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बाल श्रम: राजस्थान हाईकोर्ट ने बचाव और पुनर्वास सिस्टम को संस्थागत बनाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया
बाल श्रम: राजस्थान हाईकोर्ट ने बचाव और पुनर्वास सिस्टम को संस्थागत बनाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में सभी बाल श्रमिकों के लिए 'बचाव और पुनर्वास सिस्टम' को संस्थागत बनाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र के श्रम विभाग को नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस अनूप कुमार ढांड की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता एडवोकेट गोपाल सिंह बरेथ द्वारा दायर आवेदन को स्वीकार कर लिया।खंडपीठ ने आदेश दिया,"व्यक्तिगत रूप से उपस्थित याचिकाकर्ता ने याचिका में संशोधन करने के लिए अनुमति की प्रार्थना की ताकि केंद्र सरकार के संबंधित विभाग को प्रतिवादी के रूप में पेश...

दिल्ली हाईकोर्ट
धारा 125 सीआरपीसी | भरण-पोषण का उद्देश्य पुरुष को पत्नी और बच्चों के संबंध में नैतिक दायित्व को पूरा करने के लिए मजबूर करना है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 का प्रावधान, जिसके तहत भरण-पोषण का प्रावधान किया गया है, उसका उद्देश्य सामाजिक उद्देश्य को पूरा करना है। किसी व्यक्ति को उस नैतिक दायित्व को पूरा करने के लिए मजबूर करना है, जो पत्नी और बच्चों के संबंध में समाज के प्रति देय है।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव एक पति द्वारा फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें सीआरपीसी की धारा 125(3) के तहत प्रतिवादी पत्नी द्वारा दायर एक आवेदन को आंशिक रूप से अनुमति दी गई...

दिल्ली हाईकोर्ट
दशकों तक तदर्थ आधार पर कार्यरत कर्मचारी स्थायी या सेवा के नियमितीकरण का हकदार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने दोहराया है कि एक कर्मचारी स्थायी या सेवा के नियमितीकरण की मांग करने का हकदार नहीं होगा, भले ही उसने दशकों तक तदर्थ (Ad Hoc)आधार पर काम किया हो।जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस अमित महाजन ने कहा, "यह भी तय कानून है कि भले ही कोई योजना कुछ दशकों से चल रही हो या संबंधित कर्मचारी दशकों से तदर्थ आधार पर काम करता रहा हो, यह कर्मचारी को स्थायी या नियमित करने का अधिकार नहीं देगा।"न्यायालय दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 25 मई, 2011 को जारी एक विज्ञापन से संबंधित याचिका पर विचार कर रहा था जिसमें...

कलकत्ता हाईकोर्ट
किसी भी तरह की वसूली कार्यवाही शुरू करने से पहले वैधानिक अपील दायर करने का अधिकार अनिवार्य है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस मोहम्मद निजामुद्दीन की पीठ ने माना कि किसी भी तरह की वसूली कार्यवाही शुरू करने से पहले वैधानिक अपील दायर करने का अधिकार अनिवार्य है।याचिकाकर्ता/निर्धारिती ने इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर से डेबिट करके अधिनिर्णय आदेश से उत्पन्न मांग की वसूली की कार्रवाई को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को वैधानिक अपील दायर करने का कोई अवसर दिए बिना वसूली कार्यवाही शुरू करना वेस्ट बंगाल जीएसटी एक्ट, 2017 की धारा 78 का उल्लंघन है, जो किसी भी वसूली कार्यवाही शुरू करने से...

दिल्ली हाईकोर्ट
ब्रेकिंग: दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस्तरां और होटलों को फूड बिल पर सर्विस चार्ज लगाने से रोकने वाले दिशानिर्देशों पर रोक लगाई

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सीसीपीए के दिशानिर्देशों पर रोक लगा दी, जिसमें होटल और रेस्तरां को बिलों पर सर्विस चार्ज (Service Charge) लगाने से रोक दिया गया था।अनुचित व्यापार प्रथाओं की रोकथाम और ग्राहक हित की सुरक्षा के लिए सीसीपीए द्वारा स्थापित उक्त विनियमों में कहा गया था,"मेनू में उल्लिखित खाद्य पदार्थों की कुल कीमत और लागू करों के अलावा सर्विस चार्ज लगाया जा रहा है, अक्सर किसी अन्य चार्ज की आड़ में। यह उल्लेख किया जा सकता है कि रेस्तरां या होटल द्वारा पेश किए जाने वाले भोजन और पेय...

केरल हाईकोर्ट ने फर्जी मेमो बनाकर अनुकूल निर्णय सुरक्षित करने वाले वादियों पर जुर्माना लगाया
केरल हाईकोर्ट ने फर्जी मेमो बनाकर अनुकूल निर्णय सुरक्षित करने वाले वादियों पर जुर्माना लगाया

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को नोटिस की तामील पर फर्जी मेमो दिखाकर हासिल किए गए निर्णय को रद्द कर दिया और फर्जी मेमो पेश करने वाले वादियों पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया।जस्टिस ए बदरुद्दीन ने पुनर्विचार याचिका पर विचार करते हुए कहा कि यह स्थापित कानून है कि एक बार यह स्थापित हो जाने के बाद कि पक्षकार द्वारा धोखाधड़ी से आदेश प्राप्त किया गया है, विकृत है। इस तरह के आदेश को कानूनी नहीं ठहराया जा सकता।धोखाधड़ी से प्राप्त किसी निर्णय, डिक्री या आदेश को अमान्य माना जाना चाहिए, चाहे वह प्रथम दृष्टया...

दिल्ली हाईकोर्ट
भरण पोषण मामला-पक्षकार अक्सर अपनी वास्तविक आय का खुलासा नहीं करते, उनके स्टे्टस और जीवन शैली को ध्यान में रखते हुए भरण-पोषण दिया जा सकता है : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक विवादों के मामलों में,यह देखा गया है कि कथित तौर पर भरण-पोषण के दायित्व से बचने के लिए पक्षकार अक्सर अपनी वास्तविक आय का खुलासा अदालत में नहीं करते हैं। इस प्रकार, यह न्यायालय के लिए ओपन है कि वह उनके स्टे्टस और जीवन शैली के आधार पर भरण-पोषण का निर्धारण करे।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा, ''यहां तक कि अनुभव से पता चलता है कि आम तौर पर पक्षकारों द्वारा वास्तविक आय का खुलासा नहीं किया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में, पक्षकारों की स्थिति/स्टे्टस और उनकी जीवन...

God Does Not Recognize Any Community, Temple Shall Not Be A Place For Perpetuating Communal Separation Leading To Discrimination
कल्लाकुरिची छात्रा आत्महत्या मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने माता-पिता के बिना शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम की अनुमति दी

मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार को माता-पिता की उपस्थिति के बिना कल्लाकुरिची में कथित रूप से आत्महत्या करने वाली छात्रा के शव का फिर से पोस्टमॉर्टम करने की अनुमति दी।जस्टिस एन सतीश कुमार द्वारा यह आदेश राज्य के लोक अभियोजक हसन मोहम्मद जिन्ना द्वारा तत्काल उल्लेख किए जाने के बाद पारित किया गया।लोक अभियोजक ने कोर्ट को बताया कि मृतक के माता-पिता के ठिकाने का पता नहीं लगाया जा सकता और अदालत के आदेश के अनुसार, गठित डॉक्टरों की टीम पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के संचालन के लिए इंतजार कर रही...

मलिक ने सक्रिय भूमिका निभाई, दाऊद के गिरोह के साथ मिलीभगत: ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नवाब मलिक की जमानत का विरोध किया
मलिक ने सक्रिय भूमिका निभाई, दाऊद के गिरोह के साथ मिलीभगत: ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नवाब मलिक की जमानत का विरोध किया

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) की दिवंगत बहन हसीना पारकर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राकांपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) को जमानत देने का विरोध किया है।मलिक ने अप्रैल, 2022 में उनके खिलाफ चार्जशीट दायर होने के बाद जमानत के लिए विशेष पीएमएलए अदालत का दरवाजा खटखटाया।इससे पहले की महा विकास अघाड़ी सरकार में मंत्री मलिक को इस साल फरवरी में गिरफ्तार किया गया था।मलिक के खिलाफ ईडी की चार्जशीट के अनुसार, मलिक, उनके भाई असलम, हसीना पारकर और...

उड़ीसा हाईकोर्ट अपने स्थापना दिवस के अवसर पर 22 वकीलों को प्रोमिसिंग लॉयर ऑफ द ईयर अवार्ड दिए जाने की घोषणा की
उड़ीसा हाईकोर्ट अपने स्थापना दिवस के अवसर पर 22 वकीलों को "प्रोमिसिंग लॉयर ऑफ द ईयर" अवार्ड दिए जाने की घोषणा की

उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक अनूठी पहल की शुरुआत करते हुए इस वर्ष 26 जुलाई को अपने स्थापना दिवस के अवसर पर ओडिशा के विभिन्न जिलों/न्यायाधीशों के 22 वकीलों को "प्रोमिसिंग लॉयर ऑफ द ईयर" अवार्ड दिए जाने का ऐलान किया है।पिछले एक साल के दौरान पेशे में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए जूरी द्वारा निम्नलिखित वकीलों के नाम की सिफारिश की गई है। सूची में विशेष रूप से चार अलग-अलग जजशिप की चार (4) महिला एडवोकेट के नाम भी शामिल हैं।सूची में शामिल एडवोकेट के नाम इस प्रकार हैं-1. एडवोकेट सुजानकांत महाराणा (अंगुल)2....

अपीलीय अदालतें केवल असाधारण परिस्थितियों में सीआरपीसी की धारा 391 के तहत अतिरिक्त साक्ष्य की अनुमति दे सकती हैं: झारखंड हाईकोर्ट
अपीलीय अदालतें केवल "असाधारण परिस्थितियों" में सीआरपीसी की धारा 391 के तहत अतिरिक्त साक्ष्य की अनुमति दे सकती हैं: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अपीलीय न्यायालय केवल "असाधारण परिस्थितियों" में दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 ('सीआरपीसी') की धारा 391 के तहत अतिरिक्त साक्ष्य की अनुमति दे सकते हैं और इसका उपयोग केवल साक्ष्य में मौजूद कमी को भरने के लिए नहीं किया जा सकता हैजस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की एकल न्यायाधीश पीठ ने निचली अपीलीय अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा,"यह कानून का तय प्रस्ताव है कि कमियों को भरने के लिए सीआरपीसी की धारा 311 और 391 और साक्ष्य अधिनियम की धारा 165 के तहत याचिकाओं की अनुमति नहीं दी जा...

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी योजनाओं में महिलाओं के लिए प्रयुक्त शब्द बांझ, परित्यक्त, निराश्रित को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी योजनाओं में महिलाओं के लिए प्रयुक्त शब्द 'बांझ', 'परित्यक्त', 'निराश्रित' को हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को विभिन्न योजनाओं में महिलाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले 'बांझ', 'परित्यक्त', 'निराश्रित' जैसे शब्दों को बदलने के लिए निर्देश दिए जाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।वर्तमान जनहित याचिका कुणाल रावत द्वारा दायर की गई है।चीफ जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस अनूप कुमार ढांड की खंडपीठ ने कहा,"प्रतिवादियों को जारी नोटिस पर 27.07.2022 को जवाब दाखिल करना होगा इसके अलावा, 'दस्ती' सेवा की अनुमति है।"अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश होने वाले वकील को संबंधित...

लक्ष्मण रेखा पार की: मद्रास हाईकोर्ट ने जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ ट्वीट का स्वत: संज्ञान लेते हुए सवुक्कू शंकर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की
"लक्ष्मण रेखा पार की": मद्रास हाईकोर्ट ने जस्टिस जीआर स्वामीनाथन के खिलाफ ट्वीट का स्वत: संज्ञान लेते हुए सवुक्कू शंकर के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने मदुरै बेंच रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि वह उनके खिलाफ ट्वीट करने का स्वत: संज्ञान लेकर यूट्यूबर / कमेंटेटर सवुक्कू शंकर के खिलाफ आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करें। कोर्ट ने रजिस्ट्री को फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया मध्यस्थों को पक्षकार बनाने और उनके अनुपालन अधिकारियों को नोटिस भेजने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भी पक्षकार बनाया है।सवुक्कू शंकर ने अपने ट्वीट के माध्यम से आरोप...

राजस्थान हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट की बिक्री, उपयोग और खपत पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने ई-सिगरेट की बिक्री, उपयोग और खपत पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने केंद्र और राज्य सरकारों को इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट [E-Cigarettes] (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण, और विज्ञापन) अधिनियम, 2019 का उचित तरीके से क्रियान्वयन करने और ई-सिगरेट की बिक्री, उपयोग और खपत पर रोक लगाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया।यह जनहित याचिका बेनेट विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में चौथे वर्ष की कानून की छात्रा प्रियांशा गुप्ता ने दायर की थी।याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने व्यापक रिसर्च किया है और...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर मिले ढांचे की प्रकृति का पता लगाने के लिए पैनल के गठन की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) के अंदर मिले ढांचे की प्रकृति का पता लगाने के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट (वर्तमान/ सेवानिवृत्त) के जज की अध्यक्षता में समिति/पैनल के गठन की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की।जनहित याचिका में पैनल को यह पता लगाने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई थी कि क्या हिंदुओं द्वारा दावा किया गया शिव लिंग मस्जिद के अंदर पाया गया है या यह एक फव्वारा है जैसा कि कुछ मुसलमानों द्वारा दावा किया जा रहा है।याचिका को खारिज करते हुए...

[नारायण राणे निवास] बताएं कि नियमितीकरण के लिए दूसरा आवेदन कैसे सुनवाई योग्य है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी से पूछा
[नारायण राणे निवास] बताएं कि नियमितीकरण के लिए दूसरा आवेदन कैसे सुनवाई योग्य है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी से पूछा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को पूछा कि क्या केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के मुंबई स्थित आवास के कथित अनधिकृत वर्गों को नियमित करने की मांग करने वाली दूसरी याचिका पर विचार किया जा सकता है।जस्टिस आरडी धानुका की अगुवाई वाली खंडपीठ कालका रियल एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो राणे की पारिवारिक कंपनी है। कंपनी ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम की धारा 44 के तहत नियमितीकरण के लिए नए प्रस्ताव पर विचार करने के लिए बीएमसी को निर्देश देने की मांग की...

कर्मचारी की नौकरी के अंतिम चरण में रिटायरमेंट की तारीख में बदलाव नहीं किया जा सकता : तेलंगाना हाईकोर्ट
कर्मचारी की नौकरी के अंतिम चरण में रिटायरमेंट की तारीख में बदलाव नहीं किया जा सकता : तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने हाल ही में तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम के एक कर्मचारी द्वारा दायर रिट याचिका को अनुमति दी, जिसमें उसकी 'समय से पहले' सेवानिवृत्ति (Retirement) को चुनौती दी गई थी और सभी परिणामी लाभों के साथ नौकरी में बहाली की मांग की गई थी। जस्टिस पी.माधवी देवी ने कहा कि कर्मचारी के सर्विस रिकॉर्ड में नियोक्ता को जन्म तिथि में बदलाव की अनुमति नहीं है, जब वह अपनी सेवानिवृत्ति के करीब है।मामले के संक्षिप्त तथ्यवर्तमान रिट याचिका दायर करने वाले मामले का संक्षिप्त तथ्य यह था कि याचिकाकर्ता...

भरण पोषण संबंधित मामला - न्यायालयों को बच्चे/पत्नी के आवासीय प्रमाण के संबंध में आपत्ति नहीं उठानी चाहिए, विधिवत शपथ पत्र स्वीकार करना चाहिए : कर्नाटक हाईकोर्ट
भरण पोषण संबंधित मामला - न्यायालयों को बच्चे/पत्नी के आवासीय प्रमाण के संबंध में आपत्ति नहीं उठानी चाहिए, विधिवत शपथ पत्र स्वीकार करना चाहिए : कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि फैमिली कोर्ट को पीड़ित पक्षों (पत्नी और बच्चों) के उस हलफनामे को स्वीकार करना चाहिए, जिसमें वैवाहिक घर से दूर उनके निवास स्थान के बारे में बताया गया है और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत पति से भरण-पोषण की मांग करने वाले एक आवेदन पर सुनवाई करते समय अधिकार क्षेत्र का मुद्दा न उठाया जाए। जस्टिस ई.एस.इंदिरेश (sitting at Dharwad) की एकल पीठ ने संगीता और उसके नाबालिग बच्चे की तरफ से दायर एक याचिका को अनुमति देते हुए फैमिली कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया...