसको 28 जुलाई, 2021 को कोविशील्ड वैक्सीन लगाई गई थी। चूंकि अगले ही दिन वह अस्वस्थ महसूस करने लगी, इसलिए पांच अगस्त को उसे...

अतिरिक्त भुगतान के लिए नोटिस जारी करने में विफलता ठेकेदार को बाद में मध्यस्थता में दावा करने से नहीं रोकती: दिल्ली हाईकोर्ट
अतिरिक्त भुगतान के लिए नोटिस जारी करने में विफलता ठेकेदार को बाद में मध्यस्थता में दावा करने से नहीं रोकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध के तहत नोटिस जारी करने में ठेकेदार की विफलता उसे मध्यस्थ न्यायाधिकरण के समक्ष अतिरिक्त भुगतान का दावा करने के अधिकार से वंचित नहीं करती है।जस्टिस बाखरू की एकल पीठ ने यह भी कहा कि अनुबंध में इस तरह की शर्त अनिवार्य प्रावधान नहीं है बल्कि प्रकृति में केवल निर्देशिका है। साथ ही अन्य खंडों और समकालीन अभिलेखों के संदर्भ में जांच की जानी चाहिए।न्यायालय ने आगे कहा कि अधिनियम की धारा 34(2-ए) के तहत प्रदान की गई पेटेंट अवैधता का आधार तब उपलब्ध नहीं होगा, जब प्रतिवादी भारत...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश भूमि रिकॉर्ड नियमावली को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की, 10 हजार रूपये का जुर्माना लगाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'उत्तर प्रदेश भूमि रिकॉर्ड नियमावली' को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज की, 10 हजार रूपये का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में दायर एक रिट याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में उत्तर प्रदेश भूमि रिकॉर्ड मैनुअल को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 और राजस्व संहिता नियम, 2016 के अल्ट्रा-वायरल के रूप में घोषित करने की मांग की गई थी।जस्टसि प्रिंकर दिवाकर और जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता (शैलेश कुमार मिश्रा) पर याचिका के सुनवाई योग्य न होने के कारण 10,000/- रुपये का जुर्माना भी लगाया।गौरतलब है कि यू.पी. भूमि अभिलेख नियमावली भूमि अभिलेखों की...

जस्टिस कुरियन जोसेफ यमन में मौत की सजा पाने वाली भारतीय महिला की रिहाई के लिए मध्यस्थता करेंगे
जस्टिस कुरियन जोसेफ यमन में मौत की सजा पाने वाली भारतीय महिला की रिहाई के लिए मध्यस्थता करेंगे

एक यमनी नागरिक की हत्या के मामले में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय महिला निमिषा प्रिया के मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ ने उसकी रिहाई के लिए मध्यस्थता के प्रयास का नेतृत्व करने पर सहमति व्यक्त की है।यमनी कानून के अनुसार, हत्या के मामले में दोषी को रिहा किया जा सकता है यदि पीड़ित के परिवार के सदस्य अपराध को क्षमा कर दें।जस्टिस कुरियन जोसेफ ने लाइव लॉ से बात करते हुए कहा कि उनसे माफी पर सहमत होने और बातचीत का नेतृत्व करने के लिए...

जस्टिस एन वी रमना
"आपको जल्द ही एक अच्छी खबर मिलेगी": वेतन आयोग के मुद्दों पर न्यायिक अधिकारियों को सीजेआई रमना

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमाना ने शुक्रवार को कहा कि न्यायिक अधिकारियों को जल्द ही वेतन आयोग संबंधित मुद्दों पर एक "अच्छी खबर" मिलेगी। सीजेआई हैदराबाद में तेलंगाना राज्य न्यायिक अधिकारी सम्मेलन 2022 के उद्घाटन समारोह में तेलंगाना राज्य न्यायिक अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के महत्व पर जोर देते हुए, सीजेआई ने कहा कि वित्तीय कल्याण एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है और उन्होंने वेतन आयोग से संबंधित मुद्दों को उठाया है।सीजेआई ने कहा, "केवल जब आप वित्तीय...

बार काउंसिल ऑफ इंडिया
बीसीआई इस प्रस्ताव की जांच कर रहा है कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अनिवार्य रूप से 5 नए एनरॉर्ल्ड अधिवक्ताओं को अपने चैम्बर्स में शामिल करना चा‌हिए

बार में शामिल होने वाले पेशेवरों की गुणवत्ता में सुधार के लिए कानूनी पेशे में शामिल होने के वर्तमान तंत्र पर फिर से विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की सिफारिश पर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ("बीसीआई") ने एक हलफनामा प्रस्तुत किया है, जिसमें उन परिवर्तनों को दर्शाया गया है, जिन्हें वह लागू करना चाहता है।उल्लेखनीय है कि 15.03.2022 को जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता, बार परीक्षा की कमियां; चैम्बर्स में प्लेसमेंट पाने के लिए जूनियर्स के लिए एक सिस्टम विकसित करने के...

दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर अपने वाहनों पर फर्ज़ी जज स्टिकर चिपकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई
दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर अपने वाहनों पर फर्ज़ी 'जज' स्टिकर चिपकाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई

दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर उन व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी या विभागीय जांच की मांग की गई है जो अपने वाहनों पर 'जज' शब्द के प्रिंटआउट का फर्ज़ी तरीके से उपयोग कर रहे हैं।अधिवक्ता संसेर पाल सिंह द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया कि इस तरह के प्रिंटआउट और धोखाधड़ी से प्राप्त स्टिकर का उपयोग सुरक्षा के लिए खतरा है, क्योंकि ऐसे वाहनों को सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा तलाशी के लिए नहीं रोका जाता।याचिका में दिल्ली जिला अदालतों के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई,...

सीपीसी की धारा 100 का क्षेत्राधिकार इतना सीमित है कि तथ्य की गलत या घोर अक्षम्य खोज में भी हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
सीपीसी की धारा 100 का क्षेत्राधिकार इतना सीमित है कि तथ्य की गलत या घोर अक्षम्य खोज में भी हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट को हाल ही में निचली अदालत के एक आदेश को दी चुनौती पर सुनवाई करते हुए उसे सबूतों की फिर से सराहना करने के लिए कहना पड़ा।एकल न्यायाधीश मंगेश एस. पाटिल ने कहा कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 100 के तहत अधिकार क्षेत्र इतना सीमित है कि तथ्य की गलत या घोर अक्षम्य खोज में भी हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।उक्त मामला तब सामने आया जब एकनाथ जेनु पवार ने 30.06.1956 को एक लक्ष्मीबाई द्वारा निष्पादित वसीयत के आधार पर मुकदमे की संपत्तियों के कब्जे में एकमात्र मालिक होने की निचली अदालत...

God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
मृतक शिकायतकर्ता के कानूनी उत्तराधिकारी बार काउंसिल के समक्ष अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकते हैं: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने कहा है कि आपराधिक कार्यवाही में, मूल शिकायतकर्ता के कानूनी उत्तराधिकारी मूल शिकायतकर्ता की मृत्यु पर आरोपी के खिलाफ कार्यवाही जारी रखने के लिए आवेदन कर सकते हैं।अदालत ने बार काउंसिल ऑफ तमिलनाडु एंड पुडुचेरी की अनुशासन समिति द्वारा पारित उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कानूनी उत्तराधिकारी मूल शिकायतकर्ता के जूते में कदम नहीं रख सकते हैं और अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं कर सकते हैं।न्यायमूर्ति पीएन प्रकाश और न्यायमूर्ति एए...

दिल्ली हाईकोर्ट
सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत पत्नी के भरण-पोषण पाने का अधिकार तभी समाप्त हो सकता है जब व्यभिचार कृत्य को बार-बार किया जाए : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया है कि केवल निरंतर और बार-बार व्यभिचार (या व्यभिचार में सहवास) करने पर ही दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 (4) के तहत प्रावधान की कठोरता लागू होगी। सीआरपीसी की धारा 125(4) में कहा गया है कि कोई भी पत्नी अपने पति से भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी यदि वह व्यभिचार में रह रही है, या बिना किसी पर्याप्त कारण के अपने पति के साथ रहने से इनकार करती है, या यदि वे आपसी सहमति से अलग रह रहे हैं। जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने यह भी कहा कि भरण-पोषण पर बना कानून एक कल्याणकारी कानून है जो...

जब मामला सभी कानूनी मानकों पर सत्यापित हो चुका हो तो विवाह की छोटी अवधि पति या पत्नी द्वारा किए जाने वाले अंगदान को अस्वीकार करने का आधार नहीं : पंजाब एंड  हरियाणा हाईकोर्ट
जब मामला सभी कानूनी मानकों पर सत्यापित हो चुका हो तो विवाह की छोटी अवधि पति या पत्नी द्वारा किए जाने वाले अंगदान को अस्वीकार करने का आधार नहीं : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि विवाह की अवधि पति या पत्नी में से किसी एक द्वारा अन्य पति या पत्नी के पक्ष में गुर्दा दान करने की इच्छा को नामंजूर करने का आधार नहीं है, खासकर जब मामले को सभी कानूनी मानकों पर सत्यापित किया गया हो। कोर्ट ने परमादेश की प्रकृति में एक उपयुक्त रिट जारी करने की मांग करते हुए दायर एक रिट याचिका पर विचार करते हुए यह अवलोकन किया है, जिसमें प्रतिवादी को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि याचिकाकर्ता-पत्नी से बिना किसी और देरी के अंग प्राप्त करके याचिकाकर्ता के...

बॉम्बे हाईकोर्ट, मुंबई
4 साल की समाप्ति के बाद केवल पीसीआईटी ही पुनर्मूल्यांकन नोटिस को मंजूरी दे सकते हैं, न कि एसीआईटी: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के जस्टिस एन.आर. बोरकर और जस्टिस के.आर. श्रीराम ने कहा कि प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से चार साल की समाप्ति के बाद केवल प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त (पीसीआईटी) पुनर्मूल्यांकन नोटिस को मंजूरी दे सकते हैं, न कि अतिरिक्त आयकर आयुक्त (एसीआईटी)।याचिकाकर्ता/निर्धारिती ने निर्धारण वर्ष 2015-2016 के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148 के तहत जारी पुनर्मूल्यांकन नोटिस को इस आधार पर चुनौती दी है कि आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 148 के...